संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 76वें सत्र के लिए निर्वाचित अध्‍यक्ष एवं मालदीव के विदेश मंत्री माननीय अब्दुल्ला शाहिद ने आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से भेंट की।
7 जुलाई, 2021 को न्यूयॉर्क में अपने निर्वाचन के बाद माननीय अब्दुल्ला शाहिद संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र के लिए निर्वाचित अध्यक्ष के तौर पर भारत के दौरे पर आए हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने इस चुनाव में माननीय अब्दुल्ला शाहिद की शानदार जीत पर उन्‍हें बधाई दी, और इसके साथ ही यह बात रेखांकित की कि यह विश्व स्‍तर पर मालदीव की बढ़ती साख को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने ‘उम्‍मीदों भरी अध्यक्षता’ के लिए निर्वाचित अध्‍यक्ष के विजन वक्तव्य पर उनका अभिनंदन किया, और इसके साथ ही उन्हें अपनी अध्यक्षता के दौरान भारत की ओर से पूर्ण समर्थन एवं सहयोग का आश्वासन दिया।

प्रधानमंत्री ने पूरी दुनिया की वर्तमान वास्तविकताओं और विश्‍व की विशाल अधिकांश आबादी की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के विभिन्‍न संस्‍थानों सहित बहुपक्षीय प्रणाली में अपेक्षित सुधार करने के महत्व पर विशेष जोर दिया।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी और माननीय अब्दुल्ला शाहिद ने हाल के वर्षों में भारत एवं मालदीव के द्विपक्षीय संबंधों में बड़ी तेजी से हुई वृद्धि पर भी गहन चर्चा की। प्रधानमंत्री ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि कोविड-19 महामारी से उत्‍पन्‍न विभिन्‍न तरह की बाधाओं के बावजूद द्विपक्षीय परियोजनाओं पर काम काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्‍होंने भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति और ‘सागर’ विजन के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में मालदीव के विशेष महत्व को रेखांकित किया।

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प्रधानमंत्री ने मातृभूमि की पवित्र विरासत और विश्व कल्याण की प्रार्थना पर आधारित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
May 21, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने संस्कृत में एक सुभाषितम् साझा करते हुए कहा कि हमारी मातृभूमि आध्यात्मिक साधना और उपासना के साथ-साथ साहस, शक्ति और सर्वकल्याण की पवित्र भूमि रही है। श्री मोदी ने कामना की कि महान विरासत और प्राचीन संस्कृति की यह पवित्र भूमि सदा सभी को सुख और समृद्धि से परिपूर्ण रखे।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया:

"हमारी मातृभूमि साधना और उपासना के साथ-साथ साहस, शक्ति और सर्व-कल्याण की पुण्यभूमि रही है। महान विरासत और प्राचीन संस्कृति की यह पावन धरती हर किसी को सदैव सुख-समृद्धि से परिपूर्ण रखे, यही कामना है।

यस्यां पूर्वे पूर्वजना विचक्रिरे यस्यां देवा असुरानभ्यवर्तयन्।

गवामश्वानां वयसश्च विष्ठा भगं वर्चः पृथिवी नो दधातु।।"

जिस भूमि पर हमारे पूर्वजों ने महान और कल्याणकारी कार्य किए और जिस भूमि पर देवताओं ने अन्यायपूर्ण शक्तियों को पराजित किया, वह पशुधन और शक्ति से परिपूर्ण मातृभूमि हमें विशाल स्थान और समृद्धि प्रदान करे।