प्रधानमंत्री के मुख्य सचिव एवं कैबिनेट सचिव द्वारा सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ आज सुबह एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। सभी मुख्य सचिवों ने सूचित किया कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा की गई जनता कर्फ्यू की अपील को जबर्दस्त एवं स्वतः स्फूर्त प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है।

कोविड-19 के प्रसार को सीमित करने की आवश्यकता को देखते हुए, इस पर सहमति जताई गई कि 31 मार्च, 2020 तक अंतर-राज्यीय परिवहन बसों सहित गैर-अनिवार्य यात्री परिवहन की आवाजाही पर प्रतिबंध को विस्तारित किए जाने की तात्कालिक आवश्यकता है।

विस्तृत विचार विमर्शों के बाद, राज्य सरकारों को 75 जिलों, जिनमें कोविड-19 से संबंधित मामलों या हताहतों की पुष्टि हुई है, में केवल अनिवार्य सेवाओं को परिचालित करने की अनुमति देने के लिए उपयुक्त आदेश जारी करने का सुझाव दिया गयां। राज्य सरकारें स्थिति के अपने आकलन के अनुसार सूची को विस्तारित कर सकती हैं। नोट किया गया कि कई राज्य सरकारों ने पहले ही इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।

निर्णय:

निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:

31 मार्च, 2020 तक उपनगरीय रेल सेवाओं सहित सभी रेल सेवाएं स्थगित रहेंगी। तथापि, माल गाडि़यों को इससे छूट दी गई है।

31 मार्च, 2020 तक सभी मेट्रो रेल सेवाएं स्थगित रहेंगी। राज्य सरकारें 75 जिलों, जिनमें कोविड-19 से संबंधित मामलों की पुष्टि हुई है, में केवल अनिवार्य सेवाओं को परिचालित करने की अनुमति का आदेश जारी करेंगी।

अंतर-राज्यीय यात्री परिवहन भी 31 मार्च, 2020 तक स्थगित रहेगा।

 

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प्रधानमंत्री ने शक्ति और क्षमता के सामंजस्य पर बल देने वाला संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
May 13, 2026
प्रधानमंत्री ने 1998 के परमाणु परीक्षणों को हमारे राष्ट्र के संकल्प का निर्णायक क्षण बताया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज मई 1998 में पोखरण में भारत द्वारा किए गए ऐतिहासिक परमाणु परीक्षणों को याद करते हुए उन्हें हमारे राष्ट्र के संकल्प का निर्णायक क्षण बताया। श्री मोदी ने कहा, “11 मई के परीक्षणों के बाद, पूरी दुनिया ने भारत पर दबाव बनाया, लेकिन हमने यह सिद्ध कर दिया कि कोई भी शक्ति भारत को झुका नहीं सकती।”

प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक साझा किया-

“एवं परस्परापेक्षा शक्तिशक्तिमतोः स्थिता ।

न शिवेन विना शक्तिर्न शक्त्या विना शिवः।।”

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पोस्‍ट पर लिखा;

“1998 में इसी दिन भारत ने जो परमाणु परीक्षण किए थे, उनसे दुनिया को पता चला कि हमारे देश की इच्छाशक्ति कितनी अटल है! 11 मई के टेस्ट के बाद पूरी दुनिया का दबाव भारत पर था, लेकिन हमने दिखाया कि कोई भी ताकत भारत को झुका नहीं सकती।

एवं परस्परापेक्षा शक्तिशक्तिमतोः स्थिता ।

न शिवेन विना शक्तिर्न शक्त्या विना शिवः।।”