प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) क्षेत्रीय रेलवे समझौते की पुष्टि और एक सदस्य राष्ट्र के रूप में भारत द्वारा उस पर हस्ताक्षर करने की मंजूरी दी गई।

सार्क क्षेत्र भौतिक और कम्प्यूटर सम्पर्क की दृष्टि से दुनिया के सबसे कम नेटवर्क वाले क्षेत्रों में से एक समझा जाता है। इसे महसूस करते हुए सार्क देशों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की थी कि सदस्य देशों के बीच बेहतर परिवहन ढांचा और सम्पर्क मजबूत करने के उपाय अनिवार्य हैं। सार्क सचिवालय द्वारा 2005 में कराए गए सार्क क्षेत्रीय मल्टी मॉडल परिवहन अध्ययन के आधार पर सिफारिश की गई थी कि सार्क क्षेत्र के भीतर सड़क और रेल मार्ग से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की मुक्त आवाजाही की अनुमति देने के लिए बहु-पक्षीय समझौते किए जाने चाहिए। सार्क देशों के शिखर सम्मेलन और परिवहन मंत्रियों की बैठकों में भी इसकी पुष्टि की गई थी।

तदनुरूप 2008 में सार्क देशों के लिए भारत द्वारा क्षेत्रीय रेल समझौते का प्रारूप तैयार किया गया था। उसके बाद से क्षेत्रीय रेल समझौते संबंधी विशेषज्ञ समूह की तीन बैठकों और अंतर-सरकारी परिवहन समूह (आईजीजीटी) की बैठकों में समझौते के प्रारूप पर विचार विमर्श किया गया। हस्ताक्षर करने के लिए प्रस्तावित समझौते के प्रारूप को 30 सितम्बर 2014 को नई दिल्ली में हुई आईजीजीटी की पांचवीं बैठक में अंतिम रूप दिया गया था।

सार्क क्षेत्रीय रेलवे समझौते से सार्क क्षेत्र में परिवहन सम्पर्क मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। रेल और परिवहन संचार से न केवल समूचे क्षेत्र में आर्थिक विकास को बल मिलेगा बल्कि सदस्य देशों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध बढ़ेंगे और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

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