Shri Narendra Modi addresses SME Convention of Vibrant Gujarat 2013

Published By : Admin | January 12, 2013 | 15:21 IST

मंच पर उपस्थित सभी महानुभाव और स्मॉल और मीडियम उद्योग जगत के सभी साहसिक भाईयों और बहनों..! जिन लोगों ने कल का समारोह देखा होगा, वे अगर आज के इस समारोह को देखेंगे तो वे अनुमान लगा सकते हैं कि गुजरात किस रेंज में काम कर रहा है। जितना बड़े उद्योगों का महात्म्य है, उससे भी ज्यादा छोटे उद्योगों का महात्म्य है। और आज पूरा दिन इस समिट में छोटे उद्योगों के विकास के लिए हम सब मिल कर के क्या कर सकते हैं, छोटे उद्योगों के द्वारा प्रोडक्ट की हुई चीजों को मार्केट कैसे मिले, छोटे उद्योग भी विश्व व्यापार में अपनी जगह कैसे बनाएं, छोटे उद्योगों का भी एक ब्रांड इमेज कैसे बने... ये सारे विषय ऐसे हैं कि जिसको अगर हम मिल बैठ कर सोचें तो एक बहुत बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। किसी एक जिले में एकाध छोटे उद्योगकार के लिए एकदम नई टैक्नोलॉजी को लाना उसके बूते से बाहर होता है, उसके लिए कठिनाई होती है। लेकिन बदलती हुई टैक्नोलॉजी के संबंध में हम लगातार हमारे उद्योग जगत के मित्रों को जोड़ते रहें, उनको अवसर दें, चाहे एक्जीबिशन हो, फेयर्स हो, सेमीनार्स हो, तो एक साथ 12-15 लोग आगे आएंगे और कहेंगे कि हाँ भाई, हम इस टैक्नोलॉजी को हायर करना चाहते हैं। और जब सब प्रकार की कोशिश करने के बाद सफलता मिलती है, सब लोग जुड़ते हैं तो अपने आप किसी भी उद्योगकार के लिए निर्णय करने में कठिनाई नहीं होती। इस प्रकार की समिट के माध्यम से हम हमारे गुजरात के छोटी-छोटी तहसील में बैठे हुए जो छोटे-छोटे उद्योगकार हैं, एकाध छोटा मशीन है, खुद मेहनत करते हैं, कुछ ना कुछ कर रहे हैं... लेकिन उनका भी इरादा तो है आगे बढ़ने का। वे भी चाहते हैं कि नई ऊंचाइयों को पार करना है, लेकिन उनको कभी-कभी रास्ता नहीं सूझता है। कभी कान पर कोई जानकारी पड़ती है लेकिन रास्ता पता नहीं होने के कारण, सोर्स पता नहीं होने के कारण, किन लोगों के माध्यम से करें उसका रास्ता पता नहीं होने के कारण वो अपनी जिदंगी उसी में पूरी कर देता है। पिताजी का एक कारखाना छोटा-मोटा चल रहा है, बच्चे बड़े हो रहे हैं, बच्चों को लगता है कि कुछ करें, लेकिन पिताजी को लगता है कि नहीं भाई, इतने साल से मैं चला रहा हूँ, ऐसा साहस करोगे तो कहीं डूब ना जाएं, अभी जरा ठहरो..! कभी माँ-बाप भी जो नई पीढ़ी प्रवेश करती है अपने पारिवारिक व्यवसाय में, तो उससे भी वो कभी-कभी चिंतित हो जाते हैं कि क्या करें..! इस प्रकार के समारोह से दोनों पीढ़ी की सोच को बदलने के लिए हम एक कैटलिक एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। जो पुरानी पीढ़ी के लोग हैं, जो पुरानी परंपरा से अपना काम करना चाहते हैं, पुरानी टैक्नोलॉजी का उपयोग कर के काम करना चाहते हैं, बहुत ही प्रोटेक्टिव एन्वायरमेंट में काम करना चाहते हैं और नई पीढ़ी है जो बहुत ज्यादा एग्रेसिव है, साहस करना चाहती है, नई टैक्नोलॉजी को एडाप्ट करना चाहती है और कुछ भी आने से पहले घर में ही तनाव रहता है। बेटा बाप को समझा नहीं पा रहा है, बाप बेटे को स्वीकार करने को तैयार नहीं होता है और सालों तक ऐसे ही चलता है। यहाँ कई लोग बैठे होंगे जिनको इस प्रकार का अनुभव होता होगा..! लेकिन जब ये दोनों पीढ़ी इस प्रकार के अवसर पर आती हैं तब और ‘सीइंग इज़ बिलीविंग’, जब वो इन चीजों को निकट से देखते हैं तो उनका हौंसला बुलंद हो जाता है और पल भर में वो निर्णय करते हैं कि हाँ बेटे, तुम जो कहते थे वो ठीक है, मुझे भरोसा नहीं था लेकिन मैंने देखा तो मुझे लगता है कि हाँ यार, हम कर सकते हैं..! तो मित्रों, हमें हमारे इस लघु उद्योग क्षेत्र को टैक्नोलॉजी की दृष्टि से अपग्रेड करना है। हम चाहते हैं कि जगत में जो बदलाव आया है उस बदलाव को हम कैसे एडाप्ट करें, अपने मन को कैसे बदलें, उस टैक्नोलॉजी के लिए गवर्नमेंट किस प्रकार से सपोर्ट करे, किस प्रकार की व्यवस्थाओं को विकसित करने से हम अच्छी स्थिति में बदल सकते हैं।

भी-कभी कुछ प्रोडक्ट ऐसे होते हैं जो समाज के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। हेल्थ केयर सेक्टर का कोई प्रोडक्ट होगा, एज्यूकेशन सेक्टर का कोई प्रोडक्ट होगा, इवन सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए कोई छोटा सा मशीन बनाता होगा। एकाध व्यक्ति के लिए मुश्किल होता है, वो करता भी है कभी-कभी तो क्या करता है? अगर मान लीजिए साल में वो छह मशीन बनाता है, तो फिर वो आठ-दस ग्राहकों से ज्यादा जगह में पहुंचता नहीं है। उसको लगता है इस आठ-दस क्लाइंट को पकड़ लिया, कस्टमर को पकड़ लिया, काम हो गया। उसकी तो रोजी-रोटी चलती है, लेकिन उसकी वो टैक्नोलॉजी जो सर्वाधिक लोगों को काम आ सकती है वो हर साल आठ या दस जगह पर ही पहुंचती है। उसके पास इतनी बड़ी विरासत है, उसके पास एक एसेट है, उसने एक प्रोडक्ट किया है, अगर वो ऐसे स्थान पर आता है जहां वो प्रोडक्ट बाहर आती है दुनिया के सामने, तो सबको लगता है कि यार, इसका प्रोडक्शन बढ़ाने की जरूरत है, इसका जरा मार्केटिंग करने की जरूरत है। साल में आठ लोग क्यों, अस्सी जगह पर क्यों नहीं पहुंचनी चाहिए..? तो मित्रों, उसके कारण एक उपयोगिता का भी माहौल बनता है। हर किसी को लगता है कि हाँ, अगर ये व्यवस्था विकसित होती है तो ये इस नगरपालिका को काम आ सकती है, पंचायत को काम आ सकती है, सरकारी दफ्तर में काम आ सकती है, कॉर्पोरेट हाऊस में काम आ सकती है..! और इसलिए मित्रों, इस प्रकार के प्रयासों से हम समाजोपयोगी जो प्रोडक्टस हैं, जो व्यवस्थाओं में बदलाव लाने का एक आधार बनती है, उन प्रोडक्ट्स को शो-केस करना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि सब लोग इन चीजों को देखें। अब ये बात सही है कि एक छोटे से गाँव में बैठे उद्योगकार के लिए ये सब करना मुश्किल होता है क्योंकि बेचारा खुद ही जा करके लेथ पर बैठ कर के काम करता है, वो मार्केटिंग करने कहाँ जाएगा। उसके लिए वो संभव ही नहीं है, तो फिर हमें ही कोई ऐसा मैकेनिज्म डेवलप करना चाहिए। जैसे हमने कुछ उद्योगकार मित्रों को अभी सम्मानित किया। ये वो लोग हैं जिन्होंने छोटे-छोटे उद्योगों में रहते हुए भी कुछ ना कुछ नया इनोवेशन किया है, कुछ नया अचीव किया है, कुछ वर्क कल्चर में बदलाव लाए हैं, प्रोडक्टिविटी में बदलाव लाए हैं, क्वालिटी ऑफ प्रोडक्शन में बदलाव लाए हैं..! अब इन लोगों को जब ये सब लोग देखते हैं तो इनको लगता है कि अच्छा भाई, हमारे जिले में इस व्यक्ति ने ऐसा काम किया है..? तो देखेंगे, पूछेंगे कि बताओ तुमने क्या किया था। तो उसको भी लगेगा कि हाँ यार, मैं भी अपनी फैक्ट्री में कर सकता हूँ, मैं भी मेरे यहाँ लगा सकता हूँ..!

मित्रों, एक बात सही है कि हमें अधिकतम रोजगार देने की क्षमता इन लघु उद्योगकारों के हाथों में है, आप लोगों के हाथों में है। और हम उस प्रकार की अर्थ व्यवस्था चाहते हैं जिसमें अधिकतम लोगों को लाभ हो। मास प्रोडक्शन हो, वो इकोनॉमी के लिए जरूरी भी है, लेकिन साथ-साथ प्रोडक्शन बाय मासिस भी होना चाहिए। मास प्रोडक्शन हो, लेकिन एक लिमिटेड मशीन के द्वारा सारी दुनिया चल जाती है तो हम जॉब क्रियेट नहीं कर सकते। स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज के नेटवर्क के माध्यम से प्रोडक्शन बाय मासिस होता है। और जब प्रोडक्शन बाय मासिस होता है, तो लाखों हाथ लगते हैं, तो लाखों लोगों का पेट भी भरता है और इसलिए स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज अधिकतम लोगों को रोजगार देने का एक अवसर है। अब अधिकतम लोगों को रोजगार देने में भी कभी-कभी ये दिक्कत आती है कि फैक्ट्री में उत्पादन तो बढ़ रहा है, लेकिन कभी किसी नौजवान को रख लेते हैं तो छह महीने तो उसे सिखाने में चले जाते हैं। ये कोई कम इन्वेस्टमेंट नहीं होता है। और उसके बावजूद भी भरोसा नहीं रहता है कि भाई, इस लड़के को मैं लाया हूँ, छह महीने मैंने इसे सिखाया है, उसको काम में लगाया है, लेकिन पता नहीं मेरी गैरहाजिरी में वो जो चीज़ बनाएगा वो बाजार में चलेगी की नहीं चलेगी, उसके मन में टेंशन रहता है। लेकिन अगर उसको स्किल्ड मैन पावर मिले, हर प्रकार से आधुनिक विज्ञान और ज्ञान तथा टैक्नोलॉजी से परिचित नौजवान मिलेगा तो उसका हौंसला बुलंद हो जाता है। उसको लगता है कि मैं जिस पद्घति से काम करता था उसमें तो मेरे दो घंटे ज्यादा जाते थे, ये स्किल्ड लेबर मुझे मिला है, नौजवान ऐसा है, थोड़ा इस विषय को जानता है तो मित्रों, हमारी प्रोडक्शन कॉस्ट भी कम होगी, क्वालिटी इम्प्रूव होगी और उस फील्ड में सालों से काम करने वाला जो उद्योगपति है, जो बिजनस मैन है उसको भी भरोसा हो जाएगा कि यस, स्किल्ड मैनपावर के नेटवर्क के द्वारा, उनकी मदद के द्वारा मैं ऊंची क्वालिटी की चीजें बाजार में ले जा सकता हूँ। और इसलिए मित्रों, जितना समयानुकूल टैक्नोलॉजी अपग्रेडेशन आवश्यक है, जितना हमारी सोच में बदलाव आवश्यक है, उतना ही हमारे लिए स्किल डेवलपमेंट पर बल देना आवश्यक है। और स्किल्ड मैन पावर को तैयार करने के लिए हम टेलर मेड सॉल्यूशन नहीं निकाल सकते। हम लोगों को नीड बेस्ड स्किल डेवलपमेंट करना पड़ेगा। जहां जिस प्रकार की स्किल की आवश्यकता है, उस स्किल को हम प्रोवाइड कर सकते हैं क्या? हम हमारे कोर्सेस को भी उस कंपनी को या उस उद्योग को जिस प्रकार के मैन पावर की आवश्यकता है उस प्रकार के सिलेबस से हम तैयार कर सकते हैं क्या? गुजरात ने उस दिशा में एक प्रयास किया है।

स प्रकार के मिलन के माध्यम से हम ये भी आईडेन्टीफाई करना चाहते हैं कि अगर मान लीजिए गुजरात में लाखों छोटे उद्योग हैं और गुजरात के उद्योगों की बैकबोन स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज हैं। लोग कितना ही भ्रम क्यों ना फैलाएं, लेकिन सच्चाई जो यहाँ बैठी है वो है। लेकिन कुछ लोगों ने झूठ फैला के रखा है गुजरात के बारे में और लगातार झूठ फैलाने में उनको आनंद भी आता है। और जनता उनको जरा ठीक-ठाक भी करती रहती है। लेकिन उनकी आदत सुधरने की संभावना नहीं है, उन से कोई भरोसा नहीं कर सकते हम, क्योंकि उनके वेस्टेड इन्टरेस्ट है। मित्रों, हमें गुजरात के अंदर स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज के नेटवर्क को बल देना है, इतना ही नहीं, हम स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज को भी क्लस्टर के रूप में डेवलप करना चाहते हैं। अब देखिए, यहां साणंद से लेकर बहुचराजी तक पूरा ऑटोमोबाइल का एक क्लस्टर बना रहा है। अब ये ऑटोमोबाइल का क्लस्टर बन रहा है, तो कोई एक बड़ा कारखाना बनने से मोटर बनती नहीं है। एक मोटर तब बनती है जब पाँच सौ-सात सौ छोटे-छोटे उद्योगकार छोटे-छोटे स्पेयर पार्ट्स बना कर के उसको सप्लाई करते हैं, तब जा करके एक कार बनती है। किसी का इस पर ध्यान ही नहीं जाता है, उनको तो मारूति दिखती है या फोर्ड दिखती है या नैनो दिखती है। लेकिन ये फोर्ड हो, मारूति हो या नैनो हो, जब तक ये लोग काम नहीं करते तब तक बन नहीं पाती है। और उसके नेटवर्किंग के लिए आवश्यकता क्या होती है कि जहां पर जिस इन्डस्ट्री का क्लस्टर हो, वहीं पर सराउन्डिंग में अगर हम उस प्रकार के छोटे-छोटे उद्योगों का एक पूरा जाल बिछा दें और फिर मान लो कि ऑटो कम्पोनेंट बनाने वाले अगर लोग हैं, तो वहीं पर उस प्रकार की हमारी आई.टी.आई. जो होंगी, उन आई.टी.आई. के कोर्सेज भी वही होंगे जो वहीं के बच्चों को वहीं के उद्योगों में रोजगार दिला सकें, यानि एक इन्टीग्रेटिड अप्रोच होगा। अब मान लीजिए, वापी में कोई टैक्सटाइल इन्डस्ट्री है और पालनपुर में आई.टी.आई. में टैक्सटाइल का कोर्स चल रहा है। मुझे बताइए, क्या पालनपुर का लड़का वापी के अंदर टैक्सटाइल के कारखाने में नौकरी करने के लिए जाएगा..? अपने माँ-बाप को छोड़ कर जाएगा क्या..? वहाँ पर मकान किराए पर लेकर रहेगा क्या..? नहीं रहेगा..! लेकिन वापी में अगर टैक्सटाइल इन्डस्ट्री है और मैं वापी में ही टैक्सटाइल इन्डस्ट्री के लिए रिक्वायर्ड स्किल डेवलपमेंट के काम को करता हूँ, तो वहां के नौजवानों को रोजगार मिल जाता है, वहां की कंपनी को मैन पावर मिल जाता है और वहां से ज्यादातर लोगों का नौकरी छोड़ कर भाग जाने का कारण भी नहीं बनता है। वरना कभी-कभी क्या होता है, किसी उद्योगकार को चिंता यही रहती है और बड़ा ऑर्डर लेता नहीं है। ऑर्डर क्यों नहीं लेता है..? उसको लगता है कि यार बाकी तो सब ठीक है लेकिन ये नौकरी छोड़ कर चला जाएगा तो मैं आर्डर कैसे पूरा करूंगा, मेरे पास आदमी तो हैं नहीं..! यानि एक प्रकार से वो अपने साथ काम करने वाला जो व्यक्ति है उस पर डिपेन्डेट हो जाता है, लेकिन अगर ऐसा क्लस्टर है और क्लस्टर के अंदर उसी इलाके के नौजवानों को उसी काम के लिए अगर ट्रेन किया गया है तो यदि एक छोड़ कर जाएगा तो दूसरा मिल जाएगा, लेकिन उन उद्योगों को मैन पावर की कभी कमी नहीं पड़ेगी और मैन पावर का भी एक्सप्लॉइटेशन नहीं होगा।

मित्रों, गुजरात में औद्योगिक जगत से जुड़े हुए आप सब मित्रों का एक बात के लिए मैं अभिनंदन करता हूँ कि आज गुजरात में जो ज़ीरो मैन्डेस लॉस है, पीसफुल लेबर है, उसका मूल कारण यह है कि हमारे यहां औद्योगिक जीवन में एक परिवार भाव है। अपनी कंपनी में काम करने वाला लड़का भी परिवार का हिस्सा हो जाता है, एक अपनापन का भाव होता है और उसके कारण कभी मालिक और नौकर का हमारे यहां माहौल नहीं बनता है। हम जितनी मात्रा में ये मालिक और नौकर वाले हिस्से से बचे हैं, उतना हमारा औद्योगिक विकास हुआ है। और हिन्दुस्तान के बहुत से राज्य ऐसे हैं, हिन्दुस्तान के बहुत से छोटे उद्योगकार ऐसे हैं जिनको गुजरात की इस क्वालिटी का बहुत कम पता है। हमारे यहाँ आठ घंटे की नौकरी होगी तो भी वो मजदूर नौ घंटे तक काम क्यों करेगा..? उसको लगता है कि नहीं-नहीं, ये तो मेरी कंपनी की इज्जत का सवाल है, ये माल तो मुझे सात तारिख को देना है, मैं काम करके रहूँगा..! सेठ चाहे या ना चाहे, उद्योगकार की इच्छा हो या ना हो, लेकिन वो लेबर उसको रात तक भी काम करके उसको दे देता है। मित्रों, ये माहौल जो हमारे यहाँ बना है, इसका मतलब यह हुआ कि जिस प्रकार से प्रोडक्ट की वैल्यू हमने बढ़ाई है, उसी प्रकार से उस प्रोडक्ट के पीछे जिन हाथों से काम होता है, उन हाथों की इज्जत हम जितनी बढ़ाते हैं, उतनी ही हमारे व्यवसाय में गारंटी बढ़ती है, क्वालिटी में गारंटी बढ़ती है और हमारे परिणाम में बढोतरी हो जाती है। और इसलिए मित्रों, हमें जितनी छोटे उद्योगों की केयर करनी है, उतनी ही हमारे साथ काम करने वाले हमारे लेबरर्स की चिंता करनी है। हम कभी उनका एक्सप्लॉइटेशन नहीं करेंगे, ये जिन-जिन लोगों ने ठानी और मैंने देखा है कि अगर उसको पाँच रूपये का काम मिलता है तो वो आपको पच्चीस रूपये का काम करके देता है। कभी कोई घाटे में नहीं जाता है। अपने साथियों को संभालने के कारण घाटे में गई हो, ऐसी कोई कंपनी नहीं होगी। लेकिन जो अपनी ही टीम के लोगों के साथ इस प्रकार का काम नहीं करते हैं, तो वो घाटे में जाती है।

सी प्रकार से मित्रों, सरकार भी नहीं चाहती है कि फैक्ट्रियों में जा करके नई-नई परेशानियाँ पैदा करे। पहले तो ऐसे-ऐसे कानून हुआ करते थे, जैसे एक बॉयलर इन्सपेक्शन का रहता था। अब जिन कंपनियों को बॉयलर की जरूरत होती थी वो सरकार को लिखते थे कि फलानी तारिख को हमारा इन्सपेक्शन हो जाना जरूरी है, वरना मुझे अपना बॉयलर ऑपरेशन बंद करना पड़ेगा। अब वो बॉयलर इन्सपेक्शन करने वाला जो होता है, उसके पास लोड बहुत होता है और वो डेट देता नहीं है। उसको टेंशन रहता है और क्या-क्या परेशानियाँ होती है वो सब जानते हैं..! मैंने एक छोटा कानून बना दिया। मैंने कहा भाई, जो फैक्ट्री चलाता है, वो मरना चाहता है क्या? वो अपना बॉयलर फट जाए ऐसी इच्छा करता है क्या? उसको अपने बॉयलर की चिंता नहीं होती होगी क्या? तो हमने कहा कि आप ऐसा काम करो कि उसके ऊपर जिम्मेदारी डालो और उस कंपनी को बोलो कि वो आउट सोर्स करके, जो भी इसके लाइसेंसी लोग हैं, उनसे बॉयलर इन्सपेक्शन करवा लें और कागज सरकार को भेज दें। मित्रों, इतना सरल हो गया..! अच्छा, उसके उपर जिम्मेवारी आ गई और उसके ऊपर जिम्मेवारी आ जाने के कारण वो सरकार जितना करे उससे ज्यादा करने लगा। उसको लगा कि हाँ यार, मेरा बॉलयर अगर कुछ खराब हो गया तो मेरी फैक्ट्री में आग लग जाएगी और मेरे पचास लोग मर जाएंगे। जिम्मेवारी खुद उसके उपर आ गई। मित्रों, ऐसे बहुत से छोटे-मोटे कानूनी बदलाव है। अगर आप में से उस प्रकार के सुझाव आएंगे, जिसके कारण सिम्पलीफिकेशन हो, सरकार आ कर के कम से कम परेशानियाँ पैदा करे... और मित्रों, ये जो मैं बोल रहा हूँ ना, ये मुझे करना है और मैं लगातार करता आया हूँ, काफी कुछ मैंने कर भी लिया है। लेकिन फिर भी कहीं कुछ कोने में रह गया हो तो मुझे उसको ठीक करना है और उसमें मुझे आप लोगों की मदद चाहिए। ये सरकार ऐसी नहीं है कि सब आपके भरोसे छोड़ दे और आप को कह दे कि भाई, जो होगा वो होगा, तुम जानो, तुम्हारा काम जाने, मरो-जीओ तुम्हारी मरजी... नहीं, ये हमारा काम है कि आप प्रगति करो, ये हमारा काम है कि आपकी कठिनाइयाँ दूर हों, ये हमारा काम है कि हम सब मिल कर के आगे बढ़ें..! मित्रों, आज गुजरात में इन्डस्ट्री ग्रो कर रही है उसका कारण यही है कि हमने एक ऐसा इन्वायरमेंट क्रियेट किया है और उस इन्वायरमेंट का लाभ हर किसी को मिले उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

मित्रों, अभी मैं कुछ दिन पहले सूरत में ‘स्पार्कल’ कार्यक्रम में गया था, जेम्स एंड ज्वेलरी का कार्यक्रम था। वहां पर भारत सरकार के भी लघु उद्योग विभाग को देखने वाले एक अधिकारी आए थे। उन्होंने जो भाषण किया वहां, वो जानकारी मेरे लिए भी बहुत आनंद की थी। वही जानकारी मुझे मेरे सरकार के अधिकारियों ने दी होती तो मैं उनको दस सवाल पूछता। मैं उनको कहता कि नहीं यार, ये बात मेरे गले नहीं उतर रही है, ये कैसे हो सकता है..? मेरे मन में सवाल उठते। लेकिन क्योंकि भारत सरकार के अधिकारी ने कहा है तो मुझे मालूम था कि वो सात जगह पर पूछ कर के आया होगा और बिना वेरीफाई किये कुछ नहीं कहेगा। और मित्रों, उन्होंने जो जानकारी दी, वो जानकारी सचमुच में हम सभी लघु उद्योग से जुड़े मित्रों के लिए एक बहुत ही आनंद और प्रोत्साहन का विषय है। उन्होंने कहा कि पूरे हिन्दुस्तान में स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज़ का जो ग्रोथ है, वो 19% है और गुजरात ऐसा राज्य है जिसकी स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज़ का ग्रोथ 85% है। आप विचार किजीए मित्रों, इसका मतलब कि भारत सरकार का एक जो रिपोर्ट आया है, वो रिपोर्ट ये कहता है कि गुजरात एक ऐसा राज्य है जहां मिनीमम बेरोजगार लोग हैं। बेकारों की संख्या पूरे हिन्दुस्तान में कम से कम कहीं है, तो गुजरात में है। मैं पॉलिटिकली जो बेकार हो गए हैं उनकी बात नहीं कर रहा हूँ, वो तो बेचारे पंद्रह साल से बेरोजगार हैं। मिनीमम बेरोजगार कहीं किसी राज्य में है तो वो गुजरात में हैं। भारत सरकार का दूसरा एक रिपोर्ट कहता है कि पूरे हिन्दुस्तान में पिछले पांच सात साल में जो रोजगार दिए गए हैं, उसमें 72% रोजगार अकेले गुजरात ने दिए हैं। अब इन तीनों चीजों को मिला कर देखें कि देश का ग्रोथ 19% और हमारा 85%, दूसरा रिपोर्ट कहता है कि मिनीमम बेरोजगार लोग, तीसरा रिपोर्ट कहता है कि 72% एम्लायमेंट हम देते हैं, ये तीनों को जोड़ के जब हम देखते हैं तो साफ नजर आता है कि हमारे स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज के ग्रोथ ने देश के नौजवानों की कितनी बड़ी सेवा की है। रोजगार देने के लिए एक क्षेत्र कितना बड़ा उपकारक हुआ है, कितना बड़ा लाभ हुआ है। और ये तीनो चीजें, सारे फिगर भारत सरकार के हैं।

मित्रों, इससे स्पष्ट होता है कि हमारा ये जो स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज पर बल देने का प्रयास है उसमें हम कुछ और कदम आगे बढ़ना चाहते हैं, भाईयों। और आप सब लोग शायद नहीं कर पाओगे, लेकिन मित्रों, निर्णय तो करना ही पड़ेगा..! एक है, सारी दुनिया से आया माल अब डंप हो रहा है, उसके सामने हमें टिकना है। मैं 1999-2000 की बात करता हूँ, तब तो मैं मुख्यमंत्री नहीं था लेकिन मुझे याद है, 12-15 साल पहले की बात है। मैंने उनसे कहा था कि भाई, आपकी चिंता तो सही है लेकिन इसका तो उपाय यही है कि हम चीन से अच्छे जूतें दें और चीन से सस्ते जूतें दें। अगर हम इन बातों पर बल देंगे तो कोई हमारा मुकाबला नहीं कर सकता। और हमने जब कहा कि अच्छे जूतें दें तो उसका मतलब जूतें टिकाऊ होने चाहिए, सिर्फ दिखने में अच्छे नहीं। और मैंने कहा, मेरा विश्वास है कि अगर आप टिकाऊ चीजों पर बल दोगे तो हिन्दुस्तान के ग्राहक का जो मानस है वो टिकाऊ चीजें पंसद करता है और फिर दुनिया की कोई ताकत ऐसी नहीं है कि वो उसका माल यहाँ बेच जाए। मित्रों, ये छोटा सा एक सिद्धांत है, क्या हम जिन चीज़ों का प्रोडक्शन करते हैं उसको दुनिया से जो माल हिन्दुस्तान की तरफ आ रहा है उसके सामने टिकने के लिए क्या वो टिकाउ है या नहीं, इस पर हमें गंभीरता से सोचना पड़ेगा और तभी हम इस ग्लोबल मार्केट में और इस कन्जूमरिज़म के जमाने में हम टिक पाते हैं, अदर्वाइज़ हम टिक नहीं पा सकते, मित्रों। कभी तो हमें कम मुनाफा ले कर भी टिकाउ चीज़ों पर बल देना ही पड़ेगा, ऐट द सैम टाइम, मार्केट का एक दूसरा नेचर बना है, आपने कई लोग देखे होंगे, 20 साल की उम्र में जिस प्रकार का जूता पहेनते थे, वो 75 साल के हो गए तो भी वो बदलते नहीं है। वे वो ही मोची को खोजेंगे, उसी से बनावाएंगे, ऐसा रहता था। लेकिन आज की पीढ़ी में..? आज की पीढ़ी का स्वभाव बदला है। उसको लगातार नई डिजाइन चाहिए, नया कलर चाहिए... इसका मतलब हुआ कि हमारे यहाँ लगातार रिसर्च होना चाहिए। भले ही हम स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज वाले क्यों ना हो, अगर हम मार्केट में नई चीज नहीं देंगे, तब तक हम ये दुनिया से जो मार्केट का हमला हो रहा है उसके सामने टिक नहीं सकते हैं और इसलिए हमें लगातार डिजाइनिंग हो, क्वालिटी रिसर्च हो, काम्पोनेंट रिसर्च हो, इन सारे विषयों पर बल देना पड़ेगा, क्योंकि हमें टिकना है। वरना बताइए मित्रों, जो लोग होली में पिचकारी बना कर बेचते थे, वो बेचारा साल भर पिचकारी बनाता था और होली के समय माल बेचता था और रोजी-रोटी कमाता था। उसने सब बना कर रखा है और मानो चाइना से पिचकारी आकर डम्प हो गई तो उसकी बेचारे की पिचकारी कौन खरीदेगा..! उसे चिंता रहती है। लेकिन अगर हमारी चीजें टिकाऊ हैं मित्रों, तो मैं मानता हूँ कि हम किसी भी हमले को पार कर सकते हैं।

दूसरी बात है मित्रों, कि हमें डिफेंसिव ही रहना है क्या..? कैसे भी करके अपनी रोजी-रोटी कमा लो, अपने धंधे को बचा लो यार, चला लो। बच्चे बड़े होंगे तो वे देख लेंगे, हम तो हमारा गुजरा कर लें..! ये ज्यादातर हमें सुनने को मिलता है। मैं मानता हूँ कि हमें मनोवैज्ञानिक रूप से एक बहुत बड़े परिवर्तन की आवश्यकता है। हमारे उद्योग जगत के मित्रों को डिफेंसिव नहीं होना चाहिए। क्यों ना हम ये सपना देखें कि मैं जो प्रोडक्ट बना रहा हूँ, मैं दुनिया के बाजार में जाकर के, सीना तान करके बेच कर आऊंगा। हम ही क्यों ना एग्रेसिव हो..? हम पूरे विश्व के बाजार पर कब्ज़ा करने की कोशिश क्यों ना करें..? मित्रों, इस समिट के माध्यम से हम जिस तरह दुनिया की टैक्नोलॉजी लाने के लिए उत्सुक हैं, वैसे दुनिया से बाजार खोजने में भी उत्सुक हैं। विश्व में हम अपना माल कहाँ-कहाँ बेच सकते हैं कहाँ-कहाँ पहुंचा सकते हैं, कहाँ-कहाँ मार्केट की संभावना है, वहाँ की इकॉनोमी के अनुकूल हमारी प्रोडक्ट हम कैसे पहुंचा सकते हैं... अगर इन चीजों पर हमने बल दिया तो मित्रों, हमें कभी भी किस देश का कौन सा माल यहाँ आकर टपक पड़ने वाला है, किसके यहाँ से कितना डंप होने वाला है, ऐसी कोई बात हमारी चिंता का कारण नहीं बनेगी। हम यदि एग्रेसिव होते हैं, ऑफेन्सिव होते हैं, हम विश्व के बाजार पर कब्जा करने के लिए सोचते हैं... और मैं मानता हूँ मित्रों, गुजरात के लोग साहसिक हैं, ये कर सकते हैं। गुजरात के व्यापारियों में दम है, अगर उन्हें कहा जाए कि तुम गंजे को कंघा बेच कर आ जाओ तो वो बेच कर आ जाएगा। उसके अंदर वो एन्टरप्रोन्योशिप है, वो कर सकता है। अगर उसको कहा जाए कि तुम हिमालय के अंदर फ्रिज बेच के आ जाओ तो साहब, वो बेच के आ जाएगा। वो समझा देगा कि ग्लोबल वार्मिंग क्या है, हिमालय अब गर्म होने वाला है, तुम्हे फ्रिज की ऐसे जरूरत पड़ेगी..! मित्रों, जिसके अंदर ये एन्टरप्रन्योरशिप की क्वालिटी है, उसके मन में ये विचार क्यों नहीं आता है कि मैं दुनिया के बाजार पर कब्ज़ा करुँ..!

मित्रों, बदलते हुए युग में हमारी छोटी-मोटी इन्डस्ट्रीज को भी एकाध नौजवान को तो अपने यहां इन्फोर्मेशन टैक्नोलॉजी से जुड़ा रखना ही पड़ेगा। आज ऑनलाइन बिज़नेस इतनी बड़ी मात्रा में होता है, विश्व की रिक्वायरमेंट का पता चलता है। आप किसी को भले ही दो घंटे के लिए टेम्परेरी हायर करो। कुछ ऐसे आई.टी. के बच्चे भी हो सकते हैं कि दिन में छह कंपनीओं में दो-दो घंटे सेवा दे सकते हैं, जैसे एकाउन्टेंट होते थे पहले। आपके यहां एकाउन्टेंट कोई परमानेंट थोड़े ही रखते थे, हफ्ते में दो घंटे आता था और अपना अकाउंट का काम करके चला जाता था। तो इसी प्रकार से हमें एक नई विधा डेवलप करनी होगी। ये जो आई.टी. के क्षेत्र में जिन बच्चों एक्सपर्टीज़ हैं, ऐसे बच्चों की हफ्ते में दो-तीन घंटे सेवा लेना, उनको कहना कि भाई, दुनिया में देखो क्या-क्या हो रहा है, नई टैक्नोलॉजी क्या है, नई व्यापार की संभावनाएं क्या है, देखो और कॉरस्पोन्डैंस करो, अपना माल हम बेच सकते हैं क्या..? मित्रों, थोड़ा अगर आप सोचोगे तो आज जगत इतना छोटा हो गया है कि हम अपना मार्केट खोज सकते हैं और अगर प्रोडक्ट में दम है तो मित्रों, हम अपनी बात दुनिया में पहुंचा भी सकते हैं और माल भी पहुंचा सकते हैं और मुझे लगता है कि हमारे गुजरात के उद्योगकारों को उस दिशा में विचार करना चाहिए।

क और बात है, मित्रों। मैंने देखा है कि कई हमारे उद्योगकार जिन्होंने अपनी चीजों को विशेष रूप से बनाया है, लेकिन अब पुराने जमाने का हमारा स्वाभाव है और उसके कारण हम हमारे प्रोडक्ट का पेटेंट नहीं करवाते हैं। कोई छोटा भी कोई उद्योगकार क्यों ना हो, हमें पेटेंट करवाना चाहिए। मित्रों, इस बार मैं अब से एक काम करने वाला हूँ। सरकार के अंदर जो इन्डेक्स-बी जैसे जो हमारे डिपार्टमेंट हैं, अब के बाद हम डेडिकेटिड टू द स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज, एक पूरा यूनिट सरकार के उद्योग विभाग में खोलने वाले हैं। पूरी एक सरकारी व्यवस्था डेडिकेटिड टू द स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज़ होगी। वो लघु उद्योगो के लिए, छोटे उद्योगों के लिए, कॉटेज इन्डस्ट्रीज के लिए होगा और उनको इस प्रकार की कानूनी मदद कैसे मिले जैसे कि पेटेंट कैसे करवाना, पेटेंट कैसे रजिस्टर होगा, उसकी कंपनी का नाम होगा, ब्रांड होगा, प्रेासेस होगा, प्रोडक्ट होगा... इन सारी बातों में सरकार आपकी मदद करना चाहती है। आने वाले दिनों में उस इकाई को भी हम खड़ा करेंगे जिसके कारण छोटे-छोटे लोगों को भी मदद मिलेगी। वरना क्या होता है, आप एक चीज बना लीजिए, दूसरा उसको खोल कर के, सोचेगा कि हाँ यार, ये तो मैं भी कर सकता हूँ, तो वो भी अपने यहां शुरू कर देगा..! और उसके कारण जिसने मेहनत की हो उसको तो बेचारे को मुसीबत हो जाती है। तो हम चाहते हैं कि आपकी सिक्योरिटी के लिए भी व्यवस्था हो और हमारी सरकार की तरफ से हम आपकी मदद करना चाहते हैं ताकि आपके पास जो नॉलेज है, इनोवेशन है, उसका पेटेंट आपके पास रहे, वो आपकी अथॉरिटी बनी रहे, उस दिशा में हम काम कर रहे हैं।

र एक बात है मित्रों, हम सब लोग छुट-पुट अपनी चीजों के लिए दुनिया में अपनी जगह जल्दी बना नहीं सकते। हब सबको मालूम है कि आज से पाँच-दस साल पहले बाजार में हम पैन भी खरीदने जाते थे और अगर उस पर ‘मेड इन जापान’ लिखा है तो हम कभी पूछते नहीं थे कि जापान की किस कंपनी ने इस पेन को बनाया है, कभी नहीं पूछते थे..! उस पेन पर कंपनी का नाम भी नहीं लिखा होता था, लेकिन सिर्फ ‘मेड इन जापान’ लिखा है तो हम खरीद लेते थे, अपनी जेब में रखते थे और अपने दस दोस्तों को महीने भर बताते थे कि देखिए, ‘मेड इन जापान’ है..! ये था एक जमाना..! इसका मतलब ये हुआ कि उन्होंने अपना एक ब्रांड बना लिया, फिर सब कंपनियों का माल ‘मेड इन जापान’ लिख दिया तो बाजार में चल जाता था। मित्रों, हमारे लिए भी आवश्यक है कि हम हर कंपनी का ब्रांड बनाने जाएंगे तो शायद हमारी इतनी पहुंच भी नहीं होगी और इतनी ताकत भी नहीं होगी, लेकिन अगर हम ‘मेड इन गुजरात, इंडिया’ ये अगर माहौल बना दें..! मित्रों, ये बहुत आवश्यक है और इसलिए मेरा आग्रह है कि हम आज मिले हैं उस पर चर्चा करें, आपके छोटे-छोटे एसोसिएशन में भी इस पर चर्चा हो, लेकिन कभी ना कभी इस दिशा में सोचना होगा। लेकिन ये तब होगा, केवल उस पर लिख दिया ‘मेड इन गुजरात, इंडिया’ उससे काम नहीं होता है। हमें हमारी प्रोडक्ट की क्वालिटी के विषय में कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं रहने देने के नॉर्म्स बनाने पड़ेंगे। जीरो डिफैक्ट, हम जो भी मैन्यूफक्चर करते हैं, जो भी प्रोडक्ट करते हैं, उसमें अगर जीरो डिफैक्ट होगा तब जाकर दुनिया में हम खड़े हो सकते हैं, हम जो प्रोडक्ट करते हैं वो कॉस्ट इफैक्टिव है तो दुनिया में जाकर हम खड़े हो सकते हैं, हम जो प्रोडक्ट करते हैं वो टिकाऊ है तो हम दुनिया में जा करके खड़े रह सकते हैं और इसलिए भाईयों-बहनों, हमें उस दिशा में काम करना होगा।

र एक मार्केटेबल चीज आज बाजार में है। आप अगर अपने प्रोडक्ट के साथ ये कहो कि ये एन्वायरमेंट फ्रेन्डली टैक्नोलॉजी से बनी है तो दुनिया का एक बहुत बड़ा वर्ग है जो उसको खरीदता है। आज भी जैसे खान-पान में एक बहुत बड़ा वर्ग तैयार हुआ है, उसको अगर ये कहो कि लीजिए खाइए, तो वो कहेगा कि नहीं-नहीं, अभी मैं खाना खा कर आया हूँ, अभी मेरा मन नहीं करता है। लेकिन उसको अगर आप धीरे से ये कहो कि नहीं-नहीं खाइए ना, ये आर्गेनिक है, तो वो तुरंत कहेगा, अच्छा आर्गेनिक है, लाइए-लाइए..! अब चीजें चल पड़ती हैं भइया, अब उसके पास कोई लेबोरेटरी तो है नहीं कि टेस्ट करेगा कि आर्गेनिक है कि नहीं है, लेकिन वो खाएगा कि आर्गेनिक है..! मित्रों, हमें झूठ नहीं करना है, सही करना है। एन्वायरमेंट फ्रेन्डली टैक्नोलॉजी, ये भी प्रोडक्ट के साथ-साथ बिकने वाली चीज बनने वाली है। दुनिया में हर चीज को देखिए, अच्छा ये एन्वायर फ्रेन्डली टैक्नोलॉजी है तो ठीक है..! और इसलिए मित्रों, दुनिया के मार्केट की जो सोच बदल रही है, कंज्यूमर की जो सोच बदल रही है, उन चीजों को भी हमारी स्मॉल स्केल इन्डस्ट्रीज ग्लोबल विजन के साथ तैयार करे ये मेरा सपना है। वो यहां धौलका-धंधुका में माल बेचे इसके लिए हम इतनी मेहनत नहीं कर रहे हैं, मित्रों। दुनिया के बाजार में छाती पर पैर रख के मेरे गुजरात का व्यापारी माल बेचे इसके लिए हम ये कोशिश कर रहे हैं। विश्व के बाजार में हमें अपना कदम रखना है इसके लिए हमारी कोशिश है। हिन्दुस्तान में तो है, हिन्दुस्तान में तो आपका माल बिकना ही बिकना है, आपकी अपनी एक प्रतिष्ठा है, लेकिन उस दिशा में हम प्रयास करें।

मित्रों, मैं चाहता हूँ कि पूरा दिन इस विषय पर चर्चा होने वाली है, बहुत ही एक्सपर्ट लोगों से हमें मदद मिलने वाली है और इस विधा को हम लगातार आगे बढ़ाना चाहते हैं और मेरा मकसद है मित्रों, नई टैक्नोलॉजी कैसे आए, नए इनोवेशंस कैसे हों, अधिकतम नौजवानों को रोजगार कैसे मिले, इसके लिए अनुकूल स्कूल डेवलपमेंट कैसे हो और हम विश्व के बाजार को अपना माल पहुंचाने के लिए किस प्रकार से एग्रेसिव, प्रो-एक्टिव हो कर के काम करें, हम डिफेंसिव ना हों, उस दिशा में आगे बढ़ें। मेरी आप सब को बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं, धन्यवाद..!

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డామన్‌లో వివిధ అభివృద్ధి పనులకు శంకుస్థాపన...జాతికి అంకితం చేసిన సందర్భంగా ప్రధానమంత్రి ప్రసంగం
June 05, 2026
The launch of projects across healthcare, aviation, tourism and infrastructure marks a new development push for Daman that will transform lives across the UT: PM
The data released today reflects the strength of India's economy, with growth of 7.7% in FY 2025–26 and 7.8% in the quarter ending March 31: PM
Even amid severe global challenges, the collective efforts of 1.4 billion Indians have ensured that India is not only sustaining itself but also staying ahead of the curve: PM
The National Family Health Survey clearly reflects the government's focus on healthcare. While most deliveries in India earlier took place outside hospitals, today over 90% of all deliveries occur in hospitals: PM
Thanks to Mission Indradhanush, child immunization coverage in India has risen from 60% before 2014 to nearly 90% today: PM

భారత్ మాతా కీ జై! 

భారత్ మాతా కీ జై!

దాద్రా, నగర్ హవేలీ, డామన్, డయ్యూ అడ్మినిస్ట్రేటర్ ప్రఫుల్ భాయ్ పటేల్, పార్లమెంటులో నా సహచరులు కళాబెన్ డెల్కర్, డామన్ మున్సిపల్ కౌన్సిల్ ప్రెసిడెంట్ దీపికా తాండేల్ , డామన్ జిల్లా పంచాయతీ చైర్మన్ ధర్మ్ బాబు పటేల్, సిల్వస్సా మున్సిపల్ కౌన్సిల్ చైర్మన్ సోమనాథ్ దేవ్ రే , దాద్రా, నగర్ హవేలీ జిల్లా పంచాయతీ చైర్‌పర్సన్ నిషా భవ్‌సార్, డయ్యూ  మున్సిపల్ కౌన్సిల్ చైర్మన్ హరీష్ కపాడియా , డయ్యూ జిల్లా పంచాయతీ చైర్‌పర్సన్ కోటియా రంజితాబెన్, పెద్ద సంఖ్యలో తరలివచ్చిన నా ప్రియమైన సోదరీ సోదరులారా,

మీరంతా ఇక్కడకు ఎలాగైతే వచ్చారో అలాగే లక్షద్వీప్‌లో కూడా పెద్ద సంఖ్యలో ప్రజలు వీడియో కాన్ఫరెన్స్ ద్వారా మనతో అనుసంధానమయ్యారు. ఈరోజు లక్షద్వీప్‌లో అభివృద్ధికి ఒక కొత్త ఆరంభం జరిగింది. లక్షద్వీప్ ప్రజల జీవితాల్లో విప్లవాత్మక మార్పులు తీసుకువచ్చే ఒక కొత్త ప్రాజెక్టును ఈరోజు ప్రారంభించడంతో పాటు కొన్ని పథకాలకు శంకుస్థాపనలు కూడా చేశాం. 

 

మిత్రులారా, 

కొన్నేళ్ల క్రితం నేను మీ మధ్యకు  వచ్చినప్పుడు, మన డామన్ వేగంతో మినీ ఇండియాగా మారుతోందని చెప్పాను. ఈరోజు చూస్తుంటే, ఎడమ వైపు మొత్తం బెంగాల్,  కుడి వైపున మొత్తం అస్సాం కనిపిస్తోంది. డామన్ నిజంగానే మినీ ఇండియాకు  సజీవ ఉదాహరణగా మారింది. ఇక్కడి వైవిధ్యం, వివిధ ప్రాంతాల నుంచి వచ్చి ఇక్కడ కలసి నివసిస్తున్న మీరంతా మొత్తం భారత్ అందమైన రూపాన్ని ఆవిష్కరిస్తున్నారు. మాకు ఆశీస్సులు అందించడానికి ఇంత పెద్ద సంఖ్యలో ఇక్కడికి తరలివచ్చినందుకు మీ అందరికీ నా హృదయపూర్వక ధన్యవాదాలు.

సోదరీ,సోదరులారా,

డామన్, డయ్యూకు అనేకసార్లు వచ్చే అవకాశం నాకు లభించింది.  దాద్రా, నగర్ హవేలీలను కూడా నేను సందర్షిస్తూనే ఉంటాను. నేను ముఖ్యమంత్రిగా లేదా ప్రధాన మంత్రిగా లేని రోజుల్లో కూడా ఇక్కడికి ఎన్నోసార్లు వచ్చేవాడిని. కానీ ఇప్పుడు నేను ఇక్కడికి వచ్చి ఇక్కడి సుపరిపాలనను, పాలనా నమూనాను చూస్తుంటే చాలా సంతోషంగా అనిపిస్తోంది. ప్రతిసారీ నేను గతంతో పోల్చి చూసుకున్నప్పుడు ఈ ప్రాంతం అభివృద్ధి పథంలో ఎన్నో మైళ్ల దూరం ముందుకు సాగిందని నాకు అనిపిస్తుంది.

మిత్రులారా, 

దశాబ్దాలుగా దాద్రా, నగర్ హవేలీ, డామన్,  డయ్యూ ప్రజలు అభివృద్ధి గురించి కలలు కన్నారు. ఆ కలలు కన్న పూర్వ తరాల వారు వెళ్లిపోయారు. కానీ, తమ తల్లిదండ్రులు, తాతముత్తాతలు కన్న కలలు ఈరోజు తమ కళ్ల ముందే సాకారం కావడం ప్రస్తుత తరం వారు స్వయంగా చూస్తున్నారు. ఈరోజు కూడా ఇక్కడ అనుసంధానం, ఆరోగ్యం, విద్య, పర్యాటకం, పట్టణ మౌలిక సదుపాయాలకు సంబంధించిన అనేక ప్రాజెక్టులను ప్రారంభించడంతో పాటు, కొన్నింటికి శంకుస్థాపనలు కూడా చేశాం. ఈ అభివృద్ధి పనులు డామన్ ప్రజలకే కాకుండా ఈ కేంద్రపాలిత ప్రాంతం మొత్తానికి జీవనాన్ని మరింత సులభతరం చేస్తాయి. యువతకు సరికొత్త అవకాశాలను సృష్టిస్తాయి. ఈ పనుల వెనుక ప్రఫుల్ భాయ్ పటేల్  దూరదృష్టి, ఆయన, ఆయన బృందం పడిన కష్టం స్పష్టంగా కనిపిస్తోంది. ఇందుకు గాను నేను ప్రఫుల్ భాయ్‌ని, ఆయన బృందాన్ని కూడా అభినందిస్తున్నాను. లక్షద్వీప్, దాద్రా, నగర్ హవేలీ ప్రజలకు ఈ సందర్భంగా నా హృదయపూర్వక అభినందనలు, శుభాకాంక్షలు.

 

మిత్రులారా, 

నేను ఈరోజు మీ మధ్యకు వచ్చిన తరుణంలో, ఒక సంతోషకరమైన వార్త అందింది. నేను ఈ ఉదయం ఢిల్లీ నుంచి బయలుదేరినప్పటికీ, ఇప్పుడే అందిన గణాంకాలు, అందిన వార్త నిజంగా ఎంతో సంతోషాన్ని కలిగిస్తున్నాయి. ఈ ఆనందాన్ని నేను మీతో కూడా పంచుకోవాలని అనుకుంటున్నాను. ఈరోజు వచ్చిన గణాంకాలు భారత ఆర్థిక వ్యవస్థ పునాది ఎంత బలంగా ఉందో స్పష్టంగా తెలియజేస్తున్నాయి. ఇప్పుడే ముగిసిన 2025-26 ఆర్థిక సంవత్సరంలో భారత్ 7.7 శాతం వృద్ధి రేటును సాధించింది. మార్చి 31తో ముగిసిన చివరి త్రైమాసికంలో  కూడా భారత వృద్ధి రేటు 7.8 శాతంగా నమోదైంది. ప్రపంచంలోనే అత్యంత వేగంగా వృద్ధి చెందుతున్న పెద్ద ఆర్థిక వ్యవస్థ మనదే. ఇది ప్రతి భారతీయుడు గర్వించదగ్గ విషయం. ఇదే మన దేశ ప్రగతి వేగం. ఈరోజు దేశం సంస్కరణల  ఎక్స్ప్రెస్ లా  దూసుకుపోతోంది. ఇంతటి భారీ మౌలిక సదుపాయాల అభివృద్ధిని దేశం నేడు కళ్లారా చూస్తోంది. పేదల సంక్షేమం కోసం ఇంత పెద్ద ఎత్తున పనులు జరుగుతున్నాయి. ఈ అన్ని ప్రయత్నాల ఫలితంగానే, ఈరోజు మన దేశం ప్రపంచంలోనే అత్యంత వేగంగా వృద్ధి చెందుతున్న పెద్ద ఆర్థిక వ్యవస్థగా ముందుకు సాగుతోంది. ప్రపంచమంతా సంక్షోభాల్లో కొట్టుమిట్టాడుతోందని, ప్రపంచ దేశాల ఆర్థిక వ్యవస్థలన్నీ ప్రశ్నార్థకంలో మునిగిపోయాయని మనందరికీ తెలుసు. అయితే, అంతర్జాతీయంగా ఇంతటి గడ్డు కాలం నడుస్తున్నప్పటికీ, 140 కోట్ల మంది దేశప్రజల సామూహిక ప్రయత్నాలతో భారత్ తనను తాను నిలబెట్టుకోవడమే కాకుండా, అందరికంటే ముందుండటంలోనూ విజయం సాధిస్తోంది. ఆర్థిక రంగంలో ఈ సరికొత్త శిఖరాన్ని అధిరోహించినందుకు దేశప్రజలందరికీ నేను ఎన్నో అభినందనలు తెలియజేస్తున్నాను. ప్రపంచవ్యాప్తంగా నెలకొన్న ఈ సంక్షోభాలను ఎదుర్కొంటూనే, మన దేశం దృఢ సంకల్పంతో, సంస్కరణ, పనితీరు, మార్పు పథంలో అత్యంత వేగంగా ముందుకు సాగుతుందని నేను దేశానికి మరోసారి హామీ ఇస్తున్నా. ఇది దేశప్రజలకు నా హామీ.

మిత్రులారా, 

ఈరోజు మనకు అభివృద్ధి ఎంత ముఖ్యమో, మన అభివృద్ధి నమూనా సుస్థిరంగా ఉండేలా చూసుకోవడం కూడా అంతే ముఖ్యం. ఈరోజు ప్రపంచ పర్యావరణ దినోత్సవం రోజున మన కేంద్రపాలిత ప్రాంతం ఈ సంకల్పాన్ని నిజం చేస్తోంది. ఈరోజు ఒకవైపు వేల కోట్ల రూపాయల విలువైన అభివృద్ధి ప్రాజెక్టులకు ఇక్కడ శంకుస్థాపనలు, ప్రారంభోత్సవాలు జరిగాయి. అదే సమయంలో, అమ్మ పేరిట ఒక మొక్క (ఏక్ పేడ్ మా కే నామ్) కార్యక్రమం కింద ఇక్కడ దాదాపు లక్షా ఒక్క చెట్లను, లక్ష మొక్కలను నాటడం జరుగుతోంది. ఇది ప్రభుత్వ భవనాలలో 100 శాతం సౌరశక్తిని వినియోగించే అద్భుతమైన ఘనతను సాధించిన కేంద్రపాలిత ప్రాంతమని చెప్పడానికి నేను ఎంతో గర్విస్తున్నాను. ఈరోజు డయ్యూలో పగటిపూట విద్యుత్ అవసరాలన్నీ కేవలం సౌరశక్తి ద్వారానే తీరుతున్నాయి, ఈ ప్రక్రియను మనం మరింత ముందుకు తీసుకెళ్లాల్సి ఉంది. ఇళ్లలో కూడా సౌరశక్తి ద్వారానే విద్యుత్ అందుబాటులోకి రావాలి. అంతేకాదు, మిగిలిన అదనపు విద్యుత్ ద్వారా కుటుంబాలు ఆదాయాన్ని కూడా గడించాలి. ఇందుకోసం రూఫ్‌టాప్ సోలార్ ప్లాంట్ల ఏర్పాటుకు శ్రీకారం చుట్టాం. ఈ విజయాలను సాధించినందుకు మీ అందరికీ అభినందనలు. 

 

మిత్రులారా, 

దీనితో పాటు, ప్రస్తుతం డామన్ ప్రజలు పరిశుభ్రత ప్రచారం నిర్వహిస్తున్నారని కూడా నాకు సమాచారం అందింది. డామన్ ప్రజా జీవిత సంస్కృతిలో పరిశుభ్రత ఎలా ఒక భాగమైపోయిందో ఇది తెలియజేస్తోంది. ఈ సంస్కృతి ఇక్కడి పరిశుభ్రత ప్రయత్నాలలో స్పష్టంగా కనిపిస్తోంది. ప్రజల భాగస్వామ్యంతో కూడిన ఈ ప్రయత్నాలకు గాను డామన్ ప్రజలను నేను అభినందిస్తున్నాను.

మిత్రులారా, 

కేంద్రపాలిత ప్రాంతాలుగా  దాద్రా,నగర్ హవేలీ, డామన్, డయ్యూ భారతదేశ అస్తిత్వానికి, వారసత్వానికి ప్రతీకలు. అందుకే, వీటి అభివృద్ధి కోసం మనం నిర్దేశించుకున్న లక్ష్యాలు సాధరణమైనవి  కావు. గత సంవత్సరం నేను సిల్వస్సాకు వచ్చినప్పుడు మీకు సింగపూర్ ఉదాహరణ చెప్పడం నాకు గుర్తుంది. ఒకప్పుడు సింగపూర్ కేవలం ఒక చిన్న మత్స్యకార గ్రామం అని నేను చెప్పాను. కానీ సింగపూర్ ప్రజలు కలలు కన్నారు. పెద్ద పెద్ద లక్ష్యాలను నిర్దేశించుకున్నారు. ఈరోజు అదే సింగపూర్ ప్రపంచంలోనే అతిపెద్ద వ్యాపార కేంద్రంగా అవతరించింది. ఈరోజు దాద్రా, నగర్ హవేలీ, డామన్, డయ్యూ కూడా సరిగ్గా అలాంటి కలనే కంటున్నాయి. నమో ఎయిర్‌పోర్ట్, దమన్‌గంగా నదిపై నిర్మించనున్న ఐకానిక్ బ్రిడ్జి, బీచ్ ఫ్రంట్ లో నిర్మించబోయే కన్వెన్షన్ సెంటర్ వంటి ప్రాజెక్టులు -  ఇలాంటి మౌలిక సదుపాయాల ద్వారా మనం భవిష్యత్తు కోసం పెద్ద పెద్ద సంకల్పాలకు పునాది వేస్తున్నాం. ఈ ప్రాజెక్టుల వల్ల మీ ప్రయాణాలు మరింత సులభతరం అవుతాయి. ఇక్కడ వ్యాపార రంగంలో సరికొత్త అవకాశాలు వస్తాయి. డామన్‌కు ఇరువైపులా అభివృద్ధి వేగం మరింత పుంజుకుంటుంది.

మిత్రులారా, 

ఇక్కడ ఆతిథ్య రంగ ఆర్థిక వ్యవస్థకి సంబంధించిన అవకాశాలు పెరుగుతాయి, దీనితో పాటు ట్రాన్స్‌పోర్ట్ నగర్ వంటి సౌకర్యాలు కూడా ఇక్కడి వాణిజ్యానికి, రవాణా రంగానికి సరికొత్త వేగాన్ని అందిస్తాయి.

మిత్రులారా, 

ఈ ప్రాంతంలో సముద్ర ఆధారిత ఆర్థిక వ్యవస్థ కోసం మనం సిద్ధం చేసిన లక్ష్యం అత్యాధునిక మౌలిక సదుపాయాల బలం ద్వారానే సాకారం అవుతుంది. అందువల్లనే, ఈరోజే లక్షద్వీప్‌లోని కల్పేని,  కద్మత్ దీవులలో ఆధునిక నౌకాశ్రయాలకు శంకుస్థాపన జరుగుతోంది. ఈ ప్రయత్నాలన్నీ బ్లూ ఎకానమీ రంగంలో దేశ బలాన్ని మరింత పెంచుతాయి. నేను ముందు చెప్పినట్లుగా, ఇవి లక్షద్వీప్ రూపురేఖలను, భవితవ్యాన్ని మార్చివేసే సరికొత్త కార్యక్రమాలు.

మిత్రులారా, 

పేదలు, వెనుకబడినవారు, గిరిజనులు, మధ్యతరగతి ప్రజల జీవితాలలో మార్పు రావడం బీజేపీ ప్రభుత్వంలో, మా ఎన్డీయే ప్రభుత్వంల, మాకు అభివృద్ధికి సంబంధించిన మొదటి ప్రామాణికం.  ఇందుకోసం ఆరోగ్య రంగం మాకు అత్యంత ప్రాధాన్యత కలిగిన రంగం. గత కొన్నేళ్లుగా, దేశం ఆరోగ్య సంరక్షణ దిశగా ఒక సమగ్రమైన దృక్పథంతో ముందుకు సాగింది. చికిత్సకు సంబంధించిన ప్రతి సమస్యనూ మేం పరిష్కరించాం. ఈరోజు అత్యంత పేదవాడికి కూడా ఆయుష్మాన్ కార్డ్ అందుబాటులో ఉంది. వారికి 5 లక్షల రూపాయల వరకు ఉచిత వైద్య చికిత్స భరోసా లభిస్తోంది. వ్యాధులను సకాలంలో గుర్తించడానికి  ప్రధానమంత్రి ఆయుష్మాన్ ఆరోగ్య కేంద్రాలు ఏర్పాటయ్యాయి. జన ఔషధి కేంద్రాల ద్వారా తక్కువ ధరలకే మందులు కూడా లభిస్తున్నాయి. ఈ సౌకర్యాలను మరింత మెరుగ్గా, ఆధునికంగా మార్చేందుకు ఈరోజు  ఆయుష్మాన్ భారత్ డిజిటల్ మిషన్ ద్వారా ఆరోగ్య సేవలను సాంకేతికతతో అనుసంధానించడం జరుగుతోంది.

 

మిత్రులారా, 

ఆయుష్మాన్ కార్డులు, జన ఔషధి కేంద్రాల వల్ల పేద మధ్యతరగతి ప్రజలకు దాదాపు 2.25 లక్షల కోట్ల రూపాయలు వృథాగా ఖర్చు కాకుండా ఆదా అయ్యాయి.

సోదరీ,సోదరులారా

కేంద్ర ప్రభుత్వ విధానాల వల్ల ఈ ప్రాంత ప్రజలకు కూడా ఎంతో మేలు చేకూరింది. ఒకప్పుడు ఇక్కడ మెరుగైన చికిత్సా సౌకర్యాల కొరత ఉండేది. కనీసం ఒక మెడికల్ కాలేజీ కూడా ఇక్కడ ఉండేది కాదు. కానీ ఇప్పుడు ఇక్కడ ఒక మెడికల్ కాలేజీ ఏర్పాటయింది. అందులో పోస్ట్-గ్రాడ్యుయేషన్ చదువులు కూడా ప్రారంభమయ్యాయి. సిల్వస్సాలోని నమో హాస్పిటల్ గత ఏడాది కాలంగా వేలాది మంది ప్రజలకు సేవలందిస్తోంది. ఈరోజు డామన్‌లో కూడా నమో హాస్పిటల్ ప్రారంభోత్సవం జరిగింది. ఈ ప్రాంత ప్రజలకు ఇప్పుడు మరింత మెరుగైన ఆరోగ్య సంరక్షణ సౌకర్యాలు అందుబాటులోకి వస్తాయి.

మిత్రులారా, 

జాతీయ కుటుంబ ఆరోగ్య సర్వే ఫలితాలను చూస్తే మా ప్రభుత్వం ఆరోగ్య రంగానికి ఎంతటి ప్రాధాన్యత ఇస్తుందో స్పష్టంగా అర్థమవుతుంది. ఒకానొక సమయంలో భారతదేశంలో అత్యధిక శాతం ప్రసవాలు ఆసుపత్రులలో జరిగేవి కావు. కానీ ఈరోజు దేశంలో 90 శాతానికి పైగా ప్రసవాలు ఆసుపత్రులలోనే జరుగుతున్నాయి. దీనివల్ల మాతృ మరణాల రేటు, శిశు మరణాల రేటు గణనీయంగా తగ్గాయి. మిషన్ ఇంద్రధనుష్ కారణంగా, బాలల వ్యాక్సినేషన్ రంగంలో కూడా భారత్ అద్భుతమైన పురోగతిని సాధించింది. 2014 కంటే ముందు, దేశంలో కేవలం 60 శాతం మంది పిల్లలకు మాత్రమే పూర్తి స్థాయిలో వ్యాక్సినేషన్  అందేది. కానీ ఈరోజు ఆ సంఖ్య దాదాపు 90 శాతానికి పెరిగింది. ఆరోగ్య భద్రత రంగంలో కూడా ఒక పెద్ద మార్పు వచ్చింది. 2014 కంటే ముందు, 30 శాతం కంటే తక్కువ కుటుంబాలు మాత్రమే ఆరోగ్య బీమా పథకాలతో అనుసంధానమై ఉండేవి. ఈరోజు ఆయుష్మాన్ భారత్ ఆ గణాంకాలను కూడా పూర్తిగా మార్చేసింది. ఇప్పుడు 60 శాతానికి పైగా కుటుంబాలు ఈ ఆరోగ్య భద్రతా రక్షణను పొందుతున్నాయి.

 

మిత్రులారా, 

ఆరోగ్య రంగంలో ప్రభుత్వం చేపట్టిన ఈ ప్రయత్నాల వల్ల ఎవరైనా అత్యధికంగా లబ్ధి పొంది ఉంటే, అది నా దేశంలోని మహిళా శక్తి మాత్రమే.

మిత్రులారా, 

ఇంతకుముందు ఈ ప్రాంతానికి చెందిన యువత ఉన్నత చదువుల కోసం వెలుపలి ప్రాంతాలకు వెళ్లాల్సి వచ్చేది. కానీ ఈరోజు ఇక్కడ ఒకటి కాదు, అనేక జాతీయ స్థాయి విద్యాసంస్థలు ఏర్పాటయ్యాయి. ఇటీవలి సంవత్సరాలలో ఇక్కడ సరికొత్త పాఠశాల భవనాలను నిర్మించారు. పాఠశాలల్లో స్మార్ట్ తరగతి గదులు  కూడా అందుబాటులోకి వచ్చాయి. వీటి ద్వారా 40 వేల మందికి పైగా విద్యార్థులు లబ్ధి పొందుతున్నారు. ఈ కేంద్రపాలిత ప్రాంతం విద్యారంగంలో క్రమక్రమంగా ముందుకు సాగుతుండటం నాకు ఎంతో సంతోషాన్ని కలిగిస్తోంది. ఇక్కడ స్వామి వివేకానంద ఎడ్యుకేషన్ హబ్ వంటి అనేక నిర్మాణ పనులు జరుగుతున్నాయి.

సొదరీ,సోదరులారా, 

ఈ విద్యా విప్లవంలో మన కుమార్తెలు వెనుకబడిపోకూడదన్నది కూడా మా సంకల్పం. ఇందుకోసం ఎన్నో పెద్ద పెద్ద ప్రయత్నాలు జరుగుతున్నాయి. ఇక్కడి కుమార్తెలకు సరస్వతి సైకిల్ యోజన, సరస్వతి విద్యా యోజన'వంటి పథకాలు ఎంతగానో సహాయపడుతున్నాయి.

మిత్రులారా, 

ఈరోజు దేశంలోని యువతకు డిగ్రీలతో పాటు సరైన దిశా నిర్దేశం కూడా లభించాలన్నదే భారతదేశ ప్రయత్నం. స్థానిక ప్రతిభను ప్రపంచవ్యాప్త అవకాశాలతో అనుసంధానించేలా వారికి తగిన అవకాశాలు, పరిజ్ఞానం లభించాలి. డిజైన్, న్యాయశాస్త్రం, ఇంజనీరింగ్, వైద్య విద్య, ఐటీ, డ్రోన్, పునరుత్పాదక ఇంధనం వంటి రంగాలలో మన ప్రస్తుత సన్నద్ధత భారతదేశ మానవ వనరులను మరింత బలోపేతం చేస్తుంది. అందువల్లనే, వృత్తివిద్యా సంస్థల విస్తరణ అత్యంత ప్రాధాన్యత సంతరించుకుంది.

 

మిత్రులారా, 

ఈరోజు  నేషనల్ ఇన్‌స్టిట్యూట్ ఆఫ్ ఫ్యాషన్ టెక్నాలజీ 18వ క్యాంపస్‌కు శంకుస్థాపన జరిగింది. ఈ సంస్థ ఇక్కడి యువతకు అంతర్జాతీయ స్థాయి పరిజ్ఞానాన్ని, అవకాశాలను అందిస్తుంది. ఐటీఐ, డామన్‌లో డ్రోన్ టెక్నీషియన్ వంటి సరికొత్త కోర్సులు కూడా ప్రారంభమయ్యాయి. పీఎం విశ్వకర్మ, పీఎం సూర్య ఘర్ ఉచిత విద్యుత్ పథకానికి  సంబంధించిన శిక్షణా కార్యక్రమాలు కూడా ఇక్కడి యువతకు ఎంతో ప్రయోజనంచేకూరుస్తున్నాయి.

మిత్రులారా, 

దేశంలో క్రీడలను కూడా ఒక సరికొత్త ఆలోచనతో ముందుకు తీసుకువెడుతున్నాం. మన క్రీడలు ఇకపై కేవలం పెద్ద నగరాలకో లేదా పెద్ద పెద్ద స్టేడియాలకో మాత్రమే పరిమితం కాదు. ఖేలో ఇండియా వంటి ప్రయత్నాలు యువత తమ ప్రతిభను చాటుకోవడానికి ఒక సరికొత్త వేదికను అందించాయి. దీనివల్ల, క్రీడల రంగంలో చిన్న చిన్న ప్రాంతాల నుంచి కూడా పిల్లలు జాతీయ స్థాయికి దూసుకువస్తున్నారు. ఈ ప్రాంతం కూడా దానివల్ల ఎంతో లబ్ధి పొందింది. ఈరోజు డయ్యూ సముద్ర తీర క్రీడలకు ఒక పెద్ద కేంద్రంగా ఆవిర్భవించింది. ఘోఘ్లా బీచ్‌లో నిర్వహించిన బీచ్ గేమ్స్ ఈ ప్రాంతం వైపు దేశం దృష్టిని ఆకర్షించేలా చేశాయి. ఈరోజు ఇక్కడ ఆధునిక క్రీడా మౌలిక సదుపాయాలు నిరంతరం అభివృద్ధి చెందుతున్నాయి. ఖాన్వేల్‌లోని ఫుట్‌బాల్ సెంటర్,  డామన్‌లోని వాలీబాల్ ట్రైనింగ్ సెంటర్ ఇక్కడి క్రీడా సంస్కృతిని మరింత బలోపేతం చేస్తున్నాయి.

మిత్రులారా, 

ఈరోజు దేశం ప్రధాన దృష్టి పర్యాటక రంగం పైనే ఉంది. పర్యాటక రంగం ద్వారా స్థానిక కళలు, సంస్కృతిని ప్రోత్సహించాలన్నదే మా ప్రయత్నం. చిన్న చిన్న ప్రాంతాలను కూడా పెద్ద పెద్ద అవకాశాలతో అనుసంధానించాలి. దేఖో అప్నా దేశ్ వంటి ప్రయత్నాలు దేశంలోని వైవిధ్యాన్ని తెలుసుకోవడానికి ప్రజలను ఎంతగానో ప్రేరేపించాయి. ఈరోజు భారతదేశంలో వారసత్వ పర్యాటకం, సముద్ర తీర పర్యాటకం, పర్యావరణ హిత పర్యాటకం, సాహస పర్యాటకం వంటివి సరికొత్త శక్తిని పుంజుకుంటున్నాయి.

మిత్రులారా, 

దాద్రా, నగర్ హవేలీ, డామన్,డయ్యూలలో పర్యాటక రంగం  కూడా అపారమైన అవకాశాలు ఉన్న రంగం. ఈ ప్రాంతంలో సహజసిద్ధమైన అందాలున్నాయి. అందుకే పర్యాటక రంగానికి సంబంధించి దేశం అమలు చేసిన విధానాల వల్ల దాద్రా, నగర్ హవేలీ, డామన్, డయ్యూలకు ఎంతో మేలు జరిగింది. 2021లో దాదాపు 6 లక్షల మంది పర్యాటకులు ఇక్కడికి వచ్చారు. 2025 నాటికి ఈ సంఖ్య దాదాపు 50 లక్షలకు పెరిగింది. అంటే కేవలం కొద్ది సంవత్సరాల వ్యవధిలోనే పర్యాటకుల రాక దాదాపు పది రెట్లు పెరిగింది. మెరుగైన మౌలిక సదుపాయాలు, మెరుగైన వసతులు, పరిశుభ్రమైన సముద్ర తీరాల వల్లే ఇది సాధ్యమైంది. డామన్ నైట్ మార్కెట్, రామ్‌సేతు సీ-ఫ్రంట్, నమోపథ్ సీ-ఫ్రంట్, నానీ డామన్ కోట, గంగేశ్వర్ ఆలయ సముదాయం వంటి అనేక ప్రదేశాలు ఈరోజు ఈ మొత్తం ప్రాంతానికి ఒక సరికొత్త గుర్తింపుగా మారుతున్నాయి.

మిత్రులారా, 

దాద్రా, నగర్ హవేలీ, డామన్,డయ్యూల కలలను సాకారం చేయడానికి మనం ఇక్కడి పారిశ్రామిక బలాన్ని కూడా మరింత పెంచాల్సి ఉంది. ఈ కేంద్రపాలిత ప్రాంతం మనిషి తయారీ నూలు రంగంలో తనకంటూ ఒక ప్రత్యేక గుర్తింపును సంపాదించుకోవడం ఎంతో గర్వకారణం. దాద్రా,నగర్ హవేలీలను జాతీయ మ్యాన్-మేడ్ ఫైబర్ క్యాపిటల్ గా గుర్తిస్తారు. ప్లాస్టిక్ ఎగుమతుల్లో కూడా ఈ ప్రాంతం నిరంతరం పురోగమిస్తోంది. ఇక్కడి పరిశ్రమలకు, ఎంఎస్ఎంఈలకు మద్దతుగా నిలిచేందుకు ప్రభుత్వం కూడా నిరంతర ప్రయత్నాలు చేస్తోంది. ఇక్కడి ఎంఎస్ఎంఈలు, ఇతర పరిశ్రమలకు కోట్ల రూపాయల పైగా ఆర్థిక సహాయం అందించాం. ఈ కేంద్రపాలిత ప్రాంతంలోని చిన్న, కుటీర పరిశ్రమలకు సరికొత్త అవకాశాలు లభిస్తున్నాయి. రాబోయే కాలంలో ఈ ప్రాంతం తయారీ రంగానికి ఒక పెద్ద కేంద్రంగా మారుతుందని నా గట్టి విశ్వాసం. 

మిత్రులారా, 

సున్నితమైన పాలన, అభివృద్ధి దృక్పథం  తోడైనప్పుడు క్షేత్రస్థాయిలో మార్పు అనేది అత్యంత వేగంగా రూపుదిద్దుకుంటుంది. దాద్రా, నగర్ హవేలీ, డామన్, డయ్యూలలో మా ప్రయత్నాల ఫలితాలను చూడటం ఎంతో సంతృప్తిని కలిగిస్తోంది. ఈ గడ్డపై ఉన్న ప్రజలపై నాకు పూర్తి నమ్మకం ఉంది. ఇక్కడి యువత, ఇక్కడి తల్లులు,  అక్కాచెల్లెళ్ళు, ఇక్కడి రైతులు, కళాకారులు, కార్మికులు,  పారిశ్రామికవేత్తలు రాబోయే సంవత్సరాల్లో ఈ అభివృద్ధి ప్రయాణాన్ని మరింత ముందుకు తీసుకువెళతారు. మీ కలలను సాకారం చేసుకోవడానికి కేంద్ర ప్రభుత్వం మీకు ఎల్లప్పుడూ అండగా, భుజం భుజం కలిపి నిలుస్తుందని నేను మీకు హామీ ఇస్తున్నాను. ఈ నమ్మకంతో, ఈ అభివృద్ధి ప్రాజెక్టుల సందర్భంగా మీ అందరికీ మరొక్కసారి నా హృదయపూర్వక అభినందనలు.  నాతో కలిసి పలకండి.. భారత్ మాతా కీ జై! భారత్ మాతా కీ జై! భారత్ మాతా కీ జై!

మీ అందరికీ ధన్యవాదాలు.