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हमारी सरकार का विकास का दृष्टिकोण ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूल मंत्र में दिखता है: राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी
हमारी सरकार का फोकस है - “गरीबों की उन्नति”, “किसानों की समृद्धि” और युवाओं को रोजगार”: राष्ट्रपति मुखर्जी
गरीबी और बेकसी की इस बीमारी को हटाना हमारी सबसे प्रमुख नैतिक जिम्मेदारी: राष्ट्रपति मुखर्जी
सरकार ने “खाद्य सुरक्षा”, “सभी के लिए आवास” और “सब्सिडी” पर विशेष ध्यान दिया है: राष्ट्रपति मुखर्जी
प्रधानमंत्री जन-धन योजना गरीबी उन्मूलन के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफार्म: राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी
प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत गरीबों के लाभ के लिए 2 करोड़ मकानों के निर्माण का लक्ष्य: राष्ट्रपति मुखर्जी
पहल योजना - विश्व में सबसे बड़ा प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण कार्यक्रम, लगभग 15 करोड़ लाभार्थी: राष्ट्रपति मुखर्जी
2015 में ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को रसोई गैस के सबसे ज्यादा नए कनेक्शन वितरित किये गए: राष्ट्रपति मुखर्जी
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना - फसल बीमा में सरकार का अब तक का सबसे बड़ा अंशदान, किसानों के लिए अब तक का सबसे कम प्रीमियम दर
हमारी सरकार “प्रति बूँद, अधिक फसल” और “जल सिंचाई के लिए जल संचय” के लिए प्रतिबद्ध: राष्ट्रपति मुखर्जी
2015 में यूरिया उर्वरक का अब तक का सबसे ज्यादा उत्पादन: राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी
सरकार के मेक इन इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, मुद्रा, स्किल इंडिया सहित विभिन्न पहल के माध्यम से रोजगार सृजन को बढ़ावा: राष्ट्रपति मुखर्जी
सरकार के अभिनव पहल की मदद से भारत ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ के विश्व बैंक की ताज़ा रैंकिंग में 12 पायदान ऊपर पहुंचा
सरकार के कौशल विकास मिशन को मिली गति; 76 लाख लोगों को प्रशिक्षित किया गया: राष्ट्रपति मुखर्जी
लोगों में व्यावहारिक बदलाव लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया स्वच्छ भारत मिशन एक सामुदायिक आंदोलन बनता जा रहा है: राष्ट्रपति मुखर्जी
भ्रष्टाचार के दोषियों को दंडित करने के लिए सरकार ने उठाये कड़े कदम: राष्ट्रपति मुखर्जी
सरकार के आने के बाद ऊर्जा की कमी 4 से घटकर 2.3% पर: राष्ट्रपति मुखर्जी
सरकार “वन नेशन, वन ग्रिड, वन प्राइस” के लक्ष्य की ओर अग्रसर: राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी
सरकार ने 70 से अधिक कोल ब्लॉकों की नीलामी एवं आवंटन में पारदर्शिता दिखाई: राष्ट्रपति मुखर्जी
सरकार ने 73 ठप सड़क परियोजनाओं में से ज्यादातर को फ़िर से शुरू किया, 7200 किमी राजमार्गों का निर्माण पूरा: राष्ट्रपति मुखर्जी
सरकार द्वारा राजमार्ग परियोजनाओं के तहत रिकॉर्ड 12,900 किमी राजमार्ग के निर्माण का निर्णय, अब तक का सर्वाधिक: राष्ट्रपति मुखर्जी
हमारी सरकार आम नागरिकों को डिजिटल इंडिया का लाभ उपलब्ध करवा रही है: राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी
हमारी सरकार देश की सुरक्षा संबंधी सभी चुनौतियों से मज़बूती से निपटने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध: राष्ट्रपति मुखर्जी
सरकार ने बांग्लादेश के साथ ऐतिहासिक भूमि सीमा समझौता किया: राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी
सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय सौर एलायंस की शुरुआत करके जलवायु परिवर्तन की समस्या के समाधान में एक सक्रिय भूमिका निभाई है: राष्ट्रपति मुखर्जी
लोकतंत्र का अर्थ है - चर्चा एवं विचार-विमर्श न कि व्यवधान या रुकावट: राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी

माननीय सदस्यगण,

• नवीकरण और विकास के इस बसंत के मौसम में मैं संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में आप सभी का स्वागत करता हूं। मुझे विश्वास है कि हमारे देश के नागरिकों ने हममें जो विश्‍वास व्‍यक्‍त किया है हमारे विचार-विमर्श उस विश्‍वास पर खरा उतरेंगे और आगे बढ़ते हुए हम सभी इस महान देश की प्रगति और विकास में भागीदार बनेंगे।

• पिछले वर्ष संयुक्त बैठक को संबोधित करने के दौरान मैंने भारत को आत्‍म विश्‍वास के साथ भविष्य में प्रगति की ओर अग्रसर करने के लिए अपनी सरकार द्वारा शुरू की गई दूरदर्शी पहलों को रेखांकित किया था। हमारे संविधान में एक ऐसे मजबूत और दूरंदेशी भारत की स्‍थापना का वायदा किया गया है, जिसमें अवसरों और विकास तक जनता की पहुंच हों। विकास के इस दर्शन को सबका साथ, सबका विकास में इन्‍हें मूलभूत सिद्धांत के रूप में समाहित किया गया है, जो मेरी सरकार का मार्ग दर्शन करते हैं।

• दीन दयाल उपाध्याय ने एकात्‍म मानवता दर्शन के बारे में कहा था, जिसमें अंत्योदय की परिकल्पना की गई है तथा इसमें आखिरी व्‍यक्ति तक अवसरों की सशक्‍त किरणें पहुंचती है। यह सिद्धांत मेरी सरकार का सभी कार्यक्रमों में मार्गदर्शन करता है। मेरी सरकार ने विशेष रूप से "गरीबों की उन्नति" (गरीबी उन्मूलन), "किसानों की समृद्धि" (किसान समृद्धि) और "युवाओं को रोजगार" पर ध्‍यान केंद्रित किया है।

• माननीय सदस्यगण,

• मेरी सरकार के लिए सर्वोपरि लक्ष्य गरीबी उन्मूलन है। गांधी जी ने कहा था और मैं उसे उद्धृत कर रहा हूं कि "गरीबी हिंसा का सबसे बुरा रूप है।" प्रगति का सार गरीबों, वंचितों, सीमान्‍तों और समाज के कमजोर वर्गों के लिए पूर्ति की भावना लाने में निहित है। गरीब से गरीब व्‍यक्ति भी देश के संसाधनों पर पहला अधिकार पाने का हकदार हैं। गरीबी और निर्धनता को दूर करना हमारी सबसे पवित्र नैतिक जिम्मेदारी है।

• मेरी सरकार ने वित्तीय समग्रता और सामाजिक सुरक्षा के माध्यम से इस लक्ष्‍य को संभव बनाने का वादा किया है। ये दोनों ऐसे पंख है, जिन पर मानवीय आकांक्षा उड़ान भरती है। इसके लिए मेरी सरकार ने खाद्य सुरक्षा, सभी के लिए आवास और सब्सिडी पर जोर दिया है, ताकि इनका लाभ उन लोगों तक पहुंच सकें, जिन्‍हें आवश्‍यकता पड़ने पर इनकी सबसे ज्‍यादा जरूरत होती है। पिछले साल, मैंने महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री जन-धन योजना के बारे में बात की थी। आज, मुझे यह कहने में गर्व हो रहा है कि यह विश्‍व का सबसे सफल वित्‍तीय समावेशन कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के तहत, इक्कीस करोड़ से भी अधिक खाते खोले गए हैं, जिसमें से पंद्रह करोड़ रुपए से अधिक खातें क्रियात्‍मक है और इन खातों में कुल मिलाकर बत्तीस हज़ार करोड़ रूपए से अधिक की राशि जमा है। यह कार्यक्रम न केवल बैंक खाते खोलने तक सीमित है, बल्कि गरीबों बुनियादी वित्‍तीय सेवायें और सुरक्षा प्रदान करके गरीबी उन्‍मूलन के लिए एक मंच भी बन गया है।

• सामाजिक सुरक्षा को सर्वव्यापी बनाने के लिए मेरी सरकार ने तीन नई बीमा और पेंशन योजनाओं - प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और अटल पेंशन योजना की शुरूआत की है, जो समाज के वंचित वर्गों को बीमा कवर उपलब्‍ध कराती हैं।

• सरकार 2022 तक सभी को आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री आवास योजना 25 जून, 2015 को शुरू की गई थी, जिसमें मुख्य रूप से झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों, शहरी गरीबों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और निम्न आय समूहों के लोगों के लाभ के लिए लगभग 2 करोड़ मकान बनाने का प्रावधान है। इस मिशन में आगामी पांच वर्षो के दौरान 4041 वैधानिक कस्बों को शामिल किया जाएगा। पहले वर्ष के दौरान 27 राज्यों में 2011 कस्बों/शहरों इस मिशन के अधीन शामिल किया गया है। 24,600 करोड़ रूपए की परियोजना लागत से चार लाख पच्‍चीस हजार घरों के निर्माण की मंजूरी दी गई है।

• लक्षित सब्सिडी सुनिश्चित करती है कि इसका लाभ वांछनीय व्‍यक्ति तक पहुंचे। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण को अब तक मेरी सरकार द्वारा वित्त पोषित 42 योजनाओं तक बढ़ा दिया गया है। पहल योजना विश्‍व में अपनी किस्‍म की सबसे बड़ी प्रत्‍यक्ष नकद हस्तांतरण कार्यक्रम बन गई है। इससे लगभग 15 करोड़ लोग लाभान्वित हो रहे हैं। जून 2014 के बाद से खाद्य सुरक्षा कवरेज दुगनी होकर 68 करोड़ से भी अधिक व्यक्तियों तक पहुंच गई है।

• गिव बैक कार्यक्रम के साथ अपनी मर्जी से सब्सिडी छोड़ने के अभियान से प्राप्‍त सब्सिड़ी के कारण 50 लाख बीपीएल परिवारों को नये एलपीजी कनेक्शन जारी किये गये हैं। 62 लाख से अधिक एलपीजी उपभोक्ताओं ने स्वेच्छा से इस अभियान के तहत अपनी एलपीजी सब्सिडी छोड़ दी है। 2015 के दौरान ग्रामीण गरीबों के लिए सबसे अधिक नए रसोई गैस कनेक्शन वितरित किए गए।

• डॉ अंबेडकर ने कहा था और मैं उसका उल्‍लेख कर रहा हूं कि "राजनीतिक लोकतंत्र त‍ब तक कायम नहीं हो सकता, जब तक इसके आधार पर सामाजिक लोकतंत्र निहित न हो। समग्रता के साथ सामाजिक न्‍याय हमारे संविधान का पहला वादा है और गरीब और पिछड़े लोगों के प्रति मेरी सरकार ध्यान केंद्रित कर रही हैं। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को उचित संशोधनों के द्वारा और मजबूत बनाया गया है। सामाजिक समग्रता की भावना को बढ़ावा देने के लिए पूरे देश में डॉक्‍टर भीमराव अंबेडकर की 125 वीं जयंती मनाई जा रही है। 26 नवंबर को संविधान को अपनाया गया था और अब इसे देश के नागरिकों में संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। मेरी सरकार डॉ. अंबेडकर की विरासत के पांच स्थलों पंचातिर्हास के संरक्षण के लिए काम कर रही है

• शिक्षा लोगों को सशक्‍त बनाती है और इस उद्देश्‍य के लिए मेरी सरकार ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के 50 प्रतिशत से अधिक बजट को छात्रवृत्ति धन के लिए आवंटित कर दिया है। दो नई योजनाएं - नई मंज़िल और उस्‍ताद, जिनका उद्देश्‍य अल्पसंख्यकों को सशक्त बनाना है, शुरू की गई है। वर्तमान में मदरसों में पढ़ने वाले 20,000 बच्चों को नई मंज़िल योजना के तहत कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पारसी समुदाय के जीवन इतिहास और संस्कृति को प्रदर्शित करने के लिए अगले महीने एक प्रदर्शनी अनंत लौ (एवरलास्टिंग फ्लेम) का आयोजन किया जा रहा है।

• माननीय सदस्यगण,

• "किसानों की समृद्धि", राष्‍ट्र की समृद्धि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस मौलिक वास्तविकता को स्वीकार करते हुए मेरी सरकार ने 'कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय को 'कृषि, सहकारिता और किसान कल्‍याण मंत्रालय' का नया नाम दिया गया है और इसके लिए कई कदम उठाए हैं। मेरी सरकार ने अभी हाल ही में किसानों के अनुकूल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की है, जो किसानों के लिए सबसे कम प्रीमियर दर पर फसल बीमा देने के लिए सरकार का सबसे बड़ा अंशदान है। इस योजना में पहली बार बाढ़ और बेमौसम बारिश के कारण फसल कटाई की हानियों की राष्ट्रीय कवरेज, सरकारी सब्सिडी जल्दी उपलब्‍ध कराना और कोई दावों के शीघ्र तथा सही निपटान के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग जैसी बातों को शामिल किया गया है। प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को सहायता की राशि बढ़ाकर 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है और इसके लिए पात्रता मानदंडों में छूट दी गई है।

• मार्च, 2017 तक सभी 14 करोड़ कृषि जोत के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किये जाएंगे और जिसके कारण उर्वरकों के न्‍यायसंगत प्रयोग इनपुट लागत कम करने और मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकेगा। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए, परंपरागत कृषि विकास योजना लागू की जा रही है, जिसके तहत 8000 समूहों को अब तक विकसित किया गया है।

• प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में जल उपयोग दक्षता सुधार कर और सूखारोधी बनाकर खेती का विस्‍तार करने के लिए सुनिश्चित सिंचाई का वादा किया गया है। मेरी सरकार ‘पर ड्रोप मोर क्रोप’ तथा ‘जल संचय फोर जल सिंचन" के दर्शन के लिए प्रतिबद्ध है।

• किसानों को बेहतर बाजार मूल्य उपलब्‍ध करने के लिए 585 विनियमित थोक बाजारों को आपस में जोड़ने के लिए सामान्य ई-मार्किट मंच की स्थापना के लिए एकीकृत राष्‍ट्रीय कृषि बाजार कार्य कर रहा है, जिससे भारत को एक खाद्य क्षेत्र, एक देश और एक बाजार बनाया जा सकेंगा। इससे हमारे किसानों को उचित और लाभदायक मूल्‍य मिलने से बहुत फायदा होगा। पिछले साल में लक्षित नीति हस्तक्षेपों से गन्‍ने की बकाया राशि 21,000 करोड़ रुपये से घटकर 720 करोड़ रुपये तक आ गई है।

• मेरी सरकार ने स्वदेशी उत्पादन को अधिकतम बनाने और ऊर्जा दक्षता में सुधार लाने के उद्देश्य से नई यूरिया नीति 2015 अधिसूचित की है। इस नीति से अगले तीन वर्षों के दौरान प्रति वर्ष 17 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त उत्पादन होने में मदद मिलेंगी। शत-प्रतिशत नीम कोटिड यूरिया उपलब्ध कराने से न केवल दक्षता में सुधार हुआ है, बल्कि रियायती मूल्‍य वाले यूरिया का गैर कृषि उपयोग करने की अवैध गतिविधियों को रोकने में भी मदद मिली है। देश में 2015 के दौरान सबसे अधिक यूरिया उर्वरकों का उत्पादन हुआ था।

• मेरी सरकार ने देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचाना है। भारत लगातार सबसे बड़ा दुग्‍ध उत्‍पादन देश बना हुआ है और इसकी 6.3 प्रतिशत की प्रभावशाली विकास दर है। पोल्ट्री वेंचर कैपिटल फंड और रूरल बैकयार्ड पोल्‍ट्री डेवलपमेंट के कार्यान्वयन से देश में अंडों का सबसे अधिक उत्पादन हुआ है। नील क्रांति मत्‍स्‍य पालन के लिए एकीकृत विकास और प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए विचाराधीन है, इसमें तीन हजार करोड़ रुपये का केंद्रीय परिव्यय निर्धारित किया गया है।

• पूर्वी राज्यों की कृषि क्षमता का पूरा उपयोग करने के लिए सरकार इस क्षेत्र में दूसरी हरित क्रांति की शुरूआत करने के लिए अनेक कदम उठा रही हैं। मेरी सरकार ने कृषि उच्च शिक्षा को मजबूत करने, 109 नए कृषि विज्ञान केन्द्र स्‍थापित करने और तीन नई कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थानों की स्थापना करने के लिए कदम उठाए हैं। किसानों के लाभ के लिए नीति पहल, मूल्‍यों और अन्य कृषि से संबंधित विषयों के बारे में जानकारी उपलब्‍ध कराने के लिए 24x7 किसान चैनल शुरू किया गया है।

• खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने में मदद करता है। नामित फूड पार्क के लिए सस्ता ऋण उपलब्ध कराने के लिए पिछले साल खाद्य प्रसंस्करण कोष स्‍थापित किया गया है। पिछले 19 महीनों के दौरान पांच नए मेगा फूड पार्कों में काम शुरू हो गया है। पिछले 18 महीनों में कोल्ड चेन योजना के तहत 33 परियोजनाएं चालू की गई है।

• कृषि विकास हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। 14वें वित्‍त आयोग ने 2015-16 से पांच साल की अवधि के लिए केवल ग्राम पंचायतों के लिए दी गई दो लाख करोड़ रुपये की अंशदान राशि को राज्‍यों ने बड़े उत्साह से प्राप्त किया है। इस कदम से विकास की गतिविधि जनता के करीब जाएंगी और उन्हें इस बारे में समर्थ बनाएंगी कि वे अपने गांवों और वार्डों को किस प्रकार सुधारना चाहते है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूरबन मिशन भी कौशल और स्थानीय उद्यमिता के विकास और बुनियादी ढांचे सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 300 ग्रामीण विकास समूहों के लिए शुरू किया गया है।

माननीय सदस्यगण,

• युवा हमारे देश के भविष्‍य हैं और व्‍यापक रोजगार सृजन के जरिये ‘युवाओं को रोजगार’ सुनिश्चित करना मेरी सरकार का एक प्रमुख लक्ष्‍य है। हम मेक इन इंडिया, स्‍टार्ट अप इंडिया, मुद्रा, कुशल भारत जैसी पहलों के जरिये रोजगार सृजन में तेजी ला रहे हैं।

• मेरी सरकार की अभिनव पहलों से भारत को विश्‍व बैंक की ‘कारोबार में सुगमता’ वाली नवीनतम रैंकिंग में 12 पायदान ऊपर चढ़ने में मदद मिली है। एक खास बात यह भी है कि प्रतिकूल वैश्विक निवेश माहौल के बावजूद ‘मेक इन इंडिया’ पहल ने एफडीआई के प्रवाह में 39 फीसदी बढ़ोतरी हासिल की है।

• मेरी सरकार ने ‘कारोबार में सुगमता’ बढ़ाने के लिए विभिन्‍न राज्‍यों के बीच प्रतिस्‍पर्धी सहयोग को बढ़ावा दिया है। प्रक्रिया के सरलीकरण, ई-आधारित प्रक्रिया शुरू करने और बेहतर निवेश माहौल के लिए बुनियादी ढांचागत क्षेत्र में निवेश हेतु राज्‍य सरकारों को प्रोत्‍साहित करने के साथ-साथ उनकी सहायता भी की जा रही है। मंजूरियां पाने में ज्‍यादा आसानी सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है।

• सूक्ष्म, लघु, मझोले उद्यम (एमएसएमई) बड़े पैमाने पर रोजगार मुहैया कराते हैं। बैंकों ने प्रधानमंत्री की ‘मु्द्रा योजना’ के तहत 2.6 करोड़ से भी अधिक कर्जदारों को 1 लाख करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा की राशि मुहैया कराई है, जिनमें से 2.07 करोड़ महिला उद्यमी हैं। एमएसएमई के ऑनलाइन पंजीकरण का मार्ग प्रशस्‍त करने के लिए ‘उद्योग आधार पोर्टल’ शुरू किया गया है। मेरी सरकार ने कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण आजीविका एवं प्रौद्योगिकी व्‍यवसाय इन्‍क्‍यूबेटर स्‍थापित करने का फैसला किया है।

• कपड़ा उद्योग के रोजगार गहन क्षेत्रों (सेगमेंट) को मजूबती प्रदान करने के लिए मेरी सरकार ने सात वर्षों की अवधि के दौरान तकरीबन 18000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ एक संशोधित प्रौद्योगिकी उन्‍नयन कोष योजना शुरू की है।

• रोजगार चाहने वालों को रोजगार सृजकों में तब्‍दील करने के लिए अनेक सुधार लागू किये गये हैं। मेरी सरकारी ने स्‍टार्ट-अप इंडिया अभियान शुरू किया है जो देश में अभिनव इको-सिस्‍टम को और गहरा एवं विस्‍तृत करने के साथ-साथ इसे आवश्‍यक सहायता भी प्रदान करेगा।

• महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को संशोधित किया गया है, ताकि कारगर ढंग से पारिश्रमिक के वितरण के साथ-साथ पारदर्शिता बढ़ सके और उत्‍पादक परिसंपत्तियों का सृजन हो सके।

• मेरी सरकार के ‘कुशल भारत’ संबंधी मिशन ने गति पकड़ ली है और पिछले वर्ष तकरीबन 76 लाख लोगों को प्रशिक्षित किया गया।

माननीय सदस्यगण,

• मेरी सरकार ने एक ‘शिक्षित स्‍वस्‍थ स्‍वच्‍छ भारत’ बनाने का लक्ष्‍य रखा है।

• उच्‍च शिक्षा में उत्‍कृष्‍टता के नये संस्‍थान स्‍थापित किये गये हैं। छह भारतीय प्रबंधन संस्थानों, एक भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान और एक राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान ने काम करना शुरू कर दिया है।

• स्‍वस्‍थ भारत का सर्वोत्तम तरीका खेलकूद है। मेरी सरकार ने गुवाहाटी और शिलांग में 5 फरवरी से लेकर 16 फरवरी, 2016 तक 12वें दक्षिण एशियाई खेलों का सफलतापूर्वक आयोजन किया।

• मुझे यह सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि हमने दिसम्‍बर, 2015 तक की वैश्विक लक्षित समय सीमा से काफी पहले ही सफलतापूर्वक मातृ एवं नवजात टिटनेस का सफाया कर दिया है।

• मेरी सरकार अपने स्‍वास्‍थ्‍य संस्‍थानों में बेहतर साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिये अंतर-संस्‍थान रैंकिंग प्रणाली ‘कायाकल्‍प’ से उचित लाभ उठा रही है।

• मेरी सरकार समग्र स्‍वास्‍थ्‍य सेवा, चिकित्‍सा की आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्‍सा, यूनानी और होम्‍योपैथी प्रणालियों को मजबूत बनाने पर अपना ध्‍यान केन्द्रित कर रही है। प्रथम ‘अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस’ विश्‍व भर में बड़े उत्‍साह के साथ 21 जून, 2015 को मनाया गया।

• कुपोषण की समस्‍या से निपटने के लिए मेरी सरकार विभिन्‍न मंत्रालयों के कदमों और कार्यक्रमों में तालमेल सुनिश्चित कर रही है, जिसके तहत अपेक्षित परिणाम हासिल करने पर ध्‍यान केन्द्रित किया जा रहा है।

• मेरी सरकार ने राष्‍ट्रीय स्‍तर पर सुगम्‍य भारत अभियान शुरू किया है, ताकि सामुदायिक जीवन के सभी क्षेत्रों में दिव्‍यांगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

• स्‍वच्‍छ भारत मिशन एक सामुदायिक आंदोलन का स्‍वरूप लेता जा रहा है, ताकि लोगों खासकर गरीबों के जीवन की गुणवत्ता और स्‍वास्‍थ्‍य में व्‍यापक बदलाव आ सके।

• मेरी सरकार का यह मानना है कि आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी संभव है।

• मेरी सरकार ने ‘जल क्रांति अभियान’ शुरू किया है, जिससे कि इस आम जन केन्द्रित कार्यक्रम के जरिये जल संरक्षण एवं प्रबंधन के बारे में जागरूकता बढ़ सके। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत मेरी सरकार सभी 118 शहरों में अनेक परियोजनाएं क्रियान्वित कर रही है।

माननीय सदस्यगण,

• मेरी सरकार ने शासन की गुणवत्ता में बेहतरी के लिए अनेक कदम उठाये हैं। संस्‍थानों को सुधारने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और पुराने पड़ चुके कानूनों को हटाने के लिए अनेक महत्‍वपूर्ण कदम उठाये गये हैं।

• जहां एक ओर मेरी सरकार ने भ्रष्‍टाचार की गुजांइश खत्‍म करने के लिए कदम उठाये हैं, वहीं दूसरी ओर भ्रष्‍टाचार के दोषी लोगों को दण्डित करने में मेरी सरकार कठोर रुख अख्तियार कर रही है।

• बुनियादी ढांचागत विकास को नई गति प्रदान करने से सभी लोगों के लिए अवसर प्राप्‍त हुए हैं। मेरी सरकार ने शहरों के विकास को चुनौती मानते हुए ‘स्‍मार्ट सिटी’ कार्यक्रम शुरू किया है।

• स्‍वच्‍छ ऊर्जा की उपलब्‍धता बढ़ाने के लिए मेरी सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता को वर्ष 2020 तक कई गुना बढ़ाकर 175 गीगावाट (जीडब्‍ल्‍यू) के स्‍तर पर पहुंचाने की परिकल्‍पना की है।

• सरकार के सत्ता संभालने के बाद से लेकर अब तक ऊर्जा की किल्‍लत 4 फीसदी से घटकर 2.3 फीसदी के स्‍तर पर आ गई है।

• मेरी सरकार ने पारेषण के क्षेत्र में संकुलन घटाने के लिए प्रमुख पारेषण योजनाएं शुरू करने पर अपना ध्‍यान केन्द्रित किया है।

• मेरी सरकार ने उपभोक्‍ताओं को उचित एवं प्रतिस्‍पर्धी दरों पर बिजली की उपलब्‍धता सुनिश्चित करने के लिए शुल्‍क दर नीति में महत्‍वपूर्ण सुधार किये हैं।

• मेरी सरकार ने कोयला क्षेत्र में व्‍यापक सुधार लागू किये हैं और 70 से भी ज्‍यादा कोल ब्‍लॉकों की पारदर्शी नीलामी/आवंटन किया है।

• खनन क्षेत्र को बढ़ावा देने और खनिज संसाधनों के आवंटन में पारदर्शिता लाने के लिए खान एवं खनिज विकास और नियमन अधिनियम, 1957 को संशोधित किया गया है और खदानों की नीलामी शुरू कर दी गई है।

• मेरी सरकार ने हाल ही में असम गैस क्रैकर परियोजना राष्‍ट्र को समर्पित की है। इस परियोजना से तकरीबन 1 लाख लोगों के लिए प्रत्‍यक्ष एवं परोक्ष रोजगार सृजित होने की आशा है।

माननीय सदस्यगण,

• मेरी सरकार ने रेलवे स्‍टेशनों और रेलगाडि़यों में साफ-सफाई के मानकों को बेहतर करने के लिए अनेक महत्‍वाकांक्षी उपाय किये हैं।

• जापान की सरकार के साथ हुये ऐतिहासिक समझौते के परिणामस्‍वरूप मुम्‍बई-अहमदाबाद हाई स्‍पीड रेल कॉरीडोर एक वास्‍तविकता में तब्‍दील हो जायेगी।

माननीय सदस्यगण,

• मार्च, 2019 तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 1 लाख 78 हजार ग्रामीण बस्तियों को ऐसी सड़कों से जोड़ दिया जायेगा जो हर मौसम में कारगर साबित होंगी।

माननीय सदस्यगण,

• मेरी सरकार केवल अखबारों की सुर्खियां बनने वाली आर्थिक उपलब्धियों के बजाय ‘सबका विकास’ पर अपना ध्‍यान केन्द्रित कर रही है।

माननीय सदस्यगण,

• हमारी संसद लोगों की सर्वोच्‍च इच्‍छा को दर्शाती है। लोकतांत्रिक प्रवृत्ति व्यवधान या रुकावट के बजाय बहस और चर्चा चाहती है।

• हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के ऋणी हैं। अब उनके सपनों के देश का निर्माण करते हुए यह ऋण चुकाने का समय आ गया है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के शब्दों में, ‘राष्ट्रवाद मानव जाति के उच्चतम आदर्शों सत्यम, शिवम, सुंदरम से प्रेरित है’, हमें इन आदर्शों को अपनाना चाहिए क्‍योंकि हम भविष्‍य पर अपना दांव लगाते हैं।

जय हिन्‍द

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पानी की एक-एक बूंद को बचाना, पानी की किसी भी तरह की बर्बादी को रोकना, हमारे जीवन का अभिन्न अंग बनना चाहिए : पीएम मोदी

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार !

दो दिन पहले की कुछ अद्भुत तस्वीरें, कुछ यादगार पल, अब भी मेरी आँखों के सामने हैं, इसलिए, इस बार ‘मन की बात’ की शुरुआत उन्ही पलों से करते हैं | Tokyo Olympics में भारतीय खिलाड़ियों को तिरंगा लेकर चलते देखकर मैं ही नहीं पूरा देश रोमांचित हो उठा | पूरे देश ने, जैसे, एक होकर अपने इन योद्धाओं से कहा –
विजयी भव ! विजयी भव !

जब ये खिलाड़ी भारत से गए थे, तो, मुझे इनसे गप-शप करने का, उनके बारे में जानने और देश को बताने का अवसर मिला था | ये खिलाड़ी, जीवन की अनेक चुनौतियों को पार करते हुए यहाँ पहुंचे हैं | आज उनके पास, आपके प्यार और support की ताकत है - इसलिए, आइए मिलकर अपने सभी खिलाड़ियों को अपनी शुभकामनाएँ, उनका हौसला बढ़ाएँ | Social Media पर Olympics खिलाड़ियों के support के लिए हमारा Victory Punch Campaign अब शुरू हो चुका है | आप भी अपनी टीम के साथ अपना Victory Punch share करिए India के लिए cheer करिए |

साथियो, जो देश के लिए तिरंगा उठाता है उसके सम्मान में, भावनाओं से भर जाना, स्वाभाविक ही है | देशभक्ति की ये भावना, हम सबको जोड़ती है | कल, यानि, 26 जुलाई को ‘कारगिल विजय दिवस’ भी है | कारगिल का युद्ध, भारत की सेनाओं के शौर्य और संयम का ऐसा प्रतीक है, जिसे, पूरी दुनिया ने देखा है | इस बार ये गौरवशाली दिवस भी ‘अमृत महोत्सव’ के बीच में मनाया जाएगा | इसलिए, ये, और भी खास हो जाता है | मैं चाहूँगा कि आप कारगिल की रोमांचित कर देने वाली गाथा जरुर पढ़ें, कारगिल के वीरों को हम सब नमन करें |

साथियो, इस बार 15 अगस्त को देश अपनी आज़ादी के 75वें साल में प्रवेश कर रहा है | ये हमारा बहुत बड़ा सौभाग्य है कि जिस आज़ादी के लिए देश ने सदियों का इंतजार किया, उसके 75 वर्ष होने के हम साक्षी बन रहे हैं | आपको याद होगा, आज़ादी के 75 साल मनाने के लिए, 12 मार्च को बापू के साबरमती आश्रम से ‘अमृत महोत्सव’ की शुरुआत हुई थी | इसी दिन बापू की दांडी यात्रा को भी पुनर्जीवित किया गया था, तब से, जम्मू-कश्मीर से लेकर पुडुचेरी तक, गुजरात से लेकर पूर्वोत्तर तक, देश भर में ‘अमृत महोत्सव’ से जुड़े कार्यक्रम चल रहे हैं | कई ऐसी घटनाएँ, ऐसे स्वाधीनता सेनानी, जिनका योगदान तो बहुत बड़ा है, लेकिन उतनी चर्चा नहीं हो पाई - आज लोग, उनके बारें में भी जान पा रहे हैं | अब, जैसे, मोइरांग डे को ही लीजिये ! मणिपुर का छोटा सा क़स्बा मोइरांग, कभी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की Indian National Army यानि INA का एक प्रमुख ठिकाना था | यहाँ, आज़ादी के पहले ही, INA के कर्नल शौकत मलिक जी ने झंडा फहराया था | ‘अमृत महोत्सव’ के दौरान 14 अप्रैल को उसी मोइरांग में एक बार फिर तिरंगा फहराया गया | ऐसे कितने ही स्वाधीनता सेनानी और महापुरुष हैं, जिन्हें ‘अमृत महोत्सव’ में देश याद कर रहा है | सरकार और सामाजिक संगठनों की तरफ से भी लगातार इससे जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं | ऐसा ही एक आयोजन इस बार 15 अगस्त को होने जा रहा है, ये एक प्रयास है - राष्ट्रगान से जुड़ा हुआ | सांस्कृतिक मंत्रालय की कोशिश है कि इस दिन ज्यादा-से-ज्यादा भारतवासी मिलकर राष्ट्रगान गाएँ, इसके लिए एक website भी बनाई गई है – राष्ट्रगानडॉटइन | इस website की मदद से आप राष्ट्रगान गाकर, उसे record कर पाएंगे, इस अभियान से जुड़ पाएंगे | मुझे उम्मीद है, आप, इस अनोखी पहल से जरूर जुड़ेंगे | इसी तरह के बहुत सारे अभियान, बहुत सारे प्रयास, आपको, आने वाले दिनों में देखने को मिलेंगे | ‘अमृत महोत्सव’ किसी सरकार का कार्यक्रम नहीं, किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं, यह कोटि-कोटि भारतवासियों का कार्यक्रम है | हर स्वतंत्र और कृतज्ञ भारतीय का अपने स्वतंत्रता सेनानियों को नमन है और इस महोत्सव की मूल भावना का विस्तार तो बहुत विशाल है - ये भावना है, अपने स्वाधीनता सेनानियों के मार्ग पर चलना, उनके सपनों का देश बनाना | जैसे, देश की आजादी के मतवाले, स्वतंत्रता के लिए एकजुट हो गए थे, वैसे ही, हमें, देश के विकास के लिए एकजुट होना है | हमें देश के लिए जीना है, देश के लिए काम करना है, और इसमें, छोटे- छोटे प्रयास भी बड़े नतीजे ला देते हैं | रोज के कामकाज करते हुए भी हम राष्ट्र निर्माण कर सकते हैं, जैसे, Vocal for Local | हमारे देश के स्थानीय उद्यमियों, आर्टिस्टों, शिल्पकारों, बुनकरों को support करना, हमारे सहज स्वभाव में होना चाहिए | 7 अगस्त को आने वाला National Handloom Day, एक ऐसा अवसर है जब हम प्रयास पूर्वक भी ये काम कर सकते हैं | National Handloom Day के साथ बहुत ऐतिहासिक पृष्ठभूमि जुड़ी हुई है | इसी दिन, 1905 में, स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी |

साथियो, हमारे देश के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में, Handloom, कमाई का बहुत बड़ा साधन है | ये ऐसा क्षेत्र है जिससे लाखों महिलाएं, लाखों बुनकर, लाखों शिल्पी जुड़े हुए हैं | आपके छोटे-छोटे प्रयास, बुनकरों में एक नई उम्मीद जगाएँगे | आप, स्वयं कुछ-न-कुछ खरीदें, और अपनी बात दूसरों को भी बताएं, और, जब हम आज़ादी के 75 साल मना रहे हैं, तब तो, इतना करना हमारी ज़िम्मेवारी बनती ही है भाइयो | आपने देखा होगा, साल 2014 के बाद से ही ‘मन की बात’ में हम अक्सर खादी की बात करते हैं | ये आपका ही प्रयास है, कि, आज देश में खादी की बिक्री कई गुना बढ़ गई है | क्या कोई सोच सकता था कि खादी के किसी स्टोर से एक दिन में एक करोड़ रुपए से अधिक की बिक्री हो सकती है! लेकिन, आपने, ये भी कर दिखाया है | आप जब भी कहीं पर खादी का कुछ खरीदते हैं, तो इसका लाभ, हमारे गरीब बुनकर भाइयो- बहनों को ही होता है | इसलिए, खादी खरीदना एक तरह से जन-सेवा भी है, देश-सेवा भी है | मेरा आपसे आग्रह है कि आप सभी मेरे प्यारे भाइयो-बहनों ग्रामीण इलाकों में बन रहे Handloom Products जरूर खरीदें और उसे #MyHandloomMyPride के साथ शेयर करें |

साथियो, बात जब आज़ादी के आंदोलन और खादी की हो तो पूज्य बापू का स्मरण होना स्वाभाविक है – जैसे, बापू के नेतृत्व में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ चला था, वैसे ही, आज हर देशवासी को ‘भारत जोड़ो आंदोलन’ का नेतृत्व करना है | ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपना काम ऐसे करें जो विविधताओं से हमारे भारत को जोड़ने में मददगार हो | तो आइए, हम ‘अमृत महोत्सव’ को, ये अमृत संकल्प लें, कि, देश ही हमारी सबसे बड़ी आस्था, सबसे बड़ी प्राथमिकता बना रहेगा | “Nation First, Always First”, के मंत्र के साथ ही हमें आगे बढ़ना है |

मेरे प्यारे देशवासियो, आज, मैं, ‘मन की बात’ सुन रहे मेरे युवा साथियों का विशेष आभार व्यक्त करना चाहता हूँ | अभी कुछ दिन पहले ही, MyGov की ओर से ‘मन की बात’ के श्रोताओं को लेकर एक study की गई थी | इस study में ये देखा गया कि ‘मन की बात’ के लिए सन्देश और सुझाव भेजने वालों में प्रमुखत: कौन लोग हैं | Study के बाद ये जानकारी सामने आई कि संदेश और सुझाव भेजने वालों में से करीब-करीब 75 प्रतिशत लोग, 35 वर्ष की आयु से कम के होते हैं यानि भारत की युवा शक्ति के सुझाव ‘मन की बात’ को दिशा दे रहे हैं | मैं इसे बहुत अच्छे संकेत के रूप में देखता हूँ | ‘मन की बात’ एक ऐसा माध्यम है जहाँ सकारात्मकता है – संवेदनशीलता है | ‘मन की बात’ में हम positive बातें करते हैं, इसका Character collective है | सकारात्मक विचारों और सुझावों के लिए भारत के युवाओं की ये सक्रियता मुझे आनंदित करती है | मुझे इस बात की भी खुशी है कि ‘मन की बात’ के माध्यम से मुझे युवाओं के मन को भी जानने का अवसर मिलता है |

साथियो, आप लोगों से मिले सुझाव ही ‘मन की बात’ की असली ताकत हैं | आपके सुझाव ही ‘मन की बात’ के माध्यम से भारत की विविधता को प्रकट करते हैं, भारतवासियों के सेवा और त्याग की ख़ुशबू को चारों दिशाओं में फैलाते हैं, हमारे मेहनतकश युवाओं के innovation से सब को प्रेरित करते हैं | ‘मन की बात’ में आप कई तरह के Ideas भेजते हैं | हम सभी पर तो नहीं चर्चा कर पाते हैं, लेकिन उनमें से बहुत से Ideas को मैं सम्बंधित विभागों को जरुर भेजता हूँ ताकि उन पर आगे काम किया जा सके |

साथियो, में आपको साई प्रनीथ जी के प्रयासों के बारे में बताना चाहता हूँ | साई प्रनीथ जी, एक Software Engineer हैं, आंध्र प्रदेश के रहने वाले हैं | पिछले वर्ष उन्होंने देखा कि उनके यहाँ मौसम की मार की वजह से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था | मौसम विज्ञान में उनकी दिलचस्पी बरसों से थी | इसलिए उन्होंने अपनी दिलचस्पी और अपने talent को किसानों की भलाई के लिये इस्तेमाल करने का फैसला किया | अब वे अलग-अलग Data Sources से Weather Data खरीदते हैं, उसका विश्लेषण करते हैं और स्थानीय भाषा में अलग-अलग माध्यमों से किसानों के पास जरुरी जानकारी पहुंचाते हैं | Weather updates के अलावा, प्रनीथ जी, अलग-अलग Climate conditions में लोगों को क्या करना चाहिए, guidance भी देते हैं | खासकर बाढ़ से बचने के लिए या फिर तूफ़ान या बिजली गिरने पर कैसे बचा जाए, इस बारे में भी वो लोगों को बताते हैं |

साथियो, एक ओर इस नौजवान software engineer का यह प्रयास दिल को छूने वाला है तो दूसरी ओर हमारे एक साथी के द्वारा किया जा रहा technology का उपयोग भी आपको अचंभित कर देगा | ये साथी हैं ओडिशा के संबलपुर जिले के एक गाँव में रहने वाले श्रीमान् ईसाक मुंडा जी | ईसाक जी कभी एक दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते थे लेकिन अब वे एक internet sensation बन गए हैं | अपने YouTube Channel से वो काफ़ी रुपये कमा रहे हैं | वे अपने videos में स्थानीय व्यंजन, पारंपरिक खाना बनाने के तरीके, अपने गाँव, अपनी lifestyle, परिवार और खान-पान की आदतों को प्रमुखता से दिखाते हैं | एक YouTuber के रूप में उनकी यात्रा मार्च, 2020 में शुरू हुई थी, जब उन्होंने ओडिशा के मशहूर स्थानीय व्यंजन पखाल से जुड़ा एक video post किया था | तब से वे सैकड़ों video post कर चुके हैं | उनका यह प्रयास कई कारणों से सबसे अलग है | खासकर इसलिए कि इससे शहरों में रहने वाले लोगों को वो जीवनशैली देखने का अवसर मिलता है जिसके बारे में वे बहुत कुछ नहीं जानते | ईसाक मुंडा जी culture और cuisine दोनों को बराबर मिलाकर के celebrate कर रहे हैं और हम सब को प्रेरणा भी दे रहे हैं |

साथियो, जब हम technology की चर्चा कर रहे हैं तो मैं एक और interesting विषय की चर्चा करना चाहता हूँ | आपने हाल-फिलहाल में पढ़ा होगा, देखा होगा कि IIT Madras के alumni द्वारा स्थापित एक start-up ने एक 3D printed house बनाया है | 3D printing करके घर का निर्माण, आखिर ये हुआ कैसे ? दरअसल इस start-up ने सबसे पहले 3D printer में एक, 3 Dimensional design को feed किया और फिर एक विशेष प्रकार के concrete के माध्यम से layer by layer एक 3D structure fabricate कर दिया | आपको यह जानकार खुशी होगी कि देशभर में इस प्रकार के कई प्रयोग हो रहे हैं | एक समय था जब छोटे-छोटे construction के काम में भी वर्षों लग जाते थे | लेकिन आज technology की वजह से भारत में स्थिति बदल रही है | कुछ समय पहले हमने दुनियाभर की ऐसी innovative companies को आमंत्रित करने के लिए एक Global Housing Technology Challenge launch किया था | ये देश में अपनी तरह का अलग तरह का अनोखा प्रयास है, इसलिए हमने इन्हें Light House Projects का नाम दिया | फिलहाल देश में 6 अलग-अलग जगहों पर Light House Projects पर तेजी से काम चल रहा है | इन Light House Projects में Modern Technology और Innovative तौर-तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है | इससे constructions का time कम हो जाता है | साथ ही, जो घर बनते हैं वो अधिक टिकाऊ, किफायती और आरामदायक होते हैं | मैंने हाल ही में drones के जरिए इन projects की समीक्षा भी की और कार्य की प्रगति को live देखा |
इंदौर के project में Brick और Mortar Walls की जगह Pre-Fabricated Sandwich Panel System का इस्तेमाल किया जा रहा है | राजकोट में Light House, French Technology से बनाए जा रहे हैं, जिनमें Tunnel के जरिए Monolithic Concrete construction technology का इस्तेमाल हो रहा है | इस technology से बने घर आपदाओं का सामना करने में कहीं अधिक सक्षम होंगे | Chennai में, America और Finland की technologies, Pre-Cast Concrete System का उपयोग किया जा रहा है | इससे मकान जल्दी भी बनेंगे और लागत भी कम आएगी | Ranchi में Germany के 3D Construction System का प्रयोग करके घर बनाए जाएंगे | इसमें हर कमरे को अलग से बनाया जाएगा, फिर पूरे structure को उसी तरह जोड़ा जाएगा, जैसे block toys को जोड़ा जाता है | अगरतला में New Zealand की technology का उपयोग कर steel frame के साथ मकान बनाए जा रहे हैं, जो बड़े भूकंप को झेल सकते हैं | वहीं लखनऊ में Canada की technology का इस्तेमाल किया जा रहा है | इसमें plaster और paint की जरुरत नहीं होगी और तेजी से घर बनाने के लिए पहले से ही तैयार दीवारों का प्रयोग किया जाएगा |

साथियो, आज देश में ये प्रयास हो रहा है कि ये project Incubation Centres की तरह काम करें | इससे हमारे Planners, Architects, Engineers और Students नई technology को जान सकेंगे और उसका Experiment भी कर पायेंगे | मैं इन बातों को खास तौर पर अपने युवाओं के लिए साझा कर रहा हूँ ताकि हमारे युवा राष्ट्रहित में technology के नए-नए क्षेत्रों की ओर प्रोत्साहित हो सकें |

मेरे प्यारे देशवासियो, आपने अंग्रेजी की एक कहावत सुनी होगी – “To Learn is to Grow” यानि सीखना ही आगे बढ़ना है | जब हम कुछ नया सीखते हैं, तो हमारे लिए प्रगति के नए-नए रास्ते खुद-ब-खुद खुल जाते हैं | जब भी कहीं League से हटकर कुछ नया करने का प्रयास हुआ है, मानवता के लिए नए द्वार खुले हैं, एक नए युग का आरंभ हुआ है | और आपने देखा होगा जब कहीं कुछ नया होता है तो उसका परिणाम हर किसी को आश्चर्यचकित कर देता है | अब जैसे कि अगर मैं आपसे पूछूँ कि वो कौन से राज्य हैं, जिन्हें आप सेब, Apple के साथ जोडेंगे ? तो जाहिर है कि आपके मन में सबसे पहले हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड का नाम आएगा | पर अगर मैं कहूँ कि इस list में आप मणिपुर को भी जोड़ दीजिये तो शायद आप आश्चर्य से भर जाएंगे | कुछ नया करने के जज़्बे से भरे युवाओं ने मणिपुर में ये कारनामा कर दिखाया है | आजकल मणिपुर के उखरुल जिले में, सेब की खेती जोर पकड़ रही है | यहाँ के किसान अपने बागानों में सेब उगा रहे हैं | सेब उगाने के लिए इन लोगों ने बाकायदा हिमाचल जाकर training भी ली है | इन्हीं में से एक हैं टी एस रिंगफामी योंग (T.S. Ringphami Young) | ये पेशे से एक Aeronautical Engineer हैं | उन्होंने अपनी पत्नी श्रीमती टी.एस. एंजेल (T.S. Angel) के साथ मिलकर सेब की पैदावार की है | इसी तरह, अवुन्गशी शिमरे ऑगस्टीना (Avungshee Shimre Augasteena) ने भी अपने बागान में सेब का उत्पादन किया है | अवुन्गशी दिल्ली में job करती थीं | ये छोड़ कर वो अपने गाँव लौट गईं और सेब की खेती शुरू की | मणिपुर में आज ऐसे कई Apple Growers हैं, जिन्होंने कुछ अलग और नया करके दिखाया है |

साथियो, हमारे आदिवासी समुदाय में, बेर बहुत लोकप्रिय रहा है | आदिवासी समुदायोँ के लोग हमेशा से बेर की खेती करते रहे हैं | लेकिन COVID-19 महामारी के बाद इसकी खेती विशेष रूप से बढ़ती जा रही है | त्रिपुरा के उनाकोटी (Unakoti) के ऐसे ही 32 साल के मेरे युवा साथी हैं बिक्रमजीत चकमा | उन्होंने बेर की खेती की शुरुआत कर काफ़ी मुनाफ़ा भी कमाया है और अब वो लोगों को बेर की खेती करने के लिए प्रेरित भी कर रहे है | राज्य सरकार भी ऐसे लोगों की मदद के लिए आगे आई है | सरकार द्वारा इसके लिए कई विशेष nursery बनाई गई हैं ताकि बेर की खेती से जुड़े लोगों की माँग पूरी की जा सके | खेती में innovation हो रहे हैं तो खेती के by products में भी creativity देखने को मिल रही है |

साथियो, मुझे उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में किए गए एक प्रयास के बारे में भी पता चला है | COVID के दौरान ही लखीमपुर खीरी में एक अनोखी पहल हुई है | वहाँ महिलाओं को केले के बेकार तनों से fibre बनाने की training देने का काम शुरू किया गया | Waste में से best करने का मार्ग | केले के तने को काटकर मशीन की मदद से banana fibre तैयार किया जाता है जो जूट या सन की तरह होता है | इस fibre से handbag, चटाई, दरी, कितनी ही चीजें बनाई जाती हैं | इससे एक तो फसल के कचरे का इस्तेमाल शुरू हो गया, वहीँ दूसरी तरफ गाँव में रहने वाली हमारी बहनों-बेटियों को आय का एक और साधन मिल गया | Banana fibre के इस काम से एक स्थानीय महिला को चार सौ से छह सौ रुपये प्रतिदिन की कमाई हो जाती है | लखीमपुर खीरी में सैकड़ों एकड़ जमीन पर केले की खेती होती है | केले की फसल के बाद आम तौर पर किसानों को इसके तने को फेंकने के लिए अलग से खर्च करना पड़ता था | अब उनके ये पैसे भी बच जाते है यानि आम के आम, गुठलियों के दाम ये कहावत यहाँ बिल्कुल सटीक बैठती है |
साथियो, एक ओर banana fibre से products बनाये जा रहे हैं वहीँ दूसरी तरफ केले के आटे से डोसा और गुलाब जामुन जैसे स्वादिष्ट व्यंजन भी बन रहे हैं | कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ और दक्षिण कन्नड़ जिलों में महिलाएं यह अनूठा कार्य कर रही हैं | ये शुरुआत भी कोरोना काल में ही हुई है | इन महिलाओं ने न सिर्फ केले के आटे से डोसा, गुलाब जामुन जैसी चीजें बनाई बल्कि इनकी तस्वीरों को social media पर share भी किया है | जब ज्यादा लोगों को केले के आटे के बारे में पता चला तो उसकी demand भी बढ़ी और इन महिलाओं की आमदनी भी | लखीमपुर खीरी की तरह यहाँ भी इस innovative idea को महिलाएं ही lead कर रही हैं |
साथियो, ऐसे उदाहरण जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा बन जाते हैं | आप के आस-पास भी ऐसे अनेक लोग होंगे | जब आपका परिवार मन की बातें कर रहा हो तो आप इन्हें भी अपनी गप-शप का हिस्सा बनाइये | कभी समय निकलकर बच्चों के साथ ऐसे प्रयासों को देखने भी जाइए और अवसर मिल जाये तो खुद भी ऐसा कुछ कर दिखाइए | और हाँ, यह सब आप मेरे साथ NamoApp या MyGov पर साझा करेंगे तो मुझे और अच्छा लगेगा |
मेरे प्यारे देशवासियो, हमारे संस्कृत ग्रंथों में एक श्लोक है –
आत्मार्थम् जीव लोके अस्मिन्, को न जीवति मानवः |
परम् परोपकारार्थम्, यो जीवति स जीवति ||

अर्थात् अपने लिए तो संसार में हर कोई जीता है | लेकिन वास्तव में वही व्यक्ति जीता है जो परोपकार के लिए जीता है | भारत माँ के बेटे-बेटियों के परोपकारिक प्रयासों की बातें – यही तो ‘मन की बात’ है | आज भी ऐसे ही कुछ और साथियों के बारे में हम बात करते हैं | एक साथी चंडीगढ़ शहर के हैं | चंडीगढ़ में, मैं भी, कुछ वर्षों तक रह चुका हूँ | यह बहुत खुशमिजाज और खुबसूरत शहर है | यहाँ रहने वाले लोग भी दिलदार हैं और हाँ, अगर आप खाने के शौक़ीन हो, तो यहाँ आपको और आनंद आएगा | इसी चंडीगढ़ के सेक्टर 29 में संजय राणा जी, Food Stall चलाते हैं और साईकिल पर छोले-भटूरे बेचते हैं | एक दिन उनकी बेटी रिद्धिमा और भतीजी रिया एक idea के साथ उनके पास आई | दोनों ने उनसे COVID Vaccine लगवाने वालों को free में छोले–भटूरे खिलाने को कहा | वे इसके लिए खुशी-खुशी तैयार हो गए, उन्होंने, तुरंत ये अच्छा और नेक प्रयास शुरू भी कर दिया | संजय राणा जी के छोले-भटूरे मुफ़्त में खाने के लिए आपको दिखाना पड़ेगा कि आपने उसी दिन vaccine लगवाई है | Vaccine का message दिखाते ही वे आपको स्वादिष्ट छोले–भटूरे दे देंगे | कहते हैं, समाज की भलाई के काम के लिए पैसे से ज्यादा, सेवा भाव, कर्तव्य भाव की ज्यादा आवश्यकता होती है | हमारे संजय भाई, इसी को सही साबित कर रहे हैं |
साथियो, ऐसे ही एक और काम कि चर्चा आज करना चाहूँगा | ये काम हो रहा है तमिलनाडु के नीलगिरी में | वहाँ राधिका शास्त्री जी ने AmbuRx (एम्बुरेक्स) Project की शुरुआत की है | इस project का मकसद है, पहाड़ी इलाकों में मरीजों को इलाज के लिए आसान transport उपलब्ध कराना | राधिका कून्नूर में एक Cafe चलाती हैं | उन्होंने अपने Cafe के साथियों से AmbuRx के लिए fund जुटाया | नीलगिरी पहाड़ियों पर आज 6 AmbuRx सेवारत हैं और दूरदराज़ के हिस्सों में emergency के समय मरीजों के काम आ रही हैं | एम्बुरेक्स में Stretcher, Oxygen Cylinder, First Aid Box जैसी कई चीजों की व्यवस्था है |

साथियो, संजय जी हों या राधिका जी इनके उदाहरणों से पता चलता है कि हम अपना कार्य, अपना व्यवसाय, नौकरी करते-करते भी सेवा के कार्य कर सकते हैं |

साथियो, कुछ दिन पहले एक बहुत ही interesting और बहुत ही emotional event हुआ, जिससे भारत-जॉर्जिया मैत्री को नई मजबूती मिली | इस समारोह में भारत ने सेंट क्वीन केटेवान (Saint Queen Ketevan) के होली रेलिक (Holy Relic) यानि उनके पवित्र स्मृति चिन्ह जॉर्जिया की सरकार और वहाँ की जनता को सौंपा, इसके लिए हमारे विदेश मंत्री स्वयं वहाँ गए थे | बहुत ही भावुक माहौल में हुए इस समारोह में, जॉर्जिया के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, अनेक धर्म गुरु, और बड़ी संख्या में जॉर्जिया के लोग, उपस्थित थे | इस कार्यकम में भारत की प्रशंसा में जो शब्द कहे गए, वो बहुत ही यादगार हैं | इस एक समारोह ने दोनों देशों के साथ ही, गोवा और जॉर्जिया के बीच के संबंधों को भी और प्रगाढ़ कर दिया है | ऐसा इसलिए, क्योंकि सेंट क्वीन केटेवान (Saint Queen Ketevan) के ये पवित्र अवशेष 2005 में गोवा के Saint Augustine Church से मिले थे |

साथियो, आपके मन में सवाल होगा कि ये सब क्या है, ये कब और कैसे हुआ ? दरअसल, ये आज से चार सौ- पांच सौ साल पहले की बात है | क्वीन केटेवान जॉर्जिया के राजपरिवार की बेटी थीं | दस साल के कारावास के बाद 1624 में वो शहीद हो गई थीं | एक प्राचीन पुर्तगाली दस्तावेज के मुताबिक Saint Queen Ketevan की अस्थियों को Old Goa के Saint Augustine Convent में रखा गया था | लेकिन, लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि गोवा में दफनाए गए उनके अवशेष 1930 के भूकंप में गायब हो गए थे |

भारत सरकार और जॉर्जिया के इतिहासकारों, Researchers, Archaeologists और जॉर्जियन चर्च के दशकों के अथक प्रयासों के बाद 2005 में उन पवित्र अवशेषों को खोजने में सफलता मिली थी | यह विषय जॉर्जिया के लोगों के लिए बहुत ही भावनात्मक है | इसीलिए उनके Historical, Religious और Spiritual sentiments को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने इन अवशेषों का एक अंश जॉर्जिया के लोगों को भेंट में देने का निर्णय लिया | भारत और जॉर्जिया के साझे इतिहास के इस अनूठे पक्ष को संजोए रखने के लिए मैं आज गोवा के लोगों को हृदय से धन्यवाद देना चाहूँगा | गोवा कई महान आध्यात्मिक धरोहरों की भूमि रही है | Saint Augustine Church, UNESCO की World Heritage Site – Churches and Convents of Goa का एक हिस्सा है |

मेरे प्यारे देशवासियो, जॉर्जिया से अब मैं आपको सीधे सिंगापुर लेकर चलता हूँ, जहाँ इस महीने की शुरुआत में एक और गौरवशाली अवसर सामने आया | सिंगापुर के प्रधानमंत्री और मेरे मित्र, ली सेन लुंग (Lee Hsien Loong) ने हाल ही में Renovate किए गए सिलाट रोड गुरुद्वारा का उद्घाटन किया | उन्होंने पारंपरिक सिख पगड़ी भी पहनी थी | यह गुरुद्वारा लगभग सौ साल पहले बना था और यहाँ भाई महाराज सिंह को समर्पित एक स्मारक भी है | भाई महाराज सिंह जी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी थी और ये पल आज़ादी के 75 साल मना रहे हैं तब और अधिक प्रेरक बन जाता है | दो देशों के बीच, People to People Connect, उसे, मजबूती, ऐसी ही बातों, ऐसे ही प्रयासों से, मिलती है | इनसे यह भी पता चलता है कि सौहार्दपूर्ण माहौल में रहने और एक-दूसरे की संस्कृति को समझने का कितना महत्व है |

मेरे प्यारे देशवासियो, आज ‘मन की बात’ में हमने अनेक विषयों की चर्चा की | एक और विषय है जो मेरे दिल के बहुत करीब है | ये विषय है, जल संरक्षण का | मेरा बचपन जहाँ गुजरा, वहाँ पानी की हमेशा से किल्लत रहती थी | हम लोग बारिश के लिए तरसते थे और इसलिए पानी की एक-एक बूँद बचाना हमारे संस्कारों का हिस्सा रहा है | अब “जन भागीदारी से जल संरक्षण” इस मंत्र ने वहाँ की तस्वीर बदल दी है | पानी की एक-एक बूँद को बचाना, पानी की किसी भी प्रकार की बर्बादी को रोकना यह हमारी जीवन शैली का एक सहज हिस्सा बन जाना चाहिए | हमारे परिवारों की ऐसी परंपरा बन जानी चाहिए, जिससे हर एक सदस्य को गर्व हो |

साथियो, प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा भारत के सांस्कृतिक जीवन में, हमारे दैनिक जीवन में, रचा बसा हुआ है | वहीं, बारिश और मानसून हमेशा से हमारे विचारों, हमारी philosophy और हमारी सभ्यता को आकार देते आए हैं | ऋतुसंहार और मेघदूत में महाकवि कालिदास ने वर्षा को लेकर बहुत ही सुंदर वर्णन किया है | साहित्य प्रेमियों के बीच ये कवितायें आज भी बेहद लोकप्रिय हैं | ऋग्वेद के पर्जन्य सुक्तम में भी वर्षा के सौन्दर्य का खूबसूरती से वर्णन है | इसी तरह, श्रीमद् भागवत में भी काव्यात्मक रूप से पृथ्वी, सूर्य और वर्षा के बीच के संबंधों को विस्तार दिया गया है |

अष्टौ मासान् निपीतं यद्, भूम्याः च, ओद-मयम् वसु |

स्वगोभिः मोक्तुम् आरेभे, पर्जन्यः काल आगते ||

अर्थात- सूर्य ने आठ महीने तक जल के रूप में पृथ्वी की संपदा का दोहन किया था, अब मानसून के मौसम में, सूर्य, इस संचित संपदा को पृथ्वी को वापिस लौटा रहा है | वाकई, मानसून और बारिश का मौसम सिर्फ खूबसूरत और सुहाना ही नहीं होता बल्कि यह पोषण देने वाला, जीवन देने वाला भी होता है | वर्षा का पानी जो हमें मिल रहा है वो हमारी भावी पीढ़ियों के लिए है, ये हमें कभी भूलना नहीं चाहिए |

आज मेरे मन में ये विचार आया कि क्यों न इन रोचक सन्दर्भों के साथ ही मैं अपनी बात समाप्त करूँ | आप सभी को आने वाले पर्वों की बहुत-बहुत शुभकामनाएं | पर्व और उत्सवों के समय, ये जरुर याद रखिएगा कि कोरोना अभी हमारे बीच से गया नहीं है | कोरोना से जुड़े protocols आपको भूलने नहीं है | आप स्वस्थ और प्रसन्न रहें|

बहुत-बहुत धन्यवाद!