ସେୟାର
 
Comments

मंच पर विराजमान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, हम सबके मार्गदर्शक आदरणीय राजनाथ सिंह जी, गुजरात प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान आर. सी. फलदू जी, श्रीमान रूपाला जी, श्री वी. सतीश जी, कैप्टन अभिमन्यु जी, अमितभाई शाह, स्मृति बहन, मंत्री परिषद के मेरे सभी साथी, संसद सदस्य श्री, पार्टी के सभी वरिष्ठ साथी और गुजरात के कोने-कोने से आए हुए पार्टी के सभी कार्यकर्ता भाइयों और बहनों..!

ज 6 अप्रैल है। भारतीय जनता पार्टी के रुप में हमारी विकास यात्रा के 32 वर्ष पूर्ण हो करके 33 वें वर्ष में हम लोग प्रयाण कर रहे हैं। भाइयों-बहनों, 33 वर्ष की यात्रा पूरे हिन्दुस्तान के अंदर एक नई आशा को जन्म देने वाली यात्रा है। भारतीय जनता पार्टी का जन्म उस समय हुआ था जब कुछ निजी स्वार्थ वाले तत्व अपने निहित स्वार्थ के खातिर नए नए सवाल उठा कर के देश में कोई आल्टरनेट पनपे नहीं उस षडयंत्र के शिकार हुए थे। एक सौ से ज्यादा सदस्य वाले सदन में आए दिन भारतीय जनता पार्टी को अपमानित करने का प्रयास होता था। लोकतंत्र की मर्यादाओं को तोड़ा जाता था और उस पीड़ा में से, उस दर्द में से सत्ता के मार्ग को छोड कर के जनता के बीच जाने का फैसला भारतीय जनता पार्टी ने लिया था और तब से हमारे वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में, कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम से इस पार्टी ने जनसामान्य की आशा-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए प्रयास प्रारंभ किया था। भारतीय जनता पार्टी का जन्म सत्ता भूख में से नहीं हुआ है, भारतीय जनता पार्टी का जन्म सत्ता के दलालों की भलाई करने के लिए नहीं हुआ है। इस पार्टी का जन्म देश के कोटी-कोटी नागरिकों के भाग्य को बदलने के लिए हुआ है, कल्याण के लिए हुआ है। और जब कोई अच्छा काम करता है तो रूकावटें भी कम नहीं आती है। भाइयों-बहनों, कभी मैं केरल की तरफ देखता हूँ। क्या कारण है कि साम्यवादियों के लगातार हमलों के बावजूद भी, हमारे सैंकड़ों कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतारने के बावजूद भी, चाहे केरल हो या बंगाल हो भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता जीत मिले या ना मिले, जिंदगी खपा देने में कभी कमी नहीं रखता..! क्या कारण है कि सत्ता के गलियारों से दूर-दूर का नाता नहीं होने के बावजूद भी, एक भारत माता की जय के लिए अपना जीवन न्यौछावर करने वाले लक्षावती लोग आज भारतीय जनता पार्टी का कमल का झंडा उठा कर के चल रहे हैं..!

मैं दिल्ली में बैठे हुए शासकों को चेतावनी देता हूँ कि अगर आप सोचते हैं कि आपकी सी.बी.आई. के हमले भारतीय जनता पार्टी को निराश करेंगे, तो आप सोचने में गलती कर रहे हैं। आपको लगता है कि अपने गर्वनरों के माध्यम से आप भारतीय जनता पार्टी की सरकारों को परेशान करोगे, तो आप लिख कर रखिए, जहाँ भाजपा की सरकारें हैं, वहाँ की जनता दिल्ली सरकार के और काँग्रेस पार्टी के इस रवैये का चुन-चुन के जवाब देती है और देती रहेगी..! सारी संवैधानिक संस्थाओं को भारतीय जनता पार्टी की सरकारो को परेशान करना, भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को परेशान करना, भारतीय जनता पार्टी के दल को परेशानियों में डालना, इसी के लिए उपयोग में लाया जाता है। कांग्रेस के मित्रों, ये दिल्ली में आपकी सत्ता का नशा लंबे दिनों तक रहने वाला नहीं है..!

भाइयों-बहनों, कांग्रेस में और भारतीय जनता पार्टी में बहुत बड़ा अंतर है। भारतीय जनता पार्टी की सोच और कांग्रेस पार्टी की सोच के बीच कभी कोई मेल नहीं हो सकता। भाजपा के चरित्र और कांग्रेस के चरित्र की कभी कोई तुलना नहीं कर सकता। भाइयो-बहनों, कांग्रेस जिन पर आस लगा कर बैठी है, जिनके शब्द कांग्रेस की नीति माने जाते हैं, ऐसे एक नेता का मैंने दो दिन पूर्व मैंने एक भाषण सुना। मित्रों, मुझे बहुत गहरा धक्का लगा, मन को एक पीड़ा हुई के क्या ये लोग देश के विषय में ऐसा सोचते हैं..? भाइयों-बहनों, कांग्रेस के एक नेता कह रहे हैं और कांग्रेस पार्टी की सोच को प्रकट कर रहे हैं कि ये भारत देश मधुमक्खियों का छत्ता है। मेरे कांग्रेस के मित्रों, आपके लिये ये देश मधुमक्खी का छाता हो सकता है, हमारे लिए ये देश हमारी माँ है..! ये भारत हमारी माता है, इसके सौ करोड देशवासी हमारे भाई-बहन हैं..! ये पवित्र भूमि है, ये ऋषि-मुनियों की भूमी है। अटल बिहारी वाजपेयी कहा करते थे कि यहाँ का कंकर-कंकर हमारे लिए शंकर है। अटल बिहारी बाजपेयी कहा करते थे कि गंगा जी में बहती हुई हमारी हड्डी को कान में लाकर सुनोगे तो उस हड्डी में से भी आवाज आएगी, भारत माता की जय..! ये हमारे संस्कार है। हमारे लिए ये माँ है माँ..! इस माँ की पीड़ा हम देख नहीं सकते हैं। ये हमारी माँ है, जिसके संतानों का दु:ख-दर्द हमारी चिंता का कारण है। आपके लिए ये मधुमक्खी का छाता हो सकता है, हमारे लिए तो हमारी माँ है..! और मेहरबानी करके कांग्रेस के मित्रों, हमारी भारत माता का अपमान मत करो..! आपको अगर हिन्दुस्तान के लोगों की भाषा समज नहीं आती है तो कहीं से सीखा करो, लेकिन आपके अज्ञान के कारण मेरे देश की संस्कृति और परंपरा को बर्बाद करने का पाप मत करो..! भाइयो और बहनों, मैं कभी किसी नेता के भाषण पर समय बर्बाद नहीं करता, क्योंकि वो ध्यान देने योग्य होते भी नहीं हैं। लेकिन जब हमारी भावनाओं पर चोट पहुंचाई जाती है तब इस माँ के कल्याण के लिए जीवन खपाने वाले लक्षावती कार्यकर्ता को पीड़ा होनी बहुत स्वाभाविक है।

भाइयों-बहनों, मैं हैरान हूँ..! इस देश में पानी की समस्या है इसका देश के नेताओं को अता-पता भी नहीं है। आप पर हमें दया आती है..! हमारे गुजरात कांग्रेस के नेता पानी को लेकर के गुजरात के किसानों को, गुजरात के नागरिकों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। मैं कांग्रेस के मित्रों को प्रार्थना करता हूँ, आवाहन भी करता हूँ कि अगर आपको गुजरात के किसानों की इतनी चिंता है, अगर आपको गुजरात के गांव में पानी की चिंता है और सच्चे दिल से चिंता है तो आप समय बर्बाद किये बिना दिल्ली की आपकी सरकार पर दबाव डालो और सरदार सरोवर डेम की ऊंचाई का काम जो रुका हुआ है, उसको पहले पूरा करो..! मेरे पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं, गाँव-गाँव से आवाज उठनी चाहिए, नर्मदा डैम को पूर्ण करने के लिए अब हम ज्यादा इंतजार नहीं करेंगे..! हम दिल्ली के तख्त के साथ लड़ाई लड़ेंगे और कांग्रेस के लोगों को हर गली-मौहल्ले में जवाब देना पड़ेगा।

भाइयो-बहनों, कांग्रेस पार्टी से सुधरने की अपेक्षा मत करना, वो कभी नहीं सुधर सकते..! इस चुनाव में गुजरात की जनता ने जिस प्रकार से कांग्रेस पार्टी को सजा दी है, जिस प्रकार से उनके एक-एक दिग्गज नेताओं को गुजरात की जनता ने परास्त कर दिया है... जिस भाषा का पिछले पांच साल से वे प्रयोग कर रहे थे, जिस झूठ के सहारे गुजरात की जनता को गुमराह करने का रात-दिन प्रयास रहे थे, जिस गंदी गालियों का उपयोग किया जा रहा था... गुजरात की जनता ने उस भाषा को बोलने वालों को चुन-चुन कर साफ कर दिया। आशा थी कि वे समझेंगे, सुधरेंगे और लोकतंत्र की मार्यादाओं का पालन करेंगे, लेकिन भाइयों और बहनों, इस सरकार को अभी तो कल 101 दिन हुए हैं, लेकिन 100 दिन भी वे इंतजार करने को तैयार नहीं हैं, उनकी मन:स्थिति क्या होगी इसका आप अंदाजा लगा सकते हो..!

भाइयों-बहनों, भारतीय जनता पार्टी विकास के मंत्र को लेकर चली है। आज गुजरात की धरती पर हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष पधारे हैं तब मैं गुजरात की जनता की ओर से उनसे कहना चाहता हूँ कि आज चारों तरफ आपने इतना बड़ा दिल बताया है, सार्वजनिक जीवन में इतनी ऊंचाई का अनुभव करवाया है, मेरे जैसे छोटे कार्यकर्ता को आपने बहुत बड़ा बड़प्पन दिया है। भाइयों-बहनों, राजनीति में ये छोटी घटना नहीं होती है। अपने साथी को इस ऊंचाई तक ले जाने के लिए बहुत बड़ा दिल लगता है..! लेकिन मैं आज कहना चाहता हूँ कि आपने जो मुझ मान-सम्मान दिया है, आपने जो मेरी इज्जत की है, देश भर के कार्यकर्ताओं के दिलों में मेरी जगह बनाने के लिए आपने कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन ये यश भले ही मोदी को मिलता होगा, नाम भले ही मोदी का लिया जाता होगा, लेकिन इस यश के हकदार ये सारे मेरे भाई-बहन हैं, मेरे कार्यकर्ता हैं..! मेरे कार्यकर्ता भाइयों-बहनों, आपने परिश्रम ना किया होता, आपने विकास में विश्वास ना किया होता, आपने इस देश की भलाई के मंत्र को चरित्रार्थ ना किया होता, तो नरेन्द्र मोदी को कौन पहचानने वाला था..? ये पहचान आपके कारण बनी है, आपके पुरषार्थ के कारण बनी है, आपके त्याग और तपश्चर्या के कारण बनी है। और आज जब भारतीय जनता पार्टी का जन्म दिन है मैं आप सब का अभिनंदन करता हूँ, आप सबको वंदन करता हूँ..! मेरे कार्यकर्ता भाइयो-बहनों, मैंने पहले ही दिन जब से कार्य संभाला है, उस दिन से मैंने कहा है, आज मैं दोबारा दोहराता हूँ कि मैं परिश्रम में कोई कमी नहीं रखूँगा, मैं बद इरादे से कोई पाप नहीं करूंगा..! भाइयों-बहनों, जब मैं कहता हूँ कि इंडिया फर्स्ट, तो उस लक्ष्य से, उस मार्ग से भारतीय जनता पार्टी कभी चलित नहीं हो सकती। हमारे लिए दल से बड़ा देश है। हम देश के लिए जीने-मरने वाले लोग हैं। गली-मौहल्ले में भी काम करेंगे लेकिन भारत माता के लिए करेंगे। हम गुजरात की सेवा करते हैं लेकिन हमारा तो मंत्र है, ‘भारत के विकास के लिए गुजरात का विकास’..! हम सबको इस माँ भारती के कल्याण के लिए, निराशा की गर्त में डूबे हुए सामाज में एक नया विश्वास पैदा करने के लिए अपने इस कार्य को हमें करते रहना है।

भाइयो-बहनों, भारतीय जनता पार्टी आज पूरे देश में एक आशा की किरण बनी हुई है। और ये बात पॉलिटिकल पंडित हैं वो जानें। पॉलिटिकल पार्टीयों का जन्म होने के बाद अस्सी-अस्सी साल तक उन्हें सत्ता स्थान पर पहुंचने का मौका नहीं मिला हो, ऐसे दुनिया में कई उदाहरण हैं। ये भारतीय जनता पार्टी है। इतना बड़ा देश, इतना बड़ा लोकतंत्र, लेकिन जन्म से जवानी की यात्रा पूरी होने से पहले तक पहुंचते-पहुंचते, इस देश की जनता ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हमें सेवा करने का मौका दिया था। इंग्लैंड की लेबर पार्टी को अस्सी साल तक मौका नहीं मिला था। भारतीय जनता पार्टी को जन्म से जवानी की यात्रा पूरी होने से पहले देश की जनता ने उस पर अमी वर्षा कर दी थी। आप कल्पना कर सकते हो कि लोग कांग्रेस से कितने तंग आ गए हैं, लोग देश की तबाही से कितने तंग आ चुके हैं..! और तब जा करके भाइयो-बहनों, भारत माँ का भाग्य बदलना ये भारतीय जनता पार्टी के हर कार्यकर्ता का दायित्व है। स्वामी विवेकानंद जी की स्मृती में हम ये 150 वां वर्ष मना रहे हैं। विवेकानंद जी का सपना पूरा करने के लिए देशवासियों को बाहर से नई प्रेरणा की जरूरत नहीं है। विवेकानंद जी के शब्द काफी है, विवेकानंद जी का संदेश काफी है, विवेकानंद जी का जीवन काफी है..! उससे प्रेरणा लेकर के एक नए उमंग और विश्वास के साथ आगे बढ़ना है।

भाइयो-बहनों, आज भारतीय जनता पार्टी जहाँ भी पहुँची है, गुजरात में भारतीय जनता पार्टी ने जो स्थिति पैदा की है वो किसी एक व्यक्ति के कारण नहीं है। पीढ़ियाँ की पीढ़ियाँ बीत गई, परिवार के परिवार इस पार्टी के लिए खप गए हैं। एक जमाना था, अगर मंहगाई के लिए भाजपा के कार्यकर्ता जुलूस निकालते थे तो 21-21 दिन की सजा हुआ करती थी। पूरा परिवार 21-21 दिन तक गुजरात की जेलों में रहने के लिए मजबूर हुआ करता था। ऐसे अनेक कार्यकर्ताओं के परिश्रम के कारण ये पार्टी यहाँ पहुँची है। इस पार्टी को यहाँ तक पहुँचाने वाले, अपने परिवारों को खपा देने वाले, अपनी जवानी को खपा देने वाले उन लक्षावधी कार्यकर्ताओं का मैं आज पुण्य स्मरण करता हूँ, उनका अभिनंदन करता हूँ, उनको वंदन करता हूँ..!

भाइयो-बहनों, एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आज हमको करना है। हम यहाँ से संकल्प लेकर के जाने वाले हैं। हमारे पार्टी के पूर्व अध्यक्ष श्रीमान् रूपाला जी हम सबको एक संकल्प दिलाने वाले हैं। लेकिन इस संकल्प की भी एक विशेषता है। हमारे हाथ में एक मोमबत्ती दी गई है, जो जलानी है। जब मोमबत्ती जलाएंगे तो ये सारी रोशनी बंद होने वाली है। भाइयों-बहनों, ये प्रकाश की ओर जाने का संदेश है और घर-घर, गाँव-गाँव कमल खिलाने का संदेश है। और जो लोग भारतीय जनता पार्टी को दिन-रात गाली देते हैं, नई-नई डिक्शनरी के शब्द निकालते हैं वे कान खोल कर के सुन लें, आप भारतीय जनता पार्टी पर जितना ज्यादा कीचड़ उछालोगे कमल उतना ही ज्यादा खिलने वाला है। उस कमल के संदेश को ले कर के आईये भाइयो-बहनों, आज अपनी पार्टी के 33 वर्ष की यात्रा का गौरव करते हुए एक नई यात्रा का शुभ संकल्प करके चलें। मेरी आप सब से प्रार्थना है कि आप सबको जो मोमबत्ती दी गई है उसको जलाया जाए और यहाँ की व्यवस्था वालों से मेरी प्रार्थना है कि स्टेडियम में और लाइटें बंद करके इस नजारे का अनुभव किया जाए और जब तक ये विधि पूरी नहीं होती है, हम अपना स्थान छोड़ेगें नहीं, हम जाएंगे नहीं। मेरे साथ बोलिए -

भारत माता की जय..!

भारत माता की जय..!

भारत माता की जय..!

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ମୋଦୀଙ୍କ 'ମନ କି ବାତ' ପାଇଁ ଆପଣଙ୍କ ବିଚାର ଏବଂ ଅନ୍ତର୍ଦୃଷ୍ଟି ପଠାନ୍ତୁ !
Modi Govt's #7YearsOfSeva
Explore More
ଆମକୁ ‘ଚଳେଇ ନେବା’ ମାନସିକତାକୁ ଛାଡି  'ବଦଳିପାରିବ' ମାନସିକତାକୁ ଆଣିବାକୁ ପଡ଼ିବ :ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ମୋଦୀ

ଲୋକପ୍ରିୟ ଅଭିଭାଷଣ

ଆମକୁ ‘ଚଳେଇ ନେବା’ ମାନସିକତାକୁ ଛାଡି 'ବଦଳିପାରିବ' ମାନସିକତାକୁ ଆଣିବାକୁ ପଡ଼ିବ :ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ମୋଦୀ
India is capable of administering a large number of Corona doses, WHO lauds India’s vaccination drive

Media Coverage

India is capable of administering a large number of Corona doses, WHO lauds India’s vaccination drive
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
ଗୋଆରେ କୋଭିଡ ଟିକାକରଣ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମର ହିତାଧିକାରୀ ଓ ସ୍ବସ୍ଥ୍ୟସେବା କର୍ମଚାରୀଙ୍କ ସହ ମତ ବିନିମୟ ଅବସରରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଉଦବୋଧନ
September 18, 2021
ସେୟାର
 
Comments
ପ୍ରାପ୍ତ ବୟସ୍କ ଲୋକଙ୍କ ପାଇଁ ୧୦୦% ପ୍ରଥମ ଡୋଜ୍ ପ୍ରଦାନ ପୂରଣ ଲାଗି ଗୋଆକୁ ପ୍ରଶଂସା କଲେ
ଏହି ଉପଲକ୍ଷେ ଶ୍ରୀ ମନୋହର ପାରିକରଙ୍କ ସେବାଗୁଡ଼ିକୁ ସ୍ମରଣ କଲେ
‘ସବକା ସାଥ, ସବକା ବିକାଶ, ସବକା ବିଶ୍ୱାସ ଓ ସବକା ପ୍ରୟାସ’ର ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଫଳାଫଳ ପ୍ରଦର୍ଶନ କରିଛି ଗୋଆ: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ମୁଁ ଅନେକ ଜନ୍ମଦିନ ଦେଖିସାରିଲିଣି ଏବଂ ସେଗୁଡ଼ିକୁ ସର୍ବଦା ସାଧାରଣ ବିବେଚନା କରିଥାଏ କିନ୍ତୁ, ମୋର ସମସ୍ତ ବର୍ଷଗୁଡ଼ିକରେ, ଗତକାଲି ଏଭଳି ଏକ ଦିନ ଥିଲା ଯାହା ମୋତେ ଆବେଗିକ ଭାବେ ପ୍ରଭାବିତ କରିଥିଲା, କାରଣ ୨.୫ କୋଟି ଲୋକଙ୍କ ଟିକାକରଣ ହୋଇଥିଲା: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ଗତକାଲି ପ୍ରତି ଘଣ୍ଟାରେ ୧୫ ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ଟିକା ଡୋଜ ପରିଚାଳନା କରାଯାଇଥିଲା, ପ୍ରତି ମିନିଟରେ ୨୬ ହଜାରରୁ ଅଧିକ ଏବଂ ପ୍ରତି ସେକେଣ୍ଡରେ ୪୨୫ରୁ ଅଧିକ ଟିକା ଡୋଜ ଦିଆଯାଇଥିଲା: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ଗୋଆର ପ୍ରତ୍ୟେକ ଉପଲବ୍ଧି ଯାହା କି ‘ଏକ ଭାରତ- ଶ୍ରେଷ୍ଠ ଭାରତ’କୁ ପ୍ରତିପାଦିତ କରୁଛି, ମୋ ମନରେ ଅନେକ ଆନନ୍ଦ ଭରିଦେଇଛି: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ
ଗୋଆ କେବଳ ଦେଶର ଏକ ରାଜ୍ୟ ନୁହେଁ, ବରଂ ବ୍ରାଣ୍ଡ ଇଣ୍ଡିଆର ଏକ ଶକ୍ତିଶାଳୀ ଚିହ୍ନ: ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ

ଗୋଆର ଉର୍ଜାବାନ ତଥା ଲୋକପ୍ରିୟ ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀ ପ୍ରମୋଦ ସାୱନ୍ତ ମହାଶୟ, କେନ୍ଦ୍ର ମନ୍ତ୍ରିମଣ୍ଡଳରେ ମୋର ସାଥୀ, ଗୋଆର ସୁପୁତ୍ର ଶ୍ରୀପଦ ନାୟକ ମହାଶୟ, କେନ୍ଦ୍ର ସରକାରଙ୍କ ମନ୍ତ୍ରୀ ପରିଷଦରେ ମୋର ସହକର୍ମୀ ଡକ୍ଟର ଭାରତୀ ପାୱାର ମହାଶୟା, ଗୋଆର ସମସ୍ତ ମନ୍ତ୍ରୀଗଣ, ସାଂସଦ ଏବଂ ବିଧାୟକ, ଅନ୍ୟ ଜନ ପ୍ରତିନିଧି, ସମସ୍ତ କରୋନା ଯୋଦ୍ଧା, ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ !

ଗୌୟଚ୍ୟା ମ୍ହଜା ମୋଗାଲ ଭାବା ବହିଣିନୋ, ତୁମଚେ ଅଭିନନ୍ଦନ।

ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଶ୍ରୀ ଗଣେଶ ପର୍ବର ଅନେକ ଅନେକ ଶୁଭକାବନା । ଆସନ୍ତାକାଲି ଅନନ୍ତ ଚତର୍ଦ୍ଦଶୀର ପବିତ୍ର  ଅବସରରେ ଆମେ ସମସ୍ତେ ବାପ୍ପାଙ୍କୁ ବିଦାୟ ଦେବା, ଆମେ ମଧ୍ୟ ଆମ ହାତରେ ଅନନ୍ତ ସୂତ୍ର ବାନ୍ଧିବା। ଅନନ୍ତ ସୂତ୍ର ଅର୍ଥାତ ଜୀବନରେ ସୁଖ-ସମୃଦ୍ଧି, ଦୀର୍ଘ ଜୀବନର ଆଶୀର୍ବାଦ।

ମୁଁ ଖୁସି ଯେ ଏହି ପବିତ୍ର ଦିନ ପୂର୍ବରୁ ଗୋଆର ଲୋକମାନେ ନିଜ ହାତରେ, ବାହୁରେ ଜୀବନ ରକ୍ଷା ସୂତ୍ର,  ଅର୍ଥାତ୍ ଟିକା ନେବାର କାର୍ଯ୍ୟ ମଧ୍ୟ ଶେଷ କରିଛନ୍ତି । ଗୋଆର ପ୍ରତ୍ୟେକ ଯୋଗ୍ୟ ବ୍ୟକ୍ତି ପ୍ରଥମ ଡୋଜ ଟିକା ନେଇ ସାରିଛନ୍ତି । କରୋନା ବିରୋଧରେ ଲଢେଇରେ ଏହା ହେଉଛି ଏକ ବଡ କାର୍ଯ୍ୟ। ଏଥିପାଇଁ ଗୋଆର ସମସ୍ତ ଲୋକଙ୍କୁ ବହୁତ-ବହୁତ ଶୁଭେଚ୍ଛା ।

ସାଥୀଗଣ,

ଗୋଆ ମଧ୍ୟ ହେଉଛି ଏପରି ଏକ ରାଜ୍ୟ, ଯେଉଁଠାରେ ଭାରତର ବିବିଧତାର ଶକ୍ତି ଦେଖିବାକୁ ମିଳିଥାଏ। ପୂର୍ବ ଏବଂ ପଶ୍ଚିମର ସଂସ୍କୃତି, ଚାଲିଚଳନୀ, ଖାଦ୍ୟପେୟ ଏଠାରେ ଗୋଟିଏ ସ୍ଥାନରେ ଦେଖିବାକୁ ମିଳିଥାଏ । ଏଠାରେ ଗଣେଶୋତ୍ସବ ମଧ୍ୟ ପାଳନ କରାଯାଏ, ଦୀପାବଳୀ ମଧ୍ୟ ଧୂମଧାମରେ  ପାଳନ କରାଯାଏ ଏବଂ ଖ୍ରୀଷ୍ଟମାସ ସମୟରେ ଗୋଆର ସୌନ୍ଦର୍ଯ୍ୟ ଆହୁରି ବୃଦ୍ଧି ପାଇଥାଏ । ଏହାସବୁ କରିବା ମାଧ୍ୟମରେ ଗୋଆ ନିଜର ପରମ୍ପରା ନିର୍ବାହ କରିଥାଏ। ଏକ ଭାରତ-ଶ୍ରେଷ୍ଠ ଭାରତର ଭାବନାକୁ ନିରନ୍ତର ସୁଦୃଢ କରୁଥିବା ଗୋଆର ପ୍ରତ୍ୟେକ ଉପଲବ୍ଧି, କେବଳ ମୋତେ ନୁହେଁ, ବରଂ ସମଗ୍ର ଦେଶକୁ ଖୁସି ଦେଇଥାଏ ଏବଂ ଗର୍ବରେ ଭରି ଦେଇଥାଏ।

ଏହି ଗୁରୁତ୍ବପୂର୍ଣ୍ଣ ଅବସରରେ, ମୋର ବନ୍ଧୁ, ସଚ୍ଚୋଟ କର୍ମାଯାଗୀ, ସ୍ବର୍ଗତ ମନୋହର ପାରିକର ମହାଶୟ ମନେ ପଡିବା ସ୍ୱାଭାବିକ କଥା । 100 ବର୍ଷର ସବୁଠାରୁ ବଡ ସଙ୍କଟ ସହିତ ଗୋଆ ଯେଉଁଭଳି ଭାବରେ ମୁକାବିଲା କରିଛି, ପାରିକର ମହାଶୟ ଆଜି ଆମ ଗହଣରେ ଥାଆନ୍ତେ, ତେବେ ସେମ ମଧ୍ୟ ଆପଣମାନଙ୍କର ଏହି ସିଦ୍ଧି ପାଇଁ, ଆପଣମାନଙ୍କର ଏହି ଉପଲବ୍ଧି ପାଇଁ ବହୁତ ଗର୍ବି କରିଥାନ୍ତେ।

ଗୋଆ ବିଶ୍ୱର ସର୍ବବୃହତ ଏବଂ ଦ୍ରୁତ ଟିକାକରଣ ଅଭିଯାନ- ସମସ୍ତଙ୍କ ପାଇଁ ଟିକା, ମାଗଣା ଟିକାର ସଫଳତାରେ ପ୍ରମୁଖ ଭୂମିକା ଗ୍ରହଣ କରିଛି । ଗତ କିଛି ମାସ ମଧ୍ୟରେ, ଗୋଆରେ ପ୍ରବଳ ବର୍ଷା, ଘୂର୍ଣ୍ଣିଝଡ, ବନ୍ୟା ପରି ପ୍ରାକୃତିକ ବିପର୍ଯ୍ୟୟ ସହିତ ଖୁବ ସାହସର ସହିତ ଲଢେଇ କରିଛି। ଏହି ପ୍ରାକୃତିକ ଆହ୍ବାନ ମଧ୍ୟରେ ପ୍ରମୋଦ ସାୱନ୍ତ ମହାଶୟଙ୍କ ନେତୃତ୍ୱରେ ବଡ଼ ସାହସର ସହିତ ଲଢିଛନ୍ତି । ଏହି ପ୍ରାକୃତିକ ଆହ୍ବାନ ମଧ୍ୟରେ କରୋନା ଟିକାକରଣର ଗତି ବଜାୟ ରଖିଥିବାରୁ ସମସ୍ତ କରୋନା ଯୋଦ୍ଧାଙ୍କୁ, ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟସେବା କର୍ମଚାରୀଙ୍କ ଦଳ, ଗୋଆର ସମସ୍ତଙ୍କୁ ବହୁତ- ବହୁତ ଅଭିନନ୍ଦନ ଜଣାଉଛି।

ଏଠାରେ ଅନେକ ସାଥୀ ଯେଉଁମାନେ ସେମାନଙ୍କର ଅନୁଭୂତି ସଂପର୍କରେ ଆମ ସହିତ ମତ ବିନିମୟ କରିଛନ୍ତି, ତାହା ସ୍ପଷ୍ଟ ଦର୍ଶାଉଛି ଯେ ଏହି ଅଭିଯାନ କେତେ କଷ୍ଟକର ଥିଲା। ଭରା  ନଦୀ ପାର ହୋଇ, ଟିକାକୁ ସୁରକ୍ଷିତ ରଖି ଦୂର ଦୂରାନ୍ତରେ ପହଞ୍ଚିବା କର୍ତ୍ତବ୍ୟ ଭାବନା ମଧ୍ୟ ଆବଶ୍ୟକ, ସମାଜ ପ୍ରତି ଭକ୍ତି ଦରକାର ଏବଂ ଅପ୍ରତିମ ସାହସର ଆବଶ୍ୟକ ପଡିଥାଏ। ଆପଣ ସମସ୍ତେ ଅଟକି ନ ଯାଇ, ଥକି ନ ପଡି ମାନବିକତାର ସେବା କରୁଛନ୍ତି। ଆପଣମାନଙ୍କର ଏହି ସେବା ସଦା- ସର୍ବଦା ସ୍ମରଣୀୟ ହୋଇ ରହିବ।

ସାଥୀଗଣ,

ସାବକା ସାଥ, ସାବକା ବିକାଶ, ସାବକା ବିଶ୍ୱାସ ଏବଂ ସାବକା ପ୍ରୟାସ (ସମସ୍ତଙ୍କର ସହିତ, ସମସ୍ତଙ୍କର ବିକାଶ, ସମସ୍ତଙ୍କର ବିଶ୍ୱାସ ଏବଂ  ସମସ୍ତଙ୍କର ପ୍ରୟାସ)- ଏହି ସମସ୍ତ କଥା କିଭଳି ଚମତ୍କାର ଫଳାଫଳ ଆଣିଥାଏ, ଏହା ଗୋଆ, ଗୋଆର ସରକାର, ଗୋଆର ନାଗରିକ, ଗୋଆର କରୋନା ଯୋଦ୍ଧା, ଆଗଧାଡିର କର୍ମଚାରୀ କରି ଦେଖାଇଛନ୍ତି । ସାମାଜିକ ଏବଂ ଭୌଗୋଳିକ ଆହ୍ବାନର ମୁକାବିଲା ପାଇଁ ଗୋଆ ଯେଉଁ ପ୍ରକାରର ସମନ୍ୱୟ ଦେଖାଇଛି, ତାହା ବାସ୍ତବରେ ପ୍ରଶଂସନୀୟ । ପ୍ରମୋଦ ମହାଶୟ ଆପଣଙ୍କୁ ଏବଂ ଆପଣଙ୍କ ଟିମକୁ ବହୁତ- ବହୁତ ଶୁଭେଚ୍ଛା । ରାଜ୍ୟର ଦୂର- ଦୂରାନ୍ତରେ ବସବାସ କରୁଥିବା, କୋଣ ଅନୁକୋଣରେ ସମସ୍ତ ସବ୍-ଡିଭିଜନରେ ଅନ୍ୟ ରାଜ୍ୟ ଭଳି ଦ୍ରୁତଗତିରେ ଟିକାକରଣ କରାଯିବା ହେଉଛି ଏହାର ଏକ ବଡ଼ ପ୍ରମାଣ।

ମୁଁ ଖୁସି ଯେ, ଗୋଆ ଏହାର ଗତିକୁ ହ୍ରାସ କରିବାକୁ ଦେଇ ନାହିଁ । ଏହି ସମୟରେ ଏପରିକି ଯେତେବେଳେ ଆମେ ଆଲୋଚନା କରୁଛୁ, ସେତେବେଳେ ରାଜ୍ୟରେ ଦ୍ୱିତୀୟ ଡୋଜ ପାଇଁ ଟିକା ଉତ୍ସବ ଚାଲିଛି। ଏହିଭଳି ଆନ୍ତରିକ, ଏକନିଷ୍ଠ ଉଦ୍ୟମ ସହିତ ଗୋଆ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଟିକାକରଣ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଦେଶର ଏକ ଅଗ୍ରଣୀ ରାଜ୍ୟ ହେବା ପାଇଁ ଅଗ୍ରସର ହେଉଛି। ଆଉ ଏହା ମଧ୍ୟ ଏକ ଉତ୍ତମ କଥା ଯେ ଗୋଆ ନା କେବଳ ଏହାର ଜନସଂଖ୍ୟା ନୁହେଁ ଏଠାକୁ ଆସୁଥିବା ପର୍ଯ୍ୟଟକ, ବାହାରୁ ଆସୁଥିବା ଶ୍ରମିକମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ଟିକାଦାନ କରୁଛି ।

ସାଥୀଗଣ,

ଆଜିର ଏହି ଅବସରରେ ମୁଁ ଦେଶର ସମସ୍ତ ଡାକ୍ତର, ସ୍ବାସ୍ଥ୍ୟସେବା କର୍ମଚାରୀ, ପ୍ରଶାସନ ସହ ଜଡିତ ଲୋକଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ପ୍ରଶଂସା କରିବାକୁ ଚାହୁଁଛି । ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କ ପ୍ରୟାସ ଯୋଗୁଁ ଗତକାଲି ଭାରତ ଗୋଟିଏ ଦିନରେ ଅଢେଇ କୋଟିରୁ ଅଧିକ ଲୋକଙ୍କୁ ଟିକା ଦେବାର ରେକର୍ଡ କରିଛି। ବିଶ୍ବର ବଡ଼ ବଡ଼ ସମୃଦ୍ଧ ଏବଂ ସାମର୍ଥ୍ୟ ଥିବା ଦେଶ ମଧ୍ୟ ଏହା କରିପାରି ନାହାଁନ୍ତି । ଗତକାଲି ଆମେ ଦେଖୁଥିଲୁ କିଭଳି ଦେଶ ଆଲାରାମ ଲଗାଇ କୋୱିନ ଡ୍ୟାସବୋର୍ଡକୁ ଦେଖୁଥିଲା। ବୃଦ୍ଧି ପାଉଥିବା ସଂଖ୍ୟାକୁ କେଇ ଉତ୍ସାହିତ ହୋଇ ପଡୁଥିଲେ।

ଗତକାଲି ପ୍ରତି ଘଣ୍ଟାରେ 15 ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ଟିକାକରଣ କରାଯାଇଥିଲା, ପ୍ରତି ମିନିଟରେ 26 ହଜାରରୁ ଅଧିକ ଟୀକାକରଣ କରାଯାଇଥିଲା, ପ୍ରତି ସେକେଣ୍ଡରେ ଚାରି ଶହ ପଚିଶରୁ ଅଧିକ ଲୋକ ଏହି ଟିକା ନେଇଥିଲେ। ଦେଶର ପ୍ରତ୍ୟେକ କୋଣ ଅନୁକୋଣରେ ପ୍ରତିଷ୍ଠା କରାଯାଇଥିବା ଏକ ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ଟିକାକରଣ କେନ୍ଦ୍ରରେ ଲୋକଙ୍କୁ ଟିକା ଦିଆଯାଇଛି । ଭାରତର ନିଜସ୍ୱ ଟିକା, ଟିକାକରଣ ପାଇଁ ଏତେ ବଡ଼ ନେଟୱାର୍କ, କୁଶଳୀ ମାନବ ସମ୍ବଳ, ଏହା ଭାରତର ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ ଦର୍ଶାଉଛି।

ସାଥୀଗଣ,

ଗତକାଲି ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଯେଉଁ ଉପଲବ୍ଧି ମିଳିଛି ନା, ତାହା କେବଳ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱରେ ଟୀକାକରଣର ପରିସଂଖ୍ୟାନ ଆଧାରରେ ନୁହେଁ, ଭାରତ ପାଖରେ କେତେ ସାମର୍ଥ୍ୟ ଅଛି ତାହାର ପରିଚୟ ବିଶ୍ବକୁ ମିଳିବାକୁ ଯାଉଛି। ଆଉ ସେଥିପାଇଁ ଏହାର ଗୌରବଗାନ କରିବା ହେଉଛି ପ୍ରତ୍ୟେକ ଭାରତୀୟଙ୍କର କର୍ତ୍ତବ୍ୟ ମଧ୍ୟ ଏବଂ ଏହା ମଧ୍ୟ ସ୍ବଭାବ ହେବା ଉଚିତ୍।

ସାଥୀଗଣ,

ମୁଁ ଆଜି ମୋର ମନର କଥା ମଧ୍ୟ କହିବାକୁ ଚାହୁଁଛି । ବହୁତ ଜନ୍ମଦିନ ତ ଆସିଛି ଆଉ ଯାଇଛି କିନ୍ତୁ ମୁଁ ମନର ସହିତ ସବୁବେଳେ ଏହି ସବୁ ଜିନିଷଗୁଡ଼ିକ ଠାରୁ ଅଲିପ୍ତ ହୋଇ ରହିଛି, ଏହି ସବୁ ଜିନିଷଗୁଡ଼ିକ ଠାରୁ ମୁଁ ଦୂରେଇ ରହିଛି । କିନ୍ତୁ ମୋର ଏତିକି ଆୟୂଷରେ କାଲିର ଦିନ ମୋ ପାଇଁ ମୋତେ ବହୁତ ଭାବୁକ କରିବା ଭଳି ଥିଲା। ଜନ୍ମଦିନ ପାଳନ କରିବାର ବହୁତ ଗୁଡ଼ିଏ ଉପାୟ ରହିଛି। ଲୋକମାନେ ଭିନ୍ନ- ଭିନ୍ନ ଉପାୟରେ ମଧ୍ୟ ପାଳନ କରିଥାଆନ୍ତି। ଆଉ ଯଦି ପାଳନ କରନ୍ତି ତେବେ କିଛି ଯେ ଭୁଲ କରନ୍ତି ଏଭଳି ଭାବୁଥିବା ଲୋକମାନଙ୍କ ଭିତରେ ମୁଁ ନୁହେଁ। କିନ୍ତୁ ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କ ପ୍ରୟାସ କାରଣରୁ, କାଲିକାର ଦିନ ମୋ ପାଇଁ ବହୁତ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ହୋଇ ଯାଇଥିଲା।

ମେଡିକାଲ କ୍ଷେତ୍ରର ଲୋକମାନେ, ଯେଉଁ ଲୋକମାନେ ବିଗତ ଦେଢ଼- ଦୁଇ ବର୍ଷ ଧରି ଦିନ-ରାତି ଲାଗି ପଡ଼ିଛନ୍ତି, ନିଜ ଜୀବନର ଚିନ୍ତା ନ କରି କରୋନା ସହିତ ଲଢ଼ିବାରେ ଦେଶବାସୀମାନଙ୍କୁ ସାହାଯ୍ୟ କରୁଛନ୍ତି, ସେମାନେ କାଲି ଟିକାକରଣର ଯେଉଁ ରେକର୍ଡ କରି ଦେଖାଇଛନ୍ତି, ତାହା ହେଉଛି ବହୁତ ବଡ଼ କଥା। ସମସ୍ତେ ଏଥିରେ ବହୁତ ସହଯୋଗ କରିଛନ୍ତି। ଲୋକମାନେ ଏହାକୁ ସେବା ସହିତ ଯୋଡ଼ିଲେ। ଏହା ହେଉଛି ତାଙ୍କର କରୁଣା ଭାବ, କର୍ତବ୍ୟ ଭାବ, ଯେଉଁଥିପାଇଁ ଅଢ଼େଇ କୋଟି ଟିକାର ଡୋଜ ଦିଆ ଯାଇ ପାରିଲା । ଆଉ ମୁଁ ମାନୁଛି ଯେ, ଟିକାର ପ୍ରତ୍ୟେକଟି ଡୋଜ, ଗୋଟିଏ ଜୀବନକୁ ବଂଚାଇବାରେ ସାହାଯ୍ୟ କରିଥାଏ। ଅଢ଼େଇ କୋଟିରୁ ଅଧିକ ଲୋକମାନଙ୍କୁ ଏତେ କମ୍ ସମୟ ମଧ୍ୟରେ, ଏତେ ବଡ଼ ସୁରକ୍ଷା କବଚ ମିଳିବା, ବହୁତ ସନ୍ତୋଷ ପ୍ରଦାନ କରିଥାଏ। ଜନ୍ମଦିନମାନ ଆସିବ, ଯିବ, କିନ୍ତୁ କାଲିର ଏହି ଦିନ ମୋ ମନକୁ ଛୁଇଁ ଯାଇଛି, ଅବିସ୍ମରଣୀୟ ହୋଇ ଯାଇଛି। ମୁଁ ଯେତିକି ଧନ୍ୟବାଦ ଦେବି ତାହା କମ୍ ହେବ। ମୁଁ ହୃଦୟର ସହିତ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି, ସମସ୍ତଙ୍କୁ କୃତଜ୍ଞତା ଜ୍ଞାପନ କରୁଛି।

ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ,

ଭାରତର ଟିକାକରଣ ଅଭିଯାନ, କେବଳ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟର ସୁରକ୍ଷା କବଚ ହିଁ ନୁହେଁ, ବରଂ ଗୋଟିଏ ପ୍ରକାରରେ ଅଜୀବିକାରର ମଧ୍ୟ ହେଉଛି ସୁରକ୍ଷା କବଚ। ଏବେ ଆମେ ଦେଖିବା ତ ହିମାଚଳ, ପ୍ରଥମ ଡୋଜ ମାମଲାରେ 100ପ୍ରତିଶତ ହୋଇ ଯାଇଛି, ଗୋଆ 100 ପ୍ରତିଶତ ହୋଇ ଯାଇଛି, ଚଣ୍ଡିଗଡ଼ ଏବଂ ଲାକ୍ଷାଦ୍ୱୀପରେ ମଧ୍ୟ ସମସ୍ତ ପ୍ରାପ୍ତ ବୟସ୍କ ବ୍ୟକ୍ତିଙ୍କୁ ପ୍ରଥମ ଡୋଜ ଦିଆଯାଇ ସାରିଛି। ସିକ୍କିମ ମଧ୍ୟ ବହୁତ ଶୀଘ୍ର 100 ପ୍ରତିଶତ ହେବାକୁ ଯାଉଛି । ଆଣ୍ଡାମାନ ନିକୋବାର, କେରଳ, ଲଦ୍ଦାଖ, ଉତରାଖଣ୍ଡ, ଦାଦରା ଏବଂ ନଗର ହାବେଳୀ ମଧ୍ୟ ବହୁତ ଦୂରରେ ନାହିଁ।

ସାଥୀଗଣ,

ଏହା ବହୁତ ଚର୍ଚ୍ଚାକୁ ଆସିନାହିଁ, କିନ୍ତୁ ଭାରତ ନିଜର ଟିକାକରଣ ଅଭିଯାନରେ ପର୍ଯ୍ୟଟନ କ୍ଷେତ୍ର ସହିତ ଜଡ଼ିତ ରାଜ୍ୟଗୁଡ଼ିକୁ ବହୁତ ପ୍ରାଥମିକତା ଦେଇଛି। ପ୍ରାରମ୍ଭରେ ଆମେ କହିଲୁ ନାହିଁ କାରଣ ଏହା ଉପରେ ମଧ୍ୟ ରାଜନୀତି ହେବାକୁ ଆରମ୍ଭ ହୋଇ ଯାଇଥାଏ। କିନ୍ତୁ ଏହା ବହୁତ ଜରୁରୀ ଥିଲା ଯେ ଆମର ପର୍ଯ୍ୟଟନସ୍ଥଳ ଶୀଘ୍ରରୁ ଅତି ଶୀଘ୍ର ଖୋଲୁ । ଏବେ ଉତରାଖଣ୍ଡରେ ମଧ୍ୟ ଚାର-ଧାମ ଯାତ୍ରା ସମ୍ଭବ ହୋଇ ପାରିବ। ଆଉ ଏହି ସବୁ ପ୍ରୟାସ ଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରେ, ଗୋଆର 100 ପ୍ରତିଶତ ହେବା, ବହୁତ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ହୋଇ ଯାଇଥାଏ।

ପର୍ଯ୍ୟଟନ କ୍ଷେତ୍ରର ପୁନଃରୁଦ୍ଧାର କରିବାରେ ଗାଁର ଭୂମିକା ହେଉଛି ବହୁତ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ । ଆପଣ ଚିନ୍ତା କରନ୍ତୁ, ହୋଟେଲ ଶିଳ୍ପର ଲୋକ ହୁଅନ୍ତୁ, ଟ୍ୟାକ୍ସି ଡ୍ରାଇଭର ହୁଅନ୍ତୁ, ଫେରିବାଲା ହୁଅନ୍ତୁ, ଦୋକାନୀ ହୁଅନ୍ତୁ, ଯେତେବେଳେ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଟିକା ଦିଆ ଯାଇଥିବ ତେବେ ପର୍ଯ୍ୟଟକମାନେ ମଧ୍ୟ ସୁରକ୍ଷାର ଏକ ଭାବନା ନେଇ ଏଠାକୁ ଆସିବେ। ଏବେ ଗୋଆ ଦୁନିଆର ସେହି ହାତଗଣତି ଅନ୍ତର୍ଜାତୀୟ ପର୍ଯ୍ୟଟନ ସ୍ଥଳୀରେ ସାମିଲ ହୋଇ ଚାଲିଛି, ଯେଉଁଠାରେ ଲୋକମାନଙ୍କୁ ଟିକାର ସୁରକ୍ଷା କବଚ ମିଳି ସାରିଛି।

ସାଥୀଗଣ,

ଆଗାମୀ ପର୍ଯ୍ୟଟନ ଋତୁରେ ଏଠାରେ ପୂର୍ବଭଳି ହିଁ ପର୍ଯ୍ୟଟନ କାର୍ଯ୍ୟକଳାପ ହେଉ, ଦେଶ –ବିଦେଶର ପର୍ଯ୍ୟଟକ ଏଠାରେ ଆନନ୍ଦ ନେଇ ପାରିବେ, ଏହା ହେଉଛି ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କର କାମନା । ଏହା ସେତେବେଳେ ସମ୍ଭବ ହୋଇ ପାରିବ ଯେତେବେଳେ ଆମେ କରୋନା ସହିତ ଜଡ଼ିତ ସାବଧାନତା ଗୁଡ଼ିକ ଉପରେ ମଧ୍ୟ ସେତିକି ଧ୍ୟାନ ଦେବା, ଯେତିକି ଟିକାକରଣ ଉପରେ ଦେଉଛେ । ସଂକ୍ରମଣ କମ୍ ହୋଇଛି କିନ୍ତୁ ଏବେ ମଧ୍ୟ ଏହି ଭୂତାଣୁକୁ ଆମକୁ ହାଲୁକା ଭାବେ ଗ୍ରହଣ କରିବା ନାହିଁ। ସୁରକ୍ଷା ଏବଂ ସ୍ୱଚ୍ଛତା ଉପରେ ଯେତିକି ଗୁରୁତ୍ୱ ରହିବ, ପର୍ଯ୍ୟଟକ ସେତେ ଅଧିକ ସଂଖ୍ୟାରେ ଏଠାକୁ ଆସିବେ।

ସାଥୀଗଣ,

କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର ମଧ୍ୟ ଏବେ ନିକଟରେ ବିଦେଶୀ ପର୍ଯ୍ୟଟକମାନଙ୍କୁ ପ୍ରୋତ୍ସାହିତ କରିବା ପାଇଁ ଅନେକ ପଦକ୍ଷେପ ଗ୍ରହଣ କରିଛନ୍ତି। ଭାରତ ଆସିବାକୁ 5 ଲକ୍ଷ ପର୍ଯ୍ୟଟକଙ୍କୁ ମାଗଣାରେ ଭିସା ପ୍ରଦାନ କରିବାକୁ ନିଷ୍ପତି ନିଆଯାଇଛି। ଯାତ୍ରାଏବଂ ପର୍ଯ୍ୟଟନ ସହିତ ଜଡ଼ିତ ହିତଧାରକ ମାନଙ୍କୁ 10 ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଋଣ ଶତ- ପ୍ରତିଶତ ସରକାରୀ ଗ୍ୟାରେଂଟି ସହିତ ଦିଆ ଯାଉଛି। ପଞ୍ଜୀକୃତ ପର୍ଯ୍ୟଟକ ଗାଇଡ଼୍ ମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ 1 ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଋଣ ବ୍ୟବସ୍ଥା କରାଯାଇଛି। କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର ଆଗକୁ ମଧ୍ୟ ପ୍ରତ୍ୟେକ ସେହି ପଦକ୍ଷେପ ଉଠାଇବା ପାଇଁ ପ୍ରତିବଦ୍ଧ, ଯାହା ଦେଶର ପର୍ଯ୍ୟଟନ କ୍ଷେତ୍ରକୁ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ାଇବାରେ ସହାୟକ ହେବ।

ସାଥୀଗଣ,

ଗୋଆର ପର୍ଯ୍ୟଟନ କ୍ଷେତ୍ରକୁ ଆକର୍ଷକ କରିବା ପାଇଁ, ସେଠାକାର କୃଷକ, ମତ୍ସ୍ୟଜୀବୀ ଏବଂ ଅନ୍ୟାନ୍ୟ ଲୋକମାନଙ୍କର ସୁବିଧା ପାଇଁ, ଭିତିଭୂମିକୁ ଡବଲ ଇଂଜିନ ସରକାରଙ୍କର ଦୁଇଗୁଣ ଶକ୍ତି ମିଳୁଛି। ବିଶେଷ କରି ଯୋଗାଯୋଗ ସହିତ ଜଡ଼ିତ ଭିତିଭୂମି ଉପରେ ଗୋଆରେ ଅଦ୍ଭୂତପୂର୍ବ କାର୍ଯ୍ୟ ହେଉଛି। ‘ମୋପା’ରେ ନିର୍ମାଣ କରାଯାଉଥିବା ଗ୍ରୀନଫିଲ୍ଡ ଏୟାରପୋର୍ଟ ଆଗାମୀ କିଛି ମାସ ମଧ୍ୟରେ ନିର୍ମାଣ ହୋଇ ପ୍ରସ୍ତୁତ ହେବାକୁ ଯାଉଛି। ଏହି ବିମାନବନ୍ଦରକୁ ଜାତୀୟ ରାଜପଥ ସହ ଯୋଡ଼ିବା ପାଇଁ ପ୍ରାୟ 12 ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କା ବ୍ୟୟରେ 6 ଲେନର ଆଧୁନିକ ସଂଯୋଗକାରୀ ରାଜପଥ ନିର୍ମାଣ କରାଯାଉଛି। କେବଳ ଜାତୀୟ ରାଜପଥ ନିର୍ମାଣରେ ହିଁ ବିଗତ ବର୍ଷମାନଙ୍କରେ ହଜାର ହଜାର କୋଟି କୋଟି ଟଙ୍କାର ନିବେଶ ମଧ୍ୟ ଗାଁ ମାନଙ୍କରେ ହୋଇଛି।

ଏହା ମଧ୍ୟ ହେଉଛି ବହୁତ ଖୁସିର କଥା ଯେ ଉତରର ଗାଁ ଗୁଡ଼ିକୁ ଦକ୍ଷିଣର ଗାଁ ଗୁଡ଼ିକ ସହିତ ଯୋଡ଼ିବା ପାଇଁ ‘ଝୁରୀ ବ୍ରିଜ’ର ଲୋକାର୍ପଣ ମଧ୍ୟ ଆଗାମୀ କିଛି ମାସ ମଧ୍ୟରେ ହେବାକୁ ଯାଉଛି। ଯେମିତିକି ଆପଣମାନେ ମଧ୍ୟ ଜାଣନ୍ତି, ଏହି ବ୍ରିଜ ପଣଜୀକୁ ‘ମାର୍ଗୋ’ ସହିତ ଯୋଡ଼ୁଛି। ମୋତେ ଅବଗତ କରାଯାଇଛି ଯେ ଗୋଆ ମୁକ୍ତି ସଂଗ୍ରାମର ଅନନ୍ୟ ସଂଗ୍ରାମର ସାକ୍ଷୀ ‘ଅଗୌଡ଼ା’ ଦୁର୍ଗ ମଧ୍ୟ ଖୁବ ଶୀଘ୍ର ଲୋକମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଖୋଲି ଦିଆଯିବ।

ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ,

ଗୋଆର ବିକାଶର ଯେଉଁ ପରମ୍ପରା ମନୋହର ପାରିକର ମହାଶୟ ଛାଡ଼ିଥିଲେ, ତାହାକୁ ମୋର ମିତ୍ର ଡ. ପ୍ରମୋଦ ଜୀ ଆଉ ତାଙ୍କର ଟିମ୍ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ମନୋନିବେଶର ସହିତ ଆଗକୁ ବଢାଉଛନ୍ତି। ସ୍ୱାଧୀନତାର ଅମୃତକାଳରେ ଯେତେବେଳେ ଦେଶ ଆତ୍ମନିର୍ଭରତାର ନୂତନ ସଂକଳ୍ପ ସହିତ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଛି ତେବେ ଗୋଆ ମଧ୍ୟ ସ୍ୱୟଂପୂର୍ଣ୍ଣା ଗୋଆର ସଂକଳ୍ପ ନେଇଛି। ମୋତେ ଅବଗତ କରାଯାଇଛି ଯେ ଆତ୍ମନିର୍ଭର ଭାରତ, ସ୍ୱୟଂପୂର୍ଣ୍ଣା ଗୋଆର ଏହି ସଂକଳ୍ପ ମାଧ୍ୟମରେ ଗୋଆରେ 50 ରୁ ଅଧିକ ଏହିଭଳି ଉପାଦାନ ନିର୍ମାଣ ଉପରେ କାର୍ଯ୍ୟ ଆରମ୍ଭ ହୋଇ ସାରିଛି। ଏହା ଦର୍ଶାଉଛି ଯେ ଗୋଆ ରାଷ୍ଟ୍ରୀୟ ଲକ୍ଷ୍ୟ ପ୍ରାପ୍ତି ପାଇଁ, ଯୁବକମାନଙ୍କ ପାଇଁ ରୋଜଗାରର ନୂତନ ଅବସର ସୃଷ୍ଟି କରିବା ପାଇଁ କେତେ ଗମ୍ଭୀରତାର ସହିତ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛି।

ସାଥୀଗଣ,

ଆଜି ଗୋଆ କେବଳ କୋଭିଡ଼ ଟିକାକରଣରେ ଅଗ୍ରଣୀ ନୁହେଁ, ବରଂ ବିକାଶର ଅନେକ ସ୍ତରରେ ଦେଶର ଅଗ୍ରଣୀ ରାଜ୍ୟମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ ହେଉଛି ଗୋଟିଏ। ଗୋଆର ଯେଉଁ ଗ୍ରାମୀଣ ଏବଂ ସହରୀ କ୍ଷେତ୍ର ରହିଛି, ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଭାବେ ଖୋଲା ମଳମୁକ୍ତ ହେବାରେ ଲାଗିଛି। ବିଜୁଳି ଏବଂ ପାଣି ଭଳି ମୌଳିକ ସୁବିଧାଗୁଡ଼ିକୁ ନେଇ ମଧ୍ୟ ଗୋଆରେ ଭଲ କାର୍ଯ୍ୟ ହେଉଛି। ଗୋଆ ହେଉଛି ଦେଶର ଏଭଳି ରାଜ୍ୟ ଯେଉଁଠାରେ ଶତ ପ୍ରତିଶତ ବିଜୁଳିକରଣ ହୋଇ ସାରିଛି। ପ୍ରତି ଘରକୁ ପାଇପ ମାଧ୍ୟମରେ ଜଳ ମାମଲାରେ ତ ଗୋଆ ଚମତ୍କାର କରି ଦେଖାଇଛି। ଗୋଆର ଗ୍ରାମୀଣ କ୍ଷେତ୍ରରେ ପ୍ରତି ଘରକୁ ପାଇପ ମାଧ୍ୟମରେ ଜଳ ପହଂଚାଇବାର ପ୍ରୟାସ ହେଉଛି ପ୍ରଶଂସନୀୟ। ଜଳ ଜୀବନ ମିଶନ ମାଧ୍ୟମରେ ବିଗତ 2 ବର୍ଷରେ ଦେଶରେ ଏ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପ୍ରାୟ 5 କୋଟି ପରିବାରଙ୍କୁ ପାଇପ୍ ମାଧ୍ୟମରେ ଜଳ ସୁବିଧା ସହିତ ଯୋଡ଼ିଛନ୍ତି। ଯେଉଁଭଳି ଭାବେ ଗୋଆ ଏହି ଅଭିଯାନକୁ ଆଗକୁ ବଢ଼ାଇଛି ତାହା ‘ଗୁଡ଼୍ ଗଭର୍ଣ୍ଣାନ୍ସ’(ସୁ-ଶାସନ) ଏବଂ ‘ଇଜ୍ ଅଫ୍ ଲିଭିଂ’କୁ ନେଇ ଗୋଆ ସରକାରଙ୍କର ପ୍ରାଥମିକତାକୁ ମଧ୍ୟ ସ୍ପଷ୍ଟ କରୁଛି।

ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ,

ସୁଶାସନକୁ ନେଇ ଏହି ପ୍ରତିବଦ୍ଧତା କରୋନା କାଳରେ ଗୋଆ ସରକାର ଦେଖାଇଛନ୍ତି। ପ୍ରତ୍ୟେକ ପ୍ରକାରର ଆହ୍ୱାନ ଗୁଡ଼ିକ ସତ୍ୱେ, କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର ଯେଉଁ ସାହାଯ୍ୟ ମଧ୍ୟ ଗୋଆ ପାଇଁ ପଠାଇଲେ, ତାହାକୁ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ, ବିନା କୌଣସି ଭେଦଭାବରେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ହିତାଧିକାରୀଙ୍କ ପାଖରେ ପହଂଚାଇବାର କାର୍ଯ୍ୟ ଗୋଆର ଟିମ୍ କରିଛନ୍ତି। ପ୍ରତ୍ୟେକ ଗରିବ, ପ୍ରତ୍ୟେକ କୃଷକ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ମତ୍ସ୍ୟଜୀବୀ ସାଥୀଙ୍କ ପାଖରେ ସାହାଯ୍ୟ ପହଂଚାଇବାରେ କୌଣସି ଅଭାବ ରଖା ଯାଇ ନାହିଁ । ମାସ- ମାସ ଧରି ଗୋଆର ଗରିବ ପରିବାରଙ୍କୁ ମାଗଣାରେ ରାସନ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ସଚ୍ଚୋଟତାର ସହିତ ପହଂଚାଯାଉଛି। ମାଗଣ ଗ୍ୟାସ ସିଲିଣ୍ଡର ମିଳିବା ଦ୍ୱାରା ଗୋଆର ଅନେକ ଭଉଣୀମାନଙ୍କୁ ଅସୁବିଧା ସମୟରେ ସାହାରା ମିଳିଛି।

ଗୋଆର କୃଷକ ପରିବାରକୁ ପିଏମ କିଷାନ ସମ୍ମାନ ନିଧି ଦ୍ୱାରା କୋଟି- କୋଟି ଟଙ୍କା ସିଧାସଳଖ ସେମାନଙ୍କର ବ୍ୟାଙ୍କ ଖାତାରେ ମିଳିଛି। କରୋନା କାଳରେ ହିଁ ଏଠାକାର ଛୋଟ- ଛୋଟ କୃଷକମାନଙ୍କୁ ମିଶନ ମୋଡରେ କିଷାନ କ୍ରେଡିଟ କାର୍ଡ ମିଳିଛି। କେବଳ ଏତିକି ନୁହେଁ, ଗୋଆର ପଶୁପାଳକଙ୍କୁ ଏବଂ ମତ୍ସ୍ୟଜୀବୀମାନଙ୍କୁ ପ୍ରଥମ ଥର ବଡ଼ ସଂଖ୍ୟାରେ କିଷାନ କ୍ରେଡିଟ କାର୍ଡର ସୁବିଧା ମିଳିଛି । ପିଏମ ସ୍ୱନିଧି ଯୋଜନା ମାଧ୍ୟମରେ ମଧ୍ୟ ଗାଁରେ ବୁଲାବିକାଳୀ ଏବଂ ଠେଲାଗାଡ଼ି ମାଧ୍ୟମରେ ବ୍ୟବସାୟ କରୁଥିବା ସାଥୀଙ୍କୁ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ଋଣ ଦେବାର କାର୍ଯ୍ୟ ଚାଲୁ ରହିଛି। ଏହି ସମସ୍ତ ପ୍ରୟାସଗୁଡ଼ିକ ଦ୍ୱାରା ଗୋଆର ଲୋକମାନଙ୍କୁ, ବନ୍ୟା ସମୟରେ ମଧ୍ୟ ବହୁତ କିଛି ସାହାଯ୍ୟ ମିଳିପାରିଛି।

ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ,

ଗୋଆ ହେଉଛି ଅସୀମ ସମ୍ଭାବନାଗୁଡ଼ିକର ପ୍ରଦେଶ। ଗୋଆ ଦେଶର କେବଳ ମାତ୍ର ଗୋଟିଏ ଦେଶ ନୁହେଁ, ବରଂ ହେଉଛି ବ୍ରାଣ୍ଡ ଇଣ୍ଡିଆର ମଧ୍ୟ ଏକ ସଶକ୍ତ ପରିଚୟ। ଏହା ହେଉଛି ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କର ଦାୟିତ୍ୱ ଯେ ଗୋଆର ଏହି ଭୂମିକାକୁ ଆମେ ସଂପ୍ରସାରଣ କରିବା। ଗୋଆରେ ଆଜି ଯେଉଁ ଭଲ କାର୍ଯ୍ୟମାନ ହେଉଛି, ସେଥିରେ ନିରନ୍ତରତା ହେଉଛି ବହୁତ ଆବଶ୍ୟକ। ଦୀର୍ଘ ସମୟ ପରେ ଗୋଆକୁ ରାଜନୈତିକ ସ୍ଥିରତାର, ସୁଶାସନର ଲାଭ ମିଳୁଛି।

ଏହି ନିରନ୍ତରତାକୁ ଗୋଆର ଲୋକମାନେ ଏହିଭଳି ଭାବେ ବଜାୟ ରଖିବେ, ଏହି କାମନାର ସହିତ ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ପୁଣିଥରେ ବହୁତ-ବହୁତ ଶୁଭେଚ୍ଛା। ପ୍ରମୋଦ ଜୀ ଆଉ ତାଙ୍କର ସମଗ୍ର ଟିମକୁ ଶୁଭେଚ୍ଛା।

ସଗଲ୍ୟାଙ୍କ ଦେୱ ବରେଁ କରୁଁ

ଧନ୍ୟବାଦ!