पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीय किसानों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए निरंतर मेहनत की है। उन्होंने 'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में खेतों में तकनीक के एकीकरण और मजबूत सहायता प्रणाली के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाया है। सरकार ने योजनाओं का एक मजबूत ढांचा तैयार किया है जो किसानों को वित्तीय स्थिरता, जल सुरक्षा, ऊर्जा पहुंच और इन्फ्रास्ट्रक्चर का समर्थन सुनिश्चित करता है।
प्रधानमंत्री-किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM), पीएम-किसान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY), पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC), वर्षा आधारित क्षेत्र विकास (RAD), सूक्ष्म सिंचाई कोष (MIF), प्राकृतिक खेती पहल, और कृषि अवसंरचना निधि (AIF) जैसी योजनाएं मिलकर किसानों की विविध चुनौतियों का समाधान करती हैं।
ये सभी योजनाएं मिलकर एक मजबूत कृषि पारिस्थितिकी तंत्र बनाती हैं, जो किसानों की आय बढ़ाने, जोखिम घटाने और सतत खेती को बढ़ावा देने का काम कर रही हैं।
PM-KISAN योजना, जो 2019 में शुरू हुई, 11 करोड़ से अधिक किसानों को हर साल 6,000 रुपये की नियमित आय तीन समान किस्तों में देती है। अब तक 19 किस्तों में 3.68 लाख करोड़ रुपये से अधिक वितरित किए जा चुके हैं।
यह योजना किसानों के लिए एक वित्तीय सहारा बनती है, जिससे वे बीज, उपकरण या माइक्रो-इरिगेशन जैसी तकनीकों में निवेश कर सकते हैं। यह आय सहायता न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ोतरी के साथ किसानों को आर्थिक स्थिरता देती है। इससे किसान आधुनिक खेती के तरीकों को अपनाकर अपनी उत्पादकता बढ़ा पाते हैं।
इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट (IFPRI) के एक अध्ययन में उत्तर प्रदेश के किसानों पर यह पाया गया कि जिन किसानों को ये नकद सहायता मिली, वे बीज, उर्वरक, कीटनाशक और खेती के उपकरणों में अधिक निवेश करने लगे।
किसानों को अप्रत्याशित फसल नुकसान से बचाने के लिए, 2016 में शुरू हुई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) व्यापक बीमा कवरेज प्रदान करती है। आठ वर्षों (2016-17 से 2023-24) में 63.23 करोड़ किसान आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें किसानों ने 32,463 करोड़ रुपये प्रीमियम दिया और उन्हें 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक के दावों का भुगतान किया गया – यह उनके निवेश का 5.4 गुना लाभ है।
केवल पिछले पांच वर्षों (2019-20 से 2023-24) में किसानों ने लगभग 19.5 लाख करोड़ रुपये प्रीमियम दिया और 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के दावे प्राप्त किए।
यह जोखिम प्रबंधन कृषि अवसंरचना निधि (AIF) के साथ जुड़ता है, जो 2020 में शुरू हुई थी और जनवरी 2025 तक 92,000 परियोजनाओं के लिए 56,000 करोड़ रुपये से अधिक मंजूर कर चुकी है, जिससे 86,500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश जुटाया गया है।
AIF का ध्यान फार्म-गेट स्टोरेज पर है, जिससे फसल कटाई के बाद के नुकसान में 20% तक कमी आती है, और किसानों को अपनी उपज लंबे समय तक सुरक्षित रखने व बेहतर दाम पर बेचने में मदद मिलती है, जिससे PMFBY की सुरक्षा और मजबूत होती है।
पानी की सुरक्षा स्थायी खेती की नींव है, जिसे पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC) योजना और माइक्रो इरिगेशन फंड (MIF) के माध्यम से पूरा किया गया है।
2015-16 से, PDMC ने 96 लाख हेक्टेयर में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाए हैं, जिसके लिए राज्यों को 22,000 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। MIF, जिसका कोष 2021-22 में दोगुना होकर 10,000 करोड़ रुपये हो गया, ने 3,700 करोड़ रुपये के लोन जारी किए हैं, जो जल-सक्षम सिंचाई को बढ़ावा देता है।
इन पहलों से कवर किए गए क्षेत्रों में पानी के उपयोग की दक्षता 30-50% बढ़ी है, जिससे किसानों को प्रति हेक्टेयर ऊर्जा और पानी के खर्च में सालाना 5,000 से 10,000 रुपये की बचत होती है।
PM-KUSUM योजना एक गेम-चेंजर योजना है, जो किसानों को सौर ऊर्जा का उपयोग करके उर्जा उत्पादक (उर्जादाता) बनने का अवसर देती है। अब तक 9 लाख से अधिक सोलर पंप लगाए जा चुके हैं, जिससे डीजल पर निर्भरता कम हुई है, जिससे बचत होती है और खेती के क्षेत्र में ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन भी घटता है।
एक सोलर पंप से किसान सालाना 50,000 से 70,000 रुपये ईंधन पर बचा सकते हैं, साथ ही अतिरिक्त ऊर्जा बेचकर अतिरिक्त आय भी कमा सकते हैं। यह नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बदलाव न केवल खर्च कम करता है, बल्कि सरकार के डीजल मुक्त कृषि क्षेत्र के दृष्टिकोण के साथ भी मेल खाता है।
वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में वर्ष 2022 से एकीकृत वर्षा आधारित क्षेत्र विकास (RAD) कार्यक्रम ने 1,900 करोड़ रुपये आवंटित करके 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया है और इसके लिए 1900 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।
यह कार्यक्रम पानी की कमी वाले इलाकों में मिट्टी की सेहत और उत्पादकता सुधारकर PDMC के सिंचाई दक्षता पर ध्यान को पूरा करता है। इसी तरह, प्राकृतिक खेती की पहलकदमियां जैसे परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) और मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन (MOVCDNER) ने लगभग 60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया है, जिनके लिए 2020-21 से 2024-25 तक पांच वर्षों में 3750 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
नवंबर 2024 में मंजूर राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) का लक्ष्य 8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करना है, जो रासायनिक मुक्त खेती को बढ़ावा देता है, जिससे इनपुट लागत 20-30% तक घटती है और जैविक उत्पादों को प्रीमियम दाम मिलते हैं।
ये योजनाएं एक मजबूत और समन्वित प्रणाली बनाती हैं। PM-KISAN और MSP किसानों की आमदनी को स्थिरता देते हैं, PMFBY जोखिमों को कम करता है, PDMC और MIF पानी के उपयोग को बेहतर बनाते हैं, PM-KUSUM ऊर्जा की स्वतंत्रता बढ़ाता है, RAD वर्षा आधारित क्षेत्रों का समर्थन करता है, और AIF कृषि आधारभूत संरचना को मजबूत करता है। ये सभी मिलकर किसानों की आय बढ़ाने में मदद करते हैं, जिसे वे आधुनिक कृषि मशीनरी में निवेश कर सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर, PM-KISAN, PMFBY और PM-KUSUM से लाभ पाने वाला किसान अपनी वार्षिक आय ₹1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख तक कर सकता है, जिसमें आय सहायता, बीमा दावे और ऊर्जा बचत शामिल हैं।
मोदी सरकार की बहुआयामी रणनीति ने किसानों के लिए एक सुरक्षा जाल बनाया है, जो उन्हें आधुनिक और सतत कृषि के क्षेत्र में सफल होने में सक्षम बनाता है।
वित्तीय सहायता, जोखिम संरक्षण, संसाधन कुशलता और आधारभूत संरचना विकास को एक साथ जोड़कर, ये योजनाएं भारत के अन्नदाताओं को न केवल सुरक्षित बनाती हैं, बल्कि उन्हें उर्जा दाता के रूप में भी स्थापित करती हैं, जो एक विकसित भारत के निर्माण में योगदान देते हैं। जैसे-जैसे ये पहलें आगे बढ़ेंगी, वे एक ऐसे भविष्य का वादा करती हैं जहां किसान मजबूत, आत्मनिर्भर और देश की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण होंगे, जो भारत को आत्मविश्वास के साथ पोषण और ऊर्जा प्रदान करेंगे।