पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने पुणे मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के प्रथम चरण को दी मंजूरी
पुणे मेट्रो ट्रैफिक को तो कम करेगी ही साथ ही तीव्र, आरामदायक, सुरक्षित, प्रदूषण रहित और सस्ती परिवहन सुविधा भी करेगी प्रदान

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पुणे मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण के विकास को मंजूरी दे दी है। पुणे मेट्रो रेल गलियारे की कुल लंबाई 31.254 किलोमीटर होगी। इसमें दो अलग गलियारे होंगे। गलियारा-1 (पिंपरी चिंचवड महानगरपालिका यानी पीसीएमसी से स्वरगेट) 16.589 किलोमीटर (11.57 किलोमीटर जमीन के ऊपर और 5.019 किलोमीटर भूमिगत) और गलियारा-2 (वनाज से रामवाड़ी) 14.665 किलोमीटर (पूरी तरह जमीन के ऊपर) लंबा होगा।

मेट्रो रेल गलियारे की पूर्णता लागत 11,420 करोड़ रुपये होगी। इस मेट्रो गलियारे से पुणे मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की लगभग 50 लाख की आबादी को सीधा फायदा पहुंचेगा। इस प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के अनुसार कार्य शुरू होने की तिथि से पांच साल के भीतर यह परियोजना पूरी हो जाएगी।

अनुमोदित रूट से यात्रियों को अति आवश्यक कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है और यह पुणे मेट्रोपॉलिटन एरिया के भीड़भाड़ वाले मार्गों और सघन यातायात के काफी हद तक राहत प्रदान करेगा। इससे सड़कों पर ट्रैफिक काफी कम हो जाएगा और शहर में तेज, आरामदायक, सुरक्षित, प्रदूषण मुक्त और किफायती जन परिवहन प्रणाली की शुरुआत होगी, जो इस क्षेत्र के विकास और समृद्धि को आगे बढ़ाने में सहायक होगा। पुणे महानगर क्षेत्र का विकास एवं समृद्धि राष्ट्र के विकास एवं समृद्धि में योगदान देगी।

यह परियोजना महाराष्ट्र मेट्रो रेल निगम लिमिटेड (महा-मेट्रो) द्वारा कार्यान्वित की जाएगी। इसमें भारत सरकार और महाराष्ट्र सरकार संयुक्त रूप से 50-50 प्रतिशत के स्वामित्व वाली कंपनी होंगी। यह परियोजना मेट्रो रेल (कार्य निर्माण) अधिनियम, 1978, मेट्रो रेल (संचालन और रखरखाव) अधिनियम 2002 और रेल अधिनियम 1989 के कानूनी ढांचे के तहत कवर होगी, जिनमें समय-समय पर संशोधन किया गया है।

मौजूदा नागपुर मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड (एनएमआरसीएल), को महाराष्ट्र में मुंबई महानगर क्षेत्र के बाहर पुणे मेट्रो रेल परियोजना के पहले चरण समेत सभी मेट्रो परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए महाराष्ट्र मेट्रो रेल निगम लिमिटेड (महा-मेट्रो) में पुनर्गठित किया जाएगा। एनएमआरसीएल भारत सरकार और महाराष्ट्र सरकार की संयुक्त विशेष प्रायोजन संस्था (एसपीवी) है। इस परियोजना को दिल्ली, बेंगलुरू, चेन्नई, कोच्चि, नागपुर आदि की मेट्रो रेल परियोजनाओं के अनुभव और सीख का लाभ प्राप्त होगा।

पृष्ठभूमिः

पुणे मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में पुणे नगर निगम (पीएमसी), पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम (पीसीएमसी) शामिल हैं। पुणे और खादकी, दोनों ही कैंटोनमेंट क्षेत्रों जनसंख्या में तेजी से बढ़ी है। पुणे शहरी संकुलन की आबादी 2001 की जनगणना के अनुसार 35.7 लाख थी, जो 2011 में बढ़कर 49.9 लाख पहुंचे गई। अनुमान है कि यह 2021 में बढ़कर 69.0 लाख और 2031 में बढ़कर 77.3 लाख पहुंच जाएगी।

पिछले दशकों में तेजी से हो रहे औद्योगिकीकरण और तीव्र आर्थिक विकास के कारण यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। इससे पुणे के ट्रांसपोर्ट ढांचे पर काफी दबाव आ गया है। इस क्षेत्र की आबादी में वृद्धि के अनुमान को देखते हुए परिवहन की मौजूदा बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें मजबूत बनाने की तत्काल आवश्यकता है। बढ़ती अर्थव्यवस्था और अपर्याप्त सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के कारण यात्री निजी मोड में जा रहे हैं, जो इस क्षेत्र में वाहन स्वामित्व प्रवृत्ति के बढ़ते ट्रेंड से स्पष्ट होता है। इससे न केवल सड़कों पर भीड़ बढ़ रही है बल्कि वायु प्रदूषण में भी इजाफा हो रहा है। इसलिए, यहां के लिए मेट्रो रेल प्रणाली बहुत आवश्यक है।

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प्रधानमंत्री ने पटना पक्षी अभयारण्य और छारी-ढांड में नए रामसर स्थलों का स्वागत किया
January 31, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने एटा (उत्तर प्रदेश) में स्थित पटना पक्षी अभयारण्य और कच्छ (गुजरात) में स्थित छारी-ढांड को रामसर स्थल के रूप में शामिल किए जाने का स्वागत किया है। श्री मोदी ने स्थानीय लोगों और आर्द्रभूमि के संरक्षण के प्रति समर्पित सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि ये पहचान जैव विविधता के संरक्षण और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं।

प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की पोस्ट का जवाब देते हुए एक्‍स पर पोस्ट किया:

“यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि एटा (उत्तर प्रदेश) में स्थित पटना पक्षी अभयारण्य और कच्छ (गुजरात) में स्थित छारी-ढांड को रामसर स्थल के रूप में शामिल‍ किया गया है। वहां के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ आर्द्रभूमि के संरक्षण के प्रति समर्पित सभी लोगों को हार्दिक बधाई। ये पहचान जैव विविधता के संरक्षण और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं। आशा है कि ये आर्द्रभूमियां असंख्य प्रवासी और स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में फलती-फूलती रहेंगी।”