भारत का मध्यम वर्ग, जिसे लंबे समय से देश की आर्थिक आकांक्षाओं की रीढ़ माना जाता रहा है, एक परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। पिछले एक दशक में, टैक्सेशन, हेल्थकेयर, एजुकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर में लक्षित नीतिगत हस्तक्षेपों ने न केवल वित्तीय बोझ को कम किया है, बल्कि अभूतपूर्व अवसर भी खोले हैं। भारत की 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के विज़न के वास्तुकार के रूप में, यह डेमोग्राफिक अब इनोवेशन, कंजम्पशन और न्यायसंगत ग्रोथ को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। आइए देखें कि कैसे सिस्टमैटिक रिफॉर्म उनके भविष्य को फिर से लिख रहे हैं।

टैक्सेशन से बचने से सेविंग की ओर कदम

एक दशक पहले, ₹12 लाख की वार्षिक आय का मतलब था ₹1.95 लाख करों से अलग होना। आज, नई व्यवस्था के तहत वही आय पूरी तरह से कर-मुक्त है - एक ऐसा कदम जिसने मध्यम वर्ग के परिवारों को सालाना ₹80,000-₹2.4 लाख वापस दिए हैं। सरलीकृत कर संरचना और फेसलेस असेसमेंट के साथ इस राजकोषीय मुक्ति ने 2014 से करदाताओं के आधार को 65% तक बढ़ा दिया है, जिसमें 7.28 करोड़ भारतीय अब सरकारी खजाने में योगदान दे रहे हैं। युवा पेशेवर इस बदलाव का नेतृत्व कर रहे हैं, क्योंकि 18-35 वर्ष की आयु के 3.2 करोड़ करदाता डिजिटल फाइलिंग टूल अपना रहे हैं।

इसके प्रभाव बहुत गहरे हैं। अत्यधिक कर देनदारियों से मुक्त होकर, परिवार अपनी बचत को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और निवेश की ओर मोड़ रहे हैं। भारत की आबादी में मध्यम वर्ग की हिस्सेदारी 2004-05 में 14% से बढ़कर आज 36% हो गई है, जिससे आर्थिक गति के उत्प्रेरक के रूप में उनकी भूमिका और मजबूत हुई है।

पीएम आयुष्मान भारत- समावेशी स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण

पीढ़ियों से, जेब से स्वास्थ्य सेवा खर्च ने मध्यम वर्ग की बचत को खत्म कर दिया है। अब स्थिति बदल गई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय अब निजी व्यय से आगे निकल गया है, जो पीएम मोदी की आयुष्मान भारत योजना के कारण संभव हुआ है, जिसके तहत 73 करोड़ नागरिकों को मुफ्त स्वास्थ्य बीमा दिया जा रहा है। 2 लाख से ज़्यादा आयुष्मान आरोग्य मंदिर किफ़ायती निदान प्रदान करते हैं, जबकि 13,822 जन औषधि केंद्र 50-90% छूट पर दवाइयाँ देते हैं, जिससे 2014 से अब तक परिवारों को ₹30,000 करोड़ की बचत हुई है।

भविष्य और भी उज्जवल दिखाई देता है। 4.5 करोड़ परिवारों और 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को ₹5 लाख कवरेज योजनाओं के तहत बीमा किया गया है, और 200 नए कैंसर देखभाल केंद्र पाइपलाइन में हैं, मध्यम वर्ग वित्तीय संकट की तुलना में निवारक देखभाल को प्राथमिकता दे सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन हब यह सुनिश्चित करते हैं कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा अब केवल शहरी विशेषाधिकार नहीं रह गई है।

एजुकेशन: ग्लोबल वर्कफोर्स तैयार करना

भारत के शिक्षा परिदृश्य में एक मौन क्रांति आई है। 2014 से मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर लगभग दोगुनी होकर 706 हो गई है, जिसमें अकेले 2025 में 10,000 नई सीटें जोड़ी जाएंगी। एम्स जैसे प्रमुख संस्थान अब 23 शहरों में हैं, जबकि 2014 में इनकी संख्या 7 थी, जबकि 46 भारतीय विश्वविद्यालय वैश्विक रैंकिंग में शामिल हैं - जो 2014 से पांच गुना अधिक है।

भविष्य के कौशल पर ध्यान देना स्पष्ट है। पीएम रिसर्च फेलोशिप एआई और अक्षय ऊर्जा अनुसंधान में 10,000 विद्वानों का समर्थन करती है, जबकि 50,000 अटल टिंकरिंग लैब्स स्कूल स्तर के इनोवेटर्स को बढ़ावा देती हैं। ये पहल वैश्विक नौकरी बाजारों के साथ संरेखित हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि भारत के युवा न केवल रोजगार योग्य हैं बल्कि उभरते क्षेत्रों में अग्रणी हैं।

टेक्नोलॉजी: पहुंच का लोकतंत्रीकरण, जीवन को सशक्त बनाना

1 जीबी मोबाइल डेटा की कीमत - जो कभी ₹260 की लग्जरी थी - गिरकर ₹10.10 हो गई है, जिससे 94.9 करोड़ ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं के लिए डिजिटल विभाजन कम हो गया है। आधार के 1,470 करोड़ ई-केवाईसी लेनदेन और डिजिलॉकर के 776 करोड़ डिजिटल दस्तावेजों ने शासन को सुव्यवस्थित किया है, जिससे नौकरशाही की लालफीताशाही खत्म हो गई है। यूपीआई का दबदबा और फास्टैग के 8 करोड़ उपयोगकर्ता दिखाते हैं कि कैसे तकनीक रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बना रही है, चाहे वह टोल भुगतान हो या 11.31 करोड़ डिजिटल जीवन प्रमाणपत्रों के जरिए पेंशन की सुविधा।

मध्यम वर्ग के लिए, यह डिजिटल छलांग दक्षता में तब्दील हो जाती है। पहले से भरे हुए टैक्स फॉर्म, RERA के तहत कागज रहित संपत्ति पंजीकरण और स्मार्ट सिटी मिशन के तहत AI-संचालित शहरी नियोजन से परेशानियाँ कम हो रही हैं और उत्पादकता बढ़ रही है।

इंफ्रास्ट्रक्चर: भविष्य के शहरों का निर्माण

शहरी भारत का कायापलट हो रहा है। ₹1 लाख करोड़ का अर्बन चैलेंज फंड शहरों को हरियाली से भरपूर जगहों, पैदल चलने वालों के लिए रास्ते और पानी की बचत करने वाली प्रणालियों से पुनर्जीवित कर रहा है। मेट्रो नेटवर्क, जो अब 23 शहरों में 1,000 किलोमीटर तक फैला हुआ है, निर्बाध आवागमन की सुविधा प्रदान करता है, जबकि 136 वंदे भारत ट्रेनें और 4,174 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट सतत विकास पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

आवास, जो कभी दूर का सपना था, अब पहुंच में है। PMAY और ₹15,000 करोड़ SWAMIH फंड के तहत बनाए गए 4.21 करोड़ से ज़्यादा घर शहरी अभावों को दूर कर रहे हैं, जबकि RERA की पारदर्शिता खरीदारों की सुरक्षा करती है। ग्रामीण भारत भी पीछे नहीं है—जल जीवन मिशन के तहत 79.77% घरों में अब नल से पानी पहुँच रहा है, जो 2019 में 17% था।

वित्तीय सुरक्षा और ग्रीन एनर्जी- सस्टेनेबिलिटी के स्तंभ

अटल पेंशन योजना (7.33 करोड़ नामांकित) और मुद्रा ऋण (₹32.36 लाख करोड़ वितरित) जैसी योजनाएं वित्तीय सुदृढ़ता मजबूत कर रही हैं। साथ ही, छत पर सौर ऊर्जा लगाने से बिजली के बिल में कमी आ रही है, जिससे 1 करोड़ घरों को सालाना ₹75,000 करोड़ की बचत होगी। मध्यम वर्ग अब केवल उपभोक्ता नहीं रह गया है, बल्कि भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन में एक हितधारक बन गया है।

विकसित भारत का मार्ग - मध्यम वर्ग के नेतृत्व में क्रांति

महंगाई, जो कभी 8.7% पर बनी रहने वाली चिंता थी, अब घटकर 5.5% के संतुलित स्तर पर आ गई है, जिससे खरीदारों की क्षमता बढ़ी है। जैसे-जैसे भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है, मध्यम वर्ग इस प्रगति के केंद्र में है। उनकी बढ़ती आय, टेक्नोलॉजी अपनाने की क्षमता और बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता से मांग और इनोवेशन का एक सकारात्मक चक्र बन रहा है।

2030 तक, यह डेमोग्राफिक न केवल भारत की आर्थिक कहानी को आकार देगी बल्कि समावेशी विकास की वैश्विक धारणा को भी फिर से परिभाषित करेगी। सक्षम मध्यम वर्ग से विकसित भारत तक की यात्रा शुरू हो चुकी है - और यह अपरिवर्तनीय है।

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यह नया भारत है, जो अपने विकास के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ता: पीएम मोदी
March 23, 2026
Today, India is moving forward with a new confidence; Now India faces challenges head-on: PM
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This is the new India, It is leaving no stone unturned for development: PM

नमस्कार!

पिछले कुछ समय में मुझे एक-दो बार टीवी9 भारतवर्ष देखने का मौका मिला है। नॉर्मली भी युद्धों और मिसाइलों पर आपका बहुत फोकस होता है और आजकल तो आपको कंटेंट की ओवरफीडिंग हो रही है। बड़े-बड़े देश टीवी9 को इतना सारा कंटेंट देने पर तुले हुए हैं, लेकिन On a Serious Note, आज विश्व जिन गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहा है, वो अभूतपूर्व है और बेहद गंभीर है। और इन स्थितियों के बीच, आज टीवी-9 नेटवर्क ने विचारों का एक बेहद महत्वपूर्ण मंच बनाया है। आज इस समिट में आप सभी India and the world, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। मैं आप सबको बधाई देता हूं। इस समिट के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं। सभी अतिथियों का अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

आज जब दुनिया, conflicts के कारण उलझी हुई है, जब इन conflicts के दुष्प्रभाव पूरी दुनिया पर दिख रहे हैं, तब India and the world की बात करना बहुत ही प्रासंगिक है। भारत आज वो देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। 2014 के पहले की स्थितियों को पीछे छोड़कर के आज भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब भारत चुनौतियों को टालता नहीं है बल्कि चुनौतियों से टकराता है। आप बीते 5-6 साल में देखिए, कोरोना की महामारी के बाद चुनौतियां एक के बाद एक बढ़ती ही गई हैं। ऐसा कोई साल नहीं है, जिसने भारत की, भारतीयों की परीक्षा न ली हो। लेकिन 140 करोड़ देशवासियों के एकजुट प्रयास से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है। इस समय युद्ध की परिस्थितियों में भी भारत की नीति और रणनीति देखकर, भारत का सामर्थ्य देखकर दुनिया के अनेकों देश हैरान हैं। हमारे यहां कहावत है, सांच को आंच नहीं। 28 फरवरी से दुनिया में जो उथल-पुथल मची है, इन कठोर विपरीत परिस्थितियों में भी भारत प्रगति के, विकास के, विश्वास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इन 23 दिनों में भारत ने अपनी Relationship Building Capacity दिखाई है, Decision Making Capacity दिखाई है और Crisis Management Capacity दिखाई है।

साथियों,

आज जब दुनिया इतने सारे खेमों में बंटी हुई है, भारत ने अभूतपूर्व और अकल्पनीय bridges बनाए हैं। Gulf से लेकर Global West तक, Global South से लेकर पड़ोसी देशों तक भारत सभी का trusted partner है। कुछ लोग पूछते हैं, हम किसके साथ हैं? तो उनको मेरा जवाब यही है कि हम भारत के साथ हैं, हम भारत के हितों के साथ हैं, शांति के साथ हैं, संवाद के साथ हैं।

साथियों,

संकट के इसी समय में जब global supply chains डगमगा रही हैं, भारत ने diversification और resilience का मॉडल पेश किया है। Energy हो, fertilizers हों या essential goods अपने नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए भारत ने निरंतर प्रयास किया है और आज भी कर रहे है।

साथियों,

जब राष्ट्रनीति ही राजनीति का मुख्य आधार हो, तब देश का भविष्य सर्वोपरि होता है। लेकिन जब राजनीति में व्यक्तिगत स्वार्थ हावी हो जाता है, तब लोग देश के फ्यूचर के बजाय अपने फ्यूचर के बारे में सोचते हैं। आप ज़रा याद कीजिए 2004 से 2010 के बीच क्या हुआ था? तब कांग्रेस सरकार के समय पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों का संकट आया था और तब कांग्रेस ने देश की नहीं बल्कि अपनी सत्ता की चिंता की। उस वक्त कांग्रेस ने एक लाख अड़तालीस हज़ार करोड़ रुपए के ऑयल बॉन्ड जारी किए थे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने खुद कहा था कि वो आने वाली पीढ़ी पर कर्ज का बोझ डाल रहे हैं। यह जानते हुए भी कि ऑयल बॉन्ड का फैसला गलत है, जो रिमोट कंट्रोल से सरकार चला रहे थे, उन लोगों ने अपनी सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय किया क्योंकि जवाबदेही उस समय नहीं होनी थी, उस बॉन्ड पर री-पेमेंट 2020 के बाद होनी थी।

साथियों,

बीते 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस सरकार के उस पाप को धोने का काम किया है, और इस धुलाई का खर्चा कम नहीं आया है, ऐसी लाँड्री आपने देखी नहीं होगी। 1 लाख 48 हज़ार करोड़ रुपए की जगह, देश को 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पेमेंट करनी पड़ी क्योंकि इसमें ब्याज भी जुड़ गया था। यानी हमने करीब-करीब दोगुनी राशि चुकाने के लिए मजबूर हुए। आजकल कांग्रेस के जो नेता बयानों की मिसाइलें दाग रहे हैं, मिसाइल आई तो टीवी9 को मजा आएगा, उनकी इस विषय का जिक्र आते ही बोलती बंद हो जाती है।

साथियों,

पश्चिम एशिया में बनी परिस्थितियों पर मैंने आज लोकसभा में अपना वक्तव्य दिया है। दुनिया में जहां भी युद्ध हो रहे हैं, वो भारत की सीमा से दूर हैं। लेकिन आज की व्यवस्थाओं में कोई भी देश युद्धों से दुष्प्रभाव से दूर रहे, ऐसा संभव नहीं होता। अनेक देशों में तो स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी है। और इन हालातों में हम देख रहे हैं कि राजनीतिक स्वार्थ से भरे कुछ लोग, कुछ दल, संकट के इस समय में भी अपने लिए राजनीतिक अवसर खोज रहे हैं। इसलिए मैं टीवी9 के मंच से फिर कहूंगा, यह समय संयम का है, संवेदनशीलता का है। हमने कोरोना महासंकट के दौरान भी देखा है, जब देशवासी एकजुट होकर संकट का सामना करते हैं, तो कितने सार्थक परिणाम आते हैं। इसी भाव के साथ हमें इस युद्ध से बनी परिस्थितियों का सामना करना है।

साथियों,

दुनिया की हर उथल-पुथल के बीच, भारत ने अपनी प्रगति की गति को भी बनाए रखा है। अगर मैं 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद, बीते 23 दिनों का ही ब्यौरा दूं, तो पूरब से पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक देश में हजारों करोड़ के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का काम हुआ है। दिल्ली मेट्रो रेल के महत्वपूर्ण कॉरिडोर्स का लोकार्पण, सिलचर का हाई स्पीड कॉरिडोर का शिलान्यास, कोटा में नए एयरपोर्ट का शिलान्यास, मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दर्जा देना, ऐसे अनेक काम बीते 23 दिनों में ही हुए हैं। बीते एक महीने के दौरान ही औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भव्य स्कीम को मंजूरी दी गई है। इसके तहत देशभर में 100 plug-and-play industrial parks विकसित किए जाएंगे। देश में Small Hydro Power Development Scheme को भी हरी झंडी दी गई है। इससे आने वाले वर्षों में 1,500 मेगावाट नई hydro power capacity जोड़ी जाएगी। इसी दौरान जल जीवन मिशन को साल 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। किसानों के हित में भी अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। बीते एक महीने में ही पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। और जो हमारे MSMEs हैं, जो हमारे निर्यातक हैं, उनके लिए भी करीब 500 करोड़ रुपए के राहत पैकेज की भी घोषणा की गई है। यह सारे कदम इस बात का प्रमाण हैं कि विकसित भारत बनाने के लिए देश कितनी तेज गति से काम कर रहा है।

साथियों,

Management की दुनिया में एक सिद्धांत कहा जाता है - What gets measured, gets managed. लेकिन मैं इसमें एक बात और जोड़ना चाहता हूं, What gets measured, gets improved और ultimately, gets transformed. क्योंकि आकलन जागरूकता पैदा करता है। आकलन जवाबदेही तय करता है और सबसे महत्वपूर्ण आकलन संभावनाओं को जन्म देता है।

साथियों,

अगर आप 2014 से पहले के 10-11 साल और 2014 के बाद के 10-11 साल का आप आकलन करेंगे, तो यही पाएंगे कि कैसे इसी सिद्धांत पर चलते हुए, भारत ने हर सेक्टर को Transform किया है। जैसे पहले हाईवे बनते थे, करीब 11-12 किलोमीटर प्रति दिन की रफ्तार से, आज भारत करीब 30 किलोमीटर प्रतिदिन की स्पीड से हाईवे बना रहा है। पहले पोर्ट्स पर शिप का Turnaround Time, 5-6 दिन का होता था। आज वही काम, करीब-करीब 2 दिन से भी कम समय में पूरा हो रहा है। पहले Startup Culture के बारे में चर्चा ही नहीं होती थी। 2014 से पहले, हमारे देश में 400-500 स्टार्ट अप्स ही थे। आज भारत में 2 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रर्ड स्टार्ट अप्स हैं। पहले मेडिकल education में सीटें भी सीमित थीं, करीब 50-55 हजार MBBS seats थीं, आज यह बढ़कर सवा लाख से ज्यादा हो चुकी हैं। पहले देश के Banking system से भी करोड़ों लोग बाहर थे। देश में सिर्फ 25 करोड़ के आसपास ही बैंक account थे। वहीं जनधन योजना के माध्यम से 55 करोड़ से ज्यादा बैंक अकाउंट खुले हैं। पहले हमारे देश में airports की संख्या भी 70 से कम थी। आज एयरपोर्ट्स की संख्या भी बढ़कर 160 से ज्यादा हो चुकी है।

साथियों,

पहले भी योजनाएं तो बनती थीं, लेकिन आज फर्क है, आज परिणाम दिखते हैं। पहले गति धीमी थी, आज भारत fastrack पर है। पहले संभावनाएं भी अंधकार में थीं, आज संकल्प सिद्धियों में बदल रहे हैं। इसलिए दुनिया को भी यह संदेश मिल रहा है कि यह नया भारत है। यह अपने विकास के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है।

साथियों,

आज हमारा प्रयास है कि अतीत में विकास का जो असंतुलन पैदा हो गया था, उसको अवसरों में बदला जाए। अब जैसे हमारा पूर्वी भारत है। हमारा पूर्वी भारत संसाधनों से समृद्ध है, दशकों तक वहां जिन्होंने सरकारें चलाई हैं, उनकी उपेक्षा ने पूर्वी भारत के विकास पर ब्रेक लगा दी थी। अब हालात बदल रहे हैं। जिस असम में कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, आज वहां सेमीकंडक्टर यूनिट बन रही है। ओडिशा में सेमीकंडक्टर से लेकर पेट्रोकेमिकल्स तक अनेक नए-नए सेक्टर का विकास हो रहा है। जिस बिहार में 6-7 दशक में गंगा जी पर एक बड़ा पुल बन पाया था एक, उस बिहार में पिछले एक दशक में 5 से ज्यादा नए पुल बनाए गए हैं। यूपी में कभी कट्टा मैन्युफैक्चरिंग की कहानियां कही जाती थीं, आज यूपी, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है।

साथियों,

पूर्वी भारत का एक और बड़ा राज्य पश्चिम बंगाल है। पश्चिम बंगाल, एक समय में भारत के कल्चर, एजुकेशन, इंडस्ट्री और ट्रेड का हब होता था। बीते 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए बड़ी मात्रा में निवेश किया है। लेकिन दुर्भाग्य से, आज वहां एक ऐसी निर्मम सरकार है, जो विकास पर ब्रेक लगाकर बैठी है। TV9 बांग्ला के जो दर्शक हैं, वो जानते हैं कि बंगाल में आयुष्मान योजना पर निर्मम सरकार ने ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम आवास योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। चाय बागान श्रमिकों के लिए शुरू हुई योजना के लिए ब्रेक लगाया हुआ है। यानी विकास और जनकल्याण से ज्यादा प्राथमिकता निर्मम सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ को दे रही है।

साथियों,

देश में इस तरह की राजनीति की शुरुआत जिस दल ने की है, वो अपने गुनाहों से बच नहीं सकती और वो पार्टी है - कांग्रेस। कांग्रेस पार्टी की राजनीति का एक ही लक्ष्य रहा है, किसी भी तरह विकास का विरोध और कांग्रेस यह तब से कर रही है, जब मैं गुजरात में था। गुजरात में वर्षों तक जनता ने हमें आशीर्वाद दिया, तो कांग्रेस ने उस जनादेश को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने गुजरात की छवि पर सवाल उठाए, उसकी प्रगति को कटघरे में खड़ा किया और जब यही विश्वास पूरे देश में दिखाई दिया, तो कांग्रेस का विरोध भी रीजनल से नेशनल हो गया।

साथियों,

जब राजनीति में विरोध, विकास के विरोध में बदल जाए, जब आलोचना देश की उपलब्धियों पर सवाल उठाने लगे, तब यह सिर्फ सरकार का विरोध नहीं रह जाता, यह देश की प्रगति से असहज होने की मानसिकता बन जाती है। आज कांग्रेस इसी मानसिकता की गुलाम बन चुकी है। आज स्थिति यह है कि देश की हर सफलता पर प्रश्न उठाया जाता है, हर उपलब्धि में कमी खोजी जाती है और हर प्रयास के असफल होने की कामना की जाती है। कोविड के समय, देश ने अपनी वैक्सीन बनाई, तो कांग्रेस ने उस पर भी संदेह जताया। Make in India की बात हुई, तो कहा गया कि यह सफल नहीं होगा, बब्बर शेर कहकर इसका मजाक उड़ाया गया। जब देश में डिजिटल इंडिया अभियान शुरू हुआ, तो उसका मजाक उड़ाया गया। लेकिन हर बार यह कांग्रेस का दुर्भाग्य और देश का सौभाग्य रहा कि भारत ने हर चुनौती को सफलता में बदला। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीनेशन ड्राइव का उदाहरण है। भारत डिजिटल पेमेंट्स में दुनिया का अग्रणी देश है। भारत मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

लोकतंत्र में विरोध जरूरी होता है। लेकिन विरोध और विद्वेष के बीच एक रेखा होती है। सरकार का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन देश को बदनाम करना, यह कांग्रेस की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। जब विरोध इस स्तर तक पहुंच जाए कि देश की उपलब्धियां भी असहज करने लगें, तो यह राजनीति नहीं, यह दृष्टिकोण की समस्या है। अभी हमने ग्लोबल AI समिट में भी देखा है। जब पूरी दुनिया भारत में जुटी हुई थी, तो कांग्रेस के लोग कपड़े फाड़ने वहां पहुंच गए थे। इन लोगों को देश की इज्जत की कितनी परवाह है, यह इसी से पता चलता है। इसलिए आज आवश्यकता है कि देशहित को, दलहित से ऊपर रखा जाए क्योंकि अंत में राजनीति से ऊपर, राष्ट्र होता है, राष्ट्र का विकास होता है।

साथियों,

आज का यह दिन भी हमें यही प्रेरणा देता है। आज के ही दिन शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज ही, समाजवादी आंदोलन के प्रखर आदर्श डॉ. राम मनोहर लोहिया जी की जयंती भी है। यह वो प्रेरणाएं हैं, जिन्होंने देश को हमेशा स्व से ऊपर रखा है। देशहित को सबसे ऊपर रखने की यही प्रेरणा, भारत को विकसित भारत बनाएगी। यही प्रेरणा भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी। मुझे पूरा विश्वास है कि टीवी9 की यह समिट भी भारत के आत्मविश्वास और दुनिया के भरोसे पर, भारतीयों पर जो भरोसा है, उस भरोसे को और सशक्त करेगी। आप सभी को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं और आपके बीच आने का अवसर दिया, आप सबसे मिलने का मौका लिया, इसलिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

नमस्‍कार!