प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज थिम्‍पू में संसद के संयुक्‍त अधिवेशन को सम्‍बोधित किया।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि करीब-करीब पिछली एक शताब्‍दी सत्‍ता के विस्‍तार, राजनीति के केंद्रीकरण जैसी गतिविधियों से भरी पड़ी रही, लेकिन भूटान अपवाद सिद्ध हुआ है। भूटान ने लोकतंत्र की मजबूत नींव डालने का प्रयास किया है। भूटान ने बहुत ही उत्‍तम तरीके से, लोकशिक्षा के माध्‍यम से जन-मन को धीरे-धीरे तैयार करते हुए संवैधानिक व्‍यवस्‍थाओं को विकसित करते हुए यहां लोकतंत्र की परंपराओं को प्रस्‍थापित किया है। यहां के लोकतंत्र की प्रक्रिया में यहां की संसद की गरिमा, यहां के जनप्रतिनिधियों के प्रति सामान्‍य मानव की आस्‍था उत्‍तरोत्‍तर बढ़ रही है। यहां के मतदाताओं ने जो जागरुकता दिखाई है वह स्‍वस्‍थ लोकतांत्रिक परंपरा के लिए शुभ संकेत है। भारत में भी अभी-अभी चुनाव हुआ है और भारत की जनता ने सुशासन और विकास के लिए मतदान किया है।

भूटान की नेशनल असेम्‍बली के स्‍पीकर महामहिम श्री जिग्‍मे जांग्‍पो के भाषण की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जितना सशक्‍त होगा, उतना ही भूटान को लाभ होगा, प्रधानमंत्री ने कहा कि वे उनकी इस बात से पूरी तरह सहमत हैं। उन्‍होंने कहा कि सम्‍पूर्ण क्षेत्र खासतौर से सार्क देशों की भलाई के लिए भारत का सुखी सम्‍पन्‍न होना आवश्‍यक है। केवल एक मजबूत और समृद्ध भारत ही पड़ोसी के सामने आने वाली समस्‍या से उसे निजात दिला सकता है।

भारत-भूटान संबंधों के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक संबंधों पर आधारित नहीं हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत और भूटान दोनों ने ही शासकीय परिवर्तन देखा है। भूटान में लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था विकसित हुई, लेकिन संबंधों को कोई आंच नहीं आई। भारत में भी कई बार शासन व्‍यवस्‍थाएं बदली हैं, लेकिन भारत और भूटान के संबंधों को कोई आंच नहीं आई है। भारत और भूटान के संबंध सिर्फ शासकीय व्‍यवस्‍थाओं के कारण नहीं हैं। भारत और भूटान के संबंध सांस्‍कृतिक विरासत के कारण हैं। सांस्‍कृतिक परंपराओं और हमारे बंधनों के कारण हैं। हम एकता की अनुभूति इसलिए करते हैं कि हमने अपने दिल के दरवाजे खोल कर रखे हैं। भूटान हो या भारत, हमने अपने दिल के दरवाजे खोल करके रखे हैं। भूटान और भारत का नाता उस अर्थ में एक ऐतिहासिक धरोहर है और भारत और भूटान की आने वाली पीढ़ि‍यों ने भी इस ऐतिहासिक धरोहर को संभालना है, संजोए रखना है और उसको और अधिक ताकतवर बनाना है।


bhutan-parliament2-684 भूटान के विकास का जिक्र करते हुए श्री मोदी ने कहा कि किसी भी छोटे देश के लिए और इतनी कठिनाइयों से जी रहे देश के लिए विकास एक उपलब्धि है। उन्‍होंने कहा कि भविष्‍य में विश्‍व के अनेक छोटे देश विकास के लिए भूटान की प्रगति के मॉडल को बारीकी से देखेंगे। दुनिया विकास दर की चर्चा कर रही है, जीडीपी की चर्चा कर रही है, तब भूटान हैपीनेस की चर्चा कर रहा है और ऐसा इसलिए है क्‍योंकि शासक के दिल में आखिरी छोर पर बैठे हुए व्‍यक्ति की कल्‍याण की भावना है।

श्री मोदी ने कहा कि भूटान की पनबिजली संभावनाओं को काम में लाने की योजनाएं केवल भूटान की अर्थव्‍यवस्‍था से ही जुड़ी अथवा भारत की ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए ही नहीं है, बल्कि भारत और भूटान का संयुक्त प्रयास ग्‍लोबल वार्मिंग से जूझ रही मानवता के लिए योगदान करने का प्रयास है।

प्रधानमंत्री ने भूटान के बजट में काफी राशि शिक्षा पर खर्च करने की चर्चा की और कहा कि इससे पता लगता है कि भूटान आज की पीढ़ी की समृद्धि के लिए ही नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ि‍यों की समृद्धि के लिए भी बीज बो रहा है। उन्‍होंने कहा कि भारत इसमें योगदान करना चाहता है। उन्‍होंने कहा कि भारत युवकों के फायदे के लिए भूटान में शिक्षा को आधुनिक टैक्‍नोलॉजी से जोड़ कर ई-लाइब्रेरी का नेटवर्क स्‍थापित करने में मदद करेगा। इससे भूटान के युवक ज्ञान के भंडार के साथ जुड़े जाएंगे। दुनिया का जो भी ज्ञान होगा उन्‍हें इस टैक्‍नोलॉजी के माध्‍यम से हासिल हो जाएगा। उन्‍होंने कहा कि भारत, भूटानी छात्रों को दी जा रही छात्रवृत्ति को दोगुना कर देगा।

भारत और भूटान के संबंधों को कैसे मजबूत बनाया जा सकता है, इस बारे में श्री मोदी ने सुझाव दिया कि भारत के भूटान से लगे हिमालयी क्षेत्र और अगर चाहे तो नेपाल भी हर वर्ष एक खेल प्रतियोगिता आयोजित कर सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि खेलों के जरिए लोगों को आपस में जोड़ने से खुशहाली आती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को भी भूटान काम में ला सकता है। श्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कई बार लोग कहते हैं कि हिमालय ने हम लोगों को अलग किया है, लेकिन उनका मानना है कि हिमालय ने हमें एकजुट किया है, क्‍योंकि वह हमारी साझा विरासत का एक अंग है। उन्‍होंने कहा कि हिमालय के दोनों तरफ के लोग इसे ताकत का स्रोत मानते हैं, लेकिन समय की मांग है कि हिमालय के विभिन्‍न पहलुओं का अध्‍ययन किया जाए। उन्‍होंने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन के लिए पहले ही एक राष्‍ट्रीय कार्ययोजना तैयार कर चुका है। उन्‍होंने कहा कि हिमालयी प्रणाली को बनाए रखने के लिए एक राष्‍ट्रीय मिशन पर भी विचार किया जा सकता है। उन्‍होंने कहा कि भारत हिमालय के अध्‍ययन के लिए एक केन्‍द्रीय विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना करना चाहता है और भूटान को उससे काफी फायदा होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और भूटान पर्यटन की दिशा में एक समग्र दृष्टिकोण तैयार कर सकता है और एक सर्किट विकसित कर सकता है, जिसमें भारत के पूर्वोत्‍तर राज्‍य और भूटान शामिल हों। उन्‍होंने कहा कि ''आतंकवाद तोड़ता है, पर्यटन जोड़ता है''। श्री मोदी ने कहा कि अगर भूटान के प्राकृतिक संसाधन और संभावनाओं को मिला दिया जाए तो यह दुनिया के लिए एक बड़ा निमंत्रण होगा।

प्रधानमंत्री ने भूटान के तीसरे नरेश की टिप्‍पणी को उद्धृत किया : दूध और पानी की तरह, भारत और भूटान को अलग नहीं किया जा सकता। उन्‍होंने कहा कि मित्रता अटूट है और सांस्‍कृतिक धरोहर पर आधारित है। उन्‍होंने अपने जोरदार स्‍वागत के लिए भूटान की जनता के प्रति आभार व्‍यक्‍त किया।

नेशनल काउंसिल के चेयरमैन महामहिम डॉ. सोनम किंगा ने धन्‍यवाद भाषण किया।

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प्रधानमंत्री ने नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता की
June 11, 2026
विकसित भारत की परिकल्पना प्रत्येक राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के 70 करोड़ युवाओं को देश की संपत्ति बताया और राज्यों से इस जनसांख्यिकीय लाभांश को विकास लाभांश में बदलने का आग्रह किया
प्रधानमंत्री ने राज्यों को युवाओं और एमएसएमई के लिए अवसर पैदा करने तथा उन देशों से सक्रिय रूप से निवेश आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहित किया जिनके साथ भारत ने मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं
राज्यों को एक ज़िला एक उत्पाद को मजबूत करना चाहिए और रक्षा विनिर्माण में अवसरों का लाभ उठाना चाहिए: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए और लोगों को भविष्य के लिए तैयार कौशल से सुसज्जित किया जाना चाहिए
प्रधानमंत्री ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी जैसी उभरती सामाजिक चुनौतियों का सामना करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता का उल्लेख किया
प्रधानमंत्री मोदी ने अल नीनो से उत्पन्न चिंताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया और राज्यों से जल संरक्षण तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का आग्रह किया
मुख्यमंत्री/उप राज्यपाल/प्रशासकों ने प्रधानमंत्री मोदी को कार्यालय में 12 वर्ष पूरे करने पर बधाई दी
राज्यों ने वैश्विक भू-राजनीतिक संकट का सामना करने और भारत की क्षमता को मजबूत करने के लिए केंद्र के साथ एकजुटता व्यक्त की
सभी राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों ने बैठक में भाग लिया; पहली बार सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इसमें भाग लिया
बैठक का विषय : विकसित भारत@2047 के लिए समावेशी मानव विकास

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। इस वर्ष बैठक का विषय विकसित भारत@2047 के लिए समावेशी मानव विकास था। इसमें 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और प्रशासकों ने भाग लिया। यह पहला अवसर था जब सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग की शासी परिषद की बैठक में भाग लिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं अनिश्चितता और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही हैं, भारत की विकास गाथा दुनिया को प्रेरित करती रहती है। उन्होंने आत्मनिर्भरता के प्रति राष्ट्र के संकल्प को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विशेष रूप से वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने और लागू करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने सहकारी संघवाद के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकसित भारत की परिकल्पना हर राज्य, जिले, प्रखंड और गांव का सामूहिक संकल्प बनना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने भारत की जनसांख्यिकीय शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के युवा इसकी सबसे बड़ी संपत्ति हैं, जिसमें लगभग 70 करोड़ भारतीय 25 वर्ष से कम आयु के हैं। इसे जनसांख्यिकीय लाभांश बताते हुए उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे इसे शिक्षा, कौशल विकास और क्षमता निर्माण की पहल के माध्यम से विकास लाभांश में बदलने पर ध्यान केंद्रित करें जो युवाओं को भविष्य के अवसरों और चुनौतियों के लिए तैयार करे।

प्रधानमंत्री ने हाल ही में कई देशों के साथ हुए भारत के मुक्त व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए राज्यों को युवाओं और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए अवसर पैदा करने और हितधारकों को इन समझौतों से होने वाले फायदों का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने के लिए तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने राज्यों से सक्रिय रूप से सहयोगी देशों से निवेश आकर्षित करने का भी आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने महिला नेतृत्व वाले विकास पर बल देते हुए, राज्यों से लखपति दीदी की संख्या 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया और नारी शक्ति के लिए सुरक्षित तथा संरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने राज्यों से एक ज़िला एक उत्पाद (ओडीओपी) पहल पर ध्यान केंद्रित करने और इसके आसपास निर्यात के अनुकूल रणनीतियों को विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने रक्षा विनिर्माण का एक उभरते क्षेत्र के रूप में उल्लेख किया जहां भारत एक विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। श्री मोदी ने राज्यों को इसके विकास से उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाने के लिए नीतियां तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया।

प्रधानमंत्री ने निवारक उपायों, जागरूकता अभियानों और प्रभावी शासन के माध्यम से नशीली दवाओं के दुरुपयोग और साइबर धोखाधड़ी जैसी उभरती सामाजिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने अल नीनो की स्थिति से उत्पन्न चिंताओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया और राज्यों से जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा प्राकृतिक और जैविक खेती की प्रथाओं को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चालू खरीफ सीजन के दौरान किसानों द्वारा 11 लाख टन जैविक खाद की खरीद टिकाऊ कृषि में बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री ने जिला स्तर पर प्रगति का मूल्यांकन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। श्री मोदी ने विशेष रूप से आकांक्षी जिला मानकों के माध्यम से सुझाव दिया कि इसी तरह कृषि के क्षेत्र में 100 जिलों की पहचान की जानी चाहिए ताकि सकारात्मक परिणाम लाए जा सकें। उन्होंने राज्यों से इस प्रयास में आगे आने का आग्रह किया ताकि महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण के माध्यम से एक अभूतपूर्व परिवर्तन हासिल किया जा सके।

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत@2047 की परिकल्पना साकार करने के लिए एक निगरानी ढांचे और लक्षित 100-दिवसीय तथा पांच-वर्षीय लक्ष्यों की आवश्यकता पर बल दिया।

निवेश आकर्षित करने के लिए सुशासन, पारदर्शिता और बुनियादी ढांचे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने राज्यों से ब्रांडिंग, कारोबार करने में आसानी और डेटा केंद्रों तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में उभरते अवसरों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई को एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। श्री मोदी ने भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक कौशल से लोगों को सुसज्जित करने के लिए अधिक प्रयासों का आह्वान किया।

मुख्यमंत्रियों/उपराज्यपालों/प्रशासकों ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके कार्यालय में 12 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर बधाई दी। उन्होंने वैश्विक भू-राजनीतिक संकट का सामना करने और ऊर्जा आवश्यकताओं के संबंध में भारत की क्षमता को मजबूत करने और इसकी विकास गति को बनाए रखने के लिए केंद्र के साथ एकजुटता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चर्चा रचनात्मक रही और यह राज्यों की आकांक्षाओं, आशाओं, अनुभवों, सर्वोत्तम प्रथाओं तथा चुनौतियों को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने बैठक में भाग लेने के लिए सभी मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और प्रशासकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भरोसा जताया कि सहयोग, नवाचार और विकास के प्रति साझा प्रतिबद्धता के माध्यम से भारत वर्ष 2047 तक विकसित भारत की ओर अपनी यात्रा को गति दे सकता है।