समग्र पृथ्वी पर श्वेत रण के आध्यात्मिक पर्यावरण का नजारा कहीं और नहीं : मुख्यमंत्री

चंद्रग्रहण के मौके पर सफेद रण में पूनम और अमावस्या का अलौकिक निरीक्ष

अहमदाबाद, शनिवार: मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को विश्व के एकमात्र श्वेत रण की पर्यावरणीय विरासत वाले कच्छ के रणोत्सव का लुत्फ उठाने के लिए धोरड़ो पहुंचे देश-विदेश के प्रवासी परिवारों के अपूर्व आनंद में सहभागी बने।

धोरड़ो टैन्ट सिटी में आगमन से पूर्व श्री मोदी ने मागशीर्ष की पूर्णिमा को दत्त जयंति के पुनित पर्व पर मध्याह्न पश्चात काले डुंगर (काली पहाड़ी) पर बिराजमान भगवान दत्तात्रेय के दर्शन किए।

पच्छम पीर की चोटी पर स्थित काला डुंगर कच्छ की अन्तरराष्ट्रीय रण सीमा का अद्भुत विहंगावलोकन कराता है। अब तक दत्तात्रेय मंदिर के पौराणिक महिमावंत तीर्थ और प्रसाद खाने के लिए पहुंचने वाले वन्य जीव सियार के लोंगदर्शन की वजह से प्रसिद्घ काला डुंगर को प्राकृतिक पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित किया गया है। पर्यटन विभाग की ओर से सीमावर्ती क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) के तहत काला डुंगर पर कच्छ-सीमा निरीक्षण, वन्य प्राणी अभयारण्य और अन्य विशेष आकर्षणों का समावेश किया गया है।

काला डुंगर के निकट उत्तर दिशा की ओर कच्छ का बड़ा रण शुरू होता है। मुख्यमंत्री की दीर्घदृष्टि से 14,371 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला समूचा काला डुंगर पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित हो रहा है। यायावर पक्षी फ्लेमिंगो के लिए प्रजजन क्षेत्र (ब्रिडींग साइट) माना जाने वाला हंजबेट काला डुंगर से महज 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सनसेट पॉइन्ट से सूर्यास्त दर्शन का अद्भुत नजारा निहारने के लिए सैलानियों को कई सुविधाओं मुहैया करायी गई है।

मुख्यमंत्री ने काला डुंगर में वन विभाग की ओर से आयोजित प्राकृतिक साहस रैली का प्रारंभ करवाया और यायावर पक्षी फ्लेमिंगो की बस्ती को निहारा।

मुख्यमंत्री ने काले डुंगर की तलहटी में ध्रोबाणा के निकट गुजरात सरकार और जेपी एसोसिएट की संयुक्त भागीदारी में जन-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल आधारित पर्यटन प्रेमियों के लिए निर्माणाधीन पर्यावरण मैत्रीपूर्ण कच्छी भूंगा (कच्छी आवासीय शैली) रिसोर्ट का निरीक्षण किया।

इस मौके पर श्री मोदी ध्रोबाणा में आयोजित ग्रामीण मेले में उमड़े सैलानियों के उमंग और उत्साह में सहभागी बने और ऊंट दौड़ तथा अन्य ग्रामीण खेलों की स्पर्धा के प्रतियोगियों को प्रोत्साहित किया। ध्रोबाणा में ग्राम मेला के सांस्कृतिक कलाकारों ने मुख्यमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया।

शाम ढलते ही धोरड़ो टैन्ट सिटी पहुंचे मुख्यमंत्री का पर्यटन मंत्री जयनारायण व्यास, पर्यटन निगम के अध्यक्ष कमलेश पटेल, राज्य मंत्री वासणभाई आहिर, राज्य मंत्री जीतुभाई सुखडिय़ा सहित रणोत्सव के जिला आयोजकों ने भावभीना स्वागत किया।

धोरड़ो के टैन्ट सिटी परिसर में कच्छी कलाकृतियों के विश्वविख्यात क्राफ्ट बाजार में टहलते हुए मुख्यमंत्री ने कच्छ कला के कुशल कारीगरों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि रणोत्सव कच्छ में स्वरोजगारोन्मुखी आर्थिक प्रवृत्तियों को गतिशील बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

धोरड़ो टैन्टसिटी परिसर में मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर वहां मौजूद प्रवासी अत्यंत उत्साहित नजर आ रहे थे। बाद में फ्लेमिंगो पक्षियों का लाइव वीडियो शो भी सभी ने निहारा।

आज चंद्रग्रहण के मौके पर सफेद रण में पूनम की रात को अमावस्या के अलौकिक पर्यावरण का नजारा देखने सूर्यास्त के पश्चात मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री के साथ सैलानी भी श्वेत रण में विहार के लिए निकल पड़े थे।

 

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प्रधानमंत्री आंतरिक ज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
April 09, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया, जिसमें उन्होंने आंतरिक ज्ञान को ब्रह्मांड का सच्चा सार बताते हुए उसके महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत की विरासत और संस्कृति ने हमेशा यह सिखाया है कि सच्चा ज्ञान और उसका सही सदुपयोग ही किसी राष्ट्र की प्रगति के आधार हैं। उन्होंने बताया कि इसी मार्ग पर चलते हुए देश के युवा एक समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह ज्ञान, जो हमारे भीतर ही स्थित है और सामान्य ज्ञान से कहीं अधिक श्रेष्ठ है, महान और विद्वान व्यक्तियों द्वारा पूजनीय माना जाता है।

प्रधानमंत्री ने एक्स(X) पर लिखा:

"हमारी विरासत और संस्कृति हमें यही सिखाती आई है कि सच्चा ज्ञान और उसका सदुपयोग ही राष्ट्र की प्रगति का आधार है। इसी मार्ग पर चलकर आज हमारे देश के युवा समृद्ध और सशक्त भारत को गढ़ने में जुटे हैं।

अन्तःस्थमेव यज्ज्ञानं ज्ञानादपि च यत्परम्।

तदेव सर्वसंसारसारं सद्भिरुपास्यते॥"

जो ज्ञान हमारे भीतर स्थित है और जो सामान्य या बाहरी ज्ञान से भी श्रेष्ठ है, वही इस समस्त संसार का असली सार है। श्रेष्ठ पुरूषों और ज्ञानियों द्वारा उसी आंतरिक ज्ञान की उपासना की जाती है।