"PM terms corruption a disease worse than cancer
""Mera Kya, Mujhe Kya" attitude must end. PM hints at harsh measures to curb corruption"
"PM: Network of roads is essential to take development to every nook and corner, just as a network of veins is essential to take blood to all parts of the body"

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज भ्रष्टाचार को कैंसर से भी ज्यादा गंभीर बीमारी बताया और कहा कि वे लोगों की सहायता से भ्रष्टाचार को देश से समाप्त करने के लिए दृढ़ संकल्प हैं।

haryana 1 684 haryana 6 684प्रधानमंत्री हरियाणा के कैथल में चार लेन वाले ‘कैथल-नरवाना-हिसार-राजस्थान सीमा’ राजमार्ग की आधारशिला रखने के बाद एक विशाल जनसभा को संबोधित कर रहे थे। श्री नरेन्द्र मोदी ने एकत्र जनसमूह से सवाल किया ‘’क्या समाज से भ्रष्टाचार समाप्त किया जाना चाहिए, यदि मैं इसे समाप्त करने के लिए कठोर कदम उठाऊं तो क्या आप मेरी सहायता करेंगे?’’ तालियों की गड़गड़ाहट के बीच प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि वे लोगों की सहायता से देश को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाएंगे। उन्होंने कहा कि मेरा क्या, मुझे क्या के रवैये ने देश को तबाही के रास्ते पर धकेल दिया है और इसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए। देश ऐसी बुराइयों को अब लंबे समय तक नहीं झेल सकता।

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देश के विकास में बुनियादी ढ़ांचे के महत्व को उजागर करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हरियाणा ने इसका अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया है। राष्ट्रीय राजमार्ग-1 के दोनों तरफ की जमीन को बढ़िया तरीके से विकसित किया गया है लेकिन इसे छोड़कर राज्य में विकास की कमी को देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि विकास के लिए सड़कों का नेटवर्क ठीक उसी तरह आवश्यक है जिस तरह शरीर के प्रत्येक अंग तक रक्त को पहुंचाने के लिए नसों का नेटवर्क। प्रधानमंत्री ने आधुनिक बुनियादी ढ़ांचे के विकास के लिए सरकार का विजन रखा जिसमें विश्व स्तर की सड़कों का निर्माण, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, बिजली, गैस और पानी के ग्रिड शामिल हैं।

कैथल राजस्थान सीमा क्षेत्र में चार लेन वाली परियोजना का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सड़क हरियाणा और राजस्थान को जोड़ेगी और दोनों राज्यों के बीच व्यापार और परिवहन को बढ़ाएगी जिससे देश को फायदा मिलेगा। प्रधानमंत्री ने आज इस परियोजना की आधारशिला रखी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि युवकों के लिए रोजगार के अवसर जरूरी हैं और रोजगार सृजित करने के लिए विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समारोह में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि लोग विकास चाहते हैं। वे विकास के मार्ग पर पूरी दुनिया के साथ शामिल होना चाहते हैं।

भारत के अन्न भंडारों को भरने के लिए हरियाणा के किसानों का अभिवादन करते हुए प्रधानमंत्री ने उनसे कृषि के आधुनिक तरीके और प्रौद्योगिकी अपनाने का आह्वान किया ताकि अन्न का भंडार भी भरे, और किसान की जेब भी भरे। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जरिए किसानों के लिए सिंचाई की सुविधा सुनिश्चित करेगी।

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haryana 3 684इस अवसर पर हरियाणा के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी, हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्दर सिंह हूडा, केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री कृष्णपाल और रक्षा राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह भी मौजूद थे।

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Prime Minister shares Sanskrit Subhashitam highlighting the importance of courage and perseverance
August 03, 2026

The Prime Minister, Shri Narendra Modi, said that one should never lose courage even when fortune turns unfavourable, for patience and perseverance can help a person regain lost ground. He noted that just as a skilled sailor whose ship breaks apart in the middle of the ocean does not lose hope but continues striving to survive by swimming, determination and steadfast effort enable one to overcome adversity.

The Prime Minister shared a Sanskrit Subhashitam-

“त्याज्यं न धैर्यं विधुरेऽपि दैवे धैर्यात्कदाचित्स्थितिमाप्नुयात्सः।

याते समुद्रेऽपि च पोतभङ्गे सांयात्रिको वाञ्छति कर्म एव।। ”

The Subhashitam conveys that one should not lose patience even when fortune is adverse, for through patience, one can always regain a lost favorable situation. Just as a skilled sailor, even when his ship breaks apart in the middle of the ocean, focuses solely on his actions, namely, the effort to survive and swim, without losing heart.

The Prime Minister wrote on X;

“त्याज्यं न धैर्यं विधुरेऽपि दैवे धैर्यात्कदाचित्स्थितिमाप्नुयात्सः।

याते समुद्रेऽपि च पोतभङ्गे सांयात्रिको वाञ्छति कर्म एव ।।”