Our mantra is "Act East and Act fast for India’s East": PM Modi in Mizoram

Published By : Admin | November 23, 2018 | 13:02 IST
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In the last four years, the BJP Government at the Centre, has worked for greater recognition, and spread of Indian culture and traditions, far and wide: PM Modi
I feel a deep sense of anguish, when I see the leaders of the Congress party, abuse the same traditions: PM Modi
Congress party which once governed most Indian States, is now restricted to just two or three States. Now, the people of Mizoram, have a golden opportunity to rid themselves of this Congress culture: PM
The double engine of BJP Governments in both the Centre and the State will take Mizoram to new heights: PM Modi

मंच पर विराजमान भारतीय जनता पार्टी के सभी नेतागण और इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के समाज सेवा को समर्पित ऐसे उम्मीदवार…डॉ. ऐछुंगा, श्रीमान एच. लालरुआता, श्रीमान सी. एस. चवाङ्ग्छुमा, श्रीमान रामदीनजउवा, श्रीमान जोसफ लालजाव्मलियान, श्रीमान लालनूपुईया चौंगथो, श्रीमान किना रंजन चकमा...       Friends, it is always a pleasure to visit this part of the country. In the last 4 years, I’ve travelled to different states of North-East 27 times. Last December, during my visit to Mizoram I had the opportunity to dedicate the Tuirial Hydro Electric Power Plant to the people of this region. Today, I come seeking your blessings for the Bharatiya Janata Party.

Brothers and Sisters, मिजोरम के पास एक समृद्ध संस्कृति है, परंपरा है, जिसको आप सभी ने संजो कर रखा है। आपका गीत, संगीत, नृत्य, आपका खान-पान, आपका पहनावा शानदार है, अद्भुत है। इसमें प्रकृति से जुड़े हर रंग हैं, खुशी के हर पल हैं। Brothers and Sisters, मेरा खुद का ये मानना रहा है कि समृद्ध वही होता है जो अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है, अपनी संस्कृति, अपनी भाषा, अपनी परंपरा का आदर करता है।

This is my vision, my thought, not just for Mizoram but for the entire country. That is why, in the last 4 years the BJP government at the Centre has worked for greater recognition and spread of Indian culture and tradition far and wide. But friends, I feel a deep sense of anguish when I see the leaders of the Congress party abuse the same traditions.          

आप सभी को विशेष तौर पर यहाँ के नौजवानों को याद होगा कि कुछ महीने पहले कांग्रेस के नेताओं ने कैसे नॉर्थ-ईस्ट के पहनावे का अपमान किया था। नॉर्थ-ईस्ट में अलग-अलग जगहों पर मुझे जो स्थानीय वेश-भूषा दी जाती है उसको ये outlandish बताते हैं, अजीबो-गरीब बताते हैं। यहाँ आकर बड़ी-बड़ी बातें करने वाले कांग्रेस नेताओं की यही सच्चाई है। Brothers and Sisters, कांग्रेस का इतने वर्षों का शासन गवाह है कि इसके लिए आपकी भावनाएँ, आपकी उम्मीदें, आपकी आकांक्षाएँ कोई मायने नहीं रखतीं। कांग्रेस को जमीन पर जंगलों के बीच बसे भारत की असली विरासत से भी कोई सरोकार नहीं है। कांग्रेस के लिए प्राथमिकता आपलोग नहीं, मिजोरम के लोग नहीं, बल्कि सरकार की कुर्सी है जिसे बचाने के लिए वो लोगों को तरह-तरह के डर दिखाती है। मिजोरम से लेकर मध्य प्रदेश तक, छत्तीसगढ़ से लेकर राजस्थान तक उसकी यही कहानी है। भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोपों से घिरी अपनी सरकार को बचाने के लिए कांग्रेस यहाँ भी इसी फॉर्मूले पर चल रही है।

Sisters and Brothers, our country has now understood this Congress formula of divide and rule. That is why, the Congress party which once governed most Indian states is now restricted to just 2 or 3 states. Now, the people of Mizoram have a golden opportunity to read themselves of this Congress culture.

Sisters and Brothers, भारतीय जनता पार्टी सिर्फ और सिर्फ देश के विकास को ध्येय बनाकर के आगे बढ़ रही है। हमारा मंत्र है ‘सबका साथ सबका विकास’। हमारा ये भी commitment है कि मीजो समाज को संविधान में जो भी अधिकार मिले हैं, उनकी हर कीमत पर रक्षा की जाएगी।

Sisters and Brothers, Act East and Act fast for India’s East की पॉलिसी पर चलते हुए बीते साढ़े चार वर्ष में हमने नॉर्थ-ईस्ट के हर क्षेत्र को विकास से जोड़ा है। भाजपा और उसके सहयोगियों के प्रयासों को नॉर्थ-ईस्ट के लोगों ने भी सराहा, स्वीकार किया है। बम-बंदूक, बंद और ब्लॉकेड के दौर से अब नॉर्थ-ईस्ट आगे बढ़ चुका है। आज हर कोई अनुभव कर रहा है कि ईटानगर से आईजॉल तक, कोहिमा से कामरूप तक आपसी सद्भाव की भावना मजबूत हुई है।

Sisters and Brothers, केंद्र और राज्य सरकार के डबल इंजन ने अब नॉर्थ-ईस्ट के तमाम राज्यों के विकास की गति को और बढ़ा दिया है। अब मिजोरम के लोगों की बारी विकास की इस मुख्यधारा से जुड़ने की है। Sisters and brothers, जब शांति होती है तो विकास के नए द्वार खुलते हैं। भाजपा पर आप सभी का, मिजोरम का, नॉर्थ-ईस्ट का भरोसा इसलिए है क्यूंकि हमने इस हिस्से को शेष भारत से कनेक्ट किया, पूर्वी एशियाई देशों के साथ अपने सम्बन्धों को मजबूत करने का गेट वे बनाया।

27 मई 2016 का दिन क्या मिजोरम भूल सकता है जब हमारा यह राज्य पहली बार ब्रॉड गेज रेल लाइन से जुड़ा था? मुझे आज भी आपके चेहरों पर आई वो खुशी याद है जब मैंने सिलचर-भैराबी डेली पैसेंजर एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई थी। अब तो करीब 5 हजार करोड़ रुपये की लागत से भैराबी से सैरांग के लिए नई ब्रॉड गेज लाइन पर भी तेजी से काम हो रहा है और अगले एक-डेढ़ वर्ष में इसको भी पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

Sisters and Brothers, भारत का सम्पूर्ण विकास तभी संभव है जब हमारा ये पूर्वी हिस्सा विकसित होगा। और इसलिए, भाजपा नॉर्थ-ईस्ट के विकास के लिए समर्पित है। विशेष तौर पर कनेक्टिविटी, हाईवे, रेलवे, एयर वे, वॉटर वे और आई वे (इन्फॉर्मेशन वे) पर हमारा फोकस है। Transformation through transportation यहाँ के विकास के लिए हमारा प्रमुख एजेंडा है। इसी पर चलते हुए करीब 90,000 करोड़ रुपये नॉर्थ-ईस्ट के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किए जा रहे हैं। बीते 4 वर्षों के दौरान, 1000 किलोमीटर रेल लाइन को ब्रॉड गेज में बदला जा चुका है। करीब 50 हजार करोड़ की लागत से 15 नई रेलवे लाइनें बिछाई जा रही हैं। नॉर्थ-ईस्ट राज्यों की हर राजधानी को ब्रॉड गेज से जोड़ने का अभियान चल रहा है।

Sisters and Brothers, भाजपा की सरकार गति पर भी ध्यान देती है और प्रगति पर भी। जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तो उस दरम्यान नॉर्थ-ईस्ट में हर साल करीब 100 किलोमीटर रेल लाइन बनती थी या ब्रॉड गेज में बदली जाती थी। अब जब केंद्र में भाजपा की सरकार है तो इन्हीं कामों की गति तीन गुना से ज्यादा बढ़ गई है।

Sisters and Brothers, इसके अलावा नॉर्थ-ईस्ट में नए एयरपोर्ट बनाए जा रहे हैं, पुराने एयरपोर्ट्स या हेलीपैड्स को अपग्रेड किया जा रहा है, उनको उड़ान योजना से जोड़ा जा रहा है। 5,000 किलोमीटर से अधिक लंबाई के नेशनल हाईवे बन रहे हैं, करीब 5,000 करोड़ रुपये के टेलीकॉम प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। इसमें से भी अकेले मिजोरम में बीते 4 वर्षों में करीब पौने दो सौ किलोमीटर नेशनल हाईवे बनाए गए हैं जबकि 200 किलोमीटर स्टेट हाईवे को नेशनल हाईवे में बदला गया है। मिजोरम के 50 बड़े रोड प्रोजेक्ट्स पर केंद्र सरकार करीब 8,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।

Sisters and Brothers, इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जो अभूतपूर्व खर्च नॉर्थ-ईस्ट में हो रहा है, उससे रोजगार के हजार अवसर भी बन रहे हैं। यहाँ के इंजीनीयर हों, सर्वेयर हों, गाड़ी वाले हों, ट्रक-ट्रॉली वाले हों, कामगार हों, अनेक तरह के रोजगार की संभावनाएं यहाँ मिजोरम में भी बनी है। Sisters and Brothers, कनेक्टिविटी बेहतर होने से आपका जीवन तो आसान होता ही है, ईज ऑफ लिविंग तो बढ़ती ही है, इसका बहुत बड़ा प्रभाव टूरिज्म सेक्टर पर पड़ता है। आने वाले समय में जब कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाएं पूरी होंगी तो टूरिस्टों की संख्या और बढ़ेगी और इसका सीधा मतलब है आपके लिए, यहाँ के नौजवानों के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर भी बनेंगे। मैं मिजोरम के युवाओं से आज विशेष तौर पर कहना चाहूंगा कि वो उसका पूरा लाभ उठाएँ। इसके अलावा यहाँ के जो युवा अपना स्टार्ट अप शुरू करना चाहते हैं, उसके लिए वे 100 करोड़ रुपये के नॉर्थ-ईस्ट वेंचर फंड का भी उपयोग कर सकते हैं। पिछली बार जब मैं मिजोरम आया था तो यहीं के कुछ युवाओं को चेक सौंप कर मैंने इसकी शुरुआत की थी।

Sisters and Brothers, नॉर्थ-ईस्ट में इतना काम हो रहा है लेकिन यहाँ भी कांग्रेस सरकार की वजह से मिजोरम इसका पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा है। सच्चाई ये है कि यहाँ की कांग्रेस सरकार को आप सभी की जरा भी चिंता नहीं है। कांग्रेस विकास की नहीं, लटकाने, अटकाने और भटकाने के कल्चर वाली पार्टी है। इनके लिए भ्रष्टाचार ही राजनीति का आधार है। इसके कुछ उदाहरण मैं आपको देता हूँ। Brothers and Sisters, करीब 250 करोड़ रुपये रिलीज भी किए जा चुके हैं लेकिन यहाँ की कांग्रेस सरकार के कारनामे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। Brothers and Sisters, आपके विकास के लिए दिए गए करीब सवा सौ करोड़ रुपये यहाँ की कांग्रेस सरकार ने खर्च ही नहीं किए। इतना ही नहीं जो खर्च हुए उसका utilization सर्टिफिकेट यानि पैसे कहाँ गए, कहाँ खर्चा किया, क्या किया, इसका हिसाब भी ये कांग्रेस की मिजोरम की सरकार अभी तक दे नहीं पाई है।

Brothers and Sisters, ये यहाँ की सरकार का काम करने का तरीका है। मुझे बताया गया है कि यहाँ पर राज्य सरकार जो ठेके देती है उसमें भी बड़े-बड़े खेल किए जाते हैं, जमकर के भाई-भतीजावाद चलता है। आखिर ये कांग्रेस की सरकार आपके लिए चल रही है या कांग्रेस नेताओं के रिश्तेदारों के लिए चलती है? भाइयो-बहनो, आज मिजोरम में स्थिति ये है कि केंद्र सरकार की सहायता से चल रहे करीब 46 प्रोजेक्ट्स में से 28 प्रोजेक्ट तय समय से बहुत लेट चल रहे हैं। इसके अलावा नॉर्थ-ईस्टर्न काउंसिल, एनईसी योजना के तहत चल रहे 36 प्रोजेक्ट्स में से 20 प्रोजेक्ट्स तय समय से पीछे चल रहे हैं। कांग्रेस का यही वर्किंग कल्चर है जिसके चलते यहां इनफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति खराब है, सड़कें बेहाल हैं जबकि बगल में मणिपुर, अरुणाचल और असम जैसे राज्यों में गाँव हो या शहर, चमचमाती सड़कें आज बनने लगी हैं।   

Sisters and Brothers, मिजोरम में सड़कों का ये हाल तब है जब मुख्यमंत्री खुद पीडब्ल्यूडी के मिनिस्टर हैं। बरसों से पीडब्ल्यूडी मंत्रालय मुख्यमंत्री के पास है। आपलोग ही आरोप लगाते हैं कि कांग्रेस से जुड़े ठेकेदारों को एक बार कॉन्ट्रैक्ट दे दिया तो फिर मुख्यमंत्री को उधर की तरफ झाँकने की फुर्सत ही नहीं है कि कितना काम हुआ, कैसा काम हुआ, कोई लेना-देना नहीं। Brothers and Sisters, सड़क के साथ बिजली की हालत भी खस्ता है और यह विभाग भी स्वयं मुख्यमंत्री जी के पास है। गाँव-गाँव में लोग बिजली की कटौती से परेशान हैं। मिजोरम में बिजली पैदा करने की बहुत क्षमता होने के बावजूद यहाँ के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

Sisters and Brothers, कांग्रेस की नीयत ठीक रहती तो Tuirial डैम बहुत पहले बन चुका होता। इस डैम को अटल बिहारी वाजपेयी जी की अगुआई वाली सरकार ने 1998 में मंजूरी दी थी। उसके बाद कांग्रेस की सरकारें उसको लटकाने में लगी रहीं और पिछले साल दिसंबर में ये डैम हमने आप सभी को, देश की इस जनता को समर्पित भी कर दिया। इस डैम की पूरी क्षमता से संचालित होने के बाद मिजोरम, सिक्किम और त्रिपुरा के बाद नॉर्थ-ईस्ट में तीसरा पावर सरप्लस राज्य बनने की तरफ हमारा मिजोरम आगे बढ़ सकता है।

Brothers and Sisters, कांग्रेस में अपना-पराया देखकर ही योजनाएं बनती हैं, अपने ही लोगों का काम कांग्रेसी करवाते हैं, जो इनको वोट देते हैं, उन्हीं को योजनाओं का लाभ भी देते हैं। कांग्रेस के कल्चर का उदाहरण New Land Use Policy भी है। इसके माध्यम से कांग्रेस ने कैसे अपने लोगों को सरकारी खजाने से पैसे बांटे हैं, इसका पूरा कच्चा चिट्ठा CAG ने खोला है और देश भर के अखबारों ने छापा है। Sisters and Brothers, इस योजना पर सवाल उठे तो New Economic Development Programme यानि NEDP नाम से एक और योजना ले आए। लोग कह रहे हैं कि इसमें भी अपने लोगों को ठेके देने का गोरखधंधा चल रहा है। गरीबों के नाम पर कांग्रेस नेताओं के करीबियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।

Sisters and Brothers, एक तरफ कांग्रेस अपने करीबियों के लिए योजनाएं बनाती है तो वहीं भाजपा देश के सामान्य जन के लिए। हम देश के संतुलित विकास के लिए, सबके विकास के लिए, बिना भेद-भाव विकास के लिए काम कर रहे हैं। इस समय देश भर में गरीब बहनों को, आदिवासी बहनों को मुफ्त गैस देने की उज्ज्वला योजना चल रही है। इस योजना के तहत देश में करीब 6 करोड़ गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। मिजोरम में भी करीब 25 हजार परिवारों को धुएँ से मुक्ति मिली है और उनको उज्ज्वला के तहत गैस का कनेक्शन मिला है। इसी तरह जन धन योजना के माध्यम से केंद्र सरकार ने देश भर के 32 करोड़ से अधिक लोगों का बैंक में खाता खुलवाया। मुझे खुशी है कि 10-11 लाख की जनसंख्या वाले मिजोरम के करीब 3 लाख भाई-बहनों का बैंक अकाउंट इस योजना के तहत खोला गया है।

इसी प्रकार, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना को अपनाने में भी मिजोरम के जन-जन आगे हैं। देश भर में करीब 20 करोड़ लोग इन दोनों योजनाओं से जुड़े हैं, जिसमें सवा लाख से अधिक लोग मिजोरम के हैं। Sisters and Brothers, देश भर में गरीबों को अपना घर देने का बहुत बड़ा अभियान चल रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पूरे देश में सवा करोड़ से अधिक गरीब, बेघर परिवारों के लिए अपना घर बनाकर के उनको चाबी दे दी गई है। लेकिन मिजोरम सरकार गरीबों को घर देने को लेकर के जरा भी गंभीर नहीं है। केंद्र के बार-बार आग्रह के बावजूद यहाँ की सरकार गरीबों को घर दिलवाने के लिए हमें कोई सहयोग नहीं कर रही है। गाँव और गरीब के प्रति इसी बेरुखी के चलते इस सरकार का जाना अब जरूरी है।

Sisters and Brothers, मिजोरम को तो प्रकृति ने भी भरपूर संसाधन दिए हैं। आइजॉल हो, चंपाई हो, कोलासिब हो, लौंगतलाई हो, ऐसे अनेक इलाके bamboo के जंगलों से भरे पड़े हैं। यहाँ का bamboo dance तो सारी दुनिया में मशहूर ही है। ये bamboo आपकी आय का भी बहुत बड़ा माध्यम रहा है। लेकिन इसके प्रति कांग्रेस का रवैया कैसा रहा है, ये भी आप सबको भली-भांति जानना चाहिए। कांग्रेस की सरकार जब तक केंद्र में थी तब तक गैर-वन क्षेत्रों में bamboo को काटने और उसका व्यापार करने पर भी रोक थी। इस वजह से आपको कितनी दिक्कत होती थी लेकिन कांग्रेस ने कभी इसकी परवाह नहीं की। Sisters and Brothers, जब केंद्र में भाजपा की सरकार आई तो हमने कानून बदला और bamboo को पेड़ की बजाए grass की श्रेणी में ले आए। अब मिजोरम के बहन-भाई अपने खेत में bamboo उगा कर इससे बड़े सामान, पंखे, फर्नीचर, पर्दे और दूसरी कलाकृतियाँ आसानी से बना सकते हैं, बनाकर के बेच सकते हैं।  

Brothers and Sisters, भाजपा का विजन संसाधन और संस्कृति के विकास का तो है ही, देश को स्पोर्टिंग पावर बनाने का भी है। इसमें भी नॉर्थ-ईस्ट की बड़ी भूमिका है। बीते 3-4 वर्षों से आपने देखा होगा कि चाहे वो एशियाड हो, कॉमनवेल्थ गेम्स हो, भारत का प्रदर्शन ऐतिहासिक रहा है। अभी जो वर्ल्ड वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप चल रही है, इसमें भी नॉर्थ-ईस्ट का डंका बज रहा है। Sisters and Brothers, मिजोरम में भी टैलेंट भरपूर है। ये फुटबॉल का बड़ा सेंटर है। यहाँ के लिए तो ये तक कहा जाता है कि बच्चा किक मारना पहले सीखता है और रोटी मांगना बाद में। ये टैलेंट देश के काम आए इसके लिए यहाँ सुविधाएं विकसित करने के लिए भाजपा प्रतिबद्ध है। मिजोरम की फुटबॉल टीम देश की सबसे बेहतरीन टीमों में से तो है ही, भारत की राष्ट्रीय टीम के भी बहुत सारे खिलाड़ी यहीं अपने मिजोरम से हैं। फुटबॉल मिजोरम का पैशन है। जब यहाँ भाजपा सरकार बनेगी तो उसे घर-घर का पैशन बनाने के लिए और साथ ही यहाँ के टैलेंट को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर ले जाने का भी काम करेगी। फुटबॉल के विकास के लिए भी बीते 4 वर्षों में सरकार ने गंभीर प्रयास किए हैं। पिछले वर्ष ही, भारत में पहली बार अंडर-17 वर्ल्ड कप हुआ था। इसके आयोजन की तारीफ दुनिया भर में हुई थी। Brothers and Sisters, स्पोर्ट्स हो, संस्कृति हो, संसाधन हो, सुरक्षा हो या फिर स्वाभिमान, भाजपा की सरकार देश और समाज से जुड़े हर पहलू पर ध्यान दे रही है।

Brothers and Sisters, to speed up the development of Mizoram and to provide a corruption-free government in the state, the BJP seeks your blessings and your support. That double engine of BJP government in both the Centre and the State will take Mizoram on to new heights.

आप यहाँ भारी संख्या में मुझे और सभी उम्मीदवारों को आशीर्वाद देने के लिए आए, इसलिए हृदय से मैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ। बहुत-बहुत धन्यवाद।

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January 23, 2022
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Also confers Subhas Chandra Bose Aapda Prabandhan Puraskars
Gujarat was the first state to enact disaster related law in 2003
“In disaster management, emphasis is on Reform along with stress on Relief, Rescue and Rehabilitation”
“Disaster management is no longer just a government job but it has become a model of 'Sabka Prayas'”
“We have a goal to fulfil the dreams of independent India. We have the goal of building a new India before the hundredth year of independence”
“It is unfortunate that after Independence, along with the culture and traditions of the country, the contribution of many great personalities was also tried to be erased”
“The freedom struggle involved ‘tapasya’ of lakhs of countrymen, but attempts were made to confine their history as well. But today the country is boldly correcting those mistakes”
“We have to move ahead taking inspiration from Netaji Subhash's 'Can Do, Will Do' spirit”

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में उपस्थित मंत्रीपरिषद के मेरे साथी श्री अमित शाह, श्री हरदीप पूरी जी, मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य, INA के सभी ट्रस्टी, NDMA के सभी सदस्यगण, jury मेम्बर्स, NDRF, कोस्ट गॉर्ड्स और IMD के डाइरेक्टर जनरल्स, आपदा प्रबंधन पुरस्कारों के सभी विजेता साथी, अन्य सभी महानुभाव, भाइयों एवं बहनों!

भारत मां के वीर सपूत, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जन्मजयंती पर पूरे देश की तरफ से मैं आज कोटि-कोटि नमन करता हूं। ये दिन ऐतिहासिक है, ये कालखंड भी ऐतिहासिक है और ये स्थान, जहां हम सभी एकत्रित हैं, वो भी ऐतिहासिक है। भारत के लोकतंत्र की प्रतीक हमारी संसद पास में है, हमारी क्रियाशीलता और लोकनिष्ठा के प्रतीक अनेक भवन भी हमारे साथ पास में नजर आ रहे हैं, हमारे वीर शहीदों को समर्पित नेशनल वॉर मेमोरियल भी पास है। इन सबके आलोक में आज हम इंडिया गेट पर अमृत महोत्सव मना रहे हैं और नेताजी सुभाषचंद्र बोस को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि दे रहे हैं। नेताजी सुभाष, जिन्होंने हमें स्वाधीन और संप्रभु भारत का विश्वास दिलाया था, जिन्होंने बड़े गर्व के साथ, बड़े आत्मविश्वास के साथ, बड़े साहस के साथ अंग्रेजी सत्ता के सामने कहा था- “मैं स्वतंत्रता की भीख नहीं लूंगा, मैं इसे हासिल करूंगा"। जिन्होंने भारत की धरती पर पहली आज़ाद सरकार को स्थापित किया था, हमारे उन नेताजी की भव्य प्रतिमा आज डिजिटल स्वरूप में इंडिया गेट के समीप स्थापित हो रही है। जल्द ही इस होलोग्राम प्रतिमा के स्थान पर ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा भी लगेगी। ये प्रतिमा आज़ादी के महानायक को कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि है। नेताजी सुभाष की ये प्रतिमा हमारी लोकतान्त्रिक संस्थाओं को, हमारी पीढ़ियों को राष्ट्रीय कर्तव्य का बोध कराएगी, आने वाली पीढ़ियों को, वर्तमान पीढ़ी को निरंतर प्रेरणा देती रहेगी।

साथियों,

पिछले साल से देश ने नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाना शुरू किया है। आज पराक्रम दिवस के अवसर पर सुभाषचंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी दिए गए हैं। नेताजी के जीवन से प्रेरणा लेकर ही इन पुरस्कारों को देने की घोषणा की गई थी। साल 2019 से 2022 तक, उस समय के सभी विजेताओं, सभी व्यक्तियों, सभी संस्थाओं को जिने आज सम्मान का अवसर मिला है। उन सबको भी मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारे देश में आपदा प्रबंधन को लेकर जिस तरह का रवैया रहा था, उस पर एक कहावत बहुत सटीक बैठती है- जब प्यास लगी तो कुआं खोदना। और जिस मैं काशी क्षेत्र से आता हूं वहां तो एक और भी कहावत है। वो कहते हैं - भोज घड़ी कोहड़ा रोपे। यानि जब भोज का समय आ गया तो कोहड़े की सब्जी उगाने लगना। यानि जब आपदा सिर पर आ जाती थी तो उससे बचने के उपाय खोजे जाते थे। इतना ही नहीं, एक और हैरान करने वाली व्यवस्था थी जिसके बारे में कम ही लोगों को पता है। हमारे देश में वर्षों तक आपदा का विषय एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के पास रहा था। इसका मूल कारण ये था कि बाढ़, अतिवृष्टि, ओले गिरना, ऐसी जो स्थितियों पैदा होती थी। उससे निपटने का जिम्मा, उसका संबंध कृषि मंत्रालय से आता था। देश में आपदा प्रबंधन ऐसे ही चलता रहता था। लेकिन 2001 में गुजरात में भूकंप आने के बाद जो कुछ हुआ, देश को नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर किया। अब उसने आपदा प्रबंधन के मायने बदल दिए। हमने तमाम विभागों और मंत्रालयों को राहत और बचाव के काम में झोंक दिया। उस समय के जो अनुभव थे, उनसे सीखते हुए ही 2003 में Gujarat State Disaster Management Act बनाया गया। आपदा से निपटने के लिए गुजरात इस तरह का कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य बना। बाद में केंद्र सरकार ने, गुजरात के कानून से सबक लेते हुए, 2005 में पूरे देश के लिए ऐसा ही Disaster Management Act बनाया। इस कानून के बाद ही National Disaster Management Authority उसके गठन का रास्ता साफ हुआ। इसी कानून ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भी देश की बहुत मदद की।

साथियों,

डिजास्टर मैनैजमेंट को प्रभावी बनाने के लिए 2014 के बाद से हमारी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर चौतरफा काम किया है। हमने Relief, Rescue, Rehabilitation उस पर जोर देने के साथ-साथ ही Reform पर भी बल दिया है। हमने NDRF को मजबूत किया, उसका आधुनिकीकरण किया, देश भर में उसका विस्तार किया। स्पेस टेक्नालजी से लेकर प्लानिंग और मैनेजमेंट तक, best possible practices को अपनाया। हमारे NDRF के साथी, सभी राज्यों के SDRFs, और सुरक्षा बलों के जवान अपनी जान की बाजी लगाकर, एक-एक जीवन को बचाते हैं। इसलिए, आज ये पल इस प्रकार से जान की बाजी लगाने वाले, औरों की जिंदगी बचाने के लिए खुद की जिंदगी का दांव लगाने वाले चाहे वो NDRF के लोग हों, चाहे SDRF के लोग हों, हमारे सुरक्षाबलों के साथी हों, ये सब के सब उनके प्रति आज आभार व्यक्त करने का, उनको salute करने का ये वक्त है।

साथियों,

अगर हम अपनी व्यवस्थाओं को मजबूत करते चलें, तो आपदा से निपटने की क्षमता दिनों-दिन बढ़ती चली जाती है। मैं इसी कोरोना काल के एक-दो वर्षों की बात करूं तो इस महामारी के बीच भी देश के सामने नई आपदाएँ आकर खड़ी हो गईं। एक तरफ कोरोना से तो लड़ाई लड़ ही रहे थे। अनेक जगहों पर भूकंप आए, कितने ही क्षेत्रों में बाढ़ आई। ओड़िशा, पश्चिम बंगाल समेत पूर्वी तटों पर cyclones आए, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिमी तटों पर cyclones आए, पहले, एक-एक साइक्लोन में सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो जाती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। देश ने हर चुनौती का जवाब एक नई ताकत से दिया। इसी वजह से इन आपदाओं में हम ज्यादा से ज्यादा जीवन बचाने में सफल रहे। आज बड़ी-बड़ी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां, भारत के इस सामर्थ्य, भारत में आए इस बदलाव की सराहना कर रही हैं। आज देश में एक ऐसा end-to-end cyclone response system है जिसमें केंद्र, राज्य, स्थानीय प्रशासन और सभी एजेंसियां एक साथ मिलकर के काम करती हैं। बाढ़, सूखा, cyclone, इन सभी आपदाओं के लिए वार्निंग सिस्टम में सुधार किया गया है। Disaster risk analysis के लिए एडवांस्ड टूल्स बनाए गए हैं, राज्यों की मदद से अलग अलग क्षेत्रों के लिए Disaster risk maps बनाए गए हैं। इसका लाभ सभी राज्यों को, सभी स्टेक होल्डर्स को मिल रहा है। और सबसे महत्वपूर्ण, डिजास्टर मैनेजमेंट - आपदा प्रबंधन, आज देश में जनभागीदारी और जन-विश्वास का विषय बन गया है। मुझे बताया गया है कि NDMA की ‘आपदा मित्र’ जैसी स्कीम्स से युवा आगे आ रहे हैं। आपदा मित्र के रूप में जिम्मेवारियां उठा रहे हैं। यानी जन भागीदारी बढ़ रही है। कहीं कोई आपदा आती है तो लोग विक्टिम्स नहीं रहते, वो वॉलंटियर्स बनकर आपदा का मुकाबला करते हैं। यानी, आपदा प्रबंधन अब एक सरकारी काम भर नहीं है, बल्कि ये ‘सबका प्रयास’ का एक मॉडल बन गया है।

और साथियों,

जब मैं सबका प्रयास की बात करता हूँ, तो इसमें हर क्षेत्र में हो रहा प्रयास, एक holistic approach भी शामिल है। आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए, हमने अपने एजुकेशन सिस्टम में भी कई सारे बदलाव किए हैं। जो सिविल इंजीनियरिंग के कोर्सेस होते हैं, आर्किटेक्चर से जुड़े कोर्सेस होते हैं, उसके पाठ्यक्रम में डिजास्टर मैनेजमेंट से जोड़ा, इन्फ्रासट्रक्चर की रचना कैसी हो उसपर विषयों को जोड़ना, ये सारे काम प्रयासरत हैं। सरकार ने Dam Failure की स्थिति से निपटने के लिए, डैम सेफ्टी कानून भी बनाया है।

साथियों,

दुनिया में जब भी कोई आपदा आती है तो उसमें लोगों की दुखद मृत्यु की चर्चा होती है, कि इतने लोगों की मृत्यु हो गई, इतना ये हो गया, इतने लोगों को हटाया गया, आर्थिक नुकसान भी बहुत होता है। उसकी भी चर्चा की जाती है। लेकिन आपदा में जो इंफ्रास्ट्रक्चर का नुकसान होता है, वो कल्पना से परे होता है। इसलिए ये बहुत आवश्यक है कि आज के समय में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण ऐसा हो जो आपदा में भी टिक सके, उसका सामना कर सके। भारत आज इस दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। जिन क्षेत्रों में भूकंप, बाढ़ या साइक्लोन का खतरा ज्यादा रहता है, वहां पर पीएम आवास योजना के तहत बन रहे घरों में भी इसका ध्यान रखा जाता है। उत्तराखंड में जो चार धाम महा-परियोजना का काम चल रहा है, उसमें भी आपदा प्रबंधन का ध्यान रखा गया है। उत्तर प्रदेश में जो नए एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, उनमें भी आपदा प्रबंधन से जुड़ी बारीकियों को प्राथमिकता दी गई है। आपात स्थिति में ये एक्सप्रेसवे, विमान उतारने के काम आ सकें, इसका भी प्रावधान किया गया है। यही नए भारत का विज़न है, नए भारत के सोचने का तरीका है।

साथियों,

Disaster Resilient Infrastructure की इसी सोच के साथ भारत ने दुनिया को भी एक बहुत बड़ी संस्था का विचार दिया है, उपहार दिया है। ये संस्था है- CDRI - Coalition for Disaster Resilient Infrastructure. भारत की इस पहल में ब्रिटेन हमारा प्रमुख साथी बना है और आज दुनिया के 35 देश इससे जुड़ चुके हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच में, सेनाओं के बीच में हमने Joint Military Exercise बहुत देखी है। पुरानी परंपरा है उसकी चर्चा भी होती है। लेकिन भारत ने पहली बार डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए Joint ड्रिल की परंपरा शुरू की है। कई देशों में मुश्किल समय में हमारी डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़ी एजेंसियों ने अपनी सेवाएँ दी हैं, मानवता के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह किया है। जब नेपाल में भूकंप आया, इतनी बड़ी तबाही मची, तो भारत एक मित्र देश के रूप में उस दुख को बाटने के लिए जरा भी देरी नहीं की थी। हमारे NDRF के जवान वहां तुरंत पहुंच गए थे। डिजास्टर मैनेजमेंट का भारत का अनुभव सिर्फ हमारे लिए नहीं बल्कि पुरी मानवता के लिए आप सभी को याद होगा 2017 में भारत ने साउथ एशिया जियो-स्टेशनरी communication satellite को लान्च किया। weather और communication के क्षेत्र में उसका लाभ हमारे दक्षिण एशिया के मित्र देश को मिल रहा है।

साथियों,

परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर हममे हौंसला है तो हम आपदा को भी अवसर में बदल सकते हैं। यही संदेश नेताजी ने हमे आजादी की लड़ाई के दौरान दिया था। नेताजी कहते थे कभी भी स्वतंत्र भारत के सपने का विश्वास मत खोना। दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को झकझोर सके"। आज हमारे सामने आज़ाद भारत के सपनों को पूरा करने का लक्ष्य है। हमारे सामने आज़ादी के सौंवे साल से पहले, 2047 के पहले नए भारत के निर्माण का लक्ष्य है। और नेताजी को देश पर जो विश्वास था, जो भाव नेताजी के दिल में उभरते थे। और उनके ही इन भावों के कारण मैं कह सकता हूँ कि, दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने से रोक सके। हमारी सफलताएँ हमारी संकल्पशक्ति का सबूत हैं। लेकिन, ये यात्रा अभी लंबी है। हमें अभी कई शिखर और पार करने हैं। इसके लिए जरूरी है, हमें देश के इतिहास का, हजारों सालों की यात्रा में इसे आकार देने वाले तप, त्याग और बलिदानों का बोध रहे।

भाइयों और बहनों,

आज़ादी के अमृत महोत्सव का संकल्प है कि भारत अपनी पहचान और प्रेरणाओं को पुनर्जीवित करेगा। ये दुर्भाग्य रहा कि आजादी के बाद देश की संस्कृति और संस्कारों के साथ ही अनेक महान व्यक्तित्वों के योगदान को मिटाने का काम किया गया। स्वाधीनता संग्राम में लाखों-लाख देशवासियों की तपस्या शामिल थी लेकिन उनके इतिहास को भी सीमित करने की कोशिशें हुईं। लेकिन आज आजादी के दशकों बाद देश उन गलतियों को डंके की चोट पर सुधार रहा है, ठीक कर रहा है। आप देखिए, बाबा साहब आंबेडकर से जुड़े पंचतीर्थों को देश उनकी गरिमा के अनुरूप विकसित कर रहा है। स्टेचू ऑफ यूनिटी आज पूरी दुनिया में सरदार वल्लभ भाई पटेल के यशगान की तीर्थ बन गई है। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत भी हम सबने कर दी है। आदिवासी समाज के योगदान और इतिहास को सामने लाने के लिए अलग-अलग राज्यों में आदिवासी म्यूज़ियम्स बनाए जा रहे हैं। और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन से जुड़ी हर विरासत को भी देश पूरे गौरव से संजो रहा है। नेताजी द्वारा अंडमान में तिरंगा लहराने की 75वीं वर्षगांठ पर अंडमान के एक द्वीप का नाम उनके नाम पर रखा गया है। अभी दिसम्बर में ही, अंडमान में एक विशेष ‘संकल्प स्मारक’ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के लिए समर्पित की गई है। ये स्मारक नेताजी के साथ साथ इंडियन नेशनल आर्मी के उन जवानों के लिए भी एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। ये मेरा सौभाग्य है कि पिछले वर्ष, आज के ही दिन मुझे कोलकाता में नेताजी के पैतृक आवास भी जाने का अवसर मिला था। जिस प्रकार से वो कोलकाता से निकले थे, जिस कमरे में बैठकर वो पढ़ते थे, उनके घर की सीढ़ियां, उनके घर की दीवारें, उनके दर्शन करना, वो अनुभव, शब्दों से परे है।

साथियों,

मैं 21 अक्टूबर 2018 का वो दिन भी नहीं भूल सकता जब आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष हुए थे। लाल किले में हुए विशेष समारोह में मैंने आजाद हिंद फौज की कैप पहनकर तिरंगा फहराया था। वो पल अद्भुत है, वो पल अविस्मरणीय है। मुझे खुशी है कि लाल किले में ही आजाद हिंद फौज से जुड़े एक स्मारक पर भी काम किया जा रहा है। 2019 में, 26 जनवरी की परेड में आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिकों को देखकर मन जितना प्रफुल्लित हुआ, वो भी मेरी अनमोल स्मृति है। और इसे भी मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि हमारी सरकार को नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने का अवसर मिला।

साथियों,

नेताजी सुभाष कुछ ठान लेते थे तो फिर उन्हें कोई ताकत रोक नहीं सकती थी। हमें नेताजी सुभाष की ‘Can Do, Will Do’ स्पिरिट से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना है। वो ये जानते थे तभी ये बात हमेशा कहते थे भारत में राष्ट्रवाद ने ऐसी सृजनात्मक शक्ति का संचार किया है जो सदियों से लोगों के अंदर सोई पड़ी थी। हमें राष्ट्रवाद भी जिंदा रखना है। हमें सृजन भी करना है। और राष्ट्र चेतना को जागृत भी रखना है। मुझे विश्वास है कि, हम मिलकर, भारत को नेताजी सुभाष के सपनों का भारत बनाने में सफल होंगे। आप सभी को एक बार फिर पराक्रम दिवस की बहुत बहुत शुभकामनायें देता हूं और मैं आज एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के लोगों को भी विशेष रूप से बधाई देता हूं। क्योंकि बहुत छोटे कालखंड में उन्होंने अपनी पहचान बना दी है। आज कहीं पर भी आपदा हो या आपदा के संबंधित संभावनाओं की खबरें हों, साईक्लोन जैसी। और जब एनडीआरएफ के जवान यूनिफार्म में दिखते हैं। सामान्य मानवीय को एक भरोसा हो जाता है। कि अब मदद पहुंच गई। इतने कम समय में किसी संस्था और इसकी यूनिफार्म की पहचान बनना, यानि जैसे हमारे देश में कोई तकलीफ हो और सेना के जवान आ जाएं तो सामान्य मानवीय को संतोष हो जाता है, भई बस अब ये लोग आ गये। वैसा ही आज एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों ने अपने पराक्रम से ये करके दिखाया है। मै पराक्रम दिवस पर नेताजी का स्मरण करते हुए, मैं एनडीआरएफ के जवानों को, एसडीआरएफ के जवानों को, उन्होंने जिस काम को जिस करुणा और संवेदनशीलता के साथ उठाया है। बहुत – बहुत बधाई देता हूं। उनका अभिनंदन करता हूं। मैं जानता हूं इस आपदा प्रबंधन के काम में, इस क्षेत्र में काम करने वाले कईयों ने अपने जीवन भी बलिदान दिए हैं। मैं आज ऐसे जवानों को भी श्रद्धांजलि देता हूं जिन्होंने किसी की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी थी। ऐसे सबको में आदरपूवर्क नमन करते हुए मैं आप सबको भी आज पराक्रम दिवस की अनेक – अनेक शुभकामनाएं देते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। बहुत बहुत धन्यवाद !