प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कनाडा यात्रा ऐतिहासिक, महत्वपूर्ण, निर्णायक और यादगार रही। यह यात्रा भारत और कनाडा के बीच सहयोग को मजबूत बनाने के उद्देश्य से की गई थी। प्रधानमंत्री की यात्रा से भारत-कनाडा के संबंधों में सुधार को बल मिला है। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री कई गतिविधियाँ में शामिल रहे - कनाडा के साथ महत्वपूर्ण समझौते, टोरंटो में भारतीय समुदाय को संबोधन और प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर के साथ वैंकूवर का दौरा। कनाडा की यात्रा करने का मौका मिलने पर अपनी खुशी जताते हुए प्रधानमंत्री ने अपनी यात्रा से पहले ही ट्विटर पर अपनी खुशी व्यक्त की थी।

42 साल के लंबे अंतराल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा यह पहली द्विपक्षीय यात्रा थी! इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच साझेदारी और सहयोग को आगे बढ़ाना था। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री हार्पर ने भारत-कनाडा संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने और ठोस परिणाम प्राप्त करने के लिए व्यापक वार्ता और विचार-विमर्श किया।

कनाडा के औद्योगिक घरानों, नेताओं और राज्य के प्रमुखों के साथ हुए बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसे विकसित भारत की छवि प्रस्तुत की जो दुनिया भर में सभी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से विकास कर रहा है। उन्होंने भारत के राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकता के हर क्षेत्र में कनाडा को एक महत्वपूर्ण भागीदार बताया।

आतंकवाद, जिसने अतीत में दोनों राष्ट्रों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया, की निंदा करते हुए श्री मोदी ने व्यापक वैश्विक रणनीति और सुसंगत नीति को बढ़ावा देने तथा सभी तरह के आतंकवाद के खिलाफ़ कारवाई करने की मांग की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा के साथ भारत के रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की भी मांग की। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री हार्पर ने कनिष्क एयर इंडिया स्मारक पर 1985 में दुखद विमान दुर्घटना में मारे गए लोगों को श्रद्धाजलि दी।

दोनों देशों के बीच हुए समझौतों में व्यापार और प्रौद्योगिकी का विस्तार, सिविल परमाणु ऊर्जा सहयोग पुनः शुरू करने आदि को प्राथमिकता दी गई। कृषि, शिक्षा क्षेत्र और कौशल विकास पर भी विचार-विमर्श हुआ। कनाडा से यूरेनियम की खरीद पर हुए समझौते पर प्रधानमंत्री मोदी ने संतोष जताते हुए कनाडा को भारत में तेजी से हो रहे बदलावों के लिए आश्वस्त किया।

उत्साह से लबरेज लोग टोरंटो के रिको कोलिसियम में प्रधानमंत्री मोदी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। \ श्री नरेन्द्र मोदी के समारोह स्थल पर पहुंचते ही वहां के भारतीय समुदाय में उत्साह की एक लहर दौड़ गई। टोरंटो में दर्शकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने “भारत + कनाडा” साझेदारी को मजबूत एवं महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री हार्पर की दूरगामी सोच और नेतृत्व की सराहना करते हुए कनाडा के लोगों को हार्दिक स्वागत करने के लिए धन्यवाद दिया।

श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत-कनाडा साझेदारी साझा मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने कनाडा में भारतीयों के योगदान का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत एक युवा देश है और भारतीय युवाओं में अद्भुत क्षमता है, बस इन क्षमताओं को दिखाने के लिए अवसर उपलब्ध कराने की जरुरत है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के बारे में लोगों की धारणा बदल रही है और भारत “स्कैम इंडिया” की छवि से निकलकर “स्किल्ड इंडिया” बन रहा है।”

कनाडा दौरे के अपने अंतिम दिन गुरुद्वारा खालसा दीवान और लक्ष्मी नारायण मंदिर का दौरा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री हार्पर ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को दृढ़ बताया।

कनाडा से भारत वापस रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपार संतोष के साथ यह उम्मीद जताई कि भारत और कनाडा आने वाले समय में एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। उन्होंने यह आशा जताई कि कनाडा भारत के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक रहेगा और एक प्रमुख आर्थिक भागीदार के रूप में फिर से उभरेगा।

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पीएम मोदी के असम दौरे के कुछ यादगार पल
April 01, 2026

पीएम नरेन्द्र मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ में एक चाय बागान का दौरा किया और वहां काम करने वाली महिलाओं से बातचीत की। बागान में घूमते हुए, उन्होंने उनके साथ थोड़ी देर चाय की पत्तियां भी तोड़ीं और उनके काम को करीब से देखा।

प्रधानमंत्री की बागान श्रमिकों के साथ हुई बातचीत यादगार रही। चाय को असम की आत्मा बताते हुए प्रधानमंत्री कहा कि चाय बागान श्रमिकों का राज्य की पहचान बनाने में बड़ा योगदान है। साथ ही, उन्होंने उस क्षेत्र को मजबूत बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाई है, जिसकी पहुंच दुनिया भर के बाजारों तक है।

चाय बागान में काम करने वाली महिलाओं ने अपनी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को साझा किया। प्रधानमंत्री ने चाय बागान से जुड़े समुदायों की मेहनत और धैर्य की सराहना की और कहा कि इससे असम का गर्व और भी मजबूत हुआ है।

एक खास भावपूर्ण पल में महिलाओं ने जगत जननी मां को समर्पित एक पारंपरिक गीत भी गाया। इससे यह साफ झलकता है कि चाय बागानों में परंपराएं आज भी लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से गहराई से जुड़ी हुई हैं। यह उन लोगों के जीवन और योगदान की एक झलक भी देता है, जो असम के चाय उद्योग की रीढ़ हैं।