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मंच पर बिराजमान भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, संसद सदस्य भाई श्री अनुराग ठाकुर, गुजरात प्रदेश भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के अध्यक्ष श्रीमान प्रदीप सिंह, शहर के मेयर भाई श्री असित भाई, शहर भाजपा अध्यक्ष भाई श्री राकेश भाई, मंच पर बिराजमान युवा मोर्चा के सभी अग्रणी और मणिनगर विधानसभा क्षेत्र के पोलिंग बूथ पर बुनियादी काम करने वाले सभी युवा मित्रों..!

मैं युवा मोर्चा के मित्रों का अभिनन्दन करता हूँ कि इन्होंने सही अर्थ में जिसे जमीनी काम कहा जाए ऐसा बुनियादी काम आज किया है। कारण, चुनाव जीतना कहाँ होता है..? कोई यह मानता है कि मुझे गुजरात जीत जाना है, कोई मानता है कि मुझे शहर जीत जाना है, कोई मानता है कि मुझे विधानसभा जीत जानी है..! पर इन सब पर विजय कब सम्भव हो सकती है? जब तक आप पोलिंग बूथ ना जीतो, तब तक कुछ जीता नहीं जा सकता। आपको कुछ भी जीतना हो तो पहले पोलिंग बूथ जीतना पड़े। और आपने पोलिंग बूथ जीत लिया तो कुछ हारोगे नहीं। कॉर्पोरेशन भी नहीं हारोगे, विधानसभा भी नहीं हारोगे, गुजरात भी नहीं हारोगे। इसलिए चुनाव की असली कसौटी पोलिंग बूथ में होती है। इस पोलिंग बूथ का कार्यकर्ता बूथ में कितना सक्रिय है, इस पोलिंग बूथ के हजारों मतदाताओं के साथ उसका संबंध कैसा है, कितने परिवारों को यह नाम से जानता है, कितने परिवार इनको जानते हैं, किस परिवार की क्या समस्या है, इससे कौन परिचित है, इनके सुख-दु:ख में साथी के तौर पर कौन खड़ा रहा है, इसके आधार पर बूथ की ताकत निर्धारित होती है।

मित्रों, कांग्रेस और भाजपा में जो बुनियादी फर्क है ये यह है। भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीतती है संगठन की ताकत के आधार पर। भारतीय जनता पार्टी चुनाव का जो व्यूह रचती है इनके केन्द्र में कार्यकर्ता होते हैं। भारतीय जनता पार्टी आयोजन करती है तो कार्यकर्ताओं के भरोसे पर आयोजन करती है। और कांग्रेस पार्टी..? अरबों-खरबों रूपये के खर्च पर रोज टी.वी. पर दो सौ बार विज्ञापन देना, अखबारों में रोज नए झूठ चलाना, वोट बैंक की राजनीति करना, झूठे वादे देना, लोगों को भ्रमित करना, कांग्रेस के यही तौर-तरीके हैं और साठ सालों में इसमें वे माहिर हो गए हैं..! पर गुजरात राज्य ऐसा है, यहाँ के नागरिक इतने समझदार हैं कि कांग्रेस को बराबर पहचान चुके हैं। अभी देश के दूसरे भाग में इनकी बनावट चल रही है, यहाँ नहीं चलती। यहाँ की जनता ने इन्हें बराबर पहचान लिया है कि ये कैसे लोग हैं, ये क्या करते हैं, क्या बोलते हैं... ये सब गुजरात की जनता जान चुकी है। मुझे तो कई बार ऐसा लगता है कि गुजरात की जनता कितनी दूरदर्शी है। अगर गुजरात की जनता में दूरदर्शीता नहीं होती और दूसरे राज्यों की तरह या दिल्ली की तरह यहाँ भी कांग्रेस होती तो राज्य का क्या होता..? कल्पना करो मित्रों, पूरे देश की जो दशा की है इन्होंने, तो गुजरात की दशा क्या की होती..? यह गुजरात की जनता की दूरदर्शिता है कि उन्होंने पच्चीस साल पहले ही इनको निकाल दिया। पच्चीस साल हुए अभी यहाँ मौका नहीं मिलता, नामलेवा नहीं मिलता, नामलेवा..! आप कांग्रेस में एक नाम तो बोलो, चलो हमारे पास तो मोदी है, आपके पास कौन है, लाओ..! जवाब तो देना पड़ेगा ना उन्हें..! जनता जर्नादन को जवाब तो देना पड़ेगा, भाई, चलो मोदी है हमारे पास, आपके पास कौन है..? साहब, जिस गाड़ी का ड्राइवर ही नहीं है, उसकी दिशा कैसी होगी? और बिना ड्राइवर की गाड़ी की तो कोई दिशा होती है? अब जिस गाड़ी का ड्राइवर नहीं है वे आपको दिशा बताने निकले है..! मेरी तो प्रधानमंत्री से बिनती है, प्रधानमंत्री से, डॉ. मनमोहन सिंह, एक काम करो, दस साल होने को आए, और तो कुछ नहीं कर सके हो, एक काम करो, आप इस गुजरात की दिशा पकड़ लो, देश की दशा सुधर जाएगी..! मित्रों, हिन्दुस्तान की ऐसी दुदर्शा कभी देखी नहीं है..! और कांग्रेस के मित्रों, दिवार पर लिखा हुआ पढ़ लो कि आप लाख प्रयास करोगे, रोज नए झूठ फैलाओगे, आरोपों की भरमार लगाओगे, रूपयों की रेलमपेल करोगे, तब भी जाकर गुजरात की जनता आपको गुजरात की दुदर्शा करने का मौका नहीं देगी, नहीं देगी और नहीं ही देगी..!

आजकल लोग एक प्रश्र पूछते हैं कि मोदी विकास की बात करता है, कहाँ हुआ है विकास, बताओ... एसा कहते हैं..! मैं छोटा था तब जोक चलते थे कुछ्, एक काका के सिर पर मोटा फोड़ा हो गया, तो एक लड़के ने काका से पूछा कि काका क्या हुआ? तो कहा दिखता नहीं है क्या? तो बोला कि नहीं, नहीं, मुझे दिखता है इसलिए तो पूछता हूँ कि इतना बड़ा फोड़ा कैसे हुआ? तो कहा इधर आओ, देखो वो दीवार दिख रही है? तो कहा दिख रही है। इसके पास वो खंबा दिख रहा है? कहा दिख रहा है। उस खंभे पर एक कील मारी हुई दिखाई दे रही है? तो कहा दिख रही है। काका बोले, मुझे नहीं दिखाई दी थी इसलिए मैं टकरा गया और यह फोड़ा हो गया..! मित्रों, कांकरिया पहले कैसा था? कचरापेटी जैसा था ना? आज कांकरिया सुधर गया कि नहीं? ए-वन हो गया कि नहीं? इसको विकास कहते है? आपको दिखता है? उनको नहीं दिखता..! पहले अपनी यह ए.एम.टी.एस. कि लाल बस कैसी थी? कैसी दशा थी, भाई? अंदर बैठो तो पहुंचने की गांरटी थी? पंक्चर हो जाता था कि नहीं? पेट्रोल खत्म हो जाता था कि नहीं? आज बी.आर.टी.एस... चकाचक है ना? इसे विकास कहते है? आपको दिखता है? उनको नहीं दिखता..! पहले यह अपनी साबरमती नदी कैसी थी? साबरमती में क्या होता था? गधे दौड़ते थे, सर्कस आता था, किक्रेट खेला जाता था, धूल उड़ती थी, ऐसा था कि नहीं..? और आज..? लबालब बहती है कि नहीं? नौकाएं चलती हैं कि नहीं? रिवरफ्रंट बना है कि नहीं? फर्क दिखता है? इसको विकास कहते है? आपको दिखता है? उनको नहीं दिखता..! मोतिया नहीं साहब, अंधापन है, मोतिया हो तो धुंधला भी दिखता है..!

भाइयों और बहनों, विकास के बिना कोई भविष्य नहीं है। भारत सरकार की एक रिपोर्ट कहती है... कांग्रेस पार्टी कैसे झूठ फैला रही है इसका एक नमूना बता रहा हूँ। आपके पास 2004 के अखबार हों तो निकाल कर देखना, कांग्रेस ने आधे पन्ने का विज्ञापन दिया था, 2004 में। और उसमें इन्होंने ऐसा कहा था कि यदि दिल्ली में हमारी सरकार बनेगी तो हम हरएक घर में से एक व्यक्ति को रोज़गार देंगे। क्या कहा था? खाली रोज़गार नहीं, हरएक घर में से एक व्यक्ति को। इनकी सरकार 2004 में बनी, 2009 में भी बनी और अब तो उठने की तैयारी हो गई है... किसी को मिला रोज़गार, भाई? आपके अड़ौस-पड़ौस में किसी को मिला? आपके सगे-संबंधियों में किसी को मिला? क्यों इनके घर में युवा नहीं थे? फिर भी रोज़गार नहीं मिला। यह झूठ फैलाने में एक्सपर्ट लोग ऐसे झूठ फैलाते हैं..! अभी भारत सरकार ने एक रिपोर्ट दी है, भारत सरकार की एक रिपोर्ट बाहर आई है कि सारे देश में पिछले पांच साल के भीतर कुल जो रोज़गार दिया गया है, कुल जो रोज़गार मिला है, पूरे देश में 72% रोजगार केवल और केवल गु... ज... रा... त... कुल रोजगार के 72% रोज़गार गुजरात में और 28% में पूरा हिन्दुस्तान। हमारा गुजरात इतना सा राज्य, 1600 किलोमीटर लंबा समुद्र तट, विशाल रण, रेगिस्तान, दूसरी तरफ पाकिस्तान... ऐसा अपना बेचारा गरीब गुजरात..! मुश्किल से दो नदियां, नर्मदा और तापी, बाकि नदियों में पानी ही नहीं होता, बारह महीने रेत और धूल के गुबार उठते रहते हैं। उमरगाम से अंबाजी आदिवासी पट्टा, समुद्र किनारे मछुआरों का पट्टा। यह हमारा छोटा सा गुजरात, गरीब गुजरात..! और उनके पास इतना बड़ा हिन्दुस्तान, कश्मीर से कन्याकुमारी, नोट छापने के कारखाने इनके पास, सी.बी.आई. इनके पास, इनकम टैक्स इनके पास, आप जो कहो वो सब उनके पास..! इसके बाद भी इस दिल्ली की सल्तनत को मैं चुनौती देता हूँ। इतना छोटा सा गुजरात दिल्ली की सल्तनत को चुनौती देता है कि आओ, हिम्मत हो तो आओ, विकास की स्पर्धा करो और ये देश देखे, इतना बड़ा देश आपके पास है, आप एक दिन में कितने किलोमीटर सडक़ बना सकते हो, हम एक दिन में कितने किलोमीटर सडक़ बना सकते हैं; आप कितने लोगों को रोज़गार दे सकते हो, हम कितने लोगों को रोज़गार दे सकते हैं; आप कितना कृषि उत्पादन कर सकते हो, हम कितना उत्पादन कर सकते हैं; आप कितना दूध पैदा कर सकते हो, हम कितना दूध पैदा कर सकते हैं, आओ..! पर विकास कि स्पर्धा उन्हें करनी ही नहीं है। विकास की स्पर्धा के लिए वे तैयार नहीं है। झूठ फैलाकर आप देश का भला नहीं कर सकते, देश का विकास नहीं कर सकते। कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है मित्रों, जिसमें गुजरात ने नईं ऊंचाइयां पार नहीं की हो..!

अब एक ये नया चालू किया है, ये पैसे तो हमने भेजे थे..! ऐसा कहते हैं, केन्द्र से आए थे..! अच्छा, कहो तो जरा कि केन्द्र में कहाँ से आए थे? आप ये तो कहो भाई, केन्द्र में कहाँ से आए थे..? अगर मैं ये कहता हूँ कि गांधीनगर ने पैसा दिया, गांधीनगर ने पैसा दिया... गांधीनगर में रूपया कहाँ से आता है? ये नरेन्द्र मोदी के पूज्य पिताजी की संपत्ति नहीं है, ये तो गुजरात की जनता के परिश्रम का पैसा है। गांधीनगर की तिजोरी के पैसे मेरी मिल्कीयत नहीं है, भारतीय जनता पार्टी की भी मिल्कीयत नहीं है, ये संपत्ति छह करोड़ गुजरातियों के पसीने की कमाई है। बार-बार कहते रहते हैं कि हमने दिया, हमने दिया... दहेज में आए थे क्या? भाइयों और बहनों, सालाना 50,000 करोड़ रूपया, याद रखना दोस्तों, हर वर्ष 50,000 करोड़ रूपया गुजरात से टैक्स के रूप में दिल्ली की तिजोरी में जमा होते हैं, कितना..? पचास हजार बोलने के बाद अटक मत जाना, आधा लाख करोड़ रूपया..! और आता है कितना? 6000 करोड़..! अब आप मुझे बताओ कि इसे उन्होंने दिया कहते हैं कि हमने दिया? नहीं-नहीं, आपको अगर मैं सौ रूपया देता हूँ और आप मुझे दस वापिस देते हो, और फिर छाती चौड़ी कर फिरते हो कि हमने दस रूपया दिया, दस रूपया दिया...? अरे भाई, नब्बे ले गए, आप नब्बे ले गए..! इस प्रकार के झूठ दिन रात चलाए जाते हैं और इस गुजरात की जनता का अपमान किया जाता है। जैसे हम कोई भिखारी हों, वहाँ हाथ फैला कर खड़े हों और दिल्ली में महारानी हमें टुकड़े फैंकती हो... कांग्रेस की ऐसी भाषा इस गुजरात के स्वाभिमान पर चोट है और गुजरात अपने इस स्वाभिमान पर कोई हमला कभी भी स्वीकार नहीं करेगा, मित्रों। और बार-बार झूठ चलाए, बार-बार झूठ चलाए... इसलिए फिर हमने एक विज्ञापन दिया... दिल्ली रोज गुजरात को कैसे थप्पड़ मारती है इसके बारे में जब विज्ञापन दिया, तो कांग्रेस के लोगों को ऐसा थप्पड़ लगा, ऐसा थप्पड़ लगा कि कोर्ट में गए, मोदी का यह विज्ञापन बंद करवाओ। इतना सहन करने की ताकत नहीं है। अब कोर्ट में मैटर है, जजमेंट आएगा तब देखेंगे क्या होता है..! पर लग तो गया..! घर-घर लोगों को याद भी रह गया है।

भाइयों और बहनों, कांग्रेस के पास विकास की यात्रा में स्पर्धा करने की ताकत नहीं है। कांग्रेस के पास झूठ चलाने के सिवाय कोई काम नहीं रह गया। आज गुजरात ऑटोमोबाइल क्षेत्र में एशिया का हब बन गया है। हजारों गाडिय़ां रोज बनती है, कितने लोगों को रोजगार मिलता है, कितने नौजवानों को रेाजगार मिल रहा है..! इन नौजवानों का भाग्य किस तरह से बदलेगा? आपकी तरह व्यर्थ बातें करते तो इस गुजरात का और देश का नौजवान कभी अपना माथा ऊंचा नहीं कर सका होता। हमने रास्ता अपनाया है जिससे कि गुजरात का नौजवान छाती चौड़ी करके, सिर उठाकर घूम सकता है, वह रास्ता अपनाया है। पहले हुल्लड़ उद्योग चलता था, हुल्लड उद्योग..! अक्सर छुराबाजी, बार-बार हुल्लड़..! कर्फ्यू, जब देखो तब कर्फ्यू..! परीक्षा के समय में देखो तो कर्फ्यू लगा हो, रथयात्रा निकलनी हो तो कर्फ्यू लगा हो, उत्तरायण मना रहे हो तो कर्फ्यू लगा हो, क्रिकेट मैच में बॉल ऐसे पड़ा, तो कर्फ्यू लगा हो... दस साल हो गए दोस्तों, दस साल... गुजरात में से कर्फ्यू ने विदा ले ली है। सुख चैन की जिदंगी जी रहे हैं लोग, सब कुछ संभव है..!

अभी हमने काम उठाया है, नौजवानों को गुटका से बचाने का। गुटका मुक्ति हो जाएगी ना, दोस्तों? सौ प्रतीशत..? लेकिन गुटका मुक्ति में मुझे समर्थन देने के लिए एक मोबाइल फोन करना था, किया सभी ने..? 80009-80009। सभी ने नहीं किया होगा, थोड़े तो रह गए होंगे। 80009-80009, मिस्ड कॉल करो और मेरे इस काम में मुझे समर्थन दो, करोगे मित्रों? दूसरों से करवाओगे? अकेले मणिनगर से एक लाख मिस्ड कॉल आने चाहिए, मेरे युवा मोर्चा के मित्र करके दिखाएं। क्यों ढीले पड़ गए? अरे भाई, ‘ईच बूथ, टेन यूथ’ वाले आप लोग हो, आपके पोलिंग बूथ में आप कम से कम पचास लोगों से मिस्ड कॉल नहीं करवा सकते? इतना करोगे तो आपकी संख्या आ जाएगी, पूरा करोगे इसे दो दिनों में?

मित्रों, 11 तारीख, नाइन इलेवन... 9/11 इतिहास में दो कारणों से याद रखी जाती है। एक, स्वामी विवेकानंदजी ने अमेरिका में विश्व धर्म परिषद को संबोधित किया था और दूसरा, अमेरिका में ट्विन टावर पर आतंकवादियों का हमला हुआ था। नाइन इलेवन की ये दो घटनाएं। यही 9/11, 11 सितंबर को स्वामी विवेकानंदजी की 150 वर्ष की स्मृति में ‘विवेकानंद युवा विकास यात्रा’ का हम प्रारंभ करने जा रहे हैं। और मैं बहुचराजी से उस यात्रा को ले कर निकलने वाला हूँ, गुजरात के कोने-कोने में घूमने वाला हूँ। गुजरात की युवा शक्ति के दर्शन करने निकलने वाला हूँ, गुजरात की युवा शक्ति को गुजरात के आने वाले कल से जोडऩे के लिए निकलने वाला हूँ। और इसमें मेरे मणिनगर के लोग क्या करेंगे? मैं आपसे आह्वान करता हूँ, कि 11 तारीख को नौ बजे से पहले इस मणिनगर विधानसभा के युवा मोर्चा के सभी, एक भी ग़ैरहाज़िर नहीं, ये सभी के सभी बहुचराजी पहुंच सकते हैं? पहुंच सकते हो वे हाथ ऊपर करो। जिनका हाथ नीचे है वे क्या करेंगे? सभी आएंगे..? मित्रों, तय करो कि सुबह साढ़े पांच-छह बजे यहाँ से एक साथ टू व्हीलर, फोर-व्हीलर की बड़ी यात्रा निकाल कर बहुचराजी पहुंचना है और वहाँ मुझे यात्रा की विदाई देने के लिए ये नौजवान मित्रों आएं। कौन जवाबदारी लेगा, भाई? अरे, प्रदीप सिंह को पूरे गुजरात का करने दो ना, अपने मणिनगर का हम नहीं कर सकते? पंकज भाई करेंगे? पक्का..? मैं सारे व्हीहीकल गिनूगां हाँ, हर एक पोलिंग बूथ में से कितनी गाडिय़ां आई हैं ये गिनूंगा। मित्रों, मैं मणिनगर विधानसभा का प्रतिनिधि हूँ, आपका साथी हूँ और इसलिए मैं मणिनगर को कहता हूँ कि चलो बहुचराजी..! और माँ बहुचराजी के आशीर्वाद ले कर मित्रों, गुजरात के आने वाले कल को घढऩे के लिए एक नया संकल्प लेकर निकलना है।

आप से अभी जैसा मैंने कहा, लड़ाई पोलिंग बूथ में है। युद्घ जीतने के लिए किला जीतना पड़ता है, किला मतलब पोलिंग बूथ। और जो पोलिंग बूथ का किला जीत लेता है, वह युद्घ जीत लेता है। मेरा छोटे से छोटा कार्यकर्ता तय करे कि पोलिंग बूथ में वह भाजपा का झंडा कभी झुकने नहीं देगा। अगर भारतीय जनता पार्टी का पोलिंग बूथ का कार्यकर्ता संकल्प करे कि मैं पोलिंग बूथ में भाजपा का झंडा कभी झुकने नहीं दूंगा, तो गुजरात की धरती पर कभी भी भाजपा का झंडा नहीं झुकेगा..! ये विकास यात्रा चलती ही रहेगी, अविरत चलती रहेगी, लगातार विकास यात्रा चलेगी। विरोध, अवरोध, अप्रचार, झूठ की आंधी चलेगी, अभी और जारी रहेगी, जरा और गर्मी आएगी, और तीव्रता आएगी, पर ये सभी तीव्रताओं को पार कर, विजय के विश्वास के साथ आगे बढ़ें, इसी अपेक्षा के साथ...

जय जय गरवी गुजरात...!!

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Government of India to provide free vaccine to all Indian citizens above 18 years of age: PM Modi
June 07, 2021
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Government of India to provide free vaccine to all Indian citizens above 18 years of age
25 per cent vaccination that was with states will now be undertaken by Government of India: PM
Government of India will buy 75 per cent of the total production of the vaccine producers and provide to the states free of cost: PM
Pradhan Mantri Garib Kalyan Anna Yojna extended till Deepawali: PM
Till November, 80 crore people will continue to get free food grain every month: PM
Corona, Worst Calamity of last hundred years: PM
Supply of vaccine is to increase in coming days: PM
PM informs about development progress of new vaccines
Vaccines for children and Nasal Vaccine under trial: PM
Those creating apprehensions  about vaccination are playing with the lives of people: PM

मेरे प्यारे देशवासियों, नमस्कार! कोरोना की दूसरी वेव से हम भारतवासियों की लड़ाई जारी है।  दुनिया के अनेक देशों की तरह, भारत भी इस लड़ाई के दौरान बहुत बड़ी पीड़ा से गुजरा है। हममें से कई लोगों ने अपने परिजनों को, अपने परिचितों को खोया है। ऐसे सभी परिवारों के साथ मेरी पूरी संवेदनाएं हैं।

साथियों,

बीते सौ वर्षों में आई ये सबसे बड़ी महामारी है, त्रासदी है। इस तरह की महामारी आधुनिक विश्व ने न देखी थी, न अनुभव की थी। इतनी बड़ी वैश्विक महामारी से हमारा देश कई मोर्चों पर एक साथ लड़ा है। कोविड अस्पताल बनाने से लेकर ICU बेड्स की संख्या बढ़ानी हो, भारत में वेंटिलेटर बनाने से लेकर टेस्टिंग लैब्स का एक बहुत बड़ा नेटवर्क तैयार करना हो, कोविड से लड़ने के लिए बीते सवा साल में ही देश में एक नया हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। सेकेंड वेव के दौरान अप्रैल और मई के महीने में भारत में मेडिकल ऑक्सीजन की डिमांड अकल्पनीय रूप से बढ़ गई थी। भारत के इतिहास में कभी भी इतनी मात्रा में मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत कभी भी महसूस नहीं की गई। इस जरूरत को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया गया। सरकार के सभी तंत्र लगे। ऑक्सीजन रेल चलाई गई, एयरफोर्स के विमानों को लगाया गया, नौसेना को लगाया गया। बहुत ही कम समय में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के प्रॉडक्शन को 10 गुना से ज्यादा बढ़ाया गया। दुनिया के हर कोने से, जहां कही से भी, जो कुछ भी उपलब्ध हो सकता था उसको प्राप्त करने का भरसक प्रयास  किया गया, लाया गया। इसी तरह ज़रूरी दवाओं के production को कई गुना बढ़ाया गया, विदेशों में जहां भी दवाइयां उपलब्ध हों, वहां से उन्हें लाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ी गई।

साथियों,

कोरोना जैसे अदृश्य और रूप बदलने वाले दुश्मन के खिलाफ लड़ाई में सबसे प्रभावी हथियार, कोविड प्रोटोकॉल है, मास्क, दो गज की दूरी और बाकी सारी सावधानियां उसका पालन ही है। इस लड़ाई में वैक्सीन हमारे लिए सुरक्षा कवच की तरह है। आज पूरे विश्व में वैक्सीन के लिए जो मांग है, उसकी तुलना में उत्पादन करने वाले देश और वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां बहुत कम हैं, इनी गिनी है। कल्पना करिए कि अभी हमारे पास भारत में बनी वैक्सीन नहीं होती तो आज भारत जैसे विशाल देश में क्या होता?  आप पिछले 50-60 साल का इतिहास देखेंगे तो पता चलेगा कि भारत को विदेशों से वैक्सीन प्राप्त करने में दशकों लग जाते थे। विदेशों में वैक्सीन का काम पूरा हो जाता था तब भी हमारे देश में वैक्सीनेशन का काम शुरू भी नहीं हो पाता था। पोलियो की वैक्सीन हो, Smallpox जहां गांव में हम इसको चेचक कहते हैं। चेचक की  वैक्सीन हो, हेपिटाइटिस बी की वैक्सीन हो, इनके लिए देशवासियों  ने दशकों तक इंतज़ार किया था। जब 2014 में देशवासियों ने हमें सेवा का अवसर दिया तो भारत में वैक्सीनेशन का कवरेज, 2014 में भारत में वैक्सीनेशन का कवरेज सिर्फ 60 प्रतिशत के ही आसपास था। और हमारी दृष्टि में ये बहुत चिंता की बात थी। जिस रफ्तार से भारत का टीकाकरण कार्यक्रम चल रहा था, उस रफ्तार से, देश को शत प्रतिशत टीकाकरण कवरेज का लक्ष्य हासिल करने में करीब-करीब 40 साल लग जाते। हमने इस समस्या के समाधान के लिए मिशन इंद्रधनुष को लॉन्च किया। हमने तय किया कि मिशन इंद्रधनुष के माध्यम से युद्ध स्तर पर वैक्सीनेशन किया जाएगा और देश में जिसको भी वैक्सीन की जरूरत है उसे वैक्सीन देने का प्रयास होगा। हमने मिशन मोड में काम किया, और सिर्फ 5-6 साल में ही वैक्सीनेशन कवरेज 60 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत से भी ज्यादा हो गई। 60 से 90,  यानि हमने वैक्सीनेशन की स्पीड भी  बढ़ाई और दायरा भी बढ़ाया।

 हमने बच्चों को कई जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए कई नए टीकों को भी भारत के टीकाकरण अभियान का हिस्सा बना दिया। हमने ये इसलिए किया, क्योंकि हमें हमारे देश के बच्चों की चिंता थी, गरीब की चिंता थी, गरीब के उन बच्चों की चिंता थी जिन्हें कभी टीका लग ही नहीं पाता था। हम शत प्रतिशत टीकाकरण कवरेज की तरफ बढ़ रहे थे कि कोरोना वायरस ने हमें घेर लिया। देश ही नहीं, दुनिया के सामने फिर पुरानी आशंकाएं घिरने लगीं कि अब भारत कैसे इतनी बड़ी आबादी को बचा पाएगा? लेकिन साथियों,जब नीयत साफ होती है, नीति स्पष्ट होती है, निरंतर परिश्रम होता है, तो नतीजे भी मिलते हैं। हर आशंका को दरकिनार करके भारत ने एक साल के भीतर ही एक नहीं बल्कि दो 'मेड इन इंडिया' वैक्सीन्स लॉन्च कर दीं। हमारे देश ने, देश के वैज्ञानिकों ने ये दिखा दिया कि भारत बड़े बड़े देशों से पीछे नहीं है। आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो देश में 23 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज़ दी जा चुकी हैं।

साथियों,

हमारे यहाँ कहा जाता है- विश्वासेन सिद्धि: अर्थात, हमारे प्रयासों में हमें सफलता तब मिलती है, जब हमें स्वयं पर विश्वास होता है। हमें पूरा विश्वास था कि हमारे वैज्ञानिक बहुत ही कम समय में वैक्सीन बनाने में सफलता हासिल कर लेंगे। इसी विश्वास के चलते जब हमारे वैज्ञानिक अपना रिसर्च वर्क कर ही रहे थे तभी हमने लॉजिस्टिक्स और दूसरी तैयारियां शुरू कर दीं थीं। आप सब भली-भांति जानते हैं कि पिछले साल यानि एक साल पहले, पिछले साल अप्रैल में, जब कोरोना के कुछ ही हजार केस थे, उसी समय वैक्सीन टास्क फोर्स का गठन कर दिया गया था। भारत में, भारत के लिए वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को सरकार ने हर तरह से सपोर्ट किया। वैक्सीन निर्माताओं को क्लिनिकल ट्रायल में मदद की गई, रिसर्च और डवलपमेंट के लिए ज़रूरी फंड दिया गया, हर स्तर पर सरकार उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चली। 

आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत मिशन कोविड सुरक्षा के माध्यम से भी उन्हें हज़ारों करोड़ रुपए उपलब्ध कराए गये। पिछले काफी समय से देश लगातार जो प्रयास और परिश्रम कर रहा है, उससे आने वाले दिनों में वैक्सीन की सप्लाई और भी ज्यादा बढ़ने वाली है। आज देश में 7 कंपनियाँ, विभिन्न प्रकार की वैक्सीन का प्रॉडक्शन कर रही हैं। तीन और वैक्सीन का ट्रायल भी एडवांस स्टेज पर चल रहा है। वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए दूसरे देशों की कंपनियों से भी वैक्सीन खरीदने की प्रक्रिया को तेज किया गया है। इधर हाल के दिनों में, कुछ एक्सपर्ट्स द्वारा हमारे बच्चों को लेकर भी चिंता जताई गई है। इस दिशा में भी 2 वैक्सीन्स का ट्रायल तेजी से चल रहा है। इसके अलावा अभी देश में एक 'नेज़ल' वैक्सीन पर भी रिसर्च जारी है। इसे सिरिन्ज से न देकर नाक में स्प्रे किया जाएगा। देश को अगर निकट भविष्य में इस वैक्सीन पर सफलता मिलती है तो इससे भारत के वैक्सीन अभियान में और ज्यादा तेजी आएगी।

साथियों,

इतने कम समय में वैक्सीन बनाना, अपने आप में पूरी मानवता के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। लेकिन इसकी अपनी सीमाएं भी हैं। वैक्सीन बनने के बाद भी दुनिया के बहुत कम देशों में वैक्सीनेशन प्रारंभ हुआ, और ज्यादातर समृद्ध देशों में ही शुरू हुआ। WHO ने वैक्सीनेशन को लेकर गाइडलाइंस दीं। वैज्ञानिकों ने वैक्सीनेशन की रूप रेखा रखी। और भारत ने भी जो अन्य देशों की best practices थी , विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक  थे, उसी आधार पर चरणबद्ध तरीके से वैक्सीनेशन करना तय किया। केंद्र सरकार ने मुख्यमंत्रियों के साथ हुई अनेकों बैठकों से जो सुझाव मिले, संसद के विभिन्न दलों के साथियों द्वारा जो सुझाव मिले, उसका भी पूरा ध्यान रखा। इसके बाद ही ये तय हुआ कि जिन्हें कोरोना से ज्यादा खतरा है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। इसलिए ही, हेल्थ वर्कर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स, 60 वर्ष की आयु से ज्यादा के नागरिक, बीमारियों से ग्रसित 45 वर्ष से ज्यादा आयु के नागरिक, इन सभी को वैक्सीन पहले लगनी शुरू हुई। आप कल्पना कर सकते हैं कि अगर कोरोना की दूसरी वेव से पहले हमारे फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन नहीं लगी होती तो क्या होता? सोचिए, हमारे डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ को वैक्सीन ना लगी तो क्या होता? अस्पतालों में सफाई करने वाले हमारे भाई-बहनों को, एंबुलेंस के हमारे ड्राइवर्स भाई - बहनों को वैक्सीन ना लगी होती तो क्या होता? ज्यादा से ज्यादा हेल्थ वर्कर्स का वैक्सीनेशन होने की वजह से ही वो निश्चिंत होकर दूसरों की सेवा में लग पाए, लाखों देशवासियों का जीवन बचा पाए।

लेकिन देश में कम होते कोरोना के मामलों के बीच, केंद्र सरकार के सामने अलग-अलग सुझाव भी आने लगे, भिन्न-भिन्न मांगे होने लगीं। पूछा जाने लगा, सब कुछ भारत सरकार ही क्यों तय कर रही है? राज्य सरकारों को छूट क्यों नहीं दी जा रही? राज्य सरकारों को लॉकडाउन की छूट क्यों नहीं मिल रही? One Size Does Not Fit All जैसी बातें भी कही गईं। दलील ये दी गई कि संविधान में चूंकि Health-आरोग्य, प्रमुख रूप से राज्य का विषय है, इसलिए अच्छा है कि ये सब राज्य ही करें। इसलिए इस दिशा में एक शुरूआत की गई। भारत सरकार ने एक बृहद गाइडलाइन बनाकर राज्यों को दी ताकि राज्य अपनी आवश्यकता और सुविधा के अनुसार काम कर सकें। स्थानीय स्तर पर कोरोना कर्फ्यू लगाना हो, माइक्रो कन्टेनमेंट जोन बनाना हो, इलाज से जुड़ी व्यवस्थाएं हो, भारत सरकार ने राज्यों की इन मांगों को स्वीकार किया।

साथियों,

इस साल 16 जनवरी से शुरू होकर अप्रैल महीने के अंत तक, भारत का वैक्सीनेशन कार्यक्रम मुख्यत: केंद्र सरकार की देखरेख में ही चला। सभी को मुफ्त वैक्सीन लगाने के मार्ग पर देश आगे बढ़ रहा था। देश के नागरिक भी, अनुशासन का पालन करते हुए, अपनी बारी आने पर वैक्सीन लगवा रहे थे। इस बीच, कई राज्य सरकारों ने फिर कहा कि वैक्सीन का काम डी-सेंट्रलाइज किया जाए और राज्यों पर छोड़ दिया जाए। तरह-तरह के स्वर उठे। जैसे कि वैक्सीनेशन के लिए Age Group क्यों बनाए गए? दूसरी तरफ किसी ने कहा कि उम्र की सीमा आखिर केंद्र सरकार ही क्यों तय करे? कुछ आवाजें तो ऐसी भी उठीं कि बुजुर्गों का वैक्सीनेशन पहले क्यों हो रहा है? भांति-भांति के दबाव भी बनाए गए, देश के मीडिया के एक वर्ग ने इसे कैंपेन के रूप में भी चलाया।

साथियों,

काफी चिंतन-मनन के बाद इस बात पर सहमति बनी कि राज्य सरकारें अपनी तरफ से भी प्रयास करना चाहती हैं, तो भारत सरकार क्यों ऐतराज करे? और भारत सरकार ऐतराज क्यों करे? राज्यों की इस मांग को देखते हुए, उनके आग्रह को ध्यान में रखते हुए 16 जनवरी से जो व्यवस्था चली आ रही थी, उसमें प्रयोग के तौर पर एक बदलाव किया गया। हमने सोचा कि राज्य ये मांग कर रहे हैं, उनका उत्साह है, तो चलो भई 25 प्रतिशत काम उन्ही की शोपित कर दिया जाये, उन्ही को दे दिया जाए। स्वभाविक है, एक मई से राज्यों को 25 प्रतिशत काम उनके हवाले दिया गया, उसे पूरा करने के लिए उन्होंने अपने-अपने तरीके से प्रयास भी किए। 

इतने बड़े काम में किस तरह की कठिनाइयां आती हैं, ये भी उनके ध्यान में आने लगा, उनको पता चला। पूरी दुनिया में वैक्सीनेशन की क्या स्थिति है, इसकी सच्चाई से भी राज्य परिचित हुए। और हमने देखा, एक तरफ मई में सेकेंड वेव, दूसरी तरफ वैक्सीन के लिए लोगों का बढ़ता रुझान और तीसरी तरफ राज्य सरकारों की कठिनाइयां। मई में दो सप्ताह बीतते-बीतते कुछ राज्य खुले मन से ये कहने लगे कि पहले वाली व्यवस्था ही अच्छी थी। धीरे-धीरे इसमें कई राज्य सरकारें जुड़ती चली गईं। वैक्सीन का काम राज्यों पर छोड़ा जाए, जो इसकी वकालत कर रहे थे, उनके विचार भी बदलने लगे। ये एक अच्छी बात रही कि समय रहते राज्य, पुनर्विचार की मांग के साथ फिर आगे आए। राज्यों की इस मांग पर, हमने भी सोचा कि देशवासियों को तकलीफ ना हो, सुचारू रूप से उनका वैक्सीनेशन हो, इसके लिए एक मई के पहले वाली, यानि 1 मई के पहले 16 जनवरी से अप्रैल अंत तक जो व्यवस्था थी, पहले वाली पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू किया जाए।

 

साथियों,

आज ये निर्णय़ लिया गया है कि राज्यों के पास वैक्सीनेशन से जुड़ा जो 25 प्रतिशत काम था, उसकी जिम्मेदारी भी भारत सरकार उठाएगी। ये व्यवस्था आने वाले 2 सप्ताह में लागू की जाएगी। इन दो सप्ताह में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर नई गाइड-लाइंस के अनुसार आवश्यक तैयारी कर लेंगी। संयोग है कि दो सप्ताह बाद, 21 जून को ही अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भी है। 21 जून, सोमवार से देश के हर राज्य में, 18 वर्ष से ऊपर की उम्र के सभी नागरिकों के लिए, भारत सरकार राज्यों को मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराएगी। वैक्सीन निर्माताओं से कुल वैक्सीन उत्पादन का 75 प्रतिशत हिस्सा भारत सरकार खुद ही खरीदकर राज्य सरकारों को मुफ्त देगी। यानि देश की किसी भी राज्य सरकार को वैक्सीन पर कुछ भी खर्च नहीं करना होगा। अब तक देश के करोड़ों लोगों को मुफ्त वैक्सीन मिली है।

 अब 18 वर्ष की आयु के लोग भी इसमें जुड़ जाएंगे। सभी देशवासियों के लिए भारत सरकार ही मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध करवाएगी। गरीब हों, निम्न मध्यम वर्ग हों, मध्यम वर्ग हो या फिर उच्च वर्ग, भारत सरकार के अभियान में मुफ्त वैक्सीन ही लगाई जाएगी। हां, जो व्यक्ति मुफ्त में वैक्सीन नहीं लगवाना चाहते, प्राइवेट अस्पताल में वैक्सीन लगवाना चाहते हैं, उनका भी ध्यान रखा गया है। देश में बन रही वैक्सीन में से 25 प्रतिशत,  प्राइवेट सेक्टर के अस्पताल सीधे ले पाएं, ये व्यवस्था जारी रहेगी। प्राइवेट अस्पताल, वैक्सीन की निर्धारित कीमत के उपरांत एक डोज पर अधिकतम 150 रुपए ही सर्विस चार्ज ले सकेंगे। इसकी निगरानी करने का काम राज्य सरकारों के ही पास रहेगा।

साथियों,

हमारे शास्त्रों में कहा गया है-प्राप्य आपदं न व्यथते कदाचित्, उद्योगम् अनु इच्छति चा प्रमत्तः॥ अर्थात्, विजेता आपदा आने पर उससे परेशान होकर हार नहीं मानते, बल्कि उद्यम करते हैं, परिश्रम करते हैं, और परिस्थिति पर जीत हासिल करते हैं। कोरोना से लड़ाई में 130 करोड़ से अधिक भारतीयों ने अभी तक की यात्रा आपसी सहयोग, दिन रात मेहनत करके तय की है। आगे भी हमारा रास्ता हमारे श्रम और सहयोग से ही मजबूत होगा। हम वैक्सीन प्राप्त करने की गति भी बढ़ाएंगे और वैक्सीनेशन अभियान को भी और गति देंगे। हमें याद रखना है कि, भारत में वैक्सीनेशन की रफ्तार आज भी दुनिया में बहुत तेज है, अनेक विकसित देशों से भी तेज है। हमने जो टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बनाया है- Cowin, उसकी भी पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। अनेक देशों ने भारत के इस प्लेटफॉर्म को इस्तेमाल करने में रुचि भी दिखाई है। हम सब देख रहे हैं कि वैक्सीन की एक एक डोज कितनी महत्वपूर्ण है, हर डोज से एक जिंदगी जुड़ी हुई है। केंद्र सरकार ने ये व्यवस्था भी बनाई है कि हर राज्य को कुछ सप्ताह पहले ही बता दिया जाएगा कि उसे कब, कितनी डोज मिलने वाली है। मानवता के इस पवित्र कार्य में वाद-विवाद और राजनीतिक छींटाकशी, ऐसी बातों को कोई भी अच्छा नहीं मानता है। वैक्सीन की उपलब्धता के अनुसार, पूरे अनुशासन के साथ वैक्सीन लगती रहे, देश के हर नागरिक तक हम पहुंच सकें, ये हर सरकार, हर जनप्रतिनिधि, हर प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।

प्रिय देशवासियों,

टीकाकरण के अलावा आज एक और बड़े फैसले से मैं आपको अवगत कराना चाहता हूं। पिछले वर्ष जब कोरोना के कारण लॉकडाउन लगाना पड़ा था तो प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत, 8 महीने तक 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को मुफ्त राशन की व्यवस्था हमारे देश ने की थी। इस वर्ष भी दूसरी वेव के कारण मई और जून के लिए इस योजना का विस्तार किया गया था। आज सरकार ने फैसला लिया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अब दीपावली तक आगे बढ़ाया जाएगा। महामारी के इस समय में, सरकार गरीब की हर जरूरत के साथ, उसका साथी बनकर खड़ी है। यानि नवंबर तक 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को, हर महीने तय मात्रा में मुफ्त अनाज उपलब्ध होगा। इस प्रयास का मकसद यही है कि मेरे किसी भी गरीब भाई-बहन को, उसके परिवार को, भूखा सोना ना पड़े।

साथियों,

देश में हो रहे इन प्रयासों के बीच कई क्षेत्रों से वैक्सीन को लेकर भ्रम और अफवाहों की  चिंता बढ़ाती है। ये चिंता भी मैं आपके सामने व्यक्त करना चाहता हूं। जब से भारत में वैक्सीन पर काम शुरू हुआ, तभी से कुछ लोगों द्वारा ऐसी बातें कही गईं जिससे आम लोगों के मन में शंका पैदा हो। कोशिश ये भी हुई कि भारत के वैक्सीन निर्माताओं का हौसला पस्त पड़ जाए और उनके सामने अनेक प्रकार की बाधाएं आएं। जब भारत की वैक्सीन आई तो अनेक माध्यमों से शंका-आशंका को और बढ़ाया गया। वैक्सीन न लगवाने के लिए भांति-भांति के तर्क प्रचारित किए गए। इन्हें भी देश देख रहा है। जो लोग भी वैक्सीन को लेकर आशंका पैदा कर रहे हैं, अफवाहें फैला रहे हैं, वो भोले-भाले भाई-बहनों के जीवन के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं।

ऐसी अफवाहों से सतर्क रहने की जरूरत है। मैं भी आप सबसे, समाज के प्रबुद्ध लोगों से, युवाओं से अनुरोध करता हूँ, कि आप भी वैक्सीन को लेकर जागरूकता बढ़ाने में सहयोग करें। अभी कई जगहों पर कोरोना कर्फ्यू में ढील दी जा रही है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हमारे बीच से कोरोना चला गया है। हमें सावधान भी रहना है, और कोरोना से बचाव के नियमों का भी सख्ती से पालन करते रहना है। मुझे पूरा विश्वास है, हम सब कोरोना से इस जंग में जीतेंगे, भारत कोरोना से जीतेगा। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, आप सभी देशवासियों का बहुत बहुत धन्यवाद!