"यह हमारी सरकार का बहुत बड़ा सौभाग्य है कि हम 3.5 करोड़ परिवारों के सबसे बड़े सपने को पूरा कर सके"
"यह आज का नया भारत है जहां गरीब धनतेरस पर अपने नए घरों में गृह प्रवेश कर रहे हैं"
"सरकार की विभिन्न नीतियां एवं योजनाएं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घरों को सभी सुविधाओं से परिपूर्ण बनाती हैं"
"पीएम-आवास योजना सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का एक माध्यम बन गई है"
"हम घरों की सुविधा से वंचित रहने के दुष्चक्र को तोड़ रहे हैं जो कई पीढ़ियों को प्रभावित करता था"
"अब बुनियादी सुविधाओं से लैस गरीब अपनी गरीबी कम करने के प्रयास कर रहे हैं"
"मुझे खुशी है कि देश का एक बड़ा वर्ग देश को ‘रेवड़ी संस्कृति’ से मुक्त करने के लिए कमर कस रहा है"

नमस्कार,

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी, राज्य सरकार के मंत्रिगण, विधायकगण, पंचायत सदस्य, अन्य सभी महानुभाव और मध्य प्रदेश के मेरे सभी भाइयों और बहनों,

सबसे पहले आप सभी को धनतेरस और दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। धनतेरस और दीपावली का ये अवसर ऐसा होता है, जब हम नई शुरुआत करते हैं। घर में नया रंग-रोगन करते हैं, नए बर्तन लाते हैं, कुछ ना कुछ नया जोड़ते हैं, नए संकल्प भी लेते हैं। नई शुरुआत करने से हम ज़िंदगी में नयापन भर देते हैं, सुख और समृद्धि के लिए एक नया द्वार खुल जाता है। आज मध्य प्रदेश के साढ़े 4 लाख गरीब बहनों और भाइयों के लिए नए जीवन की शुरुआत हो रही है। आज ये सभी साथी अपने नए और पक्के घर में गृह प्रवेश कर रहे हैं। एक समय था, जब धनतेरस पर सिर्फ वही लोग गाड़ी और घर जैसी बड़ी और महंगी संपत्ति खरीद पाते थे जिनके पास संसाधन होते थे, पैसे होते थे, उन्हीं के लिए धनतेरत होती थी। लेकिन आज देखिए, देश का गरीब भी धनतेरस पर गृहप्रवेश कर रहा है। मैं मध्य प्रदेश की उन लाखों बहनों को आज विशेष बधाई देता हूं, जो आज अपने घर की मालकिन बनी हैं, और लाखों रुपयों के बने घर आपको लखपति बना दिया है।

भाइयों और बहनों,

मैं तकनीक के माध्यम से सामने बैठे असीम आकांक्षाओं से भरे अनगिनत लोगों को देख पा रहा हूं। पहले ये आकांक्षाएं, ये सपने सामने आते ही नहीं थे क्योंकि बिना घर के ये भावनाएं दब जाती थी, छिप जाती थीं, मुरझा जाती थी। मुझे विश्वास है, अब जब इन साथियों को ये नए घर मिल गए हैं, तो अपने सपनों को सच करने की नई ताकत भी मिली है। इसलिए ये आज का दिन सिर्फ गृह प्रवेश का नहीं है, बल्कि घर में खुशियां, घर में नए संकल्प, नए सपने, नया उमंग, नया भाग्य में प्रवेश का भी है। ये हमारी सरकार का सौभाग्य है कि बीते 8 वर्षों में वो पीएम आवास योजना के तहत साढ़े तीन करोड़ गरीब परिवारों की जिंदगी का सबसे बड़ा सपना पूरा कर पाई है। और ऐसा नहीं है कि हमने ऐसे ही घर बनाकर दे दिए, चार दीवारें खड़ी करके दे दिये। हमारी सरकार गरीबों को समर्पित है, गरीब की है, इसलिए गरीब की इच्छा, उसके मन, उसकी जरूरतों को सबसे ज्यादा समझती है। हमारी सरकार जो घर देती है ना, उसमें बाकी सुविधाएं भी साथ आती हैं। शौचालय हो, बिजली हो, पानी हो, गैस हो, सरकार की अलग-अलग योजनाएं प्रधानमंत्री आवास योजना के इन करोड़ों घरों को संपूर्ण बनाती हैं।

साथियों,

आपसे बात करते हुए मुझे पहले की स्थिति भी याद आ रही है, पहले अगर घर गरीबों के लिए घोषित होता भी था, तो उसको टॉयलेट अलग बनाना पड़ता था। बिजली, पानी और गैस के कनेक्शन के लिए अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के कई-कई बार चक्कर लगाने पड़ते थे। पहले की सरकारों में इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए गरीब को कई दफ्तरों में रिश्वत भी देनी पड़ती थी। यही नहीं, पहले गरीबों के नाम पर घरों की घोषणा तो हो जाती थी, फिर सरकार बताती थी कि इस तरह का घर बनेगा, वही हुकुम करती थी। वही नक्शा दे देती थी, यहां से ही सामान लेना है, यही सामान लेना है। जिसको उस घर में रहना है, अरे उसकी कोई पसंद होती है, नापसंद होती है, उसकी अपनी सामाजकि परंपराएं होती हैं, उसका अपना एक रहन-सहन होता है। उसकी कोई पूछताछ ही नहीं होती थी। यही कारण है कि पहले जो थोड़े-बहुत घर बनते भी थे, उनमें से बहुत सारों में कभी गृहप्रवेश ही नहीं हो पाता था। लेकिन हमने ये आज़ादी घर की मालकिन को, घर के मालिक को दे दी। इसलिए आज पीएम आवास योजना बहुत बड़े सामाजिक-आर्थिक बदलाव का माध्यम बन रही है।

भाइयों और बहनों,

अक्सर हम देखते हैं कि एक पीढ़ी अपनी अर्जित की हुई संपत्ति को अगली पीढ़ी को सौंपती है। हमारे यहां पहले की सरकारों की गलत नीतियों की वजह से लोगों को मजबूरी में आवासहीनता भी अगली पीढ़ी को सौंपनी पड़ती थी। और जो संतान पीढ़ियों के इस कुचक्र को तोड़ती थी, उसका बहुत गुणगान होता था, गौरवगान होता था। मेरा सौभाग्य है कि देश के सेवक के तौर पर, देश की करोड़ों माताओं की संतान के तौर पर मुझे अपने करोड़ों गरीब परिवारों को इस कुचक्र से बाहर निकालने का मौका मिला है। हमारी सरकार हर गरीब को अपनी पक्की छत देने के लिए दिनरात काम कर रही है। इसलिए आज इतनी बड़ी संख्या में ये घर बन रहे हैं। मध्य प्रदेश में भी पीएम आवास योजना के तहत करीब 30 लाख घर बनाए जा चुके हैं। अभी 9-10 लाख घरों पर काम चल रहा है।

साथियों,

लाखों बनते हुए ये घर, देश के कोने-कोने में रोजगार के अवसर भी बना रहे हैं। आज सुबह जब मैं रोजगार मेले के कार्यक्रम में था। तो मैंने खास कहा था कि‍ मैं शाम को एक गृह प्रवेश कार्यक्रम में जाने वाला हूं, और उसके साथी भी रोजगार कैसे जुड़ा है मैं पूरा बताने वाला हूं।

साथि‍यों,

आप भी जानते हैं जब घर बनते हैं तो कंस्ट्रक्शन से जुड़ा मटीरियल, जैसे ईंट, सीमेंट, रेत, बजरी, स्टील, रंग-रोगन, बिजली का सामान, टॉयलेट सीट, नल-पाइप, इन सब चीज़ों की डिमांड बढ़ती है। जब ये डिमांड बढ़ती है तो इन मैटेरियल को बनाने वाली फैक्ट्रियां ज्यादा लोगों को रखती हैं, ज्‍यादा ट्रांसपोर्ट वालों की जरूरत पड़ती है उनको लगाती है। जहां ये सामान बिकता है उन दुकानों में भी लोगों को रोज़गार मिलता है। और सतना से बेहतर इसको कौन समझ सकता है। सतना तो चूना पत्थर के लिए, सीमेंट के लिए भी जाना जाता है। घर बनते हैं तो सतना के सीमेंट की डिमांड भी बढ़ जाती है। घर बनाने के काम से जुड़े श्रमिक, मिस्त्री, बढ़ई, प्लंबर, पुताई, फर्नीचर बनाने वाले उनको भी ढेर सारा काम मिलता है। मुझे बताया गया है कि मध्य प्रदेश में ही 50 हज़ार से अधिक राजमिस्त्री प्रशिक्षित किए गए हैं। इनमें से भी 9-10 हज़ार हमारी माताएं-बहनें लोग उसे राजमिस्त्री भी कहते हैं, लोग उसे रानीमिस्त्री भी कहते हैं। यानि हमारी बहनों को एक नई कला, रोज़गार के नए अवसर से जोड़ने का कितना बड़ा काम पीएम आवास योजना के माध्यम से हो रहा है। वरना पहले तो निर्माण के क्षेत्र में बहनों को सिर्फ अनस्किल्ड लेबर यानि अकुशल श्रमिक ही मान लिया जाता था। मध्य प्रदेश में ही अभी तक 22 हज़ार करोड़ रुपए इन घरों को बनाने में खर्च हुए हैं। अब वो आप भी सोच सकते हैं 22 हजार करोड़ गए कहां? घर बना लेकिन जिन पैसों से घर बना वो पैसे मध्य प्रदेश के अलग अलग कामों में गए, लोगों के घरों में गए, लोगों की दुकान चलाने वालों को मिले, कारखाना चलाने वालों को मिले ताकि लोगों की आय बढ़े। पहले का अर्थ ये है कि ये घर सबके लिए तरक्की लेकर आ रहे हैं। जिसको घर मिलता है उनको भी तरक्की होती है और जिस गांव में घर बनते हैं उन गांव वालों की भी तरक्की होती है।

भाइयों और बहनों,

पहले की सरकारों और हमारी सरकार में एक बहुत बड़ा फर्क है। पहले की सरकारें गरीब को तरसाती थीं, उसे अपने दफ्तरों में चक्कर लगवाती थीं। हमारी सरकार गरीब के पास खुद पहुंच रही है, हर योजना का लाभ गरीब को मिले इसलिए अभियान चला रही है। आज हम सैचुरेशन की बात कर रहे हैं, यानि जनकल्याण की हर योजना का लाभ शत-प्रतिशत लाभार्थियो तक कैसे पहुंचे? कोई भाई-भतीजावाद नहीं, कोई तेरा-मेरा नहीं, इसको देना है, इसको नहीं देना है, कुछ नहीं, जिसका हक है सबको देना है। पक्के घर सबको तेज़ी से मिले। गैस हो, बिजली कनेक्शन हो, पानी के कनेक्शन हो, आयुष्मान भारत के तहत 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज हो, ये सबको तेज़ी से मिले। अच्छी सड़कों, अच्छे स्कूल-कॉलेज और अच्छे अस्पतालों तक सभी की पहुंच हो। गांव-गांव ऑप्टिकल फाइबर तेज़ी से पहुंचे। हम इसके लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं। आखिर हमें ये जल्दी क्यों है, इतनी अधीरता इसके लिए क्यों है? इसके पीछे अतीत का एक बहुत बड़ा सबक है। ऐसी हर मूल सुविधाओं को बीते अनेक दशकों तक लटकाए रखा गया। देश की एक बहुत बड़ी आबादी, इन्हीं मूल सुविधाओं के लिए संघर्ष करती थी। उसके पास बाकी चीजों के बारे में सोचने की फुर्सत भी नहीं थी। इसलिए, गरीबी हटाने के हर वादे, हर दावे, वो सिर्फ राजनीति के दाव हुआ करते थे। वो किसी के काम नहीं आए। सेनापति चाहे कितना भी जोश भरे, लेकिन अगर सैनिकों के पास लड़ाई के लिए मूल सुविधाएं ही नहीं होंगी तो युद्ध जीत पाना असंभव होता है। इसलिए हमनें गरीबी को परास्त करने के लिए, गरीबी से बाहर निकलने के लिए हमनें उन मूल सुविधाओं से देश के हर नागरिक को तेज़ी से जोड़ने का निश्चय किया। अब सुविधाओं से युक्त होकर गरीब, तेजी से अपनी गरीबी कम करने के लिए प्रयास कर रहा है। और तो मैं आपको कहुंगा ये जो घर आपको दिया है ना। वो सिर्फ रहने, खाने, पीने, सोने की जगह है ऐसा नहीं है। मैं तो कहता हूं ये आपका घर एक ऐसा किला है, ऐसा किला है जो गरीबी को घुसने नहीं देगा बची कुची गरीबी है उसको भी निकालके रहेगा ऐसा किला है ये आपका घर।

भाइयों और बहनों,

बीते अनेक महीनों से केंद्र सरकार 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को इसलिए मुफ्त राशन दे रही है, ताकि वैश्विक महामारी के समय में उसे भूखमरी का सामना ना करना पड़े। इसके लिए केंद्र सरकार अभी तक पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना पर 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर चुकी है। और मैं आपको एक और बात बताना चाहता हूं। जब टैक्सपेयर को लगता है जो देश का खजाना भरते हैं, कर देते हैं, जब उसको लगता है कि उसका पैसा सही जगह खर्च हो रहा है, तो टैक्सपेयर भी खुश होता है, संतुष्ट होता है और ज्यादा टैक्स देते रहता है। आज देश के करोड़ों टैक्यपेयर्स को ये संतोष है कि कोरोना काल में करोड़ों लोगों का पेट भरने में मदद करके वो कितनी बड़ी सेवा का काम कर रहे हैं। आज जब मैं चार लाख घर दे रहा हूं ना हर टैक्सपेयर सोचता होगा कि चलिये मैं तो दिवाली मना रहा हूं लेकिन मध्य प्रदेश का मेरा कोई गरीब भाई भी अच्छी दिवाली मना रहा है, उसको पक्का घर मिल रहा है। उसकी बेटी का जीवन सुख बन जाएगा।

लेकिन साथियों,

वही टैक्सपेयर जब ये देखता है कि उससे वसूले गए रुपए में मुफ्त की रेवड़ी बांटी जा रही है, तो टैक्सपेयर सबसे ज्यादा दुखी होता है। आज ऐसे अनेकों टैक्सपेयर्स मुझे खुलकर चिट्ठियां लिख रहे हैं। मुझे खुशी है कि देश में एक बड़ा वर्ग, देश को रेवड़ी कल्चर से मुक्ति दिलाने के लिए कमर कस रहा है।

साथियों,

हमारी सरकार का लक्ष्य, नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करने के साथ ही, इस बात का भी है कि गरीबों के, मध्यम वर्ग के पैसे बचें। आयुष्मान भारत योजना के तहत अभी तक करीब 4 करोड़ गरीब मरीज़ मुफ्त इलाज ले चुके हैं। इससे इन सभी परिवारों के हज़ारों करोड़ रुपए बचे हैं, जो सरकार ने वहन किए हैं। कोरोना काल में मुफ्त टीकाकरण पर हजारों करोड़ रुपए सरकार ने खर्च किए, ताकि गरीब को, मिडिल क्लास को अचानक आई इस गंभीर बिमारी की विपत्ति के कारण जेब से खर्च करना ना पड़े, कर्ज लेना न पड़े। पहले कोरोना आया, फिर दुनिया में लड़ाई आ गई, इससे दुनिया से हमें आज महंगी खाद खरीदनी पड़ रही है। यूरिया, जिसके एक बैग की कीमत आज दो हज़ार रुपए से ज्यादा है, उसे हम किसानों को सिर्फ 266 रुपए में उपलब्ध करा रहे हैं। 2000 हजार रुपये की बैग 300 रुपये से भी कम रुपयों में दे देते हैं। किसानों पर बोझ ना पड़े, इसलिए इस वर्ष सरकार 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च इसके पीछे कर रही है। केंद्र सरकार की पीएम किसान सम्मान निधि भी किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। आपने देखा होगा, कुछ दिन पहले ही जो 16 हज़ार करोड़ रुपए की जो किस्त भेजी थी, वो हर लाभार्थी किसान तक फौरन पहुंच गई। अभी 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक किसानों के बैंक खाते में हमारी सरकार ने जमा कराए हैं। और ये मदद तब पहुंची है, जब बुआई का समय होता है, जब खाद के लिए, दवाओं के लिए किसान को ज़रूरत होती है। किसान फसल बेचते हैं तो पैसा भी अब सीधे बैंक अकाउंट में आता है। मनरेगा का पैसा भी सीधे बैंक खाते में जमा होता है। यहां तक कि हमारी गर्भवती माताओं को जब अच्छे खाने की सबसे अधिक ज़रूरत होती है, तब मातृवंदना योजना के हज़ारों रुपए सीधे उन तक पहुंचते हैं।

भाइयों और बहनों,

ये सबकुछ अगर सरकार आज कर पा रही है तो उसके पीछे सबसे बड़ा कारण है सेवाभाव, आप सबके प्रति समर्पण और कोई कितनी ही हमारी आलोचना करे हम गरीबों का भला करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति से, आपके आशीर्वाद से समर्पण भाव से आगे बढ़ा रहे हैं। इसलिए आज इतने बड़े पैमाने पर टेक्नॉलॉजी का उपयोग किया जा रहा है। जो भी नई टेक्नॉलॉजी हमारे वैज्ञानिक, हमारे युवा खोजते हैं, उसका उपयोग सामान्य जन का जीवन आसान बनाने में किया जा रहा है। आज देखिए, गांव-गांव में ड्रोन से घरों के सर्वे हो रहे हैं। पहले जो काम पटवारी करते थे, रैवेन्यु डिपार्टमेंट के कर्मचारी करते थे, अब वही काम टेक्लोलॉजी से ड्रोन आकर के कर देता है। देश में पहली बार स्वामित्व योजना से गांव के घरों के नक्शे बनाए जा रहे हैं और ग्रामीणों को स्वामित्व के प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं। ताकि सीमा के विवाद ना हों, घर पर कोई अवैध कब्ज़ा ना कर सके और ज़रूरत पड़ने पर बैंकों से लोन भी मिल सके। इसी प्रकार जब खेती में भी बड़े पैमाने पर ड्रोन के उपयोग पर बल दिया जा रहा है, किसान ड्रोन की सुविधा हो जा रही है। कुछ दिन पहले एक बहुत बड़ा कदम हमने किसानों के लिए उठाया है। देशभर में अभी जो लाखों खाद की दुकानें हैं, उनको प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। अब किसानों को ज़रूरत का हर सामान एक ही जगह पर इन्हीं किसान केंद्रों पर मिलेगा। अनेक कृषि उपकरण यहां तक कि भविष्य में ड्रोन भी इन्हीं केंद्रों पर किराए पर उपलब्ध होंगे। यूरिया को लेकर भी बहुत बड़ा कदम उठाया है। अब कौन सी कंपनी की यूरिया लें, कौन सी ना लें, इस मुश्किल से किसान को मुक्ति मिल गई है। अब हर खाद भारत नाम से ही मिलेगी। इसमें कीमत भी साफ-साफ लिखी है। जितनी कीमत लिखी है, उससे ज्यादा किसान को देने की ज़रूरत नहीं है। मुझे पूरा विश्वास है कि ऐसे प्रयासों से किसान का, गरीब का जीवन आसान होगा। हम सभी विकसित भारत के निर्माण में जुटे रहेंगे। एक बार फिर आप सभी लाभार्थियों को आपके अपने पक्के घर की बधाई देता हूं और मैं कल्पना कर सकता हूं कि कितनी खुशी है आपको। खुद का घर तीन-तीन, चार-चार पीढ़ियां गई होंगी, कभी खुद के घर में दिवाली नहीं मनाई होगी। आज जब आप अपने बच्चों के साथ खुद के घर में धनतेरस और दीपावली मना रहे हैं तो आपकी जिंदगी में ये दीया का प्रकाश एक नई रोशनी लेकर के आएगा, मैं आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। परमात्मा के आर्शीवाद आप पर बने रहें और आपको ये नया घर नई प्रगति का एक कारण बन जाए यही मेरी शुभकामनाएं हैं। बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Text of PM’s interaction with Space Startup CEOs
August 23, 2026
मुख्‍य कार्यकारी अधिकारियों ने भारत के अंतरिक्ष उद्योग द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी अपनाने में दुनिया में बढ़ती रुचि की जानकारी दी
मुख्‍य कार्यकारी अधिकारियों ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने की सराहना की, कहा इससे कई नए अवसर उत्‍पन्‍न हुए हैं
प्रधानमंत्री ने लोगों के जीवन सुगमता के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के व्यापक अनुप्रयोगों का आह्वान किया
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक प्रतिभा, कंपनियों और निवेश आकर्षित करने की क्षमता
प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष उद्योग और अन्य सामाजिक विकास क्षेत्रों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया
प्रधानमंत्री ने युवाओं में अंतरिक्ष क्षेत्र के प्रति जिज्ञासा और रुचि पोषित करने के लिए अटल टिंकरिंग लैब्स के साथ सहयोग बढ़ाने का सुझाव दिया

प्रधानमंत्री - आपने एक नए क्षेत्र में साहस दिखाया है, सबसे बड़ी बात है कि आपने सरकार की बात पर भरोसा किया। मेरा एक मत रहा कि जो भी हम निर्णय करें, हम उसमें कंसिस्टेंट रहें, हम बार-बार उसमें बदलाव ना करें, ताकि कोई भी रिस्क लेना चाहता है, तो उसको भरोसा रहे कि भाई ठीक है मेरी गलती के कारण कुछ गड़बड़ होगा तो ठीक है, लेकिन कोई मेरा हाथ नहीं छोड़ देगा। और ये विश्वास पैदा करने का हमारा प्रयास था।

CEO –We are India’s first Space Tech Unicorn. अभी July, 18 को हम भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट सक्सेसफुली सैटेलाइट्स को इजेक्ट करके लॉन्च किया था। And, this is just the beginning. Generally, we say that just warm up for Skyroot, अभी शुरुआत है। एंड नेक्स्ट ईयर मिड तक हम एक लॉन्च per month हम कर रहे हैं। And also like thanks to you sir for opening up the sector. तीन फैक्ट्री बन चुका है। एक रॉकेट per month का कैपेसिटी है ऑलरेडी। And, this is just the beginning. अभी फ्यूचर ड्रीम है कि एक लॉन्च per week करना है और several launches per day.

CEO – एक ऐसा इंजन बनाया जो दुनिया का सबसे आधुनिक इंजनों में से आता है। सर इसको अभी हमने तैयार किया है, इसकी टेस्टिंग जारी है।

प्रधानमंत्री - उनका कॉन्फिडेंस है, इन्वेस्टर्स का?

CEO – सर,स्काई रूट का जो लॉन्च हुआ है फर्स्ट, उसके बाद से बढ़ गया है।

प्रधानमंत्री –अच्छा। वो रूट आपको काम आ रहा है?

CEO – वो बहुत काम आ रहा है।

प्रधानमंत्री –दुनिया अब भारत के स्टार्टअप को खोजती होगी, भई कौन है इसमें? क्योंकि एक जब ब्रेक थ्रू होता है, तो तुरंत लोगों का ध्यान जाता है।

CEO – I think, स्पेस इंडस्ट्री ओपन होने के बाद हमने एक बहुत अच्छी सी ट्रेंड देखी है। हमारे जितने सिटीजंस यूएस और यूरोप में हैं वे वापस आकर हमारे साथ काम करना चाह रहे हैं।

प्रधानमंत्री –बहुत लोगों को हमें जोड़ना है और जैसा मेहता ने कहा कि भई अब विदेश से लोग गए हुए वापस आ रहे हैं। मैं समझता हूं कि हमें ऐसा एक aura खड़ा कर देना चाहिए कि इस फील्ड में दुनियाभर के लोगों को लगे कि भई जिंदगी बनानी है, तो हिंदुस्तान जाओ। भारत की कोई स्टार्टअप से जुड़ जाओ। भारत की कोई स्पेस एजेंसी से जुड़ जाओ। मैं पक्का मानता हूं जी, पूरा टैलेंट पूल जो है, एक मैग्नेट की तरह आपके कारण हम खींच सकते हैं और वो हमारी एक बहुत बड़ी ताकत बन सकता है।

CEO –हमारा विज़न है कि नेक्स्ट 18 months में हम ग्लोबल ग्राउंड स्टेशन नेटवर्क लगाना चाहते हैं।

CEO –हम जो सैटेलाइट्स का इंजन होता है, जो सैटेलाइट को एक जगह से दूसरा जगह ले जाता है स्पेस में। 5 साल या 15 साल तक ले जाता है सैटेलाइट्स को, वो इंजंस बनाते हैं सर। ग्लोबली बहुत अच्छा ट्रैक्शन मिला है एंड ये भी आपका एफर्ट भी इसमें बहुत है सर कि इंडिया का कंपनीज़ अभी एक्सपोर्ट करने के लिए गवर्नमेंट का सपोर्ट है।

प्रधानमंत्री –कॉस्ट में हम बहुत कॉम्पिटिटिव हैं, टैलेंट में तो कोई प्रश्न ही नहीं उठता है और रिस्क टेकिंग कैपेसिटी हमारे देश के लोगों की वैसे भी ज्यादा होती है। और उसके कारण हम बहुत तेजी से अपनी जगह बना सकते हैं।

CEO –This robotic spacecraft will go to space, physically capture the dead satellite and remove it from the orbit.

CEO –We are the first Indian company working on the docking under refueling technologies with the vision of establishing a fuel station in space.

CEO – मेरा नाम अंतरिक्ष है, my co-founder Monika is also here. सर हम इंडिया का फर्स्ट स्पेस फार्मा स्टार्टअप हैं। हम ऐसे सेटेलाइट्स बना रहे हैं, जो स्पेस में जाके Pharmaceuticals मैन्युफैक्चर कर सके और उसे वापस ले आ सके अंतरिक्ष से।

प्रधानमंत्री –आपका नाम अंतरिक्ष रखा है, आपके परिवार के लोग इसमें थे पहले से?

CEO – जी सर, नहीं मेरी मम्मी ने रखा था सर।

CEO – एक लॉन्च के बाद last one month में आठ लॉन्च कॉन्ट्रैक्ट मिला।

प्रधानमंत्री – अच्छा, अच्छा।

CEO – और मोस्टली इंटरनेशनल हैं।

CEO – सर अभी तो 10 लाख फार्मर के साथ we are planned to launch this innovation.

CEO – सर ये आपके लिए ताकि एक याद बनी रहेगी।

प्रधानमंत्री – वाह।

CEO – ये ओपनिंग, जो आपने ओपन किया था प्राइवेट सेक्टर को, उससे जो private सैटेलाइट है, उससे भारत की ब्यूटी जो दिख रही है।