भाजपा; झारखंड की सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि की गारंटी के साथ चुनावी मैदान में उतरी है: गढ़वा, में पीएम मोदी
जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी, घोर परिवारवादी दल हैं; हर हाल में सत्ता पर काबिज रहना ही इनका एकमात्र मकसद: गढ़वा, झारखंड में पीएम मोदी
जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी ने तुष्टिकरण की नीति को चरम पर पहुंचाया: गढ़वा, झारखंड में पीएम मोदी

जय जोहार,

मां गढ़ देवी, भगवान बंशीधर और शहीद नीलांबर-पीतांबर के इ पावन भूमि पर रउवा सबके राम-राम। ओ गोय, ठीक-ठाक बा ना ? आपने कुछ महीने पहले दिल्ली में लगातार तीसरी बार भाजपा-NDA सरकार बनाई। अब झारखंड में विधानसभा का चुनाव है। हम सभी को मिलकर यहां भाजपा-NDA के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार बनानी है। बनाएंगे? पक्का बनाएंगे? हर बूथ में जाके मेहनत करेंगे? आपका ये प्यार, ये उमंग, मैं देख रहा हूं, जितने लोग पंडाल में हैं, उससे दोगुना लोग बाहर धूप में खड़े हैं। (और मैंने देखा, यहां एक बेटी बहुत बढ़िया पेंटिंग बनाकर लाई थी। बेटा वो पेंटिंग मिल जाएगी मुझे। आपने पता लिखा है अपना। अरे ये कैसे कर दिया। अच्छा लिख करके दो। मैं आपको चिट्ठी भेजूंगा। बहुत बढ़िया चित्र बनाया आपने। ये अफसर लोग गए हैं, वो जरूर मुझे मिल जाएगा। लेकिन आप पता लिखकर जरा दे देना। वो हमारे लोग आ जाएंगे।) मैं आज आपका आशीर्वाद मांगने आया हूं। आज झारखंड में हर तरफ एक ही गूंज है। रोटी, बेटी, माटी की पुकार। झारखंड में भाजपा-NDA सरकार। मैं फिर से बुलाता हूं- बोलेंगे? सब बोलेंगे? रोटी-बेटी-माटी की पुकार, रोटी-बेटी-माटी की पुकार, रोटी-बेटी-माटी की पुकार। इस समय छठ के महापर्व का उत्साह भी चारों तरफ दिख रहा है। मैं छठी मैय्या की उपासना करने वाले सभी व्रतियों को भी अपनी शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

झारखंड के ये चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब पूरा देश जब आजादी के 100 साल होंगे तो हिंदुस्तान को विकसित होने का संकल्प लेकर के पूरा देश आगे बढ़ रहा है। यानि आने वाले 25 वर्ष देश के लिए भी और झारखंड के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। देश की आज़ादी के 100 वर्ष पूरे होंगे और झारखंड भी तब 50 वर्ष का होने वाला है। भाजपा ने तो झारखंड के लोगों की आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए अलग राज्य का निर्माण किया था। और कुछ लोग जो यहां बैठे हैं वो कहते थे हमारी छाती पर झारखंड बनेगा। अरे उनकी छाती पर झारखंड बन गया, लेकिन झारखंड के कुछ नेता उनकी गोदी में जाकर बैठ गए। विकसित झारखंड बनाने के लिए बीते 10 वर्षों में झारखंड के इंफ्रास्ट्रक्चर पर बहुत अधिक फोकस किया गया है। (ये पर्दा नीचे करो, पीछे लोगों को दिखाई नहीं देता है। शाबाश।) झारखंड को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ने वाली सड़कों को आधुनिक और चौड़ा किया जा रहा है। यहां रेल कनेक्टिविटी को सशक्त किया जा रहा है। आज झारखंड को 12 आधुनिक वंदेभारत ट्रेनें कनेक्ट कर रही हैं। गंगा जी पर जो वॉटरवे बन रहा है, उससे भी झारखंड कनेक्टेड है। जगदीशपुर-हल्दिया-बोकारो-धामरा गैस पाइपलाइन, झारखंड वालों को सस्ती गैस पहुंचाने में मदद कर रही है। यानि झारखंड में बेहतर सुविधाओं के लिए, यहां के किसानों, यहां के उद्योगों को बल देने के लिए केंद्र सरकार अपनी तरफ से हर कोशिश कर रही है। ये तब है जब झारखंड में JMM सरकार ने विकास के हर काम में रोड़े अटकाने की कोशिश की। लेकिन हम ईमानदारी से झारखंड के विकास की हर कोशिश पूरी ताकत से हर काम कर रहे हैं। जब यहां आप लोग डबल इंजन की सरकार बनाएंगे तो राज्य का विकास भी डबल तेजी से होने लगेगा।

साथियों,

भाजपा, झारखंड की सुविधा, सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि की गारंटी के साथ चुनावी मैदान में उतरी है। मैं झारखंड भाजपा को बहुत-बहुत बधाई देता हूं कि कल उसने बहुत ही शानदार संकल्प पत्र जारी किया है। ये संकल्प पत्र, रोटी, बेटी और माटी के सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि के लिए समर्पित है। माताओं-बहनों-बेटियों के लिए, उनके कल्याण के लिए, उनके हकों के लिए इसमें अनेक संकल्प लिए गए हैं। गोगो दीदी योजना से हर महीने माताओं-बहनों को 2100 रुपए मिलेंगे। मेरे गरीब परिवार की बहनों को पहले हमने उज्जवला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन दिए। अब झारखंड में बनने जा रही भाजपा-NDA सरकार, 500 रुपए में सिलेंडर देगी। अगले साल दीपावली और रक्षाबंधन पर झारखंड की बहनों को 2 मुफ्त सिलेंडर भी मिलने वाले हैं। भाजपा ने ओडिशा की, छत्तीसगढ़ की, मध्य प्रदेश की बहनों को ये घोषणा की और लागू भी कर दिया, उनको पहुंचा भी दिया। इसलिए एक तरफ भाजपा का गारंटी पूरा करने का ट्रैक रिकॉर्ड है। वहीं दूसरी तरफ JMM-कांग्रेस-RJD सरकार के झूठे वायदे हैं। इन्होंने 5 साल तक माताओं-बहनों के लिए कुछ नहीं किया। अब जब भाजपा की योजनाएं सामने हैं, तब इन्होंने आनन-फानन में महिलाओं की आंखों में धूल झोंकने के लिए नकल करके नई-नई घोषणाएं की हैं। ये लोग नकल तो कर सकते हैं, लेकिन भाजपा के पास जो नेक-नीयत है वो कहां से लाएंगे? और इनकी योजनाएं कि अब करेंगे, तब करेंगे, दिसंबर में...अरे तुम रहने ही वाले नहीं हो भाई। ये चुनाव में विदाई पक्की है।

साथियों,

JMM-कांग्रेस वालो ने आपको गरीबों के घर के नाम पर भी धोखा ही दिया है। केंद्र की हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत झारखंड में 16 लाख गरीबों के घर बनाए। कितने? 16 लाख, ये आंकड़ा बहुत बड़ा होता है भाई। और ये घर किसको मिले। जिनके पास पक्का घर नहीं था, ऐसे मेरे ST-SC-OBC परिवारों को मिले। करीब 1 लाख 15 हज़ार घर तो यहां गढ़वा जिले के गरीब परिवारों को ही मिल चुके हैं। अब आप कह रहे थे कि यहां पहले कोई प्रधानमंत्री नहीं आया। ये मोदी पहला प्रधानमंत्री है जो यहां आया। जो बड़े-बड़े अच्छे-अच्छे काम होते हैं न, वो मेरे नसीब में ही लिखे हुए हैं। अरे गढ़वा के लोगों का प्यारा पाना, आशीर्वाद पाने के लिए भी तो नसीब चाहिए। ये नसीब मोदी को मिला है इसलिए आपके आशीर्वाद पाने के लिए, आपके पास आ गया। लेकिन JMM-कांग्रेस से आप पूछिए कि अबुआ-आवास योजना का क्या हुआ? क्यों इस योजना का नाम लेकर आपके साथ विश्वासघात किया गया?

साथियों,

लोकसभा चुनाव के दौरान मैंने देशभर में तीन करोड़ नए घर बनाने की गारंटी दी थी। हमने सरकार बनते ही इस गारंटी पर काम शुरू भी कर दिया। अब झारखंड भाजपा ने भी 21 लाख नए आवास बनाने का संकल्प लिया है। झारखंड के हर गरीब के पास पक्का घर हो, ये भाजपा की गारंटी है। अच्छा मेरा एक काम करोगे भाई? सबके सब हाथ ऊपर करके बताइए करोगे? पक्का करोगे? देखिए ये चुनाव में जब आप लोगों से मिलने जाएं तो कहीं आपको लोग अगर झुग्गी-झोपड़ी में रहते नजर आते हैं, कोई कच्चे घर में मिट्टी के छोटे से घर में रहता है, आप उसको कहना, यहां 23 तारीख के बाद भाजपा सरकार बनने वाली है। और उसको कहना कि मोदी जी आए थे, और उन्होंने कहा है कि उसका घर अब पक्का बन जाएगा, मेरी तरफ से कह देना। आप ही मेरे लिए मोदी हैं। यहां का मेरा हर कार्यकर्ता मोदी है, आप वादा कर देना, कर दोगे? मैं पूरा करूंगा दोस्तों।

साथियों,

झारखंड के नौजवानों में टैलेंट की कमी नहीं है। देश ने युवाओं का टैलेंट, ये हमारे झारखंड की बेटियां, झारखंड के बेटे खेल के मैदान में झारखंड का जज्बा दिखाते हैं। झारखंड के युवाओं का सामर्थ्य बढ़े, उन्हें नए अवसर मिलें, ये सरकार की जिम्मेदारी होती है। लेकिन JMM-कांग्रेस-RJD ने झारखंड के युवाओं के साथ भी धोखा ही किया है। बीते 5 वर्षों में झारखंड के नौजवानों के साथ क्या-क्या हुआ, ये भी आपने देखा है। इन लोगों ने झारखंड के नौजवानों के लिए बेरोज़गारी भत्ता देने का वादा किया था। लेकिन ये वादा पूरा नहीं किया। वादा किया था कि नहीं किया था? वादा किया था कि नहीं किया था? झूठ बोलकर वोट ले गए थे कि नहीं ले गए थे? फिर आपका वादा तोड़ा कि नहीं तोड़ा? आपको एक रुपया भी दिया नहीं न? आप उनको सजा दोगे कि नहीं दोगे? साथियों, इतना ही नहीं, भर्तियों में धांधली, पेपर लीक, ये तो यहां का उद्योग बन गया उद्योग। सिपाही भर्ती के दौरान, JMM सरकार की लापरवाही के कारण कई नौजवानों की दुखद मृत्यु हो गई। अब झारखंड भाजपा ने इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया है। झारखंड में भाजपा सरकार बनने के बाद 3 लाख सरकारी पदों को पारदर्शी तरीके से भरा जाएगा। अभी हरियाणा में लोगों ने तीसरी बार भाजपा सरकार बनाई। अभी एक महीना नहीं हुआ है। वहां के नौजवान डबल दिवाली मना रहे हैं। क्यों? सरकार ने आते ही बिना खर्ची-बिना पर्ची 25 हजार लोगों को रोजगार दे दिया। वादा किया था, पूरा कर दिया। लाखों नौजवानों के लिए युवा साथी भत्ता देने का संकल्प भी लिया गया है। युवा साथी भत्ते के तौर पर यहां के युवाओं को 2 हजार रुपए दिए जाएंगे। सभी परीक्षाओं के लिए वार्षिक कैलेंडर, जारी होने से पेपर लीक माफिया पर भी लगाम लगेगी। केंद्र सरकार पहले ही पेपर लीक करने वालों के लिए सख्त सज़ा देने का कानून बना चुकी है।

साथियों,

हमने लोकसभा चुनाव के दौरान देश के करोड़ों नौजवानों के लिए रोज़गार, इंटर्नशिप और कौशल विकास की गारंटी दी थी। पहले 100 दिन के भीतर ही, इसके लिए हम 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक का पीएम पैकेज हमने घोषित कर दिया। पीएम इंटर्नशिप कार्यक्रम लागू हो चुका है। इसके तहत हज़ारों नौजवानों ने रजिस्ट्रेशन भी कर लिया है। बड़ी कंपनियों में इंटर्नशिप पर पीएम पैकेज के तहत यहां के युवाओं को भी हर महीने 5 हजार रुपए मिलेंगे।

साथियों,

किसानों का हित, किसानों की आय बढ़ाना, भाजपा की प्राथमिकता है। झारखंड भाजपा ने धान की सरकारी खरीद, 3100 रुपए प्रति क्विंटल करने का भी फैसला लिया है। कितना? 3100 रुपए, हर किसान के घर जाकर बताओगे। छोटे और सीमांत किसानों के लिए, पशुपालकों के लिए भी आर्थिक मदद देने की योजना घोषित की है। यही नहीं, आदिवासी परिवारों की आजीविका बढ़ाने के लिए भी अनेक अच्छी घोषणाएं की गई हैं। हर आदिवासी ब्लॉक में केंदू पत्ता, महुआ, और मशरूम जैसे उत्पादों से जुड़ी प्रोसेसिंग और स्टोरेज क्षमता बनाई जाएगी।

साथियों,

मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि इन घोषणाओं को पूरा करने के लिए भाजपा-NDA सरकार पूरी ताकत से काम करेगी। ये मोदी की आपको गारंटी है। साथियों, आजकल अफवाहें फैलाना, इसका एक उद्योग चल पड़ा है। कुछ लोग भांति-भांति की दुकानें खोलकर बैठे हैं। वो अफवाह फैलाने का माल बेच रहे हैं। आपको ऐसी किसी भी अफवाह में नहीं आना है। मुझे याद है, जब हमने पीएम किसान सम्मान निधि योजना लागू की थी 2018 में। तो JMM वालों ने यहां के गांव-गांव जाकर किसानों से झूठ बोला। और क्या बोला, उन्होंने बोला देखिए, ये मोदी अभी पैसा भेज रहा है न, इसे खाते में मत डलवा देना, इससे मत जुड़ना। क्योंकि चुनाव जीतने के बाद मोदी ये पैसा ब्याज समेत तुमसे वापस ले लेगा। ऐसा झूठ चलाया। और मेरे भोले-भाले गांव के किसान भाइयों ने मोदी जो पैसा भेजता था उसे लेने से मना कर दिया। बोले हमें नहीं चाहिए, पैसा देना पड़ेगा। जब दुबारा आपने 2019 में सेवा का मौका दिया तब जाकर ये झूठ का पता चला कि ये JMM कितना झूठ बोलते थे। इस बार भी रोज नए-नए झूठ फैलाने का काम, एक परिवार दिल्ली में ये धंधा करता है, दूसरा इधर झारखंड में करता है। मुझे खुशी है कि आज पीएम किसान सम्मान निधि के 600 करोड़ रुपए से ज्यादा गढ़वा के किसानों को मिल चुके हैं।

साथियों,

आजादी के बाद से ही कांग्रेस की राजनीति का बहुत बड़ा आधार रहा है- जनता से झूठ, जनता को धोखा। ये झूठे वायदे करके वोटरों को धोखा देते हैं। हमारे निर्दोष भोले-भाले हमारे नागरिकों की आंख में धूल झोंक देते हैं। अभी ताज़ा-ताज़ा हरियाणा ने भी इनको सबक सिखाया है। वहां भी इन्होंने झूठ फैलाने की बहुत कोशिश की थी। महिलाओं-किसानों-नौजवानों-SC/ST/OBC, सभी को कुछ न कुछ झूठ बेचने की कोशिश की थी। लेकिन हरियाणा वालों ने इनके झूठ को टिकने नहीं दिया। कांग्रेस और उसके साथी जहां-जहां भी झूठ बोलकर सत्ता में आए हैं, उस राज्य को उन्होंने बर्बाद कर दिया है। इन्होंने हिमाचल को तबाह कर दिया है। वहां कर्मचारियों के सामने सैलरी और पेंशन तक का संकट आने लगा है। अपने हक का DA पाने के लिए कर्मचारियों को आंदोलन करने पड़ रहे हैं। यहां जो सरकारी मुलाजिम हैं न, जरा हिमाचल के अपने परिचितों से पूछ लो, क्या हाल करके रखा है इन्होंने। तेलंगाना में भी कांग्रेस सरकार के झूठे वायदों की वजह से वहां की जनता पस्त पड़ी हुई है। कर्नाटक में जो कुछ हो रहा है, उससे तो कांग्रेस के भीतर ही घमासान मचा है। कांग्रेस के जो अध्यक्ष हैं, उन्होंने भी मान लिया है कि कांग्रेस झूठी गारंटी देती है। मैं तो हैरान हूं, पता नहीं कैसे हमारे खड़गे जी के मुंह से जाने-अनजाने सच निकल गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की जो ये अनाप-शनाप घोषणाएं हैं, ये राज्यों को दिवालिया कर देंगी। इसलिए आपको कांग्रेस और उसके साथियों की घोषणाओं पर कभी भरोसा नहीं करना है। मेरी बात मानोगे? पक्का मानोगे?

साथियों,

झारखंड का एक और बहुत बड़ा दुश्मन है और वो है परिवारवाद। JMM-कांग्रेस-RJD, ये तीनों दल घोर परिवारवादी हैं। ये लोग चाहते हैं कि सत्ता की चाबी केवल इन्हीं के परिवार के पास रहे। JMM का भी यही मॉडल है। अगर कोई अपनी काबिलियत से आगे बढ़ भी गया, तो उसके साथ कैसा बर्ताव करते हैं, ये भी हमने देखा है। हमारे चंपई सोरेन जी के साथ इन्होंने क्या किया? इन लोगों ने एक आदिवासी बेटे को अपमानित करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। जिनके लिए अपने परिवार से बड़ा कुछ नहीं है, वो झारखंड के आप सभी लोगों की परवाह भला क्यों करेंगे? इसलिए मैं झारखंड के हर नौजवान से कहूंगा कि ऐसे स्वार्थी दलों को अच्छे से सबक सिखाना है। भाइयों-बहनों, जब मैं कहता हूं कि मेरा अपना परिवार हो या न हो, लेकिन आप सब मेरा परिवार हैं। मेरी बात में आपको सच लगता है कि नहीं लगता है? क्या मैं आपके लिए जीता हूं कि नहीं जीता हूं? क्या मैं आपके लिए दिन-रात काम करता हूं कि नहीं करता हूं? मैं दिन-रात आपके लिए सोचता हूं कि नहीं सोचता हूं? इस देश के किसी नागरिक में इस बात को लेकर शक नहीं है। मेरे लिए सबकुछ 140 करोड़ देशवासी हैं। उनके लिए सबकुछ उनका अपना परिवार है।

साथियों,

आप भी जानते हैं, भ्रष्टाचार दीमक की तरह देश को खोखला करता है। भ्रष्टाचार, सबसे अधिक गरीब को, दलित, पिछड़े, आदिवासी को सबसे ज्यादा दुखी करता है, तबाह करता है, बर्बाद करता है। झारखंड ने तो बीते 5 सालों में देखा है कि कैसे JMM-कांग्रेस-RJD सरकार ने भ्रष्टाचार की सारी सीमाएं तोड़ दी है। मुख्यमंत्री हो, मंत्री हो, विधायक हो, सांसद हो, ऐसा कोई बचा नहीं जिन पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप नहीं हैं। JMM के मंत्री के लोगों के पास से नोटों के पहाड़ निकले। क्या निकलता है? क्या निकलता है? कांग्रेस के सांसद के घर से नोटों के पहाड़ निकले। मैंने तो आंखों से कभी इतने नोटों के पहाड़ नहीं देखे जी। मैंने टीवी पर देखा कि लूट के नोटो के पहाड़ इतने बड़े होते हैं। अरे इंसान तो छोड़िए, मशीनें तक गिनते-गिनते थक गईं। और ये पैसा किसका था भाई? ये पैसा किसका था? ये पैसा झारखंड के लोगों का था कि नहीं था? ये पैसा झारखंड के नौजवान का था कि नहीं था? ये पैसा झारखंड की बेटियों का था कि नहीं था? ये पैसा झारखंड के गरीबों का था कि नहीं था? ये पैसा झारखंड के आदिवासियों का था कि नहीं था? ये पैसा झारखंड के मेरे किसान भाइयों का था कि नहीं था? लूट लिया। कहीं रोड बननी था, कहीं बस अड्डा बनना था, कहीं पुलिया बनानी थी, कहीं स्कूल-अस्पताल बनना था, कहीं बिजली की लाइन पहुंचनी थी। सबकुछ लूट लिया। आपके हक का, आपके अधिकार का ये इन्होंने लूटा है, ये आपका जेब काटने वाले लोग हैं।

साथियों,

मुझे इस क्षेत्र के भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों की भी रिपोर्ट मिली है। इन्होंने तो आपके हक के पानी के नल तक को नहीं छोड़ा। हमने हर घर जल पहुंचाने की इतनी बड़ी योजना बनाई। केंद्र सरकार ने दिल्ली से हजारों करोड़ रुपए भेजा। लेकिन यहां JMM-कांग्रेस के लोगों ने वो पैसा अपनी तिजोरी में भर लिया। देश में जहां भाजपा सरकारें हैं, वहां अनेक राज्यों में हर घर जल अभियान बहुत सफलता से चल रहा है। लेकिन झारखंड में हमारे प्रयासों के बावजूद, ढेर सारे पैसे भेजने के बावजूद, घर-घर नल पहुंचाने का काम ठप पड़ा है। और अभी आपके सब नेता बता रहे थे भाषण में कि मोदी जी, गढ़वा को पानी मिल जाए न, गढ़वा का पलायन रुक जाएगा। मैं आपकी बात से सहमत हूं। साथियों, मैं जिस गुजरात से आता हूं, उस गुजरात में कच्छ और सौराष्ट्र ऐसे ही पानी की मुसीबत में जीता था। पानी की ट्रेनें भेजनी पड़ती थी वो हाल था। जब 2001 में वहां के लोगों ने काम दिया मुख्यमंत्री का, मैं पानी के पीछे पड़ गया। मैंने कहा कि मैं पानी पहुंचाकर रहूंगा। और बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया। वर्षा की एक-एक बूंद रोकने का अभियान चलाया। मरी-पड़ी नदियों को जिंदा करने के लिए लोगों को लगाया। और जिस कच्छ और सौराष्ट्र से पलायन होता था आज पानीदार बन गया और लोग वापस आने लग गए। भाइयों-बहनों, अगर दिल में कुछ करने का जज्बा हो न तो मेरा गढ़वा भी पानीदार बन जाएगा। और एक बार पानी पहुंचा तो पलायन तो रुकेगा जो पलायन होके गए न वो भी वापस आ जाएंगे दोस्तों। जनभागीदारी से वर्षा की एक-एक बूंद बचाकर हम समस्याओं का समाधान कर सकते हैं।

साथियों,

आज ये क्षेत्र, बालू तस्करी का बहुत बड़ा केंद्र बन चुका है। बालू बोलते ही आपको सब दिखाई दिया। सच्चाई ये है कि झारखंड की सरकार, माफिया की गुलाम बनी हुई है। जनता पलायन के लिए मजबूर है और ये लोग सरकारी ठेकों में बंदरबांट करने में व्यस्त हैं। यहां हर काम-धंधा बंद होता जा रहा है, लेकिन ट्रांसफर-पोस्टिंग का धंधा खूब फल-फूल रहा है। इसलिए आपको याद रखना है, JMM-कांग्रेस-RJD ने ये जो माफिया तंत्र बनाया है, भाजपा-NDA को दिया आपका हर वोट उस पर चोट करेगा।

साथियों,

JMM-कांग्रेस-RJD ने तुष्टिकरण की नीति को चरम पर पहुंचा दिया है। ये तीनों दल सामाजिक ताना-बाना तोड़ने पर आमादा हैं, ये तीनों दल घुसपैठिया समर्थक हैं। बांग्लादेशी घुसपैठियों के वोट पाने के लिए ये इन घुसपैठियों को पूरे झारखंड में बसा रहे हैं। जब स्कूलों में सरस्वती वंदना तक पर रोक लगने लगे, तो पता चलता है कि खतरा कितना बड़ा है। जब तीज-त्योहारों में पत्थरबाजी होने लगे, माता दुर्गा को भी रोक दिया जाए, जब कर्फ्यू लगने लगे, तो पता चलता है कि स्थिति कितनी खतरनाक है। जब बेटियों के साथ शादी के नाम पर छल-कपट होने लगे, तो पता चलता है कि पानी सिर के ऊपर से गुजरने लगा है। जब घुसपैठ का मामला कोर्ट में जाए और प्रशासन इससे इनकार करे तो पता चलता है कि सरकारी तंत्र में ही घुसपैठ हो चुकी है। ये आपकी रोटी भी छीन रहे हैं, ये आपकी बेटी भी छीन रहे हैं और आपकी माटी को भी हड़प रहे हैं। अगर JMM-कांग्रेस-RJD की यही कुनीति जारी रही, तो झारखंड में आदिवासी समाज का दायरा सिकुड़ जाएगा। ये आदिवासी समाज और देश की सुरक्षा, दोनों के लिए बड़ा खतरा है। इसलिए इस घुसपैठिया गठबंधन को अपने एक वोट से उखाड़ फेंकना है। फेंकेंगे? एक-एक वोट रोटी-बेटी-माटी को बचाएगा। बचाओगे?

साथियों,

झारखंड का तेज़ विकास तभी संभव है, जब यहां ऐसी सरकार हो जो केंद्र की योजनाओं को तेज़ी से लागू करे। ये लोग खुद काम करते नहीं और दूसरों को भी काम नहीं करने देते। दशकों तक इनके कुशासन का नतीजा, झारखंड ने भुगता है। गढ़वा हो, पलामू हो, राज्य के ऐसे अनेक जिले हैं, जिनको इन्होंने पिछड़ा घोषित कर रखा था। हमने यहां के विकास को प्राथमिकता दी। देश के जो अच्छे और युवा अफसर हैं, उनको यहां तैनात किया गया। ऐसे जो हमारे आकांक्षी जिले हैं, वहां अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, रोड, रेल, इंटरनेट, ऐसी हर सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है। ये लोग कैसे योजनाओं में भी रोड़े अटकाते हैं, इसका उदाहरण उत्तर कोयल जलाशय- मंडल डैम है। कई दशक पहले इसका निर्माण कार्य शुरु हुआ था। ये समय पर बन जाता तो लाखों किसानों को इसका लाभ होता। पानी के लिए तरसना न पड़ता। हमने इस परियोजना को गति देने का फैसला लिया। इसके लिए हज़ारों करोड़ रुपए स्वीकृत किए। 2019 में इसकी आधारशिला रखी गई। लेकिन यहां रोड़े अटकाने वाली JMM सरकार बन गई। यहां जो डूब क्षेत्र के प्रभावित हैं, उनके लिए पिछले साल ही हमने राज्य सरकार को स्पेशल पैकेज की मंज़ूरी दी है। लेकिन राज्य सरकार ने प्रभावितों को ये पैसा भी नहीं दिया। लूटने में लगे रहे। यहां भाजपा-NDA सरकार बनते ही, इस परियोजना पर तेज़ी से काम किया जाएगा !

साथियों,

यहां अगर भाजपा सरकार रहती तो सोन-कनहर पाइप लाइन सिंचाई परियोजना कब की पूरी हो चुकी होती। इसी तरह यहां जो चियांकी एयरपोर्ट है, इसको हम सस्ती हवाई यात्रा वाली योजना उड़ान में शामिल करना चाहते हैं। लेकिन यहां की सरकार इसमें भी दिलचस्पी नहीं ले रही। हमने पलामू और गढ़वा के लिए सोलर पार्क स्वीकृत किए हैं। JMM की सरकार, लोगों को अंधेरे में रख रही है, लेकिन इन परियोजनाओं के लिए ज़मीन नहीं दे रही। यहां के नौजवानों को नौकरियां मिले, झारखंड का विकास हो, ये इन लोगों को मंज़ूर नहीं है।

साथियों,

भाजपा-NDA, विकास और विरासत दोनों को महत्व देते हैं। हम उन क्षेत्रों, उन वर्गों के विकास पर विशेष बल दे रहे हैं, जो अतीत में पिछड़ गए थे। हम आदिवासी क्षेत्रों का विकास भी कर रहे हैं और आदिवासी विरासत को भी पूरी शान से आगे बढ़ा रहे हैं। ये भाजपा ही जो पूरे देश में आदिवासी परंपरा, कला-संस्कृति के लिए समर्पित 10 बड़े संग्रहालय बना रही है। रांची में जो भव्य संग्रहालय बना है, उसके उद्घाटन का अवसर मुझे ही मिला था। कुछ दिन बाद ही धरती आबा बिरसा मुंडा जी का जन्म दिवस है। ये भाजपा-NDA सरकार ही है, जिसने धरती आबा के जन्म दिवस को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया था। इस वर्ष का आयोजन तो और भी विशेष है। इस 15 नवंबर से अगले 2 वर्ष तक, धरती आबा बिरसा मुंडा जी की डेढ़ सौवीं जन्मजयंति के समारोह देशभर में मनाए जाएंगे। पूरा देश जनजातीय गौरव वर्ष का उत्सव मनाएगा। पूरा देश इसमें शामिल होगा। पूरी दुनिया भगवान बिरसा मुंडा और आदिवासी समाज के योगदान को जानने समझने लगेगी।

साथियों,

झारखंड का तेज़ विकास, भाजपा की गारंटी है, NDA की गारंटी है। इसलिए मैं गढ़वा से पूरे झारखंड के भाई-बहनों से आग्रह करुंगा, भाजपा के, आजसू के, JDU और LJP के उम्मीदवार जहां-जहां हैं, उनको भारी मतों से विजयी बनाएं। हमें मिलकर, झारखंड को विकास के उस सफर पर ले जाना है, जो पूर्वी भारत के विकास को तेज़ी दे सके। आप इतनी बड़ी संख्या में हमें आशीर्वाद देने आए, मैं आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। लेकिन मेरा एक काम करेंगे? सबके सब हाथ ऊपर करके बताएं, मेरा एक काम करेंगे? जरा जोर से बताएं करेंगे? घर-घर जाएंगे? लोगों से मिलेंगे? एक काम करना, हर परिवार में जाकर कहना, अपने मोदी जी गढ़वा आए थे। और मोदी जी ने आपको जोहार कहा है। मेरा जोहार पहुंचा देंगे? मेरा राम-राम पहुंचा देंगे? (एक नौजवान बहुत बढ़िया चित्र बनाकर लाए हैं, हमारे सिक्यूरिटी वालों से कहूंगा कि वो चित्र उनसे लीजिए। जरा अपना पता पीछे लिख देना भइया। मैं आपको चिट्ठी भेजूंगा। इसके पीछे अपना एड्रेस लिख देना। जरा ले लीजिए वो फोटोग्राफ, चित्र ले लीजिए।)
मेरे साथ बोलिए, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय ! बहुत-बहुत धन्यवाद।

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
Why global AI leaders are flocking to the India AI Impact Summit in New Delhi

Media Coverage

Why global AI leaders are flocking to the India AI Impact Summit in New Delhi
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
21वीं सदी के इस दशक में भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है: ET Now ग्लोबल बिजनेस समिट में पीएम मोदी
February 13, 2026
Amid numerous disruptions, this decade has been one of unprecedented development for India, marked by strong delivery and by efforts that have strengthened our democracy: PM
In this decade of the 21st century, India is riding the Reform Express: PM
We have made the Budget not only outlay-focused but also outcome-centric: PM
Over the past decade, we have regarded technology and innovation as the core drivers of growth: PM
Today, we are entering into trade deals with the world because today's India is confident and ready to compete globally: PM

आप सभी का इस ग्लोबल बिजनेस समिट में, आप सबका मैं अभिनंदन करता हूं। हम यहां A Decade Of Disruption, A Century Of Change, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। विनीत जी का भाषण सुनने के बाद मुझे लगता है कि मेरा काम बहुत सरल हो गया है। लेकिन एक छोटी request करूं, इतना सारा आपको पता है, तो कभी ET में तो दिखना चाहिए।

साथियों,

21वीं सदी का बीता दशक अभूतपूर्व डिसरप्शन का रहा है। ग्लोबल Pandemic, ग्लोब के अलग-अलग हिस्सों में तनाव, युद्ध और ग्लोब के संतुलन को हिला देने वाले Supply Chain Breakdowns, दुनिया ने एक दशक के भीतर काफी कुछ देख लिया। लेकिन साथियों, कहते हैं, संकट के समय ही किसी देश के सामर्थ्य पता चलता है और मुझे बहुत गर्व है, अनेक Disruptions के बीच भी भारत के लिए यह दशक, अभूतपूर्व डेवलपमेंट का रहा है, शानदार डिलीवरी का रहा है और डेमोक्रेसी को मजबूत करने वाला रहा है। जब पिछला दशक शुरू हुआ था, तो भारत ग्यारहवें नंबर की अर्थव्यवस्था था। इतनी उथल-पुथल में पूरी आशंका थी कि भारत और नीचे चला जाएगा, लेकिन आज भारत, बहुत तेजी के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने जा रहा है। और आप जिस Century Of Change की बात कर रहे हैं, उसका बहुत बड़ा आधार और यह मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं, इसका बहुत बड़ा आधार भारत ही होने जा रहा है। आज भारत, दुनिया की ग्रोथ में 16 परसेंट से ज्यादा योगदान दे रहा है। और मुझे विश्वास है, इस सेंचुरी के हर आने वाले साल में हमारा योगदान और भी बढ़ता रहेगा, निरंतर बढ़ता रहेगा। मैं वह मदान की तरह astrologer के रूप में नहीं आया हूं। भारत, दुनिया की ग्रोथ को ड्राइव करेगा, दुनिया की ग्रोथ का नया इंजन बनेगा।

साथियों,

दुनिया में सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद एक नई वैश्विक व्यवस्था बनी थी, एक नए वर्ल्ड ऑर्डर ने आकार लिया था। लेकिन सात दशक के बाद, वो व्यवस्था टूट रही है। दुनिया आज एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की तरफ बढ़ रही है। आखिर यह क्यों हो रहा है? ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि तब जो व्यवस्था बनी थी, उसकी नींव One Size Fits All, इसी सोच पर टिकी थी। तब ये माना गया कि World Economy Core में होगी, Supply Chains मजबूत और विश्वसनीय हो जाएगी। इस व्यवस्था में नेशन्स को केवल कंट्रीब्यूटर्स के रूप में ही देखा गया। लेकिन आज, इस मॉडल को चुनौती मिल रही है। यह अपनी प्रासंगिकता खोता जा रहा है। आज हर देश को यह पता चल रहा है कि उसे अपनी रज़ीलियन्स खुद बनानी होगी।

साथियों,

आज दुनिया जिसकी चर्चा कर रही है। उसको भारत ने 2015 में, आज से 10 साल से पहले, 2015 में ही अपनी नीति का हिस्सा बना लिया था। दस साल पहले जब नीति आयोग बना, तो उसके फाउंडिंग डॉक्यूमेंट में ही भारत ने अपना विजन क्लीयर कर दिया था और विजन यह कि भारत किसी दूसरे देश से कोई सिंगल डेवलपमेंट मॉडल इंपोर्ट नहीं करेगा। हम भारत के विकास के लिए भारतीय अप्रोच को लेकर ही चलेंगे। इस नीति ने भारत को अपने हिसाब से, अपनी रिक्वायरमेंट के हिसाब से, अपने हित में फैसले लेने का आत्मविश्वास दिया और यह एक बड़ा कारण है कि डिसरप्शन के दशक में भी भारत की इकोनॉमी कमजोर नहीं पड़ी, निरंतर मजबूत होती गई।

साथियों,

आज 21वीं सदी के इस दशक में भारत Reform Express पर सवार है और इस Reform Express की सबसे बड़ी खासियत यह है कि हम इसे compulsion में नहीं, बल्कि conviction के साथ, Reform के कमिटमेंट के साथ गति दे रहे हैं। यहां तो बहुत बड़ी-बड़ी संख्या में बड़े-बड़े expert बैठे हैं, अर्थजगत के दिग्गज बैठे हैं। आपने भी 2014 से पहले का दौर देखा है। जब तक हालात मजबूर न कर दें, जब तक कोई संकट न आ जाए, जब कोई और रास्ता न बचे, तब मजबूरन रिफॉर्म्स किए जाते थे। आप याद करिए, 1991 का रिफॉर्म्स भी तब हुआ, जब देश पर दिवालिया होने का खतरा आ गया था। जब देश को सोना गिरवी रखना पड़ा था। पहले की सरकारों का यही तरीका था, वो reforms compulsion में ही किया करती थीं। जब 26/11 का आतंकी हमला हुआ, कांग्रेस सरकार की कलई खुल गई, तो NIA का गठन किया गया। जब पावर सेक्टर बर्बाद हो गया, ग्रिड फेल होने लगे, तब मजबूरी में कांग्रेस को पावर सेक्टर में याद आई।

साथियों,

ऐसी एक लंबी सूची है, जो याद दिलाती है कि जब compulsion में, मजबूरी में reform होता है, तो न सही नतीजे मिलते हैं, न देश को सही परिणाम मिलते हैं।

साथियों,

आज मुझे गर्व है कि बीते 11 वर्षों में हमने पूरे conviction के साथ रिफॉर्म किए हैं और यह रिफॉर्म Policy में हुए हैं, Process में हुए, Delivery में हुए और इतना ही नहीं, Mindset में भी reform हुआ है। क्योंकि साथियों, अगर पॉलिसी बदले, लेकिन प्रोसेस वही रहे, माइंडसेट वही रहे, डिलीवरी ठीक से ना हो, तो रिफॉर्म्स सिर्फ और सिर्फ कागज का टुकड़ा बनकर रह जाता है। इसलिए हमने पूरे सिस्टम को बदलने के लिए ईमानदारी से कोशिश की है।

साथियों,

मैं प्रोसेस की बात करूं, तो एक साधारण लेकिन बहुत जरूरी प्रोसेस है, कैबिनेट नोट्स का। यहां कई लोगों को अंदाजा होगा कि पहले की सरकारों में एक कैबिनेट नोट बनने में ही कुछ महीने लग जाते थे, महीने। अब इस स्पीड से देश का विकास कैसे होता? इसलिए हमने इस process को बदला। हमने डिसीजन मेकिंग को time-bound और technology-driven बनाया। हमने यह तय कर दिया कि इस अफसर की टेबल पर यह कैबिनेट नोट इतने घंटे से ज्यादा रहेगा ही नहीं। या तो रिजेक्ट करो या निर्णय लो और इसका नतीजा आज देश देख रहा है।

साथियों,

मैं आपको रेलवे ओवर ब्रिज के अप्रूवल का भी उदाहरण दूंगा। पहले R.O.B का एक डिजाइन अप्रूव कराने के लिए कई वर्ष लग जाते थे, कई सारी क्लीयरेंस की ज़रूरत थीं, कई जगह चिट्ठियां लिखनी पड़ती थीं और यह मैं प्राइवेट के लिए नहीं कह रहा हूं, सरकार को। हमने इसको भी बदला और आज देखिए कितनी तेजी से रोड और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। विनीत जी ने बहुत विस्तार से इस बात को बताया।

साथियों,

एक बड़ा Interesting उदाहरण बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर का है। अब बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर देश की security से जुड़ा हुआ होता है। आप कल्पना कर सकते हैं, एक समय था, जब बॉर्डर एरियाज़ में एक साधारण सी सड़क बनाने के लिए भी कुछ परमिशन दिल्ली से लेनी पड़ती थी। जिला स्तर पर निर्णय लेने के यानी इसके सामने एक प्रकार से उसका कोई अधिकारी ही नहीं थे, दीवार ही दीवार थीं, वो निर्णय नहीं कर सकता था और इसलिए तो दशकों बाद भी हमारे देश में बॉर्डर इंफ्रा इतना बेहाल रहा। 2014 के बाद हमने इस प्रोसेस में भी रिफॉर्म किया, हमने स्थानीय प्रशासन को Empower किया और आज हम देश के बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से डेवलप होते देख रहे हैं।

साथियों,

बीते दशक में भारत के जिस Reform ने दुनिया में हलचल मचा दी है, वो है UPI, भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम। यह सिर्फ एक App नहीं है, यह policy, process और delivery के एक शानदार कन्वर्जेंस का प्रमाण है। जो लोग कभी बैंकिंग और फाइनेंस से जुड़े बेनिफिट्स के बारे में सोच भी नहीं सकते थे, UPI देश के ऐसे नागरिकों को सर्व कर रहा है। यह जो डिजिटल इंडिया है, डिजिटल पेमेंट सिस्टम है, जनधन आधार मोबाइल की ट्रिनिटी है, यह रिफॉर्म किसी compulsion से नहीं हुआ, यह हमारा कन्विक्शन था। और कन्विक्शन यह था कि जिन लोगों तक पहले की सरकारें कभी नहीं पहुंची, हमें ऐसे नागरिकों का इंक्लूजन करना है। जिसे कोई नहीं पूछता, उसे मोदी पूजता है। और इसलिए यह रिफॉर्म्स किए गए हैं और आज भी हमारी सरकार इसी सोच के साथ चल रही है।

साथियों,

भारत का यह जो नया मिज़ाज है, वो हमारे बजट में भी रिफ्लेक्ट होता है। पहले जब बजट की चर्चा होती थी, तो फोकस सिर्फ Outlay पर होता था। कितना पैसा आवंटित हुआ, क्या सस्ता हुआ, क्या महंगा हुआ और उस दिन टीवी देखेंगे, तो पूरी टीवी एक ही यानी इनके लिए, बजट मतलब इंकम टैक्‍स ऊपर गया कि नीचे गया, इसके आगे उनको देश दिखता ही नहीं है। और होता क्‍या था, कितनी नई ट्रेनें घोषित हुईं, यही चलता रहता था, उन घोषणाओं का बाद में क्या हुआ, कोई पूछने वाला ही नहीं था। और इसलिए हमने बजट को Outlay के साथ-साथ Outcome सेंट्रिक बनाया।

साथियों,

बजट में एक और बड़ा बदलाव आया है। 2014 से पहले Off-Budget Borrowing पर बहुत अधिक चर्चा होती थी। लेकिन अब Off-Budget Reforms की चर्चा होती है। बजट से बाहर, नेक्स्ट जनरेशन GST रिफॉर्म्स हुए, प्लानिंग कमीशन की जगह नीति आयोग बनाया, आर्टिकल 370 की दीवार गिरा दी, तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया, नारी शक्ति वंदन अधिनियम बनाया।

साथियों,

बजट में घोषित हों, या बजट से बाहर, रिफॉर्म एक्सप्रेस लगातार गति पकड़ रही है। अगर मैं पिछले एक साल की ही बात करूं तो हमने Ports & Maritime सेक्टर में Reform किया, शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के लिए अनेक Initiative लिए, जन-विश्वास एक्ट के तहत रिफॉर्म्स को और आगे बढ़ाया, Energy Security के लिए Shanti Act बनाया, लेबर कानूनों से जुड़े रिफॉर्म्स को लागू किया, भारतीय न्याय संहिता लेकर आए, वक्फ कानून में Reform किया गया है, गांव में रोजगार के लिए नया G RAM G कानून बनाया, ऐसे अनेक Reforms साल भर होते रहे हैं।

साथियों,

इस साल के बजट ने रिफॉर्म एक्सप्रेस को और आगे बढ़ाया है। वैसे तो बजट के बहुत सारे आयाम हैं, लेकिन मैं दो Important फैक्टर्स की बात करूंगा। Capex और Technology, बीते वर्षों की भांति इस बजट में भी, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को बढ़ाकर करीब 17 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है। और आप जानते हैं कि कैपेक्स का मल्टीप्लायर effect कितना बड़ा होता है। इससे देश की कैपेसिटी और प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। अनेकों सेक्टर्स में बहुत बड़ी संख्या में जॉब क्रिएशन भी होती है। पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप का निर्माण, देश के टीयर-2, टीयर-3 शहरों के लिए सिटी इकोनॉमिक रीजन्स का निर्माण और सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, ऐसे बजट अनाउंसमेंट्स, सही मायने में युवाओं पर, देश के फ्यूचर पर, यह इन्वेस्टमेंट हैं।

साथियों,

बीते दशक में हमने टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को ग्रोथ का कोर ड्राइवर माना है। इसी सोच के साथ, देश में स्टार्टअप कल्चर, हैकाथॉन कल्चर, उसको हमने प्रमोट किया। आज देश में, दो लाख से अधिक स्टार्टअप, रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स हैं और यह डायवर्स सेक्टर्स में काम कर रहे हैं। हमने युवाओं को प्रोत्साहित किया, देश में रिस्क टेकिंग कल्चर को पुरस्कृत करने का भाव जगाया और परिणाम हमारे सामने है। इस साल का बजट, हमारी इसी प्राथमिकता को और मजबूत करता है। विशेष तौर पर बायोफार्मा, सेमीकंडक्टर और AI जैसे सेक्टर के लिए, इस बजट में महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं।

साथियों,

आज जब देश की आर्थिक ताकत बढ़ी है, तो हम राज्यों को भी उतना ही ज्यादा सशक्त कर रहे हैं। मैं एक और आंकड़ा आपको देना चाहता हूं। 2004 से 2014, 10 साल, इस दरमियान राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के तौर पर 18 लाख करोड़ रुपए के आसपास ही मिले थे, 2004 से 2014 तक। जबकि 2014 से लेकर 2025 तक, राज्यों को 84 लाख करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। अगर मैं इस साल बजट में प्रस्तावित लगभग 14 लाख करोड़ का आंकड़ा और जोड़ दूं, तो हमारी सरकार में राज्यों को टैक्स डिवोल्यूशन के करीब-करीब 100 लाख करोड़ रुपए मिलने तय हुए हैं। यह राशि केंद्र सरकार की तरफ से अलग-अलग राज्य सरकारों को मिली है, ताकि वो अपने यहां विकास के कार्यों को आगे बढ़ा सकें।

साथियों,

आजकल आप लोग भारत के FTA’s यानि फ्री ट्रेड डील्स पर काफी चर्चा कर रहे हैं और मैं यहां enter हुआ, वहीं से शुरू हो गए लोग। दुनियाभर में इसका एनालिसिस हो रहा है। लेकिन मैं आज इसका एक और इंटरेस्टिंग एंगल आपको बताता हूं, मीडिया को जो चाहिए, वो तो इसमें नहीं होगा शायद, लेकिन हो सकता है कि कुछ काम में आ जाए। और मैं पक्का मानता हूं, जो बात मैं कहने जा रहा हूं, आपने भी इसके बारे में विचार नहीं किया होगा। क्या आपने कभी सोचा है कि आज इतने सारे विकसित देशों के साथ फ्री-फ्री ट्रेड डील्स हो रहे हैं, क्या यही काम 2014 से पहले क्यों नहीं हो पाए? देश वही, युवा शक्ति वही, सरकारी सिस्टम वही, तो बदला क्या? बदलाव, सरकार के विजन में आया है, नीति और नीयत में बदलाव आया है, भारत के सामर्थ्य में बदलाव आया है।

साथियों,

आप ज़रा सोचिए, फ्रेजाइल फाइव इकोनॉमी जब थी, तब कौन हमारे साथ डील करता? गांव में भी गरीब की बेटी को कोई रईस के परिवार वाला शादी करता है क्या? वो उसको छोटा मानता है, हमारा भी यही हाल था भाई दुनिया में। जब देश पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा था, चारों तरफ घोटाले और घपले थे, तब कौन भारत पर भरोसा कर पाता? 2014 से पहले भारत में मैन्युफैक्चरिंग का बेस बहुत कमजोर था और जिसके कारण, पहले की सरकारें भी डरती थी, एक तो कोई आता नहीं था और जरा सा भी कोई कोशिश करें, तो यह लोग भी डरते थे और डर यह था कि अगर विकसित देशों के साथ डील हो गई, तो वो हमारे बाजार पर कब्जा कर लेंगे, वो यहां अपने प्रोडक्ट डंप करने लगेंगे, हताशा-निराशा के उस माहौल में 2014 से पहले यूपीए सरकार सिर्फ चार देशों के साथ ही कॉम्प्रिहेंसिव ट्रेड एग्रीमेंट कर पाई थी। जबकि, बीते दशक में भारत ने जो ट्रेड डील्स की हैं, उनमें दुनिया के 38 कंट्री कवर होते हैं, 38 कंट्री। और यह दुनिया के अलग-अलग रीजन्स में हैं। आज हम इसलिए दुनिया के साथ ट्रेड डील्स कर रहे हैं क्योंकि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। आज का भारत, दुनिया के साथ कंपीट करने के लिए तैयार है। बीते 11 वर्षों में भारत ने मैन्युफैक्चरिंग का एक मजबूत इकोसिस्टम देश में विकसित किया है। इसलिए, आज भारत समर्थ है, सशक्त है और इसलिए दुनिया भी हम पर भरोसा करती है। यही बदलाव हमारी Trade Policy में आए Paradigm Shift का आधार बने और यही Paradigm Shift विकसित भारत की हमारी यात्रा का अनिवार्य स्तंभ बना है।

साथियों,

आज हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ देश के हर नागरिक को विकास में सहभागी बनाते हुए कार्य कर रही है। जो विकास की दौड़ में पीछे छूट गया, हम उसके विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं। पहले की सरकारों ने दिव्यांग जनों के लिए सिर्फ घोषणाएं कीं, हम भी उसी रास्ते को जारी रख सकते थे, लेकिन ये सरकार की संवेदनशीलता का उदाहरण है। आप में से शायद जो बातें मैं बता रहा हूं, आप जिस लेवल के लोग हैं, शायद उसमें फिट नहीं बैठती होगी। हमारे दिव्यांग जनों के लिए जैसे हमारे यहां Language में बिखराव है ना, Sign Language का भी वही हाल था जी। तमिलनाडु में जाओ तो एक Sign Language, उत्तर प्रदेश में जाओ तो दूसरी, गुजरात में जाओ तो तीसरी, असम में जाओ तो चौथी, अगर यहां का दिव्‍यांग असम गया, तो बेचारा समझ ही नहीं पाता था। अब यह कोई बड़ा काम तो नहीं था। अगर संवेदनशील सरकार होती है ना, तो उसको यह काम छोटा नहीं लगता है। और देश ने पहली बार Indian Sign Language को institutionalise किया, common किया, व्यवस्था बनाई है। ऐसे ही, देश की Transgender community कब से अपने अधिकारों के लिए लड़ रही थी। हमने उनके लिए भी कानून बनाकर उन्हें सम्मान से जीने का कवच दिया है। बीते दशक में ही देश की करोड़ों बहनों को तीन-तलाक की कुरीति से मुक्ति मिली, लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण पक्का हुआ।

साथियों,

आज सरकारी मशीनरी की सोच भी बदली है, उसमें संवेदनशीलता आई है। सोच का अंतर क्या होता है, यह हम जरूरतमंदों को मुफ्त अनाज देने वाली स्कीम में भी देखते हैं। विपक्ष के कुछ लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं और कुछ अखबारों में जरा छपता भी ज्यादा है। कोई मजाक उड़ाता है कि जब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकल ही गए हैं, तो उनको मुफ्त राशन क्यों मिलता है? अजीबोगरीब सवाल है। अगर आप बीमार हैं, अस्पताल में गए और अस्पताल से आपको छुट्टी मिली, तो भी डॉक्टर कहता है कि सात दिन तक यह-यह संभालना, पंद्रह दिन तक यह-यह संभालना, कहता है कि नहीं कहता है? गरीबी से बाहर निकले हैं, लेकिन यह सवाल पूछ रहे हैं कि निकले हैं, तो फिर अनाज क्यों देते हो? ऐसी संकीर्ण मानसिकता वाले लोग, यह नहीं सोचते कि सिर्फ गरीबी से बाहर निकालना काफी नहीं होता, बल्कि जो व्यक्ति नियो मिडिल क्लास में आया है, वो फिर गरीबी के चंगुल में न फंस जाए, यह भी सुनिश्चित करना पड़ता है। इसलिए उसे आज अनाज मुफ्त की सुविधा मिल रही है, यह आवश्यक है। बीते वर्षों में केंद्र सरकार ने इस योजना पर लाखों करोड़ रुपए खर्च किए हैं, इससे गरीब और नियो मिडिल क्लास को बहुत बड़ा संबल मिला है।

साथियों,

सोच का एक और फर्क हम अपने आसपास भी देखते हैं। कुछ लोग हैं, जो कहते हैं कि ये मोदी 2047 की बात क्यों करता है? 2047 में विकसित भारत बनेगा, नहीं बनेगा, किसने देखा? हम रहें या ना रहें, उससे हमारा लेना देना क्या है? अब देखिए, यह सोच है और यह बड़े-बड़े लोगों की सोच है, यह कोई मैं अपने शब्द नहीं बता रहा हूं।

साथियों,

जिन लोगों ने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, लाठियां खाईं, कालापानी की सज़ाएं पड़ी, फांसी के तख्त पर चढ़ गए, अगर वो भी यही सोचते कि आजादी पता नहीं कब मिले, हम क्यों आज आजादी के लिए लाठी खाएं, तो सोचिए, क्या उस सोच के साथ देश कभी आजाद हो पाता क्या? जब राष्ट्र प्रथम का भाव हो, जब देश हित सर्वोपरि हो, तो हर निर्णय देश के लिए होता है, हर नीति देश के लिए बनती है। हमारी सोच स्पष्ट है, विजन साफ है, हमें देश को विकसित बनाने के लिए निरंतर काम करना है। 2047 तक हम रहें न रहें, लेकिन यह देश रहेगा, इस देश की संतानें रहेंगी। इसलिए हमें और इसलिए हमें अपना आज खपाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों का कल सुरक्षित रहे, उज्ज्वल रहे। मैं आज अपनी आज बो रहा हूं क्योंकि कल की पीढ़ी को फल खाने को मौका मिले।

साथियों,

दुनिया को अब डिसरप्शन के साथ जीने के लिए तैयार रहना होगा। समय के साथ इनके नेचर में बदलाव आएगा, लेकिन यह तय है कि अब व्यवस्थाएं बहुत तेजी से बदलेंगी। AI से जो Disruption हो रहे हैं, वो तो आप देख ही रहे हैं। आने वाले समय में AI और भी क्रांतिकारी बदलाव लेकर आने वाली है, भारत इसके लिए भी तैयार है। कुछ ही दिनों में भारत में ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट होने जा रही है। दुनिया के अनेक देश, दुनियाभर के टेक लीडर्स, इस समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। सभी के साथ मिलकर, हम एक बेहतर विश्व बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे। इसी भरोसे के साथ, एक बार फिर इस Summit के लिए आप सभी को बहुत सारी मेरी शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

वंदे मातरम!