हाल के एक अध्ययन से पता चला है कि साल 2030 तक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था देश की कुल अर्थव्यवस्था (GDP) का लगभग पांचवां हिस्सा बन जाएगी। यह तेजी से बढ़ोतरी उन उद्योगों की वजह से होगी जो टेक्नॉलजी की मदद से काम कर रहे हैं, और इनकी सालाना विकास दर करीब 17.3% होगी। यह बात दिखाती है कि भारत में एक बड़ा बदलाव हो रहा है। सरकार और कंपनियां मिलकर टेक्नॉलजी को आम लोगों तक पहुंचाने और नए-नए आइडिया (नवाचार) को बढ़ावा देने में लगातार मेहनत कर रही हैं।
पिछले एक दशक में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने तकनीकी विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है, जिसने इसे वैश्विक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया है।
2014 से 2025 तक, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और इंडिया AI मिशन जैसी स्ट्रैटेजिक पहलों ने देश को नवाचार, कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास के नए युग में प्रवेश कराया है।
इस दौरान भारत ने न सिर्फ अपने देश में डिजिटल सुविधाओं की कमी (डिजिटल खाई) को दूर किया है, बल्कि अब वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अंतरिक्ष की खोज और डिजिटल पेमेंट जैसे क्षेत्रों में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।
साथ ही, भारत ने नीतियों में सुधार, बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विकास और सबको साथ लेकर चलने वाले विकास (समावेशी विकास) पर एक साथ ध्यान दिया है। इससे देश की टेक्नॉलजी से जुड़ी स्थिति मजबूत हुई है और इसके फायदे भारत के लोगों के साथ-साथ पूरी दुनिया को भी मिल रहे हैं।
डिजिटल इंडिया से दूर हुई डिजिटल डिवाइड
साल 2015 में शुरू की गई डिजिटल इंडिया योजना भारत की तकनीकी तरक्की की नींव रही है। इस योजना ने इंटरनेट को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने को प्राथमिकता दी है, जिससे शहरों के साथ-साथ गांवों में भी इंटरनेट कनेक्शन बहुत तेजी से बढ़ा है।
2014 में भारत में करीब 25 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते थे। 2024 तक यह संख्या बढ़कर 97 करोड़ हो गई, यानी इसमें 300% की जबरदस्त बढ़त हुई। ब्रॉडबैंड यूज़ करने वालों की संख्या भी 6.1 करोड़ से बढ़कर 94 करोड़ हो गई। 2014 में एक व्यक्ति हर महीने औसतन 70.1 MB डेटा इस्तेमाल करता था, जो 2025 तक बढ़कर 22.8 GB हो जाएगा — यानी यह बढ़त 325 गुना है, जो अपने आप में रिकॉर्ड है।
भारतनेट परियोजना एक बड़ी और अहम पहल रही है, जिसके तहत 2.14 लाख से ज्यादा ग्राम पंचायतों को तेज़ इंटरनेट से जोड़ा गया है। इस योजना ने डिजिटल सेवाओं को गांव-गांव तक पहुँचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है।
इस लगातार बढ़ती कनेक्टिविटी का प्रभाव गहरा और व्यापक है। ग्रामीण उद्यमी और किसान अब ऑनलाइन बाजारों, सरकारी योजनाओं और शैक्षिक संसाधनों तक पहुंच रहे हैं, जिससे आर्थिक समावेशिता को बढ़ावा मिला है।
उदाहरण के तौर पर, ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) ने 600 शहरों के 7 लाख से ज़्यादा दुकानदारों और व्यापारियों को ऑनलाइन कारोबार से जोड़ा है, जिनमें 35 लाख किसान भी शामिल हैं। इस प्लेटफॉर्म ने दिसंबर 2024 तक 15.4 करोड़ ऑर्डर पूरे किए हैं।
इससे छोटे कारोबारियों को ताकत मिली है, और गांव और शहरों के बीच की दूरी को कम करने में मदद मिली है। साथ ही, इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिला है।
UPI: भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति
भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने दुनिया भर में डिजिटल पैसे के लेनदेन का तरीका ही बदल दिया है। अप्रैल 2025 में, UPI के ज़रिए 1789 करोड़ से ज़्यादा लेनदेन किए गए। यह दुनिया में होने वाले सभी रीयल-टाइम पेमेंट का करीब 49% हिस्सा है, जो बहुत बड़ी उपलब्धि है।
2016 में एक नई प्रणाली के तौर से शुरू होकर 2024 तक 668 बैंकों और 5.5 करोड़ नए व्यापारियों को सपोर्ट देने तक इस मंच की स्केलेबिलिटी उल्लेखनीय है। FY 2024–25 में 214 लाख करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन के साथ, UPI भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है।
UPI का असर सिर्फ सुविधा तक ही सीमित नहीं है। यह आसान और कम खर्च वाले लेनदेन की सुविधा देकर, देश में नकदी (कैश) पर निर्भरता को कम करने में मदद कर रहा है। इसके साथ ही, इसने अनौपचारिक (गैर-सरकारी या बिना रजिस्ट्रेशन वाले) अर्थव्यवस्था को भी नियंत्रित किया है और पैसों के लेनदेन को ज्यादा पारदर्शी (साफ-सुथरा और रिकॉर्ड में रहने वाला) बनाया गया है।
फ्रांस और सिंगापुर जैसे 7 देशों में UPI को अपनाया गया है, जो दिखाता है कि भारत का फिनटेक (वित्तीय टेक्नोलॉजी) का प्रभाव अब दुनिया भर में फैल रहा है।
सरकार ने BHIM-UPI प्रोत्साहन योजना के तहत 1,500 करोड़ रुपये दिए हैं, जिससे छोटे दुकानदारों और व्यापारियों को डिजिटल लेनदेन अपनाने के लिए बढ़ावा मिला है। इससे न सिर्फ सभी लोगों को बैंकिंग से जोड़ने (वित्तीय समावेशिता) में मदद मिली है, बल्कि छोटे उद्यमियों (micro-entrepreneurs) को भी सशक्तिकरण हुआ है।
स्टार्टअप इकोसिस्टम और इनोवेशन
स्टार्टअप इंडिया जैसे योजनाओं के तहत भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम फला-फूला है। 2014 में मुट्ठी भर स्टार्टअप्स से बढ़कर, 2024 तक देश में 150,000 से अधिक स्टार्टअप्स और 100 से अधिक यूनिकॉर्न हैं।10,000 अटल टिंकरिंग लैब्स (ATLs) के साथ एक करोड़ से अधिक स्कूली बच्चों को इनोवेशन में प्रशिक्षित करके अटल इनोवेशन मिशन (AIM) ने इस क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
2024 में शुरू किए गए डिजी-SAPNE और GENESIS जैसे कार्यक्रम टियर-II/III शहरों और पूर्वोत्तर में स्टार्टअप्स को लक्षित करते हैं, जिससे समावेशी विकास सुनिश्चित होता है।
ऐसी पहलों ने रोजगार सृजन और कौशल वृद्धि के लिए अनुकूल माहौल बनाया है। केवल इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में 12 लाख से अधिक नौकरियां सृजित हुई हैं, जबकि 59 अटल इनक्यूबेशन सेंटरों ने 2,900 स्टार्टअप्स का सहयोग किया है, जिन्होंने अपनी स्थापना के बाद से करीब 32,000 से अधिक नौकरियां उत्पन्न की हैं।
नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देकर, भारत ने 2014 के बाद से ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में 42 स्थानों की बढ़ोतरी मिली है, जिसके कारण भारत आज अत्याधुनिक अनुसंधान और विकास के केन्द्र के रूप में उभरा है।
AI और सेमिकंडक्टर्स से भविष्य की अगुआई
भारत का AI पर ध्यान इसे विश्व में अग्रणी रूप से स्थापित कर रहा है, जिसमें इंडियाAI मिशन ने AI इकोसिस्टम के निर्माण के लिए 10,300 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। 18,693 GPUs के साथ एक उच्च-स्तरीय कम्प्यूटिंग सुविधा और BharatGen और Sarvam-1 जैसी पहलों ने शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के लिए AI तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाया है। भारत का AI कौशल प्रवेश का स्कोर 2.8 पर है, जो अमेरिका और जर्मनी से आगे है, साथ ही साथ 1.7 के स्कोर के साथ भारतीय महिलाएं भी इस क्षेत्र में अग्रणी हैं।
सेमिकंडक्टर्स में, 76,000 करोड़ रुपये के सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम ने 1.52 लाख करोड़ रुपये की पांच परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिला है, और भारत की सेमिकंडक्टर मांग 2030 तक 100 अरब डॉलर तक पहुंचने के रास्ते पर है।
ये प्रगतियां आयात पर निर्भरता को कम करती हैं, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाती हैं और भारत को ग्लोबल टेक्नॉलजी के बाज़ार में एक प्रमुख इकाई के रूप में स्थापित करती हैं।
अंतरिक्ष और उसके पार
इसरो के नेतृत्व में भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर चुका है, जिसमें 2023 में चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर लैंडिंग और आदित्य-L1 सौर मिशन शामिल हैं। 2025 में SpaDeX मिशन के द्वारा भारत, अंतरिक्ष डॉकिंग में सक्षम चुनिंदा देशों की लिस्ट में भी शामिल हो चुका है। 398 विदेशी उपग्रहों को व्यावसायिक रूप से लॉन्च करके भारत ने जहाँ विदेशी मुद्राएं अर्जित की, वहीं अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के लिए 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड बनाकर स्पेस ईकानमी को बल देना का भी कार्य किया।
ये उपलब्धियां राष्ट्रीय गौरव को प्रेरित करती हैं और दूरसंचार, रिमोट सेंसिंग, कृषि, आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन जैसे सम्बन्धित क्षेत्रों में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देती हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, 2014 से 2025 तक भारत की तकनीकी यात्रा में कई रिफॉर्म हुए। डिजिटल इंडिया, UPI और इंडिया AI मिशन जैसी पहलों का लाभ उठाकर, देश ने न केवल आर्थिक और इन्फ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धियां हासिल की हैं, बल्कि समावेशी विकास के माध्यम से लाखों लोगों को सशक्त भी किया है।
ग्रामीण सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशिता, रोजगार सृजन और वैश्विक नेतृत्व जैसे बहुआयामी प्रभाव इस परिवर्तन की गहराई को दर्शाते हैं। जैसे-जैसे भारत नवाचार करता जा रहा है, उसकी तकनीकी क्षमता न केवल इसके भविष्य को आकार दे रही हैं, बल्कि वैश्विक तकनीकी परिदृश्य को भी प्रभावित कर रही हैं। स्ट्रैटेजिक विजन और समावेशी नीतियां कैसे किसी राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती हैं, आज भारत यह साबित कर रहा है।