મુખ્યમંત્રીશ્રી નરેન્દ્રભાઇ મોદીએ ગુજરાતની સ્વર્ણિમ જ્યંતિને ધ્યાનમાં રાખીને રાજ્ય સરકાર દ્વારા ઔઘોગિક શ્રમયોગીઓને વિવિધ કક્ષામાં આપવામાં આવતા પુરસ્કારોનો વ્યાપ વિસ્તારવાનો સ્તુત્ય નિર્ણય કર્યો છે.
રાજ્ય સરકાર દ્વારા ઔઘોગિક શ્રમયોગીઓને આપવામાં આવતા વિવિધ કક્ષામાં કુલ ૧૬ પુરસ્કારોને સ્થાને હવે સમગ્રતયા ૬૪ પુરસ્કારો પ્રદાન કરાશે.
રાજ્ય સરકાર અને કેન્દ્ર સરકારના સંચાલન હેઠળના એકમો સિવાયના ઔઘોગિક એકમોમાં કાર્યરત શ્રમયોગીઓને વિશિષ્ટ કામગીરીની કદરરૂપે શ્રમરત્ન, શ્રમભૂષણ, શ્રમવીર તથા શ્રમશ્રી અને શ્રમદેવી પુરસ્કારો હાલ આપવામાં આવે છે તેમાં વધારો કરીને પ્રત્યેક શ્રેણીમાં ૧૬-૧૬ શ્રમયોગીઓને આ પુરસ્કારો અપાશે. શ્રમીકો વિશાળ સંખ્યામાં આ પુરસ્કાર યોજનાનો વ્યાપક લાભ લઇ શકે તે હેતુથી સુરત, વડોદરા અને રાજકોટ પ્રદેશોના વિભાજન કરીને હવે ત્રણ ક્ષેત્રીય પ્રદેશ સુધી આ પુરસ્કારોનું ફલક વિસ્તાર્યું છે. આ હેતુ માટે પ્રવર્તમાન જોગવાઇમાં ૪૦૦ ટકાનો વધારો કરવામાં આવ્યો છે.
અત્રે એ નિર્દેશ કરવો જરૂરી છે કે, જે શ્રમયોગીઓ ઔઘોગિક ઉત્પાદન કે ઉત્પાદકતા વધારવા, ઔઘોગિક શાંતિ અને સલામતી જાળવવા, આફત સમયે પોતાની આગવી આત્મસૂજ અને ત્વરિત પગલાંથી જાન-માલનું નુકશાન થતું અટકાવવા તેમજ શ્રમયોગી કલ્યાણ ક્ષેત્રમાં ઉત્કૃષ્ઠ કામગીરી કરે છે તેને પ્રોત્સાહિત કરવા શ્રમરત્નપુરસ્કારઅંતર્ગતરૂા.રપ૦૦૦, શ્રમભૂષણપુરસ્કારઅન્વયેરૂા.૧પ૦૦૦, શ્રમવીરમાટેરૂા.૧૦૦૦૦અનેશ્રમશ્રી-શ્રમદેવીનેરૂા.પ૦૦૦નાપ્રત્યેકપુરસ્કારથીનવાજવામાંઆવેછે.
આમ હવે કુલ ૬૪ શ્રમયોગીઓ ચાર શ્રેણીમાં પુરસ્કૃત થશે. ઔઘોગિક શાંતિ અને સુમેળભર્યા સંબંધો માટે ગુજરાત આંતરરાષ્ટ્રીય ખ્યાતિ ધરાવે છે ત્યારે તેમાં ઔઘોગિક શ્રમજીવીઓનો નિર્ણાયક ફાળો ધ્યાનમાં રાખીને તેમને વિશેષ પ્રોત્સાહિત કરવાનો આ શ્રમયોગી કલ્યાણલક્ષી નિર્ણય મુખ્યમંત્રીશ્રીએ કર્યો છે.
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में ₹24,815 करोड़ की दो रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दी
April 18, 2026
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय आर्थिक मामलों की समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 24,815 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली दो परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
इस बढ़ी हुई लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे भारतीय रेलवे की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। ये मल्टीट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करेंगे और भीड़भाड़ को कम करेंगे। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नए भारत की परिकल्पना के अनुरूप हैं। इसका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मुख्य योजना के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।
उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश राज्यों के 15 जिलों को कवर करने वाली ये 02 (दो) परियोजनाएं भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 601 किलोमीटर तक बढ़ाएंगी।
प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा, जिनमें दूधेश्वरनाथ मंदिर, गढ़मुक्तेश्वर गंगा घाट, दरगाह शाह विलायत जामा मस्जिद (अमरोहा), नैमिषारण्य (सीतापुर), अन्नवरम, अंतर्वेदी, द्रक्षरामम आदि शामिल हैं।
प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, अनाज, सीमेंट, पीओएल, लोहा और इस्पात, कंटेनर, उर्वरक, चीनी, रासायनिक लवण, चूना पत्थर आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन का साधन होने के नाते, जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की रसद लागत को कम करने में मदद करेगा, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन (180.31 करोड़ किलोग्राम) में कमी आएगी, जो 7.33 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है।
गाजियाबाद – सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन (403 किमी)
गाजियाबाद-सीतापुर एक मौजूदा दोहरी लाइन खंड है जो दिल्ली-गुवाहाटी उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन 4) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह परियोजना देश के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों के बीच संपर्क सुधारने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस खंड की मौजूदा लाइन क्षमता का 168% तक उपयोग हो रहा है और परियोजना शुरू न होने की स्थिति में इसके 207% तक होने का अनुमान है।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, हापुड, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर जिलों से होकर गुजरती है।
परियोजना का मार्ग गाजियाबाद (मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स), मुरादाबाद (पीतल के बर्तन और हस्तशिल्प), बरेली (फर्नीचर, वस्त्र, इंजीनियरिंग), शाहजहांपुर (कालीन और सीमेंट से संबंधित उद्योग) और रोजा (तापीय विद्युत संयंत्र) जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से होकर गुजरता है।
सुगम परिवहन के लिए, परियोजना की रूपरेखा हापुड़, सिंभाओली, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर और सीतापुर के भीड़भाड़ वाले स्टेशनों को बाईपास करने के लिए बनाई गई है और तदनुसार, बाईपास खंडों पर छह नए स्टेशन प्रस्तावित हैं।
परियोजना खंड के पास/पास प्रमुख पर्यटक/धार्मिक स्थान दूधेश्वरनाथ मंदिर, गढ़मुक्तेश्वर गंगा घाट, दरगाह शाह विलायत जामा मस्जिद (अमरोहा), और नैमिषारण्य (सीतापुर) हैं।
इस परियोजना से कोयला, खाद्यान्न, रासायनिक खाद, तैयार इस्पात आदि के 35.72 मीट्रिक टन प्रति वर्ष के अतिरिक्त माल परिवहन का अनुमान है।
अनुमानित लागत: लगभग 14,926 करोड़ रुपये।
रोजगार सृजन: 274 लाख मानव दिन।
कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 128.77 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड की कमी। यह 5.15 करोड़ पेड़ों के बराबर है।
लॉजिस्टिक लागत में बचत: सड़क परिवहन की तुलना में प्रति वर्ष 2,877.46 करोड़ रुपये की बचत।
राजमुंदरी (निदादावोलु) - विशाखापत्तनम (दुव्वाडा) खंड हावड़ा - चेन्नई उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन) का हिस्सा है।
प्रस्तावित परियोजना हावड़ा-चेन्नई उच्च घनत्व नेटवर्क (एचडीएन) मार्ग के चौगुने विस्तार की पहल का हिस्सा है।
यह परियोजना आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी, कोनासीमा, काकीनाडा, अनाकापल्ले और विशाखापत्तनम जिलों से होकर गुजरती है।
विशाखापत्तनम को आकांक्षी जिला कार्यक्रम में एक आकांक्षी जिला माना गया है।
यह पूर्वी तट पर स्थित विशाखापत्तनम, गंगावरम, मछलीपटनम और काकीनाडा जैसे प्रमुख पत्तनों को जोड़ती है।
परियोजना का मार्ग पूर्वी तटरेखा के साथ-साथ चलता है और यह पूर्वी तटीय रेल गलियारे के सबसे व्यस्त, मुख्य रूप से माल ढुलाई के खंडों में से एक है।
इस खंड की लाइन क्षमता का उपयोग पहले ही 130% तक पहुंच चुका है, जिसके कारण बार-बार जाम और परिचालन में देरी हो रही है। क्षेत्र में पत्तनों और उद्योगों के प्रस्तावित विस्तार के कारण लाइन की क्षमता में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
परियोजना के इस खंड में गोदावरी नदी पर 4.3 किमी लंबा रेल पुल, 2.67 किमी लंबा वायडक्ट, 3 बाईपास शामिल हैं और नया मार्ग मौजूदा मार्ग से लगभग 8 किमी छोटा है, जिससे संपर्क और परिचालन दक्षता में सुधार होगा।
प्रस्तावित खंड अन्नवरम, अंतर्वेदी और द्रक्षरामम आदि जैसे प्रमुख स्थलों तक पहुंच में सुधार करके पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
कोयला, सीमेंट, रासायनिक खाद, लोहा और इस्पात, खाद्यान्न, कंटेनर, बॉक्साइट, जिप्सम, चूना पत्थर आदि सहित 29.04 मीट्रिक टन प्रति वर्ष के अतिरिक्त माल परिवहन का अनुमान है।
अनुमानित लागत: लगभग 9,889 करोड़ रुपये।
रोजगार सृजन: 135 लाख मानव दिन।
कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 51.49 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड की कमी। यह 2.06 करोड़ पेड़ों के बराबर है।
लॉजिस्टिक लागत में बचत: सड़क परिवहन की तुलना में प्रति वर्ष 1,150.56 करोड़ रुपये की बचत।
आर्थिक सशक्तिकरण:
आकांक्षी जिले - विशाखापत्तनम जिले को बेहतर संपर्क मिलेगा।
पर्यटन और उद्योगों के माध्यम से इस क्षेत्र में अतिरिक्त आर्थिक अवसर उपलब्ध होंगे।
रेल संपर्क में सुधार के कारण नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा प्राप्त होगी।