प्राचीन मंदिरों के पुनरुद्धार, कॉरिडोर और राजमार्गों के विकास तथा चार धाम यात्रा एवं ‘स्वदेश’ जैसी पहलों की शुरुआत को बारीकी से देखने पर, कोई भी सरकार की भावना और इरादे का अंदाजा लगा सकता है, जो राष्ट्र के उपेक्षित पारंपरिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और बहाली के लक्ष्यों को हासिल करने में पूरे मनोयोग से जुटी हुई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार अभूतपूर्व सांस्कृतिक पुनर्जागरण की एक नई लहर लेकर आई, जिसने न केवल पूरे देश अपने प्रभाव में ले लिया, बल्कि युवाओं और बुजुर्गों को भक्ति, आध्यात्मिकता और विश्वास की ओर भी प्रेरित किया।

2014 में सरकार ने भारत के सभ्यतागत मूल्यों को संरक्षित करने और बहाल करने की दिशा में अपना पहला कदम उठाया। पीएम मोदी ने वाराणसी के घाटों पर गंगा आरती करके अपनी यात्रा शुरू करने के बाद से पीछे मुड़कर नहीं देखा।

ऐसी असंख्य परियोजनाएं हैं जिन्हें पिछले दस वर्षों के दौरान नया रूप दिया गया है या पुनर्विकसित किया गया है। अगस्त 2020 में राम मंदिर की आधारशिला रखना हो या उज्जैन में नई सुविधाओं और निर्माण के साथ महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का उद्घाटन, पीएम मोदी हमेशा परंपराओं की पवित्रता और राष्ट्र के सभ्यतागत मूल्यों को संरक्षित करने के साथ-साथ राष्ट्र के लोगों को आस्था से जोड़ने में कामयाब रहे हैं।

केदारनाथ के साथ-साथ मोदी सरकार ने चार धाम परियोजनाओं के माध्यम से यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को जोड़ने की पहल की जिसके तहत चारों तीर्थस्थलों को जोड़ने वाली बारहमासी सड़कों का निर्माण किया गया है। एक अन्य परियोजना में, सरकार ने ऋषिकेश को कर्णप्रयाग के साथ रेलवे लाइन के माध्यम से जोड़ने की योजना बनाई है, जिसके 2025 तक चालू होने की संभावना है।

2017 में, पीएम मोदी ने कोयंबटूर में 112 फीट ऊंची आदियोगी शिव प्रतिमा का अनावरण किया और योग को सामने लाये, जिसने देश के नागरिकों को एक बेहतर और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ भारत बनाने के लिए एक साथ लाने का काम किया।

2021 में, वाराणसी में एक पुनर्निर्मित काशी विश्वनाथ धाम का उद्घाटन पीएम मोदी द्वारा किया गया था। पीएम मोदी ने सोमनाथ समुद्र तटीय पैदल पथ का भी उद्घाटन किया, और उनकी सरकार ने पुराने (जूना) सोमनाथ के मंदिर परिसर के पुनर्निर्माण की पहल की।

वर्ष 2022 में सांस्कृतिक क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां देखी गईं। 11वीं सदी के भक्ति संत रामानुजाचार्य की स्मृति में हैदराबाद में 216 फीट ऊंची स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी का अनावरण और पीएम मोदी की गुजरात के पावागढ़ पहाड़ी की यात्रा के साथ-साथ कालिका माता के पुनर्विकसित मंदिर की आधारशिला रखी गई।

हाल ही में, 2024 में, पीएम मोदी द्वारा एक और परियोजना, कामाख्या दिव्यलोक परियोजना शुरू की गई, जिसका उद्देश्य असम में पर्यटन को बढ़ावा देना है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अकेले भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मंदिरों की स्थापना की पहल की है। 2018 में, उन्होंने अबू धाबी में हिंदू मंदिर का शिलान्यास किया। एक साल बाद, उन्होंने बहरीन में 200 साल पुराने भगवान श्री कृष्ण श्रीनाथजी मंदिर के पुनरुद्धार परियोजना की शुरुआत की। प्रधानमंत्री मोदी फरवरी 2024 में अबू धाबी में एक हिंदू मंदिर, बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था के स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन करने के लिए तैयार हैं।

सनातन धर्म, पराधीनता और उपनिवेशीकरण की अवधि के दौरान भारत के लचीलेपन का आधार रहा है। प्रधानमंत्री मोदी को अक्सर सनातन धर्म के गुणों के महत्व पर चर्चा करते देखा गया है और उनकी सरकार इसके कालातीत सार और आध्यात्मिक जीवन शक्ति को संरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। भारतीय विरासत से जुड़े पवित्र स्थानों के सांस्कृतिक महत्व को संरक्षित करते हुए, सरकार समय-समय पर हमारी विरासत, परंपराओं, संस्कृति और सनातन धर्म की रक्षक साबित हुई है।

पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा किए गए जबरदस्त प्रयासों के कारण, काशी, जो कभी केवल आध्यात्मिक जागृति का केंद्र था, अब आर्थिक विकास का केंद्र बिंदु बन गया है। 2021 से पहले, काशी विश्वनाथ मंदिर लगभग 3,000 वर्ग फुट के क्षेत्र में ही सीमित था। वही मंदिर परिसर अब 500,000 वर्ग फुट में फैला है, जो मंदिर की भव्यता और निर्माण का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

दिसंबर 2021 से, जब काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ, लगभग 69 लाख लोगों ने काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन किए। हालांकि, अगले वर्ष में, यह संख्या बढ़कर 13 करोड़ हो गई। इन दो वर्षों के भीतर यहां भक्तों की आमद 20 गुना बढ़ गई है। आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि 2022 में भारत में पूजा स्थलों के आसपास की अर्थव्यवस्था में लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया, जबकि 2021 में यह 65,070 करोड़ रुपये था।

सरकार के प्रयासों के कारण वाराणसी आज पर्यटकों की संख्या में सबसे आगे है, जबकि अयोध्या, मथुरा और उज्जैन जैसे अन्य मंदिर शहर काफी पीछे चल रहे हैं। धार्मिक पर्यटन के संबंध में, पर्यटन मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़े काफी महत्व रखते हैं। 2022 में, मंदिरों से उत्पन्न सामूहिक राजस्व 1.34 लाख करोड़ रुपये था, जो 2021 में लगभग 65 हजार करोड़ रुपये से महत्वपूर्ण वृद्धि को दर्शाता है। यह 2020 में 50,136 करोड़ रुपये, 2019 में 211,661 करोड़ रुपये और 2018 में 194,881 करोड़ रुपये की तुलना में तीर्थ स्थलों से कमाई में दो गुना वृद्धि को दर्शाता है।

सरकार भारत की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने के अपने लक्ष्य में सफल रही है, जिसे पिछली सरकारों द्वारा लंबे समय तक उपेक्षित किया गया था। पीएम मोदी आशा की किरण और सांस्कृतिक जागृति के पथप्रदर्शक बन गए हैं, जिन्हें न केवल देश के लोगों द्वारा बल्कि दुनिया भर में सराहा जा रहा है।

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जल जीवन मिशन के 6 साल: हर नल से बदलती ज़िंदगी
August 14, 2025
"हर घर तक पानी पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन, एक प्रमुख डेवलपमेंट पैरामीटर बन गया है।" - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

पीढ़ियों तक, ग्रामीण भारत में सिर पर पानी के मटके ढोती महिलाओं का दृश्य रोज़मर्रा की बात थी। यह सिर्फ़ एक काम नहीं था, बल्कि एक ज़रूरत थी, जो उनके दैनिक जीवन का अहम हिस्सा थी। पानी अक्सर एक या दो मटकों में लाया जाता, जिसे पीने, खाना बनाने, सफ़ाई और कपड़े धोने इत्यादि के लिए बचा-बचाकर इस्तेमाल करना पड़ता था। यह दिनचर्या आराम, पढ़ाई या कमाई के काम के लिए बहुत कम समय छोड़ती थी, और इसका बोझ सबसे ज़्यादा महिलाओं पर पड़ता था।

2014 से पहले, पानी की कमी, जो भारत की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक थी; को न तो गंभीरता से लिया गया और न ही दूरदृष्टि के साथ हल किया गया। सुरक्षित पीने के पानी तक पहुँच बिखरी हुई थी, गाँव दूर-दराज़ के स्रोतों पर निर्भर थे, और पूरे देश में हर घर तक नल का पानी पहुँचाना असंभव-सा माना जाता था।

यह स्थिति 2019 में बदलनी शुरू हुई, जब भारत सरकार ने जल जीवन मिशन (JJM) शुरू किया। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक सक्रिय घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) पहुँचाना है। उस समय केवल 3.2 करोड़ ग्रामीण घरों में, जो कुल संख्या का महज़ 16.7% था, नल का पानी उपलब्ध था। बाकी लोग अब भी सामुदायिक स्रोतों पर निर्भर थे, जो अक्सर घर से काफी दूर होते थे।

जुलाई 2025 तक, हर घर जल कार्यक्रम के अंतर्गत प्रगति असाधारण रही है, 12.5 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को जोड़ा गया है, जिससे कुल संख्या 15.7 करोड़ से अधिक हो गई है। इस कार्यक्रम ने 200 जिलों और 2.6 लाख से अधिक गांवों में 100% नल जल कवरेज हासिल किया है, जिसमें 8 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश अब पूरी तरह से कवर किए गए हैं। लाखों लोगों के लिए, इसका मतलब न केवल घर पर पानी की पहुंच है, बल्कि समय की बचत, स्वास्थ्य में सुधार और सम्मान की बहाली है। 112 आकांक्षी जिलों में लगभग 80% नल जल कवरेज हासिल किया गया है, जो 8% से कम से उल्लेखनीय वृद्धि है। इसके अतिरिक्त, वामपंथी उग्रवाद जिलों के 59 लाख घरों में नल के कनेक्शन किए गए, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि विकास हर कोने तक पहुंचे। महत्वपूर्ण प्रगति और आगे की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय बजट 2025–26 में इस कार्यक्रम को 2028 तक बढ़ाने और बजट में वृद्धि की घोषणा की गई है।

2019 में राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किए गए जल जीवन मिशन की शुरुआत गुजरात से हुई है, जहाँ श्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री के रूप में सुजलाम सुफलाम पहल के माध्यम से इस शुष्क राज्य में पानी की कमी से निपटने के लिए काम किया था। इस प्रयास ने एक ऐसे मिशन की रूपरेखा तैयार की जिसका लक्ष्य भारत के हर ग्रामीण घर में नल का पानी पहुँचाना था।

हालाँकि पेयजल राज्य का विषय है, फिर भी भारत सरकार ने एक प्रतिबद्ध भागीदार की भूमिका निभाई है, तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करते हुए राज्यों को स्थानीय समाधानों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने का अधिकार दिया है। मिशन को पटरी पर बनाए रखने के लिए, एक मज़बूत निगरानी प्रणाली लक्ष्यीकरण के लिए आधार को जोड़ती है, परिसंपत्तियों को जियो-टैग करती है, तृतीय-पक्ष निरीक्षण करती है, और गाँव के जल प्रवाह पर नज़र रखने के लिए IoT उपकरणों का उपयोग करती है।

जल जीवन मिशन के उद्देश्य जितने पाइपों से संबंधित हैं, उतने ही लोगों से भी संबंधित हैं। वंचित और जल संकटग्रस्त क्षेत्रों को प्राथमिकता देकर, स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य केंद्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करके, और स्थानीय समुदायों को योगदान या श्रमदान के माध्यम से स्वामित्व लेने के लिए प्रोत्साहित करके, इस मिशन का उद्देश्य सुरक्षित जल को सभी की ज़िम्मेदारी बनाना है।

इसका प्रभाव सुविधा से कहीं आगे तक जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि JJM के लक्ष्यों को प्राप्त करने से प्रतिदिन 5.5 करोड़ घंटे से अधिक की बचत हो सकती है, यह समय अब शिक्षा, काम या परिवार पर खर्च किया जा सकता है। 9 करोड़ महिलाओं को अब बाहर से पानी लाने की ज़रूरत नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह भी अनुमान है कि सभी के लिए सुरक्षित जल, दस्त से होने वाली लगभग 4 लाख मौतों को रोक सकता है और स्वास्थ्य लागत में 8.2 लाख करोड़ रुपये की बचत कर सकता है। इसके अतिरिक्त, आईआईएम बैंगलोर और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, JJM ने अपने निर्माण के दौरान लगभग 3 करोड़ व्यक्ति-वर्ष का रोजगार सृजित किया है, और लगभग 25 लाख महिलाओं को फील्ड टेस्टिंग किट का उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया है।

रसोई में एक माँ का साफ़ पानी से गिलास भरते समय मिलने वाला सुकून हो, या उस स्कूल का भरोसा जहाँ बच्चे बेफ़िक्र होकर पानी पी सकते हैं; जल जीवन मिशन, ग्रामीण भारत में जीवन जीने के मायने बदल रहा है।