फिजियोथेरेपी पर फोकस

Published By : Admin | September 8, 2022 | 17:26 IST

फिजियोथेरेपी को सबसे अच्छे प्रोफेशन में से एक माना जाता है जो एक दयालुता, साइंटिफिक नॉलेज और प्रोफेशनल स्किल के साथ मानवता के साथ व्यवहार करता है। तेज दर्द से परेशान रोगियों के उपचार में फिजिकल थेरेपिस्ट का अपार योगदान, अतुलनीय है, लेकिन इन Master Healers को भारत में कई वर्षों तक चिकित्सा बिरादरी (Medical Fraternity) में उन्हें उचित दर्जा नहीं दिया गया।

पीएम मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने फिजियोथेरेपी पर आवश्यक जोर दिया। उन्होंने गुजरात में सभी के लिए ट्रेडिशनल मेडिसिन, योग और फिजियोथेरेपी को महत्व दिया। उनके कार्यकाल के दौरान गुजरात की पहली फिजियोथेरेपी काउंसिल का गठन किया गया, जिसने फिजियोथेरेपी को चिकित्सा बिरादरी में उचित प्रोफेशनल दर्जा दिया।


काउंसिल के गठन ने एक ऐसे सेक्टर को रेगुलेट कर दिया जो पहले बहुत संगठित नहीं था। इसने सुनिश्चित किया कि सर्टिफाइड लोग जो पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित हैं, काउंसिल का हिस्सा हों। इसने रोगियों को खुद ट्रीटमेंट फैसिलिटी की तलाश करने की आवश्यकता को भी समाप्त कर दिया, इसके बजाय उनके पास एक अप्रूव्ड थेरेपिस्ट की लिस्ट थी, जिससे वे अपना ट्रीटमेंट करा सकते थे। काउंसिल के गठन के परिणामस्वरूप राज्य के हेल्थकेयर सिस्टम में कुशल और योग्य फिजियोथेरेपिस्ट की उपलब्धता सुनिश्चित हुई और वे विशेषज्ञों के साथ व्यापक स्वास्थ्य सेवा और टीम वर्क प्रदान कर रहे हैं।


इस कदम के सबसे बड़े लाभार्थी दिव्यांग और वृद्ध लोग हुए जो दर्द से परेशान थे। अब गवर्निंग बॉडी के साथ, उन्हें सर्टिफाइड प्रोफेशनल्स द्वारा राज्य में गुणवत्तापूर्ण उपचार दिया जा रहा है। जिन लोगों को मोबिलिटी की समस्या थी, उनके लिए समय पर और प्रोफेशनल तरीके से फिजियोथेरेपिस्ट के मार्गदर्शन और सेवाओं का लाभ उठाने के लिए सीएम मोदी द्वारा 104 सेवा शुरू की गई थी।

मुख्यमंत्री मोदी ने एक स्ट्रीम के रूप में फिजियोथेरेपी के बड़े पैमाने पर प्रसार के लिए विश्वसनीय इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर भी जोर दिया। राज्य में 2002-2014 के दौरान फिजियोथेरेपी स्ट्रीम की पढ़ाई के लिए फिजियोथेरेपी कॉलेजों, ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेस की संख्या में पर्याप्त वृद्धि हुई। प्रारंभ में वर्ष 2002 में राज्य में 10 कॉलेज थे, जो धीरे-धीरे वर्ष 2014 में बढ़कर 27 हो गए। सूरत, दाहोद और जामनगर में तीन नए सरकारी फिजियोथेरेपी कॉलेज खोले गए। राज्यभर में 14 नए सेल्फ फंडिंग फिजियोथेरेपी कॉलेज भी स्थापित किए गए। पीजी कोर्स में उपलब्ध सीटों की संख्या शुरू में 15 थी जो वर्ष 2014 में बढ़कर 192 हो गई। इसके अलावा, इस अवधि के दौरान पीएचडी कोर्सेस के लिए पंजीकृत छात्रों की संख्या में भी वृद्धि हुई।


2014 में देश के प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी ने 'फिजियो समिट 2014' में प्रेरित करने वाला संदेश दिया। उनका संदेश फिजियोथेरेपी के विभिन्न पहलुओं के बारे में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता के बारे में था। उन्होंने यह भी महसूस किया कि एक प्रोफेशन के रूप में फिजियोथेरेपी, देश में व्यापक रूप से प्रचलित नहीं थी, बल्कि केवल कुछ हिस्सों में ही केंद्रित है थी।

जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए फिजियोथेरेपी के महत्व को जानते हुए मोदी सरकार ने 2015 में पहली बार विधेयक लाने का विचार रखा था, जिसका उद्देश्य उन संस्थानों को नियंत्रित करना है जो फिजियोथेरेपी जैसे संबद्ध हेल्थ साइंस में प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षित करते हैं।

मोदी सरकार ने उचित विचार-विमर्श और परामर्श के बाद 2021 में नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल विधेयक पारित किया। विधेयक के पारित होने के बाद सेंट्रल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन की स्थापना ने फिजियोथेरेपी को आवश्यक प्रोत्साहन दिया है, जो एक प्रोफेशन के रूप में 75 वर्षों से अनियंत्रित और गैर-मान्यता प्राप्त थी।

इस आयोग के माध्यम से, PTs के साथ-साथ 50 से अधिक अन्य हेल्थकेयर प्रोफेशनल कैटेगरी को अंततः मानकीकृत शिक्षा, विश्वस्तर पर सक्षम Clinical Practices और हेल्थकेयर क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए मान्यता प्राप्त होगी। फिजियोथेरेपिस्ट और संबद्ध वर्कर्स के मानकीकरण और नियमितीकरण के लिए एक वैधानिक मैकेनिज्म की सख्त जरूरत थी।


इस विधेयक की एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता, व्यवसायों के वर्गीकरण (Classification) की अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली (ISCO कोड) का उपयोग करते हुए संबद्ध प्रोफेशनल्स का वर्गीकरण है। यह दुनिया भर में फिजियोथेरेपिस्ट की मोबिलिटी को सुनिश्चित करेगा और इस प्रकार उन्हें बेहतर अवसर प्रदान करेगा।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन नेटवर्क के तहत फिजियोथेरेपिस्ट को शामिल करने से मरीजों को आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथिक), आयुर्वेद, दंत चिकित्सा, होम्योपैथी, फिजियोथेरेपी, यूनानी, सिद्धा या सोवा रिग्पा जैसी दवाओं की विभिन्न सिस्टम में पंजीकृत सुविधाओं के लिए आसानी से एबीडीएम नेटवर्क आसानी से खोजने में मदद मिलेगी।

आयुर्वेद और फिजियोथेरेपी परस्पर अलग नहीं हैं, क्योंकि फिजियोथेरेपी और आयुर्वेद में उपयोग किए जाने वाले उपचार के सिद्धांत समान हैं और चूंकि यह उस विशेष स्थिति को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने पर एक Synergistic Effect पैदा करता है, इसलिए एक एकीकृत ट्रीटमेंट का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि आयुर्वेद और फिजियोथेरेपी के इस संगम से रोगियों को सर्वोत्तम लाभ मिले, मोदी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि फिजियोथेरेपी ट्रीटमेंट, आयुष ट्रीटमेंट के साथ इंटीग्रेट हो। कई आयुष अस्पतालों और कॉलेजों में इसे शुरू कर दिया गया है।

जब तेज दर्द से राहत की बात आती है तो फिजियोथेरेपिस्ट शानदार Healers होते हैं। पीएम मोदी के आश्वासन के बाद मेनस्ट्रीम मेडिकल फ्रेटरनिटी में उनके शामिल होने से देश के लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण उपचार के बहुपक्षीय रास्ते खुल गए हैं। फिजिकल थेरेपिस्ट के महत्व को हमारे खिलाड़ियों को आवश्यक सहायता प्रदान करने और उन्हें फिट रखने के रूप में देखा जा सकता है। अब, जबकि भारत पिछले 6 वर्षों में अधिक संख्या में पदक ला रहा है,उनकी प्रासंगिकता कई गुना बढ़ गई है।

कोविड महामारी के दौरान कार्डियोपल्मोनरी रिहैबिलिटेशन सुनिश्चित करके, फिजियोथेरेपिस्टों ने मृत्यु दर और मोर्बिलिटी को कम करने में प्रमुख भूमिका निभाई।

प्रोफेशन के साथ टेक्नोलॉजी को इंटीग्रेट करने के लिए आईआईटी, गांधीनगर के साथ रोबोटिक दस्ताने बनाने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए जो पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी, दर्द से राहत, ताकत और मोबिलिटी में सहायक सिद्ध होंगे। गवर्नमेंट फिजियोथेरेपी कॉलेज, अहमदाबाद ने फिजियोथेरेपी के लिए डब्ल्यूएचओ एडवाइजरी / गाइडलाइन का लोकल लैंग्वेज में अनुवाद भी किया है, इस प्रकार विभिन्न आर्थोपेडिक, न्यूरोलॉजिक और कार्डियोपल्मोनरी बीमारियों के उपचार से संबंधित जागरूकता सुनिश्चित करना है।

नीतिगत उपायों के माध्यम से पीएम मोदी ने देश में फिजियोथेरेपिस्ट को सशक्त बनाया है और साथ ही यह सुनिश्चित किया है कि इस वैल्युएबल प्रोफेशन के बारे में जागरूकता बढ़े। फिजियोथेरेपी के महत्व पर उनके निरंतर जोर से गुजरात में ट्रीटमेंट के स्टैंडर्ड में सुधार हुआ है, अब देशभर में ट्रीटमेंट स्टैंडर्ड में सुधार हो रहा है।

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प्रधानमंत्री 5 जून को सूरत और दमन के दौरे पर जाएंगे
June 04, 2026
प्रधानमंत्री सूरत में लगभग 18,800 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, राष्ट्र को समर्पित करेंगे और आधारशिला रखेंगे
प्रधानमंत्री 8-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के प्रमुख पैकेज राष्ट्र को समर्पित करेंगे
प्रधानमंत्री एनएच-56 के महत्वपूर्ण खंडों को चार-लेन बनाने की आधारशिला रखेंगे; यह परियोजना जनजातीय क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाएगी और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक पहुंच को सुगम बनाएगी
प्रधानमंत्री दमन में लगभग 2,970 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, राष्ट्र को समर्पित करेंगे और आधारशिला रखेंगे
प्रधानमंत्री दमन में नमो हवाई अड्डा का नया टर्मिनल भवन राष्ट्र को समर्पित करेंगे
प्रधानमंत्री लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश के लिए 885 करोड़ रुपये की बंदरगाह परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी 5 जून, 2026 को गुजरात और दमन का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री दोपहर लगभग 2:30 बजे, सूरत जिले के हजीरा में चल रहे औद्योगिक कार्यों और अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे। प्रधानमंत्री शाम लगभग 4:15 बजे, सूरत में लगभग 18,800 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और राष्ट्र को समर्पित करेंगे। वे इस अवसर पर सभा को संबोधित भी करेंगे।

इसके बाद प्रधानमंत्री दमन के लिए रवाना होंगे, जहां शाम लगभग 6:15 बजे वे दमन स्थित नामो हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद दमन में स्थित नामो अस्पताल राष्ट्र को समर्पित किया जाएगा। फिर सायं लगभग 7:15 बजे प्रधानमंत्री दमन में लगभग 2,970 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, समर्पण और शिलान्यास करेंगे। वे लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश के लिए लगभग 885 करोड़ रुपये की चार महत्वपूर्ण परियोजनाओं का भी शिलान्यास करेंगे। इस अवसर पर वे जनसमूह को भी संबोधित करेंगे।

सूरत में प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री सूरत में सड़क, बिजली और औद्योगिक क्षेत्रों में फैली 18,800 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे और उनकी आधारशिला रखेंगे।

प्रधानमंत्री वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के पैकेज VI और VII राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिससे गुजरात और महाराष्ट्र के बीच उच्च गति परिवहन, लॉजिस्टिक्‍स दक्षता और आर्थिक संपर्क में सुधार होगा। प्रधानमंत्री प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे, जिनमें जनजातीय क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए राष्‍ट्रीय राजमार्ग-56 के महत्वपूर्ण खंडों को चार लेन का बनाना शामिल है।

प्रधानमंत्री सूरत में 200 बिस्तरों वाले ईएसआईसी अस्पताल का भी उद्घाटन करेंगे, जो प्रमुख स्‍पेशियलिटिज में आधुनिक माध्यमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेगा। साथ ही, यह एक केंद्रीय प्रयोगशाला और आवश्यक सहायक सेवाओं से भी सुसज्जित होगा। इसमें व्यावसायिक चोटों और चिकित्सा आपात स्थितियों के समय पर प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए 24/7 आपातकालीन और ट्रॉमा देखभाल की सुविधा भी है। प्रधानमंत्री अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन प्रणाली के तहत बिजली निकासी क्षमता बढ़ाने के लिए गुजरात में ट्रांसमिशन नेटवर्क विस्तार सहित महत्वपूर्ण उपयोगिता केन्‍द्रों और औद्योगिक अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे। प्रधानमंत्री गुजरात सरकार की कई महत्वपूर्ण पहलों का भी उद्घाटन करेंगे, जिनमें वलसाड में संशोधित सुधार-आधारित वितरण सेक्‍टर स्‍कीम के तहत आधुनिक बिजली वितरण उन्नयन, दहेज पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (पीसीपीआईआर) और सारिगाम गुजरात औद्योगिक विकास निगम (जीआईडीसी) में उन्नत अपशिष्ट निपटान और उपचार अवसंरचना एवं जंबूसर बल्क ड्रग पार्क में आवश्यक लेआउट उपयोगिता केन्‍द्र शामिल हैं।

दमन में प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री दमन में लगभग 2,970 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे, उन्हें राष्ट्र को समर्पित करेंगे और आधारशिला रखेंगे। ये परियोजनाएं स्वास्थ्य सेवा, नागरिक उड्डयन, पर्यटन, अवसंरचना, कनेक्टिविटी और जन कल्याण सहित विभिन्न सेक्‍टरों से संबंधित हैं। इनसे दादरा और नगर हवेली तथा दमन एवं दीव केंद्र शासित प्रदेशों के समग्र विकास को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री दमन में लगभग 1,340 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और राष्ट्र को समर्पित करेंगे, जिनमें नामो हवाई अड्डे का नया टर्मिनल भवन और नामो अस्पताल शामिल हैं। नया हवाई अड्डा टर्मिनल क्षेत्रीय हवाई संपर्क को अत्‍यधिक सुदृढ़ करेगा और क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देगा। दमन जिले का जिला अस्पताल नामो अस्पताल प्रतिदिन लगभग 1,500 ओपीडी रोगियों की देखभाल के लिए विकसित किया गया है। इससे लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिलेगी।

प्रधानमंत्री लगभग 1,630 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे। प्रमुख परियोजनाओं में आइकॉनिक ब्रिज, दमन कन्वेंशन सेंटर और दमन स्थित एनआईएफटी परिसर शामिल हैं। इन परियोजनाओं से आधुनिक बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।

प्रधानमंत्री लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश के लिए लगभग 885 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे। इन परियोजनाओं में कलपेनी द्वीप और कदमत द्वीप दोनों के पूर्वी और पश्चिमी किनारों पर बंदरगाह सुविधाओं का विकास शामिल है। इन बहुउद्देशीय घाटों के विकास से 300 मीटर तक की लंबाई वाले क्रूज जहाजों सहित बड़े यात्री जहाजों के लिए साल भर आवागमन की सुविधा उपलब्ध होगी। ये परियोजनाएं यात्रियों और माल की सुरक्षित एवं कुशल आवाजाही को सक्षम बनाएंगी। साथ ही मछली प्रबंधन, ईंधन वितरण, बर्फ आपूर्ति और नाव मरम्मत के लिए एकीकृत सुविधाएं प्रदान करेंगी। ये पहल समुद्री कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करेंगी, स्थानीय मछुआरों की आजीविका में सहायता करेंगी, पर्यटन को बढ़ावा देंगी और द्वीपों के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देंगी।