सुशासन पर पांच बड़े विचार

Published By : Admin | March 26, 2014 | 15:14 IST

सक्रिय सरकार, जनता के साथ

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सरकार अर्थात उप-जनता और उप-सक्रिय प्रदान कर सकती है. पिछले दशक में गुजरात की सफलता संक्षिप्त रूप से इसी मंत्र के कारण है, जिसे नरेंद्र मोदी द्वारा ग्रहण किया गया.

नरेंद्र मोदी ने नवीनतम योजनाओं जैसे एक दिन का शासन के माध्यम से अच्छा शासन प्रदान करना सुनिश्चित किया है.

न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन

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गुजरात ने न्यूनतम प्रक्रियात्मक अवरोधों को रखते हुए अधिकतम शासन विस्तार सुनिश्चित किया है, ताकि लोगों को लाभ मिले.

और परिणाम असाधारण हैं. गुजरात ने एकबार फिर आर्थिक स्वतंत्रता में राज्य को दर्जा दिलवाया– लोगों के लिए अधिक शक्ति, उन्नति करने के लिए अधिक शक्ति!

दिखावा नहीं, काम

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भारत ने वादे और दिखावा बहुत देख लिए, अब समय है कार्यवाही का और आम जनता के हित में काम करने का

नरेन्द्र मोदी का गुजरात में शुरु से ही प्रयास रहा है कि जो भि कार्य हों वो जनता के हित के लिये हों कि सरकारी खानापूरी या दिखावे के लिए. "स्वागत" इसी कार्यविधि का एक उदाहरण है

रेड टेप के बजाय रेड कार्पेट

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रेड कार्पेट प्रगति की ओर ले जाता है, रेड टेप निष्क्रियता को जन्म देता है.

नरेंद्र मोदी ने रेड कार्पेट के साथ, छोटे और बड़े, उद्योगों का स्वागत किया और रेड टेप को कम किया. वाइब्रेंट गुजरात सभाओं की बार-बार सफलता इसे सबसे अच्छी तरह हाइलाइट करती है.

सबका साथ, सबका विकास (सामूहिक प्रयास, मिलीजुली वृद्धि)

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राष्ट्र तभी आगे बढ़ेगा जब प्रत्येक नागरिक उन्नति के मार्ग का हिस्सा हो.

सामूहिक प्रयासों और निर्णायक नेतृत्व के साथ मिलीजुली उन्नति करने के लिए आगे गुजरात आगे बढ़ा है. पढ़िए कैसे गुजरात मॉडल ने सभी जगह सफलता पाई है.

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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर प्रधानमंत्री ने विभाजन पीड़ितों के साहस को किया याद
August 14, 2026
प्रधानमंत्री ने परिश्रम और पुरुषार्थ के महत्व को दर्शाने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हम विभाजन से प्रभावित सभी लोगों के साहस को याद करते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास का वह एक ऐसा क्षण था जिसने कई जिंदगियां तबाह कर दीं, लोगों के परिवार उजड़ गए, कई लोगों को अपनों को खोना पड़ा और लोगों ने अत्यधिक पीड़ा झेली।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी स्थिति में भी लोगों ने शून्य से शुरू कर अपना जीवन पुनर्स्थापित किया, विपरीत परिस्थितियों को उपलब्धियों में बदला और राष्ट्र की प्रगति में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि इन लोगों का जीवन सभी को मानवीय जिजीविषा की शक्ति की याद दिलाता है। श्री मोदी ने उम्मीद जताई कि यह दिन हमारे देश में सद्भाव और भाईचारा बनाए रखने तथा विकसित भारत के निर्माण की दिशा में सामूहिक रूप से काम करने के हमारे संकल्प को और मजबूत करे।

प्रधानमंत्री ने उस भयावह दौर से उबरकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान देने वाले सभी देशवासियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अपने साहस और क्षमता से उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को साकार करने का उदाहरण प्रस्तुत किया। श्री मोदी ने सभी से सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने एक सुभाषितम् साझा करते हुए इस बात पर बल दिया कि परिश्रम, उद्यम और समर्पित प्रयासों से ही विविध कलाएं, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प तथा नवाचार विकसित होते हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसलिए, किसी को भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए बल्कि साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्यों की ओर दृढ़ता से अग्रसर रहना चाहिए क्योंकि पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर श्रृंखलाबद्ध पोस्ट में लिखा:

आज हम #PartitionHorrorsRemembranceDay मना रहे हैं। विभाजन से प्रभावित सभी लोगों के साहस को हम याद करते हैं। इतिहास का वह क्षण कई जिंदगियों को तहस-नहस कर देने वाला था…परिवार उजड़ गए, लोगों ने अपनों को खोया और असहनीय पीड़ा सहनी पड़ी।
इन सब पर विजय प्राप्त करते हुए, लोगों ने शून्य से अपना जीवन पुनर्स्थापित किया, विपत्ति को सफलता में परिवर्तित किया और राष्ट्र की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उनकी जीवन यात्राएं हमें मानवीय जिजीविषा की शक्ति की याद दिलाती हैं। आशा है कि यह दिन हमारे देश में सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने के हमारे संकल्प को और मजबूत करेगा और हम सब मिलकर एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।

"विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी देशवासियों का हृदय से नमन, जिन्होंने उस वीभत्स दौर से निकलकर देश की प्रगति में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने अपने साहस और सामर्थ्य से दिखाया कि कैसे विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्पों को सिद्ध किया जाता है। आइए, सद्भावना और एकजुटता की राष्ट्रीय भावना को और सशक्त करें।

उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः।
कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति॥”

It is through hard work, enterprise and dedicated effort that diverse arts, science, technological skills, craftsmanship and innovations flourish, paving the way for success. Therefore, one should not remain dependent on fate; rather, one should move steadily towards one's goals with courage, diligence and persistent effort, for it is human endeavor that shapes destiny.