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मंच पर विराजमान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, हम सबके मार्गदर्शक आदरणीय राजनाथ सिंह जी, गुजरात प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान आर. सी. फलदू जी, श्रीमान रूपाला जी, श्री वी. सतीश जी, कैप्टन अभिमन्यु जी, अमितभाई शाह, स्मृति बहन, मंत्री परिषद के मेरे सभी साथी, संसद सदस्य श्री, पार्टी के सभी वरिष्ठ साथी और गुजरात के कोने-कोने से आए हुए पार्टी के सभी कार्यकर्ता भाइयों और बहनों..!

ज 6 अप्रैल है। भारतीय जनता पार्टी के रुप में हमारी विकास यात्रा के 32 वर्ष पूर्ण हो करके 33 वें वर्ष में हम लोग प्रयाण कर रहे हैं। भाइयों-बहनों, 33 वर्ष की यात्रा पूरे हिन्दुस्तान के अंदर एक नई आशा को जन्म देने वाली यात्रा है। भारतीय जनता पार्टी का जन्म उस समय हुआ था जब कुछ निजी स्वार्थ वाले तत्व अपने निहित स्वार्थ के खातिर नए नए सवाल उठा कर के देश में कोई आल्टरनेट पनपे नहीं उस षडयंत्र के शिकार हुए थे। एक सौ से ज्यादा सदस्य वाले सदन में आए दिन भारतीय जनता पार्टी को अपमानित करने का प्रयास होता था। लोकतंत्र की मर्यादाओं को तोड़ा जाता था और उस पीड़ा में से, उस दर्द में से सत्ता के मार्ग को छोड कर के जनता के बीच जाने का फैसला भारतीय जनता पार्टी ने लिया था और तब से हमारे वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में, कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम से इस पार्टी ने जनसामान्य की आशा-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए प्रयास प्रारंभ किया था। भारतीय जनता पार्टी का जन्म सत्ता भूख में से नहीं हुआ है, भारतीय जनता पार्टी का जन्म सत्ता के दलालों की भलाई करने के लिए नहीं हुआ है। इस पार्टी का जन्म देश के कोटी-कोटी नागरिकों के भाग्य को बदलने के लिए हुआ है, कल्याण के लिए हुआ है। और जब कोई अच्छा काम करता है तो रूकावटें भी कम नहीं आती है। भाइयों-बहनों, कभी मैं केरल की तरफ देखता हूँ। क्या कारण है कि साम्यवादियों के लगातार हमलों के बावजूद भी, हमारे सैंकड़ों कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतारने के बावजूद भी, चाहे केरल हो या बंगाल हो भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता जीत मिले या ना मिले, जिंदगी खपा देने में कभी कमी नहीं रखता..! क्या कारण है कि सत्ता के गलियारों से दूर-दूर का नाता नहीं होने के बावजूद भी, एक भारत माता की जय के लिए अपना जीवन न्यौछावर करने वाले लक्षावती लोग आज भारतीय जनता पार्टी का कमल का झंडा उठा कर के चल रहे हैं..!

मैं दिल्ली में बैठे हुए शासकों को चेतावनी देता हूँ कि अगर आप सोचते हैं कि आपकी सी.बी.आई. के हमले भारतीय जनता पार्टी को निराश करेंगे, तो आप सोचने में गलती कर रहे हैं। आपको लगता है कि अपने गर्वनरों के माध्यम से आप भारतीय जनता पार्टी की सरकारों को परेशान करोगे, तो आप लिख कर रखिए, जहाँ भाजपा की सरकारें हैं, वहाँ की जनता दिल्ली सरकार के और काँग्रेस पार्टी के इस रवैये का चुन-चुन के जवाब देती है और देती रहेगी..! सारी संवैधानिक संस्थाओं को भारतीय जनता पार्टी की सरकारो को परेशान करना, भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को परेशान करना, भारतीय जनता पार्टी के दल को परेशानियों में डालना, इसी के लिए उपयोग में लाया जाता है। कांग्रेस के मित्रों, ये दिल्ली में आपकी सत्ता का नशा लंबे दिनों तक रहने वाला नहीं है..!

भाइयों-बहनों, कांग्रेस में और भारतीय जनता पार्टी में बहुत बड़ा अंतर है। भारतीय जनता पार्टी की सोच और कांग्रेस पार्टी की सोच के बीच कभी कोई मेल नहीं हो सकता। भाजपा के चरित्र और कांग्रेस के चरित्र की कभी कोई तुलना नहीं कर सकता। भाइयो-बहनों, कांग्रेस जिन पर आस लगा कर बैठी है, जिनके शब्द कांग्रेस की नीति माने जाते हैं, ऐसे एक नेता का मैंने दो दिन पूर्व मैंने एक भाषण सुना। मित्रों, मुझे बहुत गहरा धक्का लगा, मन को एक पीड़ा हुई के क्या ये लोग देश के विषय में ऐसा सोचते हैं..? भाइयों-बहनों, कांग्रेस के एक नेता कह रहे हैं और कांग्रेस पार्टी की सोच को प्रकट कर रहे हैं कि ये भारत देश मधुमक्खियों का छत्ता है। मेरे कांग्रेस के मित्रों, आपके लिये ये देश मधुमक्खी का छाता हो सकता है, हमारे लिए ये देश हमारी माँ है..! ये भारत हमारी माता है, इसके सौ करोड देशवासी हमारे भाई-बहन हैं..! ये पवित्र भूमि है, ये ऋषि-मुनियों की भूमी है। अटल बिहारी वाजपेयी कहा करते थे कि यहाँ का कंकर-कंकर हमारे लिए शंकर है। अटल बिहारी बाजपेयी कहा करते थे कि गंगा जी में बहती हुई हमारी हड्डी को कान में लाकर सुनोगे तो उस हड्डी में से भी आवाज आएगी, भारत माता की जय..! ये हमारे संस्कार है। हमारे लिए ये माँ है माँ..! इस माँ की पीड़ा हम देख नहीं सकते हैं। ये हमारी माँ है, जिसके संतानों का दु:ख-दर्द हमारी चिंता का कारण है। आपके लिए ये मधुमक्खी का छाता हो सकता है, हमारे लिए तो हमारी माँ है..! और मेहरबानी करके कांग्रेस के मित्रों, हमारी भारत माता का अपमान मत करो..! आपको अगर हिन्दुस्तान के लोगों की भाषा समज नहीं आती है तो कहीं से सीखा करो, लेकिन आपके अज्ञान के कारण मेरे देश की संस्कृति और परंपरा को बर्बाद करने का पाप मत करो..! भाइयो और बहनों, मैं कभी किसी नेता के भाषण पर समय बर्बाद नहीं करता, क्योंकि वो ध्यान देने योग्य होते भी नहीं हैं। लेकिन जब हमारी भावनाओं पर चोट पहुंचाई जाती है तब इस माँ के कल्याण के लिए जीवन खपाने वाले लक्षावती कार्यकर्ता को पीड़ा होनी बहुत स्वाभाविक है।

भाइयों-बहनों, मैं हैरान हूँ..! इस देश में पानी की समस्या है इसका देश के नेताओं को अता-पता भी नहीं है। आप पर हमें दया आती है..! हमारे गुजरात कांग्रेस के नेता पानी को लेकर के गुजरात के किसानों को, गुजरात के नागरिकों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। मैं कांग्रेस के मित्रों को प्रार्थना करता हूँ, आवाहन भी करता हूँ कि अगर आपको गुजरात के किसानों की इतनी चिंता है, अगर आपको गुजरात के गांव में पानी की चिंता है और सच्चे दिल से चिंता है तो आप समय बर्बाद किये बिना दिल्ली की आपकी सरकार पर दबाव डालो और सरदार सरोवर डेम की ऊंचाई का काम जो रुका हुआ है, उसको पहले पूरा करो..! मेरे पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं, गाँव-गाँव से आवाज उठनी चाहिए, नर्मदा डैम को पूर्ण करने के लिए अब हम ज्यादा इंतजार नहीं करेंगे..! हम दिल्ली के तख्त के साथ लड़ाई लड़ेंगे और कांग्रेस के लोगों को हर गली-मौहल्ले में जवाब देना पड़ेगा।

भाइयो-बहनों, कांग्रेस पार्टी से सुधरने की अपेक्षा मत करना, वो कभी नहीं सुधर सकते..! इस चुनाव में गुजरात की जनता ने जिस प्रकार से कांग्रेस पार्टी को सजा दी है, जिस प्रकार से उनके एक-एक दिग्गज नेताओं को गुजरात की जनता ने परास्त कर दिया है... जिस भाषा का पिछले पांच साल से वे प्रयोग कर रहे थे, जिस झूठ के सहारे गुजरात की जनता को गुमराह करने का रात-दिन प्रयास रहे थे, जिस गंदी गालियों का उपयोग किया जा रहा था... गुजरात की जनता ने उस भाषा को बोलने वालों को चुन-चुन कर साफ कर दिया। आशा थी कि वे समझेंगे, सुधरेंगे और लोकतंत्र की मार्यादाओं का पालन करेंगे, लेकिन भाइयों और बहनों, इस सरकार को अभी तो कल 101 दिन हुए हैं, लेकिन 100 दिन भी वे इंतजार करने को तैयार नहीं हैं, उनकी मन:स्थिति क्या होगी इसका आप अंदाजा लगा सकते हो..!

भाइयों-बहनों, भारतीय जनता पार्टी विकास के मंत्र को लेकर चली है। आज गुजरात की धरती पर हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष पधारे हैं तब मैं गुजरात की जनता की ओर से उनसे कहना चाहता हूँ कि आज चारों तरफ आपने इतना बड़ा दिल बताया है, सार्वजनिक जीवन में इतनी ऊंचाई का अनुभव करवाया है, मेरे जैसे छोटे कार्यकर्ता को आपने बहुत बड़ा बड़प्पन दिया है। भाइयों-बहनों, राजनीति में ये छोटी घटना नहीं होती है। अपने साथी को इस ऊंचाई तक ले जाने के लिए बहुत बड़ा दिल लगता है..! लेकिन मैं आज कहना चाहता हूँ कि आपने जो मुझ मान-सम्मान दिया है, आपने जो मेरी इज्जत की है, देश भर के कार्यकर्ताओं के दिलों में मेरी जगह बनाने के लिए आपने कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन ये यश भले ही मोदी को मिलता होगा, नाम भले ही मोदी का लिया जाता होगा, लेकिन इस यश के हकदार ये सारे मेरे भाई-बहन हैं, मेरे कार्यकर्ता हैं..! मेरे कार्यकर्ता भाइयों-बहनों, आपने परिश्रम ना किया होता, आपने विकास में विश्वास ना किया होता, आपने इस देश की भलाई के मंत्र को चरित्रार्थ ना किया होता, तो नरेन्द्र मोदी को कौन पहचानने वाला था..? ये पहचान आपके कारण बनी है, आपके पुरषार्थ के कारण बनी है, आपके त्याग और तपश्चर्या के कारण बनी है। और आज जब भारतीय जनता पार्टी का जन्म दिन है मैं आप सब का अभिनंदन करता हूँ, आप सबको वंदन करता हूँ..! मेरे कार्यकर्ता भाइयो-बहनों, मैंने पहले ही दिन जब से कार्य संभाला है, उस दिन से मैंने कहा है, आज मैं दोबारा दोहराता हूँ कि मैं परिश्रम में कोई कमी नहीं रखूँगा, मैं बद इरादे से कोई पाप नहीं करूंगा..! भाइयों-बहनों, जब मैं कहता हूँ कि इंडिया फर्स्ट, तो उस लक्ष्य से, उस मार्ग से भारतीय जनता पार्टी कभी चलित नहीं हो सकती। हमारे लिए दल से बड़ा देश है। हम देश के लिए जीने-मरने वाले लोग हैं। गली-मौहल्ले में भी काम करेंगे लेकिन भारत माता के लिए करेंगे। हम गुजरात की सेवा करते हैं लेकिन हमारा तो मंत्र है, ‘भारत के विकास के लिए गुजरात का विकास’..! हम सबको इस माँ भारती के कल्याण के लिए, निराशा की गर्त में डूबे हुए सामाज में एक नया विश्वास पैदा करने के लिए अपने इस कार्य को हमें करते रहना है।

भाइयो-बहनों, भारतीय जनता पार्टी आज पूरे देश में एक आशा की किरण बनी हुई है। और ये बात पॉलिटिकल पंडित हैं वो जानें। पॉलिटिकल पार्टीयों का जन्म होने के बाद अस्सी-अस्सी साल तक उन्हें सत्ता स्थान पर पहुंचने का मौका नहीं मिला हो, ऐसे दुनिया में कई उदाहरण हैं। ये भारतीय जनता पार्टी है। इतना बड़ा देश, इतना बड़ा लोकतंत्र, लेकिन जन्म से जवानी की यात्रा पूरी होने से पहले तक पहुंचते-पहुंचते, इस देश की जनता ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हमें सेवा करने का मौका दिया था। इंग्लैंड की लेबर पार्टी को अस्सी साल तक मौका नहीं मिला था। भारतीय जनता पार्टी को जन्म से जवानी की यात्रा पूरी होने से पहले देश की जनता ने उस पर अमी वर्षा कर दी थी। आप कल्पना कर सकते हो कि लोग कांग्रेस से कितने तंग आ गए हैं, लोग देश की तबाही से कितने तंग आ चुके हैं..! और तब जा करके भाइयो-बहनों, भारत माँ का भाग्य बदलना ये भारतीय जनता पार्टी के हर कार्यकर्ता का दायित्व है। स्वामी विवेकानंद जी की स्मृती में हम ये 150 वां वर्ष मना रहे हैं। विवेकानंद जी का सपना पूरा करने के लिए देशवासियों को बाहर से नई प्रेरणा की जरूरत नहीं है। विवेकानंद जी के शब्द काफी है, विवेकानंद जी का संदेश काफी है, विवेकानंद जी का जीवन काफी है..! उससे प्रेरणा लेकर के एक नए उमंग और विश्वास के साथ आगे बढ़ना है।

भाइयो-बहनों, आज भारतीय जनता पार्टी जहाँ भी पहुँची है, गुजरात में भारतीय जनता पार्टी ने जो स्थिति पैदा की है वो किसी एक व्यक्ति के कारण नहीं है। पीढ़ियाँ की पीढ़ियाँ बीत गई, परिवार के परिवार इस पार्टी के लिए खप गए हैं। एक जमाना था, अगर मंहगाई के लिए भाजपा के कार्यकर्ता जुलूस निकालते थे तो 21-21 दिन की सजा हुआ करती थी। पूरा परिवार 21-21 दिन तक गुजरात की जेलों में रहने के लिए मजबूर हुआ करता था। ऐसे अनेक कार्यकर्ताओं के परिश्रम के कारण ये पार्टी यहाँ पहुँची है। इस पार्टी को यहाँ तक पहुँचाने वाले, अपने परिवारों को खपा देने वाले, अपनी जवानी को खपा देने वाले उन लक्षावधी कार्यकर्ताओं का मैं आज पुण्य स्मरण करता हूँ, उनका अभिनंदन करता हूँ, उनको वंदन करता हूँ..!

भाइयो-बहनों, एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आज हमको करना है। हम यहाँ से संकल्प लेकर के जाने वाले हैं। हमारे पार्टी के पूर्व अध्यक्ष श्रीमान् रूपाला जी हम सबको एक संकल्प दिलाने वाले हैं। लेकिन इस संकल्प की भी एक विशेषता है। हमारे हाथ में एक मोमबत्ती दी गई है, जो जलानी है। जब मोमबत्ती जलाएंगे तो ये सारी रोशनी बंद होने वाली है। भाइयों-बहनों, ये प्रकाश की ओर जाने का संदेश है और घर-घर, गाँव-गाँव कमल खिलाने का संदेश है। और जो लोग भारतीय जनता पार्टी को दिन-रात गाली देते हैं, नई-नई डिक्शनरी के शब्द निकालते हैं वे कान खोल कर के सुन लें, आप भारतीय जनता पार्टी पर जितना ज्यादा कीचड़ उछालोगे कमल उतना ही ज्यादा खिलने वाला है। उस कमल के संदेश को ले कर के आईये भाइयो-बहनों, आज अपनी पार्टी के 33 वर्ष की यात्रा का गौरव करते हुए एक नई यात्रा का शुभ संकल्प करके चलें। मेरी आप सब से प्रार्थना है कि आप सबको जो मोमबत्ती दी गई है उसको जलाया जाए और यहाँ की व्यवस्था वालों से मेरी प्रार्थना है कि स्टेडियम में और लाइटें बंद करके इस नजारे का अनुभव किया जाए और जब तक ये विधि पूरी नहीं होती है, हम अपना स्थान छोड़ेगें नहीं, हम जाएंगे नहीं। मेरे साथ बोलिए -

भारत माता की जय..!

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July 31, 2021
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You are lucky to enter Service in the 75th Year of Azadi, next 25 years are critical for both you and India: PM
“They fought for ‘Swarajya’; you have to move forward for ‘Su-rajya’”: PM
Challenge is to keep police ready in these times of technological disruptions: PM
You are the flag-bearers of ‘Ek Bharat -Shreshth Bharat’, always keep the mantra of ‘Nation First, Always First’ foremost: PM
Remain friendly and keep the honour of the uniform supreme: PM
I am witnessing a bright new generation of women officers, we have worked to increase the participation of women in police force: PM
Pays tribute to members of the Police Service who lost their lives serving during the pandemic
Officer trainees from the neighbouring counties underline the closeness and deep relation of our countries: PM

ଆପଣମାନଙ୍କ ସହିତ କଥା ହୋଇ ମୋତେ ବହୁତ ଭଲ ଲାଗିଲା । ପ୍ରତ୍ୟେକ ବର୍ଷ ମୋର ଏହି ପ୍ରୟାସ ରହିଥାଏ ଯେ ଆପଣମାନଙ୍କ ଭଳି ଯୁବ ସାଥୀମାନଙ୍କ ସହିତ କଥା ହୁଏ, ଆପଣମାନଙ୍କ ଚିନ୍ତାଧାରା ସଂପର୍କରେ କ୍ରମାଗତ ଭାବେ ଜାଣୁଥାଏ। ଆପଣମାନଙ୍କର କଥା, ଆପଣମାନଙ୍କର ପ୍ରଶ୍ନ, ଆପଣମାନଙ୍କର ଉତ୍ସୁକତା, ମୋତେ ମଧ୍ୟ ଭବିଷ୍ୟତର ଆହ୍ୱାନ ମୁକାବିଲା କରିବାରେ ସହାୟତା କରିଥାଏ।

ସାଥୀଗଣ,

ଚଳିତ ଥରର ଏହି ଚର୍ଚ୍ଚା ଏଭଳି ସମୟରେ ହେଉଛି ଯେତେବେଳେ ଭାରତ, ନିଜ ସ୍ୱାଧନତାର 75 ବର୍ଷର ଅମୃତ ମହୋତ୍ସବ ପାଳନ କରୁଛି। ଚଳିତ ବର୍ଷର ଅଗଷ୍ଟ 15 ତାରିଖ, ନିଜ ସହିତ ସ୍ୱାଧୀନତାର 75 ବର୍ଷ ପୂର୍ତି ନେଇକରି ଆସିଛି। ବିଗତ 75 ବର୍ଷରେ ଭାରତ ଏକ ଉନ୍ନତ ପୁଲିସ ସେବାର ନିର୍ମାଣ ପାଇଁ ପ୍ରୟାସ କରିଛି। ପୁଲିସ ଟ୍ରେନିଂ ସହିତ ଜଡ଼ିତ ଭିତିଭୂମିରେ ମଧ୍ୟ ଏହି କିଛି ବର୍ଷ ହେବ ବହୁତ ସଂସ୍କାର ହୋଇଛି। ଆଜି ଯେତେବେଳେ ମୁଁ ଆପଣମାନଙ୍କ ସହିତ କଥା ହେଉଛି, ସେତେବେଳେ ସେହି ଯୁବକମାନଙ୍କୁ ଦେଖୁଛି, ଯେଉଁମାନେ ଆଗାମୀ 25 ବର୍ଷ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଭାରତରେ ଆଇନ ବ୍ୟବସ୍ଥାକୁ ସୁନିଶ୍ଚିତ କରବାରେ ସହଭାଗୀ ହେବେ। ଏହା ହେଉଛି ବହୁତ ବଡ଼ ଦାୟିତ୍ୱ। ଏଥିପାଇଁ ଏବେ ଏକ ନୂତନ ଶୁଭାରମ୍ଭ, ଏକ ନୂଆ ସଂକଳ୍ପର ଲକ୍ଷ୍ୟକୁ ନେଇ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବାକୁ ହେବ।

ସାଥୀଗଣ,

ମୋତେ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ସୂଚନା ମିଳିନାହିଁ ଯେ ଆପଣମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ କେତେ ଲୋକ ଦାଣ୍ଡି ଯାଇଛନ୍ତି ଅବା ପୁଣି କେତେ ଜଣ ସାବରମତୀ ଆଶ୍ରମ ଦେଖିଛନ୍ତି। କିନ୍ତୁ ମୁଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ 1930ର ଦାଣ୍ଡି ଯାତ୍ରା ସମ୍ପର୍କରେ ସ୍ମରଣ କରାଇ ଦେବାକୁ ଚାହୁଁଛି। ଗାନ୍ଧିଜୀ ଯେଉଁ ଲବଣ ସତ୍ୟାଗ୍ରହ ବଳରେ ଇଂରେଜ ଶାସନର ମୂଳଦୁଆକୁ ଦୋହଲାଇ ଦେବାର କଥା କହିଥିଲେ। ସେ ମଧ୍ୟ ଏହା କହିଥିଲେ ଯେ ‘ଯେତେବେଳେ ସାଧନ ନ୍ୟାୟପୂର୍ଣ୍ଣ ଏବଂ ଠିକ୍ ହୋଇଥାଏ, ସେତେବେଳେ ଭଗବାନ ମଧ୍ୟ ସାଙ୍ଗରେ ଠିଆ ହେବା ପାଇଁ ଉପସ୍ଥିତ ହୋଇ ଯାଇଥାଆନ୍ତି।’

 

 

ସାଥୀଗଣ,

ଗୋଟିଏ ଛୋଟିଆ ଲାଠିକୁ ସାଙ୍ଗରେ ଧରି ମହାତ୍ମା ଗାନ୍ଧି ସାବରମତୀ ଆଶ୍ରମରୁ ବାହାରି ପଡ଼ିଥିଲେ। ଦିନ ପରେ ଦିନ ବିତି ଚାଲିଲା ଆଉ ଲୋକମାନେ ଯିଏ ଯେଉଁଠାରେ ଥିଲେ, ସେମାନେ ଲବଣ ସତ୍ୟାଗ୍ରହ ସହିତ ଯୋଡ଼ି ହୋଇ ଚାଲିଲେ । 24 ଦିନ ପରେ ଯେତେବେଳେ ଗାନ୍ଧିଜୀ ଦାଣ୍ଡିରେ ନିଜର ଯାତ୍ରା ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ କଲେ, ସେତେବେଳେ ସମଗ୍ର ଦେଶ, ଏକ ପ୍ରକାରରେ ସାରା ଦେଶ ଜାଗ୍ରତ ହୋଇ ଠିଆ ହୋଇ ପଡ଼ିଥିଲା । କଶ୍ମୀରରୁ କନ୍ୟାକୁମାରୀ, ଅଟକରୁ କଟକ। ସମଗ୍ର ହିନ୍ଦୁସ୍ତାନ ଚେତନାଯୁକ୍ତ ହୋଇ ଯାଇଥିଲା। ସେହି ମନୋଭାବକୁ ସ୍ମରଣ କରିବା, ସେହି ଇଚ୍ଛାଶକ୍ତିକୁ ସ୍ମରଣ କରନ୍ତୁ। ସେହି ଲକ୍ଷ୍ୟ ନେଇ, ସେହି ଐକ୍ୟବଦ୍ଧ ମନୋଭାବ ଭାରତର ସ୍ୱାଧୀନତା ସଂଗ୍ରାମକୁ ସାମୁହିକତାର ଶକ୍ତିରେ ଭରି ଦେଇଥିଲା। ପରିବର୍ତନର ସେହି ଭାବ, ସଂକଳ୍ପର ସେହି ଇଚ୍ଛାଶକ୍ତି ଆଜି ଦେଶ ଆପଣମାନଙ୍କ ଭଳି ଯୁବକମାନଙ୍କ ଠାରୁ ଆଶା କରୁଛି। 1930 ରୁ 1947 ମଧ୍ୟରେ ଦେଶରେ ଯେଉଁ ଜୁଆର ଉଠିଥିଲା, ଯେଉଁଭଳି ଭାବେ ଦେଶର ଯୁବକମାନେ ଆଗକୁ ଆସିଲେ, ଏକ ଲକ୍ଷ୍ୟ ପାଇଁ ଏକଜୁଟ ହୋଇ ସମଗ୍ର ଯୁବପିଢ଼ୀ ଏକାଠି ଯୋଡ଼ି ହୋଇଗଲେ, ଆଜି ସେହି ମନୋଭାବ ଆପଣମାନଙ୍କ ଠାରୁ ଆଶା କରାଯାଉଛି। ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଏହି ଭାବ ସହିତ ବଂଚିବାକୁ ହେବ। ଏହି ସଂକଳ୍ପ ସହିତ ଯୋଡି ହେବା। ସେହି ସମୟରେ ଦେଶର ଲୋକ ବିଶେଷ କରି ଦେଶର ଯୁବକମାନେ ସ୍ୱରାଜ୍ୟ ପାଇଁ ଲଢ଼େଇ କରିଥିଲେ। ଆଜି ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସୁରାଜ୍ୟ ପାଇଁ ମନ-ପ୍ରାଣ ଦେଇ ଏକାଠି ହେବାକୁ ପଡ଼ିବ। ସେହି ସମୟରେ ଲୋକମାନେ ଦେଶର ସ୍ୱାଧୀନତା ପାଇଁ ପ୍ରାଣବଳୀ ଦେବାକୁ ପ୍ରସ୍ତୁତ ଥିଲେ। ଆଜି ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଦେଶ ପାଇଁ ଜୀଇଁବାର ଭାବନା ନେଇ ଆଗକୁ ଚାଲିବାର ଅଛି। 25 ବର୍ଷ ପରେ ଯେତେବେଳେ ଦେଶର ସ୍ୱାଧୀନତାର 100 ବର୍ଷ ପୂରଣ ହେବ, ସେତେବେଳେ ଆମ ଦେଶର ପୁଲିସ ସେବା କିପରି ହେବ, କେତେ ସଶକ୍ତ ହେବ, ତାହା ଆପଣମାନଙ୍କର ଆଜିର କାର୍ଯ୍ୟ ଉପରେ ମଧ୍ୟ ନିର୍ଭର କରିବ। ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସେହି ମୂଳଦୁଆ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିବାର ଅଛି, ଯାହା ଉପରେ 2047ର ଭବ୍ୟ, ଅନୁଶାସିତ ଭାରତର ଭବନ ନିର୍ମାଣ ହେବ। ସମୟ ଏହି ସଂକଳ୍ପକୁ ସିଦ୍ଧି କରିବା ପାଇଁ ଆପଣଙ୍କ ଭଳି ଯୁବକମାନଙ୍କୁ ମନୋନୀତ କରିଛି। ଆଉ ମୁଁ ଏହାକୁ ଆପଣମାନଙ୍କ ପାଇଁ ବହୁତ ବଡ଼ ସୌଭାଗ୍ୟ ବୋଲି ଭାବୁଛି। ଆପଣ ଏକ ଏଭଳି ସମୟରେ କ୍ୟାରିୟର ଆରମ୍ଭ କରୁଛନ୍ତି, ଯେତେବେଳେ ଭାରତର ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ର, ପ୍ରତ୍ୟେକ ସ୍ତରରେ ରୂପାନ୍ତରଣର ସମୟ ଦେଇ ଗତି କରୁଛି। ଆପଣଙ୍କ କ୍ୟାରିୟରରେ ଆଗାମୀ 25 ବର୍ଷ ଭାରତର ବିକାଶ କ୍ଷେତ୍ରରେ ମଧ୍ୟ ସବୁଠାରୁ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ 25ବର୍ଷ ହେବାକୁ ଯାଉଛି। ଏଥିପାଇଁ ଆପଣଙ୍କ ପ୍ରସ୍ତୁତି, ଆପଣମାନଙ୍କର ମନର ସ୍ଥିତି, ଏହି ବଡ଼ ଲକ୍ଷ୍ୟର ଅନୁକୂଳ ହେବା ଉଚିତ। ଆଗାମୀ 25 ବର୍ଷରେ ଆପଣ ଦେଶର ଭିନ୍ନ-ଭିନ୍ନ ଭାଗରେ, ଭିନ୍ନ-ଭିନ୍ନ ପଦରେ କାର୍ଯ୍ୟ କରିବେ, ଭିନ୍ନ-ଭିନ୍ନ ଭୂମିକା ତୁଲାଇବେ। ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କ ଉପରେ ଏକ ଆଧୁନିକ, ପ୍ରଭାବଶାଳୀ ଏବଂ ସମ୍ବେଦନଶୀଳ ପୁଲିସ ସେବାକ ନିର୍ମାଣର ବହୁତ ବଡ଼ ଦାୟିତ୍ୱ ରହିଛି। ଆଉ ଏଥିପାଇଁ, ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସଦା ସର୍ବଦା ଏହା ସ୍ମରଣ ରଖିବାକୁ ହେବ ଯେ ଆପଣ 25 ବର୍ଷ ପାଇଁ ଏକ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ମିଶନରେ ଅଛନ୍ତି, ଆଉ ଭାରତ ଏଥିପାଇଁ ବିଶେଷ ଭାବେ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ମନୋନନୀତ କରିଛି।

ସାଥୀଗଣ,

ସାରା ବିଶ୍ୱର ଅନୁଭବ କହୁଛି ଯେ ଯେତେବେଳେ କୌଣସି ରାଷ୍ଟ୍ର ବିକାଶ ପଥରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ିଥାଏ, ତେବେ ଦେଶ ବାହାରୁ ଏବଂ ଦେଶ ଭିତରୁ, ଆହ୍ୱାନ ମଧ୍ୟ ସେତିକି ବୃଦ୍ଧି ପାଇଥାଏ। ଏଭଳି ପରିସ୍ଥିତିରେ ଆପଣମାନଙ୍କର ଆହ୍ୱାନ, ବୈଷୟିକ ବିଘଟନର ଏହି ସମୟରେ ପୁଲିସିଂକୁ ନିରନ୍ତର ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିବାର ଅଛି। ଆପଣମାନଙ୍କର ଆହ୍ୱାନ, ଅପରାଧର ନୂଆ-ନୂଆ କୌଶଳକୁ ଆପଣମାନେ ମଧ୍ୟ ଅଧିକ ଅଭିନବତାର ସହିତ ରୋକିବାକୁ ଅଛି। ବିଶେଷ ଭାବେ ସାଇବର ସୁରକ୍ଷାକୁ ନେଇ ନୂଆ ପ୍ରୟୋଗ, ନୂତନ ଗବେଷଣା ଏବଂ ନୂଆ କଳା କୌଶଳକୁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ବିକଶିତ କରିବାକୁ ହେବ ଏବଂ ତାହାକୁ ମଧ୍ୟ ଉପଯୋଗ କରିବାର ଅଛି।

 

ସାଥୀଗଣ,

ଦେଶର ସମ୍ବିଧାନ, ଦେଶର ଗଣତନ୍ତ୍ର, ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ଯାହା ମଧ୍ୟ ଅଧିକାର ଦେଇଛି, ଯେଉଁ କର୍ତବ୍ୟଗୁଡ଼ିକୁ ପାଳନ କରିବାର ଆଶା ରଖିଛି, ତାହାକୁ ସୁନିଶ୍ଚିତ କରିବାରେ ଆପଣମାନଙ୍କର ଭୂମିକା ହେଉଛି ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ। ଆଉ ଏଥିପାଇଁ, ଆପଣମାନଙ୍କ ଠାରୁ ବହୁତ କିଛି ଆଶା ରହିଛି। ଆପଣଙ୍କ ଆଚରଣ ଉପରେ ସର୍ବଦା ଦୃଷ୍ଟି ରହିଛି। ଆପଣମାନଙ୍କ ଉପରେ ମଧ୍ୟ ବହୁତ ଚାପ ଆସିଥାଏ। ଆପଣମାନଙ୍କୁ କେବଳ ପୁଲିସ ଥାନାରୁ ନେଇ ପୁଲିସ ମୁଖ୍ୟାଳୟର ସୀମା ଭିତରେ ରହିବା ଚିନ୍ତା କରିବା ଉଚିତ ନୁହେଁ। ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସମାଜରେ ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ରରେ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ଭୂମିକା ସହିତ ମଧ୍ୟ ପରିଚିତ ରହିବାର ଅଛି, ବନ୍ଧୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଭାବ ସହିତ ରହିବାର ଅଛି ଏବଂ ପୋଷାକର ମର୍ଯ୍ୟାଦାକୁ ସର୍ବୋଚ୍ଚ ସ୍ଥାନରେ ରଖିବାର ଅଛି। ଆଉ ଏକ କଥା ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସଦା ସର୍ବଦା ଧ୍ୟାନରେ ରଖିବାକୁ ହେବ। ଆପଣମାନଙ୍କର ସେବା, ଦେଶର ଭିନ୍ନ-ଭିନ୍ନ ଜିଲ୍ଲାରେ ରହିବ, ସହରରେ ମଧ୍ୟ ରହିବ, ଏଥିପାଇଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଏକ ମନ୍ତ୍ର ସଦା ସର୍ବଦା ମନେ ରଖିବାର ଅଛି। କ୍ଷେତ୍ରରେ ରହିବା ସମୟରେ ଆପଣମାନେ ଯାହା ମଧ୍ୟ ନିଷ୍ପତି ନେବେ, ତାହା ଦ୍ୱାରା ଦେଶର ହିତ ହେବା ଆବଶ୍ୟକ। ରାଷ୍ଟ୍ରୀୟ ପରିପ୍ରେକ୍ଷ୍ୟ ହେବା ଉଚିତ। ଆପଣମାନଙ୍କ କାର୍ଯ୍ୟକଳାପର ପରିସର ଏବଂ ସମସ୍ୟାମାନ ଯଦିଓ ସ୍ଥାନୀୟ ହେବ, ଏଭଳି କ୍ଷେତ୍ରରେ ତାହାର ମୁକାବିଲା କରିବା ସମୟରେ ଏହି ମନ୍ତ୍ର ବହୁତ କାର୍ଯ୍ୟରେ ଆସିବ। ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସଦା ସର୍ବଦା ଏହା ସ୍ମରଣ ରଖିବାକୁ ହେବ ଯେ ଆପଣ ଏକ ଭାରତ, ଶ୍ରେଷ୍ଠ ଭାରତ ଭାବନାର ହେଉଛନ୍ତି ଧ୍ୱଜାବାହକ। ଏଥିପାଇଁ ଆପଣମାନଙ୍କର ପ୍ରତ୍ୟେକ କାର୍ଯ୍ୟ, ଆପଣମାନଙ୍କର ପ୍ରତ୍ୟେକ ଗତିବିଧିରେ ଦେଶ ପ୍ରଥମେ, ସଦୈବ ପ୍ରଥମେ- ରାଷ୍ଟ୍ର ପ୍ରଥମ, ସଦୈବ ପ୍ରଥମ ଏହି ଭାବନାକୁ ପ୍ରତିଫଳିତ କରିବା ଭଳି ହେବା ଉଚିତ।

ସାଥୀଗଣ,

ମୁଁ ଆପଣଙ୍କ ସମ୍ମୁଖରେ ତେଜସ୍ୱୀ ମହିଳା ଅଫିସରମାନଙ୍କର ନୂଆ ପିଢ଼ୀକୁ ଦେଖୁଛି। ବିଗତ ବର୍ଷମାନଙ୍କରେ ପୁଲିସ ବଳରେ ଝିଅମାନଙ୍କର ଯୋଗଦାନକୁ ବୃଦ୍ଧି କରିବା ପାଇଁ ନିରନ୍ତର ପ୍ରୟାସ କରାଯାଇଛି। ଆମର ଝିଅମାନେ ପୁଲିସ ସେବାରେ ଦକ୍ଷତା ଏବଂ ଉତରଦାୟିତ୍ୱ ସହିତ, ବିନମ୍ରତା, ସହଜତା ଏବଂ ସମ୍ବେଦନଶୀଳତାର ମୂଲ୍ୟବୋଧକୁ ମଧ୍ୟ ସଶକ୍ତ କରିଛନ୍ତି। ଏହିଭଳି ଭାବେ ୧୦ ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ଜନସଂଖ୍ୟା ବିଶିଷ୍ଟ ସହରରେ କମିଶନର ପଦ୍ଧତି ଲାଗୁ କରିବାକୁ ନେଇ ମଧ୍ୟ ରାଜ୍ୟଗୁଡ଼ିକ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛନ୍ତି। ଏ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ 16ଟି ରାଜ୍ୟର ଅନେକ ସହରରେ କମିଶନର ବ୍ୟବସ୍ଥା ଲାଗୁ କରାଯାଇ ସାରିଛି। ମୋର ବିଶ୍ୱାସ ଯେ ଅନ୍ୟ ସ୍ଥାନରେ ମଧ୍ୟ ଏହାକୁ ନେଇ ସକରାତ୍ମକ ପଦକ୍ଷେପ ଉଠାଯିବ।

ସାଥୀଗଣ,

ପୁଲିସିଂକୁ ଭବିଷ୍ୟତବାଦୀ ଏବଂ ପ୍ରଭାବଶାଳୀ କରିବା ପାଇଁ ସାମୁହିକତା ଏବଂ ସମ୍ବେଦନଶୀଳତାର ସହିତ କାର୍ଯ୍ୟ କରିବା ହେଉଛି ବହୁତ ଜରୁରୀ। ଏହି କରୋନା ସମୟରେ ମଧ୍ୟ ଆମେ ଦେଖିଛୁ ପୁଲିସ ସାଥୀମାନେ କିଭଳି ସ୍ଥିତିକୁ ନିୟନ୍ତ୍ରଣ କରିବାରେ ବହୁତ ବଡ଼ ଭୂମିକା ତୁଲାଇଛନ୍ତି। କରୋନା ବିରୋଧୀ ଲଢେଇରେ ଆମର ପୁଲିସ କର୍ମୀମାନେ, ଦେଶବାସୀଙ୍କ ସହିତ କାନ୍ଧକୁ କାନ୍ଧ ମିଳାଇ କାର୍ଯ୍ୟ କରିଛନ୍ତି। ଏହି ପ୍ରୟାସରେ ଅନେକ ପୁଲିସ କର୍ମୀଙ୍କୁ ନିଜ ଜୀବନକୁ ଆହୁତି ଦେବାକୁ ପଡିଛି। ମୁଁ ସେହି ସମସ୍ତ ଯବାନଙ୍କୁ, ପୁଲିସ ସାଥୀମାନଙ୍କୁ ଆଦର ପୂର୍ବକ ଶ୍ରଦ୍ଧାଞ୍ଜଳି ଜଣାଉଛି ଏବଂ ଦେଶ ତରଫରୁ ସେମାନଙ୍କ ପରିବାର ପ୍ରତି ସମ୍ବେଦନା ପ୍ରକଟ କରୁଛି।

 

ସାଥୀଗଣ,

ଆଜି ଆପଣମାନଙ୍କ ସହିତ କଥା ହୋଇ, ମୁଁ ଆଉ ଗୋଟିଏ ପକ୍ଷ ଆପଣମାନଙ୍କ ସମ୍ମୁଖରେ ରଖିବାକୁ ଚାହୁଁଛି। ଆଜିକାଲି ଆମେ ଦେଖୁଛେ ଯେ ଯେଉଁଠି– ଯେଉଁଠି ପ୍ରାକୃତିକ ବିପର୍ଯ୍ୟୟ ଆସିଥାଏ, କେଉଁଠାରେ ବନ୍ୟା, କେଉଁଠାରେ ସାମୁଦ୍ରିକ ଝଡ଼, କେଉଁଠାରେ ଭୂସ୍ଖଳନ, ତେବେ ଆମର ଏନଡିଆରଏଫର ସାଥୀମାନେ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ସାମର୍ଥ୍ୟର ସହିତ ସେଠାରେ ଦୃଷ୍ଟିଗୋଚର ହୋଇଥାଆନ୍ତି। ପ୍ରାକୃତିକ ବିପର୍ଯ୍ୟୟ ସମୟରେ ଏନଡିଆରଏଫର ନାମ ଶୁଣି ଲୋକମାନଙ୍କ ମନରେ ଏକପ୍ରକାରର ବିଶ୍ୱାସ ଜନ୍ମିଥାଏ। ଏନଡିଆରଏଫର ଏହି ଶାଖା ନିଜର ଉନ୍ନତ କାର୍ଯ୍ୟ ଯୋଗୁଁ ଏହି ସୁନାମ ଅର୍ଜନ କରି ପାରିଛି। ଆଜି ଲୋକଙ୍କୁ ଏହି ଭରସା ରହିଛି ଯେ ବିପର୍ଯ୍ୟୟ ସମୟରେ ଏନଡିଆରଏଫର ଯବାନମାନେ ନିଜ ଜୀବନକୁ ମଧ୍ୟ ବାଜି ଲଗାଇ ଆମକୁ ବଂଚାଇବେ। ଏନଡିଆରଏଫ ମଧ୍ୟ ଅଧିକାଂଶ ପୁଲିସ ବଳର ଯବାନ ଥାଆନ୍ତି। ଆପଣମାନଙ୍କର ସାଥୀମାନେ ଥାଆନ୍ତି। କିନ୍ତୁ କ’ଣ ଏହି ଭାବନା, ଏହି ସମ୍ମାନ, ପୁଲିସ ପ୍ରତି ରହିଛି? ଏନଡିଆରଏଫରେ ପୁଲିସର ଲୋକମାନେ ମଧ୍ୟ ଅଛନ୍ତି । ଏନଡିଆରଏଫକୁ ସମ୍ମାନ ମଧ୍ୟ ମିଳୁଛି । ଏନଡିଆରଏଫରେ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଥିବା ପୁଲିସ ଯବାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ସମ୍ମାନ ମିଳୁଛି। କିନ୍ତୁ ସାମାଜିକ ବ୍ୟବସ୍ଥା ସେପରି ରହିଛି କି? କିନ୍ତୁ କ’ଣ ପାଇଁ ? ଏହାର ଉତର,   ଆପଣମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ଜଣାଅଛି । ଜନମାନସରେ ପୁଲିସ ପ୍ରତି ଏ ଯେଉଁ ନକରାତ୍ମକ ଦୃଷ୍ଟିଭଙ୍ଗୀ ରହିଛି, ତାହା ନିଜକୁ ନିଜ ମଧ୍ୟରେ ହେଉଛି ବହୁତ ବଡ଼ ଆହ୍ୱାନ । କରୋନା ସମୟରେ ପ୍ରାରମ୍ଭିକ ଅବସ୍ଥାରେ ଅନୁଭବ କରାଯାଇଥିଲା ଯେ ଏହି ଦୃଷ୍ଟିଭଙ୍ଗୀ ଟିକେ ବଦଳି ଯାଇଛି । କାରଣ ଲୋକମାନେ ଯେତେବେଳେ ଭିଡିଓଗୁଡ଼ିକୁ ସାମାଜିକ ଗଣମାଧ୍ୟମରେ ଦେଖୁଥିଲେ । ପୁଲିସ କର୍ମୀମାନେ ଗରିବମାନଙ୍କର ସେବା କରୁଥିଲେ। ଭୋକିଲା ଲୋକମାନଙ୍କୁ ଖାଦ୍ୟ ଖାଇବାକୁ ଦେଉଥିଲେ । କେଉଁଠାରେ ଖାଦ୍ୟ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରି ଗରିବଙ୍କ ନିକଟରେ ପହଂଚାଉଥିଲେ, ସେତେବେଳେ ସମାଜରେ ଲୋକମାନେ ପୁଲିସକୁ ଏକ ଭିନ୍ନ ଦୃଷ୍ଟିରେ ଦେଖୁଥିଲେ, ଚିନ୍ତା କରିବାର ବାତାବରଣ ବଦଳୁଥିଲା। କିନ୍ତୁ ଏବେ ପୁଣି ସେହି ପୁରୁଣା ସ୍ଥିତି ହୋଇ ଯାଇଛି। ତେବେ କାହିଁକି ଜନତାଙ୍କ ବିଶ୍ୱାସ ବୃଦ୍ଧି ପାଉନାହିଁ, ଭରସା କାହିଁକି ବୃଦ୍ଧି ପାଉନାହିଁ?

ସାଥୀଗଣ,

ଦେଶର ସୁରକ୍ଷା ପାଇଁ, ଆଇନ ବ୍ୟବସ୍ଥା ବଜାୟ ରଖିବା ପାଇଁ, ଆତଙ୍କର ସମାପ୍ତି ପାଇଁ ଆମର ପୁଲିସ ସାଥୀ, ନିଜ ପ୍ରାଣ ଉତ୍ସର୍ଗ କରି ଦେଇଥାଆନ୍ତି। ଅନେକ- ଅନେକ ଦିନ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଆପଣମାନେ ଘରକୁ ଯାଇ ପାରନ୍ତି ନାହିଁ, ପର୍ବପର୍ବାଣୀ ଉତ୍ସବ ସମୟରେ ମଧ୍ୟ ପ୍ରାୟତଃ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ପରିବାର ଠାରୁ ଦୂରରେ ରହିବାକୁ ପଡ଼ିଥାଏ। କିନ୍ତୁ ଯେତେବେଳେ ପୁଲିସର ଭାବମୂର୍ତିର କଥା ଆସିଥାଏ, ସେତେବେଳେ ଲୋକଙ୍କ ମନୋଭାବ ବଦଳି ଯାଇଥାଏ। ପୁଲିସ ବିଭାଗକୁ ଆସୁଥିବା ନୂତନ ପିଢ଼ୀର ଏହା ହେଉଛି ଦାୟିତ୍ୱ ଯେ ଏହି ଭାବମୂର୍ତି ବଦଳୁ, ପୁଲିସ ପ୍ରତି ଥିବା ଏହି ନକରାତ୍ମକ ଦୃଷ୍ଟିଭଙ୍ଗୀର ଅନ୍ତ ହେଉ। ଏହା ଆପଣମାନଙ୍କୁ କରିବାର ଅଛି। ଆପଣମାନଙ୍କର ତାଲିମ, ଆପଣମାନଙ୍କର ଚିନ୍ତାଧାରା ମଧ୍ୟରେ ବର୍ଷ-ବର୍ଷ ଧରି ଚଳି ଆସୁଥିବା ପୁଲିସ ବିଭାଗର ଯେଉଁ ସ୍ଥାପିତ ପରମ୍ପରା ରହିଛି, ତାହା ସହିତ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ପ୍ରତିଦିନ ସାମ୍ନା-ସାମ୍ନି ହେବାକୁ ପଡ଼ିଥାଏ। ବ୍ୟବସ୍ଥା ଆପଣମାନଙ୍କୁ ବଦଳାଇ ଦେଇଥାଏ ଅବା ଆପଣ ବ୍ୟବସ୍ଥାକୁ ବଦଳାଇ ଦେଉଛନ୍ତି, ଆପଣଙ୍କର ଏହି ଟ୍ରେନିଂ, ଆପଣଙ୍କର ଇଚ୍ଛାଶକ୍ତି ଏବଂ ଆପଣଙ୍କର ମନୋବଳ ଉପରେ ନିର୍ଭର କରିଥାଏ। ଆପଣଙ୍କର କ’ଣ ଲକ୍ଷ୍ୟ ରହିଛି। କେଉଁ ଆଦର୍ଶ ସହିତ ଆପଣ ଯୋଡ଼ି ହୋଇଛନ୍ତି? ସେହି ଆଦର୍ଶର ପରିପୂରଣ ପାଇଁ କେଉଁ ସଂକଳ୍ପ ନେଇ ଆପଣ ଚାଲୁଛନ୍ତି। ତାହା ହିଁ ନିର୍ଭର କରୁଛି ଆପଣ କିଭଳି ବ୍ୟବହାର କରିବେ। ଏହା ଏକ ପ୍ରକାରରେ ଆପଣଙ୍କର ଆଉ ଏକ ପରୀକ୍ଷା ହେବ। ଆଉ ମୋର ଭରସା ରହିଛି, ଆପଣମାନେ ମଧ୍ୟ ସଫଳ ହେବେ, ନିଶ୍ଚୟ ସଫଳ ହେବେ ।

ସାଥୀଗଣ,

ଏଠାରେ ଆମର ଯେଉଁ ପଡୋଶୀ ଦେଶର ଯୁବ ଅଫିସର ଅଛନ୍ତି, ସେମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ମୁଁ ବହୁତ-ବହୁତ ଶୁଭକାମନା ଦେବାକୁ ଚାହୁଁଛି। ଭୁଟାନ ହେଉ, ନେପାଳ ହେଉ, ମାଳଦ୍ୱୀପ ହେଉ, ମରିସସ ହେଉ, ଆମେ ସମସ୍ତେ କେବଳ ପଡୋଶୀ ହିଁ ନୁହେଁ, ବରଂ ଆମର ଚିନ୍ତାଧାରା ଏବଂ ସାମାଜିକ ଚାଲିଚଳଣୀରେ ମଧ୍ୟ ବହୁତ ସମାନତା ରହିଛି। ଆମେ ସମସ୍ତେ ହେଉଛେ ସୁଖ-ଦୁଃଖର ସାଥୀ। ଯେତେବେଳେ ମଧ୍ୟ କୌଣସି ବିପର୍ଯ୍ୟୟ ଆସିଥାଏ, ବିପତି ଆସିଥାଏ, ସେତେବେଳେ ସର୍ବପ୍ରଥମେ ପରସ୍ପରକୁ ସହାୟତା କରିଥାଉ। କରୋନା ସମୟରେ ମଧ୍ୟ ଆମେ ଏହା ଅନୁଭବ କରିଛେ। ଏଥିପାଇଁ, ଆଗାମୀ ବର୍ଷରେ ହେବାକୁ ଥିବା ବିକାଶରେ ମଧ୍ୟ ଆମର ଭାଗିଦାରୀ ବଢ଼ିବା ଥୟ। ବିଶେଷ ଭାବେ ଆଜି ଯେତେବେଳେ ଅପରାଧ ଏବଂ ଅପରାଧୀ, ସୀମାରେଖା ମଧ୍ୟରେ ସୀମିତ ନାହାଁନ୍ତି, ସେଭଳି ସମୟରେ ପାରସ୍ପରିକ ସମନ୍ୱୟ ଅଧିକ ଜରୁରୀ ହୋଇ ପଡ଼ିଛି। ମୋର ବିଶ୍ୱାସ ଯେ ସର୍ଦ୍ଦାର ପଟେଲ ଏକାଡେମୀରେ ବିତାଇଥିବା ଆପଣଙ୍କର ଏହି ଦିନ, ଆପଣଙ୍କ କ୍ୟାରିୟର, ଆପଣଙ୍କର ଜାତୀୟ ଏବଂ ସାମାଜିକ ଦାୟିତ୍ୱବୋଧ ଆଉ ଭାରତ ସହିତ ବନ୍ଧୁତାକୁ ମଧ୍ୟ ଦୃଢ଼ କରିବାରେ ସାହାଯ୍ୟ କରିବ। ପୁଣିଥରେ ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ବହୁତ-ବହୁତ ଶୁଭକାମନା!

ଧନ୍ୟବାଦ!