WSJ_684

वाल स्‍ट्रीट जर्नल में प्रकाशित प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के विचार लेख का मूल पाठ इस प्रकार है:

भारत में बदलाव के लिए उम्मीदें उफान पर हैं। इस साल मई में, विविधताओं से भरे भारत में सवा अरब भारतीयों ने स्‍पष्‍ट रूप से राजनैतिक स्थायित्‍व, सुशासन और तीव्र विकास के लिए अपना वोट दिया। पिछले 30 वर्षों में पहली बार देश के निचले सदन लोकसभा में किसी सरकार को बहुमत मिला और बहुमत की सरकार का गठन हुआ। एक युवा राष्ट्र के रूप में भारत आशावाद और आत्मविश्वास से भरा हुआ है, जहां 80 करोड़ लोगों की उम्र 35 साल से कम है। इन युवा लोगों की ऊर्जा, उत्‍साह और उद्यमिता भारत की सबसे बड़ी शक्‍ति है। मेरी सरकार का सबसे बड़ा मिशन इन्‍हीं गुणों का वि‍कास करना है।

DSC_2613-684

इस मिशन को पूरा करने के लिए हम गैर-जरूरी कानूनों और नियमों को समाप्‍त करेंगे,  नौकरशाही की प्रक्रियाओं को आसान और छोटा बनाएंगे, और यह सुनिश्‍चित करेंगे कि हमारी सरकार अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बने। ऐसा कहा जाता है कि सही विचार उतना ही महत्‍वपूर्ण है जितना सही कार्य।

हम भारत में विश्‍वस्‍तरीय बुनि‍यादी ढांचागत संरचना तैयार करेंगे, जो देश में तेज विकास और लोगों की बुनि‍यादी जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक हैं। हम देश के शहरों और गांवों को रहने लायक, टि‍काऊ और स्‍मार्ट बनाएंगे। हम देश के गांवों को आर्थिक बदलाव को प्रोत्‍साहित करने का मुख्‍य केन्‍द्र बनाएंगे। भारत को वैश्‍विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए मेक इन इंडियाहमारी प्रतिबद्धता और सभी को हमारा निमंत्रण है। हम इस विचार को वास्‍तविक बनाने के हरसंभव प्रयास करेंगे।

हमने समावेशी विकास के वादे के साथ अपने चुनाव अभियान का संचालन किया। मेरे लिए इसके कई अर्थ हैं – कौशल शिक्षा, अवसर, सुरक्षा, आत्‍मसम्‍मान और समाज के प्रत्‍येक वर्ग खासकर महिलाओं के लिए अधिकार, प्रत्‍येक भारतीय के लिए बैंक खाता, सभी के लिए कि‍फायती स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं, वर्ष 2019 तक सभी के लिए स्‍वच्‍छता, 2022 तक सभी के लिए मकान, हर घर के लिए बिजली और हर गांव से संपर्क। इन चुनौतियों को पूरा करने के लिए, मुझे आम भारतीय नागरिकों की अनगिनत आसाधारण कहानियों से विश्‍वास प्राप्‍त हुआ। ये कहानियां दशकों की भारत-यात्रा के दौरान मैंने देखी और सुनी।

प्रशासन में बदलाव, लोगों को सशक्त बनाने, सामाजिक चुनौतियों के लिए वाजिब समाधन मुहैया कराने और अब तक अकल्पनीय रहे तरीकों से लोगों तक पहुंच कायम करने के लिए तकनीक और इनोवेशन की संभावनाओं में मेरा दृढ़ विश्वास है। पिछले एक दशक में देश में मोबाइल फोन की संख्‍या चार करोड़ से बढ़कर 90 करोड़ हो गई; हमारा देश स्‍मार्ट फोन का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है और यह बाजार तेजी से बढ़ रहा है।

मैं जब पिछले दो दशकों में दुनिया में हुए कंप्‍यूटर विकास और स्‍टोरेज क्षमता और गागर में सागर भरने के उसके गुण के बारे में सोचता हूं तो इस आत्‍मविश्‍वास से भर जाता हूं कि यह विकास नवीकरणीय ऊर्जा में भी संभव है। सौर और पवन शक्ति से भारत के हजारों गांवों को बिना लंबे समय तक इंतजार किए भरोसेमंद, किफायती और स्‍वच्‍छ ऊर्जा प्राप्‍त हो सकती है।

इसकी वजह से भारत की समृद्धि अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बन सकती है। प्रकृति की उदारता की पूजा करते हुए समृद्ध बनने का यह मार्ग हमारी परंपरा से हमें प्राप्‍त हुआ है और यही मार्ग हमने चुना है।

भारत अपने अंतरराष्ट्रीय मित्रों के सहयोग से अपने स्‍वप्‍नों को साकार करेगा। इतिहास बताता है कि भारत का स्वभाविक स्वभाव विश्व के प्रति उदारता का है। व्यवसाय, विचारों, अनुसंधान, इनोवेशन और पर्यटन के लिए भारत उदार तथा मित्रवत रहेगा। आगामी महीनों में आप भारत की यात्रा शुरू करने से पहले इस अंतर को महसूस करेंगे।

अमेरिका हमारा स्वभाविक वैश्विक साझेदार है। भारत और अमरीका ने अपने साझा मूल्यों की चिरस्थायी और सार्वभौमिक प्रासंगिकता को साकार रूप दिया है। अमेरिका में उन्नतिशी भारतीय-अमरीकी समुदाय हमारी साझेदारी की संभावनाओं, और एक ऐसे माहौल के गुंजाइश का प्रतीक है, जो उद्यमिता को बढ़ावा देता है और कठिन परिश्रम को पुरस्कृत करता है। डिजिटल युग में नेतृत्व के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हमारी मजबूती खासतौर से महत्वपूर्ण है। हमारे बीच समान राजनीतिक व्यवस्था है और कानून के शासन के प्रति दोनों देश वचनबद्ध हैं। ऐसे में हमारे बीच व्यवसायिक साझेदारी के लिए सहजता और निश्चितता का माहौल है। शिक्षा, इनोवेशन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अमरीका लगातार भारत को प्रेरित कर रहा है।

भारत और अमरीका की एक-दूसरे की सफलतामें आधारभूत भागीदारी है- हमारे मूल्यों और हमारे कई साझा हितों के लिए। ये तत्व भी हमारी साझेदारी के लिए आवश्यक हैं। एशिया और प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता लाने में इसकाअहम योगदान होगा। इसी तरह आतंकवाद और चरमपंथ पर काबू पाने, और हमारे समुद्रों, साइबर स्पेस तथा अंतरिक्ष को सुरक्षित बनाने में इनका अहम योगदान है। ये सभी हमारे दैनिक जीवन पर गहरा असर डालते हैं।

भारत और अमेरिका की पूरक शक्ति का इस्तेमाल दुनिया भर में लोगों के जीवन में बदलाव लाने और समावेशी तथा व्यापक वैश्विक विकास के लिए किया जा सकता है। चूंकि हमारे देशों के मूल्य और रुचियां एक जैसे हैं, लेकिन हमारी परिस्थितियां अलग हैं। हम एक अनूठी परिस्थिति में हैं, जहां से हम एक अधिक एकीकृत और सहयोगात्मक विश्व के लिए एक सेतू की भूमिका में आ सकते हैं। एक-दूसरे के विचारों की संवेदनशीलता और हमारी दोस्ती में भरोसे के जरिए हम वर्तमान वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक संगठित अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में अपना योगदान कर सकते हैं।

वैश्विक व्यवस्था में यह एक बदलाव का क्षण है। मैं दोनों राष्ट्रों की नियति के प्रति आश्वस्त हूं, क्योंकि लोकतंत्र नई शुरुआत का सबसे बड़ा साधन है, और सही परिस्थितियां होने पर ये मानव उत्साह को बढ़ाने के लिए सर्वश्रेष्ठ अवसर उपलब्ध कराता है।

https://online.wsj.com/articles/narendra-modi-an-invitation-to-make-in-india-1411687511  में मूल रूप से प्रकाशित। 

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India’s digital economy enters mature phase as video dominates: Nielsen

Media Coverage

India’s digital economy enters mature phase as video dominates: Nielsen
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Prime Minister shares Sanskrit Subhashitam highlighting the spirit of selfless service and compassion
May 06, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, said that work done with a selfless spirit is the truest form of humanity. He noted that such actions not only bring inner happiness but also contribute to the welfare of society.

The Prime Minister shared a Sanskrit Subhashitam-

“अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।
अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥”

The Subhashitam conveys that to hold no hatred towards any living being-in thought, word, or deed, to act with compassion towards all, and to give generously-this is regarded as the highest form of conduct.

The Prime Minister wrote on X;

“निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सच्ची मानवता है। इससे आत्मिक खुशी तो मिलती ही है, समाज का भी कल्याण होता है।

अद्रोहः सर्वभूतेषु कर्मणा मनसा गिरा।

अनुग्रहश्च दानं च शीलमेतत्प्रशस्यते॥”