सावरकुंडला, ध्रांगध्रा, सुरेंद्रनगर और धोलका में जनसभाएँ संबोधित करते हुए श्री नरेन्द्र मोदी

श्री मोदी ने जनसभाएँ संबोधित करने का अंत किया उन सीटों से जहाँ 2012 के गुजरात विधानसभा चुनावों के पहले चरण के मतदान होने वाले हैं

गुजरात में प्रचार के दौरान श्री राहुल गाँधी द्वारा फैलाए गए झूठे आरोपों को मुख्यमंत्री ने किया छिन्न-भिन्न

श्री राहुल गाँधी कहते हैं कि वे  महात्मा गाँधीजी के बताए रास्ते पर चल रहे है; यदि वे सही में महात्मा गाँधीजी के बताए रास्ते पर चल रहे है तो  महात्मा गाँधी का एक सपना अधूरा नही रहेगा; जो था आज़ादी के बाद कॉंग्रेस को रद्द करने का

क्या युवाओं को रोजगार चाहिए या मोबाईल फोन? क्या महिलाएँ कीमतों में गिरावट देखना चाह्ती हैं या उन्हें मोबाईल फोन चाहिए? वैसे भी आपके शासन में देश में यदि अंधकार ही रहेगा तो हम ये मोबाईल फोन चार्ज कहाँ करेंगे? पूछ रहे हैं श्री मोदी

श्री राहुल गाँधी विधानसभा के सम्मान की बातें करते हैं लेकिन मई 2011 से मई 2012 के दौरान श्री राहुल गाँधी की लोकसभा में 85 दिनों में से 24 हाज़री थी और 2010 तथा 2011 के दौरान 72 में से 19 हाजरी : मुख्यमंत्री 

यदि श्री राहुल गाँधी को गुजरात विधानसभा के प्रति इतना ही आदर है तो उन्हें गुजरात के राज्यपाल से कहना चाहिए कि प्रजातांत्रिक तरीके से चुनी गई विधानसभा द्वारा पास किए गए बिल पास करे : श्री मोदी

मुख्यमंत्री ने लोगों से भारी संख्या में मतदान करने की अपील की, वे महिला मतदारों से महत्वपूर्ण सहयोग की आशा रखते हैं

  

मंगलवार 11 दिसंबर 2012 को श्री नरेन्द्र मोदी ने सावरकुंडला (अमरेली जिला), ध्रांगध्रा (सुरेन्द्रनगर जिला), सुरेन्द्रनगर शहर और धोलका (अहमदाबाद) में बड़ी जनसभाएँ संबोधित की। इसीके साथ श्री मोदी ने जनसभाएँ संबोधित करने का अंत किया उन सभी क्षेत्रों में जहाँ 13 दिसंबर, 2012 को गुजरात विधानसभा चुनावों के पहले चरण के मतदान होने वाले हैं। राज्य में पिछले 11 वर्षों में की गई विकास की पहलों के बारे में मुख्यमंत्री ने विस्तार से बोला और कहा गुजरात सरकार की आलोचना करने के साथ साथ लोग यहाँ के विकास की भी बातें करते हैं जबकि यु.पी.ए. की बात आती है तो चर्चा होती है सिर्फ घोटालों, लूट, कीमतों में वृद्धि इत्यादि की

आज सुबह गुजरात में प्रचार के दौरान श्री राहुल गाँधी द्वारा फैलाए गए झूठे आरोपों को मुख्यमंत्री ने अपनी विशिष्ट शैली में छिन्न-भिन्न कर दिया। उन्होंने ध्यान दिलाया कि श्रीमति सोनिया गाँधी, डॉ. मनमोहन सिंह और श्री राहुल गाँधी ने पूरे प्रचार में जितनी जनसभाएँ संबोधित की हैं उससे कहीं ज़्यादा जनसभाएँ वे एक दिन में संबोधित करते हैं। श्री मोदी ने कहा, आज श्री राहुल गाँधी आए और बोले उनका महात्मा गाँधी से करीबी नाता है। पर आप तो तब तक पैदा भी नहीं हुए थे! महात्मा गाँधी आनंद भवन में फर्श पर सोते थे, श्री राहुल गाँधी द्वारा बताए गए इस वाकिये पर उन्होंने कहा, यह महात्मा गाँधी का बडप्पन और नेहरु के प्रति उनका प्यार था कि वे फर्श पर सोते थे, पर मुद्दा तो यह है कि जब बेटा जैल में था तब खुद श्री मोतीलाल नेहरु पलंग पर सोते थे!

राहुल गाँधी के बारे में उन्होंने कहा, वे कहते हैं कि मैं महात्मा गाँधीजी के बताए रास्ते पर चलता हूँ। यदि वे सही में महात्मा गाँधीजी के बताए रास्ते पर चल रहे है तो  महात्मा गाँधी का एक सपना अधूरा नही रहेगा; जो था आज़ादी के बाद कॉंग्रेस को रद्द करने का श्री मोदी ने गुजरात के लोगों से कहा कि वे महात्मा गाँधी के इस सपने को गुजरात में सच कर दिखायें।

श्री मोदी ने कॉंग्रेस के प्रचार में मुद्दों की कमी दर्शाई। एक बार फिर श्री राहुल गाँधी की कॉंग्रेस द्वारा मोबाईल फोन देने वाली बात पर पूछा, क्या युवाओं को रोजगार चाहिए या मोबाईल फोन? क्या महिलाएँ कीमतों में गिरावट देखना चाह्ती हैं या उन्हें मोबाईल फोन चाहिए? वैसे भी आपके शासन में देश में यदि अंधकार ही रहेगा तो हम ये मोबाईल फोन चार्ज कहाँ करेंगे? श्री मोदी ने कहा कॉंग्रेस देश के लिये क्या करेगी यह बताने के बजाय वे मोबाईल फोन पर अटके हैं।

 

विधानसभा 25 दिनों से ज़्यादा नहीं मिलती है; क़ॉंग्रेस सचिव के ऐसे कथन का मुँहतोड़ जवाब देते हुए श्री मोदी ने बतलाया कि मई 2011 से मई 2012 के दौरान श्री राहुल गाँधी की लोकसभा में 85 दिनों में से 24 हाज़री थी और 2010 तथा 2011 के दौरान 72 में से 19 हाजरी! उन्होंने टिप्पणी कि, यदि आपको आदर होता तो आप रोज़ जाते!  मुख्यमंत्री ने कहा यदि श्री राहुल गाँधी को विधानसभा से इतना लगाव है तो उन्हें पता होना चाहिए कि गुजरात में विधानसभा पूरे पूरे दिन मुद्दों पर चर्चाएँ की हैं पर कॉंग्रेस का ही रूख सकारात्मक नहीं रहा है। उन्होंने टिप्पणी की, हम मुद्दों पर कई दिनों तक चर्चा करते हैं तब बिल पास होते हैं। पर अफसोस है कि कॉंग्रेस विधानसभा का भी आदर नहीं करती!

श्री मोदी ने कहा कि यदि श्री राहुल गाँधी को गुजरात विधानसभा के प्रति इतना ही आदर है तो उन्हें गुजरात के राज्यपाल से कहना चाहिए कि प्रजातांत्रिक तरीके से चुनी गई विधानसभा द्वारा पास किए गए बिल पास करे। चाहे वह ‘गुजकोक’ हो या पुरुषों और महिलाओं को स्थानीय संस्थाओं में समान सीटों का बिल हो, ऐसे सभी महत्वपूर्ण बिल राज्यपाल की मेज़ पर बिना गौर किए पड़े हैं।

आर.टी.आई. निवेदनों के बारे में श्री राहुल गाँधी द्वारा लगाए गए आरोपों पर श्री मोदी ने कहा लोगों को श्री राहुल गाँधी से दिल्ली में अधूरे पड़े निवेदनों के बारे में पूछना चाहिए और बताया कि दिल्ली में 3 लाख से भी अधिक आर.टी.आई. निवेदन बिना गौर किए पड़े हैं।

मुख्यमंत्री ने कॉंग्रेस से सीधा प्रश्न पूछा कि 2009 में आपके द्वारा किये गये 1 करोड़ रोजगारों के वादे का क्या हुआ? आपको मत तो मिल गए पर क्या किसी युवा को दिल्ली से कोई रोजगार मिला? उन्होंने पूछा। गुजरात में बेरोज़गारी है; कॉंग्रेस के इस झूठ का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि केन्द्र की नौंधपत्रिकाओं के अनुसार यह साफ है कि यदि किसी राज्य में सबसे कम बेरोज़गारी है तो वह है गुजरात। साथ ही भारत सरकार के आँकड़े दर्शाते हैं कि भारत में बने रोज़गार के अवसरों में से 72% अवसर गुजरात में बने हैं।

उन्होंने यु.पी.ए. की किसानों के खिलाफ नीतिओं के बारे में विस्तार से बताया, जिन्होंने रूई के आयात पर रोक लगाकर गुजरात के किसानों को 7000 रुपयों का नुकसान पहुँचाया। श्री मोदी ने कहा वे गुजरात के रूई पैदा करने वाले किसानों को केन्द्र की दया पर नहीं छोडना चाहते, इसीलिए गुजरात सरकार ने नई टेक्षटाईल नीतियाँ बनाई है जिससे किसानों के जीवन में गुणात्मक परिवर्तन आयेंगे। उन्होंने बताया कि इन नीतियों से लोगों के लिए लाखों रोज़गार खड़े होंगे।

श्री मोदी ने लोगों को भारी संख्या में जाकर मतदान करने की अपील की और कहा ये चुनाव सिर्फ यह निश्चित करने के लिये नहीं कि अगला एम.एल.ए. कौन होगा बल्कि यह निश्चित करने के लिए है कि गुजरात का भविष्य किसके हाथों में होगा और आने वाले वर्षों में राज्य को विकास की उँचाईयों पर कौन लेकर जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा जैसे 15 दिन भी कहीं बाहर जाएँ तो हम हमारे घर की चाबी किसी अंजान को नहीं सौंप सकते वैसे ही गुजरात को हम अगले पाँच वर्षों के लिए किन्हीं अंजान हाथों में नहीं सौंप सकते। उन्होंने कहा कि गुजरात के लोग उन्हें अच्छी तरह जानते हैं और उन्होंने उन्हें राज्य के लिए काम करते हुए देखा है तथा वे आने वाले और पाँच वर्षों तक सेवा करने के लिए उनका आशीर्वाद चाहते हैं।

कॉंग्रेस द्वारा चलाई जाने वाली यु.पी.ए. के रूख को गुजरात के खिलाफ बताते हुए श्री मोदी ने कहा कि दिल्ली से आने वाले पैसों के आधार पर गुजरात को ज़रूरतमंद राज्य बताने के बजाय प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि गुजरात हर साल दिल्ली को 60000 करोड़ रुपयों का योगदान देता है! क्या गुजरात भिखारी राज्य है? क्या हम दिल्ली की सहायता पर जीते हैं? प्रधानमंत्री जिस स्थान पर बैठे हैं वहाँ पर ऐसे शब्द उन्हें शोभा नहीं देते!श्री मोदी के कहा।

सौराष्ट्र में हो रहे विकास के कार्यों का एक उदाहरण देते हुए श्री मोदी ने SAUNI योजना के बारे में बात की और  कहा कि 10000 रुपयों कि इस योजना से नर्मदा का पानी सौराष्ट्र में लाया जाएगा जिससे लोगों को अनंत लाभ होंगे।

मुख्यमंत्री ने कॉंग्रेस द्वारा प्रचार में फैलाये गए इस झूठ का कि नर्मदा के काम में बहुत देरी हो रही है, कठोर जवाब दिया। उन्होंने बताया कि इस योजना का शिलान्यास पंडित जवाहरलाल नेहरु ने किया था और 26 वर्षों तक कुछ भी नहीं हुआ। श्रीमति इन्दिरा गाँधी ने 9 सालों तक उन फाईलों पर कोई कार्यवाही नहीं की! वैसे ही उन्होंने यु.पी.ए. के अड़चन भरे रूख के बारे में कहा कि उन्होंने बाँध पर दरवाज़े लगाने नहीं दिए और याद दिलाया कि बाँध की उँचाई बढ़ाने के लिए तो उन्हें उपवास भी रखना पड़ा था।

गुजरात में शिक्षा के मुद्दे पर कॉंग्रेस नेताओं की टिप्पणिओं का जवाब देते हुए श्री मोदी ने कहा कि केन्द्र के स्वयं के आँकड़े दर्शाते हैं कि यदि किसी राज्य ने प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति की है तो वह है गुजरात।

जनसभाओं में हर उम्र और समुदाय के लोगों ने हिस्सा लिया था।

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जब राष्ट्र प्रथम के संकल्प वाली सरकार होती है, तो राष्ट्रीय नायकों को भी उचित सम्मान मिलता है: पीएम मोदी
July 06, 2026
हम भारत के उस महान सपूत को श्रद्धांजलि देते हैं, जिनकी राष्ट्रीय एकता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है: पीएम
जब सरकार, 'राष्ट्र प्रथम' के संकल्प वाली होती है, तो राष्ट्रीय नायकों को भी उचित सम्मान मिलता है: पीएम
डॉ. मुखर्जी ने देश में दो संविधान, दो प्रधानमंत्री और दो झंडों की बात का पुरज़ोर विरोध किया: पीएम
वे अच्छी तरह समझते थे कि राष्ट्र-निर्माण का मूल आधार संस्थानों का निर्माण है: पीएम
डॉ. मुखर्जी ने ऐसे राष्ट्रीय संस्थानों की नींव रखी, जो आने वाले दशकों तक भारत की आर्थिक ताकत बने: पीएम

केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी अमित भाई शाह, गजेंद्र सिंह शेखावत, पश्चिम बंगाल के ऊर्जावान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, भाजपा के वरिष्ठ सदस्य, हम जैसे लाखों कार्यकर्ताओं की प्रेरणा, श्रीमान माखनलाल जी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, श्री शॉमिक भट्टाचार्य, उपस्थित जनप्रतिनिधिगण, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सबको मेरा नमस्कार!

मैं अपने पूर्व नियोजित कार्यक्रम के कारण, इस समय प्रवास पर हूं। लेकिन टेक्नोलॉजी की मदद से इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में आपसे जुड़ रहा हूं।

साथियों,

आज देश की धरती, पश्चिम बंगाल की धरती, अपने एक महान सपूत, एक महान देशभक्त, भारत की अखंडता के लिए समर्पित एक युगदृष्टा को श्रद्धापूर्वक स्मरण कर रही है। आज हम उस विचार बीज का गुणगान कर रहे हैं, जो वर्तमान समय में चारों तरफ फल-फूल रहा है। जो, आधुनिक भारत को दिशा देने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।

साथियों,

जहाँ जमीन से जुड़ी हुई वैचारिक शक्ति हो, साथ-साथ इरादे मजबूत हो और नीयत साफ़ हो और जब नए संकल्प के साथ संपूर्ण समर्पण हो और ये सारी कड़ियां जब आपस में जुड़ जाती हैं, तो संकल्प की सिद्धि होती ही होती है। और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ऐसा ही जीवन जी करके दिखाया है। मैं डॉक्टर मुखर्जी की 125वीं जन्मजयंती के अवसर पर उन्हें नमन करता हूं, अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

साथियों,

आज का यह कार्यक्रम इस बात का भी साक्षी है कि जब राष्ट्र प्रथम के संकल्प वाली सरकार होती है, तो राष्ट्र नायकों को सम्मान भी मिलता है और उनके विजन पर चलने का भी प्रयास होता है। डॉक्टर मुखर्जी की 125वीं जन्मजयंती को, हमारी सरकार दो वर्षों के राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मना रही है। यह पिछले वर्ष 6 जुलाई को शुरू हुए थे और अगले साल 6 जुलाई तक चलेंगे। और अब तो बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद इस राष्ट्रीय सम्मान को, एक प्रेरणा पुरुष को याद करने में बंगाल ने अपने आप में रौनक बढ़ा दी है। कुछ दिन पहले ही 20 जून को भव्य तरीके से पश्चिम बंग दिवस का आयोजन किया गया था। यह बंगाल की धरती, बंगाल की विरासत को प्रणाम था। आज का यह कार्यक्रम अपनी विरासत के प्रति उसी सम्मान का हिस्सा है। मैं पश्चिम बंगाल सरकार को इतने भव्य कार्यक्रम के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

डॉक्टर मुखर्जी का जीवन, एक विचार से जन-आंदोलन तक की परिणति का प्रेरक है। उन्होंने भारत में एक वैचारिक आंदोलन को जन्म दिया। आप देखिए, जिस समय जनसंघ की स्थापना हुई थी, तब हर तरफ कांग्रेस का ही बोलबाला था, कांग्रेस का ही वर्चस्व दिखाई देता था। एक ऐसे दौर में, जब अलग विचार के लिए कोई जगह ही नहीं थी, बड़ी मुश्किल था पैर रखने के लिए भी जगह मिल जाए, तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उन सारी परिस्थितियों को चुनौती देते हुए एक नए विचार का साहस किया। यह केवल एक संगठन बनाने का निर्णय नहीं था, एक राजनीतिक दल को जन्म देने का काम नहीं था। यह लोकतंत्र में वैचारिक विविधता, राष्ट्रीय चिंतन और जनभागीदारी पर उनके अटूट विश्वास की अभिव्यक्ति थी। इसी विश्वास से भारतीय जनसंघ का जन्म हुआ। और साथियों, कोई भी विचार केवल स्थापना से अमर नहीं होता। विचार तब अमर होता है, जब पीढ़ियाँ उसे अपने जीवन से सींचती हैं। भारतीय जनसंघ के उस छोटे से दीये को जलाए रखने के लिए लक्षावधि कार्यकर्ताओं ने अपना जीवन खपा दिया। पल-पल, तिल-तिल, लाखों कार्यकर्ताओं के तप, त्याग और समर्पण ने, उस दीये की लौ को कभी बुझने नहीं दिया। आज वह दीया अपने मूल स्वरूप में भले न दिखाई देता हो, भारतीय जनसंघ आज उसी रूप में भले न हो, लेकिन उस दीये का जो प्रकाश-पुंज था, वो आज करोड़ों देशवासियों के विश्वास का प्रकाश बनकर फैल रहा है। उसी प्रकाश का विस्तार आज पूरे देश में खिले हुए करोड़ों कमल के रूप में दिखाई देता है। कभी जो भारतीय जनसंघ था, वही आज भारतीय जनता पार्टी के रूप में विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति बनकर जनसेवा कर रहा है।

साथियों,

अक्सर हम देखते हैं कि समय के साथ कुछ विचारों का आकर्षण फीका पड़ता जाता है। लेकिन आप सोचिए, यह कितना सशक्त विचार-बीज डॉक्टर मुखर्जी ने रोपा है कि आज इतने साल बाद भी उसका इतनी तेजी से विस्तार हो रहा है। मुझे पूरा विश्वास है, जब आने वाली पीढ़ियाँ भारतीय जनता पार्टी की इस यात्रा का इतिहास लिखेंगी, इसका अध्ययन करेंगी, तब वह निश्चित रूप से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों, उनके साहस और उनकी दूरदृष्टि का उल्लेख करेंगी। और मैं फिर कहूंगा, बंगाल के लिए तो यह डबल खुशी की बात है। एक तो डॉक्टर मुखर्जी की 125वीं जन्मजयंती और दूसरा, बंगाल में यह आयोजन, उनके विचार पुंज से निकली भाजपा सरकार में ये भव्य उत्सव हो रहा है। पश्चिम बंगाल की जनता की तरफ से अपने महान सपूत को ये बहुत ही आत्मीय श्रद्धांजलि है।

साथियों,

संसद में अपने एक भाषण में डॉक्टर मुखर्जी ने कहा था और यह डॉक्टर मुखर्जी का यह वाक्य आज भी हमें प्रेरणा देता है। डॉक्टर मुखर्जी ने पार्लियामेंट में कहा था- राष्ट्रीय एकता के धरातल पर ही सुनहरे भविष्य की नींव रखी जा सकती है। और देखिए, आज देश गर्व से कह सकता है कि डॉक्टर मुखर्जी अंतिम सांस तक इसी विश्वास को वो जीते थे, उन्होंने इसे जीया था। 1947 में जब देश का विभाजन हुआ, लगभग तय हो चुका था, तब एक और संकट सामने था। पूरे के पूरे बंगाल को ही भारत से अलग करने की साजिशें रची जा रही थीं। तब डॉक्टर मुखर्जी इन साजिशों के सामने चट्टान बनकर खड़े हो गए। उन्होंने जनमत तैयार किया, राजनीतिक संघर्ष किया और यह सुनिश्चित किया कि पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न हिस्सा बना रहे और तब डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने हुंकार भरी थी। उनके शब्द थे- कांग्रेस देश भाग कोरेछे, आमी पाकिस्तान के भाग कोरेछी। यानि कांग्रेस ने देश का बंटवारा किया, और मैंने पाकिस्तान का ही बंटवारा कर दिया।

साथियों,

यह जो हुंकार है, इसकी जो ताकत है, इसमें जिस बड़ी राजनीतिक इच्छाशक्ति के दर्शन होते हैं, उसका एहसास हमें तब भी होता है, जब हम आज की परिस्थितियों को देखते हैं।

साथियों,

डॉक्टर मुखर्जी, एक भारत श्रेष्ठ भारत के लिए पूरी तरह से समर्पित थे। और इसलिए, जब देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान की बात हुई, तो डॉक्टर मुखर्जी ने इसका भी जमकर विरोध किया। उन्होंने देश को मंत्र दिया- एक देशे दुई बिधान, दुई प्रोधान एबॉन्ग दुई निशान, आमरा कोखोनो मेने नेबो ना यानि "एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान— नहीं चलेंगे, नहीं चलेंगे।" यह केवल एक नारा नहीं था। यह समान अधिकार, समान संविधान और समान राष्ट्रीय चेतना का आह्वान था। उन्होंने अपने सिद्धांतों के लिए संघर्ष किया, जेल गए और अंततः कश्मीर के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। आज हमारी सरकार को इस बात का गर्व है कि आर्टिकल 370 की दीवार गिराकर हमने डॉक्टर मुखर्जी का सपना पूरा किया है।

साथियों,

आज जब हम एक भारत, श्रेष्ठ भारत की बात करते हैं, तो यह उसी राष्ट्रीय दृष्टि का विस्तार है, जिसे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने जीवन से परिभाषित किया। एक ऐसा भारत-जहाँ उत्तर और दक्षिण के बीच कोई दूरी न हो, जहाँ पूर्व और पश्चिम, समान अवसरों के सहभागी हों, जहाँ हर राज्य अपनी विशिष्ट पहचान के साथ भारत की सामूहिक शक्ति बने। जहाँ हर नागरिक एक ही संविधान, एक ही राष्ट्रीय भावना और एक ही भविष्य के संकल्प से जुड़ा हो। मुझे खुशी है कि डॉक्टर मुखर्जी की प्रेरणा से आज भारत का संविधान पूरे देश में आन-बान-शान के साथ लागू है और कोटि-कोटि देशवासियों को प्रेरणा दे रहा है।

साथियों,

डॉक्टर मुखर्जी, इस बात को अच्छे से समझते थे कि संस्थाओं के निर्माण में ही राष्ट्र निर्माण का तत्व छुपा है। मात्र 33 वर्ष की आयु में डॉ. मुखर्जी, कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने। लेकिन उन्होंने उस पद को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं माना। उन्होंने विश्वविद्यालय को भारत के भविष्य का निर्माण करने वाली संस्था के रूप में देखा। उन्होंने शिक्षा को गुलामी की सोच के दायरे के बाहर निकालने का प्रयास किया। उन्होंने कहा- बोंगो-जातिर आत्तोशोम्मान पुनोर-उद्धार, एबॉन्ग मातृ-भाषार माध्योमे शिख्खार प्रोशार एई आमादेर प्रोधान लोक्खो होवा उचित! यानि बंगाल के लोगों का आत्मसम्मान लौटाना और मातृभाषा में पढ़ाई, यह हमारा प्रथम उद्देश्य है। उनका विश्वास था कि यदि भारत को आत्मविश्वासी राष्ट्र बनना है, तो उसकी शिक्षा भी भारतीय आत्मा से जुड़ी होनी चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने भारतीय भाषाओं को सम्मान दिया। आज हमें इस बात का भी गर्व है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्थानीय भाषा में पढ़ाई पर बल दिया जा रहा है। जो सपना डॉक्टर मुखर्जी ने देखा था, वो हमारी सरकार ने पूरा किया है।

साथियों,

स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में उन्होंने औद्योगिक विकास का वृहद विजन रखा था। उन्होंने ऐसे राष्ट्रीय संस्थानों की नींव रखी, जो आने वाले दशकों तक भारत की आर्थिक शक्ति बनें। चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स ने भारत की रेल व्यवस्था को नई गति दी। सिंदरी फर्टिलाइजर प्लांट ने कृषि आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया। दामोदर वैली कॉरपोरेशन ने ऊर्जा और सिंचाई का नया अध्याय लिखा। इंडस्ट्रियल फाइनेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (IFCI) ने भारतीय उद्योगों को वित्तीय आधार दिया।

साथियों,

उनके लिए उद्योग, फैक्ट्रियां, यह केवल कुछ कल कारखाने नहीं थे। विश्वविद्यालय, केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं थे। रिसर्च इंस्टीट्यूशंस, केवल वैज्ञानिक प्रयोगों की जगह नहीं थे। उनके लिए ये सभी, राष्ट्र निर्माण के साधना केंद्र थे। डॉक्टर मुखर्जी, ऐसी संस्थाओं के पक्षधर थे, जो टैलेंट को अवसर दें। ऐसी शिक्षा, जो इनोवेशन को प्रोत्साहन दे। ऐसे उद्योग, जो आत्मनिर्भरता का आधार बने। और ऐसी व्यवस्था, जो आने वाली पीढ़ियों को और अधिक सशक्त भारत सौंप सके। और यही स्पिरिट, आज विकसित भारत की भी प्रेरणा है।

साथियों,

आज के इस अवसर पर मैं, बंगाल के, पूरे देश के मेरे युवा साथियों से कहूंगा, डॉक्टर मुखर्जी ने एक भारत के लिए अपना जीवन समर्पित किया। हम सबको श्रेष्ठ भारत के लिए जीना है, हमें मिलकर विकसित भारत का संकल्प सिद्ध करना है। हमें देश को आत्मनिर्भर बनाना है। इसी आह्वान के साथ, एक बार फिर से मैं डॉक्टर मुखर्जी को नमन करता हूं। मैं उनके ही शब्दों में अपनी बात समाप्त करूंगा। यह डॉक्टर मुखर्जी के शब्द हैं, यह उनकी भाव भंगिमा है- जे काज एई हाते नाओ ना केनो, ता अत्योंतों गुरुत्तो शहोकारे कोरते होबे जो भी काम आरंभ करो, उसे पूरी गंभीरता से करो, तन्मयता से करो, पूरी निष्ठा से करो, कोई भी काम अधूरा ना छोड़ो, उसे जरूर पूरा करो। डॉक्टर मुखर्जी के शब्दों में यह प्रवाहित भावना के साथ, इनके ही इन शब्दों के साथ आप सभी को भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!