सुशासन: भारत की सबसे बड़ी ताकत

Published By : Admin | February 24, 2024 | 16:11 IST

भारत एक प्रो-एक्टिव गवर्नेंस को सेलिब्रेट कर रहा है। नागरिकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सरकार की प्रो-एक्टिव गवर्नेंस खुशी की बात है, क्योंकि राष्ट्र अभूतपूर्व गति से विकास का अनुभव कर रहा है। "अंत्योदय" सिद्धांतों के प्रति निष्ठा, हाशिए पर मौजूद लोगों पर फोकस से सार्वजनिक कल्याण लक्ष्यों को प्राप्त करने की प्रतिबद्धता सिर्फ पूरी नहीं हो रही है बल्कि यह तय समय से पहले हासिल हो रही है।

कुशासन के पिछले युग को बदलते हुए, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि योजनाओं का कवरेज 100% तक पहुंचे ताकि किसी भी पात्र नागरिक की अनदेखी न हो और सभी को उनका सही हिस्सा मिले। यह राष्ट्र की जड़ें कमजोर करने वाले; जातिवाद, वंशवादी शासन, तुष्टिकरण के लिए एक बड़ा झटका है।

पीएम नरेन्द्र मोदी, न्यूनतम सरकार-अधिकतम शासन सिद्धांत के प्रति संकल्पित हैं। इस सिद्धांत का उद्देश्य नौकरशाही प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना, अनावश्यक नियमों को कम करना और गवर्नेंस में दक्षता को बढ़ावा देना है। यह दृष्टिकोण एक कारोबार-अनुकूल वातावरण बनाता है, कारोबारी सुगमता को बढ़ाता है, और गवर्नेंस को नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए सुधारों पर फोकस, करके नागरिकों के लिए सर्विस डिलिवरी की समग्र गुणवत्ता में सुधार करता है।

मोदी सरकार ने एक समग्र सरकार दृष्टिकोण अपनाया है जिसमें विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और सार्वजनिक एजेंसियों के सहयोग से समयबद्ध तरीके से नागरिकों को सेवाएं प्रदान करने के लिए गतिविधियां की जाती हैं।

2015 में, PRAGATI (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) नाम से, एक मल्टीफंक्शनल, मल्टीमोडल, इंटरैक्टिव और विशिष्ट प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया था जो सामान्य नागरिक की शिकायतों को दूर करने के लिए सरकार की महत्वपूर्ण पहलों और कार्यक्रमों को इंटीग्रेट, मॉनिटर और मूल्यांकन करता है। बेमौसम बारिश और किसानों को राहत, लोक शिकायतें, परियोजना कार्यान्वयन, स्वच्छ भारत और कारोबारी सुगमता से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिनके लिए प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया गया है।

इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 21वीं सदी में कदम रखने वाले 140 करोड़ भारतीय डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया और PLI योजनाओं की आश्चर्यजनक सफलता से खुश हैं, जिससे तेज आर्थिक विकास को गति मिली है।

हाल ही में, जीवन और कारोबारी सुगमता बढ़ाने के अपने निरंतर प्रयासों के हिस्से के रूप में, सरकार ने 1,562 अनावश्यक और अप्रचलित कानूनों को निरस्त कर दिया है। कॉमर्स, कंज्यूमर प्रोटेक्शन, डेटा प्राइवेसी और बाज़ार आचरण में सुधारात्मक तथा प्रगतिशील नीतियों ने कंज्यूमर्स और कारोबार के बीच पारदर्शिता और विश्वास को बढ़ावा दिया है।

इसके अलावा, दो लाख से ज्यादा ग्राम पंचायतों को कम्प्यूटरीकृत किया गया है, जिससे ग्रामीण आबादी के बीच डिजिटल साक्षरता और कौशल विकास में वृद्धि हुई है और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासी निकायों में सुधार हुआ है। ग्राम पंचायत स्तर पर कम्प्यूटरीकरण से बुनियादी स्तर पर विभिन्न विकासात्मक कार्यक्रमों और योजनाओं की बेहतर निगरानी और मूल्यांकन संभव होता है।

2023-2024 की अवधि में, Tele-Law ने 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 766 जिलों में 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को शामिल करने के लिए अपनी पहुंच बढ़ा दी है, जिसमें 112 आकांक्षी जिले शामिल हैं। लगभग 700 वकील pre-litigation counsel की पेशकश में शामिल हैं। 30 नवंबर, 2023 तक 24 लाख से अधिक लाभार्थियों ने इस पहल के माध्यम से कानूनी सलाह और परामर्श प्राप्त किया है। यह इस तथ्य का प्रमाण है कि न्याय की पहुंच और डिलिवरी, चाहे वह ग्रामीण या शहरी क्षेत्रों में हो, सरकार द्वारा इन निरंतर प्रयासों के कारण बढ़ी है।

जम्मू-कश्मीर, जो देश के अन्य राज्यों की तुलना में अपेक्षाकृत पिछड़ स्थिति में था, को operational efficiency के लिए प्रेरित किया गया और इसने गवर्नेंस के पूरी तरह से डिजिटल मोड में बदलाव के लिए भारत का पहला केंद्र शासित प्रदेश होने का गौरव हासिल किया। National e-Services Delivery Assessment (NeSDA) रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में, सरकार लोगों के लिए परेशानी मुक्त 1050 सेवाएं ऑनलाइन प्रदान करती है। यह मध्य प्रदेश की 1,010 सेवाओं और केरल 911 ई-सेवाओं से आगे निकाल गया है। इसने आम जनता को सेवाएं प्रदान करने में पारदर्शिता, दक्षता और प्रभावशीलता बढ़ाने में थोड़े समय के भीतर जिम्मेदारी से प्रगति की है। ई-गवर्नेंस ने जम्मू और श्रीनगर सचिवालयों के एक साथ संचालन की सुविधा प्रदान की है, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 200 करोड़ रुपये की वार्षिक लागत बचत हुई है, जो पहले ‘दरबार मूव’ पर खर्च की गई थी। दरबार मूव के उन्मूलन के बाद से, ई-ऑफिस प्रणाली कुशलता से चल रही है, जिससे जम्मू-कश्मीर में तेजी से शासन सुनिश्चित हो रहा है।

राष्ट्र अब पीएम मोदी के सुर में सुर मिला रहा है, जिन्होंने कहा है,

“भारत आगे बढ़ रहा है। भारत को अपने लक्ष्यों से आगे बढ़ना है। भारत न रुकने वाला है और न थकने वाला है। अब विकसित भारत बनाना 140 करोड़ नागरिकों का दृढ़ संकल्प है। और जब नागरिकों ने यह संकल्प लिया है, तो देश का विकसित होना तय है।”

पूरी सरकारी मशीनरी ने जनता की सेवा करने और भारत को दुनिया भर में खड़ा करने के लिए अपनी ताकत और संसाधन लगाए हैं। पीएम मुद्रा, स्वनिधि, सुकन्या समृद्धि, जन धन खातों और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) जैसी विभिन्न योजनाओं के लगातार प्रचार के साथ-साथ पूरे देश में उनकी सफलता की कहानियों का प्रसार करने से जागरूकता बढ़ी है। आज देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुधारों और प्रगतिशील नीतियों के माध्यम से एक समग्र विकास देख रहा है।

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जल जीवन मिशन के 6 साल: हर नल से बदलती ज़िंदगी
August 14, 2025
"हर घर तक पानी पहुंचाने के लिए जल जीवन मिशन, एक प्रमुख डेवलपमेंट पैरामीटर बन गया है।" - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

पीढ़ियों तक, ग्रामीण भारत में सिर पर पानी के मटके ढोती महिलाओं का दृश्य रोज़मर्रा की बात थी। यह सिर्फ़ एक काम नहीं था, बल्कि एक ज़रूरत थी, जो उनके दैनिक जीवन का अहम हिस्सा थी। पानी अक्सर एक या दो मटकों में लाया जाता, जिसे पीने, खाना बनाने, सफ़ाई और कपड़े धोने इत्यादि के लिए बचा-बचाकर इस्तेमाल करना पड़ता था। यह दिनचर्या आराम, पढ़ाई या कमाई के काम के लिए बहुत कम समय छोड़ती थी, और इसका बोझ सबसे ज़्यादा महिलाओं पर पड़ता था।

2014 से पहले, पानी की कमी, जो भारत की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक थी; को न तो गंभीरता से लिया गया और न ही दूरदृष्टि के साथ हल किया गया। सुरक्षित पीने के पानी तक पहुँच बिखरी हुई थी, गाँव दूर-दराज़ के स्रोतों पर निर्भर थे, और पूरे देश में हर घर तक नल का पानी पहुँचाना असंभव-सा माना जाता था।

यह स्थिति 2019 में बदलनी शुरू हुई, जब भारत सरकार ने जल जीवन मिशन (JJM) शुरू किया। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक सक्रिय घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) पहुँचाना है। उस समय केवल 3.2 करोड़ ग्रामीण घरों में, जो कुल संख्या का महज़ 16.7% था, नल का पानी उपलब्ध था। बाकी लोग अब भी सामुदायिक स्रोतों पर निर्भर थे, जो अक्सर घर से काफी दूर होते थे।

जुलाई 2025 तक, हर घर जल कार्यक्रम के अंतर्गत प्रगति असाधारण रही है, 12.5 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को जोड़ा गया है, जिससे कुल संख्या 15.7 करोड़ से अधिक हो गई है। इस कार्यक्रम ने 200 जिलों और 2.6 लाख से अधिक गांवों में 100% नल जल कवरेज हासिल किया है, जिसमें 8 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश अब पूरी तरह से कवर किए गए हैं। लाखों लोगों के लिए, इसका मतलब न केवल घर पर पानी की पहुंच है, बल्कि समय की बचत, स्वास्थ्य में सुधार और सम्मान की बहाली है। 112 आकांक्षी जिलों में लगभग 80% नल जल कवरेज हासिल किया गया है, जो 8% से कम से उल्लेखनीय वृद्धि है। इसके अतिरिक्त, वामपंथी उग्रवाद जिलों के 59 लाख घरों में नल के कनेक्शन किए गए, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि विकास हर कोने तक पहुंचे। महत्वपूर्ण प्रगति और आगे की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय बजट 2025–26 में इस कार्यक्रम को 2028 तक बढ़ाने और बजट में वृद्धि की घोषणा की गई है।

2019 में राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किए गए जल जीवन मिशन की शुरुआत गुजरात से हुई है, जहाँ श्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री के रूप में सुजलाम सुफलाम पहल के माध्यम से इस शुष्क राज्य में पानी की कमी से निपटने के लिए काम किया था। इस प्रयास ने एक ऐसे मिशन की रूपरेखा तैयार की जिसका लक्ष्य भारत के हर ग्रामीण घर में नल का पानी पहुँचाना था।

हालाँकि पेयजल राज्य का विषय है, फिर भी भारत सरकार ने एक प्रतिबद्ध भागीदार की भूमिका निभाई है, तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करते हुए राज्यों को स्थानीय समाधानों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने का अधिकार दिया है। मिशन को पटरी पर बनाए रखने के लिए, एक मज़बूत निगरानी प्रणाली लक्ष्यीकरण के लिए आधार को जोड़ती है, परिसंपत्तियों को जियो-टैग करती है, तृतीय-पक्ष निरीक्षण करती है, और गाँव के जल प्रवाह पर नज़र रखने के लिए IoT उपकरणों का उपयोग करती है।

जल जीवन मिशन के उद्देश्य जितने पाइपों से संबंधित हैं, उतने ही लोगों से भी संबंधित हैं। वंचित और जल संकटग्रस्त क्षेत्रों को प्राथमिकता देकर, स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य केंद्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करके, और स्थानीय समुदायों को योगदान या श्रमदान के माध्यम से स्वामित्व लेने के लिए प्रोत्साहित करके, इस मिशन का उद्देश्य सुरक्षित जल को सभी की ज़िम्मेदारी बनाना है।

इसका प्रभाव सुविधा से कहीं आगे तक जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि JJM के लक्ष्यों को प्राप्त करने से प्रतिदिन 5.5 करोड़ घंटे से अधिक की बचत हो सकती है, यह समय अब शिक्षा, काम या परिवार पर खर्च किया जा सकता है। 9 करोड़ महिलाओं को अब बाहर से पानी लाने की ज़रूरत नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह भी अनुमान है कि सभी के लिए सुरक्षित जल, दस्त से होने वाली लगभग 4 लाख मौतों को रोक सकता है और स्वास्थ्य लागत में 8.2 लाख करोड़ रुपये की बचत कर सकता है। इसके अतिरिक्त, आईआईएम बैंगलोर और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, JJM ने अपने निर्माण के दौरान लगभग 3 करोड़ व्यक्ति-वर्ष का रोजगार सृजित किया है, और लगभग 25 लाख महिलाओं को फील्ड टेस्टिंग किट का उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया है।

रसोई में एक माँ का साफ़ पानी से गिलास भरते समय मिलने वाला सुकून हो, या उस स्कूल का भरोसा जहाँ बच्चे बेफ़िक्र होकर पानी पी सकते हैं; जल जीवन मिशन, ग्रामीण भारत में जीवन जीने के मायने बदल रहा है।