4000 दिनों के ऐतिहासिक सुशासन पर मुख्यमंत्री का अभिवादन

 ग्राम पंचायत मंत्रियों को मासिक 1000 रुपये का विशेष प्रोत्साहक भत्ता पैकेज के रूप में दिया जाएगा

 पंचायतों का प्रशासन टेक्नॉसेवी बने यह गुजरात का संकल्प: श्री मोदी

 गांवों में पानी की व्यवस्था करने के लिए पंचायत मंत्री लाखा वणजारा की भूमिका निभाए

  

मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गांधीनगर के महात्मा मन्दिर में आयोजित ग्राम पंचायत मंत्रियों के राजय स्तरीय कार्य शिविर का शुभारम्भ करते हुए राज्य के तमाम पंचायत मंत्रियों की सेवा को प्रोत्साहन देते हुए मासिक 1000 रुपये का विशेष भत्ता देने की घोषणा की। पंचायत मंत्रियों को वर्तमान में मिलने वाले 100 रुपये मासिक के खास भत्ते में 9 गुना वृद्धि की गई है। पंचायत मंत्री जो कैश अकाउंट का ग्राम पंचायत का हिसाब, वसूली आदि का काम करते हैं उन्हें पहली बार मासिक 100 रुपये का कैश अलाउंस सहित कुल मासिक 1000 रुपये का खास भत्ता पैकेज दिया जाएगा।

इसके साथ ही गुजरात के कर्मचारियों को मिलने वाले वाहन भत्ते के अंतर्गत तलाटी मंत्री को वाहन भत्ता मिलने योग्य होगा।

गुजरात में पंचायतराज की स्वर्णिम जयंती मनाई जा रही है, इसके तहत आज गांधीनगर में राज्य की तमाम ग्राम पंचायतों के मंत्रियों का राज्य स्तरीय कार्य शिविर आयोजित किया गया। इस अवसर पर गुजरात के त्रि स्तरीय पंचायतीराज ढांचे में ग्राम विकास और पंचायत के प्रशासन में सेवाएं दे रहे पंचायत मंत्रियों के योगदान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात के इतिहास में पहली बार पंचायत तलाटी मंत्रियों का कार्य शिविर जिस महात्मा मन्दिर में आयोजित हो रहा है उसके निर्माण में गांव- गांव से जल और मिट्टी लाने की पसीने की सुवास ग्राम पंचायत के मंत्रियों की फैलाई हुई ही है।

पंचायत मंत्री परिवारों को प्रेरणा देते हुए श्री मोदी ने कहा कि पूर्व में ग्राम पंचायतों में पैसा ही नहीं था मगर आज सभी जगह दमकता विकास नजर आता है क्योंकि आज गांवों को लाखों के साधन, सहायता मिल रहे हैं।

श्री मोदी ने कहा कि राज्य सरकार निरंतर कुछ नया करने का सोचती है जिसका प्रतिभाव पंचायत मंत्री तक के विचार में दिखाई देता है। यह दर्शाता है कि गुजरात में आप सभी को विकास के लिए कुछ नया करने की प्रेरणा मिलती है। गुजरात सरकार के 6 लाख कर्मयोगियों की 12 लाख भुजाएं ही इस सरकार की ताकत है और 4000 दिवस की राजनैतिक स्थिरता में गुजरात नई ऊंचाई पर पहुंच गया है।

गुजरात में 55 में से 110 नये प्रांत, आपणो तालुको- वाइब्रेंट तालुको, नये जिलों और तहसीलों के गठन जैसी प्रशासनिक सत्ता विकेन्द्रीकरण की सुगमता ने नई चेतना जगाई है। इसकी भूमिका में श्री मोदी ने कहा कि आंगनवाडी जैसी उपेक्षित इकाईयों को गांवों में गरीब बालकों के पालन- पोषण के लिए उर्जावान बनाया गया है। गांव- गांव में सखीमंडल की बहनें और तलाटी मंत्री भी कम्प्युटर साक्षरता के लिए राज्य सरकार के एम्पावर प्रोजेक्ट से सशक्त बन रहे हैं। गांवों के प्रशासनिक तंत्र में ई ग्राम विश्व ग्राम और स्वागत ऑनलाइन कार्यक्रम सम्भव हुए हैं क्योंकि राज्य सरकार ने ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान की है।

प्रत्येक पंचायत मंत्री टेक्नोसेवी बने, यह आहवान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक पंचायत मंत्री गांव का चीफ सेक्रेटरी है और उन्हें इसी सामर्थ्य से नेतृत्व करना चाहिए। गांव के सरकारी निवृत्त सेवकों के साथ वर्ष में उनके साथ समूह चिंतन करके गांव की सूरत बदलने के लिए जनभागीदारी को सक्रिय बनाने की प्रेरणा देते हुए श्री मोदी ने सुझाव दिया कि 26 जनवरी 1 मई और दिपावली पर इन निवृत्त सेवकों का स्नेह मिलन आयोजित किया जाना चाहिए। इसके लिए किसी वित्तीय व्यवस्था की जरूरत हो तो उस पर विचार किया जा सकता है।

श्री मोदी ने प्रत्येक गांव में लाखा वणजारा की वाव का इतिहास सजीव कर पानी का व्यवस्थापन जल मन्दिर के रूप में करने का सुझाव भी दिया। साथ ही विश्वास जताया कि इस से आने वाली पीढ़ियां आपको याद करेगी।

कार्यक्रम में राज्य के पंचायत मंत्री नरोत्तम पटेल, राज्य स्वास्थ्य मंत्री परबत भाई पटेल ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री रमण भाई वोरा, जयसिंह चौहान, मोहन भाई कुंडारिया,संसदीय सचिव एके. जोती, पंचायत विभाग के अग्र सचिव आरएम. पटेल सहित कई प्रशासनिक अधिकारी और ग्राम पंचायत मंत्री मौजूद थे।

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प्रधानमंत्री ने 'नागरिक देवो भव' की भावना पर बल दिया और अधिकारियों से नागरिकों को शासन के केंद्र में रखने का आग्रह किया
प्रधानमंत्री ने विकास संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए विभिन्न सरकारी विभागों के लिए मिलकर काम करने का समग्र दृष्टिकोण अपनाने और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने का आह्वान किया
प्रधानमंत्री ने युवा प्रशासनिक अधिकारियों से 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में देश की यात्रा का नेतृत्व करने का आह्वान किया
प्रधानमंत्री ने भविष्य में प्रशासन को सक्षम बनाने में मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा-आधारित शासन की भूमिका का उल्लेख किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज सुबह नई दिल्ली में सेवा तीर्थ में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 2024 बैच के 183 प्रशिक्षु अधिकारियों से बातचीत की जिन्हें विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है। 

युवा प्रशिक्षु अधिकारियों ने इस अवसर पर अपने क्षेत्र से संबंधित प्रशिक्षण और मंत्रालयों से जोड़े जाने के बाद कामकाज के अनुभव साझा किए। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि विभागों में दो वर्षों के कामकाज के अनुभव और प्रशासनिक प्रशिक्षण के बाद वे अब एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं जहां उनके निर्णय न केवल उनके अपने करियर को बल्कि करोड़ों नागरिकों के भविष्य को भी आकार देंगे। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि लोक सेवा की असली परीक्षा वास्तविक परिस्थितियों से ईमानदारी, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ निपटने से प्रारंभ होती है। 

प्रधानमंत्री ने युवा प्रशासनिक अधिकारियों से दृढ़ संकल्प, नवाचार और नागरिक-केंद्रित शासन के साथ राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने अधिकारियों से हमेशा यह याद रखने का आग्रह किया कि प्रशासन से संबंधित प्रत्येक फाइल के पीछे मानवीय पहलू छिपे होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक फाइल अनगिनत नागरिकों की आकांक्षाओं, चिंताओं और उनके जीवन का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने "नागरिक देवो भव" के मंत्र पर बल देते हुए अधिकारियों से हर निर्णय के केंद्र में नागरिकों को रखने और यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि शासन सहानुभूतिपूर्ण, उत्तरदायी और समावेशी बना रहे। 

प्रधानमंत्री ने सभी विभागों के समग्र रूप से मिलकर काम करने के दृष्टिकोण को अपनाने का आह्वान करते हुए इस बात पर बल दिया कि विकास से संबंधित प्रमुख चुनौतियों का समाधान अलग-थलग रहकर नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि सार्थक और स्थायी परिणाम प्राप्त करने के लिए विभागों के बीच प्रभावशाली समन्वय आवश्यक है। 

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत का निर्माण करना आने वाले दशकों में हर नीति और प्रशासनिक निर्णय का उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आज भारत की प्राथमिकताओं में आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि, ऊर्जा सुरक्षा और युवाओं के लिए अवसरों का सृजन शामिल हैं। 

प्रधानमंत्री ने पिछले दशक में शासन व्यवस्था में आए परिवर्तनों पर बल देते हुए कहा कि प्रशासन प्रक्रिया-केंद्रित मॉडल से परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण की ओर अग्रसर हुआ है। उन्होंने सेवा वितरण में सुधार लाने और नागरिकों को सुगमता और पारदर्शिता के साथ सेवाओं तक पहुंच प्रदान करने में डिजिटल शासन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया। 

प्रधानमंत्री ने आंकड़ों पर आधारित शासन के महत्व पर बल देते हुए कहा कि आंकड़ों को केवल संख्या के रूप में नहीं बल्कि लाखों लोगों के सामूहिक जीवन, चुनौतियों और आकांक्षाओं के प्रतिबिंब के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि नीतियां जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम दे रही हैं या नहीं।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया और बताया कि वर्तमान बैच में 40 प्रतिशत से अधिक महिला अधिकारी हैं।

प्रधानमंत्री ने युवा अधिकारियों से राष्ट्र निर्माण में अपने योगदान का निरंतर मूल्यांकन करने और पदों से नहीं बल्कि कामकाज से मिले ठोस परिणामों से संतुष्टि प्राप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि उनकी ऊर्जा, प्रतिभा और समर्पण भारत के विकास पथ को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

कार्मिक राज्य मंत्री श्री जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव श्री पी.के. मिश्रा, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव-2 श्री शक्तिकांत दास, मंत्रिमंडल सचिव श्री टीवी सोमनाथन, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव सुश्री रचना शाह, एलबीएसएनएए के निदेशक श्री श्रीराम तरणिकांति और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस संवाद के दौरान उपस्थित थे।