"भारतीय संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था, आध्यात्मिकता और आदर्शों, दर्शन तथा दृष्टिकोण ने सदैव ऐसी परंपराओं का पोषण किया है जो एकता, स्वीकृति और समावेश को बढ़ावा देती हैं।"
- पीएम मोदी (अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, 2023 के राष्ट्रीय उत्सव के दौरान)
हजारों वर्ष पुरानी अपनी समृद्ध सभ्यता के साथ, भारत को हमेशा एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महाशक्ति माना जाता है। जैसा कि अरबिंदो घोष ने कल्पना की थी, भारत दुनिया के लिए एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक है। इस पवित्र भूमि ने हमेशा दुनिया भर के यात्रियों को आकर्षित किया है। आज, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, देश भारत के ऐतिहासिक महत्व और सभ्यतागत लोकाचार को रेखांकित करते हुए 'विकास भी विरासत भी' की भावना के साथ उस गौरव को आगे बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री, भारत के गौरव और गरिमा को बहाल करने में जुटे हैं। वह भारत को एक विश्वमित्र की भूमिका में आगे बढ़ा रहे हैं, जो कि वह था और जो वह पुन: हो सकता है।
दशकों के बाद, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सभ्यता के महत्व के विभिन्न स्थलों के पुनर्विकास और पुनरुत्थान करने के लिए एक ठोस प्रयास किया गया है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, चार धाम परियोजना, सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण, उज्जैन महाकाल कॉरिडोर और अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर; अनुकरणीय परियोजनाएं हैं जो दुनिया की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में भारत की छवि को बढ़ाने में मदद करती हैं और इसे विरासत तथा धार्मिक सद्भाव का आनंद लेने के इच्छुक लोगों के लिए एक बेहतर गंतव्य बनाती हैं।
बौद्ध और रामायण सर्किट जैसी पहल, भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का पता लगाने अथवा श्रीराम के पदचिह्नों पर चलने के इच्छुक यात्रियों के लिए एक उत्कृष्ट अनुभव प्रदान करती है। जनकपुर (नेपाल) और अयोध्या (भारत) के बीच सीधी बस सेवा, कनेक्टिविटी को बढ़ाती है, और इस तरह के प्रयास दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्रों में सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देते हैं।
इसके अलावा, भारत ने पिछले दशक में UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में अपने प्रतिनिधित्व का काफी विस्तार किया है। केवल नौ वर्षों में दस स्थलों को जोड़ना, भारत की सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित करने और प्रदर्शित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके अलावा, 344 पुरावशेषों की सफलतापूर्वक वापसी, अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बीच अपने सांस्कृतिक खजाने की सुरक्षा के लिए सरकार के समर्पण को दर्शाती है।
एक जीवित संस्कृति के रूप में भारत तभी फल-फूल सकता है, जब हम इसका पोषण करें, इसे मजबूत करें; और यह एक जिम्मेदारी भी है जिसे हम भारतीय डायस्पोरा की अगली पीढ़ियों के साथ साझा करते हैं। मोदी सरकार ने विदेशों में भारत की संस्कृति को प्रदर्शित करने में प्रवासी भारतीयों को रचनात्मक रूप से शामिल किया है। जैसा कि पीएम मोदी कहते हैं, "वे दुनिया भर में भारत की स्पिरिट को मूर्त रूप देते हैं, एकता और विविधता की भावना को बढ़ावा देते हैं।”
पीएम मोदी का विजन ‘भारतीयता’ के लिए है, जहां प्रत्येक व्यक्ति, अपनी क्षेत्रीय पहचान से परे, ब्रांड इंडिया की प्रगति में योगदान देता है। इस विजन को मजबूत करने के लिए भारत को जानिए क्विज़ जैसी पहलें हैं, जो युवा भारतीय डायस्पोरा को अपनी जड़ों में गहराई से उतरने और अपने पूर्वजों की भूमि की बेहतर समझ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। इसी तरह, प्रवासी तीर्थ दर्शन योजना, प्रवासी भारतीयों को भारत की आध्यात्मिक और धार्मिक विरासत का अनुभव करने के लिए प्रेरित करती है।
इसके अलावा, 'One Earth, One Family, One Future' थीम के साथ भारत की G20 समिट की मेजबानी ने न केवल देश के सदियों पुराने 'वसुधैव कुटुम्बकम' लोकाचार को उजागर किया, बल्कि वैश्विक सहमति निर्माता के रूप में भारत की बढ़ती साख को भी प्रदर्शित किया, जैसा कि नई दिल्ली डिक्लेरेशन में स्पष्ट है।
दूसरी ओर, मोदी सरकार के अथक प्रयासों की बदौलत योग आज वैश्विक धरोहर बन गया है। प्रधानमंत्री मोदी के भावुक आह्वान के जवाब में, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित कर, वैश्विक स्तर पर भारत के सांस्कृतिक प्रभाव को प्रदर्शित किया।
UNGA ने अपने प्रस्ताव में योग को स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती तथा वैश्विक आबादी को इससे होने वाले फायदों के प्रति समग्र दृष्टिकोण के रूप में मान्यता दी। भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि को चिह्नित करते हुए, योग तब से एक अंतरराष्ट्रीय आंदोलन बन गया है, जो विविध गतिविधियों और कार्यक्रमों से युक्त है।
इसके अलावा, पीएम मोदी अपनी विदेशी यात्राओं के दौरान भारतीय आदिवासी कला और संस्कृति को सक्रिय रूप से बढ़ावा देते हैं। मध्य प्रदेश से गोंड पेंटिंग, तेलंगाना से बिदरी पॉट्स और गुजरात से वरली पेंटिंग जैसे उपहार वैश्विक नेताओं को भेंट करके, वह न केवल भारतीय कला रूपों की विविधता को प्रदर्शित करते हैं, बल्कि भारत के आदिवासी समुदायों की जीवंत सांस्कृतिक विरासत को भी सेलिब्रेट करते हैं।
रबीन्द्रनाथ टैगोर ने एक बार लिखा था: "भारत, ज्ञान और बुद्धि की संपत्ति का प्रतिनिधित्व करता है जो सभी के लिए है। यह भारत का दायित्व है कि वह अपनी सर्वश्रेष्ठ संस्कृति को दूसरों के लिए खुले दिल से साझा करे। साथ ही, भारत को दूसरों की अच्छी चीजों को अपनाने का भी पूरा अधिकार है।”
इस तरह के विचार से प्रेरणा लेकर और एक स्थायी विरासत को बढ़ावा देते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी समृद्ध परंपराओं को पुनर्जीवित करते हुए भारत को वैश्विक मंच पर एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है। पीएम मोदी ने विभिन्न परियोजनाओं, पहलों और राजनयिक जुड़ाव के माध्यम से भारत को एक सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक नेता के रूप में प्रदर्शित किया है। आज, जब राष्ट्र भविष्य की ओर एक रास्ता बनाते हुए अपने अतीत को फिर से गले लगा रहा है, पीएम मोदी का 'विकास भी विरासत भी' का विजन गहराई से प्रतिध्वनित होता है, जो भारत को अपनी वैश्विक साख को पुनः प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है।




