गरीब कल्याण मेला अभियान को वीडियो कॉन्फ्रेन्स के जरिए श्री मोदी ने किया संबोधित

कागजी योजनाएं बनाने वाले फिर उतरे मैदान में : मुख्यमंत्री

इस सरकार ने गत दस वर्षों में गरीबों को दिए 16 लाख आवास

अब तक आयोजित 900 गरीब कल्याण मेलों में 80 लाख लाभार्थियों को 10500 करोड़ के लाभों का वितरण

मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को राज्य भर में चल रहे गरीब कल्याण मेला अभियान में वीडियो कॉन्फ्रेन्स के माध्यम से स्पष्ट तौर पर कहा कि चुनाव के मद्देनजर भूतकाल की सरकारों की तरह कागजी योजनाओं के जरिए गरीबों का शोषण करने वाले आज फिर मैदान में उतर पड़े हैं। लेकिन इस सरकार ने तो गत दस वर्षों से गरीबों को रोटी और मकान की स्थायी जिन्दगी देने का सेवायज्ञ चलाया है।

उन्होंने कहा कि गुजरात में अब तक आयोजित 900 गरीब कल्याण मेलों के तहत तकरीबन 80 लाख गरीबों के हाथ में इस सरकार ने 10,500 करोड़ रुपये के लाभ स्वयं चलकर दिए हैं। इतना ही नहीं, 2001 से अब तक गरीबों को 16 लाख आवास के आवंटन के साथ ही सवा तीन लाख भूखण्ड भी दिए गए हैं। श्री मोदी ने कहा कि गरीब कल्याण मेले में आवास की पहली किस्त की सहायता के पेटे दो हजार करोड़ रुपये की राशि सवा चार लाख गरीबों को मिलने वाली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात के विकास की बदौलत उसकी आर्थिक समृद्घि में वृद्घि हुई है और सरकारी तिजोरी की आय में से गरीबों को उनके हक का पैसा दिया जा रहा है। भूतकाल में कांग्रेस की सरकारों ने बिचौलियों के हाथों गरीबों के शोषण की जागीर सौंप दी थी। इस सरकार के जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में कदम-दर-कदम गरीबों के साथ खड़े रहने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने जन्म से मृत्यु तक गरीबों की सहायता के लिए राज्य सरकार की अनेक गरीबोन्मुखी योजनाएं के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि गरीब समाजों का एक वर्ग भी ऐसा नहीं जिसकी सुख-समृद्घि के लिए योजना नहीं है। गरीबों के घर से गरीबी जाएगी, गुटखा जाएगा तो शिक्षा आएगी, कुपोषण और व्यसन में से गरीब परिवारों को मुक्त करने के उनकी सरकार के अभियान वास्तव में गरीबों को गरीबी से बाहर निकालेंगे।

आगामी पांच सितंबर से ग्यारह सितंबर तक पूरे सप्ताह गुजरात में गुटखा मुक्ति सप्ताह के तौर पर मनाकर गरीबों विशेषकर युवा पीढ़ी को मौत के मुख में धकेलने वाले कैन्सर से बचाने का सामाजिक क्रांति का अभियान शुरू किया जाएगा। गुटखा पर प्रतिबंध की राज्य सरकार की घोषणा का समाज की नारीशक्ति- माता और बहनों द्वारा व्यापक स्वागत किए जाने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गुटखा जाएगा तो गरीबी भी जाएगी, युवाओं को कौशल विकास और रोजगार के अवसर मिलेंगे। ऐसी स्थिर और स्थायी जिन्दगी के मिलने से शिक्षा का प्रसार होगा और गरीबी से मुक्ति मिलने पर सुख-शांति का सपना साकार होगा। इस सरकार का यही गरीब कल्याण यज्ञ है।

मुख्यमंत्री ने इस वर्ष अकाल की परिस्थिति में भी आफत को अवसर में पलटने के साथ राज्य में मुक पशुओं के लिए घासचारे की व्यवस्था, पेयजल का प्रबंध और ग्रामीण इलाकों में नरेगा योजना की मदद से जलाशयों, बांधों तथा तालाबों के जलसंग्रह के उत्पादकीय कामों के जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार प्रदान करने जैसे अकाल राहत के कार्यों की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सरकार लाचार बनाकर या टुकड़े फेंक कर विकास का वचन नहीं देती बल्कि गुजरात के विकास में सभी को साथ लेकर सभी को भागीदार बनाने को प्रतिबद्घ है। राज्य के युवाओं को एम्पावर कंप्यूटर प्रशिक्षण देकर हजारों युवाओं को उनके प्रमाण पत्र भी दिए जा चुके हैं। पंचायती राज के स्वर्णिम जयंती उत्सव को ध्यान में रखते हुए इस सरकार ने पंचायत प्रतिनिधि के तौर पर सेवाएं प्रदान करने वालों का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सम्मान करने की पहल की है। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में पंचायतों के पूर्व प्रतिनिधियों का सरकार की ओर से सम्मान किया जा रहा है।

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प्रधानमंत्री 15 जनवरी को राष्ट्रमंडल देशों के स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारियों की 28वीं कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करेंगे
January 14, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 15 जनवरी 2026 को सुबह 10:30 बजे संसद भवन परिसर, नई दिल्ली स्थित संविधान सदन के केंद्रीय हॉल में राष्ट्रमंडल देशों के लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री सभा को संबोधित भी करेंगे।

इस सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला करेंगे और इसमें विश्व के विभिन्न हिस्सों से 42 राष्ट्रमंडल देशों और 4 अर्ध-स्वायत्त संसदों के 61 लोकसभा अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी भाग लेंगे।

यह सम्मेलन समकालीन संसदीय मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला पर विचार-विमर्श करेगा, जिसमें मजबूत लोकतांत्रिक संस्थानों को बनाए रखने में लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों की भूमिका, संसदीय कामकाज में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, संसद सदस्यों पर सोशल मीडिया का प्रभाव, संसद की सार्वजनिक समझ को बढ़ाने के लिए अभिनव कार्यनीतियां और मतदान से परे नागरिक भागीदारी आदि शामिल हैं।