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पीएमजीएसवाई की सभी मौजूदा परियोजनाओं को पूरा करने के लिए राज्य के हिस्से सहित 2021-22 से 2024-25 तक कुल 1,12,419 करोड़ रु. खर्च होने की संभावना है
9 राज्यों के 44 जिलों में आरसीपीएलडब्ल्यूईए के तहत 2016 से 4,490 किलोमीटर लंबी सड़कों और 105 पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है
शेष कार्यों को पूरा करने में पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों की मदद के लिए सितंबर, 2022 तक समय बढ़ाया जा रहा है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीईए) ने सड़कों और पुलों के निर्माण के शेषकार्यों को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-I और II को सितंबर, 2022 तक जारी रखने से संबंधित ग्रामीण विकास मंत्रालय के ग्रामीण विकास विभाग के प्रस्तावों को अपनी मंजूरी दे दी है। सीसीईए ने वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना (आरसीपीएलडब्ल्यूईए) को मार्च, 2023 तक जारी रखने के लिए भी अपनी मंजूरी दी।

भारत सरकार ने मैदानी क्षेत्रों में 500 से अधिक जनसंख्या वाली और उत्तर-पूर्व तथा हिमालयी राज्यों में 250 से अधिक जनसंख्या वाली सड़क से वंचित बस्तियों को कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए पीएमजीएसवाई-I की शुरुआत की। चयनित वामपंथी उग्रवाद ब्लॉकों में, 100 से अधिक जनसंख्या वाली बस्तियों को भी कनेक्टिविटी प्रदान की जानी थी। ऐसी कुल 1,84,444 बस्तियों में से केवल 2,432 बस्तियां शेष हैं। कुल स्वीकृत 6,45,627 किलोमीटर लंबी सड़कों और 7,523 पुलों में से 20,950 किलोमीटर लंबी सड़कों और 1,974 पुलों के कार्यों को पूरा करना शेष है। इस प्रकार, अब ये कार्य पूरे हो जाएंगे। 

पीएमजीएसवाई- II के तहत, 50,000 किलोमीटर ग्रामीण सड़क नेटवर्क के उन्नयन की परिकल्पना की गई थी। कुल 49,885 किलोमीटर लंबी सड़कों और 765 एलएसबी स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से केवल 4,240 किलोमीटर लंबी सड़कों और 254 पुलों का कार्य शेष हैं। इस प्रकार, अब ये कार्य पूरे हो जाएंगे। 

उत्तर-पूर्व और पर्वतीय राज्यों में कोविड लॉकडाउन, ज्यादा समय तक बारिश होने,सर्दी, वन संबंधी मुद्दों के कारण पीएमजीएसवाई- I और II के तहत अधिकांश कार्य लंबित हैं। ये राज्य केंद्र सरकार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था से संबंधित इन महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करने के लिए समय बढ़ाने का अनुरोध करते रहे हैं। इन राज्यों को शेष कार्यों को पूरा करने में मदद करने के लिए समयसीमा को सितंबर,2022 तक बढ़ाया गया है। 

9 राज्यों के 44 वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में कनेक्टिविटी में सुधार के लिए वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों की सड़क संपर्क परियोजना(आरसीपीएलडब्ल्यूईए) 2016 में शुरू की गई थी। 5,714 किलोमीटर लंबी सड़कों और 358 पुलों का कार्य पूरा होना बाकी है और अन्य 1,887 किलोमीटर लंबी सड़कों तथा 40 पुलों को मंजूरी दी जा रही है। इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए योजना को मार्च, 2023 तक बढ़ाया जा रहा है, जो संचार और सुरक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं।

पीएमजीएसवाई ग्रामीण सड़कों के निर्माण में नई और हरित प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को बढ़ावा देती है। किफायती और तेजी से निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सड़क निर्माण में स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है। अब तक नई और हरित प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए 1 लाख किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों का निर्माण किया जा चुका है, जिसमें से 61,000 किलोमीटर से अधिक का काम पूरा हो चुका है। उत्तर प्रदेश राज्य को हाल ही में फुल डेप्थ रिक्लेमेशन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से निर्माण के लिए 1,255 किलोमीटर सड़क की मंजूरी दी गई है, जिससे न केवल लागत और समय की बचत होगी, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा।

पीएमजीएसवाई निर्माण के दौरान और निर्माण के बाद सड़क के निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए त्रिस्तरीय गुणवत्ता आश्वासन तंत्र की परिकल्पना की गई है। बेहतर गुणवत्ता प्रबंधन के लिए केंद्रीय और राज्य, दोनों स्तरों पर गुणवत्ता मॉनीटरों और निरीक्षणों की संख्या में वृद्धि की गई है। हाल के वर्षों में संतोषजनक कार्यों के अनुपात में वृद्धि की प्रवृत्ति देखी गई है।

सरकार ने 2019 में मार्च, 2025 तक 1,25,000 किलोमीटर लंबी सड़कों को पूरा करने के लिए पीएमजीएसवाई-III शुरू की। पीएमजीएसवाई -III के तहत अब तक लगभग 72,000 किलोमीटर लंबी सड़कों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है, जिसमें से 17,750 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है।

पीएमजीएसवाई की सभी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 2021-22 से 2024-25 तक राज्य के हिस्से सहित कुल 1,12,419 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। 

बिंदुवार विवरण 

पीएमजीएसवाई-I 

• पीएमजीएसवाई-I को जनगणना-2001 के अनुसार मैदानी क्षेत्रों में 500 से अधिक जनसंख्या वाली और उत्तर-पूर्व तथा हिमालयी राज्यों में 250 से अधिक जनसंख्या वाली सड़क से वंचित बस्तियों को जोड़ने के लिए 2000 में शुरू किया गया था। इस योजना में पात्र बसावटों वाले उन सभी जिलों के लिए मौजूदा ग्रामीण सड़कों के उन्नयन के घटक भी शामिल थे।  

• वर्ष 2013 में गृह मंत्रालय द्वारा चिन्हित वामपंथी उग्रवाद प्रभावित ब्लॉकों में जनगणना 2001 के अनुसार 100-249 की जनसंख्या वाली बस्तियों को भी शामिल करने का निर्णय लिया गया था। 

• योजना के तहत कवरेज के लिए पहचाने गए 250 से अधिक जनसंख्या वाली और 500 से अधिक जनसंख्या वाली 1,78,184 बस्तियों में से 1,71,494 बसावटों को पहले ही जोड़ा जा चुका है और 15 नवंबर, 2021 तक 1,968 बसावट शेष हैं। शेष 4,722 बस्तियों को या तो छोड़ दिया गया है या वे व्यवहार्य नहीं हैं। 15 नवंबर, 2021 तक 100-249 जनसंख्या वाली श्रेणी में कुल स्वीकृत 6,260 बस्तियों में से केवल 464 बस्तियां शेष हैं। 

• पीएमजीएसवाई-I के तहत कुल 6,45,627 किलोमीटर लंबी सड़कों और 7,523 पुलों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से केवल 20,950 किलोमीटर लंबी सड़कों और 1,974 पुलों का कार्य पूरा होना 15 नवंबर, 2021 तक शेष है। 

• अधिकांश लंबित परियोजनाएं पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में हैं। 

• सीसीईए ने 9 अगस्त, 2018 को मार्च, 2019 तक विस्तार को मंजूरी दी। 

• सभी शेष बसावटों को प्रस्तावित विस्तारित अवधि के भीतर, अर्थात् सितंबर,2022 तक 20,950 किलोमीटर लंबी सड़कों और 1,974 पुलों का निर्माण करके कनेक्टिविटी प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। 

पीएमजीएसवाई-II 

• पीएमजीएसवाई-II, जिसे मई, 2013 में कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया था, में मौजूदा ग्रामीण सड़क नेटवर्क के 50,000 किलोमीटर लंबाई को पूरा करने की परिकल्पना की गई थी। 

• राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सभी प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है। 

• योजना के तहत स्वीकृत कुल 49,885 किलोमीटर लंबी सड़कों और 765 पुलों में से केवल 4,240 किलोमीटर लंबी सड़कें और 254 पुल शेष हैं। 

• अधिकांश लंबित परियोजनाएं पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ बिहार राज्य में भी हैं। 

• सीसीईए ने 9 अगस्त, 2018 को मार्च, 2020 तक विस्तार को मंजूरी दी। 

• सभी लंबित परियोजनाओं को प्रस्तावित विस्तारित अवधि के भीतर यानी सितंबर, 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 

वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना 

• 9 राज्यों, यानि आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के 44 जिलों में 11,725 ​​करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ सामरिक महत्व के 5,412 किलोमीटर लंबी सड़कों और 126 पुलों के निर्माण/उन्नयन का कार्य 2016 में शुरू किया गया।

• कार्यान्वयन अवधि: 2016-17 से 2019-20 

• गृह मंत्रालय ने राज्यों और सुरक्षा बलों के परामर्श से इस योजना के तहत सड़कों और पुलों के कार्यों का चयन किया गया है। 

• गृह मंत्रालय के अतिरिक्त प्रस्तावों सहितइस योजना के तहत अब तक 9,822 करोड़ रुपए के परिव्यय से 10,231 किलोमीटर लंबी सड़कों और पुलों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। 

• 4,490 किलोमीटर लंबी सड़कों और 105 पुलों का निर्माण पहले ही पूरा कर लिया गया है। 

• लगभग 1,887 किलोमीटर की शेष परियोजनाओं और अतिरिक्त परियोजनाओं को, जिन्हें अभी तक स्वीकृत नहीं किया गया है, प्रस्तावित विस्तारित अवधि के भीतर यानी मार्च2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 

रोजगार सृजन क्षमता सहित प्रमुख प्रभाव 

• पीएमजीएसवाई पर किए गए विभिन्न स्वतंत्र प्रभाव मूल्यांकन अध्ययनों का निष्कर्ष है कि इस योजना का कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, शहरीकरण और रोजगार सृजन आदि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। 

• विकास के संदर्भ में ग्रामीण संपर्क एक अनिवार्यता है। शेष बसावटों के लिए सभी मौसमों में सड़क संपर्क से इनजुड़ी हुई बसावटों की आर्थिक संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। मौजूदा ग्रामीण सड़कों के उन्नयन से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं के लिए परिवहन सेवाओं के प्रदाता के रूप में सड़क नेटवर्क की समग्र दक्षता में सुधार होगा। सड़कों के निर्माण/उन्नयन से स्थानीय जनता को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के रोजगार प्राप्त होगें। 

कार्यान्वयन की रणनीति और लक्ष्य 

• जिन परियोजनाओं के लिए समय बढ़ाने का अनुरोध किया गया है, वे पहले से ही पीएमजीएसवाई के तहत कार्यान्वयन के अधीन हैं। पीएमजीएसवाई-I और II के तहत सभी परियोजनाएं पहले ही स्वीकृत की जा चुकी हैं। मंत्रालय की ओर से आरसीपीएलडब्ल्यूईए के तहत दिसंबर, 2021 तक शेष अतिरिक्त प्रस्ताव को मंजूरी का प्रयास किया जाएगा। 

• मंत्रालय विस्तारित समय-सीमा के साथ शेष परियोजनाओं को पूरा करना सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के साथ प्रगति की लगातार निगरानी करेगा। 

पृष्ठभूमि 

• पीएमजीएसवाई-I को निर्धारित जनसंख्या (2001 की जनगणना के अनुसार मैदानी क्षेत्रों में 500 से अधिक जनसंख्या और उत्तर-पूर्व, पर्वतीय, आदिवासी और रेगिस्तानी क्षेत्रों में 250 से अधिक जनसंख्या) वाली सड़क से वंचित बसावटों के समग्र सामाजिक आर्थिक विकास के लिए को सभी मौसमों के अनुकूल सड़क संपर्क प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। सरकार ने बाद में पीएमजीएसवाई-II, आरसीपीएलडब्ल्यूईए और पीएमजीएसवाई-III नामकनई योजनाएं शुरू की।

• वर्तमान प्रस्ताव पीएमजीएसवाई-I, II और आरसीपीएलडब्ल्यूईए के लिए समय-सीमा बढ़ाने के लिए है।  •पीएमजीएसवाई-III को वर्ष 2019 में 1,25,000 किलोमीटर मौजूदा रूटों और प्रमुख ग्रामीण लिंकों के माध्यम से बसावटों के साथ-साथ ग्रामीण कृषि बाजारों, उच्चतर माध्यमिक स्कूलों और अस्पतालों को जोड़ने के लिए शुरू किया गया था औरयोजना की कार्यान्वयन अवधि मार्च, 2025 तक है।

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