दिल्ली के 'द अशोक' में आयोजित विकसित भारत एंबेसडर सम्मेलन में 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिसमें प्रतिष्ठित ग्लोबल यूनिवर्सिटीज के पूर्व भारतीय छात्र और उल्लेखनीय उद्यमी शामिल रहे। जन-संचालित विकसित भारत एंबेसडर के बैनर तले यह 26वां इवेंट था।

हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड, एमआईटी, व्हार्टन, ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज और आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के 200 से अधिक पूर्व छात्र VBA2024 आयोजन में अग्रणी स्टार्टअप और ओनिडा जैसी फर्मों तथा प्रमुख रियल एस्टेट उपक्रमों का प्रतिनिधित्व करने वाले उद्यमियों के साथ जुटे।

इस अवसर पर भारत सरकार के रेलवे, कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव की सम्मानित उपस्थिति में 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में भारत की यात्रा पर गहन चर्चा हुई। मंत्री वैष्णव ने उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों के बारे में बताया। पिछले दशक में, भारत की प्रगति का श्रेय पीएम मोदी के नेतृत्व में सुनियोजित योजनाओं और समर्पित कार्यान्वयन को दिया गया।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पीएम मोदी की असाधारण कार्य संस्कृति को स्वीकार किया और राष्ट्र के प्रति उनके अथक समर्पण को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "मैं एक ऐसे बॉस के साथ काम कर रहा हूं जो लगभग 24 घंटे काम करते हैं और एक भी छुट्टी नहीं लेते।”

मंत्री वैष्णव ने भारत के विकास को आगे बढ़ाने वाले चार स्तंभों पर प्रकाश डाला, जिनमें फिजिकल, डिजिटल और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर में पर्याप्त पब्लिक इंवेस्टमेंट, इंक्लूजिव डेवलपमेंट पर ध्यान, लक्ष्यों का सरलीकरण और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर शामिल है। उन्होंने रेलवे ट्रैक निर्माण और विद्युतीकरण में पर्याप्त वृद्धि को रेखांकित किया, जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का संकेत है।

इसके अलावा, मंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन और जन धन योजना जैसी पहलों पर प्रकाश डाला और देश भर में प्रभावी परिवर्तन लाने में उनकी भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने विधायी सुधारों और सरलीकरण प्रयासों के उदाहरणों का हवाला देते हुए टेलीकम्युनिकेशन और कानून जैसे क्षेत्रों में आमूलचूल बदलाव पर भी चर्चा की।

इसके अलावा, वैष्णव ने स्वदेशी उत्पादन और क्षमता निर्माण पर सरकार के जोर की सराहना की, जिसका उदाहरण मेक इन इंडिया जैसी पहल है। उन्होंने राष्ट्रीय शक्ति और गौरव को बढ़ावा देने के लिए भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनरुद्धार को महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम का समापन, उपस्थित लोगों को प्रधानमंत्री मोदी के डेवलपमेंट विजन के अनुरूप अपने-अपने क्षेत्रों में विकसित भारत की भावना को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करने के साथ हुआ। VBA2024 सम्मेलन इस प्रगति के लिए सामूहिक कार्रवाई को उत्प्रेरित करने का प्रयास करते हैं।

इस सम्मेलन के दौरान, ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन के सीईओ, अखिलेश मिश्रा ने विकसित भारत एंबेसडर बनने की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला तथा उपस्थित जनसमूह को विकसित भारत के विजन में सार्थक योगदान देने के लिए दस व्यावहारिक उपायों के बारे में बताया।

एक आयोजन के दौरान एक प्रतिभागी ने विकसित भारत विजन की विशेषता पर जोर देते हुआ कहा कि यह महत्वाकांक्षी और महत्वपूर्ण दोनों है।

विकसित भारत का विजन: 140 करोड़ सपने, एक उद्देश्य

विकसित भारत एंबेसडर अभियान, नागरिकों को भारत के विकास में योगदान देने की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित करता है। विकसित भारत एंबेसडर मीटिंग्स और इवेंट्स के माध्यम से नागरिक, रचनात्मक चर्चाओं में संलग्न हो सकते हैं, विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं और इस नेक काम में योगदान करने में मदद करने के लिए व्यावहारिक रणनीतियों का पता लगा सकते हैं।

NaMo App के माध्यम से विकसित भारत एंबेसडर अभियान का हिस्सा बनें: https://www.narendramodi.in/ViksitBharatAmbassador


दूरियों को मिटाता NaMo App

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ऐप, NaMo App एक डिजिटल ब्रिज है जो नागरिकों को विकसित भारत एंबेसडर अभियान में भाग लेने के लिए सशक्त बनाता है। NaMo App नागरिकों के लिए वन-स्टॉप प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है:

उद्देश्य में भागीदार बनें: साइन अप करें और एक विकसित भारत एंबेसडर बनें तथा 10 अन्य लोगों को बनाएं।

विकास की कहानियों का प्रसार: अभियान से संबंधित अपडेट, न्यूज और रिसोर्सेज तक पहुंच।

इवेंट बनाएं/शामिल हों: लोकल कार्यक्रम, मीटअप और वॉलंटियर्स ऑपर्च्यूनिटीज बनाएं और खोजें।

कनेक्ट/नेटवर्क: समान विचारधारा वाले व्यक्तियों को खोजें और उनके साथ बातचीत करें, जो एक विकसित भारत के विजन को शेयर करते हैं।

NaMo ऐप के ‘वॉलंटियर मॉड्यूल' के 'ऑनग्राउंड टास्क' टैब में 'VBA इवेंट' सेक्शन, यूजर्स को तमाम विकसित भारत एंबेसडर इवेंट के साथ अपडेट रहने में सक्षम बनाता है।

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पीएम ने 53वीं प्रगति बैठक की अध्यक्षता की
August 25, 2026
प्रधानमंत्री कार्यालयपीएम ने रेलवे, सड़क और ऊर्जा क्षेत्र की छह अहम ढ़ांचागत परियोजनाओं की समीक्षा की
समीक्षा किए गए प्रोजेक्ट्स 9 राज्यों में फैले हैं और इनमें कुल ₹30,000 करोड़ से ज़्यादा का निवेश किया गया है
पीएम ने कहा, ढ़ांचागत परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों या पैकेज के बजाय एकीकृत प्रयास के तौर पर देखा जाना चाहिए
पीएम ने परियोजनाओं को लागू करने के सभी चरणों में लगातार सुधार और मंत्रालयों तथा राज्यों में सक्रियता से काम करने की संस्कृति पर ज़ोर दिया
पीएम ने कहा, रफ्तार के साथ-साथ गुणवत्ता भी ज़रूरी है
एग्रीस्टैक की समीक्षा करते हुए, पीएम ने कृषि डेटा से ज़्यादा फायदा उठाने के लिए एआई समेत नवीन डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया
साइबर फ्रॉड और 'डिजिटल अरेस्ट' के मामले में, पीएम ने प्रशिक्षण, जन-जागरूकता, साइबर-सुरक्षा से जुड़ी शिक्षा और आपसी तालमेल के साथ कार्रवाई करने पर ज़ोर दिया

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सक्रिय शासन और समय पर काम पूरा करने के लिए बनाए गए आईसीटी-आधारित, मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म प्रगति की 53वीं बैठक की आज सेवा तीर्थ में अध्यक्षता की।

बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने रेलवे, सड़क और ऊर्जा क्षेत्रों से जुड़ी छह प्रमुख बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हुई हैं और इनकी कुल लागत ₹30,000 करोड़ से अधिक है। संपर्क को मजबूत करने, औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के लिए महत्वपूर्ण इन परियोजनाओं की समीक्षा करते वक्त समय-सीमा का पालन, अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल, लंबित मुद्दों के समाधान और काम को तेजी से पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ढ़ांचागत परियोजनाओं में देरी से सिर्फ़ लागत ही नहीं बढ़ती, बल्कि नागरिकों, व्यवसायों और अर्थव्यवस्था को मिलने वाले लाभ भी टल जाते हैं। उन्होंने कहा कि ढ़ांचागत परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों, टुकड़ों या पैकेजों के बजाय एक एकीकृत इकाई के तौर पर देखा और उनकी निगरानी की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग पैकेजों में हो रही प्रगति का नतीजा आखिर में संपूर्ण परियोजना के वक्त पर पूरा होने और उसके चालू होने के रूप में निकलना चाहिए। इसलिए मंत्रालयों और राज्यों से कहा गया कि वे काम को शुरू से लेकर अंत तक पूरा करने का नज़रिया अपनाएं और उन अहम कमियों को दूर करें, जिनसे पूरे प्रोजेक्ट के चालू होने और फ़ायदे मिलने में देरी हो सकती है। उन्होंने मंत्रालयों और राज्य सरकारों में सक्रिय कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देने और परियोजनाओं को लागू करने के हर स्तर पर ज़्यादा ज़िम्मेदारी लेने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने खास तौर पर बड़े परिवहन और ढ़ांचागत परियोजनाओं की योजना बनाते समय, जहाँ भी संभव हो, ढ़ांचागत सेवाओं के लिए कॉमन यूटिलिटी कॉरिडोर की संभावना तलाशने पर ज़ोर दिया। उन्होंने मंत्रालयों और राज्यों से कहा कि वे योजना बनाने के चरण में ही ऐसी एकीकृत कार्यप्रणालियों पर विचार करें और उनकी तकनीकी व आर्थिक व्यवहार्यता को ध्यान में रखें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि काम को तेज़ी से पूरा करने के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मंत्रालयों, राज्यों और काम को लागू करने वाली एजेंसियों से आधुनिक तकनीकों को अपनाने और हर चरण पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने व निगरानी को मज़बूत करने का आह्वान किया।

डिजिटल कृषि मिशन के तहत एग्रीस्टैक की समीक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कृषि डेटा से ज़्यादा फ़ायदा उठाने के लिए एआई जैसी नई डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल करने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इनपुट प्लानिंग से लेकर प्रोसेसिंग तक, पूरी कृषि मूल्य श्रृंखला में डेटा इकोसिस्टम का असरदार ढंग से इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ताकि बेहतर जानकारी के आधार पर कदम उठाए जा सकें, सही लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके और डेटा के आधार पर फ़ैसले लिए जा सकें। उन्होंने एग्रीस्टैक व्यवस्था बनाने में राज्यों और केंद्र सरकार की कोशिशों की तारीफ की और किसानों के लिए बेहतर नतीजे पाने के लिए इसके इस्तेमाल को और मज़बूत करने का आह्वान किया।

साइबर धोखाधड़ी के मामलों, जिनमें डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं भी शामिल हैं, की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण, जागरूकता और शिक्षा पर लगातार ध्यान देकर ऐसे मामलों की रोकथाम को मज़बूत किया जाना चाहिए। उन्होंने लगातार और खास तौर पर बुज़ुर्गों, युवाओं और कमज़ोर वर्गों के लिए जागरूकता अभियान चलाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, ताकि उन्हें धोखाधड़ी के आम तरीकों, चेतावनी के संकेतों और सुरक्षित डिजिटल तौर-तरीकों के बारे में जानकारी दी जा सके। उन्होंने इससे जुड़े कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए नियमित ट्रेनिंग की भी बात कही, ताकि साइबर धोखाधड़ी के नए तरीकों की पहचान की जा सके और उन पर तेज़ी से कार्रवाई की जा सके।