पिछले 11 वर्षों में, नरेंद्र मोदी सरकार ने भारत के आर्थिक सुधार कार्यक्रम में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को केंद्र में रखा है। देश को एक ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के स्पष्ट संकल्प के साथ, सरकार ने निवेश आकर्षित करने, घरेलू क्षमता के निर्माण और निर्यात बढ़ाने के उद्देश्य से कई संरचनात्मक सुधार कार्यक्रम शुरू किए हैं। ऐसी ही एक पहल के अंतर्गत वर्ष 2020 में ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन के तहत प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना शुरू की गई जो सरकार के संकल्प को कार्यान्वित करती है।

पांच वर्षों में कुल 1.97 लाख करोड़ रुपये की लागत के साथ, कई PLI स्कीम देश की 21वीं सदी की औद्योगिक नीति का एक महत्वपूर्ण आधारस्तंभ बनकर उभरी हैं।

शुरूआत में तीन सेक्टर्स—मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, फार्मास्युटिकल APIs (एक्टिव फार्मास्युटिकल इन्ग्रेडिएंट्स), और चिकित्सा उपकरणों—के लिए लॉन्च की गई इस योजना की त्वरित सफलता ने इसे 14 महत्वपूर्ण सेक्टर्स में भी लागू करने का मार्ग प्रशस्त किया। इन सेक्टर्स में ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल्स से लेकर एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरी और स्पेशलिटी स्टील जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर्स शामिल हैं।

मोदी सरकार का लक्ष्य स्पष्ट था: प्रोडक्शन को प्रोत्साहन देना, न कि इनपुट्स को; बड़े स्तर पर जाने के लिए प्रेरित करना, न कि केवल सब्सिडी प्रदान करना।

इस पहल के परिणाम शुरुआत से ही कई क्षेत्रों में दिखाई दे रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में PLI ने भारत को मैन्युफैक्चरिंग में एक बड़ी सफलता दिलाई है। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग कभी लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर था, जो अब वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित हो रहा है। मोबाइल फोन उत्पादन में न केवल तेजी से वृद्धि हुई है, बल्कि निर्यात भी नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है।

इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) के अनुसार, भारत ने FY24 में 1.2 लाख करोड़ रुपये मूल्य के मोबाइल फोन निर्यात किए, जो FY14 में मात्र 1,566 करोड़ रुपये के निर्यात से काफी अधिक है। मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बढ़ते घरेलू वैल्यू-एडिशन और सपोर्टिंग कंपोनेंट इकोसिस्टम ने देश को विश्व के शीर्ष मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग देशों में स्थान दिला दिया है।

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में जबर्दस्त उछाल का यह अकेला उदाहरण नहीं है। फार्मास्युटिकल क्षेत्र में भी PLI ने देश के बल्क ड्रग्स और APIs मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को पुनर्जीवित कर दिया है। इस श्रेणी के अंतर्गत 50 से अधिक परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिससे भारत ने आयातित इंटरमीडिएट इन्ग्रेडिएंट्स पर अपनी निर्भरता को काफी हद तक कम करने में सफलता पाई है और हेल्थकेयर क्षेत्र में सप्लाई-चेन पर फिर से नियंत्रण हासिल किया है। इससे न केवल देश की प्रतिरोध-क्षमता बेहतर हुई है, बल्कि लाइफ-साइंस में भारत एक विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में भी स्थापित हुआ है।

ऑटोमोबाइल और ऑटो-कंपोनेंट सेक्टर में भी महत्वपूर्ण प्रगति देखी गई है। PLI के तहत 25,938 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ इस सेक्टर में स्वच्छ और अनवरत यातायात की दिशा में बदलाव आया है। PLI योजना के प्रोत्साहन से इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी की ओर लोगों का झुकाव बढ़ रहा है, जिससे भविष्य के लिए अनुकूल परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव तैयार करने में मदद मिली है।

प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) की नीति का एक सबसे प्रगतिशील पक्ष यह है कि भारत सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मजबूती से उभरा है। मोदी सरकार ने डिजिटल युग में इस सेक्टर के सामरिक और आर्थिक महत्व को पहचानते हुए एक घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की नींव रखी है। चिप-मैन्युफैक्चरिंग में फैब्रिकेशन, डिजाइन और पैकेजिंग के लिए विशेष इंसेंटिव स्ट्रक्चर के साथ भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू-चेन में अपनी जगह बना रहा है। यह प्रयास भविष्य की टेक्नोलॉजी और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भारत की सबसे आगे रहने की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है, जो अब केवल एक बाजार के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में एक अहम खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है।

PLI योजना ने वैश्विक स्तर पर भारत के इकॉनोमिक स्टेटस को भी मजबूत किया है। जिस स्तर पर निवेश हो रहा है और जिस गति से उत्पादन लक्ष्य हासिल किए जा रहे हैं, वह भारत के इकॉनोमिक आर्किटेक्चर में विश्व के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

विदेशी निवेशक दीर्घकालिक मैन्युफैक्चरिंग निवेश के लिए भारत को लगातार एक स्थिर और सुधारवादी मार्केट के रूप में देख रहे हैं। नीतिगत स्थिरता, परफॉरमेंस से जुड़े भुगतान, और कारोबारी सुगमता (Ease of Doing Business) संबंधित सुधारों ने भारत की मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की संभावनाओं में नए सिरे से विश्वास पैदा किया है। कई मायनों में, भारत को अब केवल एक उपभोक्ता बाजार के रूप में नहीं, बल्कि ग्लोबल सप्लाई-चेन के लिए एक भरोसेमंद आधार के रूप में देखा जा रहा है।

PLI स्कीम से जुड़े कई सेक्टर्स में निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को रेखांकित करता है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात पिछले दस वर्षों में छह गुना बढ़ा है, जो FY14 में 38,263 करोड़ रुपये से बढ़कर FY24 में 2.41 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। निर्यात में यह वृद्धि अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए देश की हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को दर्शाता है। यह प्रभावशाली वृद्धि न केवल व्यापार-घाटे को कम करने में मदद कर रही है, बल्कि भारत को एक भरोसेमंद ग्लोबल प्रोडक्शन बेस के रूप में भी स्थापित कर रही है।

इन सबके साथ ही, सौर मॉड्यूल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स जैसे महत्वपूर्ण एवं क्रिटिकल इंपोर्ट पर भी भारत की निर्भरता अब लगातार कम हो रही है। भारत का बढ़ता घरेलू उत्पादन आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के साथ ही ग्लोबल वैल्यू-चेन में देश की महत्वपूर्ण स्थिति को भी सुरक्षित कर रहा है।

PLI योजना मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ के सपने का सच्चा प्रतीक है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव को सिर्फ वादों के बजाय वास्तविक उत्पादन से जोड़कर, इस योजना ने जवाबदेही, पारदर्शिता और वास्तविक परिणाम सुनिश्चित किए हैं। पिछली सरकार के सब्सिडी मॉडल के विपरीत, PLI योजना परफॉरमेंस और वास्तविक प्रभाव को प्रोत्साहित करती है।

मूलतः, PLI स्कीम मोदी सरकार की साहसिक सोच और अनुशासित कार्यान्वयन की क्षमता को दर्शाती है। यह स्कीम वित्तीय विवेक और औद्योगिक महत्वाकांक्षा को एक साथ जोड़ती है, जिससे करदाताओं के धन का उपयोग दीर्घकालिक क्षमताओं के निर्माण में हो रहा है। इन योजनाओं का डिजाइन व्यावहारिक रहा है, जो उपलब्धि के आधार पर भुगतान, परफॉरमेंस पर नियंत्रण और सेक्टर-स्पेसिफिक सुधारों के माध्यम से परिणाम सुनिश्चित करता है।

पिछले दशक में, PLI स्कीम, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता, और आत्मनिर्भरता के सपने से लैस भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में एक महत्वपूर्ण क्रांति हुई है। आज जब हमारा देश आर्थिक विकास के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, इन नीतियों द्वारा रखी गई मजबूत नींव आने वाले कई वर्षों तक भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग मैप पर मजबूती से स्थापित करने में अपना योगदान देती रहेगी।