मंच पर विराजमान, इस महत्वपूर्ण समारोह में हिस्सा लेने के लिए पधारे हुए भारत सरकार के दो सीनियर अधिकारी डॉ. एस. अय्यपन जी एवं श्रीमान् आशीष बहुगुणा जी, मंच पर विराजमान मंत्री परिषद के मेरे साथी, विदेश से आए हुए मेहमान और सभी मेरे किसान भाइयों और बहनों..! 

मैं पूरा समय आपके बीच रहना चाहता था। कल भी मैं यहीं सभागार मैँ बैठ कर के किसानों को सुन रहा था। मुझे भी बहुत कुछ इस समारोह से सीखने को मिला, लेकिन आज मुझे बीच में दो-तीन घंटे के लिए जयपुर जाना पड़ा और उसके कारण मैं इसका पूरा लाभ नहीं उठा पाया। एक बात का मुझे सबसे ज्यादा आनंद भी हुआ है और संतोष भी हुआ है, क्योंकि टैक्निकल सेशन्स वगैरा में कभी लैंग्वेज का भी प्राब्लम होता है, उसकी टर्मिनोलॉजी भी हमारी सीमा से बाहर होती है, लेकिन इस प्रकार के सभी छोटे-छोटे सत्रों में देश भर से आए किसानों ने रूचि ली, पूरे मनोयोग से उसमें अपने आप को जोड़ा, जानने का प्रयास किया, ये एक अदभुत घटना थी मेरे हिसाब से..! मित्रों, ऐसे दो दिन के समारोह का जो आखिरी समारोह होता है तो करीब-करीब ऑडिटोरियम आधा कर देना पड़ता है। हमारी कठिनाई ये है कि अभी भी कई लोग बेचारे बाहर खड़े हैं, उनको जगह नहीं मिल रही है..! मेरे मन में विचार ये आता है, मैं मोदी को पूछ रहा हूँ कि भाई, ये करने में तुमने देर क्यों की..? मैं सच बता रहा हूँ, इसको इस रूप में और इस सफलता के साथ करने के लिए, मुझे लगता है कि अच्छा होता कि परमात्मा ने मुझे पाँच सात साल पहले इस काम के लिए प्रेरित किया होता..!

मैं भारत सरकार के इन दोनों महानुभावों का हृदय से अभिनंदन करता हूँ कि उन्होंने खुले मन से अपनी बातें बताई और गुजरात में हो रहे प्रयास और किसानों के बारे में जो सोचा जा रहा है, बहुत विस्तार से उन्होंने अपनी बातें बताई, मैं उनका आभारी हूँ..! क्योंकि देश की राजनीति इतनी विचित्र हो गई है कि एक सरकार का व्यक्ति दूसरी सरकार के प्रति अच्छी बोले तो बेचारे के लिए परेशानी आ जाती है, ये बुरी हालत है, मित्रों..! आपको हैरानी होगी मेरे किसान भाइयों और बहनों, आज हमारे कुछ नेताओं ने, अब उनको तो नेता कहना या नहीं कहना ये भी एक सवाल है, सवाल उठाया कि दूसरे राज्यों के किसानों को 51-51 हजार रूपया मोदी ने क्यों दिए..? बताइए, ये देश एक है, हम सब एक है, किसी भूभाग मे जन्मे होंगे, कोई भाषा बोलते होंगे... क्या हमारे बीच दूरी होनी चाहिए..? ये क्या छोटी सोच है..! और दूसरा मैं कभी सोचता हूँ कि क्या हिन्दुस्तान का कोई जिला ऐसा होगा, हिन्दुस्तान के कोई जिले का कोई किसान ऐसा होगा, जिसका मेरे राज्य पर कर्ज नहीं होगा..? जब हम अकाल में पीड़ित होते हैं तो हिन्दुस्तान के सात से आठ राज्यों के किसान जो घास उनके खेतों से हमें भेजते हैं, तब हमारे पशुओं को चारा मिलता है..! क्या मैँ उनका ऋण स्वीकार करूं या ना करूं..? हमें चावल बाहर से लाने पड़ते हैं, वो चावल पैदा करने वाले किसान जो हमारा पेट भरते हैं, वो हिन्दुस्तान के किसी भी कोने में पैदा हुआ होगा, क्या मैं उसका सम्मान करूं या ना करूं..? हम पंतग उडाते हैं, बड़ा मजा लेते हैं, तो उसके बाम्बू मुझे आसाम, नागलैंड और मिजोरम का किसान देता है, क्या मैं उसका शुक्रिया अदा करूँ या ना करूं..? हिन्दुस्तान के हर किसान की मेहनत का परिणाम है कि देश के हर कोने में कहीं ना कहीं, किसी ना किसी को लाभ हो रहा है और इसलिए किसानों को भूभाग के आधार पर, किसानों की भाषा के आधार पर उनके बीच में दरारें ना की जाएं, दीवारें खड़ी ना की जाएं। ये हमारी कोशिश है एकता की, जोड़ने की और वो भी ये धरती सुजलाम सुफलाम बने इसलिए हमारा एक पवित्र प्रयास है..!

Full Speech: Shri Modi at the Valedictory Session of Vibrant Gujarat Agriculture Summit 2013

भाइयों-बहनों, देश की प्रगति करनी है तो संकुचितता से बाहर आना पड़ता है। हम कभी-कभी सुनते हैं कि एक राज्य दूसरे राज्य को पानी नहीं देता है, पानी के लिए झगड़े होते हैं। आपको जान कर के आनंद होगा, गुजरात भले ही पानी के अभाव वाला राज्य है, हमें पानी की किल्लत है, हम वर्षा पर हमारी जिन्दगी गुजारते हैं, लेकिन राजस्थान को नर्मदा के पानी की जरूरत थी, उसका हक बनता था तो गुजरात ने कोई झगड़ा नहीं किया, कुछ नहीं किया और आज राजस्थान में नर्मदा का पानी बह रहा है..! देश में हर किसी को एक दूसरे की मदद करनी पड़ेगी, एक दूसरे की सहायता करनी पड़ेगी और तभी तो ये देश प्रगति कर सकता है..! और आने वाले दिनों में हिन्दुस्तान में होलिस्टिक वॉटर मैनेजमेंट के लिए सोचने की हमें जरूरत है। हिन्दुस्तान के कुछ भाग ऐसे हैं, जहाँ अधिक पानी के कारण किसान परेशान है और कुछ हिस्से ऐसे हैं कि जो पानी के अभाव के कारण परेशान है। कहीं पर पानी समंदर में बहता चला जा रहा है और कहीं पर एक लोटे भर पानी के लिए इंसान तरसता रहता है..! क्या ये हम लोगों का दायित्व नहीं है कि हमारे देश के किसानों के लिए, हमारे देश के विकास के लिए इस पानी के माहात्म्य को हम स्वीकार करें..? चाहे पीना हो, चाहे खेती का विषय हो, चाहे औद्योगिक विषय हो... इस पानी के मामले को हमें समझना होगा..! और इसलिए जब अटल बिहारी वाजपेयी जी देश के प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा कर रहे थे, तो उन्होंने एक सपने को साकार करने का प्रयास किया था, नदियों को जोड़ने का..! गुजरात का हमारा अनुभव है, हमने नर्मदा नदी के पानी से करीब बीस नदियों को जोड़ा है। आप लोगों को कभी मौका मिला हो, साबरमती नदी अगर देखने गए हो, तो हमारी ये साबरमती नदी जो है, अहमदाबाद में आपको कभी रिवरफ्रंट देखने का मौका मिला हो तो, वो साबरमती नदी है लेकिन पानी साबरमती का नहीं है, उसमें पानी नर्मदा का बह रहा है और उसके कारण इतना परिणाम मिला है, इतना परिवर्तन आया है..! जो पानी समंदर में जाता था, उस पानी का सर्वाधिक उपयोग हो..! हम लोगों ने तो छोटे-छोटे प्रयोग किये हैं, लेकिन बड़े स्केल पर देश में ये प्रयोग हो सकते हैं..! अगर गंगानहर राजस्थान में ना आती, अन्य राज्यों से पानी वहाँ ना पहुंचता तो राजस्थान के वो इलाके का क्या हाल हुआ होता और इसलिए पानी का एक होलिस्टिक मैनेजमेंट और देश में पानी के संबंध में एक संवेदनशीलता कैसे पैदा हो, पानी के मूल्य की ओर लोग कैसे सजग बने..!

अब बड़े-बड़े शहर हैं, बड़े शहरों में वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट करके वो पानी अगर किसान को पहुंचाया जाए तो भविष्य में शहर और गाँव के बीच जो तनाव की संभवनाएं हैं, वो संभवनाएं समाप्त हो जाएंगी। वरना झगड़े होंगे, गाँव वाले कहेंगे कि इस पानी पर हक मेरा है, शहर वाला कहेगा पीने के बिना हम जीएंगे कैसे, पहले हमें पीने के लिए चाहिए..! लेकिन यही पानी रिसाइकिल करके किसान को दिया जाए तो कोई संकट नहीं आएगा। विषय छोटे होते हैं, लेकिन अगर उस पर ध्यान केन्द्रित किया जाए तो मैं विश्वास से कहता हूँ मित्रों, हम काफी कुछ परिवर्तन ला सकते हैं और इसलिए हम लोगों का आग्रह है इन्टर लिकिंग ऑफ रिवर वॉटर ग्रीड, इस पर इस देश में आने वाले दिनों में गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए, योजनाएं बननी चाहिए,  कहीं ना कहीं से शुरू करना चाहिए और तब जा कर के हमारे किसान को हम बहुत बड़ी मदद कर सकते हैं। ये उसकी इनपुट कॉस्ट कम करने वाली बात है ना, उसमें एक बहुत बड़ा इनपुट कॉस्ट का मामला पानी है। अगर उसको पानी सहजता से मिल जाए तो उसका इनपुट कॉस्ट कम हो जाएगा और इनपुट कॉस्ट कम होगा तो स्वाभाविक है कि उस पर जो बोझ रहता है वो बोझ कम होगा, और जितनी भी आय होगी उस आय में वृद्घि होगी। उसी प्रकार से, एक बार मेरा एक अच्छा एक्सपीरियंस है, पूरे देश का हाल मुझे इतनी बारीकी से मालूम नहीं है, लेकिन मैं एक कृषि यूनिवर्सिटी में गया था और मुझे कुछ किसानों को सम्मानित करना था। और मैँ मानता था कि शायद बड़ी आयु के, पुरानी सोच के सारे किसान आए होंगे, लेकिन मुझे आनंद हुआ कि मैंने करीब पैंतीस किसानों को सम्मानित किया, और पैंतीस में से 25 से 28 किसान 30-35 की आयु के थे, इतना आनंद हुआ मुझे वो दृश्य देख कर..! इसका मतलब ये हुआ कि हम सही तरीके से कृषि को हमारी युवा पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करें, उसके भीतर एक आशा पैदा करें कि कृषि भी जिंदगी को और आगे बढ़ाने के लिए बहुत बड़ा अवसर बन सकती है। ये सोचने की जरूरत नहीं है कि तुम्हारे पिताजी या दादाजी के जमाने में जो कष्ट आए, तुम्हारे जमाने में भी वही कष्ट आएंगे, ऐसा सोचने की जरूरत नहीं है। वो एक नया विश्वास पैदा करने की आवश्कयता है और ये संभव है और इसलिए देश की ग्रामीण युवा पीढी को कृषि के माहात्म्य की ओर जोड़ कर के आर्थिक विकास, आर्थिक क्रांति के क्षेत्र का नेतृत्व करने के लिए हम उसको प्रेरित कैसे करें, उसको कैसे जोड़ें, उस दिशा में अगर हम प्रयास करेंगे तो सफलता मिलेगी ये मुझे विश्वास है..!

उसी प्रकार से, अब जैसे गुजरात के विकास की बात होती है तो एक बात पर हमारा बल रहता है कि गुजरात के विकास की यात्रा तीन खंभों पर खड़ी कैसे हो। एक तिहाई औद्योगिक विकास, एक तिहाई कृषि विकास और एक तिहाई सेवा क्षेत्र..! उस पर हम बल देते हैं और उस दिशा में जाने की हमारी भरपूर कोशिश रहती है। लेकिन कृषि में, और मेरा जितना अध्ययन है, और उसमें मेरा बड़ा विश्वास बन गया है और इन दिनों भी जो कृषि क्षेत्र के सफलता विफलता के जो रिसर्च हो रहे हैं उसमें भी ये बात उभर के आ रही है कि खेती के साथ एलाइड एक्टिविटि को हमें जोड़ना चाहिए और इसलिए खेती को भी तीन हिस्सों में बांटना चाहिए। एक हम जो परंपरागत खेती करते हैं वो, दूसरा एनिमल हसबैंडरी, पशुपालन, कोई पोल्ट्री फार्म करे, कोई फिशरीज का चलाएं, वो एक अतिरिक्त एक्टिविटी कृषि के साथ जुड़नी चाहिए। यहाँ आपने देखा होगा हमने ईमू फार्म का मॉडल रखा है। कई किसान ईमू को देखने जा रहे थे, ईमू के साथ फोटो निकाल रहे थे..! कितना बड़ा विश्व में उसका मार्केट होगा..! और इन दिनों ईमू फार्मिंग की ओर काफी मात्रा में किसान बढ़ रहे हैं, अपनी जमीन का छोटा सा हिस्सा ईमू फार्मिंग के साथ कर लेते हैं और ईमू के अंडे की दवाइयाँ बनाने के लिए दुनिया के बाजार में अब बहुत बड़ी माँग हो रही है, उसकी दिशा में काम कर रहे हैं। और इसलिए हम खेती का एक हिस्सा एनिमल हसबैंडरी का, पोल्ट्री फार्म का, फिशनरी का, इसकी ओर ध्यान दें..!

Full Speech: Shri Modi at the Valedictory Session of Vibrant Gujarat Agriculture Summit 2013

एक क्षेत्र की ओर और ध्यान देने की जरूरत है, और वो है तीसरा हिस्सा एग्रो फॉरिस्ट्री..! हमारे यहाँ क्या है, आज हम मकान बनाते हैं तो दो घर के बीच में एक दीवार चढ़ जाती है और उस दीवार का खर्चा आधा ये मकान वाला देता है और आधा वो मकान वाला देता है और एक पतली सी दीवार से हम दो मकानों को डिवाइड करते हैं। लेकिन दो खेत के बीच में हम इतनी सारी जमीन बर्बाद करते हैं, बाड़ लगा देते हैं, इतना नुकसान हो रहा है हमारी जमीन का..! हम एक-एक इंच जमीन का, ये जो बहुगुणा जी बता रहे थे, हम एक-एक इंच जमीन का उपयोग करें..! क्यों ना हमने अगर हमने पड़ौसी किसानों के साथ, हमारे बगल वाला जो किसान है उसके साथ बैठ कर के ये जो दो-दो, तीन-तीन, चार-चार फीट जमीन बर्बाद हो रही है, हम दोनों बैठ कर के तय करें, एक रिमार्क लाइन बना लें और उस पर वृक्षों की खेती करें..! वो हमारा डिमार्केशन भी हो जाएगा, वो वृक्ष भी आने वाले समय में हमारी बहुत बड़ी सम्पत्ति बन जाएगें..! इस काम को अगर करें और सरकार के नियमों से जोड़ कर के दस साल के बाद, बीस साल के बाद वृक्षों को बेचने का क्रम बनाया जा सकता है। नए वृक्ष बनते जाएंगे, बड़े होने के बाद बेचे जाएंगे, और आज इतना बड़ा देश, हम टीम्बर इम्पोर्ट कर रहे हैं, एक तरफ तो हम करंट अकाउंट डेफिसिट के कारण परेशान है और जैसा कि बहुगुणा जी ने कहा भई कौन बचाएगा..? किसान बचाएगा, देश की आर्थिक स्थिति में से देश को बाहर लाएगा, लेकिन ताकत क्या है..? अगर हम ये एग्रो फोरेस्ट्री पर ध्यान देते हैं और हम हमारे दो खेतों के बीच की जो जगह है, जो आज बर्बाद हो चुकी है, अगर सिर्फ उसमें पेड़ को लगाएं और वो भी ज्यादा आय देने वाले पेड़, जिसमें से ज्यादा इनकम मिलती है ऐेसे पेड़, तो आपकी इकोनॉमी को बहुत बड़ा बल मिलेगा, कभी किसान को आत्महत्या करने की नौबत नहीं आएगी। एक बर्बाद हुआ तो दूसरा मदद करेगा, दूसरा बर्बाद हुआ तो तीसरा मदद करेगा... इन तीन खंभो पर हमें हमारी खेती को खड़ा करना चाहिए और इसलिए मेरे किसान भाईयों-बहनों को मैं आग्रह करूँगा कि हम उस दिशा में प्रयास करें..!

एक छोटा विषय है, जो फिशरीज के क्षेत्र में लगे हुए हैं, हमारे हिन्दुस्तान का समुद्री तट है, सी-वीड की खेती..! समुद्र के पानी में 45 दिन में फसल तैयार होती है, महिलाएं कर सकती है और आज मेडिकल साइंस को इतनी सी-वीड की आवश्कता है, इतना रॉ मैटेरियल की आवश्यकता है, उसको आसानी से डेवलप किया जा सकता है। गुजरात ने अभी उन प्रयोगों को प्रारंभ किया है। कई राज्य हैं, समुद्री तट पर जो राज्य हैं, वो इसमें बहुत कुछ कांन्ट्रीब्यूट कर सकते हैं। और उसमें कृषि के लिए जो दवाइयाँ चाहिए वो भी बनती है, मनुष्यों के लिए जो दवाइयाँ चाहिए वो भी बनती हैं। यानि इस प्रकार का वो पौधा जिसका उपयोग करके हमारे समुद्री तट के जो किसान हैं, फिशरमैन हैं, उनके लाभ के लिए भी हम अगर नई योजनाओं को क्रियान्वित करें तो मैं विश्वास से कहता हूँ मित्रों, कि उसकी आय में बढ़ोतरी होगी..!

मित्रों, दूसरी आवश्यकता होती है हमारे यहाँ उत्पादन के बाद एग्रो मार्केटिंग लिकेंज की। आज किसान की हालत क्या है..? दुनिया में हर चीज की कीमत उत्पादक तय करता है। कोई फाउन्टेन पैन बनाता है तो कितने में बिकेगी वो तय करता है उत्पादन करने वाला, कोई कार बनाता है तो कार कितने में बिकेगी वो तय करता है उत्पादक, अकेला किसान ऐसा है जो पैदा करता है लेकिन दाम वो तय नहीं कर पाता है..! उसका माल कितने में बिकेगा उसके हाथ में नहीं है, वो असहाय है..! और इसलिए अगर हम परफैक्ट मार्केट लिंकेज को नहीं बनाते हैं तो हम किसान कि इस दुविधा वाली जो स्थिति है, एक कन्फ्यूजन वाली जो स्थिति है, एक क्वेश्चन मार्क से जुड़ी हुई उसकी जो जिंदगी है उससे हम बाहर नहीं ला सकते। और जब तक उसके भीतर एक विश्वास पैदा नहीं होता है कि मैं जो पैदा करता हूँ, दुनिया को इसे इस रूप में लेना ही पड़ेगा, ये सामर्थ्य उसके हाथ में नहीं आता है तब तक किसान में विश्वास पैदा नहीं होता है। और इसलिए हमारी मार्केट लिंकेज की सारी व्यवस्थाओं को किसान की इस मूलभूत आवश्यकता के साथ जोड़ना पडेगा और तब जा कर के हम किसान को एक नया विश्वास दे सकते हैं..!

उसी प्रकार से, इस देश में एग्रीकल्चर सेक्टर में पी.एच.डी. किये हुए शायद हजारों लोग होंगे। सबसे पहली आवश्यकता मुझे लगती है कि हमारे देश में एग्रीकल्चर सेक्टर में जितने रिसर्च हुए हैं, अगर भारत सरकार कर सके तो अच्छी बात है, वरना गुजरात सरकार उसमें सहयोग करने के लिए तैयार है। हमारे देश में जितनी रिसर्च हुई है उन सबको कम्पाइल करने की आवश्कयता है। मान लीजिए चावल है, चावल पर एक हजार लोग होंगे जिन्होंने पी.एच.डी. की होगी... कहीं इक्कठा तो करें..! किसी ने सोयाबीन पर की होगी, किसी ने पोल्ट्री फार्म पर की होगी... सब बिखरा पड़ा हुआ है। हमारी टेलेंट पूल बनाने की आवश्यकता है। जिन्होंने किसी ने चालीस साल पहले किया होगा, पचास साल पहले किया होगा, कोई अभी कर रहा होगा... ये चीजें आज बिखरी पड़ी हैं। कृषि क्षेत्र के विकास के लिए ये जो हमारी इन्टलैक्चुअल एबिलिटी है, ये हमारे इन्टलैक्चुअल रिसोर्सिस हैं, ये जो हमारी इन्टलैक्चुअल विरासत है, उसको हमें जोड़ने के लिए कोई ना कोई प्रबंधन करने की आवश्कता है। फिर उसमें से अच्छी चीजों को छांट-छाँट कर के आगे उन प्रयोगों को कैसे लिया जाए उस पर ध्यान देने की आवश्यकता है..!

दूसरी बात है, जो आज लैब में हो रहा है वो किसी इन्टरनेशनल जनरल में छप जाए और साइंटिस्ट की वाह वाही हो जाए, यहाँ तक सीमित हो गया है। मैं चाहता हूँ कि हमारे एग्रीकल्चर साइंटिस्ट को तब तक जीवन में संतोष नहीं मिलना चाहिए, जब तक कि उसने जो रिसर्च किया है वो रिसर्च धरती पर नजर नहीं आए..! कागज पर रिसर्च खेती के क्षेत्र में काम का नहीं है..! अच्छे डॉक्टर का तब उपयोग होता है, कि जब किसी पेशेंट की वो जिंदगी बचाए, तभी तो उस डॉक्टर का माहात्म्य बढ़ता है..! उसी प्रकार से जो लैब में है वो लैंड पर उतरना चाहिए और इसलिए ‘लैब टू लैंड’ की लिकेंज की बड़ी आवश्यकता है और ‘लैब टू लैंड’ की ओर बल दें। जो भी नए प्रयोग हो रहे हैं, जो भी नई रिसर्च हो रही है, उन सबको हम खेत में, किसान के घर तक पहुंचाएं..! और गुजरात में जो कृषि महोत्सव का प्रयोग हुआ है उसकी सबसे बड़ी सिद्घी ये है। यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट किसानों के साथ बैठते हैं, किसानों के साथ चर्चा करते हैं और किसान भी कभी-कभी उसमें जोड़ते हैं। जो लैब में बैठ कर के संशोधन किया है, और जो धरती पर उसने प्रयोग किये हैं, दोनों को जब जोड़ देते हैं तो नई क्रांति का निर्माण हो जाता है, ये हमने अनुभव किया है..! और इसलिए ‘लैब टू लैंड’ इस लिंकेजिज की तरफ भी हमको बल देने की आवश्यकता है..!

उसी प्रकार से आज भी देश का बैंकिंग सेक्टर, फाइनेशियल बोर्ड, उसके दायरे में पता नहीं क्यों किसान आता ही नहीं है..! देश में बैंकों से जो कुल पैसे दिए जाते हैं, उसमें से किसानों के नसीब में सिर्फ 5% पैसे आते हैं..! 58% पॉपुलेशन किसान है, खेती पर निर्भर है, लेकिन बैंक से मिलने वाले कर्ज का भाग्य सिर्फ 5% किसानों की तरफ जाता है..! ये स्थिति हमको बदलनी पड़ेगी। अधिकतम किसानों को बैंकिंग लिंकेज का लाभ कैसे मिले और प्रोसेस को सिम्पल करनी पड़ेगी। आज किसान तंग आ जाता है, कल भी मैंने बोला था इस विषय के बारे में... वो साहूकार से पैसा लेता है, इतना कर्ज करना पड़ता है और बैंकों के पास कोई काम नहीं होता है। सिर्फ बैंकिंग क्षेत्र की ब्रांचिस बनाने से काम नहीं होता है, किसान भी हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। हमारे ऋण देने की प्रक्रिया में, उन बैंकों को रेकग्नाइज़ नहीं करना चाहिए जिसके 70-80% लेने देने वाले किसान ना हो, तब तक बात बनेगी नहीं। और इसलिए उन व्यवस्थाओं को हम करते हैं और अगर इस प्रकार से हो तो मुझे विश्वास है, किसान अपनी को-आपरेटिव सोसायटियाँ बनाएगा, अपना फंड इक्कठा करेगा, और वेयर हाउसिस अपने खड़े कर देगा। उसमें कोई ताकत कम नहीं है, वो कर सकता है, लेकिन अगर हम उसके लिए इन व्यवस्थाओं की ओर ध्यान देते हैं तो मैं मानता हूँ कि किसान को अगर ये ऋण के बोझ से मुक्त कर दिया जाए, उस पर एक टेंशन रहेगा, क्या करूँ, कब पैसा आएगा... और कभी-कभी वो माल सस्ते में क्यों बेचता है..? वो माल सस्ते में इसलिए बेचता है क्योंकि उसे लगता है कि मुझे साहूकार को पैसे देने है, पन्द्रह दिन अगर अपने माल को रखे तो दो रुपया, पाँच रूपया ज्यादा मिलने वाला है, लेकिन क्योंकि साहूकार का ब्याज बढ़ रहा है इसलिए वो कहता है कि यार जल्दी बेचो, पहले उसका निपटाओ, वरना मुसीबत आ जाएगी और उसी के कारण उसका एक्प्लोइटेशन होता है..! और जब तक हम इस फाइनेन्शियल नेटवर्क को, इस लिंकेज को स्ट्रांग नहीं करेंगे, किसान अपनी ताकत पर खड़ा नहीं हो सकता है और उस दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता है, ऐसा मुझे लगता है..!

मित्रों, भारत सरकार ने हमारी काफी मदद की एक काम के लिए। क्योंकि हमारे सामने एक बहुत बड़ी चुनौति थी कि हम हर जिले से प्रोग्रेसिव किसान को खोजें, लेकिन सही किसान को कैसे खोजें? हमसे कोई गलती ना हो जाए, इसलिए हमने एक ज्यूरी बनाई, उसमें हमें प्रोफेशनल लोग मिले, भारत सरकार की भी मदद मिली, पुरानी भारत सरकार के एग्रीकल्चर सेक्रेटरी थे हमें वो मिले, इन सबने बैठ कर के पूरे देश में से इन सारी प्रक्रिया को पिछले छह महीने से चलाया और उसमें से हर जिले में से उत्तम किसान, किसानी करने वाले लोगों को पसंद किया, उत्तम प्रयोगों को पंसद किया। अब हम आगे चाहते हैं, गुजरात सरकार की वैबसाइट पर हम आप सभी किसानों की पूरी डिटेल रखने वाले हैं। आपने ये सिद्घी कैसे प्राप्त की, आपकी प्रोसेस क्या थी, आपको परिणाम क्या मिले, आपने कौन से व्यवहारिक प्रयोग किये... ताकि देश भर के किसान, जो कुछ जानना समझना चाहते हैं, वो इन कृषि मनिषियों के अनुभवों से सीख सकते हैं..! जो लैब में होता है उससे ज्यादा कृषि ऋषियों के द्वारा लैंड पर होता है, और उसको हम लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं..! और इसलिए इसके फालोअप के रूप में ये काम हम लेना चाहते हैं और वो काम ये होगा कि जिन किसानों का आज हमने सम्मान किया है, आपने जो सिद्घी प्राप्त की है, आपने जो नए प्रयोग कर-कर के देश को कुछ दिया है, ये देश भी जाने और दुनिया भी जाने, और इसलिए हम उसको अधिकतम भाषाओं में रखने का भी प्रयास करेंगे। लेकिन गुजरात सरकार एक इनिशियेटिव लेगी, और हम आगे चल कर के देश में कोई भी ऐसे अच्छे प्रयोग हो, तो उन प्रयोगों को जोड़ने के लिए जरूर प्रयास करने वाले हैं। मैं अय्यपन जी की इस बात का जरूर स्वागत करता हूँ कि उन्होंने कहा है कि भई, ये जो सिर्फ यूनिवर्सिटीज में ही फाउंडर बीज का काम होता है, उसको हम बाहर ले जा कर के खुले मैदान में किसानों के साथ करने की दिशा में सोच रहे हैं। एक अच्छा इनिशियेटिव बनेगा ये प्रयोग, क्योंकि हम लोगों की कई वर्षों से ये माँग रही थी कि इन प्रयोगों को हमें यूनिवर्सिटीज की दीवारों से बाहर निकालने पड़ेंगे और तब जा कर के उत्तम प्रकार के बीजों का संशेाधन हम कर सकते हैं। और वो फुल प्रूफ होते हैं, क्योंकि एक प्रोटेक्टिव एन्वायरमेंट में एक चीज होती है और एक खुले नेचुरल अवस्था में होती है, उन दोनों की ताकत में फर्क होता है और इसलिए उसके आयुष कैसे हैं, उसके परिणाम कैसे हैं, वो तुरंत जाना जा सकता है और उस प्रयोग को हम बल देना चाहते हैं। भारत सरकार उस दिशा में त्वरित कदम उठाएगी तो अवश्य मैं मानता हूँ कि अच्छा परिणाम मिलेगा..!

सभी प्रतिनिधि जो यहाँ आए, हमारी कोशिश रही है कि आपको अच्छी सुविधा मिले, कोई कष्ट ना हो। फिर भी, ये हमारा पहला प्रयास है, कहीं कोई कम्यूनिकेशन में गैप रही हो, कहीं व्यवस्था में कमी रही हो, यहाँ आने के बाद शायद आपको कोई कष्ट हुआ हो, अगर आपको कोई भी तकलीफ हुई हो तो मैं गुजरात की तरफ से आप सबकी क्षमा चाहता हूँ, आप सबसे माफी चाहता हूँ और मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि हम इस प्रयास को निरंतर जारी रखेगें..! बाद में काफी डिटेल डिस्कस करने की हमारी पद्घति रहती है कि उसको थोड़ा डिटेल में हम डीप रीडिंग करते हैं, हमारी कमियॉ क्या रही, अच्छाइयाँ क्या रही, और अच्छा कैसे कर सकते हैं... और फिर एक अच्छे नए मॉडल के साथ अगले इसी प्रकार के समारोह के लिए हम मिलेंगे। मैं आप सबको विश्वास देता हूँ और ये हमारा कन्वीक्शन है, ये हमारा कमिटमेंट है..!

देखिए, हम गुजरात में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट करते हैं, दो साल में एक बार करते हैँ और सिर्फ दो दिन लगाते हैं, उससे ज्यादा हम उसमें टाइम नहीं लगाते। लेकिन हर वर्ष एक महीना कृषि महोत्सव करते हैं, 44-45 डिग्री टेम्प्रेचर होता है और हमारी सरकार के एक लाख से ज्यादा कर्मचारी, सभी मिनिस्टर्स गाँव में जाते हैं, खेतों में जाते हैं, किसानों के साथ बैठते हैं और कृषि में किस प्रकास से नई चीज आई है, सीधा संवाद करते हैं। और ये काम लगातार पिछले आठ सालों से चल रहा है, विदआउट एनी ब्रेक..! ज्ञान संपदा को गाँव तक कैसे ले जाना, उसके लिए भगीरथ प्रयास हम लोग करते हैं और मित्रों, ये करते, करते हम लगातार नई-नई चीजों को जोड़ते जाते हैं, उसमें से एक कड़ी ये महा सम्मेलन है..! आने वाले दिनों में और नई कड़ियाँ जुड़ेंगी, और नया काम होगा, लेकिन ये बात निश्चित है कि महात्मा गांधी के सपनों को अगर पूरा करना है तो हमारे गाँव को समृद्घ करना होगा, गाँव को समृद्घ करना है तो हमारी कृषि को समृद्घ करना होगा, हमारे किसान को समृद्घ करना होगा और उस काम के लिए हम सब मिल कर के जुड़ेंगे, जुटेंगे, तो मैं मानता हूँ मित्रों, आज हमारा जो उत्पादन है, अगर हम उसको दो गुना कर दें... कर सकते हैं, मुश्किल काम नहीं है, कर सकते हैं, छोटे-छोटे परिवर्तन से हो सकता है... तब इस हिन्दुस्तान को एक दाना भी अन्न कहीं से लाना नहीं पड़ेगा..! हिन्दुस्तान के हर इंसान की आवश्यकता की पूर्ति करने की ताकत मेरे किसान भाइयों-बहनों में है..! और अगर हम तीन गुना उत्पादन करें तो मित्रों, विश्वास से कहता हूँ पूरी दुनिया का पेट भरने की ताकत ये मेरे देश के किसानों में है, इस उर्वरा धरती में है..! इतना सामर्थ्य है मित्रों, पूरे विश्व का पेट भरने का सपना हम क्यों ना देखें..! और दुनिया को हम वो खिलाएं जो हम चाहते हैं, ये इच्छा क्यों ना हो हमारे मन में, ये मिजाज लेकर आगे बढ़ें..!

फिर एक बार मित्रों, इस आखिरी कार्यक्रम में आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ और अगली बार मिलने का निमंत्रण भी आपको देता हूँ। बहुत-बहुत धन्यवाद..!

Explore More
Today, the entire country and entire world is filled with the spirit of Bhagwan Shri Ram: PM Modi at Dhwajarohan Utsav in Ayodhya

Popular Speeches

Today, the entire country and entire world is filled with the spirit of Bhagwan Shri Ram: PM Modi at Dhwajarohan Utsav in Ayodhya
From SHGs to drone technology: Inside India's growing push for women's economic empowerment

Media Coverage

From SHGs to drone technology: Inside India's growing push for women's economic empowerment
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
The development of Delhi is linked to the image of the entire country: PM Modi
March 08, 2026
We are committed to building a modern, Viksit Delhi. The projects launched today will strengthen infrastructure, improve connectivity and enhance ease of living: PM
India's ‘Nari Shakti’ is moving forward with a new energy in every field: PM
The development of Delhi is not just the development of one city; it is linked to the image of the entire country: PM
The new Metro section will bring major convenience to lakhs of people in the capital, especially in East and North-East Delhi, making daily commute easier than ever before: PM
The government has launched a campaign to provide PM SVANidhi credit cards to street vendors, enabling them to access credit as per their needs: PM

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी, दिल्ली के लेफ्टिनेंट गर्वनर विनय सक्सेना जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी मनोहर लाल जी, हर्ष मल्होत्रा जी, तोखन साहू जी, प्रदेश सरकार के सभी मंत्री, सभी माननीय सांसद, माननीय विधायकगण और दिल्ली के मेरे प्यारे भाईयों और बहनों।

आज हम सब दिल्ली में विकास को नई गति देने के लिए यहां इकट्ठे हुए हैं। कुछ देर पहले ही यहां साढ़े तैंतीस हजार करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। मेट्रो के विस्तार से लेकर हजारों सरकारी कर्मचारियों के आवासों तक देश की राजधानी में सुविधाओं का लगाता मजबूत विस्तार हो रहा है, एक नई मजबूती दी जा रही है। दिल्ली के आप लोगों ने एक साल पहले जिस नई उम्मीद और नए संकल्प के साथ, यहां भाजपा की डबल इंजन सरकार बनाई थी, उसका परिणाम आज यहां विकास कार्यों में दिख रहा है। मैं दिल्ली के सभी नागरिकों को इस विकास की अविरत धारा के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज का यह कार्यक्रम एक और वजह से भी बहुत विशेष है। आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। आज भारत, महिला सशक्तिकरण की नई गाथा लिख रहा है। यहां रेखा गुप्ता जी के सफल नेतृत्व में राजधानी का विकास हो रहा है। राजनीति, प्रशासन, विज्ञान, खेल या समाज सेवा का क्षेत्र, भारत की नारी शक्ति हर क्षेत्र में एक नई ऊर्जा से आगे बढ़ रही है। मैं पूरे देश की नारी शक्ति को आज महिला दिवस पर हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, और राष्ट्र के विकास में उनके असीमित योगदान के लिए ऋृण स्वीकार करता हूं और उन्हें अनेक-अनेक शुभकामनाएँ देता हूं, ताकि वो समाज और राष्ट्र को निरंतर मजबूती देती रहें, राष्ट्र को निरंतर प्रगति की राह पर ले जाने में नई ऊर्जा देती रहें।

साथियों,

दुनिया का कोई भी व्यक्ति, जब भारत जैसे विशाल लोकतंत्र के बारे में सोचता है, तो अक्सर उसके मन में दिल्ली की तस्वीर आती है। दिल्ली केवल भारत की राजधानी नहीं है। ये भारत की पहचान भी है, भारत की ऊर्जा का प्रतीक भी है। इसलिए दिल्ली का विकास केवल एक शहर का विकास नहीं होता, यह पूरे देश की छवि से जुड़ा होता है। दिल्ली जितनी आधुनिक होगी, दिल्ली जितनी सुविधाजनक होगी, दिल्ली की कनेक्टिविटी जितनी बेहतर होगी, भारत का आत्मविश्वास दुनिया के सामने उतनी ही मज़बूती से दिखाई देगा। और इसलिए मुझे खुशी है कि आज हमारी दिल्ली सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में तेज़ी से आगे बढ़ रही है। एक समय था, जब दिल्ली में खराब व्यवस्थाओं की ही चर्चा होती थी। शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुँचने में कई कई घंटे लगते थे, बस स्टैंड्स पर, बसों और ऑटो के इंतजार में माताओं-बहनों का समय बर्बाद होता था। लेकिन आज दिल्ली की तस्वीर बदल रही है। कुछ ही दिन पहले, दिल्ली नमो भारत जैसी तेज़ ट्रेन के ज़रिए मेरठ से जुड़ी है। इससे दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा और आसान हो गई है। और आज, मेट्रो फेज-फोर के शुरू होने के साथ दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क 375 किलोमीटर से भी आगे पहुंच गया है। दुनिया के बड़े-बड़े शहरों में भी मेट्रो का इतना बड़ा नेटवर्क नहीं है।

साथियों,

आज जो मेट्रो का नया सेक्शन शुरू हुआ है, उससे राजधानी के लाखों लोगों को बहुत बड़ी सुविधा मिलने वाली है। खासतौर पर, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के लोगों के लिए अब रोज़ का सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान होगा। इन सबके साथ ही, गाज़ियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद और गुरुग्राम जैसे एनसीआर के शहरों से, दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में आना जाना और भी आसान हो जाएगा।

साथियों,

आज का ये कार्यक्रम, इस बात का भी प्रमाण है कि एक वर्ष पहले दिल्ली ने जिस आपदा से मुक्ति पाई, वो कितनी जरूरी थी। अगर यहां पर आपदा सरकार न होती, तो ये मेट्रो फेज़-4 प्रोजेक्ट, बहुत पहले पूरा हो चुका होता। लेकिन आपदा वालों ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए, दिल्ली के लाखों लोगों की सुविधा को ताक पर रख दिया था। अब यहां भाजपा सरकार बनने के बाद, दिल्ली के चौतरफा विकास में बहुत तेजी आई है।

साथियों,

डबल इंजन की सरकार में, दिल्ली की हर ट्रांसपोर्ट फैसिलिटी का अपग्रेडेशन हो रहा है। दिल्ली में हर दिन लाखों लोग बसों से सफर करते हैं। इसलिए हमारी कोशिश है कि, दिल्ली के लोगों को, साफ, आरामदायक और आधुनिक बस सेवा मिले। केंद्र सरकार द्वारा दी गई चार हज़ार से अधिक इलेक्ट्रिक बसें, आज दिल्ली के लोगों की सेवा कर रही हैं। और बीते केवल एक साल में ही लगभग 1800 नई बसों को, दिल्ली की सड़कों पर उतारा गया है। इनमें सैकड़ों देवी बसें भी शामिल हैं, जो दिल्ली की कॉलोनियों और मोहल्लों को आपस में जोड़ रही हैं।

साथियों,

करीब 10 वर्षों तक यहां जो आपदा सरकार थी, उसने विकास का हर काम ठप कर रखा था। अब दिल्ली से जुडी विभिन्न चुनौतियों के समाधान के लिए हमारी सरकार, मिशन मोड पर काम कर रही है। पैरिफरल एक्सप्रेस-वे बनने से लाखों गाड़ियों को, दिल्ली में दाखिल होने की आवश्यकता नहीं पड़ती। भाजपा सरकार यमुना जी की साफ-सफाई के लिए भी, बहुत बड़े लेवल पर काम कर रही है। इसके लिए करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया गया है।

साथियों,

दिल्ली में पहले जो आपदा सरकार थी, उसे यहां के गरीब, मध्यम वर्ग, किसी की परेशानी से कोई फर्क नहीं पड़ता था। आपदा सरकार ने हेल्थ सेक्टर का भी बुरा हाल कर रखा था। हम आपदा सरकार को चिट्ठियां लिखते थे, भारत सरकार चिट्ठियां लिखती थी, और कहते रहे कि आयुष्मान स्कीम लागू करो। लेकिन आपदा वालों ने कभी गरीबों की परवाह नहीं की। मुझे खुशी है कि यहां रेखा जी के नेतृत्व में, भाजपा सरकार निरंतर स्थितियों को बदलने में जुटी है। बीते एक वर्ष में ही, अनेक आयुष्मान आरोग्य मंदिर यहां स्थापित किए गए हैं। इससे गरीब और मिडिल क्लास को बहुत फायदा मिल रहा है। अब दिल्ली में आयुष्मान स्कीम भी लागू है। दिल्ली के लोगों को मुफ्त इलाज भी मिल रहा है। फर्क साफ है। आपदा वालों का तरीका था- काम कम, बहाने ज्यादा। आज दिल्ली में विकास का मॉडल है, बहाने बंद, काम शुरू। पहले प्रोजेक्ट्स फाइलों में दम तोड़ते थे। आज प्रोजेक्ट्स जमीन पर उतरते हैं।

साथियों,

आज यहां आने से पहले, मैं सरोजिनी नगर गया था। वहां मुझे नए बने सरकारी आवासों को देखने का अवसर मिला। ये आवास उन सरकारी कर्मचारियों के लिए बनाए गए हैं, जो राष्ट्र के हर संकल्प को पूरा करने में दिन रात परिश्रम करते हैं। ये जरूरी है कि उन्हें रहने के लिए, सुरक्षित, साफ-सुथरे और सुविधाजनक आवास मिलें। और इसीलिए ये नई और आधुनिक इमारतें बनाई जा रही हैं। आज ऐसे हजारों नए फ्लैट्स लाभार्थियों को सौंपे गए हैं। मुझे विश्वास है कि ये नए आवास हमारे कर्मयोगियों और उनके परिवार के जीवन में, नई खुशियां और नई उम्मीद लेकर आएगी।

साथियों,

आज देश में जहां भी बीजेपी की सरकार है, हर राज्य में, हर गांव-हर शहर में, लोगों को किसी ना किसी योजना का लाभ जरूर मिल रहा है। हमारे जो गरीब परिवार हैं, जो माताएं-बहनें हैं, जो मजदूर और किसान हैं, जो छोटी-मोटी नौकरी करने वाले मेरे भाई-बहन हैं, सरकार उन सबके लिए कुछ ना कुछ जरूर कर रही है। मैं आपको हमारे रेहड़ी-पटरी पर काम करने वाले साथियों का उदाहरण बताता हूं। इनका हमारे रोजमर्रा के जीवन में कितना महत्व है, ये हमने कोरोना काल के दौरान अनुभव किया है। ये वो लोग हैं, जिन्हें एक जमाने में अपनी रेहड़ी तक किराये पर लेनी पड़ती थी। छोटा कारोबार करने के लिए हज़ार-दो हज़ार रुपये तक भी उन्हें किसी दूसरे से ऊंचे ब्याज पर लेना पड़ता था। लेकिन हमारी सरकार ने इन साथियों का दर्द समझा, और उन्हें बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा। आज प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के माध्यम से ऐसे लाभार्थियों को अपने काम के लिए आसान लोन मिलने लगा है। दिल्ली में भी रेहड़ी-पटरी पर काम करने वाले करीब 2 लाख साथियों को, इस योजना से करीब 350 करोड़ रुपए की मदद मिली है।

साथियों,

मुझे अभी, इन रेहड़ी पटरी वाली कुछ बहनों के साथ संवाद करने का अवसर मिला, वो किस प्रकार से सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही हैं, उसका विस्तार सुनकर मेरा मन गर्व से भर गया।

साथियों,

इसी दिल्ली में, कभी डेबिट और क्रेडिट कार्ड केवल अमीर लोगों के पास होते थे। लेकिन आज स्थिति बदल रही है। आज रेहड़ी और ठेले पर काम करने वाले साथियों के पास भी क्रेडिट कार्ड की सुविधा पहुंच रही है। सरकार ने रेहड़ी-पटरी वाले साथियों के लिए स्वनिधि क्रेडिट कार्ड देने का अभियान चलाया है। अब उनकी जेब में ही क्रेडिट कार्ड होगा जिसे वो अपनी जरूरत के अनुसार उपयोग कर पाएँगे। अब से कुछ देर पहले यहां मंच पर मुझे कुछ बहनों को ये स्वनिधि क्रेडिट कार्ड देने का अवसर मिला है। ये स्वनिधि क्रेडिट कार्ड, गरीब के स्वाभिमान का नया माध्यम बन रहा है।

साथियों,

आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, मैं देश की अपनी करोड़ों बहनों के साथ, एक और खुशी साझा करना चाहता हूं। कुछ साल पहले हमने संकल्प लिया था कि, हम देश में 3 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाएंगे। बहुत लोगों ने मेरी मजाक उड़ाई, कि देश के गांव में महिला लखपति दीदी बने, ये मोदी चुनाव जीतने के लिए नई-नई बातें बताता रहता है, बहुत भला-बुरा कहा गया था, बहुत मजाक उड़ाई गई थी, भांति-भांति के सोशल मीडिया पर खेल चल रहे थे। लेकिन आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर बड़े गर्व के साथ कहता हूं कि, मेरी माताओं-बहनों में कितना सामर्थ्य है, अगर उनको अवसर दिया जाए, तो वो कैसे-कैसे, नई- नई सिद्धियां हासिल कर सकती हैं। मुझे आज खुशी के साथ कहना है कि देश ने, तीन करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का जो संकल्प किया था, वो पूरा हो चुका है। 3 करोड़ से अधिक बहनें अब लखपति बन चुकी हैं।

साथियों,

दशकों से गांवों में हमारी बहनों के पास हुनर भी था, मेहनत भी थी, लेकिन उन्हें पूंजी और अवसर नहीं मिलते थे। और इसीलिए हमने इन बहनों को सेल्फ हेल्प ग्रुप्स से जोड़ा, बैंकों से जोड़ा, और उन्हें नई ट्रेनिंग, नए अवसर और बाजार से जोड़ने का काम किया। आज देश में 10 करोड़ से अधिक बहनें, ऐसे समूहों से जुड़ी हुई हैं। इन सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को, लाखों करोड़ रुपये की आर्थिक मदद मिली है। इसका परिणाम यह है कि आज गांवों की नारीशक्ति, आत्मनिर्भर बन रही हैं, अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं और लखपति दीदी बनकर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बहुत मजबूत कर रही हैं।

साथियों,

हमारी बहनों की इसी सफलता ने, हमें एक नया संकल्प लेने की प्रेरणा दी है। तीन करोड़ लखपति दीदी, ये असंभव लगता था, लेकिन साकार कर दिया। अब सरकार ने तय किया है कि देश में 3 करोड़ लखपति दीदी, और नई तीन करोड़ जोड़ दी जाएंगी। यानी तीन करोड़ लखपति दीदी बन चुकी, आज हम संकल्प ले रहे हैं, तीन करोड़ और दीदी लखपति दीदी बनेंगी। मुझे पूरा विश्वास है कि देश की नारी शक्ति के आशीर्वाद से यह संकल्प भी जरूर पूरा होगा।

भाइयों और बहनों,

आज जब देश, अपनी माताओं-बहनों-बेटियों की सिद्धियों का गौरवगान कर रहा है, तब मैं दिल्ली-वालों के साथ, देशवासियों के साथ एक पीड़ा भी साझा करना चाहता हूं। ये पीड़ा है, ये दुख है, दिल को गहरी चोट लगी है, जो मैं आज देशवासियों के सामने, दिल्लीवासियों के सामने, मैं व्यक्त करना चाहता हूं। आज देश अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मना रहा है, और कल पश्चिम बंगाल में TMC सरकार ने, देश की राष्ट्रपति, आदरणीय द्रोपदी मुर्मू जी का घोर अपमान किया है। द्रोपदी मुर्मू जी, संथाल आदिवासी परंपरा के बहुत बड़े उत्सव में शामिल होने के लिए बंगाल गई थीं। लेकिन राष्ट्रपति जी और उस कार्यक्रम का, आदिवासियों के उस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का, आदिवासियों का गौरव करने के बजाय TMC ने, आदिवासियों के संथाल लोगों के अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण कार्यक्रम का बहिष्कार किया और राष्ट्रपति का बहिष्कार किया। वो स्वयं आदिवासी समाज से आती हैं। संथाल आदिवासी समाज के विकास के लिए उन्होंने चिंता की है। TMC सरकार ने उस कार्यक्रम को बद-इंतजामी के हवाले कर दिया।

साथियों,

ये राष्ट्रपति जी के अपमान के साथ-साथ, देश के संविधान का भी अपमान है, देश के संविधान के स्पिरिट का भी अपमान है, लोकतंत्र की महान परंपरा का भी अपमान है। जिन्होंने जीवन के संघर्षों से तपकर ऊंचाइयां हासिल की हैं, ऐसी हर बहन-बेटी, ये उसका भी अपमान है।

साथियों,

हमारे यहां कहा गया है, अहंकारे हतः पुष्टः समूलं च विनश्यति। यानी अहंकार में चूर व्यक्ति, कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः नष्ट हो जाता है! मैं आज देश की राजधानी से, आप सभी के बीच ये आह्वान कर रहा हूं, एक आदिवासी राष्ट्रपति का घोर अपमान करने वाली TMC की ये गंदी राजनीति और सत्ता का अहंकार, बहुत ही जल्द चूर-चूर होकर रहेगा। पश्चिम बंगाल की प्रबुद्ध जनता TMC को, एक नारी के अपमान के लिए, एक आदिवासी के अपमान के लिए और देश के महामना राष्ट्रपति के अपमान के लिए कभी भी माफ नहीं करेगा, देश भी कभी माफ नहीं करेगा, देश का आदिवासी समाज भी कभी माफ नहीं करेगा, देश की नारिशक्ति भी कभी माफ नहीं करेगी।

साथियों,

हमारी संस्कृति हमें हर वर्ग का, हर विचार का सम्मान करना सिखाती है। हमारी संस्कृति हमें अपनी विरासत पर गर्व करना भी सिखाती है। इसी प्रेरणा से आज हम दिल्ली की विरासत के संरक्षण का काम भी कर रहे हैं। बीते वर्षों में केंद्र की भाजपा सरकार ने, विकास भी और विरासत भी, इस मंत्र के साथ, दिल्ली की अनेक ऐतिहासिक जगहों को और बेहतर करने का काम शुरू किया है। दिल्ली में अनेक नए स्थल भी बनाए गए हैं। देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीरों के सम्मान में नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया गया है। नया संसद भवन, कर्तव्य पथ, कर्तव्य भवन और सेवा तीर्थ, ये सभी 21वीं सदी के भारत की नई सोच को दिखाते हैं। अभी कुछ दिन पहले ही भारत मंडपम् में ऐतिहासिक ग्लोबल AI समिट हुई। भारत मंडपम और यशोभूमि जैसे स्थान, दुनिया को भारत की संस्कृति, भारत के व्यापार और भारत की क्षमता से परिचित कराने का बड़ा माध्यम बन चुके हैं। प्रधानमंत्री संग्रहालय और युगे-युगीन भारत संग्रहालय जैसे नए म्यूज़ियम भी, दिल्ली की पहचान को और मजबूत करने जा रहे हैं।

साथियों,

दिल्ली भारत की ऐतिहासिक यात्रा का शहर है, और आज यही दिल्ली देश के एक नए दौर की साक्षी बन रही है। ये नए भारत के आत्मविश्वास का दौर है। भारत का यही आत्मविश्वास, अब हमें विकसित भविष्य की तरफ ले जाएगा। इसलिए हम सभी को मिलकर अपने हर संकल्प की सिद्धि के लिए काम करते रहना है। मुझे विश्वास है, रेखा गुप्ता जी और उनकी पूरी टीम के नेतृत्व में दिल्ली में विकास का हर काम और अधिक गति पकड़ेगा। दिल्ली के हर परिवार का जीवन बेहतर होगा, सुखी होगा, समृद्ध होगा। इसी सद्भाव के साथ, एक बार फिर सभी विकास कार्यों के लिए, मैं आप सबको बहुत-बहुत बधाई देता हूं, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। मेरे साथ बोलिये-

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

बहुत-बहुत धन्यवाद!