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प्रधानमंत्री ने दुनिया भर के लोगों को ईस्टर की बधाई दी #मनकीबात
प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान और बांग्लादेश पर जीत के लिए भारतीय क्रिकेट टीम को बधाई दी #मनकीबात
मैं मैच से पहले भारत और ऑस्ट्रेलिया, दोनों टीमों को अपनी शुभकामनाएं देता हूँ: प्रधानमंत्री #मनकीबात
मैं पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन स्थल (खान) बनाने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड को बधाई देना चाहता हूँ: प्रधानमंत्री #मनकीबात
पर्यटन के माध्यम से रोजगार के अनेकों अवसर बनाए जा सकते हैं। हम इसके माध्यम से लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं: पीएम
यह भारतीय खेल में एक नई क्रांति का समय है: प्रधानमंत्री #मनकीबात
फुटबॉल को गाँव-गाँव में पहुँचाना जरुरी और इसके लिए #फीफा अंडर-17 काफ़ी महत्वपूर्ण अवसर है: प्रधानमंत्री
वैश्विक स्तर पर भारत की ब्रांडिंग के लिए #फीफा अंडर-17 से जुड़ें अपने सुझाव नरेंद्र मोदी एप पर भेजें: प्रधानमंत्री #मनकीबात
अपनी छुट्टियां का इस्तेमाल अपने व्यक्तित्व के विकास और नए कौशल सीखने में करें: प्रधानमंत्री #मनकीबात
हमने किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए ‘किसान सुविधा एप’ शुरू किया है और मुझे आशा है कि यह उनके लिए फायदेमंद होगा: प्रधानमंत्री
गर्मियों का समय किसानों के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण होता है। हम सभी को जल संरक्षण के बारे में सोचना चाहिए: प्रधानमंत्री
7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस है और इस वर्ष इसका थीम है – बीट डायबिटीज़: प्रधानमंत्री #मनकीबात
मैं अपने देशवासियों से आग्रह करता हूं कि आप डायबिटीज़ (मधुमेह) को परास्त करें: प्रधानमंत्री #मनकीबात
81908-81908 पर एक मिस्ड कॉल दें और किसी भी समय अपनी क्षेत्रीय भाषा में प्रधानमंत्री मोदी की मन की बात सुनें #मनकीबात 

मेरे प्यारे देशवासियो, आप सब को बहुत-बहुत नमस्कार! आज दुनिया भर में ईसाई समुदाय के लोग Easter मना रहे हैं। मैं सभी लोगों को Easter की ढ़ेरों शुभकामनायें देता हूँ।

मेरे युवा दोस्तो, आप सब एक तरफ़ Exam में busy होंगे। कुछ लोगों की exam पूरी हो गयी होगी। और कुछ लोगों के लिए इसलिए भी कसौटी होगी कि एक तरफ़ exam और दूसरी तरफ़ T-20 Cricket World Cup. आज भी शायद आप भारत और Australia के match का इंतज़ार करते होंगे। पिछले दिनों भारत ने पाकिस्तान और बांग्लादेश के खिलाफ़ दो बेहतरीन match जीते हैं। एक बढ़िया सा momentum नज़र आ रहा है। आज जब Australia और भारत खेलने वाले हैं, मैं दोनों टीमों के players को अपनी शुभकामनायें देता हूँ।

65 प्रतिशत जनसँख्या नौजवान हो और खेलों की दुनिया में हम खो गए हों! ये तो बात कुछ बनती नहीं है। समय है, खेलों में एक नई क्रांति का दौर का। और हम देख रहे हैं कि भारत में cricket की तरह अब Football, Hockey, Tennis, Kabaddi एक mood बनता जा रहा है। मैं आज नौजवानों को एक और खुशखबरी के साथ, कुछ अपेक्षायें भी बताना चाहता हूँ। आपको शायद इस बात का तो पता चल गया होगा कि अगले वर्ष 2017 में भारत FIFA Under - 17 विश्वकप की मेज़बानी करने जा रहा है। विश्व की 24 टीमें भारत में खेलने के लिए आ रही हैं। 1951, 1962 Asian Games में भारत ने Gold Medal जीता था और 1956 Olympic Games में भारत चौथे स्थान पर रहा था। लेकिन दुर्भाग्य से पिछले कुछ दशकों में हम निचली पायरी पर ही चलते गए, पीछे ही हटते गए, गिरते ही गए, गिरते ही गए। आज तो FIFA में हमारा ranking इतना नीचे है कि मेरी बोलने की हिम्मत भी नहीं हो रही है। और दूसरी तरफ़ मैं देख रहा हूँ कि इन दिनों भारत में युवाओं की Football में रूचि बढ़ रही है। EPL हो, Spanish League हो या Indian Super League के match हो। भारत का युवा उसके विषय में जानकारी पाने के लिए, TV पर देखने के लिए समय निकालता है। कहने का तात्पर्य यह है कि रूचि तो बढ़ रही है। लेकिन इतना बड़ा अवसर जब भारत में आ रहा है, तो हम सिर्फ़ मेज़बान बन कर के अपनी जिम्मेवारी पूरी करेंगे? इस पूरा वर्ष एक Football, Football, Football का माहौल बना दें। स्कूलों में, कॉलेजों में, हिन्दुस्तान के हर कोने पर हमारे नौजवान, हमारे स्कूलों के बालक पसीने से तर-ब-तर हों। चारो तरफ़ Football खेला जाता हो। ये अगर करेंगे तो फिर तो मेज़बानी का मज़ा आएगा और इसीलिए हम सब की कोशिश होनी चाहिये कि हम Football को गाँव-गाँव, गली-गली कैसे पहुँचाएं। 2017 FIFA Under – 17 विश्वकप एक ऐसा अवसर है इस एक साल के भीतर-भीतर हम चारों तरफ़ नौजवानों के अन्दर Football के लिए एक नया जोम भर दे, एक नया जुत्साह भर दे। इस मेज़बानी का एक फ़ायदा तो है ही है कि हमारे यहाँ Infrastructure तैयार होगा। खेल के लिए जो आवश्यक सुविधाएँ हैं उस पर ध्यान जाएगा। मुझे तो इसका आनंद तब मिलेगा जब हम हर नौजवान को Football के साथ जोड़ेंगें।

दोस्तो, मैं आप से एक अपेक्षा करता हूँ। 2017 की ये मेज़बानी, ये अवसर कैसा हो, साल भर का हमारा Football में momentum लाने के लिए कैसे-कैसे कार्यक्रम हो, प्रचार कैसे हो, व्यवस्थाओं में सुधार कैसे हो, FIFA Under – 17 विश्वकप के माध्यम से भारत के नौजवानों में खेल के प्रति रूचि कैसे बढ़े, सरकारों में, शैक्षिक संस्थाओं में, अन्य सामाजिक संगठनों में, खेल के साथ जुड़ने की स्पर्धा कैसे खड़ी हो? Cricket में हम सभी देख पा रहे हैं, लेकिन यही चीज़ और खेलों में भी लानी है। Football एक अवसर है। क्या आप मुझे अपने सुझाव दे सकते हैं? वैश्विक स्तर पर भारत का branding करने के लिए एक बहुत बड़ा अवसर मैं मानता हूँ। भारत की युवा शक्ति की पहचान कराने का अवसर मानता हूँ। Match के दरमियाँ क्या पाया, क्या खोया उस अर्थ में नहीं। इस मेज़बानी की तैयारी के द्वारा भी, हम अपनी शक्ति को सजो सकते हैं, शक्ति को प्रकट भी कर सकते हैं और हम भारत का Branding भी कर सकते हैं। क्या आप मुझे NarendraModiApp, इस पर अपने सुझाव भेज सकते हैं क्या? Logo कैसा हो, slogans कैसे हो, भारत में इस बात को फ़ैलाने के लिए क्या क्या तरीके हों, गीत कैसे हों, souvenirs बनाने हैं तो किस-किस प्रकार के souvenirs बन सकते हैं। सोचिए दोस्तो, और मैं चाहूँगा कि मेरा हर नौजवान ये 2017, FIFA, Under- 17 विश्व Cup का Ambassador बने। आप भी इसमें शरीक होइए, भारत की पहचान बनाने का सुनहरा अवसर है।

मेरे प्यारे विद्यार्थियो, छुट्टियों के दिनों में आपने पर्यटन के लिए सोचा ही होगा। बहुत कम लोग हैं जो विदेश जाते हैं लेकिन ज्यादातर लोग अपने-अपने राज्यों में 5 दिन, 7 दिन कहीं चले जाते हैं। कुछ लोग अपने राज्यों से बाहर जाते हैं। पिछली बार भी मैंने आप लोगों से एक आग्रह किया था कि आप जहाँ जाते हैं वहाँ से फोटो upload कीजिए। और मैंने देखा कि जो काम Tourism Department नहीं कर सकता, जो काम हमारा Cultural Department नहीं कर सकता, जो काम राज्य सरकारें, भारत सरकार नहीं कर सकतीं, वो काम देश के करोड़ों-करोड़ों ऐसे प्रवासियों ने कर दिया था। ऐसी-ऐसी जगहों के फोटो upload किये गए थे कि देख कर के सचमुच में आनंद होता था। इस काम को हमें आगे बढ़ाना है इस बार भी कीजिये, लेकिन इस बार उसके साथ कुछ लिखिए। सिर्फ़ फोटो नहीं! आपकी रचनात्मक जो प्रवृति है उसको प्रकट कीजिए और नई जगह पर जाने से, देखने से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। जो चीजें हम classroom में नहीं सीख पाते, जो हम परिवार में नहीं सीख पाते, जो चीज हम यार-दोस्तों के बीच में नहीं सीख पाते, वे कभी-कभी भ्रमण करने से ज्यादा सीखने को मिलती है और नई जगहों के नयेपन का अनुभव होता है। लोग, भाषा, खान-पान वहाँ के रहन-सहन न जाने क्या-क्या देखने को मिलता है। और किसी ने कहा है - ‘A traveller without observation. is a bird without wings’ ‘शौक-ए-दीदार है अगर, तो नज़र पैदा कर’। भारत विविधताओं से भरा हुआ है। एक बार देखने के लिए निकल पड़ो जीवन भर देखते ही रहोगे, देखते ही रहोगे! कभी मन नहीं भरेगा और मैं तो भाग्यशाली हूँ मुझे बहुत भ्रमण करने का अवसर मिला है। जब मुख्यमंत्री नहीं था, प्रधानमंत्री नहीं था और आपकी ही तरह छोटी उम्र थी, मैंने बहुत भ्रमण किया। शायद हिन्दुस्तान का कोई District नहीं होगा, जहाँ मुझे जाने का अवसर न मिला हो। ज़िन्दगी को बनाने के लिए प्रवास की एक बहुत बड़ी ताकत होती है और अब भारत के युवकों में प्रवास में साहस जुड़ता चला जा रहा है। जिज्ञासा जुड़ती चली जा रही है। पहले की तरह वो रटे-रटाये, बने-बनाये उसी route पर नहीं चला जाता है, वो कुछ नया करना चाहता है, वो कुछ नया देखना चाहता है। मैं इसे एक अच्छी निशानी मानता हूँ। हमारा युवा साहसिक हो, जहाँ कभी पैर नहीं रखा है, वहाँ पैर रखने का उसका मन होना चाहिए।

मैं Coal India को एक विशेष बधाई देना चाहता हूँ। Western Coalfields Limited (WCL), नागपुर के पास एक सावनेर, जहाँ Coal Mines हैं। उस Coal Mines में उन्होंने Eco friendly Mine Tourism Circuit develop किया है। आम तौर पर हम लोगों की सोच है कि Coal Mines - यानि दूर ही रहना। वहाँ के लोगों की तस्वीरें जो हम देखते हैं तो हमें लगता है वहाँ जाने जैसा क्या होगा और हमारे यहाँ तो कहावत भी रहती है कि कोयले में हाथ काले, तो लोग यूँ ही दूर भागते हैं। लेकिन उसी कोयले को Tourism का destination बना देना और मैं खुश हूँ कि अभी-अभी तो ये शुरुआत हुई है और अब तक क़रीब दस हज़ार से ज्यादा लोगों ने नागपुर के पास सावनेर गाँव के निकट ये Eco friendly Mine Tourism की मुलाक़ात की है। ये अपने आप में कुछ नया देखने का अवसर देती है। मैं आशा करता हूँ कि इन छुट्टियों में जब प्रवास पर जाएँ तो स्वच्छता में आप कुछ योगदान दे सकते हैं क्या?

इन दिनों एक बात नज़र आ रही है, भले वो कम मात्रा में हो अभी भी आलोचना करनी है तो अवसर भी है लेकिन फिर भी अगर हम ये कहें कि एक जागरूकता आई है। Tourist places पर लोग स्वच्छता बनाये रखने का प्रयास कर रहे हैं। Tourist भी कर रहे हैं और जो tourist destination के स्थान पर स्थाई रूप से रहने वाले लोग भी कुछ न कुछ कर रहे हैं। हो सकता है बहुत वैज्ञानिक तरीक़े से नहीं हो रहा? लेकिन हो रहा है। आप भी एक tourist के नाते ‘tourist destination पर स्वच्छता’ उस पर आप बल दे सकते हैं क्या? मुझे विश्वास है मेरे नौजवान मुझे इसमें जरूर मदद करेंगे। और ये बात सही है कि tourism सबसे ज्यादा रोज़गार देने वाला क्षेत्र है। ग़रीब से ग़रीब व्यक्ति कमाता है और जब tourist, tourist destination पर जाता है। ग़रीब tourist जाएगा तो कुछ न कुछ तो लेगा। अमीर होगा तो ज्यादा खर्चा करेगा। और tourism के द्वारा बहुत रोज़गार की संभावना है। विश्व की तुलना में भारत tourism में अभी बहुत पीछे है। लेकिन हम सवा सौ करोड़ देशवासी हम तय करें कि हमें अपने tourism को बल देना है तो हम दुनिया को आकर्षित कर सकते हैं। विश्व के tourism के एक बहुत बड़े हिस्से को हमारी ओर आकर्षित कर सकते हैं और हमारे देश के करोड़ो-करोड़ों नौजवानों को रोज़गार के अवसर उपलब्ध करा सकते हैं। सरकार हो, संस्थाएँ हों, समाज हो, नागरिक हो हम सब ने मिल करके ये करने का काम है। आइये हम उस दिशा में कुछ करने का प्रयास करें।

मेरे युवा दोस्तो, छुट्टियाँ ऐसे ही आ कर चला जाएं, ये बात मुझे अच्छी नहीं लगती। आप भी इस दिशा में सोचिए। क्या आपकी छुट्टियाँ, ज़िन्दगी के महत्वपूर्ण वर्ष और उसका भी महत्वपूर्ण समय ऐसे ही जाने दोगे क्या? मैं आपको सोचने के लिए एक विचार रखता हूँ। क्या आप छुट्टियों में एक हुनर, अपने व्यक्तित्व में एक नई चीज़ जोड़ने का संकल्प, ये कर सकते हैं क्या? अगर आपको तैरना नहीं आता है, तो छुट्टियों मे संकल्प कर सकते हैं, मैं तैरना सीख लूँ, साईकिल चलाना नही आता है तो छुट्टियों मे तय कर लूँ मैं साईकिल चलाऊंI आज भी मैं दो उंगली से कंप्यूटर को टाइप करता हूँ, तो क्या मैं टाइपिंग सीख लूँ? हमारे व्यक्तित्व के विकास के लिए कितने प्रकार के कौशल है? क्यों ना उसको सीखें? क्यों न हमारी कुछ कमियों को दूर करें? क्यों न हम अपनी शक्तियों में इजाफ़ा करेंI अब सोचिए और कोई उसमें बहुत बड़े classes चाहिए कोई trainer चाहिए, बहुत बड़ी fees चाहिए, बड़ा budget चाहिए ऐसा नहीं है। आप अपने अगल-बगल में भी मान लीजिये आप तय करें कि मैं waste में से best बनाऊंगा। कुछ देखिये और उसमे से बनाना शुरू कर दीजिये। देखिये आप को आनंद आयेगा शाम होते-होते देखिये ये कूड़े-कचरे में से आपने क्या बना दिया। आप को painting का शौक है, आता नही है, अरे तो शुरू कर दीजिये ना, आ जायेगा। आप अपनी छुट्टियों का समय अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए, अपने पास कोई एक नए हुनर के लिए, अपने कौशल-विकास के लिए अवश्य करें और अनगिनत क्षेत्र हो सकते हैं जरुरी नहीं है, कि मैं जो गिना रहा हूँ वही क्षेत्र हो सकते है। और आपके व्यक्तित्व की पहचान उससे और उससे आप का आत्मविश्वास इतना बढ़ेगा इतना बढ़ेगा। एक बार देख लीजिये जब छुट्टियों के बाद स्कूल में वापिस जाओगे, कॉलेज मे वापिस जाओगे और अपने साथियों को कहोगे कि भाई मैंने तो छुट्टीयों मे ये सीख लिया और अगर उसने नहीं सिखा होगा, तो वो सोचेगा कि यार मेरा तो बर्बाद हो गया तुम बड़े पक्के हो यार कुछ करके आ गए। ये अपने साथियों मे शायद बात होगी। मुझे विश्वास है कि आप ज़रूर करेंगे। और मुझे बताइए कि आप ने क्या सीखा। बतायेंगे ना!। इस बार ‘मन की बात’ में My-gov पर कई सुझाव आये हैं।

‘मेरा नाम अभि चतुर्वेदी है। नमस्ते प्रधानमंत्री जी, आपने पिछले गर्मियों की छुट्टियों में बोला कि चिड़ियों को भी गर्मी लगती है, तो हमने एक बर्तन में पानी में रखकर अपनी बालकोनी में या छत पर रख देना चाहिये, जिससे चिड़िया आकर पानी पी लें। मैंने ये काम किया और मेरे को आनंद आया, इसी बहाने मेरी बहुत सारी चिड़ियों से दोस्ती हो गयी। मैं आपसे विनती करता हूँ कि आप इस कार्य को वापस ‘मन की बात’ में दोहराएँ।’

मेरे प्यारे देशवासियो, मैं अभि चतुर्वेदी का आभारी हूँ इस बालक ने मुझे याद कराया वैसे मैं भूल गया था। और मेरे मन में नहीं था कि आज मैं इस विषय पर कुछ कहूँगा लेकिन उस अभि ने मुझे याद करवाया कि पिछले वर्ष मैंने पक्षियों के लिए घर के बाहर मिट्टी के बर्तन में। मेरे प्यारे देशवासियो मैं अभि चतुर्वेदी एक बालक का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ। उसने मुझे फोन करके एक अच्छा काम याद करवा दिया। पिछली बार तो मुझे याद था। और मैंने कहा था कि गर्मियों के दिनों मे पक्षियों के लिए अपने घर के बाहर मिट्टी के बर्तनों मे पानी रखे। अभि ने मुझे बताया कि वो साल भर से इस काम को कर रहा है। और उसकी कई चिड़िया उसकी दोस्त बन गई है। हिन्दी की महान कवि महादेवी वर्मा वो पक्षियों को बहुत प्यार करती थीं। उन्होंने अपनी कविता में लिखा था - तुझको दूर न जाने देंगे, दानों से आंगन भर देंगे और होद में भर देंगे हम मीठा-मीठा ठंडा पानी। आइये महादेवी जी की इस बात को हम भी करें। मैं अभि को अभिनन्दन भी देता हूँ और आभार भी व्यक्त करता हूँ कि तुमने मुझको बहुत महत्वपूर्ण बात याद कराई।

मैसूर से शिल्पा कूके, उन्होंने एक बड़ा संवेदनशील मुद्दा हम सब के लिए रखा है। उन्होंने कहा है कि हमारे घर के पास दूध बेचने वाले आते हैं, अख़बार बेचने वाले आते हैं, Postman आते हैं। कभी कोई बर्तन बेचने वाले वहाँ से गुजरते हैं, कपड़े बेचने वाले गुजरते हैं। क्या कभी हमने उनको गर्मियों के दिनों मे पानी के लिए पूछा है क्या? क्या कभी हमने उसको पानी offer किया है क्या? शिल्पा मैं आप का बहुत आभारी हूँ आपने बहुत संवेदनशील विषय को बड़े सामान्य सरल तरीके से रख दिया। ये बात सही है बात छोटी होती है लेकिन गर्मी के बीच अगर postman घर के पास आया और हमने पानी पिलाया कितना अच्छा लगेगा उसको। खैर भारत में तो ये स्वाभाव है ही है। लेकिन शिल्पा मैं आभारी हूँ कि तुमने इन चीज़ों को observe किया।

मेरे प्यारे किसान भाइयो और बहनो, Digital India – Digital India आपने बहुत सुना होगा। कुछ लोगों को लगता है कि Digital India तो शहर के नौजवानों की दुनिया है। जी नही, आपको खुशी होगी कि एक “किसान सुविधा App” आप सब की सेवा में प्रस्तुत किया है। ये “किसान सुविधा App” के माध्यम से अगर आप उसको अपने Mobile-Phone में download करते हैं तो आपको कृषि सम्बन्धी, weather सम्बन्धी बहुत सारी जानकारियाँ अपनी हथेली में ही मिल जाएगी। बाज़ार का हाल क्या है, मंडियों में क्या स्थिति है, इन दिनों अच्छी फसल का क्या दौर चल रहा है, दवाइयां कौन-सी उपयुक्त होती हैं? कई विषय उस पर है। इतना ही नहीं इसमें एक बटन ऐसा है कि जो सीधा-सीधा आपको कृषि वैज्ञानिकों के साथ जोड़ देता है, expert के साथ जोड़ देता है। अगर आप अपना कोई सवाल उसके सामने रखोगे तो वो जवाब देता है, समझाता है, आपको। मैं आशा करता हूँ कि मेरे किसान भाई-बहन इस “किसान सुविधा App” को अपने Mobile-Phone पर download करें। try तो कीजिए उसमें से आपके काम कुछ आता है क्या? और फिर भी कुछ कमी महसूस होती है तो आप मुझे शिकायत भी कर दीजिये।

मेरे किसान भाइयो और बहनों, बाकियों के लिए तो गर्मी छुट्टियों के लिए अवसर रहा है। लेकिन किसान के लिए तो और भी पसीना बहाने का अवसर बन जाता है। वो वर्षा का इंतजार करता है और इंतजार के पहले किसान अपने खेत को तैयार करने के लिए जी-जान से जुट जाता है, ताकि वो बारिश की एक बूंद भी बर्बाद नहीं होने देना चाहता है। किसान के लिए, किसानी के season शुरू होने का समय बड़ा ही महत्वपूर्ण होता है। लेकिन हम देशवासियो को भी सोचना होगा कि पानी के बिना क्या होगा? क्या ये समय हम अपने तालाब, अपने यहाँ पानी बहने के रास्ते तालाबों में पानी आने के जो मार्ग होते हैं जहाँ पर कूड़ा-कचरा या कुछ न कुछ encroachment हो जाता तो पानी आना बंद हो जाता है और उसके कारण जल-संग्रह धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। क्या हम उन पुरानी जगहों को फिर से एक बार खुदाई करके, सफाई करके अधिक जल-संचय के लिए तैयार कर सकते हैं क्या? जितना पानी बचायेंगे तो पहली बारिश में भी अगर पानी बचा लिया, तालाब भर गए, हमारे नदी नाले भर गए तो कभी पीछे बारिश रूठ भी जाये तो हमारा नुकसान कम होता है।

इस बार आपने देखा होगा 5 लाख तालाब, खेत-तालाब बनाने का बीड़ा उठाया है। मनरेगा से भी जल-संचय के लिए assets create करने की तरफ बल दिया है। गाँव-गाँव पानी बचाओ, आने वाली बारिश में बूँद-बूँद पानी कैसे बचाएँ। गाँव का पानी गाँव में रहे, ये अभियान कैसे चलायें, आप योजना बनाइए, सरकार की योजनाओं से जुड़िए ताकि एक ऐसा जन-आंदोलन खड़ा करें, ताकि हम पानी से एक ऐसा जन-आन्दोलन खड़ा करें जिसके पानी का माहत्म्य भी समझें और पानी संचय के लिए हर कोई जुड़े। देश में कई ऐसे गाँव होंगे, कई ऐसे प्रगतिशील किसान होंगे, कई ऐसे जागरूक नागरिक होंगे जिन्होंने इस काम को किया होगा। लेकिन फिर भी अभी और ज्यादा करने की आवश्यकता है।

मेरे किसान भाइयो-बहनों, मैं एक बार आज फिर से दोहराना चाहता हूँ। क्योंकि पिछले दिनों भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा किसान मेला लगाया था और मैंने देखा कि क्या-क्या आधुनिक technology आई है, और कितना बदलाव आया है, कृषि क्षेत्र में, लेकिन फिर भी उसे खेतों तक पहुँचाना है और अब किसान भी कहने लगा है कि भई अब तो fertilizer कम करना है। मैं इसका स्वागत करता हूँ। अधिक fertilizer के दुरुपयोग ने हमारी धरती माँ को बीमार कर दिया है और हम धरती माँ के बेटे हैं, सन्तान हैं हम अपनी धरती माँ को बीमार कैसे देख सकते हैं। अच्छे मसाले डालें तो खाना कितना बढ़िया बनता है, लेकिन अच्छे से अच्छे मसाले भी अगर ज्यादा मात्रा में दाल दें तो वो खाना खाने का मन करता है क्या? वही खाना बुरा लगता है न? ये fertilizer का भी ऐसा ही है, कितना ही उत्तम fertilizer क्यों न हो, लेकिन हद से ज्यादा fertilizer का उपयोग करेंगे तो वो बर्बादी का कारण बन जायेगा। हर चीज़ balance होनी चाहिये और इससे खर्चा भी कम होगा, पैसे आपके बचेंगे। और हमारा तो मत है - कम cost ज्यादा output, “कम लागत, ज्यादा पावत”, इसी मंत्र को ले करके चलना चाहिए और वैज्ञानिक तौर-तरीकों से हम अपने कृषि को आगे बढ़ाना चाहिए। मैं आशा करता हूँ कि जल संचय में जो भी आवश्यक काम करना पड़े, हमारे पास एक-दो महीने हैं बारिश आने तक, हम पूरे मनोयोग से इसको करें। जितना पानी बचेगा किसानी को उतना ही ज्यादा लाभ होगा, ज़िन्दगी उतनी ही ज्यादा बचेगी।

मेरे प्यारे देशवासियो, 7 अप्रैल को ‘World Health Day’ है और इस बार दुनिया ने ‘World Health Day’ को ‘beat Diabetes’ इस theme पर केन्द्रित किया है। diabetes को परास्त करिए। Diabetes एक ऐसा मेजबान है कि वो हर बीमारी की मेजबानी करने के लिए आतुर रहता है। एक बार अगर diabetes घुस गया तो उसके पीछे ढेर सारे बीमारी कुरुपी मेहमान अपने घर में, शरीर में घुस जाते हैं। कहते हैं 2014 में भारत में क़रीब साडे छः करोड़ diabetes के मरीज थे। 3 प्रतिशत मृत्यु का कारण कहते हैं कि diabetes पाया गया। और diabetes के दो प्रकार होते हैं एक Type-1, Type-2. Type- 1 में वंशगत रहता है, hereditary है, माता-पिता को है इसलिए बालक को होता है। और Type-2 आदतों के कारण, उम्र के कारण, मोटापे के कारण। हम उसको निमंत्रण देकर के बुलाते हैं। दुनिया diabetes से चिंतित है, इसलिए 7 तारीक को ‘World Health Day’ में इसको theme रखा गया है। हम सब जानते हैं कि हमारी life style उसके लिए सबसे बड़ा कारण है। शरीरिक श्रम कम हो रहा है। पसीने का नाम-ओ-निशान नहीं है, चलना-फिरना हो नहीं रहा है। खेल भी खेलेंगे तो online खेलते है, off-line कुछ नहीं हो रहा है। क्या हम, 7 तारीख से कुछ प्रेरणा ले कर के अपने निजी जीवन में diabetes को परास्त करने के लिए कुछ कर सकते है क्या? आपको योग में रूचि है तो योग कीजिए नहीं तो कम से कम दौड़ने चलने के लिए तो जाइये। अगर मेरे देश का हर नागरिक स्वस्थ होगा तो मेरा भारत भी तो स्वस्थ होगा। कभी कबार हम संकोचवश medical check-up नहीं करवाते हैं। और फिर बहुत बुरे हाल होने के बाद ध्यान में आता है कि ओह... हो... मेरा तो बहुत पुराना diabetes था। Check करने में क्या जाता है इतना तो कर लीजिये और अब तो सारी बातें उपलब्ध हैं। बहुत आसानी से हो जाती हैं। आप ज़रूर उसकी चिंता कीजिए।

24 मार्च को दुनिया ने TB Day मनाया। हम जानते है, जब मैं छोटा था तो TB का नाम सुनते ही डर जाते थे। ऐसा लगता था कि बस अब तो मौत आ गयी। लेकिन अब TB से डर नहीं लगता है। क्योंकि सबको मालूम है कि TB का उपचार हो सकता है, और असानी से हो सकता है। लेकिन जब TB और मौत जुड़ गए थे तो हम डरते थे लेकिन अब TB के प्रति हम बेपरवाह हो गए हैं। लेकिन दुनिया की तुलना में TB के मरीजों की संख्या बहुत है। TB से अगर मुक्ति पानी है तो एक तो correct treatment चाहिये और complete treatment चाहिये। सही उपचार हो और पूरा उपचार हो। बीच में से छोड़ दिया तो वो मुसीबत नई पैदा कर देता है। अच्छा TB तो एक ऐसी चीज़ है कि अड़ोस-पड़ोस के लोग भी तय कर सकते है कि अरे भई check करो देखो, TB हो गया होगा। ख़ासी आ रही है, बुखार रहता है, वज़न कम होने लगता है। तो अड़ोस-पड़ोस को भी पता चल जाता है कि देखो यार कहीं उसको TB-VB तो नहीं हुआ। इसका मतलब हुआ कि ये बीमारी ऐसी है कि जिसको जल्द जाँच की जा सकती है।

मेरे प्यारे देशवासियो, इस दिशा में बहुत काम हो रहा है। तेरह हज़ार पांच सौ से अधिक Microscopy Centre हैं। चार लाख से अधिक DOT provider हैं। अनेक advance labs हैं और सारी सेवाएँ मुफ़्त में हैं। आप एक बार जाँच तो करा लीजिए। और ये बीमारी जा सकती है। बस सही उपचार हो और बीमारी नष्ट होने तक उपचार जारी रहे। मैं आपसे आग्रह करूँगा कि चाहे TB हो या Diabetes हो हमें उसे परास्त करना है। भारत को हमें इन बीमारियों से मुक्ति दिलानी है। लेकिन ये सरकार, डॉक्टर, दवाई से नहीं होता है जब तक की आप न करें। और इसलिए मैं आज मेरे देशवासियों से आग्रह करता हूँ कि हम diabetes को परास्त करें। हम TB से मुक्ति पायें।

मेरे प्यारे देशवासियो, अप्रैल महीने में कई महत्वपूर्ण अवसर आ रहे हैं। विशेष कर 14 अप्रैल भीमराव बाबा साहिब अम्बेडकर का जन्मदिन। उनकी 125वी जयंती साल भर पूरे देश में मनाई गयी। एक पंचतीर्थ, मऊ उनका जन्म् स्थान, London में उनकी शिक्षा हुई, नागपुर में उनकी दीक्षा हुई, 26-अलीपुर रोड, दिल्ली में उनका महापरिनिर्वाण हुआ और मुंबई में जहाँ उनका अन्तिम संस्कार हुआ वो चैत्य भूमि। इन पाँचों तीर्थ के विकास के लिए हम लगातार कोशिश कर रहे हैं। मेरा सौभाग्य है कि मुझे इस वर्ष 14 अप्रैल को मुझे बाबा साहिब अम्बेडकर की जन्मस्थली मऊ जाने का सौभाग्य मिल रहा है। एक उत्तम नागरिक बनने के लिए बाबा साहिब ने हमने बहुत कुछ दिया है। उस रास्ते पर चल कर के एक उत्तम नागरिक बन कर के उनको हम बहुत बड़ी श्रधांजलि दे सकते हैं।

कुछ ही दिनों में, विक्रम संवत् की शुरुआत होगी। नया विक्रम संवत् आएगा। अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग रूप से मनाया जाता है। कोई इसे नव संवत्सर कहता है, कोई गुड़ी-पड़वा कहता है, कोई वर्ष प्रतिप्रता कहता है, कोई उगादी कहता है। लेकिन हिन्दुस्तान के क़रीब-क़रीब सभी क्षत्रों में इसका महात्म्यं है। मेरी नव वर्ष के लिए सब को बहुत-बहुत शुभकामनाएं है।

आप जानते हैं, मैं पिछली बार भी कहा था कि मेरे ‘मन की बात’ को सुनने के लिए, कभी भी सुन सकते हैं। क़रीब-क़रीब 20 भाषाओँ में सुन सकते हैं। आपके अपने समय पर सुन सकते हैं। आपके अपने मोबाइल फ़ोन पर सुन सकते हैं। बस सिर्फ आपको एक missed call करना होता है। और मुझे ख़ुशी है कि इस सेवा का लाभ अभी तो एक महीना बड़ी मुश्किल से हुआ है। लेकिन 35 लाख़ लोगों ने इसका फायदा उठाया। आप भी नंबर लिख लीजिये 81908-81908. मैं repeat करता हूँ 81908-81908. आप missed call करिए और जब भी आपकी सुविधा हो पुरानी ‘मन की बात’ भी सुनना चाहते हो तो भी सुन सकते हो, आपकी अपनी भाषा में सुन सकते हो। मुझे ख़ुशी होगी आपके साथ जुड़े रहने की।

मेरे प्यारे देशवासियो, आपको बहुत-बहुत शुभकामनायें। बहुत-बहुत धन्यवाद।

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आज भारत में 70 से ज्यादा यूनिकॉर्न हैं: पीएम मोदी
भारत की विकास गाथा का यह टर्निंग पॉइंट है, जहां अब लोग न सिर्फ नौकरी चाहने वाले बनने का सपना देख रहे हैं बल्कि नौकरी देने वाले भी बन रहे हैं: पीएम

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | आज हम एक बार फिर ‘मन की बात’ के लिए एक साथ जुड़ रहे हैं | दो दिन बाद दिसम्बर का महीना भी शुरू हो रहा है और दिसम्बर आते ही psychologically हमें ऐसा ही लगता है कि चलिए भई साल पूरा हो गया | ये साल का आखिरी महीना है और नए साल के लिए ताने-बाने बुनना शुरू कर देते हैं | इसी महीने Navy Day और Armed Forces Flag Day भी देश मनाता है | हम सबको मालूम है 16 दिसम्बर को 1971 के युद्ध का स्वर्णिम जयन्ती वर्ष भी देश मना रहा है | मैं इन सभी अवसरों पर देश के सुरक्षा बलों का स्मरण करता हूँ, हमारे वीरों का स्मरण करता हूँ | और विशेष रूप से ऐसे वीरों को जन्म देने वाली वीर माताओं का स्मरण करता हूँ | हमेशा की तरह इस बार भी मुझे NamoApp पर, MyGov पर आप सबके ढ़ेर सारे सुझाव भी मिले हैं | आप लोगों ने मुझे अपने परिवार का एक हिस्सा मानते हुए अपने जीवन के सुख-दुख भी साझा किये हैं | इसमें बहुत सारे नौजवान भी हैं, छात्र-छात्राएँ हैं | मुझे वाकई बहुत अच्छा लगता है कि ‘मन की बात’ का हमारा ये परिवार निरंतर बड़ा तो हो ही रहा है, मन से भी जुड़ रहा है और मकसद से भी जुड़ रहा है और हमारे गहरे होते रिश्ते, हमारे भीतर, निरंतर सकारत्मकता का एक प्रवाह, प्रवाहित कर रहे हैं |

मेरे प्यारे देशवासियो, मुझे सीतापुर के ओजस्वी ने लिखा है कि अमृत महोत्सव से जुड़ी चर्चाएँ उन्हें खूब पसंद आ रही हैं | वो अपने दोस्तों के साथ ‘मन की बात’ सुनते हैं और स्वाधीनता संग्राम के बारे में काफी कुछ जानने का, सीखने का, लगातार प्रयास कर रहे हैं | साथियो, अमृत महोत्सव, सीखने के साथ ही हमें देश के लिए कुछ करने की भी प्रेरणा देता है और अब तो देश-भर में आम लोग हों या सरकारें, पंचायत से लेकर parliament तक, अमृत महोत्सव की गूँज है और लगातार इस महोत्सव से जुड़े कार्यक्रमों का सिलसिला चल रहा है | ऐसा ही एक रोचक प्रोग्राम पिछले दिनों दिल्ली में हुआ | “आजादी की कहानी-बच्चों की जुबानी’ कार्यक्रम में बच्चों ने स्वाधीनता संग्राम से जुड़ी गाथाओं को पूरे मनोभाव से प्रस्तुत किया | खास बात ये भी रही कि इसमें भारत के साथ ही नेपाल, मौरिशस, तंजानिया, न्यूजीलैंड और फीजी के students भी शामिल हुए | हमारे देश का महारत्न ONGC. ONGC भी कुछ अलग तरीके से अमृत महोत्सव मना रहा है | ONGC इन दिनों, Oil Fields में अपने students के लिए study tour का आयोजन कर रहा है | इन tours में युवाओं को ONGC के Oil Field Operations की जानकारी दी जा रही है - उद्धेश्य ये कि हमारे उभरते इंजीनियर राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में पूरे जोश और जुनून के साथ हाथ बंटा सकें |

साथियो, आजादी में अपने जनजातीय समुदाय के योगदान को देखते हुए देश ने जनजातीय गौरव सप्ताह भी मनाया है | देश के अलग-अलग हिस्सों में इससे जुड़े कार्यक्रम भी हुए | अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में जारवा और ओंगे, ऐसे जनजातीय समुदायों के लोगों ने अपनी संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन किया | एक कमाल का काम हिमाचल प्रदेश में ऊना के Miniature Writer राम कुमार जोशी जी ने भी किया है, उन्होनें, Postage Stamps पर ही यानी इतने छोटे postage stamp पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के अनोखे sketch बनाए हैं | हिन्दी में लिखे ‘राम’ शब्द पर उन्होनें sketch तैयार किए, जिसमें संक्षेप में दोनों महापुरुषों की जीवनी को भी उकेरा गया है | मध्य प्रदेश के कटनी से भी कुछ साथियों ने एक यादगार दास्तानगोई कार्यक्रम की जानकारी दी है | इसमें रानी दुर्गावती के अदम्य साहस और बलिदान की यादें ताजा की गई हैं | ऐसा ही एक कार्यक्रम काशी में हुआ | गोस्वामी तुलसीदास, संत कबीर, संत रविदास, भारतेन्दु हरिश्चंद्र, मुंशी प्रेमचंद और जयशंकर प्रसाद जैसी महान विभूतियों के सम्मान में तीन दिनों के महोत्सव का आयोजन किया गया | अलग-अलग कालखंड में, इन सभी की, देश की जन-जागृति में, बहुत बड़ी भूमिका रही है | आपको ध्यान होगा, ‘मन की बात’ के पिछले episodes के दौरान मैंने तीन प्रतियोगिताओं का उल्लेख किया था, competition की बात कही थी - एक देशभक्ति के गीत लिखना, देश भक्ति से जुड़ी, आजादी के आंदोलन से जुड़ी घटनाओं की रंगोली बनाना और हमारे बच्चों के मन में भव्य भारत के सपने जगाने वाली लोरी लिखी जाए | मुझे आशा है कि इन प्रतियोगिताओं के लिए भी आप जरुर Entry भी भेज चुके होंगे, योजना भी बना चुके होंगे और अपने साथियों से चर्चा भी कर चुके होंगे | मुझे आशा है बढ़-चढ़कर के हिन्दुस्तान के हर कोने में इस कार्यक्रम को आप जरुर आगे बढ़ायेंगे |

मेरे प्यारे देशवासियो, इस चर्चा से अब मैं आपको सीधे वृन्दावन लेकर चलता हूँ | वृन्दावन के बारे में कहा जाता है कि ये भगवान के प्रेम का प्रत्यक्ष स्वरूप है | हमारे संतों ने भी कहा है –
यह आसा धरि चित्त में, यह आसा धरि चित्त में,
कहत जथा मति मोर |
वृंदावन सुख रंग कौ, वृंदावन सुख रंग कौ,
काहु न पायौ और |

यानि, वृंदावन की महिमा, हम सब, अपने-अपने सामर्थ्य के हिसाब से कहते जरूर हैं, लेकिन वृंदावन का जो सुख है, यहाँ का जो रस है, उसका अंत, कोई नहीं पा सकता, वो तो असीम है | तभी तो वृंदावन दुनिया भर के लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करता रहा है | इसकी छाप आपको दुनिया के कोने-कोने में मिल जाएगी |

पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में एक शहर है, पर्थ | क्रिकेट प्रेमी लोग इस जगत से भली-भांति परिचित होंगे, क्योंकि पर्थ में अक्सर क्रिकेट मैच होते रहते हैं | पर्थ में एक ‘Sacred India Gallery’ इस नाम से एक art gallery भी है | यह gallery Swan Valley के एक खूबसूरत क्षेत्र में बनाई गई है, और, ये ऑस्ट्रेलिया की एक निवासी जगत तारिणी दासी जी के प्रयासों का नतीजा है | जगत तारिणी जी वैसे तो हैं ऑस्ट्रेलिया की, जन्म भी वहीं हुआ, लालन-पालन भी वहीँ हुआ, लेकिन 13 साल से भी अधिक समय, वृन्दावन में आकर के उन्होंने बिताया | उनका कहना है, कि वे ऑस्ट्रेलिया लौट तो गई, अपने देश वापिस तो गयी, लेकिन, वो कभी भी वृन्दावन को भूल नहीं पाईं | इसलिए उन्होने वृंदावन और उसका आध्यात्मिक भाव से जुडने के लिए ऑस्ट्रेलिया में ही वृन्दावन खड़ा कर दिया | अपनी कला को ही एक माध्यम बना करके एक अद्भुत वृन्दावन उन्होंने बना लिया | यहाँ आने वाले लोगों को कई तरह की कलाकृतियों को देखने का अवसर मिलता है | उन्हें भारत के सर्वाधिक प्रसिद्ध तीर्थस्थलों - वृंदावन, नवाद्वीप और जगन्नाथपुरी की परंपरा और संस्कृति की झलक देखने को मिलती है | यहाँ पर भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़ी कई कलाकृतियाँ भी प्रदर्शित की गई हैं | एक कलाकृति ऐसी भी है, जिसमें भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा रखा है, जिसके नीचे वृंदावन के लोग आश्रय लिए हुए हैं | जगत तारिणी जी का यह अद्भुत प्रयास, वाकई, हमें कृष्ण भक्ति की शक्ति का दर्शन कराता है | मैं, उन्हें, इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएँ देता हूँ |

मेरे प्यारे देशवासियो, अभी मैं ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में बने वृन्दावन के विषय में बात कर रहा था | ये भी एक दिलचस्प इतिहास है कि ऑस्ट्रेलिया का एक रिश्ता हमारे बुंदेलखंड के झाँसी से भी है | दरअसल, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई जब East India Company के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही थी, तो उनके वकील थे जॉन लैंग (John Lang) | जॉन लैंग मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया के ही रहने वाले थे | भारत में रहकर उन्होने रानी लक्ष्मीबाई का मुकदमा लड़ा था | हमारे स्वतन्त्रता संग्राम में झाँसी और बुंदेलखंड का कितना बड़ा योगदान है, ये हम सब जानते हैं | यहाँ रानी लक्ष्मीबाई और झलकारी बाई जैसी वीरांगनाएँ भी हुईं और मेजर ध्यानचंद जैसे खेल रत्न भी इस क्षेत्र ने देश को दिये हैं |

साथियो, वीरता केवल युद्ध के मैदान में ही दिखाई जाए, ऐसा जरूरी नहीं होता | वीरता जब एक व्रत बन जाती है और उसका विस्तार होता है तो हर क्षेत्र में अनेकों कार्य सिद्ध होने लगते हैं | मुझे ऐसी ही वीरता के बारे में श्रीमती ज्योत्सना ने चिट्ठी लिखकर बताया है | जालौन में एक पारंपरिक नदी थी – नून नदी | नून, यहाँ के किसानों के लिए पानी का प्रमुख स्त्रोत हुआ करती थी, लेकिन, धीरे-धीरे नून नदी लुप्त होने की कगार पर पहुँच गई, जो थोड़ा बहुत अस्तित्व इस नदी का बचा था, उसमें वो नाले में तब्दील हो रही थी, इससे किसानों के लिए सिंचाई का भी संकट खड़ा हो गया था | जालौन के लोगों ने इस स्थिति को बदलने का बीड़ा उठाया | इसी साल मार्च में इसके लिए एक कमेटी बनाई गई | हजारों ग्रामीण और स्थानीय लोग स्वतः स्फूर्त इस अभियान से जुड़े | यहाँ की पंचायतों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर काम करना शुरू किया, और आज इतने कम समय में, और बहुत कम लागत में, ये नदी, फिर से जीवित हो गई है | कितने ही किसानों को इसका फायदा हो रहा है | युद्ध के मैदान से अलग वीरता का ये उदाहरण, हमारे देशवासियों की, संकल्प शक्ति को दिखाता है, और ये भी बताता है कि अगर हम ठान लें, तो, कुछ भी असंभव नहीं है और तब ही तो मैं कहता हूँ - सबका प्रयास |

मेरे प्यारे देशवासियो, जब हम प्रकृति का संरक्षण करते हैं तो बदले में प्रकृति हमें भी संरक्षण और सुरक्षा देती है | इस बात को हम अपने निजी जीवन में भी अनुभव करते हैं और ऐसा ही एक उदाहरण तमिलनाडु के लोगों ने व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया है | ये उदाहरण है तमिलनाडु के तूतुकुड़ी जिले का | हम जानते हैं कि तटीय इलाकों में कई बार ज़मीन के डूबने का खतरा रहता है | तूतुकुड़ी में भी कई छोटे Island और टापू ऐसे थे जिनके समुद्र में डूबने का खतरा बढ़ रहा था | यहाँ के लोगों ने और विशेषज्ञों ने इस प्राकृतिक आपदा का बचाव प्रकृति के जरिये ही खोजा | ये लोग अब इन टापुओं पर पाल्मेरा के पेड़ लगा रहे हैं | ये पेड़ cyclone और तूफानों में भी खड़े रहते है और जमीन को सुरक्षा देते हैं | इनसे अब इस इलाके को बचाने का एक नया भरोसा जगा है |
साथियो, प्रकृति से हमारे लिये खतरा तभी पैदा होता है जब हम उसके संतुलन को बिगाड़ते हैं या उसकी पवित्रता नष्ट करते हैं | प्रकृति माँ की तरह हमारा पालन भी करती है और हमारी दुनिया में नए-नए रंग भी भरती है |
अभी मैं social media पर देख रहा था, मेघालय में एक flying boat की तस्वीर खूब viral हो रही है | पहली ही नज़र ये तस्वीर हमें आकर्षित करती है | आपमें से भी ज्यादातर लोगों ने इसे online जरुर देखा होगा | हवा में तैरती इस नाव को जब हम करीब से देखते है तब हमें पता चलता है कि ये तो नदी के पानी में चल रही है | नदी का पानी इतना साफ़ है कि हमें उसकी तलहटी दिखती है और नाव हवा में तैरती सी लगने लग जाती है | हमारे देश में अनेक राज्य हैं, अनेक क्षेत्र है जहाँ के लोगों ने अपनी प्राकृतिक विरासत के रंगों को सँजोकर रखा है | इन लोगों ने प्रकृति के साथ मिलकर रहने की जीवनशैली आज भी जीवित रखी है | ये हम सबके लिए भी प्रेरणा है | हमारे आस-पास जो भी प्राकृतिक संसाधन है, हम उन्हें बचाएं, उन्हें फिर से उनका असली रूप लौटाएँ | इसी में हम सबका हित है, जग का हित है |

मेरे प्यारे देशवासियो, सरकार जब योजनाएँ बनाती है, बजट खर्च करती है, समय पर परियोजनाओं को पूरा करती है तो लोगों को लगता है कि वो काम कर रही है | लेकिन सरकार के अनेक कार्यों में विकास के अनेक योजनाओं के बीच मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी बातें हमेशा एक अलग सुख देती है | सरकार के प्रयासों से, सरकार की योजनाओं से कैसे कोई जीवन बदला उस बदले हुए जीवन का अनुभव क्या है ? जब ये सुनते हैं तो हम भी संवेदनाओं से भर जाते हैं | यह मन को संतोष भी देता है और उस योजना को लोगों तक पहुँचाने की प्रेरणा भी देता है | एक प्रकार से यह ‘स्वान्त: सुखाय’ ही तो है और इसलिए आज “मन की बात” में हमारे साथ दो ऐसे ही साथी भी जुड़ रहे हैं जो अपने हौसलों से एक नया जीवन जीतकर आए हैं | इन्होंने आयुष्मान भारत योजना की मदद से अपना इलाज कराया और एक नयी जिंदगी की शुरुआत की है | हमारे पहले साथी हैं राजेश कुमार प्रजापति जिन्हें ह्रदय रोग की बीमारी heart की समस्या थी |
तो आइये, राजेश जी से बात करते हैं -

प्रधानमंत्री जी – राजेश जी नमस्ते |
राजेश प्रजापति – नमस्ते Sir नमस्ते |
प्रधानमंत्री जी – आपकी राजेश जी बीमारी क्या थी ? फिर
किसी डॉक्टर के पास गए होंगे, मुझे जरा समझाइए स्थानीय डॉक्टर ने कहा होगा फिर किसी और डॉक्टर के पास गए होंगें ? फिर आप निर्णय नहीं करते होंगे या करते होंगे क्या-क्या होता था ?
राजेश प्रजापति – जी मुझे heart में problem sir आ गई थी, मेरे
सीने में जलन होती थी sir, फिर मैंने डॉक्टर को दिखाया डॉक्टर ने पहले तो बताया हो सकता है बेटा तुम्हारे एसिड होगी, तो मैंने काफी दिन एसिड की दवाई कराई , उससे जब मुझे फायदा नहीं हुआ फिर डॉक्टर कपूर को दिखाया, तो उन्होंने कहा बेटा तुम्हारे जो लक्षण हैं उससे angiography से पता चलेगा, फिर उन्होंने refer किया मुझे श्री राम मूर्ति में | फिर मिले हम अमरेश अग्रवाल जी से, तो उन्होंने मेरी angiography करी | फिर उन्होंने बताया कि बेटा ये तो तुम्हारी नस blockage है, तो हमने कहा sir इसमें कितना खर्चा आयेगा? तो उन्होंने कहा card है आयुष्मान वाला जो PM जी ने बना के दिया | तो हमने कहा sir, हमारे पास है | तो उन्होंने मेरा वो card लिया और मेरा सारा इलाज़ उसी card से हुआ है | सर और जो आपने ये बनाया है card ये बहुत ही अच्छी तरीक़े से और हम गरीब आदमियों के लिए बहुत सहूलियत है इससे | और आपका कैसे मैं धन्यवाद करूँ |
प्रधानमंत्री जी – आप करते क्या हैं राजेश जी ?
राजेश प्रजापति – सर मैं इस समय तो Private नौकरी करता हूँ | सर |
प्रधानमंत्री जी – और आयु कितनी है आपकी |
राजेश प्रजापति – मेरी उनचास साल है | सर |
प्रधानमंत्री जी – इतनी छोटी आयु में आप को heart का trouble हो गया |
राजेश प्रजापति – हाँ जी sir क्या बताये अब |
प्रधानमंत्री जी – आपके परिवार में भी पिताजी को या किसी माता जी को या इस प्रकार का पहले रहा है क्या?
राजेश प्रजापति – नहीं sir किसी को नहीं था sir, ये पहला हमारे साथ ही हुआ है
प्रधानमंत्री जी – ये आयुष्मान card भारत सरकार यह card देती है, गरीबों के लिए बहुत बड़ी योजना है तो ये आप को पता कैसे चला
राजेश प्रजापति – sir ये तो, इतनी बड़ी योजना है गरीब आदमी बहुत इस से benefit मिलता है और इतना खुश हैं sir, हमने तो हॉस्पिटल में देखा है कि इस card से कितना लोगों को सहूलियत मिलती है जब डॉक्टर से कहता है card मेरे पास है sir तो डॉक्टर कहता है ठीक वो card लेकर आईये मैं उसी card से आप का इलाज़ कर दूँगा |
प्रधानमंत्री जी – अच्छा card ना होता तो आप को कितना खर्चा बोला था डॉक्टर ने |
राजेश प्रजापति – डॉक्टर साहब ने कहा था बेटा इसमें बहुत सारा खर्चा आयेगा| बेटा अगर card नहीं होगा | तो मैंने कहा sir card तो है मेरे पास, तो उन्होंने कहा तुरंत आप दिखाइए तो हमने तुरंत दिखाया उसी card से सारा इलाज़ मेरा किया गया मेरे एक पैसा नहीं खर्च हुआ सारी दवाइयां भी उसी card से निकाली गई हैं |
प्रधानमंत्री जी – तो राजेश जी आप को अभी संतोष है, तबीयत ठीक है |
राजेश प्रजापति – जी sir आप का बहुत-बहुत धन्यवाद sir आप की उम्र भी इतनी लम्बी हो की हमेशा सत्ता में ही रहे, और हमारे परिवार के लोग भी आप से इतना खुश हैं क्या कहें आप से |
प्रधानमंत्री जी: राजेश जी आप मुझे सत्ता में रहने की शुभकामनाएं मत दीजिए, मैं आज भी सत्ता में नहीं हूँ और भविष्य में भी सत्ता में जाना नहीं चाहता हूँ | मैं सिर्फ सेवा में रहना चाहता हूँ, मेरे लिए ये पद, ये प्रधानमंत्री सारी चीजें ये सत्ता के लिए है ही नहीं भाई, सेवा के लिए है |
राजेश प्रजापति : सेवा ही तो चाहिए हम लोगों को और क्या |
प्रधानमंत्री जी: देखिये ग़रीबों के लिए यह आयुष्मान भारत योजना यह अपने आप में
राजेश प्रजापति : जी sir बहुत बढ़िया चीज़ है
प्रधानमंत्री जी: लेकिन देखिये राजेश जी आप हमारा एक काम कीजिये, करेंगे ?
राजेश प्रजापति: जी बिल्कुल करेंगे sir
प्रधानमंत्री जी: देखिये होता क्या है कि लोगों को इसका पता नहीं होता है, आप एक जिम्मेवारी निभायिये ऐसे जितने गरीब परिवार है आपके आसपास उनको अपनी ये कैसे आपको लाभ हुआ, कैसे मदद मिली, ये बताइए ?
राजेश प्रजापति : बिल्कुल बतायेंगे sir
प्रधानमंत्री जी: और उनको कहिये कि वे भी ऐसा कार्ड बनवा लें ताकि परिवार में पता नहीं कब क्या मुसीबत आ जाये और आज ग़रीब दवाई के कारण परेशान रहे यह तो ठीक नहीं है | अब पैसों के कारण वो दवाई न ले या बीमारी का उपाय न करें तो ये भी बड़ी चिंता का विषय है और गरीब को तो क्या होता है जैसे आपको ये Heart का Problem हुआ, तो कितने महीने तक आप काम ही नहीं कर पाएं होंगे
राजेश प्रजापति: हम तो दस कदम नहीं चल पातें थे जीना नहीं चढ़ पाते थे sir
प्रधानमंत्री जी: बस तो आप आप राजेश जी मेरे एक अच्छे साथी बनके जितने ग़रीबों को आप ये आयुष्मान भारत योजना के संबंध में समझा सकते हैं, वैसे बीमार लोगों की मदद कर सकते है देखिये आपको भी संतोष होगा और मुझे बहुत ख़ुशी होगी कि चलिए एक राजेश जी की तबीयत तो ठीक हुई लेकिन राजेश जी ने सैकड़ों लोगों की तबीयत ठीक करवा दी, ये आयुष्मान भारत योजना, ये गरीबों के लिए है, मध्यम वर्ग के लिए है, सामान्य परिवारों के लिए है, तो घर-घर इस बात को पहुचाएंगे आप !

राजेश प्रजापति: बिल्कुल पहुचाएंगे sir | हम तो वहीँ तीन दिन रुके न हॉस्पिटल में sir तो बिचारे बहुत लोग आएं सारी सुविधाएं उनको बताई, card होगा तो free में हो जाएगा |
प्रधानमंत्री जी: चलिए राजेश जी, आप अपने आप को स्वस्थ रखिए, थोड़ी शरीर की चिंता करिये, बच्चों की चिंता कीजिये और बहुत प्रगति कीजिये, मेरी बहुत शुभकामनाएं है आपको |

साथियो, हमने राजेश जी की बातें सुनी, आइये अब हमारे साथ सुख देवी जी जुड़ रही हैं, घुटनों की समस्या ने उन्हें बहुत परेशान कर दिया था, आइये हम सुखदेवी जी से पहले उनके दुःख कि बात सुनते हैं और फिर सुख कैसे आया वो समझते हैं |

मोदी जी – सुखदेवी जी नमस्ते! आप कहाँ से बोल रहीं हैं ?
सुखदेवी जी – दानदपरा से |
मोदी जी – कहाँ-कहाँ पड़ता है ये ?
सुखदेवी जी – मथुरा में |
मोदी जी – मथुरा में, फिर तो सुखदेवी जी, आपको नमस्ते भी कहना है और साथ-साथ राधे-राधे भी कहना होगा |
सुखदेवी जी – हाँ, राधे-राधे |
मोदी जी – अच्छा हमें सुना कि आपको तकलीफ हुई थी | आपका कोई operation हुआ | जरा बताएंगी कि क्या बात है ?
सुखदेवी जी – हाँ मेरा घुटना खराब हो गया था, तो operation हुआ है मेरा | प्रयाग हॉस्पिटल में |
मोदी जी – आपकी आयु कितनी है सुखदेवी जी ?
सुखदेवी जी – उम्र 40 साल |
मोदी जी – 40 साल और सुखदेव नाम, और सुखदेवी को बीमारी हो गई |
सुखदेवी जी – बीमारी तो मुझे 15-16 साल से ही लग गई |
मोदी जी – अरे बाप रे ! इतनी छोटी आयु में घुटने आपके
खराब हो गए |
सुखदेवी जी – वो गठिया- बाय बोलते हैं जो जोड़ों में दर्द से घुटना खराब हो गई |
मोदी जी – तो 16 साल से 40 साल की उम्र तक आपने इसका
इलाज ही नहीं कराया |
सुखदेवी जी – नहीं, करवाया था | दर्द की दवाई खाते रहे छोटे-मोटे डॉक्टरों ने तो ऐसे देशी दवाई है वैसी दवाई है | थैलाछाप डॉक्टरों ने तो ऐसे उनसे घुटना चल भी पाई ख़राब हो गई, 1-2 किलोमीटर पैदल चली मैं तो घुटना खराब हो गई मेरी |
मोदी जी – तो सुखदेवी जी Operation का विचार कैसे आया ? उसके पैसों का क्या प्रबंधन किया ? कैसे बना ये सब ?
सुखदेवी जी – मैंने वो आयुष्मान कार्ड से इलाज करवाया है |
मोदी जी – तो आपको आयुष्मान कार्ड मिल गया था ?
सुखदेवी जी – हाँ |
मोदी जी – और आयुष्मान कार्ड से गरीबों को मुफ्त में उपचार
होता है | ये पता था ?
सुखदेवी जी – स्कूल में meeting हो रही थी | वहाँ से हमारे पति को पता चला तो कार्ड बनवाया मेरे नाम से |
मोदी जी – हाँ |
सुखदेवी जी – फिर इलाज करवाया कार्ड से, और मैंने कोई पैसा नहीं लगाया | कार्ड से ही इलाज हुआ है मेरा | खूब बढ़िया इलाज हुआ है |
मोदी जी – अच्छा डॉक्टर ने पहले अगर कार्ड न होता तो कितना खर्चा बताते थे ?
सुखदेवी जी – ढाई लाख रुपए, तीन लाख रुपए | 6-7 साल से पड़ी
हूँ खाट में | ये कहती थी कि हे भगवान मुझे ले ले तू, मुझे नहीं जीना |
मोदी जी – 6-7 साल से खाट पे थी | बाप-रे-बाप |
सुखदेवी जी – हाँ |
मोदी जी – ओहो |
सुखदेवी जी – बिल्कुल उठा-बैठा नहीं जाता |
मोदी जी – तो अभी आपका घुटना पहले से अच्छा हुआ है ?
सुखदेवी जी – मैं खूब घूमती हूँ | फिरती हूँ | Kitchen का काम
करती हूँ | घर का काम करती हूँ | बच्चों को खाना बनाकर देती हूँ |
मोदी जी – तो मतलब आयुष्मान भारत का कार्ड आपको सचमुच में आयुष्मान बना दिया |
सुखदेवी जी – बहुत-बहुत धन्यवाद आपकी योजना की वजह से ठीक हो गई, अपने पैरों पर खड़ी हो गई |
मोदी जी – तो अब तो बच्चों को भी आनंद आता होगा |
सुखदेवी जी – हाँजी | बच्चों को तो बहुत ही परेशानी होती थी | अब माँ परेशान है तो बच्चा भी परेशान है |
मोदी जी – देखिये हमारे जीवन में सबसे बड़ा सुख हमारा स्वास्थ्य ही होता है, ये सुखी जीवन सबको मिले यही आयुष्मान भारत की भावना है, चलिए सुखदेवी जी मेरी आप को बहुत बहुत शुभकामनाएँ, फिर से एक बार आप को राधे-राधे |
सुखदेवी जी- राधे- राधे , नमस्ते !

मेरे प्यारे देशवासियो, युवाओं से समृद्ध हर देश में तीन चीजें बहुत मायने रखती हैं | अब वही तो कभी-कभी युवा की सच्ची पहचान बन जाती है | पहली चीज है – Ideas और Innovation | दूसरी है – जोखिम लेने का जज्बा और तीसरी है – Can Do Spirit यानी किसी भी काम को पूरा करने की जिद्द, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत क्यों न हों - जब ये तीनों चीजें आपस में मिलती हैं तो अभूतपूर्व परिणाम मिलते हैं | चमत्कार हो जाते हैं | आज कल हम चारों तरफ सुनते हैं Start-Up, Start-Up, Start-Up | सही बात है, ये Start-Up का युग है, और ये भी सही है कि Start-Up की दुनिया में आज भारत विश्व में एक प्रकार से नेतृत्व कर रहा है | साल-दर-साल Start-Up को record निवेश मिल रहा है | ये क्षेत्र बहुत तेज रफ़्तार से आगे बढ़ रहा है | यहाँ तक कि देश के छोटे-छोटे शहरों में भी Start-Up की पहुँच बढ़ी है | आज कल ‘Unicorn’ शब्द खूब चर्चा में है | आप सबने इसके बारे में सुना होगा | ‘Unicorn’ एक ऐसा Start-Up होता है जिसका valuation कम से कम 1 Billion Dollar होता है यानी करीब-करीब सात हज़ार करोड़ रूपए से ज्यादा |
साथियो, साल 2015 तक देश में बमुश्किल नौ या दस Unicorns हुआ करते थे | आपको ये जानकार बेहद ख़ुशी होगी कि अब Unicorns की दुनिया में भी भारत तेज उड़ान भर रहा है | एक रिपोर्ट के मुताबिक इसी साल एक बड़ा बदलाव आया है | सिर्फ 10 महीनों में ही भारत में हर 10 दिन में एक Unicorn बना है | ये इसलिए भी बड़ी बात है क्योंकि हमारे युवाओं ने ये सफलता कोरोना महामारी के बीच हासिल की है | आज भारत में 70 से अधिक Unicorns हो चुके हैं | यानि 70 से अधिक Start-Up ऐसे हैं जो 1 Billion से ज्यादा के valuation को पार कर गए हैं | साथियो Start-Up की सफलता के कारण हर किसी का उस पर ध्यान गया है और जिस प्रकार से देश से, विदेश से, निवेशकों से उसे समर्थन मिल रहा है | शायद कुछ साल पहले उसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था |
साथियो, Start-Ups के जरिये भारतीय युवा Global Problems के समाधान में भी अपना योगदान दे रहे हैं | आज हम एक युवा मयूर पाटिल से बात करेंगे, उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर Pollution की problem का solution देने का प्रयास किया है

मोदी जी – मयूर जी नमस्ते |
मयूर पाटिल – नमस्ते सर जी |
मोदी जी – मयूर जी आप कैसे हैं ?
मयूर पाटिल – बस बढ़िया सर | आप कैसे हो ?
मोदी जी – मैं बहुत प्रसन्न हूँ | अच्छा मुझे बताइए कि आज
आप कुछ Start-Up की दुनिया में हैं |
मयूर पाटिल – हाँ जी !
मोदी जी – और Waste में से Best भी कर रहें हैं |
मयूर पाटिल – हाँ जी !
मोदी जी - Environment का भी कर रहे हैं, थोड़ा मुझे अपने बारे में बताइए | अपने काम के बारे में बताइए और इस काम के पीछे आपको विचार कहाँ से आया ?
मयूर पाटिल – सर जब College में था तभी मेरे पास Motorcycle था | जिसका Mileage बहुत कम था और Emission बहुत ज्यादा था | वो Two stroke Motorcycle था | तो Emission कम करने के लिए और उसका Mileage थोड़ा बढ़ाने के लिए मैंने कोशिश चालू किया था | कुछ 2011-12 में और इसका मैंने करीब-करीब 62 Kilometres per litre तक Mileage बढ़ा दिया था | तो वहाँ से मुझे ये प्रेरणा मिली कि कुछ ऐसा चीज बनाए जो Mars Production कर सकते हैं, तो बाकी बहुत सारे लोगों को उसका फायदा होगा, तो 2017-18 में हम लोगों ने उसका Technology develop किया और Regional transport corporation में हम लोगों ने 10 buses में वो use किया | उसका result check करने के लिए और करीब-करीब हम लोगों ने उसका चालीस प्रतिशत emission उसका कम कर दिया | Buses में |
मोदी जी – हम्म ! अब ये Technology जो आपने खोजी
है | उसका Patent वगैरह करवा लिया |
मयूर पाटिल – हाँ जी ! Patent हो गया | ये साल में हमें Patent
grant होकर के आ गया |
मोदी जी – और आगे इसको बढ़ाने का क्या Plan है ? आपका | किस प्रकार से कर रहें हैं ? जैसे बस का result आ गया | उसकी भी सारी चीज़ें बाहर आ गई होंगी | तो आगे क्या सोच रहे हैं ?
मयूर पाटिल – सर, Start-Up India के अन्दर नीति आयोग से Atal New India Challenge जो है, वहाँ से हमें grant मिला और वो grant के basis पे हम लोगों ने अभी factory चालू किया जहाँ पे हम Air filters का manufacturing कर सकते हैं |
मोदी जी – तो भारत सरकार की तरफ से कितना grant मिला आपको ?
मयूर पाटिल – 90 Lakhs |
मोदी जी – 90 Lakhs |
मयूर पाटिल – हाँ जी !
मोदी जी – और उससे आपका काम चल गया |
मयूर पाटिल – हाँ अभी तो चालू हो गया है | Processes में हैं |
मोदी जी – आप कितने दोस्त मिल करके कर रहें हैं ? ये सब !
मयूर पाटिल – हम लोग चार लोग हैं सर |
मोदी जी – और चारों पहले साथ में ही पढ़ते थे और उसी में से आपको एक विचार आया आगे बढ़ने का |
मयूर पाटिल – हाँ जी ! हाँ जी ! हम college में ही थे | और college में हम लोगों ने ये सब सोचा और ये मेरा idea था कि मैं मेरा motorcycle का at least pollution कम हो जाए और mileage बढ़ जाए |
मोदी जी – अच्छा pollution कम करते हैं, mileage बढ़ाते हैं तो average खर्च कितना बचता होगा ?
मयूर पाटिल – सर motorcycle पे हम लोगों ने test किया उसका mileage था 25 Kilometers per liter वो हम लोगों ने बढ़ा दिया 39 Kilometers per liter तो करीब-करीब 14 किलोमीटर का फायदा हुआ और उसमें से 40 प्रतिशत का Carbon emissions कम हो गया | और जब buses पे किया Regional transport corporation ने तो वहाँ पे 10 प्रतिशत Fuel efficiency increase हुआ और उसमें भी 35-40 percent emission कम हो गया |

मोदी जी – मयूर मुझे बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके और आपके साथियों को भी मेरी तरफ से बधाई दीजिये कि College life में खुद की जो समस्या थी उस समस्या का समाधान भी आपने खोजा और अब उस समाधान में से जो रास्ता चुना उसने पर्यावरण की समस्या को address करने के लिए आपने बीड़ा उठाया | और ये हमारे देश के युवाओं का ये सामर्थ्य ही है कि कोई भी बड़ी चुनौती उठा लेते हैं और रास्ते खोज रहें हैं | मेरी तरफ से आपको बहुत शुभकामनाएँ हैं | बहुत –बहुत धन्यवाद |
मयूर पाटिल – Thank You Sir ! Thank You !

साथियो, कुछ सालों पहले यदि कोई कहता था कि वो business करना चाहता है या एक कोई नई कंपनी शुरू करना चाहता है, तब, परिवार के बड़े-बुजुर्ग का जवाब होता था कि – “तुम नौकरी क्यों नहीं करना चाहते, नौकरी करो ना भाई | अरे नौकरी में security होती है salary होती है | झंझट भी कम होती है | लेकिन, आज यदि कोई अपनी कंपनी शुरू करना चाहता है तो उसके आस-पास के सभी लोग बहुत उत्साहित होते हैं और इसमें उसका पूरा support भी करते हैं | साथियो भारत की growth story का यह turning point है, जहाँ अब लोग सिर्फ Job seekers बनने का सपना नहीं देख रहे बल्कि job creators भी बन रहे हैं | इससे विश्व मंच पर भारत की स्थिति और मज़बूत बनेगी |

मेरे प्यारे देशवासियो, आज ‘मन की बात’ में हमने अमृत महोत्सव की बात की | अमृतकाल में कैसे हमारे देशवासी नए-नए संकल्पों को पूरा कर रहे हैं, इसकी चर्चा की, और, साथ ही दिसम्बर महीने में सेना के शौर्य से जुड़े हुए अवसरों का भी जिक्र किया | दिसम्बर महीने में ही एक और बड़ा दिन हमारे सामने आता है जिससे हम प्रेरणा लेते हैं | ये दिन है, 6 दिसम्बर को बाबा साहब अम्बेडकर की पुण्यतिथि | बाबा साहब ने अपना पूरा जीवन देश और समाज के लिये अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिये समर्पित किया था | हम देशवासी ये कभी न भूलें कि हमारे संविधान की भी मूल भावना, हमारा संविधान हम सभी देशवासियो से अपने-अपने कर्तव्यों के निर्वहन की अपेक्षा करता है - तो आइये, हम भी संकल्प लें कि अमृत महोत्सव में हम कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाने का प्रयास करेंगे | यही बाबा साहब के लिये हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी |

साथियो अब हम दिसम्बर महीने में प्रवेश कर रहे हैं, स्वाभाविक है अगली ‘मन की बात’ 2021 की इस वर्ष की आखिरी ‘मन की बात’ होगी | 2022 में फिर से यात्रा शुरू करेंगे और मैं हाँ आपसे ढ़ेर सारे सुझावों की अपेक्षा करता ही रहता हूँ, करता रहूँगा | आप इस साल को कैसे विदा कर रहे हैं, नए साल में क्या कुछ करने वाले हैं, ये भी जरुर बताइये और हाँ ये कभी मत भूलना कोरोना अभी गया नहीं है | सावधानी बरतना हम सब की जिम्मेवारी है |

बहुत-बहुत धन्यवाद |