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2014 के लोकसभा चुनाव में देश की जनता ने आपके नेतृत्व में पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई थी। सरकार के पांच साल पूरे होने जा रहे हैं। आप अपनी सरकार के कामकाज का आकलन कैसे करते हैं? जो वादे किए, उन पर कितना खरा उतर पाए?

मोदी: मैं मेरी सरकार के कामकाज का आकलन करूं, इससे बेहतर होगा कि जनता मेरी सरकार के कामकाज का आकलन करें। राजस्थान पत्रिका के पाठक मेरी सरकार का आकलन करें। हां, अपनी तरफ से मैं आपसे ये कह सकता हूं कि 2014 में हमें जिन उम्मीदों के साथ जनादेश मिला था उन्हें हमने पूरी ईमानदारी से पूरा करने की कोशिश की है। जरा सोचिए पांच साल पहले भारत विश्व की 11वें नंबर की अर्थव्यवस्था था, आज भारत दुनिया की छठे नंबर की इकोनॉमी है। इतना ही नहीं भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढऩे वाली बड़ी अर्थव्यवस्था भी बना हुआ है। पांच साल पहले देश में स्वच्छता का दायरा 38 प्रतिशत था, जो आज बढ़कर 99 प्रतिशत हो गया है। पांच साल पहले देश 9 या 12 गैस सिलेंडर जैसे सवालों पर जूझ रहा था, और जहां 2014 तक सिर्फ 55% घरों में गैस कनेक्शन था, वहां पिछले चार साल में यह आंकड़ा 90% के पार पहुंच गया है। 5 साल पहले जहां 18 हजार गांव अंधेरे में रहने को मजबूर थे, आज हर गांव में हमने बिजली पहुंचाने का काम किया है। पांच साल पहले जहां देश के करोड़ों घरों में बिजली नहीं थी, आज हमने उसे रोशन करने का बीड़ा उठाया है और ऐसे 2.6 करोड़ घरों में उजाला पहुंचाया है और बस कुछ ही दिनो में देश का हर घर रोशन होगा। पांच साल पहले तक देश के करोड़ों गरीब बैंक की दहलीज से दूर थे, आज हमने उन सभी को बैंकों से जोड़ने का काम किया है। पांच साल पहले घर बनाने की स्थिति क्या थी और हमने किस प्रकार सिर्फ पांच वर्षों में डेढ़ करोड़ मकान बनाकर गरीबों को उनकी चाबी देने का काम किया है। आज देश में दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थकेयर स्कीम आयुष्मान भारत चल रही है। हर वर्ष गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज सुनिश्चित हुआ है। सिर्फ 7-8 महीने में ही इस योजना की वजह से 21 लाख गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज मिला है। गरीब, पीडि़त, वंचित हों, महिलाएं हों या फिर किसान हों किसी भी वर्ग या सेक्टर को उठा लीजिए। आप पांच साल पहले की स्टडी कीजिए और आज उन पर क्या काम हुआ है, दोनों की तुलना कीजिए। आपको पता चलेगा कि हमारी सरकार ने जमीन पर कितना बड़ा काम किया है।

प्रधानमंत्री के तौर पर लिये वो 5 निर्णय जिनसे आप को लगता है कि वे देश की तस्वीर बदल देंगे?

मोदी: पहले, सरकारें अपने कार्यकाल के दौरान शुरू की गई सिर्फ एक योजना के बल पर चुनाव लड़ती थीं। लेकिन आज जब हमारी पार्टी चुनाव लड़ रही है, तो हमारे कार्यकर्ताओं के सामने समस्या यह है कि हमारी सरकार की सभी योजनाओं और कार्यों को वे कैसे याद रखें। इसकी वजह ये है कि आप किसी भी सेक्टर को उठा लीजिए, किसी भी आयु वर्ग को ले लीजिए, आप किसी भी क्षेत्र में चले जाइए - आपको वहां उपलब्धियों की लंबी लिस्ट नजर आएगी। आपको एक बड़ा बदलाव नजर आएगा। हमारी इतनी सारी उपलब्धियां हैं, किसी एक का नाम लेना बाकियों के साथ अन्याय हो जाएगा। मैं आपको उदाहरण देता हूं। आप किसानों के मुद्दे को ही उठा लीजिए। आप मुझसे मेरे कार्यकाल के पांच निर्णय के बारे में पूछ रहे हैं, लेकिन आपको सिर्फ किसानों से जुड़े ही दर्जन भर से अधिक ऐसे फैसले मिल जाएंगे, जो देश के अन्नदाताओं के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन लेकर आ रहे हैं। बीज से बाजार तक तरह-तरह की योजनाएं मिलेंगी। फसल बीमा योजना हो, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना हो या फिर एमएसपी में डेढ़ गुना बढ़ोतरी से लेकर पीएम किसान सम्मान निधि योजना। इन योजनाओं से किसान आज पहले से अधिक सशक्त हो रहे हैं। यही वजह है कि हम पूरी दृढ़ता से ये बात कहते हैं कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने में हम सफल रहेंगे। इसी प्रकार महिला सशक्तिकरण हो, स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे हों, युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना हो, भ्रष्टाचार और आतंकवाद के खिलाफ हमारे कठोर कदम हों या इनफ्रास्ट्रक्चर में तेजी हो - आप जिस क्षेत्र में सवाल पूछेंगे, दर्जनों ऐसे निर्णय मिलेंगे जो देश में बड़ा बदलाव ला रहे हैं। और उनको कवर करने के लिए आपको कई दिनों तक राजस्थान पत्रिका में यही इन्टरव्यू छापना पड़ेगा।

इन पांच सालों में कौन से ऐसे काम रहे जो आप करना चाहते थे, लेकिन कर नहीं पाए। इसके पीछे आप क्या कारण मानते हैं?

मोदी: जब आप देश सेवा में जी जान से जुटे हों तो ऐसा कोई दिन नहीं आएगा जब आपको लगे कि हां, अब कार्य पूरा हो गया और अब कुछ करने को नहीं बचा और मेरे मन में तो यह संतुष्टि कभी आती ही नहीं है कि मैंने कर दिया है। काम ख़त्म हो गया है अब आराम का समय है। मैं आपको एक उदाहरण देता हूं - हमने हर गांव में बिजली पहुंचाने का संकल्प लिया और पूर्ण भी किया। फिर सवाल आया कि हर गांव में तो पहुंच गए, हर घर का क्या? तो हमने फिर वो कार्य शुरू किया और कुछ चंद घरों को छोड़ कर, हर घर में बिजली का काम भी लगभग पूर्ण है। लेकिन क्या हम यहीं रुक जाएं या फिर आगे की योजना बनाएं कि अब हर घर में 24 घंटे बिजली भी आए? हम इस तरह के लोग हैं, जो राष्ट्र सेवा में रोज अपने आप को समर्पित करते हैं। इस महान देश को एक बार फिर बुलंदी पर ले जाना है। न थकना है, न रुकना है।

गठबंधन हो या एक पार्टी के बहुमत वाली सरकार, क्या प्रधानमंत्री अपने मन की कर पाता है?

मोदी: सरकार बहुमत से बनती है लेकिन देश सर्वसम्मति से चलता है। इसलिए मैं पिछली बार चुनाव जीतने के बाद भी बोला था कि जिन्होंने मुझे वोट दिया, यह सरकार उनकी भी रहेगी और जिन्होंने वोट नहीं दिए यह सरकार उनकी भी होगी। हम कांग्रेस को भी देश चलाने में साथी मानते हैं, सरकार चलाने में पक्ष -विपक्ष हो सकते हैं, देश चलाने में कोई प्रतिपक्ष नहीं हो सकता। हां ये अवश्य है कि गठबंधन की सरकार में भी, जो प्रमुख दल है, उसके पास जब पूर्ण बहुमत होता तो जनहित के फैसले दृढ़ता से समय पर लिए जा सकते है। यदि सरकार में प्रमुख दल ही कमजोर रहता है तो हम 30 साल देख चुके हैं कि कैसे देश संभावनाओं के अनुरूप प्रगति नहीं कर पाता। 2014 में जो निर्णायक जनादेश हमें मिला उससे जिस स्पीड और स्केल से काम हुआ है, ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं, ये सबके सामने है। विशेष साक्षात्कार में प्रधानमंत्री बोले एक परिवार के बाहर के किसी भी प्रधानमंत्री के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं हुआ सत्ता बहुमत से, देश सर्वसम्मति से चलता है संविधान के बताए रास्ते पर ही चलेंगे राम मंदिर पर तो हमारा स्टैंड शुरू से स्पष्ट है। सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर की सुनवाई को लटकाने कौन गया था?

इन पांच वर्षों में विपक्ष की भूमिका और सहयोग को लेकर क्या कहेंगे?

मोदी: पिछले 5 वर्षों में एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि जो लोग 50 साल से अधिक समय तक सरकार चलाने में विफल रहे, वे विपक्ष की भूमिका निभाने में भी विफल रहे। वे मुद्दों को उठाने और रचनात्मक रूप से बहस करने के अपने कर्तव्य को निभाने में भी विफल रहे हैं, जो एक लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका होती है। आकंड़े कभी झूठ नहीं बोलते। 16वीं लोकसभा की प्रोडक्टिविटी 15वीं लोकसभा से अधिक रही। 2014 से 2019 तक, लोकसभा की प्रोडक्टिविटी राज्य सभा की तुलना में भी अधिक थी। इस वर्ष के बजट सत्र में, जहां राष्ट्रपति का अभिभाषण और बजट पर चर्चा होनी थी, उस दौरान लोकसभा की प्रोडक्टिविटी 89 प्रतिशत थी, जबकि राज्यसभा की प्रोडक्टिविटी 8 प्रतिशत थी। यह बात हर कोई जानता है कि राज्यसभा में किस पार्टी का संख्या बल अधिक है और इसके परिणाम आपके सामने हैं। जेंडर जस्टिस और सोशल जस्टिस की बात करने में भी विपक्ष असफल रहा है। विपक्षी दलों में से किसी ने भी ट्रिपल तलाक को समाप्त करने में कोई सहयोग नहीं किया। मंडल समर्थक होने का दावा करने वाली कांग्रेस पार्टी और अन्य दल ओबीसी आयोग के गठन में भी देर करने का लगातार प्रयास करते रहे। लोगों ने देखा है कि कैसे विपक्षी दल के नेताओं ने और खासतौर पर कांग्रेस के नेताओं ने संसदीय कार्यवाही में बाधा पहुंचाने का कार्य किया। उनकी विफलता के लिए, लोग अब विपक्ष को सबक सिखाना चाहते हैं।

क्या आपसे यह उम्मीद की जा सकती है कि अगले पांच साल में हर इंसान को शुद्ध पेयजल मिलना शुरू हो जाएगा?

मोदी: क्या कारण रहा कि आजादी के 70 साल बाद भी देश के नागरिकों को शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध नहीं है और किसी सरकार से उम्मीद भी नहीं थी वह इस काम को पूरा कर दे? इसलिए आपके इस सवाल को मैं अपनी उपलब्धियों के सर्टिफिकेट के रूप में देखता हूं। जैसे हमारी इस सरकार ने हर गांव और हर घर में बिजली पहुंचाने का कार्य किया वैसे ही हमारी अगली सरकार पानी पहुंचाने का कार्य भी संभव कर पाएगी । देखिए, शुद्ध पेयजल जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकताओं में से एक है। इसलिए हमारा संकल्प है कि अगले पांच साल में देश का कोई भी परिवार ऐसा नहीं होगा, जहां तक शुद्ध पेयजल की व्यवस्था न हो। इस विषय पर मैंने कुछ लोगों को काम पर अभी से लगाया है। मेरे मन में बड़ा साफ था कि पानी के लिए एक अलग मिनिस्ट्री बनानी है। उसमें सिर्फ पानी ही विषय हो-जल संचय, जल संग्रह हो, पानी का उपयोग का तरीका हो- इरीगेशन पैटर्न, क्रॉप पैटर्न बदलना हो, समुद्री तट पर डिसैलीनेशन प्लांट लगाना हो। विंड एनर्जी के प्लांट में भी एक नई टेक्नोलॉजी आ रही है - उससे पानी का भी प्रबंध हो रहा है। जैसे स्वच्छता एक जन अभियान बन गया है वैसे "पानी बचाओ" भी एक जन अभियान बन सकता है। और अगर हम पानी को सदुपयोग करें तो परमात्मा भी मदद करेगा। मैं जल संचयन और प्रबंधन के विषय में राजस्थान पत्रिका ने जो मुहिम चला रखी है, उसकी भी बहुत सराहना करता हूँ।

सरकार के प्रचार से ऐसा संदेश ज्यादा जाता है कि आप देश से ज्यादा भाजपा के प्रधानमंत्री हैं। प्रधानमंत्री तो विपक्ष के भी होते हैं। यह दूरी क्यों बनती जा रही है?

मोदी: आप कांग्रेस के प्रोपेगेंडा में मत फंसिए। आपसे मेरा सवाल है कि आखिर वो कौन सी बातें हैं, जिसके आधार पर ये सवाल पूछ रहे हैं? हर बार, हर मुद्दे पर हमने विपक्ष को साथ लिया है। एक उदाहरण देता हूं जीएसटी का। जीएसटी संसद में पारित कैसे हुआ- सबकी सहमति से। आज तक जीएसटी काउंसिल में निर्णय कैसे लिया जा रहा है - सबकी सहमति से। लेकिन नामदार बाहर जाकर जीएसटी के बारे में जो बचकानी बातें करते हैं आपने भी सुना है, जबकि जीएसटी काउंसिल में उन्हीं के मंत्री जीएसटी का समर्थन करते हैं। यह उनकी मानसिकता है। विपक्ष के इस चरित्र को भी समझने की कोशिश कीजिए कि वो मोदी से इतना क्यों खार खाए रहते हैं। सवाल उठाने वाले उन दलों का विश्लेषण कीजिए। देश के प्रधानमंत्री के लिए ये कैसी भाषा का उपयोग करते हैं यह देखिए। मेरी बात छोडि़ए इन लोगों ने एक परिवार के बाहर के किसी भी प्रधानमंत्री के साथ सम्माजनक व्यवहार नहीं किया। मनमोहन सिंह जी के समय इन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय तक की गरिमा को ख़त्म कर दिया था। नरसिम्हा राव जी के साथ जो किया वो देश ने देखा है।

पांच साल में भ्रष्टाचार को लेकर खूब छापेमारी हुई। कुछ जगह टाइमिंग को लेकर विवाद भी हुए। ऐसे में आप बताएं कि केंद्रीय सत्ता में बैठे किसी नेता या अफसर के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

मोदी: पहले आप भ्रष्टाचार के मामले में ये पूछते थे कि ये कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है, वो कारवाई क्यों नहीं हो रही है। अब जब हो रही है तो इसे पॉलिटिकल वेंडेटा कहते हैं! ये बदलता मापदंड मेरी समझ में नहीं आया। मेरा साफ कहना है कि भ्रष्टाचार के मामले में पूरी कार्रवाई हो रही है। और किसी को भी नहीं बख्शा जाएगा। चाहे वो कितना भी बड़ा क्यों न हो। चाहे उसका सरनेम कुछ भी क्यों न हो। जिन लोगों ने कभी कानून की चौखट तक नहीं देखी थी, आज उन्हें जमानत के लिए अदालतों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अब जल्द ही उन्हें अपने गुनाहों का हिसाब चुकता करना होगा। यह पहली सरकार है जिस पर 5 साल में एक भी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा। तो क्या सिर्फ हम बनावटी बराबरी करने के लिए लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर दें? जहां तक कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ कार्रवाई का सवाल है, ऐसी एक भी कार्रवाई बताइए जहां काला धन नहीं मिला हो?

क्या आपको नहीं लगता शिक्षा में भारतीय संस्कृति का हिस्सा बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए आपकी क्या योजना है?

मोदी: मेरा साफ मानना है कि संस्कृति के बिना शिक्षा अधूरी है। भारत की सदियों पुरानी परंपरा, सभ्यता और संस्कृति हमारा आधार है। इनका जितना संबंध शिक्षा से है, उतना ही गहरा जुड़ाव हमारे व्यावहारिक जीवन से भी है। शिक्षा व्यवस्था पर हमारी सरकार विशेष ध्यान दे रही है। हमारा जोर शिक्षा में विश्वस्तरीय गुणवत्ता हासिल करने पर है। हमें संस्कृति और विज्ञान दोनों को साथ लेकर चलना होगा। हम पाठ्यक्रम को अपग्रेड करेंगे। शिक्षकों के खाली पद भरेंगे, रिसर्च पर हमारा जोर रहेगा। साथ ही शिक्षा को इंडस्ट्री के साथ जोड़ा जाएगा। वर्कफोर्स को शिक्षित और स्किल्ड बनाए बिना 8-10 प्रतिशत की ग्रोथ रेट टिकाऊ नहीं हो सकती।

राम मन्दिर निर्माण, धारा 370, कॉमन सिविल कोड, महिला आरक्षण, तीन तलाक, आर्थिक आधार पर आरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार एक कदम आगे और दो कदम पीछे चलती नजर आई। फाइनल रिजल्ट कुछ खास नहीं निकला। इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराएंगे?

मोदी: आपने कई विषयों को एक साथ जोड़कर खिचड़ी बना दी है। आपने कहा आर्थिक आधार पर आरक्षण की बात उठाई। कहां हमने एक कदम आगे और दो कदम पीछे किया। बल्कि हमें इस बात का गर्व है कि हमने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को भी संबल देने का काम किया। वो भी एससी, एसटी और ओबीसी को मिले आरक्षण को छेड़े बिना। हमने आर्थिक आरक्षण देने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया। ये पहली बार हुआ है कि इतने संवेदनशील विषय पर फैसला हो गया बिना सामाजिक समरसता बिगाड़े हुए। आपने तीन तलाक का सवाल उठाया। मेरा यही कहना है कि आपको ये सवाल उन विपक्षी पार्टियों से पूछना चाहिए, जो इस सदियों पुरानी, महिलाओं के खिलाफ चली आ रही कुप्रथा का समर्थन कर रहे हैं। इसे धर्म के चश्मे से देखने की कोशिश कर रहे हैं। हमारा कमिटमेंट एकदम साफ है। इस कुप्रथा को हर हाल में खत्म करना ही होगा। और राम मंदिर पर तो हमारा स्टैंड शुरू से स्पष्ट है। अड़ंगे कौन लटका रहा है? सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर की सुनवाई को लटकाने कौन गया था? इसी प्रकार बाकी विषयों को लेकर भी भाजपा का स्टैंड स्पष्ट है। संविधान ने इन्हें लागू करने के जो भी रास्ते निर्धारित किए हैं, हम उसी रास्ते पर चलेंगे।

भविष्य में आप पाकिस्तान के साथ संबंधों को किस तरह देखते हैं?

मोदी: भविष्य में पाकिस्तान के साथ भारत के संबंध इस बात पर निर्भर करेंगे कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कैसे कार्रवाई करता है।

एक सामान्य धारणा है या बनाई गई है कि आपकी सरकार के 5 वर्षों में विपक्ष से लेकर न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थानों से लेकर मीडिया तक सब सरकार के निशाने पर रहे हैं?क्या वाकई ऐसा है अन्यथा ऐसी धारणा क्यों बनी और किसने बनाई?

मोदी: क्या आपको कभी ऐसा लगा? आप पर कभी दबाव आया क्या? समाचार पत्र तो हमारे खिलाफ लिख ही रहे हैं। क्या पत्र-पत्रिकाएं छपने बंद हो गए? कुछ समाचार पत्र और टीवी चैनल तो रोज पानी पी-पी कर मुझे कोसते हैं। एक पार्टी, एक विचारधारा द्वारा संचालित कुछ ऑनलाइन मीडिया तो रोज ही झूठी कहानी गढ़ते हैं? आखिर ये 'इंस्टीटूशन्स अंडर अटैक' का झूठा नैरेटिव चलाने वाले लोग कौन हैं? क्या ये वही लोग हैं जिन्होंने आतंकवादियों से मुठभेड़ को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के लिए एफिडेविट बदलवा दिया था? क्या ये वही लोग हैं जिन्होंने एक शांतिप्रिय समुदाय को आतंकवादी सिद्ध करने के लिए षडयंत्र रचा था? क्या ये वही लोग हैं जिनके कारण सुप्रीम कोर्ट को सीबीआई जैसी संस्था को पिंजड़े में बंद तोता कहना पड़ा था? क्या ये वही लोग हैं जिन्होंने सेना अध्यक्ष को गुंडा कहा? क्या ये वही लोग हैं जो हमारी चुनाव प्रक्रिया को बदनाम करने के लिए विदेशों में जाकर साजिश रचते हैं? जिन्होंने देश में आपातकाल की घोषणा कर विपक्ष के सभी नेताओं को जेल में ठूंस दिया, जिन्होंने सुपर पीएम और उनकी निजी केबिनेट के जरिए देश पर रिमोट कंट्रोल से शासन किया, जिन्होंने गलत मंसूबे से सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग लाने की कोशिश की, अब वे ही बता सकते हैं कि संवैधानिक संस्थानों, मीडिया और न्यायपालिका की प्रतिष्ठा गिराने का आरोप हम पर क्यों लगा रहे हैं?

चुनाव में धन का इस्तेमाल बेतहाशा होने लगा है। अधिकतम खर्च की सभी सीमाएं धवस्त हो रही हैं। चुनाव के दौरान ही आए दिन करोड़ों नकदी पकड़ी जा रही है। ऐसे में ईमानदार प्रत्याशी तो चुनाव लडऩे की सोच भी नहीं सकता। इसे कैसे रोका जा सकता है? और रोकेगा कौन?

मोदी: आप का यह आकलन सही नहीं है कि चुनाव सिर्फ धन बल पर ही लड़ा जाता है। यह मैं किसी दल की बात नहीं कर रहा। अधिकतर प्रत्याशी जनता की सेवा और अपने काम के बदौलत जीतते हैं। ऐसे लोगों को मीडिया को ज्यादा दिखाना चाहिए। लोकतंत्र के इस महापर्व की पवित्रता बनी रहे इस के लिए हमने ही चुनाव में नकद के इस्तेमाल पर रोक लगाने की पहल की और नकद राजनीतिक चंदे की सीमा बहुत कम कर दी। इसी प्रक्रिया को और मजबूत करने के लिए हम इलेक्टोरल बॉन्ड भी लेकर आए, जिससे चुनाव में नकद का व्यापार कम हो सके। मैंने वाराणसी में नामांकन से पहले अपने कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत में कुछ बातों की अपील की उसमें एक बात जिस पर जोर था वो थी कि - क्या हम वाराणसी का चुनाव जीरो बजट के साथ लड़ सकते हैं। घर घर सम्पर्क को बढ़ावा दें। मोबाइल ऐप का उपयोग कर के लोगों तक पहुंचे आदि आदि। गवर्नेंस के प्रति सजग लोगों में, देश के किसी न किसी हिस्से में लगातार हो रहे चुनाव से पडऩे वाले विपरीत प्रभाव को लेकर चिंता है। बार-बार चुनाव होने से मानव संसाधन पर बोझ तो बढ़ता ही है, आचार संहिता लागू होने से देश की विकास प्रक्रिया भी बाधित होती है, इसलिए एक साथ चुनाव कराने के विषय पर चर्चा और संवाद बढऩा चाहिए तथा सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाई जानी चाहिए।

जहां तक चुनाव के दौरान आइटी रेड और नकद बरामद होने की बात है, तो विपक्ष को तो खुश होना चाहिए कि जिस टैक्स प्रशासन को उन्होंने पंगु बना दिया था अब वह एक्टिव रूप से काम कर रहा है। पूरा देश जानता है कि किनसे और कितना नकद बरामद हुआ है। उसी रेड में ही नामदार का तुगलक रोड चुनाव घोटाला भी सामने आया, जिसमें ये निकल कर आया कि प्रसूताओं के पोषण का पैसा खाने से भी नहीं हिचकिचाएंगे ये लोग।

जम्मू-कश्मीर में पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस के कुछ नेता ऐसे वक्तव्य दे रहे हैं जो देश हित में नहीं हैं। क्या आपको नहीं लगता कि इन दलों से गठबंधन करके भाजपा ने गलती की?

मोदी: मैं पहले ही कह चुका हूं कि जम्मू कश्मीर में पीडीपी के साथ जाने का हमारा फैसला भाजपा का महामिलावट था। हमें लगा कि मुफ्ती साहब जिस तरह के संजीदा व्यक्ति हैं, हम वहां कश्मीर में और तेज गति से विकास लाएंगे।

लेकिन हमें जिस दिन यह विश्वास हो गया कि महबूबा मुफ्ती जी लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ नहीं चल रही हैं और पंचायत चुनावों में बाधा पंहुचा रही हैं, हम तुरंत सरकार से अलग हो गए। कश्मीर में हम आज भी वाजपेयी जी के फॉर्मूले पर चल रहे हैं। जल्दी ही हम वहां विधानसभा चुनाव भी चाहते हैं।

जहां तक फारूक साहब और महबूबा मुफ्ती जी के बयानों का सवाल है, तो हम सब जानते हैं कि वे घाटी में कुछ और दिल्ली में कुछ और बोलते हैं। इन दोनों परिवारों ने कश्मीर को अपने हिसाब से चलाए रखने का जो कुचक्र रच रखा था, वह टूट रहा है। इसलिए वे बौखलाए हुए हैं।

यह कांग्रेस से पूछिए कि उनके सहयोगी दल द्वारा देश में दो प्रधानमंत्री के बयान के बावजूद वो क्यों चुप हैं?

अफसर हों, सेना के जवान या निजी कर्मचारी, हर जगह सेवानिवृत्ति की आयु तय है। लेकिन राजनीति में ऐसा नहीं। क्या आपको नहीं लगता कि राजनीति में भी अधिकतम आयु तय करने के लिए कानून की जरूरत है?

मोदी: जो भी फैमिली बेस्ड पार्टी है वहां पर लैटरल एंट्री और युवाओं के लिए कोई प्रोत्साहन नहीं है। इन पार्टियों में ड्रायविंग सीट पर बैठे परिवार के लोगों में हमेशा एक असुरक्षा का भाव रहता है, जो उन्हें देश भर में पार्टी के युवा नेताओं को आगे बढऩे के मौके देने से रोकता है। यदि किसी युवा नेता का कद पार्टी में बढ़ता है, तो इससे उनके अध्यक्ष असुरक्षित महसूस करने लगते हैं। हमने देखा कि राजस्थान और मध्य प्रदेश में उनके इस रवैये के कारण क्या हुआ, कैसे युवा नेताओं की अनदेखी की गई।
हमारी पार्टी में कई वरिष्ठ नेताओं ने स्वयं आगे होकर कुछ पहल की है जैसे गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन हों या कलराज मिश्र जी हों। लेकिन आपकी बात सही है हमें युवाओं को प्रोत्साहन देना चाहिए और यह हमारी प्रतिबद्धता भी है।

राजनीति में विरोध के स्वर उठना लोकतंत्र का गहना माना जाता है। लेकिन क्या राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सभी राजनीतिक दलों को एक साथ खड़े नहीं होना चाहिए। आखिर इसके लिए पहल कौन करेगा?

मोदी: इस सवाल का जवाब उनसे पूछिए जो पुलवामा की घटना को फिक्स मैच बता रहे थे। उनसे पूछिए जो सर्जिकल स्ट्राइक को फर्जी बता रहे थे। उनसे पूछिए जो बालाकोट में एयर स्ट्राइक पर सेना के शौर्य पर सवाल उठा रहे थे। उनसे पूछिए जिन्हें अपनी सेना से ज्यादा पाकिस्तान पर भरोसा है। उनसे पूछिए जो डोकलाम के समय देश के साथ नहीं खड़े थे। उनसे पूछिए जो सर्वसम्मति से हुए जीएसटी के निर्णयों का मजाक उड़ा रहे हैं। आप याद कीजिए, जब चीन और पाकिस्तान के साथ लड़ाई हुई, जन संघ - भाजपा लगातार सरकार के फैसले के साथ रहे। आज हमने आतंक पर चोट की, महामिलावटी लोग पाकिस्तान के साथ खड़े हो गए। इन्हें समझ ही नहीं आता कि देश है तो राजनीति है।

सभी दल जीत के दावे कर रहे हैं। आपकी राय में भाजपा और एनडीए को चुनाव में कितनी सीटें मिलेंगी?

मोदी: जी नहीं, सभी दल जीत के दावे नहीं कर रहे हैं। कांग्रेस के बड़े नेता यही कह रहे हैं कि इस बार उनकी स्थिति 2014 से बस कुछ बेहतर होगी। वे यहां तक कह रहे हैं कि चुनाव जीतने का तो पता नहीं लेकिन वोट काटने में तो जरूर सफल होंगे। उनकी ये स्थिति साफ दर्शाती है कि कांग्रेस पार्टी ने इस चुनाव में जीत की आशा छोड़ दी है। और ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि कांग्रेस भी देख रही है कि बीजेपी को किस तरह से जनता का आशीर्वाद मिल रहा है। जहां तक हमारा सवाल है, तो हम ये साफतौर पर देख पा रहे हैं कि इस चुनाव में हमारा प्रदर्शन 2014 से भी बेहतर होगा।

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दोबारा सत्ता में आए तो 5 टॉप प्रायोरिटी क्या होंगी?

मोदी: हमारी प्राथमिकता सिर्फ पांच चीजों की नहीं है। 2014 देश की आवश्यकताओं को पूरा करने वाला चुनाव था और 2019 देश की आकांक्षाओं को पूरा करने वाला चुनाव होगा। हमने अपने देश की अर्थव्यवस्था को 'फ्रेजाइल फाइव से निकाल कर 'फास्टेस्ट ग्रोइंग' में बदल दिया। अब हमारा लक्ष्य 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में बदलना है। हम भारत को एक ग्लोबल मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने के प्रति वचनबद्ध हैं। स्टार्टअप इंडिया के साथ हमने युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनाने की प्रक्रिया शुरू की। अब हम अगले लेवल पर जाकर 2024 तक 50 हजार नए स्टार्टअप और 50 लाख रुपए बिना किसी गारंटी के देने की योजना पर काम करेंगे।

हमने किसानों की इन्कम सपोर्ट के लिए 12 करोड़ छोटे व सीमांत किसानों के लिए पीएम किसान योजना की शुरुआत की। करोड़ों किसानों के बैंक खातों में पैसा पहुंचा चुके हैं। अब अगले लेवल पर जाकर देश के सभी किसानों तक पीएम किसान योजना ले जाएंगे। हमने असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा की गारंटी दी। अब नेक्स्ट लेवल पर किसानों और छोटे दुकानदारों के लिए भी पेंशन योजना लेकर आए हैं।

हमने पहले ही ग्रामीण सड़क योजना में, हाइवे बनाने में डबल स्पीड ला दिया है। आपको जानकर खुशी होगी कि आज भारत दुनिया में सबसे तेज हाइवे बनाने वाला देश है। अब नेक्स्ट लेवल पर में 100 लाख करोड़ के निवेश से विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएंगे। ये ध्यान देने वाली बात है कि ये सभी विस्तृत रोजगार सृजन के क्षेत्र हैं और इनसे आने वाले दिनों में हमारे युवाओं के लिए उनकी क्षमता के अनुसार हर प्रकार के जॉब्स क्रिएट होने वाले हैं।

दूसरा, मेरे मन में एक सपना है उसमें मुझे आपकी मदद भी चाहिए होगी- जैसे गांधी जी ने आजादी का आंदोलन चलाया तो खादी को प्रमोट किया, हथकरघे को प्रमोट किया। क्या उसी प्रकार देश में आजादी के 75 साल होने पर हम नागरिक आन्दोलन को प्रेरित कर सकते हैं? लोग कहें: मैं जीवन में यह नहीं करूंगा, या यह मैं अवश्य करूंगा। गांधी जी के 150वीं जन्म-जयंती से आजादी के 75 साल पूरे होने तक, 2019 से 2022 तक यह अभियान चलाया जाए, जिसमें करोड़ों लोगो को जोड़ा जाए, लोग स्वयं तय करें कि मैं यह काम नहीं करूंगा जैसे मैं दहेज़ नहीं लूंगा, हम बाल विवाह नहीं करेंगे, मैं पानी व्यर्थ नहीं करूंगा।

ईवीएम को लेकर विपक्ष ने मुहिम छेड़ रखी है इस पर आप का क्या कहना है?

मोदी: जिस प्रकार ईवीएम को लेकर, बिना कारण जो तूफान चला, उसका कोई लॉजिक नहीं है। कल मैंने जो बयान पढ़ा, शरद पवार जी का, वो चौंकाने वाला है। वो चुनाव हार चुके हैं, यह अलग बात है। उनके इलाके मेंं मेरी सभाएं हुई हैं, जहां से वो खुद सांसद थे। मैंने जिंदगी में इतनी बड़ी सभा नहीं देखी। इतनी बड़ी सभा वो भी इतनी भयंकर गर्मी में। अब वो कहते हैं कि बारामती में अगर हम हार गए तो हिंसा हो जाएगी। क्या लॉजिक है? चुनाव हार जाओगे तो हिंसा होगी, यह क्या बात हुई? एक और विषय की गहराई में जाना चाहिए। इंडोनेशिया में चुनाव चल रहा है, 15 करोड़ मतदाता है और बैलेट पेपर से वोट डलता है। सारे चुनाव एक साथ हुए। कुल 75 करोड़ वोट हैं। वहां पुराने जमाने वाला पर्चा चल रहा है, और उसी प्रकार मतगणना चल रही है। 20 दिन हो गए, गणना चलती ही जा रही है, और 20 दिन चलने वाली है।

पूरी मतगणना करीब 40 दिन में जाके सम्पूर्ण होगी, ऐसा अनुमान है। मतगणना के कारण पॉलिटिकल पार्टियां भी तो दबाव डालती हैं। अब तक 300 लोग टेबल पर काम करते करते तनाव के कारण मरे हैं।

भारत में भी, पहले बूथ पर बैलट था, कोई बूथ ऐसा नहीं होता था देश में कि जहां पर कोई हिंसा न हो। हर राज्य में हत्याएं होती थीं। इन दिनों जम्मू कश्मीर में चुनाव हुआ, एक मृत्यु नहीं है। बंगाल को छोड़ कहीं से भी हिंसा की खबर नहीं है। यह के्रडिट ईवीएम को जाता है। ईवीएम एक स्टैंड अलोन मशीन है। वो किसी से जुड़ी हुई ही नहीं है कि उससे छेड़छाड़ हो सके। मेरा विपक्ष से बल्कि ये आग्रह रहेगा कि भारत की ऐसी उपलब्धि को हमें पूरे दुनिया में गर्व से बताना चाहिए। उसे अपनी हार की झुंझलाहट में दुनिया के सामने बदनाम न करह्वें।

आज की कड़वी राजनीति में पॉलिटिकल विट (वाकपटुता) और ह्यूमर (हास-परिहास) को कैसे देखते है? क्या इसकी संभावना है?

मोदी: हास-परिहास के बिना राजनीति ही क्या। अब देखिए, ममता जी ने मुझे कहा कि आपको मिट्टी का रसगुल्ला खिलाऊंगी। मैंने कहा मुझे खुशी होगी। यह कितना बड़ा सौभाग्य है कि मुझे उस मिट्टी का रसगुल्ला मिलेगा, जिसपर रामकृष्ण परमहंस, विवेकानंद, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के पैर पड़े हैं। बात सीरियस थी लेकिन ह्यूमर के अंदाज में कही गई। तो ह्यूमर की संभावना तो हमेशा रहती है अपनी बात पहुचाने की। लेकिन हां, वैमनस्य का भाव नहीं होना चाहिए, ताकि सामने वाले तक आपकी बात भी पहुंच जाए और उसकी मर्यादा की ठेस भी न पहुंचे।

राजस्थान को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की भाजपा के पास क्या योजना है?

मोदी: जब साहस, बलिदान और परिश्रम की बात आती है, तब राजस्थान के लोगों ने हमेशा देश को रास्ता दिखाया है। राजस्थान के युवा कड़ी मेहनत करने वाले और इनोवेटिव तो होते ही हैं, साथ ही वे राजस्थान के भविष्य को संवारने की भी अपार क्षमता रखते हैं।

राजस्थान का अतीत बहुत गौरवशाली रहा है, अब एक गौरवशाली भविष्य की कथा लिखने का समय है। हम कौशल विकास, स्टार्ट-अप, मुद्रा योजना के माध्यम से आसान ऋण उपलब्ध कराके युवाओं को आगे बढऩे के और अधिक अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम रिफाइनरी सौर परियोजनाएं और विनिर्माण क्षेत्र पर अधिक बल देकर राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इससे युवाओं के लिए अवसरों में और वृद्धि होगी। राजस्थान में इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार करके पर्यटन को बढ़ाने के लिए भी हम प्रतिबद्ध हैं, जिससे युवाओं को और अधिक अवसर मिलेंगे। राज्य में व्यापारियों के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को और बेहतर बनाने के लिए काम किया जाएगा और व्यापारियों के लिए पेंशन योजना भी लाई जाएगी।

हम राजस्थान के किसानों की चिंताओं को समझते हैं और उनकी आय दोगुनी करने के लिए हम कड़ी मेहनत भी कर रहे हैं। हम सभी किसानों तक पीएम किसान योजना का लाभ पहुंचाएंगे। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि महिलाओं को राजस्थान की विकास यात्रा में बराबर का भागीदार बनाया जाए। शौचालय, उज्ज्वला योजना जैसी अन्य पहल के माध्यम से हम महिलाओं के जीवन में समग्र रूप से सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम महिलाओं के लिए मुद्रा, स्टैंड अप इंडिया, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका के अवसर भी बढ़ा रहे हैं। हस्तकला और पारंपरिक उत्पादों को बनाने वालों के लिए नए प्लेटफार्मों को विकसित करेंगे, ताकि उनके उत्पाद के लिए मार्केट बड़ी हो और उनकी आय बढ़े। केंद्र की अधिकतर योजनाएं ऐसी हैं जिनके जरिए हम लोगों के जीवन में सार्थक बदलाव ला पाए। उदाहरण के तौर पर आयुष्मान भारत से गरीबों को 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है। ओआरओपी को हमने लागू किया जिसका फायदा राजस्थान के हमारे वीर जवानों को मिल रहा है।
जयपुर में मेट्रो हो या टूरिज्म सेक्टर में संभावनाएं, रोजगार बढ़ाना हो, आने वाले समय में बेहतर जीवन स्तर वाले स्मार्ट सिटी हों, भारतमाला के तहत रोड कनेक्टिविटी हो, ऐसे बहुत सारे कार्य मैं गिनाता रह सकता हूं। कहने का तात्पर्य ये है कि राजस्थान की सामान्य जीवन में बदलाव लाने के लिए हमने सभी जरूरी कदम उठाए हैं।

पांच साल के मोदी सरकार के कामकाज को आप दस में से कितने अंक देना चाहेंगे ?

मोदी: मैं जनता का सेवक हूं और ईमानदारी से सिर्फ कार्य करने में विश्वास करता हूं। हम अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर जनता के बीच गए हैं, मूल्यांकन करना, नंबर देना जनता का काम है मेरा नहीं।

Source: Rajasthan Patrika

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Prime Minister meets with Mohamed Nasheed, Speaker of People’s Majlis of Maldives
December 13, 2019
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Mr.  Mohamed Nasheed, Speaker of People's Majlis of The Maldives, who is on a visit to India at the joint invitation of the Chairman,Rajya Sabha,  and the Speaker, Lok Sabha, called on Prime Minister Shri Narendra Modi in New Delhi today.

Welcoming Speaker Nasheed, Prime Minister noted that engagement between the two Parliaments is a key component of the vibrant India-Maldives relationship and expressed confidence that this visit will help consolidatebridges of friendship between the two sides.

Recalling his last visit to Malé in June this year, when he also addressed the People’s Majlis, Prime Minister lauded the continued strong leadership of Speaker Nasheed to the cause of deepening and strengthening democracy in Maldives. Prime Minister reaffirmed India’s commitment to continue to work closely with the Government of the Maldives for a stable, prosperous and peaceful Maldives wherein the aspirations of the friendly Maldivian are fulfilled.

Speaker Nasheed thanked the Prime Minister for his continued support for a stronger India-Maldives relationship since the formation of the new Government in The Maldives last year. He also thanked Prime Minister for the development cooperation initiatives undertaken in The Maldives for the welfare of the Maldivian people. He reaffirmed his unwavering support to the ‘India First’ policy of the Government of Maldives and noted that the visit of the Parliamentary delegation will help further strengthen the fraternal bonds and friendly relations between the two countries.