गुजरात सरकार 6 करोड़ गुजरातियों के साथ ही

 ढाई करोड़ पशुओं का भी खयाल रखती है : श्री मोदी

विडियो कॉंफ्रेंस के जरिये लाखों किसानों से मुख्यमंत्री का वार्तालाप: बजट में पशुपालन

और पशु स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 350 करोड़ का आवंटन

मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कृषि महोत्सव और पशु स्वास्थ्य मेला अभियान के तीसरे दिन विडियो कॉंफ्रेंस द्वारा किसानों से सीधा वार्तालाप करते हुए कहा कि गुजरात में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ज्यादा मजबूत बनाने के लिए कृषि के साथ पशुपालन के वैज्ञानिक विकास को भी उतनी ही प्राथमिकता दी गई है। गुजरात में इस वर्ष बजट में पशु स्वास्थ्य सेवाओं और पशु संवर्धन के लिए 350 करोड़ का आवंटन किया गया है। दूध के उत्पादन में दस वर्ष में 66 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

कृषि महोत्सव के कारण किसान खेतीबाड़ी की सीमित अवस्था से बाहर आ पाए हैं। इसका उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि एक जमाने में खेती उत्तम मानी जाती थी मगर पिछले 50 सालों में खेती के प्रति उपेक्षा का माहौल बन गया था। दस वर्षों से शिक्षित युवा खेतीबाड़ी की आधुनिक प्रवत्तियां और डेयरी पशुपालन में नये प्रयोग करके प्रगतिशील किसान के रूप में गौरव हासिल कर रहे हैं।

गुजरात के पास बारहों मास बहनेवाली नदी नहीं है फिर भी खेती को समृद्ध बनाने के लिए आधुनिक खेती के साथ पशुपालन और फलों की खेती को समानांतर महत्व दिया गया है। श्री मोदी ने कहा कि गुजरात सरकार सिर्फ 6 करोड़ गुजरातियों की सुख सुविधाओं का ही खयाल नहीं रखती बल्कि ढाई करोड़ पशुओं का भी खयाल रखती है। अबतक 25000 पशु स्वास्थ्य मेलों में एक करोड़ से ज्यादा पशुओं का उपचार किया गया है। हर साल 2700 पशु मेले आयोजित होते हैं। अनेक पशुपालकों ने सरकार की पशुसंवर्धन योजना का लाभ लेकर दूध उत्पादन की आय में बढोतरी हासिल की है।

राज्य में पशुपालन के लिए सहकारी बैंकों के ऋणों को कृषि- पशुपालन के साथ जोड़ा गया है। राज्य सरकार द्वारा कामधेनु विश्वविद्यालय की स्थापना करके पशु हॉस्पिटल के लिए पशुधन विकास,स्वास्थ्य,संवर्धन,वैज्ञानिक संशोधन और कुशल मानव संसाधन विकास के अनेक कोर्स शुरु करने का श्री मोदी ने संकल्प जताया।

राज्य में 112 जितने पशु रोग सम्पूर्ण तौर पर खत्म हुए हैं, इसका उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कच्छ-काठियावाड की डेरियों को भूतकाल में ताले लगा दिए गए थे लेकिन इस सरकार ने सभी 6-6 जिले की डेरियों को सजीवन किया है। पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य की सेवाएं तेजी से मिलती हैं। इसके लिए 57 नये पशु मोबाइल अस्पताल बनाए जाएंगे। उत्तम पशु बछड़ों के लिए वैज्ञानिक स्तर पर नये 80 क्रत्रिम गर्भाधान केन्द्र स्थापित किए जाएंगे। गीर गाय,कांकरेज गाय और जफराबादी भैंस के लिए उत्तम बछड़ों के लिए संशोधन के लिए 36 करोड़ का प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।

अच्छी घास-चारे का बीज किट देने और पशुधन उत्पादन के लिए 30 करोड़ का आवंटन किया गया है जबकि स्वच्छ, व्यवस्थित पशु बाड़े के लिए 30 करोड़ का आवंटन किया गया है। इसके लिए राज्य सरकार 15 हजार तक की सहायता देती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बन्नी भैंस के उत्तम शिशु का संवर्धन करने के लिए गुजरात सरकर ने इसको प्रोत्साहन देकर इसे राष्ट्रिय उत्तम पशु शिशु का दर्जा दिलवाया है।

श्री मोदी ने गौ सेवा आयोग को गौचर बोर्ड में तब्दील करके इसे राज्य में 1200 एकड़ जमीन में चारे के उत्पादन का वैज्ञानिक फार्म बनाने की घोषणा की। राजनैतिक झूठ फैलाने वालों को चुनौती देते हुए श्री मोदी ने कहा कि गुजरात में गौचर की जमीन बेच दी गई होती तो दूध के उत्पादन में 66 प्रतिशत वृद्धि कैसे होती?

मुख्यमंत्री ने गोबर बैंक और बायो गैस के पर्यावरणलक्ष्यी नये प्रयोग करने के लिए एनीमल हॉस्टल की दिशा अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह राजनैतिक अभियान नहीं है मगर चुनावों में जो मूक पशु वोट देनेवाले नहीं है उनका खयाल रखने के लिए सरकार के एक लाख जितने कर्मयोगी जी जान से जुटे हैं।

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प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की
June 23, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान को याद किया।

प्रधानमंत्री ने डॉ. मुखर्जी को एक विशिष्ट देशभक्त, विद्वान और राजनेता बताया, जिन्होंने अपना जीवन भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया। श्री मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का अटूट विश्वास, सार्वजनिक जीवन में साहस और राष्ट्रीय हित के प्रति उनकी दृढता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का बलिदान राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में अंकित है।

डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और समाज की निस्वार्थ सेवा में समर्पित कर दिया। श्री मोदी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के गहन विचार और आदर्श देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने संस्कृत में रचित सुभाषितम भी साझा किया:

“न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः।”

परेण नाकं निहितं गुहायां विभ्राजते यद्यतयो विशन्ति॥”

सुभाषितम् में इस बात पर जोर दिया गया है कि अमरत्व कर्मों, धन-दौलत या वंश से नहीं, बल्कि त्याग और महान आदर्शों के प्रति पूर्ण समर्पण से प्राप्त होता है। वे महान आत्माएं जो राष्ट्र, समाज और सत्य के लिए अपने स्वार्थों का त्याग कर देते हैं, समय की सीमाओं को पार करते हुए जनमानस में अमर हो जाते हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर, मैं उनको श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जो एक विशिष्ट देशभक्त, विद्वान और राजनेता थे जिन्होंने अपना जीवन भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया। सार्वजनिक जीवन में उनका अटूट विश्वास, साहस और राष्ट्रीय हित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। डॉ. मुखर्जी का बलिदान हमारी सामूहिक स्मृति में अंकित है। हम उनके द्वारा संजोए गए और अपनी अंतिम सांस तक सेवा किए गए मूल्यों के मार्गदर्शन में एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण के प्रति अपनी दृढता की पुष्टि करते हैं।”

“निःस्वार्थ भाव से राष्ट्र और समाज की सेवा में आजीवन समर्पित रहे देश की महान विभूति डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को उनके बलिदान दिवस पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उनके प्रखर विचार और आदर्श देश की हर पीढ़ी को मातृभूमि की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः।

परेण नाकं निहितं गुहायां विभ्राजते यद्यतयो विशन्ति॥”