अप्रैल से जून 2024 तक सात चरणों में होने वाले आगामी 2024 के आम चुनावों में 140 करोड़ की आबादी के बीच लगभग 97 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं की व्यापक भागीदारी देखने की उम्मीद है। ये चुनाव भारत की आबादी के विशाल आकार को देखते हुए दुनिया की सबसे बड़ी चुनावी कवायद होगी, जिसमें मतदाता यूरोपीय संघ की कुल आबादी से अधिक हैं। करीब 1.5 लाख मतदान केंद्रों पर करीब 55 लाख इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का इस्तेमाल किया जाएगा जिन पर करीब 1.5 करोड़ मतदान अधिकारी और सुरक्षा कर्मी तैनात होंगे।

भारत द्वारा मतदान प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए टेक्नोलॉजी का लाभ उठाना एक स्वाभाविक विकल्प है क्योंकि टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल ने मतदान प्रक्रियाओं को सरल बनाया है, मैनुअल तरीकों की तुलना में एफिशिएंसी और सटीकता में सुधार हुआ है। भारत ने पिछले 25 वर्षों में संसदीय चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) का उपयोग किया है। पीएम मोदी ने बार-बार दोहराया है कि सटीकता के साथ-साथ दक्षता सुनिश्चित करने के लिए भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग आवश्यक है। पिछले दशक में प्रत्येक संसदीय चुनाव के साथ बढ़ता मतदान संसदीय प्रथाओं में जनता के बढ़ते विश्वास और लोकतंत्र के त्योहार में भाग लेने की उत्सुकता का प्रमाण है। मतदान प्रतिशत 2014 के 66.4% से बढ़कर 2019 में 67.4% हो गया है।

निस्संदेह, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग को अपनाने से चुनावों में जनता का विश्वास बढ़ा है। पारंपरिक कागजी मतपत्रों के सुरक्षा रिकॉर्ड पर EVM की तुलना में तर्कसंगत रूप से भरोसा नहीं किया जा सकता है, जहां हेरफेर के लिए कहीं अधिक गुंजाइश बनी रहती है। जब विश्वसनीयता की बात आती है, तो पेपर बैलेट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की तुलना में भी कम भरोसेमंद होते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2019 में लोकसभा चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVO) के स्थान पर पेपर बैलेट लाने की अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट के मुताबिक कोई भी सिस्टम बेदाग नहीं है। सितंबर 2022 में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की बेंच से EVM पर प्रतिबंध लगाने और पारंपरिक बैलेट पेपर वोटिंग पर वापस जाने के लिए कहा गया था। याचिका खारिज कर दी गई।

फिर भी, EVM के संचालन पर संदेह करने वाली कुछ आवाजें आई हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि आज तक कोई भी व्यक्ति समय-समय पर किसी भी भ्रम को साबित करने में सक्षम नहीं रहा है, जब भारत के चुनाव आयोग द्वारा चुनौती दी गई थी, एक स्वायत्त निकाय जो भारत में अपनी विश्वसनीयता और स्वतंत्रता के लिए जाना जाता है। यह समय में कमी, संसाधन की बचत और मानवीय त्रुटि को कम करने के संबंध में EVM उपयोगिता का दृढ़ रुख बनाए रखता है। निश्चित रूप से, EVM में किसी भी प्रकार की खराबी या टूट-फूट का मतलब यह नहीं है कि उन्हें धांधली या छेड़छाड़ के लिए खुला छोड़ दिया गया है। बल्कि, इसे एक साधारण मशीन के सुधार के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि बदले की राजनीति को बढ़ावा देने के लिए बलि का बकरा बनाया जाना चाहिए।

EVM ऑडिट योग्य हैं, और पारदर्शी, सटीक और सुरक्षित मतदान सुनिश्चित करते हैं, मानवीय त्रुटि को कम करते हैं। EVM ने व्यापक कागज की छपाई, संसाधनों के संरक्षण और लाखों पेड़ों को बचाने की आवश्यकता को काफी कम कर दिया है। EVM में दो यूनिट होती हैं: बैलेट यूनिट (BU) और कंट्रोल यूनिट (CU)। BU का उपयोग मतदाताओं द्वारा अपना वोट डालने के लिए किया जाता है, और CUका उपयोग मतदान अधिकारियों द्वारा मतदान प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। दो यूनिट एक केबल द्वारा जुड़ी हुई हैं, और बैटरी द्वारा संचालित हैं। EVM अलग-थलग, स्टैंडअलोन मशीनें हैं और इंटरनेट या किसी अन्य नेटवर्क या कनेक्टिविटी (वायरलेस या वायर्ड) से नहीं जुड़ी होती हैं जिससे बाहरी हस्तक्षेप या हैकिंग को रोका जा सके। EVM में किसी अन्य उपकरण से जोड़ने के लिए कोई बाहरी हार्डवेयर पोर्ट भी नहीं होता है। इसलिए, कोई छेड़छाड़ संभव नहीं है और रिमोट डिवाइसेज द्वारा हैकिंग की कोई संभावना नहीं है। EVM में एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम होता है, जो एन्क्रिप्टेड होता है और केवल BU से डेटा स्वीकार कर सकता है। सॉफ्टवेयर प्रोग्राम भी एक सिक्योरिटी सील द्वारा प्रोटेक्टेड है, और सील को तोड़े बिना इसमें किसी किस्म का बदलाव या छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। सॉफ्टवेयर प्रोग्राम को प्रत्येक चुनाव से पहले और बाद में एक इंडिपेंडेंट टेक्निकल कमेटी द्वारा वेरिफाइड और सर्टिफाइड भी किया जाता है। इसके अलावा, पिछले दशक में, यह अक्सर देखा जाता है कि अपनी हार के लिए बहाने की तलाश में एक हारा हुआ विपक्ष अपने निराशाजनक चुनाव नतीजों के लिए जवाबदेही से बचने के लिए EVM पर जमकर ठीकरा फोड़ता है।

देश की चुनावी प्रक्रिया का आधुनिकीकरण हुआ है। उम्मीदवार और उनके प्रतिनिधि EVM की प्रथम स्तर की जांच, randomization, कमीशनिंग, मॉक पोल, ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज और काउंटिंग से लेकर हर कदम पर शामिल होते हैं। मतदान के बाद पोलिंग एजेंट की मौजूदगी में EVM को सील कर दिया जाता है, सील पर उनके हस्ताक्षर किए जाते हैं। उम्मीदवार और उनके एजेंट मशीनों के साथ कलेक्शन सेंटर्स तक जा सकते हैं और मतगणना के दिन तक मतदान वाले EVM रखने वाले स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी कर सकते हैं। स्ट्रॉन्ग रूम उम्मीदवारों, रिटर्निंग अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में खोले जाते हैं। निरंतर सीसीटीवी कवरेज प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।

EVM को सुरक्षित रूप से स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है जिसमें डबल लॉक, सशस्त्र सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी और चुनाव के दौरान बहुत सारे सुरक्षा कर्मचारी होते हैं। हेरफेर अथवा अनधिकृत पहुंच से बचने के लिए, चुनावों से पहले, चुनाव के दौरान और बाद में EVM की हैंडलिंग और स्टोरेज के लिए कड़ी प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। ट्रांसपोर्ट वाहनों में निरंतर पुलिस सुपरविजन, जीपीएस ट्रैकिंग और वीडियो के माध्यम से निगरानी के साथ किया जाता है। मतदाता EVM से प्राप्त एक छोटी कागजी रसीद का उपयोग अपने वोट को सुरक्षित रूप से दर्ज करने से पहले पुष्टि करने के लिए कर सकते हैं जो वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल्स (VVPAT) इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM ) से प्राप्त करते हैं। EVM की निर्भरता की गारंटी इलेक्ट्रॉनिक और VVPAT काउंटिंग के बीच statistical correlation द्वारा दी जाती है। एक बार वोट डाले जाने के बाद उसे बदला या हेरफेर नहीं किया जा सकता है; एक से अधिक बार मतदान करने के प्रयासों को सिस्टम द्वारा अस्वीकार कर दिया जाता है, जो प्रत्येक वोट को साउंड सिग्नल के साथ वेरिफाई करता है।

पीएम मोदी के नेतृत्व में, 2024 एक महत्वपूर्ण वर्ष होने वाला है, जो अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में आश्चर्यजनक प्रदर्शन से समर्थित है जिसने समावेशी विकास और प्रगति को बढ़ावा दिया है। जनता हायर जीडीपी ग्रोथ, उल्लेखनीय इंफ्रास्ट्रक्चरल प्रगति, मल्टीनेशनल लूनर अभियानों, सांस्कृतिक सुधारों के लिए बढ़ती आकांक्षा, ग्रामीण विकास और इनोवेटिव गवर्नेंस पद्धतियों की साक्षी बनी है, जहां विकास को अंतिम छोर तक पहुंचाने में सफलता मिली है। वंदे भारत गाड़ियों की कुल संख्या 50 को पार कर चुकी है, जो 250 से अधिक जिलों तक पहुंच चुकी है। 27 वंदे भारत ट्रेनें विपक्ष शासित राज्यों से चल रही हैं। ऑपरेशनल एयरपोर्ट्स की संख्या 2014 में 74 से बढ़कर फरवरी 2024 तक 149 हो गई। पूर्वोत्तर क्षेत्र में 8 एयरपोर्ट्स शुरू किए गए हैं, जबकि पिछले दशक में विपक्ष शासित राज्यों में 27 एयरपोर्ट्स चालू किए गए हैं। 2014 तक भारत में वित्तीय समावेशन की स्थिति बहुत खराब थी, क्योंकि भारत में सिर्फ 50% वित्तीय समावेशन था। लेकिन पिछले 10 वर्षों में, यह बढ़कर 80% हो गया है। विश्व बैंक के अनुसार, भारत ने केवल 6 वर्षों में वित्तीय समावेशन लक्ष्य हासिल किए हैं, अन्यथा कम से कम 47 साल लग जाते।

पीएम मुद्रा, पीएम स्वनिधि और स्टैंड-अप इंडिया लोन के माध्यम से गारंटी मुक्त लोन उपलब्ध कराए जाते हैं। पीएम मुद्रा ने उद्यमियों के लिए 10 लाख रुपये की गारंटी फ्री फंडिंग सक्षम की है। पीएम मुद्रा योजना के तहत दिए गए लोन की संख्या तमिलनाडु में सबसे अधिक है, इसके बाद पश्चिम बंगाल और कर्नाटक का स्थान है। स्वच्छ भारत अभियान, जिसने पूरे भारत में 11 करोड़ से ज्यादा शौचालयों के माध्यम से गरिमा, सुरक्षा प्रदान की और सुधार किया। यह भारत के इतिहास में निर्णायक क्षण है, जहां भारत के ग्रामीण और शहरी हिस्सों में महिलाओं ने सुरक्षा प्रदान करने में मदद की है। स्कूलों में बालिकाओं की उपस्थिति और नामांकन में वृद्धि से STEM में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है।

पीएम-गरीब कल्याण अन्न योजना ने पूरे भारत में 80 करोड़ से ज्यादा परिवारों को मुफ्त खाद्यान्न तक पहुंच सुनिश्चित की है। यह दुनिया की सबसे बड़ी कल्याणकारी योजनाओं में से एक है जिसने बहुआयामी गरीबी से 24.82 करोड़ लोगों का उत्थान सुनिश्चित करने में मदद की है। भारत ने पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत में बहुआयामी गरीबी में 2013-14 में 29.17% से 2022-23 में 11.28% की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की है। विपक्ष शासित राज्यों में भी 28 करोड़ से अधिक लाभार्थी इस योजना का लाभ उठा पाए हैं।

मोदी सरकार 13 वें और 14 वें वित्त आयोगों के बीच 10 प्रतिशत अंकों की वृद्धि को देखते हुए, साझा करने योग्य केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करने से भी नहीं कतरा रही है। विभिन्न वित्त आयोगों के तहत राज्यों को विभाज्य केंद्रीय करों की शुद्ध प्राप्तियां:
○ 12वां वित्त आयोग: 30.5% (2005-2010)
○ 13वां वित्त आयोग: 32% (2010-11 से 2014-15)
○ 14वां वित्त आयोग: 42% (2015-16 से 2019-20)
○ 15वां वित्त आयोग: 41% (जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के निर्माण के कारण 1% की कमी) (2020-21 से 2025-26)

पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने देश को बड़े घोटालों, आतंकी हमलों से छुटकारा दिलाने और गरीब तथा मध्यम वर्ग के जीवन स्तर में सुधार करने के साथ-साथ दस साल के बेदाग शासन का प्रदर्शन किया है, जो एक असाधारण उपलब्धि है तथा EVM के दुरुपयोग की भ्रांति को खारिज करती है। इस बीच, चुनाव आयोग भी EVM की विश्वसनीयता प्रदर्शित करने के लिए स्वतंत्र रूप से चुनावी कवायद की पवित्रता को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
Parliament on verge of history, says PM Modi, as it readies to take up women's bills

Media Coverage

Parliament on verge of history, says PM Modi, as it readies to take up women's bills
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
प्रधानमंत्री 15 अप्रैल को कर्नाटक का दौरा करेंगे
April 14, 2026
PM to inaugurate Sri Guru Bhairavaikya Mandira at Sri Kshetra Adichunchanagiri in Mandya
Sri Guru Bhairavaikya Mandira is a memorial dedicated to Sri Sri Sri Dr. Balagangadharanatha Mahaswamiji, the 71st Pontiff of Sri Adichunchanagiri Mahasamsthana Math
PM to also jointly release the book titled “Saundarya Lahari and Shiva Mahimna Stotram” along with former Prime Minister Shri H. D. Deve Gowda ji

Prime Minister, Shri Narendra Modi will visit Karnataka on 15th April 2026. At around 11 AM, Prime Minister will inaugurate the Sri Guru Bhairavaikya Mandira at Sri Kshetra Adichunchanagiri in Mandya district. He will also address the gathering on the occasion.

During the visit, Prime Minister will also jointly release the book titled “Saundarya Lahari and Shiva Mahimna Stotram” along with former Prime Minister Shri H. D. Deve Gowda ji.

Sri Guru Bhairavaikya Mandira is a memorial dedicated to the revered seer, Sri Sri Sri Dr. Balagangadharanatha Mahaswamiji, the 71st Pontiff of Sri Adichunchanagiri Mahasamsthana Math. Constructed in the traditional Dravidian architectural style, the Mandira stands as a tribute to the life and legacy of the late seer. The Mandira is envisioned not only as a place of reverence but also as a source of inspiration for future generations.

Sri Sri Sri Dr. Balagangadharanatha Mahaswamiji was widely respected for his lifelong commitment to social service, having established numerous educational institutions and healthcare facilities. He firmly believed that service to society is the highest form of worship, and his teachings transcended barriers of caste, creed, and region, inspiring millions.