प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने ‘समुद्र मंथन’ – राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को मंजूरी दी है। यह पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की एक केन्द्रीय क्षेत्र की योजना है और इसके लिए वित्त वर्ष 2030-31 तक कार्यान्वयन हेतु 84,084 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है।

यह योजना प्रधानमंत्री के उस विजन को साकार करती है, जिसे उन्होंने 2025 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले के प्राचीर से आधुनिक ‘समुद्र मंथन’ के रूप में पेश किया था ताकि भारत की विशाल अपतटीय ऊर्जा क्षमता का लाभ उठाया जा सके। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने, घरेलू स्तर पर अन्वेषण एवं उत्पादन को तेज करने, तकनीकी नेतृत्व को बढ़ावा देने और ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है।

इस योजना के अंतर्गत अपतटीय अन्वेषण (ऑफशोर एक्सप्लोरेशन) की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में विभिन्न तरह के उपाय शामिल हैं। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले भूकंपीय (सिस्मिक) डेटा को बड़े पैमाने पर एकत्रित करना, उसका विश्लेषण एवं व्याख्या करना; गहरे पानी व बहुत गहरे पानी में तेजी से अन्वेषण करने वाली ड्रिलिंग करना; नए एवं कम खोजे गए बेसिन में वैज्ञानिक ड्रिलिंग करना; अपतटीय उत्पादन एवं निकासी हेतु साझा बुनियादी ढांचा विकसित करना; और एक एकीकृत तेल एवं गैस मैन्यूफैक्चरिंग तथा सेवा परिक्षेत्र की स्थापना करना शामिल है। इसमें डिजिटल कार्यक्रम प्रबंधन, क्षमता विकास, तकनीक को अपनाने, हितधारकों को शामिल करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क बढ़ाने के विशेष प्रावधानों का भी समावेश है ताकि देश में अपतटीय अन्वेषण एवं उत्पादन को तेजी से बढ़ाया जा सके और एक एकीकृत इकोसिस्टम तैयार किया जा सके।

‘समुद्र मंथन’ से 600 मिलियन मीट्रिक टन ऑयल इक्विवेलेंट (एमएमटीओई) से अधिक का भंडार जमा होने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। साथ ही, इससे अपतटीय अन्वेषण की गतिविधियों में काफी वृद्धि होगी, घरेलू तेल एवं गैस के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग सुदृढ़ होगी और अपतटीय प्रौद्योगिकी एवं सेवाओं का एक ऐसा इकोसिस्टम बनेगा जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी होगा। इस योजना से अन्वेषण एवं उत्पादन की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में व्यापक निवेश को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे उद्योग, नवाचार और आर्थिक विकास से संबंधित दीर्घकालिक अवसर पैदा होंगे।

अब जबकि भारत एक विकसित देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, ‘समुद्र मंथन’ एक ऐसी परिवर्तनकारी राष्ट्रीय पहल है जो देश के अपतटीय ऊर्जा संसाधनों का लाभ उठाएगी, दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करेगी, तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाएगी और अर्थव्यवस्था व भावी पीढ़ियों के लिए स्थायी मूल्य का निर्माण करेगी।

पिछले दशक में, सरकार ने अपस्ट्रीम सेक्टर में व्यापक परिवर्तनकारी सुधार किए हैं। इनमें अन्वेषण (एक्सप्लोरेशन) हेतु लगभग पूरे अपतटीय इलाके को खोलना, विधायी एवं अनुबंध से संबंधित ढांचे को आधुनिक बनाना और राष्ट्रीय डेटा रिपॉजिटरी को सुदृढ़ करना शामिल है। इन्हीं सुधारों को आगे बढ़ाते हुए, ‘समुद्र मंथन’ रणनीतिक सार्वजनिक निवेश, अत्याधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के जरिए तेजी से अपतटीय अन्वेषण के एक नए दौर की शुरुआत करेगा।

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Prime Minister offers prayers to Bhagwan Shri Ganesh during Ganpati Darshan at Union Minister Piyush Goyal’s residence
September 14, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi has visited the residence of Union Minister Shri Piyush Goyal for Ganpati Darshan.

The Prime Minister prayed for the blessings of Bhagwan Shri Ganesh for everyone.

The Prime Minister wrote on X;

“Went for Ganpati Darshan at the residence of Union Minister Shri Piyush Goyal Ji.

May Bhagwan Shri Ganesh bless everyone!

@PiyushGoyal”