प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्क स्थापित करने के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन या भव्य-रसायन योजना को मंजूरी दी है। इस योजना की घोषणा वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में की गई थी।
इस योजना के लिए कुल 3,030 करोड़ रुपये का वित्तीय आवंटन किया जाएगा जिसमें से 3,000 करोड़ रुपये पार्क की भीतरी अवसंरचना सुविधाओं और बुनियादी उपयोगिताओं की स्थापना की लागत को पूरा करने और 30 करोड़ रुपये प्रशासनिक व्यय के रूप में आवंटित किए जाएंगे। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक पांच वर्षों की अवधि के लिए लागू रहेगी।
केंद्र सरकार उक्त योजना के तहत प्रत्येक पार्क के लिए संबंधित राज्य सरकार की ओर से न्यूनतम 500 करोड़ रुपये का योगदान करने के बाद 1,000 करोड़ रुपये तक का अनुदान प्रदान करेगी।
भव्य रसायन योजना से अर्थव्यवस्था को निम्नलिखित लाभ मिलने की उम्मीद है:
- इससे कच्चे माल की सोर्सिंग (अपस्ट्रीम), अंतिम उपभोक्ता तक आपूर्ति (डाउनस्ट्रीम) और सहायक उद्योगों सहित संपूर्ण मूल्य श्रृंखलाओं में रासायनिक उद्योग के विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे संसाधनों का कुशल उपयोग होगा और माल ढुलाई और प्रबंधन लागत कम होगी।
- साझा बुनियादी ढांचा सुविधाओं और मूलभूत उपयोगिताओं के माध्यम से, रसायन उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, यह लागत योजना प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाएगी और भारतीय उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी।
- इससे भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में बेहतर ढंग से एकीकृत होने में मदद मिलेगी, जिससे निर्यात में वृद्धि होगी और आयात प्रतिस्थापन में सुधार होगा।
- यह योजना पर्यावरण के अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर भारतीय रसायन उद्योग के सतत विकास को बढ़ावा देगी। इस पारिस्थितिकी तंत्र में केंद्रीकृत सुविधाएं होंगी, जैसे साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र, उपचार, भंडारण और निपटान सुविधा, और खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना। इससे पर्यावरण नियमों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होगा, जिससे उद्योग का विकास पर्यावरण के अनुकूल तरीके से होगा।
- रसायन क्षेत्र के विकास से अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों के विकास में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे रोजगार सृजन में वृद्धि होगी और अर्थव्यवस्था का अधिक विकास होगा। यह 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगा।
- सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र (सीईटीपी),
- उपचार, भंडारण और निपटान सुविधा (टीएसडीएफ),
- जल आपूर्ति और वितरण प्रणालियां,
- विलायक पुनर्प्राप्ति और आसवन सुविधाएं,
- भाप उत्पादन और वितरण नेटवर्क,
- परस्पर जुड़ा हुआ पाइपलाइन नेटवर्क,
- लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सुविधाएं।


