17 अप्रैल को, अलग-अलग क्षेत्रों के 10,000 से अधिक लोग बेंगलुरु के आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में ‘विकसित भारत एंबेसडर्स के साथ संगीत और ध्यान संध्या’ कार्यक्रम के लिए एकत्रित हुए। उपस्थित लोगों में आर्ट ऑफ लिविंग के अनुयायी, प्रशिक्षक, पेशेवर और हर उम्र के पढ़े-लिखे लोग शामिल थे।

VBA-2024 कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने लोकतंत्र में भागीदारी के महत्व से लेकर सांस्कृतिक और धार्मिक पर्वों के उत्सव तक, अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला।

इस आयोजन का मुख्य आकर्षण, एक विशिष्ट फिल्म का प्रदर्शन था, जिसमें विकसित भारत की यात्रा तथा पिछले दशक में इसके बदलावकारी प्रभाव को दर्शाया गया था।

गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गवर्नेंस के प्रति प्रतिबद्धता, धार्मिक अनुष्ठानों के पालन तथा राम मंदिर निर्माण की आकांक्षा को पूरा करने में उनके नेतृत्व की प्रशंसा की।.

गुरुदेव ने राम मंदिर निर्माण की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षा को पूरा करने में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका की सराहना की और 500 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद, भगवान श्रीराम की जन्मस्थली पर रामनवमी मनाने के भावनात्मक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने दुख जताया कि पिछली सरकारों ने इस पर ध्यान नहीं दिया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'राम मंदिर पर राजनीति' को खत्म कर, अल्प काल में ही सदियों पुराने स्वप्न को साकार कर दिया।

उन्होंने कहा, "ऐतिहासिक चुनौतियों के बावजूद, प्रधानमंत्री मोदी के दृढ़ नेतृत्व ने एक भव्य मंदिर का समयबद्ध निर्माण सुनिश्चित किया है। प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान के दौरान उनके द्वारा बारीकियों पर ध्यान दिए जाने और व्यक्तिगत प्रतिबद्धता ने, दूसरों के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।"

प्रधानमंत्री मोदी के सत्यनिष्ठ प्रयासों और धार्मिक अनुष्ठानों के कठोर पालन को देखते हुए, श्री श्री रविशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री सतही चीजों में विश्वास नहीं करते हैं और हर काम 'सच्चे मन और दृढ़ संकल्प' के साथ करते हैं।

रविशंकर ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह से पहले 11 दिनों के कठोर यम नियम का पालन किया। वह नवरात्रि के सभी नौ दिनों में उपवास भी रखते हैं। हिंदू धर्म के कड़े नियमों का कठोरता से पालन करके उन्होंने अपने उत्तराधिकारियों के लिए एक मानदंड स्थापित किया है और उन्हें प्रधानमंत्री मोदी द्वारा निर्धारित इन मानकों को पूरा करने में कड़ी मेहनत करनी होगी।"

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दस वर्षों में गवर्नेंस के ऊंचे मानदंड स्थापित किए हैं। वह रविवार को लोगों से मेल-मुलाकात नहीं करते, बल्कि देशवासियों के साथ 'मन की बात' करते हैं। वह सीमा पर जवानों के साथ दीपावली मनाते हैं। आने वाले समय में जो भी उनका उत्तराधिकारी बनेगा, उसे यह मानदंड बनाए रखना होगा।"

गुरुदेव ने प्रधानमंत्री के गवर्नेंस के ऊंचे मानकों पर टिप्पणी की और भावी नेताओं से इसी तरह के समर्पण और निष्ठा को बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के मिशन को पूरा करने के लिए, संकल्पशील नेतृत्व की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने निजी सुख-सुविधाओं के बजाय कर्तव्य को प्राथमिकता देकर भावी नेताओं के लिए मानदंड ऊंचा कर दिया है। सेना के साथ दीपावली मनाने और 'मन की बात' जैसे नियमित सार्वजनिक संबोधनों में शामिल होने की उनकी प्रतिबद्धता उच्च मानदंड स्थापित करती है, निस्वार्थ सेवा के महत्व पर जोर देती है और भगवान राम के आदर्शों को प्रतिध्वनित करती है। इससे भावी प्रधानमंत्रियों के सामने महत्वपूर्ण चुनौतियां खड़ी हो गई हैं, जिन्हें भारत के विकास को आगे बढ़ाने के लिए इन मानदंडों को बनाए रखना होगा।"

उन्होंने कहा, "विकास की राह पर अग्रसर होने के लिए हमें एकजुट होकर प्रयास करने होंगे और सकारात्मक सोच विकसित करनी होगी। जब तक आप इसके लिए उत्सुक और प्रेरित नहीं होंगे, तब तक आप विकसित भारत के एंबेसडर नहीं बन सकते। इस मिशन को हासिल करने के लिए सभी को एकजुट होकर इसमें योगदान देना चाहिए।"

श्रोताओं को संबोधित करते हुए गुरुदेव ने फर्स्ट टाइम वोटर्स से, देश के भविष्य को गढ़ने में, सक्रिय भागीदार के रूप में अपनी भूमिका को पहचानने का आह्वान किया। गुरुदेव ने उन्हें जिम्मेदारी और आशावाद की भावना के साथ मतदान करने के लिए प्रोत्साहित किया और इस बात पर जोर दिया कि हर वोट देश की प्रगति में योगदान देता है।

उन्होंने कहा, "आपको स्वयं को जीवंत लोकतंत्र के एक सक्रिय भागीदार के रूप में सोचना चाहिए और सकारात्मक सोच के साथ मतदान करना चाहिए कि आपके वोट में देश के विकास को दिशा देने की शक्ति है।"

उन्होंने फर्स्ट टाइम वोटर्स से अपील की कि वे स्थानीय मुद्दों से हतोत्साहित और भ्रमित न हों, बल्कि भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मतदान करें।

उन्होंने विकसित भारत एंबेसडर्स से कहा, "बदलाव का वाहक बनने और देश के विकास में स्टेकहोल्डर बनने के लिए, आपको अपना वोट जरूर करना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "हम सभी विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के नागरिक हैं और हमें इसे मजबूत बनाने के लिए अपना योगदान देते रहना चाहिए, भले ही आपको यह महत्वहीन लगे"

अपने संबोधन के समापन में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने भारत के विकास को विकसित भारत के रूप में सुनिश्चित करने की सामूहिक जिम्मेदारी दोहराई। कार्यक्रम, आशावाद और दृढ़ निश्चय के माहौल में संपन्न हुआ। सभी उपस्थित लोग देश की प्रगति में योगदान देने के लिए ऊर्जा से भर उठे।

 

विकसित भारत का विजन: 140 करोड़ सपने, एक उद्देश्य

विकसित भारत एंबेसडर अभियान, नागरिकों को भारत के विकास में योगदान देने की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित करता है। विकसित भारत एंबेसडर मीटिंग्स और इवेंट्स के माध्यम से नागरिक, रचनात्मक चर्चाओं में संलग्न हो सकते हैं, विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं और इस नेक काम में योगदान करने में मदद करने के लिए व्यावहारिक रणनीतियों का पता लगा सकते हैं।

NaMo App के माध्यम से विकसित भारत एंबेसडर अभियान का हिस्सा बनें:

https://www.narendramodi.in/ViksitBharatAmbassador

दूरियों को मिटाता NaMo App

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ऐप, NaMo App एक डिजिटल ब्रिज है जो नागरिकों को विकसित भारत एंबेसडर अभियान में भाग लेने के लिए सशक्त बनाता है। NaMo App नागरिकों के लिए वन-स्टॉप प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है:

उद्देश्य में भागीदार बनें: साइन अप करें और एक विकसित भारत एंबेसडर बनें तथा 10 अन्य लोगों को बनाएं।
विकास की कहानियों का प्रसार: अभियान से संबंधित अपडेट, न्यूज और रिसोर्सेज तक पहुंच।
इवेंट बनाएं/शामिल हों: लोकल कार्यक्रम, मीटअप और वॉलंटियर्स ऑपर्च्यूनिटीज बनाएं और खोजें।
कनेक्ट/नेटवर्क: समान विचारधारा वाले व्यक्तियों को खोजें और उनके साथ बातचीत करें, जो एक विकसित भारत के विजन को शेयर करते हैं।

NaMo ऐप के ‘वॉलंटियर मॉड्यूल' के 'ऑनग्राउंड टास्क' टैब में 'VBA इवेंट' सेक्शन, यूजर्स को तमाम विकसित भारत एंबेसडर इवेंट के साथ अपडेट रहने में सक्षम बनाता है।

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पीएम ने 53वीं प्रगति बैठक की अध्यक्षता की
August 25, 2026
प्रधानमंत्री कार्यालयपीएम ने रेलवे, सड़क और ऊर्जा क्षेत्र की छह अहम ढ़ांचागत परियोजनाओं की समीक्षा की
समीक्षा किए गए प्रोजेक्ट्स 9 राज्यों में फैले हैं और इनमें कुल ₹30,000 करोड़ से ज़्यादा का निवेश किया गया है
पीएम ने कहा, ढ़ांचागत परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों या पैकेज के बजाय एकीकृत प्रयास के तौर पर देखा जाना चाहिए
पीएम ने परियोजनाओं को लागू करने के सभी चरणों में लगातार सुधार और मंत्रालयों तथा राज्यों में सक्रियता से काम करने की संस्कृति पर ज़ोर दिया
पीएम ने कहा, रफ्तार के साथ-साथ गुणवत्ता भी ज़रूरी है
एग्रीस्टैक की समीक्षा करते हुए, पीएम ने कृषि डेटा से ज़्यादा फायदा उठाने के लिए एआई समेत नवीन डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया
साइबर फ्रॉड और 'डिजिटल अरेस्ट' के मामले में, पीएम ने प्रशिक्षण, जन-जागरूकता, साइबर-सुरक्षा से जुड़ी शिक्षा और आपसी तालमेल के साथ कार्रवाई करने पर ज़ोर दिया

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सक्रिय शासन और समय पर काम पूरा करने के लिए बनाए गए आईसीटी-आधारित, मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म प्रगति की 53वीं बैठक की आज सेवा तीर्थ में अध्यक्षता की।

बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने रेलवे, सड़क और ऊर्जा क्षेत्रों से जुड़ी छह प्रमुख बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हुई हैं और इनकी कुल लागत ₹30,000 करोड़ से अधिक है। संपर्क को मजबूत करने, औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के लिए महत्वपूर्ण इन परियोजनाओं की समीक्षा करते वक्त समय-सीमा का पालन, अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल, लंबित मुद्दों के समाधान और काम को तेजी से पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ढ़ांचागत परियोजनाओं में देरी से सिर्फ़ लागत ही नहीं बढ़ती, बल्कि नागरिकों, व्यवसायों और अर्थव्यवस्था को मिलने वाले लाभ भी टल जाते हैं। उन्होंने कहा कि ढ़ांचागत परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों, टुकड़ों या पैकेजों के बजाय एक एकीकृत इकाई के तौर पर देखा और उनकी निगरानी की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग पैकेजों में हो रही प्रगति का नतीजा आखिर में संपूर्ण परियोजना के वक्त पर पूरा होने और उसके चालू होने के रूप में निकलना चाहिए। इसलिए मंत्रालयों और राज्यों से कहा गया कि वे काम को शुरू से लेकर अंत तक पूरा करने का नज़रिया अपनाएं और उन अहम कमियों को दूर करें, जिनसे पूरे प्रोजेक्ट के चालू होने और फ़ायदे मिलने में देरी हो सकती है। उन्होंने मंत्रालयों और राज्य सरकारों में सक्रिय कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देने और परियोजनाओं को लागू करने के हर स्तर पर ज़्यादा ज़िम्मेदारी लेने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने खास तौर पर बड़े परिवहन और ढ़ांचागत परियोजनाओं की योजना बनाते समय, जहाँ भी संभव हो, ढ़ांचागत सेवाओं के लिए कॉमन यूटिलिटी कॉरिडोर की संभावना तलाशने पर ज़ोर दिया। उन्होंने मंत्रालयों और राज्यों से कहा कि वे योजना बनाने के चरण में ही ऐसी एकीकृत कार्यप्रणालियों पर विचार करें और उनकी तकनीकी व आर्थिक व्यवहार्यता को ध्यान में रखें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि काम को तेज़ी से पूरा करने के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मंत्रालयों, राज्यों और काम को लागू करने वाली एजेंसियों से आधुनिक तकनीकों को अपनाने और हर चरण पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने व निगरानी को मज़बूत करने का आह्वान किया।

डिजिटल कृषि मिशन के तहत एग्रीस्टैक की समीक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कृषि डेटा से ज़्यादा फ़ायदा उठाने के लिए एआई जैसी नई डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल करने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इनपुट प्लानिंग से लेकर प्रोसेसिंग तक, पूरी कृषि मूल्य श्रृंखला में डेटा इकोसिस्टम का असरदार ढंग से इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ताकि बेहतर जानकारी के आधार पर कदम उठाए जा सकें, सही लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके और डेटा के आधार पर फ़ैसले लिए जा सकें। उन्होंने एग्रीस्टैक व्यवस्था बनाने में राज्यों और केंद्र सरकार की कोशिशों की तारीफ की और किसानों के लिए बेहतर नतीजे पाने के लिए इसके इस्तेमाल को और मज़बूत करने का आह्वान किया।

साइबर धोखाधड़ी के मामलों, जिनमें डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं भी शामिल हैं, की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण, जागरूकता और शिक्षा पर लगातार ध्यान देकर ऐसे मामलों की रोकथाम को मज़बूत किया जाना चाहिए। उन्होंने लगातार और खास तौर पर बुज़ुर्गों, युवाओं और कमज़ोर वर्गों के लिए जागरूकता अभियान चलाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, ताकि उन्हें धोखाधड़ी के आम तरीकों, चेतावनी के संकेतों और सुरक्षित डिजिटल तौर-तरीकों के बारे में जानकारी दी जा सके। उन्होंने इससे जुड़े कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए नियमित ट्रेनिंग की भी बात कही, ताकि साइबर धोखाधड़ी के नए तरीकों की पहचान की जा सके और उन पर तेज़ी से कार्रवाई की जा सके।