"“A crime is a crime irrespective of the birth marks of the criminal”: Shri Narendra Modi writes to PM and seeks intervention on Home Minister’s views on wrongful arrests of minority youths"
"Narendra Modi writes a letter to PM, urging him to intervene and take necessary action against statement of the Home Minister on arrest of people from minority community"
"Shri Narendra Modi condemns the Home Minister’s statement saying it could give out a wrong message about the country’s criminal justice system, and have a demoralizing effect on the entire law enforcement machinery"
"Shri Modi suggested that the Home Minister should find a solution within the constitutional framework"
"Home Minister’s suggestion unprecedented and a new low for the country. Principles at stake are far too valuable to be sacrificed at the altar of political expediency: Narendra Modi"

गुजरात के मुख्यमंत्री का प्रधानमंत्री को पत्र

गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर केन्द्रीय गृह मंत्री श्री सुशील कुमार शिन्दे द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं की आतंकवाद के आरोप में हुई गिरफ्तारी की भूमिका की जांच करने के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर दिए गए सुझावों पर कड़ा विरोध जताया है। श्री मोदी ने कहा कि राजनैतिक लाभ के लिए अल्पसंख्यकों को आकर्षित करने के निश्चित उद्देश्य के साथ किया गया यह एक निर्लज्ज प्रयास है। इतना ही नहीं, संविधान के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है। कानून के समक्ष समानता के अधिकार की जड़ में यह कुठाराघात है। उन्होंने कहा कि अपराध अपराध ही होता है, आरोपी के धर्म या जाति से उसका कोई लेना-देना नहीं है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने आतंकवाद के आरोप में मामला चलाए बिना जेल में मौजूद अल्पसंख्यक युवाओं की भूमिका की जांच हेतु जांच समिति गठित करने के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर कहा है। इस मुद्दे पर आक्रोश व्यक्त करते हुए श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि, ‘मेरा आपसे निवेदन है कि आप इस मामले में हस्तक्षेप करें एवं गृह मंत्री को समझाइश दें कि वे सिर्फ अल्पसंख्यक पर ही ध्यान न दें। वे जो कह रहे हैं वह संविधान के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है, और ‘कानून के समक्ष समानता के अधिकार’ के मूल में कुठाराघात के समान है।’ उन्हें याद दिलाया जाना चाहिए कि गृह मंत्री ने संविधान के प्रति वफादारी की शपथ ली है।

संविधान की धारा १४ प्रत्येक नागरिक को ‘समानता का अधिकार’ देती है। व्यक्ति किस धर्म में आस्था रखता है या किस जाति में उसने जन्म लिया है, इस आधार पर आतंकवाद के मामलों की जांच करने का गृह मंत्री का सुझाव निश्चित ही असंवैधानिक है। अपराध अपराध ही होता है, उसका अपराधी के धर्म या जाति के साथ कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के धर्म के आधार पर उसका अपराधी या बेकसूर होना तय नहीं किया जा सकता।

गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि गृह मंत्री वास्तव में यह मानते हैं कि किसी निश्चित समुदाय के युवाओं को आतंकी मामलों में गलत तरीके से पकड़ा जा रहा है, तो उन्हें अनिवार्य रूप से संविधान के दायरे में रहकर इसका निराकरण लाना चाहिए। सभी आतंकी मामलों के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें गठित की जानी ही इसका सर्व स्वीकृत उपाय है। इससे आतंकी मामलों में संलिप्त वास्तविक अपराधी को दोषी करार देने और उसे दंडित करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही एक निश्चित समय में निर्दोष लोग भी छूट जाएंगे। इस तरह के रूख से आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई ज्यादा मजबूत बनेगी और युवाओं की गलत तरीके से गिरफ्तारी भी टलेगी। इसके चलते ‘सभी को न्याय, किसी का भी तुष्टीकरण नहीं’ यह सुनिश्चित हो सकेगा।

“समीक्षा समिति गठित करने के गृह मंत्री का प्रस्तावित निर्देश असंवैधानिक होने के अलावा फौजदारी कानून के प्रावधानों के भी खिलाफ हैं। फौजदारी कानून के तहत जिस मामले में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका हो ऐसे लंबित मामलों को वापस लेने के लिए समीक्षा समिति का प्रावधान नहीं किया गया है,” ऐसा मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा है।

गृह मंत्री ने अपने पत्र में लिखा था कि, ‘अल्पसंख्यक समुदाय के किसी भी व्यक्ति की गलत तरीके से गिरफ्तारी की गई हो तो गलती करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ फौरन कड़ा कदम उठाया जाना चाहिए। और गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को न सिर्फ तत्काल मुक्त करना चाहिए, बल्कि उसे योग्य मुआवजा भी प्रदान कर उसके पुनर्वास द्वारा उसे मुख्य धारा में शामिल करना चाहिए।’ श्री शिंदे को पता होगा कि पुलिस एवं सार्वजनिक व्यवस्था का मामला राज्य का विषय है और जांच की कार्यवाही उसी का अभिन्न हिस्सा है, ऐसा मुख्यमंत्री ने कहा।

भारत के संविधान की धारा ४४ के मुताबिक भारत के सभी हिस्सों में समान नागरिक संहिता का अमल हो, इसके लिए राज्यों को प्रयत्नशील रहना चाहिए। आजादी के बाद हमने समान नागरिक संहिता की दिशा में कोई खास काम नहीं किया है, लेकिन शुक्र है कि हमारे पास कम से कम एक समान क्रिमिनल प्रोसीजर कोड तो है। हमारी फौजदारी न्यायिक प्रणाली ने आरोपी के धर्म और अन्य मामलों को कभी ध्यान में नहीं लिया है। गृह मंत्री के सुझाव अयोग्य हैं और उससे हमारा देश और पीछे जाएगा। राजनैतिक लाभ के लिए सिद्धांतों के साथ कभी भी समझौता नहीं करना चाहिए।

गृह मंत्री सार्वजनिक तौर पर कहते हैं कि आतंकी मामलों में विश्वासपात्र जानकारियों को ध्यान में लिए बगैर अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं को गलत तरीके से फंसाया जा रहा है। हालांकि, सार्वजनिक तौर पर इस तरह का बयान अयोग्य है। इस तरह के बयान देश की न्यायिक प्रणाली के संबंध में गलत संदेश देते हैं और कानून के शासन की प्रक्रिया पर भी वे गलत असर डालते हैं।

श्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री को केन्द्रीय गृह मंत्री के इस प्रकार के सुझावों की कार्यवाही को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने को फौरन ही मामले में दखल देने की मांग की है।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India Inc backs Modi’s appeal to cut gold buying and foreign travel amid West Asia tensions

Media Coverage

India Inc backs Modi’s appeal to cut gold buying and foreign travel amid West Asia tensions
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
प्रधानमंत्री 15–20 मई तक यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली के दौरे पर रहेंगे
May 11, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 15 मई 2026 को संयुक्त अरब अमीरात की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे, जहां वह यूएई के राष्ट्रपति महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं को द्विपक्षीय मुद्दों, विशेष रूप से ऊर्जा सहयोग, तथा आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का अवसर मिलेगा। दोनों नेता मजबूत राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और लोगों के आपसी संबंधों पर आधारित द्विपक्षीय कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे। यह यात्रा दोनों देशों के बीच मजबूत व्यापार और निवेश संबंधों को और प्रोत्साहित करेगी। यूएई; भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापार साझेदार और पिछले 25 वर्षों में निवेश का सातवां सबसे बड़ा स्रोत रहा है। यूएई में 45 लाख से अधिक भारतीय समुदाय के रहने के कारण यह यात्रा उनके कल्याण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का भी महत्वपूर्ण अवसर होगी।

यात्रा के दूसरे चरण में, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री महामहिम श्री रॉब जेटन के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 15 से 17 मई 2026 तक नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा करेंगे। 2017 की यात्रा के बाद यह प्रधानमंत्री की दूसरी नीदरलैंड यात्रा होगी। इस दौरान प्रधानमंत्री महामहिम किंग विलेम-अलेक्जेंडर और क्वीन मैक्सिमा से मुलाकात करेंगे तथा प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री की यह यात्रा डिफेंस, सिक्योरिटी, इनोवेशन, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और जल क्षेत्र में स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप सहित विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग और उच्चस्तरीय संपर्कों को नई गति देगी। नई सरकार के कार्यकाल की शुरुआत में हो रही यह यात्रा दोनों देशों के बहुआयामी संबंधों को और गहरा तथा विस्तारित करने का महत्वपूर्ण अवसर होगी। नीदरलैंड यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है, जहां 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 27.8 अरब डॉलर रहा, जबकि 55.6 अरब डॉलर के समग्र FDI के साथ वह भारत का चौथा सबसे बड़ा निवेशक है।

यात्रा के तीसरे चरण में, स्वीडन के प्रधानमंत्री महामहिम श्री उल्फ क्रिस्टरसन के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 17-18 मई 2026 को स्वीडन के गोथेनबर्ग शहर की यात्रा करेंगे। प्रधानमंत्री इससे पहले 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक समिट में भाग लेने के लिए स्वीडन गए थे। पीएम मोदी प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे और सहयोग के नए क्षेत्रों की तलाश करेंगे। दोनों नेता द्विपक्षीय व्यापार को और मजबूत बनाने पर चर्चा करेंगे, जो 2025 में 7.75 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। साथ ही 2000 से 2025 के बीच भारत में 2.825 अरब डॉलर के स्वीडिश FDI, ग्रीन ट्रांजिशन, AI, इमर्जिंग टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप्स, मजबूत सप्लाई चेन, डिफेंस, स्पेस, क्लाइमेट एक्शन और लोगों के बीच संबंधों में सहयोग बढ़ाने पर भी बातचीत होगी। दोनों प्रधानमंत्री यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री को भी संबोधित करेंगे, जो यूरोप के प्रमुख बिजनेस लीडर्स का मंच है।

अपनी यात्रा के चौथे चरण में प्रधानमंत्री 18 से 19 मई 2026 तक तीसरे भारत-नॉर्डिक समिट और द्विपक्षीय कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए नॉर्वे की आधिकारिक यात्रा करेंगे। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहली नॉर्वे यात्रा होगी और 43 वर्षों में भारत से किसी प्रधानमंत्री की पहली नॉर्वे यात्रा भी होगी। प्रधानमंत्री महामहिम किंग हेराल्ड पंचम और क्वीन सोन्या से मुलाकात करेंगे तथा प्रधानमंत्री महामहिम श्री जोनास गार स्टोरे के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ भारत-नॉर्वे बिजनेस एंड रिसर्च समिट को भी संबोधित करेंगे। यह यात्रा भारत-नॉर्वे संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा करने और व्यापार एवं निवेश, भारत-EFTA व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते, क्लीन एवं ग्रीन टेक तथा ब्लू इकॉनमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के नए अवसर तलाशने का महत्वपूर्ण मौका होगी। यह यात्रा 2024 में लगभग 2.73 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार और भारत के पूंजी बाजार में नॉर्वे के गवर्नमेंट पेंशन फंड (GPFG) के करीब 28 अरब डॉलर के निवेश को नई गति देने का अवसर भी प्रदान करेगी।

तीसरा भारत-नॉर्डिक समिट 19 मई 2026 को ओस्लो में आयोजित होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के साथ नॉर्वे के प्रधानमंत्री महामहिम श्री जोनास गार स्टोरे, डेनमार्क की प्रधानमंत्री महामहिम सुश्री मेटे फ्रेडरिकसन, फिनलैंड के प्रधानमंत्री महामहिम श्री पेट्टेरी ऑर्पो, आइसलैंड की प्रधानमंत्री सुश्री क्रिस्ट्रून फ्रोस्टाडोटिर और स्वीडन के प्रधानमंत्री श्री उल्फ क्रिस्टरसन इस समिट में शामिल होंगे। यह समिट अप्रैल 2018 में स्टॉकहोम और मई 2022 में कोपेनहेगन में आयोजित पिछले दो समिट्स को आगे बढ़ाते हुए भारत और नॉर्डिक देशों के संबंधों को अधिक रणनीतिक आयाम देगा, खासकर टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, ग्रीन ट्रांजिशन और रिन्यूएबल एनर्जी, सस्टेनेबिलिटी, ब्लू इकॉनमी, डिफेंस, स्पेस और आर्कटिक जैसे क्षेत्रों में। यह यात्रा नॉर्डिक देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय व्यापार, जो 2024 में 19 अरब डॉलर रहा, तथा निवेश संबंधों को नई गति देने के साथ-साथ भारत-यूरोपियन यूनियन FTA और भारत-EFTA TEPA के बाद मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने में भी मदद करेगी।

यात्रा के अंतिम चरण में, इटली गणराज्य की प्रधानमंत्री महामहिम सुश्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री 19 से 20 मई 2026 तक इटली की आधिकारिक यात्रा करेंगे। प्रधानमंत्री इससे पहले जून 2024 में G7 समिट में भाग लेने के लिए इटली गए थे। इस दौरान वह इटली गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम श्री सर्जियो मातारेला से मुलाकात करेंगे और प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ वार्ता करेंगे। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में मजबूत गति देखने को मिल रही है और दोनों पक्ष जॉइंट स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान 2025-2029 को सक्रिय रूप से लागू कर रहे हैं। यह विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का व्यापक रोडमैप है, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार भी शामिल है, जो 2025 में 16.77 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके साथ ही निवेश बढ़ाने, अप्रैल 2000 से सितंबर 2025 तक 3.66 अरब डॉलर के कुल FDI, डिफेंस और सिक्योरिटी, क्लीन-एनर्जी, इनोवेशन, साइंस और टेक्नोलॉजी तथा लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर भी फोकस रहेगा।

प्रधानमंत्री की आगामी यात्रा विभिन्न क्षेत्रों में, विशेष रूप से हाल ही में संपन्न भारत-यूरोपियन यूनियन FTA के परिप्रेक्ष्य में, व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करते हुए यूरोप के साथ भारत की साझेदारी को और गहरा करेगी।