प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में आत्मनिर्भर भारत को बहुत महत्व दिया। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना वैश्विक महामारी के बीच 130 करोड़ भारतीयों ने संकल्प लिया- संकल्प आत्मनिर्भर बनने का और आत्मनिर्भर भारत आज हर हिन्दुस्तानी के मन-मस्तिष्क पर छाया हुआ है। आत्मनिर्भर भारत- ये सपना संकल्प में परिवर्तित होते देख रहे हैं। आत्मनिर्भर भारत- ये एक प्रकार से शब्द नहीं, ये आज 130 करोड़ देशवासियों के लिए मंत्र बन गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि भारत यह उपलब्धि हासिल करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत प्रत्येक भारतीय की अपार क्षमता, युवाओं के संकल्प और भारतीय महिलाओं की अतुलनीय क्षमता के परिणामस्वरूप आत्मनिर्भर बन जाएगा।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत के चिन्तन में, भारत जैसे विशाल देश, भारत युवा शक्ति से भरा हुआ देश। आत्मनिर्भर भारत की पहली शर्त होती है - आत्मविश्वास से भरा हुआ भारत, उसकी यही नींव होती है और यही विकास को नई गति, नई ऊर्जा देने का सामर्थ्य रखती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ‘विश्व एक परिवार’ के संस्कारों से पला-बढा हुआ है। अगर वेद कहते थे- ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ तो विनोबा जी कहते थे- ‘जय जगत’ और इसलिए हमारे लिए विश्व एक परिवार है और इसलिए आर्थिक विकास भी हो, लेकिन साथ-साथ मानव और मानवता का भी केंद्र स्थान होना चाहिए, इसका महत्व होना चाहिए, उसी को ले करके हम चलते है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह तभी संभव है जब हम अपनी जड़ों को मजबूत करेंगे।
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में अथाह प्राकृतिक संपदा है, क्या कुछ नहीं है। आज समय की मांग है कि हमारे इन प्राकृतिक संसाधनों में हम मूल्य संवर्धन करें, हम अपनी मानव संपदा में मूल्यवृद्धि करें, नई ऊंचाइयों पर ले जाएं। हम देश से कब तक कच्चा माल विदेश भेजते रहेंगे कच्चे माल कब तक दुनिया में भेजते रहेंगे, और देखिए तो कच्चे माल दुनिया में भेजना और तैयार माल दुनिया से वापस लाना, ये खेल कब तक चलेगा और इसलिए हमें आत्मनिर्भर बनाना होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हम जब आत्मनिर्भर की बात करते है तब सिर्फ आयात कम करना इतनी ही हमारी सोच नही है। जब आत्मनिर्भर की बात करते है तब हमारा ये जो कौशल, है हमारा जो मानव संसाधन का सामर्थ्य है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं इस बात को मानता हूं कि आत्मनिर्भर भारत के लिए लाखों चुनौतियां हैं और जब विश्व स्पर्धा के मोड में हो, तो चुनौतियां बढ़ भी जाती हैं। लेकिन देश के सामने अगर लाखों चुनौतियां हैं, तो देश के पास करोड़ों समाधान देने वाली शक्ति भी है मेरे देशवासी भी हैं जो समाधान का सामर्थ्य देते हैं।


