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सक्रिय सरकार, जनता के साथ

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सरकार अर्थात उप-जनता और उप-सक्रिय प्रदान कर सकती है. पिछले दशक में गुजरात की सफलता संक्षिप्त रूप से इसी मंत्र के कारण है, जिसे नरेंद्र मोदी द्वारा ग्रहण किया गया.

नरेंद्र मोदी ने नवीनतम योजनाओं जैसे एक दिन का शासन के माध्यम से अच्छा शासन प्रदान करना सुनिश्चित किया है.

न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन

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गुजरात ने न्यूनतम प्रक्रियात्मक अवरोधों को रखते हुए अधिकतम शासन विस्तार सुनिश्चित किया है, ताकि लोगों को लाभ मिले.

और परिणाम असाधारण हैं. गुजरात ने एकबार फिर आर्थिक स्वतंत्रता में राज्य को दर्जा दिलवाया– लोगों के लिए अधिक शक्ति, उन्नति करने के लिए अधिक शक्ति!

दिखावा नहीं, काम

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भारत ने वादे और दिखावा बहुत देख लिए, अब समय है कार्यवाही का और आम जनता के हित में काम करने का

नरेन्द्र मोदी का गुजरात में शुरु से ही प्रयास रहा है कि जो भि कार्य हों वो जनता के हित के लिये हों कि सरकारी खानापूरी या दिखावे के लिए. "स्वागत" इसी कार्यविधि का एक उदाहरण है

रेड टेप के बजाय रेड कार्पेट

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रेड कार्पेट प्रगति की ओर ले जाता है, रेड टेप निष्क्रियता को जन्म देता है.

नरेंद्र मोदी ने रेड कार्पेट के साथ, छोटे और बड़े, उद्योगों का स्वागत किया और रेड टेप को कम किया. वाइब्रेंट गुजरात सभाओं की बार-बार सफलता इसे सबसे अच्छी तरह हाइलाइट करती है.

सबका साथ, सबका विकास (सामूहिक प्रयास, मिलीजुली वृद्धि)

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राष्ट्र तभी आगे बढ़ेगा जब प्रत्येक नागरिक उन्नति के मार्ग का हिस्सा हो.

सामूहिक प्रयासों और निर्णायक नेतृत्व के साथ मिलीजुली उन्नति करने के लिए आगे गुजरात आगे बढ़ा है. पढ़िए कैसे गुजरात मॉडल ने सभी जगह सफलता पाई है.

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संसद सत्र को कार्यों और चर्चाओं के आधार पर तौला जाए, न कि व्यवधानों के आधार पर : पीएम
November 29, 2021
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नमस्कार साथियों,

संसद का यह सत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। हिन्दुस्तान में चारों दिशाओं में से इस आज़ादी के अमृत महोत्सव के नीमित रचनात्मक, सकारात्मक, जनहित के लिए, राष्ट्रहित के लिए, सामान्य नागरिक अनेक कार्यक्रम कर रहे हैं, कदम उठा रहे हैं, और आजादी के दिवानों ने जो सपने देखे थे उन सपनों को पूरा करने के लिए सामान्य नागरिक भी इस देश का अपना कोई न कोई दायित्व निभाने का प्रयास कर रहा है। यह खबरे अपने आप में भारत के उज्जवल भविष्य के लिए शुभ संकेत है।

कल हमने देखा है। पिछले दिनों संविधान दिवस भी, नए संकल्प के साथ संविधान के spirit को चरित्रार्थ करने के लिए हर किसी के दायित्व के संबंध में पूरे देश ने एक संकल्प किया है इन सबके परिपेक्ष में हम चाहेगें, देश भी चाहेगा, देश का हर सामान्य नागरिक चाहेगा कि भारत का यह संसद का यह सत्र और आगे आने वाला भी सत्र आजादी के दीवानों की जो भावनाएं थी, जो spirit था, आजादी के अमृत महोत्सव का जो spirit है, उस spirit के अनुकूल संसद भी देश हित में चर्चा करे, देश की प्रगृति के लिये रास्ते खोजे, देश की प्रगृति के लिए नये उपाय खोजें और इसके लिए यह सत्र बहुत ही विचारों की समृद्धि वाला, दूरगामी प्रभाव पैदा करने वाले सकारात्मक निर्णय करने वाला बने। मैं आशा करता हूँ कि भविष्य में संसद को कैसा चलाया, कितना अच्छा contribution किया उस तराजू पर तौला जाएं, ना कि किसने किताना जोर लगाकर के संसद के सत्र को रोक दिया यह मानदंड़ नहीं हो सकता। मानदंड यह होगा कि संसद में कितने घंटे काम हुआ, कितना सकारात्मक काम हुआ। हम चाहते हैं, सरकार हर विषय पर चर्चा करने के लिए तैयार है, खुली चर्चा करने के लिए तैयार है। सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है और आजादी के अमृत महोत्सव में हम यह भी चाहेंगे कि संसद में सवाल भी हो, संसद में शंति भी हो।

हम चाहते हैं, संसद में सरकार के खिलाफ, सरकार की नीतियों के खिलाफ जितनी आवाज़ प्रखर होनी चाहिए, लेकिन संसद की गरिमा, स्पीकर की गरिमा, चेयर की गरिमा इन सबके विषय में हम वो आचरण करें जो आने वाले दिनों में देश की युवा पीढ़ी के काम आए। पिछले सत्र के बाद करोना की एक विकट परिस्थिति में भी देश ने 100 करोड़ से अधिक डोज़ेज, करोना वैक्सीन और अब हम 150 करोड़ की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। नए वैरिएंट की खबरें भी हमें और भी सर्तक करती हैं, और सजग करती है। मैं संसद के सभी साथियों को भी सतर्क रहने की प्रार्थना करता हूँ। आप सभी साथियों को भी सतर्क रहने के लिए प्रार्थना करता हूँ। क्योंकि आप सबका उत्तम स्वास्थ्य, देशवासियों का उत्तम स्वास्थ्य ऐसी संकट की घड़ी में हमारी प्राथमिकता है।

देश की 80 करोड़ से अधिक नागरिकों को इस करोनाकाल के संकट में और अधिक तकलीफ न हो इसलिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना से अनाज मुफ्त में देने की योजना चल रही है। अब इसे मार्च 2022 तक समय आगे कर दिया गया है। करीब दो लाख साठ हजार करोड़ रुपये की लागत से, अस्सी करोड़ से अधिक देशवासियों को गरीब के घर का चूल्हा जलता रहे इसकी चिंता की गई है। मैं आशा करता हूँ कि इस सत्र में देश हित के निर्णय हम तेजी से करे, मिलजुल करके करें। सामान्य मानव की आश- अपेक्षाओं को पूर्ण करने वाले करें। ऐसी मेरी अपेक्षा है।... बहुत- बहुत धन्यवाद।