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मंच पर विराजमान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, हम सबके मार्गदर्शक आदरणीय राजनाथ सिंह जी, गुजरात प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान आर. सी. फलदू जी, श्रीमान रूपाला जी, श्री वी. सतीश जी, कैप्टन अभिमन्यु जी, अमितभाई शाह, स्मृति बहन, मंत्री परिषद के मेरे सभी साथी, संसद सदस्य श्री, पार्टी के सभी वरिष्ठ साथी और गुजरात के कोने-कोने से आए हुए पार्टी के सभी कार्यकर्ता भाइयों और बहनों..!

ज 6 अप्रैल है। भारतीय जनता पार्टी के रुप में हमारी विकास यात्रा के 32 वर्ष पूर्ण हो करके 33 वें वर्ष में हम लोग प्रयाण कर रहे हैं। भाइयों-बहनों, 33 वर्ष की यात्रा पूरे हिन्दुस्तान के अंदर एक नई आशा को जन्म देने वाली यात्रा है। भारतीय जनता पार्टी का जन्म उस समय हुआ था जब कुछ निजी स्वार्थ वाले तत्व अपने निहित स्वार्थ के खातिर नए नए सवाल उठा कर के देश में कोई आल्टरनेट पनपे नहीं उस षडयंत्र के शिकार हुए थे। एक सौ से ज्यादा सदस्य वाले सदन में आए दिन भारतीय जनता पार्टी को अपमानित करने का प्रयास होता था। लोकतंत्र की मर्यादाओं को तोड़ा जाता था और उस पीड़ा में से, उस दर्द में से सत्ता के मार्ग को छोड कर के जनता के बीच जाने का फैसला भारतीय जनता पार्टी ने लिया था और तब से हमारे वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में, कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम से इस पार्टी ने जनसामान्य की आशा-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए प्रयास प्रारंभ किया था। भारतीय जनता पार्टी का जन्म सत्ता भूख में से नहीं हुआ है, भारतीय जनता पार्टी का जन्म सत्ता के दलालों की भलाई करने के लिए नहीं हुआ है। इस पार्टी का जन्म देश के कोटी-कोटी नागरिकों के भाग्य को बदलने के लिए हुआ है, कल्याण के लिए हुआ है। और जब कोई अच्छा काम करता है तो रूकावटें भी कम नहीं आती है। भाइयों-बहनों, कभी मैं केरल की तरफ देखता हूँ। क्या कारण है कि साम्यवादियों के लगातार हमलों के बावजूद भी, हमारे सैंकड़ों कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतारने के बावजूद भी, चाहे केरल हो या बंगाल हो भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता जीत मिले या ना मिले, जिंदगी खपा देने में कभी कमी नहीं रखता..! क्या कारण है कि सत्ता के गलियारों से दूर-दूर का नाता नहीं होने के बावजूद भी, एक भारत माता की जय के लिए अपना जीवन न्यौछावर करने वाले लक्षावती लोग आज भारतीय जनता पार्टी का कमल का झंडा उठा कर के चल रहे हैं..!

मैं दिल्ली में बैठे हुए शासकों को चेतावनी देता हूँ कि अगर आप सोचते हैं कि आपकी सी.बी.आई. के हमले भारतीय जनता पार्टी को निराश करेंगे, तो आप सोचने में गलती कर रहे हैं। आपको लगता है कि अपने गर्वनरों के माध्यम से आप भारतीय जनता पार्टी की सरकारों को परेशान करोगे, तो आप लिख कर रखिए, जहाँ भाजपा की सरकारें हैं, वहाँ की जनता दिल्ली सरकार के और काँग्रेस पार्टी के इस रवैये का चुन-चुन के जवाब देती है और देती रहेगी..! सारी संवैधानिक संस्थाओं को भारतीय जनता पार्टी की सरकारो को परेशान करना, भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को परेशान करना, भारतीय जनता पार्टी के दल को परेशानियों में डालना, इसी के लिए उपयोग में लाया जाता है। कांग्रेस के मित्रों, ये दिल्ली में आपकी सत्ता का नशा लंबे दिनों तक रहने वाला नहीं है..!

भाइयों-बहनों, कांग्रेस में और भारतीय जनता पार्टी में बहुत बड़ा अंतर है। भारतीय जनता पार्टी की सोच और कांग्रेस पार्टी की सोच के बीच कभी कोई मेल नहीं हो सकता। भाजपा के चरित्र और कांग्रेस के चरित्र की कभी कोई तुलना नहीं कर सकता। भाइयो-बहनों, कांग्रेस जिन पर आस लगा कर बैठी है, जिनके शब्द कांग्रेस की नीति माने जाते हैं, ऐसे एक नेता का मैंने दो दिन पूर्व मैंने एक भाषण सुना। मित्रों, मुझे बहुत गहरा धक्का लगा, मन को एक पीड़ा हुई के क्या ये लोग देश के विषय में ऐसा सोचते हैं..? भाइयों-बहनों, कांग्रेस के एक नेता कह रहे हैं और कांग्रेस पार्टी की सोच को प्रकट कर रहे हैं कि ये भारत देश मधुमक्खियों का छत्ता है। मेरे कांग्रेस के मित्रों, आपके लिये ये देश मधुमक्खी का छाता हो सकता है, हमारे लिए ये देश हमारी माँ है..! ये भारत हमारी माता है, इसके सौ करोड देशवासी हमारे भाई-बहन हैं..! ये पवित्र भूमि है, ये ऋषि-मुनियों की भूमी है। अटल बिहारी वाजपेयी कहा करते थे कि यहाँ का कंकर-कंकर हमारे लिए शंकर है। अटल बिहारी बाजपेयी कहा करते थे कि गंगा जी में बहती हुई हमारी हड्डी को कान में लाकर सुनोगे तो उस हड्डी में से भी आवाज आएगी, भारत माता की जय..! ये हमारे संस्कार है। हमारे लिए ये माँ है माँ..! इस माँ की पीड़ा हम देख नहीं सकते हैं। ये हमारी माँ है, जिसके संतानों का दु:ख-दर्द हमारी चिंता का कारण है। आपके लिए ये मधुमक्खी का छाता हो सकता है, हमारे लिए तो हमारी माँ है..! और मेहरबानी करके कांग्रेस के मित्रों, हमारी भारत माता का अपमान मत करो..! आपको अगर हिन्दुस्तान के लोगों की भाषा समज नहीं आती है तो कहीं से सीखा करो, लेकिन आपके अज्ञान के कारण मेरे देश की संस्कृति और परंपरा को बर्बाद करने का पाप मत करो..! भाइयो और बहनों, मैं कभी किसी नेता के भाषण पर समय बर्बाद नहीं करता, क्योंकि वो ध्यान देने योग्य होते भी नहीं हैं। लेकिन जब हमारी भावनाओं पर चोट पहुंचाई जाती है तब इस माँ के कल्याण के लिए जीवन खपाने वाले लक्षावती कार्यकर्ता को पीड़ा होनी बहुत स्वाभाविक है।

भाइयों-बहनों, मैं हैरान हूँ..! इस देश में पानी की समस्या है इसका देश के नेताओं को अता-पता भी नहीं है। आप पर हमें दया आती है..! हमारे गुजरात कांग्रेस के नेता पानी को लेकर के गुजरात के किसानों को, गुजरात के नागरिकों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। मैं कांग्रेस के मित्रों को प्रार्थना करता हूँ, आवाहन भी करता हूँ कि अगर आपको गुजरात के किसानों की इतनी चिंता है, अगर आपको गुजरात के गांव में पानी की चिंता है और सच्चे दिल से चिंता है तो आप समय बर्बाद किये बिना दिल्ली की आपकी सरकार पर दबाव डालो और सरदार सरोवर डेम की ऊंचाई का काम जो रुका हुआ है, उसको पहले पूरा करो..! मेरे पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं, गाँव-गाँव से आवाज उठनी चाहिए, नर्मदा डैम को पूर्ण करने के लिए अब हम ज्यादा इंतजार नहीं करेंगे..! हम दिल्ली के तख्त के साथ लड़ाई लड़ेंगे और कांग्रेस के लोगों को हर गली-मौहल्ले में जवाब देना पड़ेगा।

भाइयो-बहनों, कांग्रेस पार्टी से सुधरने की अपेक्षा मत करना, वो कभी नहीं सुधर सकते..! इस चुनाव में गुजरात की जनता ने जिस प्रकार से कांग्रेस पार्टी को सजा दी है, जिस प्रकार से उनके एक-एक दिग्गज नेताओं को गुजरात की जनता ने परास्त कर दिया है... जिस भाषा का पिछले पांच साल से वे प्रयोग कर रहे थे, जिस झूठ के सहारे गुजरात की जनता को गुमराह करने का रात-दिन प्रयास रहे थे, जिस गंदी गालियों का उपयोग किया जा रहा था... गुजरात की जनता ने उस भाषा को बोलने वालों को चुन-चुन कर साफ कर दिया। आशा थी कि वे समझेंगे, सुधरेंगे और लोकतंत्र की मार्यादाओं का पालन करेंगे, लेकिन भाइयों और बहनों, इस सरकार को अभी तो कल 101 दिन हुए हैं, लेकिन 100 दिन भी वे इंतजार करने को तैयार नहीं हैं, उनकी मन:स्थिति क्या होगी इसका आप अंदाजा लगा सकते हो..!

भाइयों-बहनों, भारतीय जनता पार्टी विकास के मंत्र को लेकर चली है। आज गुजरात की धरती पर हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष पधारे हैं तब मैं गुजरात की जनता की ओर से उनसे कहना चाहता हूँ कि आज चारों तरफ आपने इतना बड़ा दिल बताया है, सार्वजनिक जीवन में इतनी ऊंचाई का अनुभव करवाया है, मेरे जैसे छोटे कार्यकर्ता को आपने बहुत बड़ा बड़प्पन दिया है। भाइयों-बहनों, राजनीति में ये छोटी घटना नहीं होती है। अपने साथी को इस ऊंचाई तक ले जाने के लिए बहुत बड़ा दिल लगता है..! लेकिन मैं आज कहना चाहता हूँ कि आपने जो मुझ मान-सम्मान दिया है, आपने जो मेरी इज्जत की है, देश भर के कार्यकर्ताओं के दिलों में मेरी जगह बनाने के लिए आपने कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन ये यश भले ही मोदी को मिलता होगा, नाम भले ही मोदी का लिया जाता होगा, लेकिन इस यश के हकदार ये सारे मेरे भाई-बहन हैं, मेरे कार्यकर्ता हैं..! मेरे कार्यकर्ता भाइयों-बहनों, आपने परिश्रम ना किया होता, आपने विकास में विश्वास ना किया होता, आपने इस देश की भलाई के मंत्र को चरित्रार्थ ना किया होता, तो नरेन्द्र मोदी को कौन पहचानने वाला था..? ये पहचान आपके कारण बनी है, आपके पुरषार्थ के कारण बनी है, आपके त्याग और तपश्चर्या के कारण बनी है। और आज जब भारतीय जनता पार्टी का जन्म दिन है मैं आप सब का अभिनंदन करता हूँ, आप सबको वंदन करता हूँ..! मेरे कार्यकर्ता भाइयो-बहनों, मैंने पहले ही दिन जब से कार्य संभाला है, उस दिन से मैंने कहा है, आज मैं दोबारा दोहराता हूँ कि मैं परिश्रम में कोई कमी नहीं रखूँगा, मैं बद इरादे से कोई पाप नहीं करूंगा..! भाइयों-बहनों, जब मैं कहता हूँ कि इंडिया फर्स्ट, तो उस लक्ष्य से, उस मार्ग से भारतीय जनता पार्टी कभी चलित नहीं हो सकती। हमारे लिए दल से बड़ा देश है। हम देश के लिए जीने-मरने वाले लोग हैं। गली-मौहल्ले में भी काम करेंगे लेकिन भारत माता के लिए करेंगे। हम गुजरात की सेवा करते हैं लेकिन हमारा तो मंत्र है, ‘भारत के विकास के लिए गुजरात का विकास’..! हम सबको इस माँ भारती के कल्याण के लिए, निराशा की गर्त में डूबे हुए सामाज में एक नया विश्वास पैदा करने के लिए अपने इस कार्य को हमें करते रहना है।

भाइयो-बहनों, भारतीय जनता पार्टी आज पूरे देश में एक आशा की किरण बनी हुई है। और ये बात पॉलिटिकल पंडित हैं वो जानें। पॉलिटिकल पार्टीयों का जन्म होने के बाद अस्सी-अस्सी साल तक उन्हें सत्ता स्थान पर पहुंचने का मौका नहीं मिला हो, ऐसे दुनिया में कई उदाहरण हैं। ये भारतीय जनता पार्टी है। इतना बड़ा देश, इतना बड़ा लोकतंत्र, लेकिन जन्म से जवानी की यात्रा पूरी होने से पहले तक पहुंचते-पहुंचते, इस देश की जनता ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हमें सेवा करने का मौका दिया था। इंग्लैंड की लेबर पार्टी को अस्सी साल तक मौका नहीं मिला था। भारतीय जनता पार्टी को जन्म से जवानी की यात्रा पूरी होने से पहले देश की जनता ने उस पर अमी वर्षा कर दी थी। आप कल्पना कर सकते हो कि लोग कांग्रेस से कितने तंग आ गए हैं, लोग देश की तबाही से कितने तंग आ चुके हैं..! और तब जा करके भाइयो-बहनों, भारत माँ का भाग्य बदलना ये भारतीय जनता पार्टी के हर कार्यकर्ता का दायित्व है। स्वामी विवेकानंद जी की स्मृती में हम ये 150 वां वर्ष मना रहे हैं। विवेकानंद जी का सपना पूरा करने के लिए देशवासियों को बाहर से नई प्रेरणा की जरूरत नहीं है। विवेकानंद जी के शब्द काफी है, विवेकानंद जी का संदेश काफी है, विवेकानंद जी का जीवन काफी है..! उससे प्रेरणा लेकर के एक नए उमंग और विश्वास के साथ आगे बढ़ना है।

भाइयो-बहनों, आज भारतीय जनता पार्टी जहाँ भी पहुँची है, गुजरात में भारतीय जनता पार्टी ने जो स्थिति पैदा की है वो किसी एक व्यक्ति के कारण नहीं है। पीढ़ियाँ की पीढ़ियाँ बीत गई, परिवार के परिवार इस पार्टी के लिए खप गए हैं। एक जमाना था, अगर मंहगाई के लिए भाजपा के कार्यकर्ता जुलूस निकालते थे तो 21-21 दिन की सजा हुआ करती थी। पूरा परिवार 21-21 दिन तक गुजरात की जेलों में रहने के लिए मजबूर हुआ करता था। ऐसे अनेक कार्यकर्ताओं के परिश्रम के कारण ये पार्टी यहाँ पहुँची है। इस पार्टी को यहाँ तक पहुँचाने वाले, अपने परिवारों को खपा देने वाले, अपनी जवानी को खपा देने वाले उन लक्षावधी कार्यकर्ताओं का मैं आज पुण्य स्मरण करता हूँ, उनका अभिनंदन करता हूँ, उनको वंदन करता हूँ..!

भाइयो-बहनों, एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आज हमको करना है। हम यहाँ से संकल्प लेकर के जाने वाले हैं। हमारे पार्टी के पूर्व अध्यक्ष श्रीमान् रूपाला जी हम सबको एक संकल्प दिलाने वाले हैं। लेकिन इस संकल्प की भी एक विशेषता है। हमारे हाथ में एक मोमबत्ती दी गई है, जो जलानी है। जब मोमबत्ती जलाएंगे तो ये सारी रोशनी बंद होने वाली है। भाइयों-बहनों, ये प्रकाश की ओर जाने का संदेश है और घर-घर, गाँव-गाँव कमल खिलाने का संदेश है। और जो लोग भारतीय जनता पार्टी को दिन-रात गाली देते हैं, नई-नई डिक्शनरी के शब्द निकालते हैं वे कान खोल कर के सुन लें, आप भारतीय जनता पार्टी पर जितना ज्यादा कीचड़ उछालोगे कमल उतना ही ज्यादा खिलने वाला है। उस कमल के संदेश को ले कर के आईये भाइयो-बहनों, आज अपनी पार्टी के 33 वर्ष की यात्रा का गौरव करते हुए एक नई यात्रा का शुभ संकल्प करके चलें। मेरी आप सब से प्रार्थना है कि आप सबको जो मोमबत्ती दी गई है उसको जलाया जाए और यहाँ की व्यवस्था वालों से मेरी प्रार्थना है कि स्टेडियम में और लाइटें बंद करके इस नजारे का अनुभव किया जाए और जब तक ये विधि पूरी नहीं होती है, हम अपना स्थान छोड़ेगें नहीं, हम जाएंगे नहीं। मेरे साथ बोलिए -

भारत माता की जय..!

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Empowerment of the poor is being given top priority today: PM Modi
August 03, 2021
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Earlier, the scope and budget of cheap ration schemes kept on increasing but starvation and malnutrition did not decrease in that proportion: PM
Beneficiaries are getting almost double the earlier amount of ration after Pradhan Mantri Garib Kalyan Anna Yojana started: PM
More than 80 crore people people are getting free ration during the pandemic with an expenditure of more than 2 lakh crore rupees: PM
No citizen went hungry despite the biggest calamity of the century: PM
Empowerment of the poor is being given top priority today: PM
New confidence of our players is becoming the hallmark of New India: PM
Country is moving rapidly towards the vaccination milestone of 50 crore: PM
Let's take holy pledge to awaken new inspiration for nation building on Azadi ka Amrit Mahotsav: PM

नमस्‍कार! गुजरात के मुख्यमंत्री श्री विजय रुपाणी जी, उप-मुख्यमंत्री श्री नितिन भाई पटेल जी, संसद में मेरे साथी और गुजरात भाजपा के अध्यक्ष श्रीमान सी. आर. पाटिल जी, पी एम गरीब कल्याण अन्न योजना के सभी लाभार्थी, भाइयों और बहनों!

बीते वर्षों में गुजरात ने विकास और विश्वास का जो अनवरत सिलसिला शुरु किया, वो राज्य को नई ऊंचाई पर ले जा रहा है। गुजरात सरकार ने हमारी बहनों, हमारे किसानों, हमारे गरीब परिवारों के हित में हर योजना को सेवाभाव के साथ ज़मीन पर उतारा है। आज गुजरात के लाखों परिवारों को पी एम गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत एक साथ मुफ्त राशन वितरित किया जा रहा है। ये मुफ्त राशन वैश्विक महामारी के इस समय में गरीब की चिंता कम करता है, उनका विश्वास बढ़ाता है। ये योजना आज से प्रारंभ नहीं हो रही है, योजना तो पिछले एक साल से करीब-करीब चल रही है ताकि इस देश का कोई गरीब भूखा ना सो जाए।

मेरे प्‍यारे भाईयों और बहनों,

गरीब के मन में भी इसके कारण विश्‍वास पैदा हुआ है। ये विश्वास, इसलिए आया है क्योंकि उनको लगता है कि चुनौती चाहे कितनी भी बड़ी हो, देश उनके साथ है। थोड़ी देर पहले मुझे कुछ लाभार्थियों के साथ बातचीत करने का अवसर मिला, उस चर्चा में मैंने अनुभव भी किया कि एक नया आत्‍मविश्‍वास उनके अन्‍दर भरा हुआ है।

साथियों,

आज़ादी के बाद से ही करीब-करीब हर सरकार ने गरीबों को सस्ता भोजन देने की बात कही थी। सस्ते राशन की योजनाओं का दायरा और बजट साल दर साल बढ़ता गया, लेकिन उसका जो प्रभाव होना चाहिए था, वो सीमित ही रहा। देश के खाद्य भंडार बढ़ते गए, लेकिन भुखमरी और कुपोषण में उस अनुपात में कमी नहीं आ पाई। इसका एक बड़ा कारण था कि प्रभावी डिलिवरी सिस्टम का ना होना और कुछ बिमारियाँ भी आ गईं व्‍यवस्‍थाओं में, कुछ cut की कंपनियाँ भी आ गईं, स्‍वार्थी तत्‍व भी घुस गये। इस स्थिति को बदलने के लिए साल 2014 के बाद नए सिरे से काम शुरु किया गया। नई technology को इस परिवर्तन का माध्यम बनाया गया। करोड़ों फर्ज़ी लाभार्थियों को सिस्टम से हटाया। राशन कार्ड को आधार से लिंक किया और सरकारी राशन की दुकानों में digital technology को प्रोत्साहित किया गया। आज परिणाम हमारे सामने है।

भाइयों और बहनों,

सौ साल की सबसे बड़ी विपत्ति सिर्फ भारत पर नहीं, पूरी दुनिया पर आई है, पूरी मानव जाति पर आई है। आजीविका पर संकट आया, कोरोना लॉकडाउन के कारण काम-धंधे बंद करने पड़े। लेकिन देश ने अपने नागरिकों को भूखा नहीं सोने दिया। दुर्भाग्य से दुनिया के कई देशों के लोगों पर आज संक्रमण के साथ-साथ भुखमरी का भी भीषण संकट आ गया है। लेकिन भारत ने संक्रमण की आहट के पहले दिन से ही, इस संकट को पहचाना और इस पर काम किया। इसलिए, आज दुनियाभर में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की प्रशंसा हो रही है। बड़े-बड़े expert इस बात की तारीफ कर रहे हैं कि भारत अपने 80 करोड़ से अधिक लोगों को इस महामारी के दौरान मुफ्त अनाज उपलब्ध करा रहा है। इस पर 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक ये देश खर्च कर रहा है। मकसद एक ही है- कोई भारत का मेरा भाई-बहन, मेरा कोई भारतवासी भूखा ना रहे। आज 2 रुपए किलो गेहूं, 3 रुपए किलो चावल के कोटे के अतिरिक्त हर लाभार्थी को 5 किलो गेहूं और चावल मुफ्त दिया जा रहा है। यानि इस योजना से पहले की तुलना में राशन कार्ड धारकों को लगभग डबल मात्रा में राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। ये योजना दीवाली तक चलने वाली है, दिवाली तक किसी गरीब को पेट भरने के लिये अपनी जेब से पैसा नहीं निकालना पड़ेगा। गुजरात में भी लगभग साढ़े 3 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त राशन का लाभ आज मिल रहा है। मैं गुजरात सरकार की इस बात के लिए भी प्रशंसा करूंगा कि उसने देश के दूसरे हिस्सों से अपने यहां काम करने आए श्रमिकों को भी प्राथमिकता दी। कोरोना लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुए लाखों श्रमिकों को इस योजना का लाभ मिला है। इसमें बहुत सारे ऐसे साथी थे, जिनके पास या तो राशन कार्ड था ही नहीं, या फिर उनका राशन कार्ड दूसरे राज्यों का था। गुजरात उन राज्यों में है जिसने सबसे पहले वन नेशन, वन राशन कार्ड की योजना को लागू किया। वन नेशन, वन राशन कार्ड का लाभ गुजरात के लाखों श्रमिक साथियों को हो रहा है।

भाइयों और बहनों,

एक दौर था जब देश में विकास की बात केवल बड़े शहरों तक ही सीमित होती थी। वहाँ भी, विकास का मतलब बस इतना ही होता था कि ख़ास-ख़ास इलाकों में बड़े बड़े flyovers बन जाएं, सड़कें बन जाएं, मेट्रो बन जाएं! यानी, गाँवों-कस्बों से दूर, और हमारे घर के बाहर जो काम होता था, जिसका सामान्‍य मानवी से लेना-देना नहीं था उसे विकास माना गया। बीते वर्षों में देश ने इस सोच को बदला है। आज देश दोनों दिशाओं में काम करना चाहता है, दो पटरी पर चलना चाहता है। देश को नए infrastructure की भी जरूरत है। Infrastructure पर भी लाखों-करोड़ों खर्च हो रहा है, उससे लोगों को रोजगार भी मिल रहा है, लेकिन साथ ही, सामान्य मानवी के जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए, Ease of Living के लिए नए मानदंड भी स्थापित कर रहे हैं। गरीब के सशक्तिकरण, को आज सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। जब 2 करोड़ गरीब परिवारों को घर दिये जाते हैं तो इसका मतलब होता है कि वो अब सर्दी, गर्मी, बारिश के डर से मुक्त होकर जी पायेगा, इतना ही नहीं, जब खुद का घर होता है ना तो आत्‍मसम्‍मान से उसका जीवन भर जाता है। नए संकल्‍पों से जुड़ जाता है और उन संकल्‍पों को साकार करने के लिये गरीब परिवार समेत जी जान से जुट जाता है, दिन रात मेहनत करता है। जब 10 करोड़ परिवारों को शौच के लिए घर से बाहर जाने की मजबूरी से मुक्ति मिलती है तो इसका मतलब होता है कि उसका जीवन स्तर बेहतर हुआ है। वो पहले सोचता था कि सुखी परिवारों के घर में ही toilet होता है, शौचालय उन्‍हीं के घर में होता है। गरीब को तो बेचारे को अंधेरे का इंतजार करना पड़ता है, खुले में जाना पड़ता है। लेकिन जब गरीब को शौचालय मिलता है तो वो अमीर की बराबरी में अपने आप को देखता है, एक नया विश्‍वास पैदा होता है। इसी तरह, जब देश का गरीब जन-धन खातों के जरिए बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ता है, मोबाइल बैंकिंग गरीब के भी हाथ में होती है तो उसे ताकत मिलती है, उसे नए अवसर मिलते हैं। हमारे यहाँ कहा जाता है-

सामर्थ्य मूलम्
सुखमेव लोके!

अर्थात्, हमारे सामर्थ्य का आधार हमारे जीवन का सुख ही होता है। जैसे हम सुख के पीछे भागकर सुख हासिल नहीं कर सकते बल्कि उसके लिए हमें निर्धारित काम करने होते हैं, कुछ हासिल करना होता है। वैसे ही सशक्तिकरण भी स्वास्थ्य, शिक्षा, सुविधा और गरिमा बढ़ने से होता है। जब करोड़ों गरीबों को आयुष्मान योजना से मुफ्त इलाज मिलता है, तो स्वास्थ्य से उनका सशक्तिकरण होता है। जब कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण की सुविधा सुनिश्चित की जाती है तो इन वर्गों का शिक्षा से सशक्तिकरण होता है। जब सड़कें शहरों से गाँवों को भी जोड़ती हैं, जब गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन, मुफ्त बिजली कनेक्शन मिलता है तो ये सुविधाएं उनका सशक्तिकरण करती हैं। जब एक व्यक्ति को स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सुविधाएं मिलती हैं तो वो अपनी उन्नति के बारे में, देश की प्रगति में सोचता है। इन सपनों को पूरा करने के लिए आज देश में मुद्रा योजना है, स्वनिधि योजना है। भारत में ऐसी अनेकों योजनाएं गरीब को सम्मानपूर्ण जीवन का मार्ग दे रही हैं, सम्मान से सशक्तिकरण का माध्यम बन रही हैं।

भाइयों और बहनों,

जब सामान्य मानवी के सपनों को अवसर मिलते हैं, व्यवस्थाएं जब घर तक खुद पहुँचने लगती हैं तो जीवन कैसे बदलता है, ये गुजरात बखूबी समझता है। कभी गुजरात के एक बड़े हिस्से में लोगों को, माताओं-बहनों को पानी जैसी जरूरत के लिए कई-कई किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था। हमारी सभी माताएं-बहनें साक्षी हैं। ये राजकोट में तो पानी के लिये ट्रेन भेजनी पड़ती थी। राजकोट में तो पानी लेना है तो घर के बाहर गड्ढा खोदकर के नीचे पाइप में से पानी एक-एक कटोरी लेकर के बाल्‍टी भरनी पड़ती थी। लेकिन आज, सरदार सरोवर बांध से, साउनी योजना से, नहरों के नेटवर्क से उस कच्छ में भी मां नर्मदा का पानी पहुंच रहा है, जहां कोई सोचता भी नहीं था और हमारे यहां तो कहा जाता था कि मां नर्मदा के स्‍मरण मात्र से पूण्‍य मिलता है, आज तो स्‍वयं मां नर्मदा गुजरात के गांव-गांव जाती है, स्‍वयं मां नर्मदा घर-घर जाती है, स्‍वयं मां नर्मदा आपके द्वार आकर के आपको आशीर्वाद देती है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज गुजरात शत-प्रतिशत नल से जल उपलब्ध कराने के लक्ष्य से अब ज्यादा दूर नहीं है। यही गति, आम जन के जीवन में यही बदलाव, अब धीरे धीरे पूरा देश महसूस कर रहा है। आज़ादी के दशकों बाद भी देश में सिर्फ 3 करोड़ ग्रामीण परिवार पानी के नल की सुविधा से जुड़े हुए थे, जिनको नल से जल मिलता था। लेकिन आज जल जीवन अभियान के तहत देशभर में सिर्फ दो साल में, दो साल के भीतर साढ़े 4 करोड़ से अधिक परिवारों को पाइप के पानी से जोड़ा जा चुका है और इसलिये मेरी माताएं-बहनें मुझे भरपूर आशीर्वाद देती रहती हैं।

भाइयों और बहनों,

डबल इंजन की सरकार के लाभ भी गुजरात लगातार देख रहा है। आज सरदार सरोवर बांध से विकास की नई धारा ही नहीं बह रही, बल्कि Statue of Unity के रूप में विश्व के सबसे बड़े आकर्षण में से एक आज गुजरात में है। कच्छ में स्थापित हो रहा Renewable Energy Park, गुजरात को पूरे विश्व के Renewable Energy Map में स्थापित करने वाला है। गुजरात में रेल और हवाई कनेक्टिविटी के आधुनिक और भव्य Infrastructure Project बन रहे हैं। गुजरात के अहमदाबाद और सूरत जैसे शहरों में मेट्रो कनेक्टिविटी का विस्तार तेज़ी से हो रहा है। Healthcare और Medical Education में भी गुजरात में प्रशंसनीय काम हो रहा है। गुजरात में तैयार हुए बेहतर Medical Infrastructure ने 100 साल की सबसे बड़ी Medical Emergency को हैंडल करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

साथियों,

गुजरात सहित पूरे देश में ऐसे अनेक काम हैं, जिनके कारण आज हर देशवासी का, हर क्षेत्र का आत्मविश्वास बढ़ रहा है। और ये आत्मविश्वास ही है जो हर चुनौती से पार पाने का, हर सपने को पाने का एक बहुत बड़ा सूत्र है। अभी ताज़ा उदाहरण है ओलंपिक्स में हमारे खिलाड़ियों का प्रदर्शन। इस बार ओलंपिक्स में भारत के अब तक के सबसे अधिक खिलाड़ियों ने क्वालीफाई किया है। याद रहे ये 100 साल की सबसे बड़ी आपदा से जूझते हुए हमने किया है। कई तो ऐसे खेल हैं जिनमें हमने पहली बार qualify किया है। सिर्फ qualify ही नहीं किया बल्कि कड़ी टक्कर भी दे रहे हैं। हमारे खिलाड़ी हर खेल में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं। इस ओलिंपिक में नए भारत का बुलंद आत्मविश्वास हर game में दिख रहा है। ओलंपिक्स में उतरे हमारे खिलाड़ी, अपने से बेहतर रैंकिंग के खिलाड़ियों को, उनकी टीमों को चुनौती दे रहे हैं। भारतीय खिलाड़ियों का जोश, जुनून और जज़्बा आज सर्वोच्च स्तर पर है। ये आत्मविश्वास तब आता है जब सही टैलेंट की पहचान होती है, उसको प्रोत्साहन मिलता है। ये आत्मविश्वास तब आता है जब व्यवस्थाएं बदलती हैं, transparent होती हैं। ये नया आत्मविश्वास न्यू इंडिया की पहचान बन रहा है। ये आत्मविश्वास आज देश के कोने-कोने में, हर छोटे-छोटे बड़े गांव-कस्बे, गरीब, मध्यम वर्ग के युवा भारत के हर कोने में ये विश्‍वास में आ रहा है।

साथियों,

इसी आत्मविश्वास को हमें कोरोना से लड़ाई में और अपने टीकाकरण अभियान में भी जारी रखना है। वैश्विक महामारी के इस माहौल में हमें अपनी सतर्कता लगातार बनाए रखनी है। देश आज 50 करोड़ टीकाकरण की तरफ तेज़ी से बढ़ रहा है तो, गुजरात भी साढ़े 3 करोड़ वैक्सीन डोसेज के पड़ाव के पास पहुंच रहा है। हमें टीका भी लगाना है, मास्क भी पहनना है और जितना संभव हो उतना भीड़ का हिस्सा बनने से बचना है। हम दुनिया में देख रहे हैं। जहां मास्क हटाए भी गए थे, वहां फिर से मास्क लगाने का आग्रह किया जाने लगा है। सावधानी और सुरक्षा के साथ हमें आगे बढ़ना है।

साथियों,

आज जब हम प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्नयोजना पर इतना बड़ा कार्यक्रम कर रहे हैं तो मैं एक और संकल्प देशवासियों को दिलाना चाहता हूँ। ये संकल्प है राष्ट्र निर्माण की नई प्रेरणा जगाने का। आज़ादी के 75 वर्ष पर, आजादी के अमृत महोत्सव में, हमें ये पवित्र संकल्प लेना है। इन संकल्पों में, इस अभियान में गरीब-अमीर, महिला-पुरुष, दलित-वंचित सब बराबरी के हिस्सेदार हैं। गुजरात आने वाले वर्षों में अपने सभी संकल्प सिद्ध करे, विश्व में अपनी गौरवमयी पहचान को और मजबूत करे, इसी कामना के साथ मैं आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। एक बार फिर अन्न योजना के सभी लाभार्थियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं !!! आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद !!!