जब दो महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के बारे में राष्ट्र को संबोधित किया, तो यह सिर्फ़ एक मिशन अपडेट नहीं था, वह एक ऐसा पल था जिसने बदलते भारत की भावना को दर्शाया। यह क्षण पूरे देश को प्रेरणा देने वाला तथा नारी शक्ति के बढ़ते प्रभाव को स्पष्ट तरीके से प्रदर्शित करने वाला था।

वर्ष 2014 से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने बदलाव की एक मजबूत लहर देखी है, जहाँ महिलाएं हाशिये से निकलकर मुख्य धारा में आई हैं और हर क्षेत्र में नेतृत्व करती नज़र आ रही हैं। चाहे वर्दी में हों, कंपनियों के बोर्डरूम में, खेल के मैदान में या अंतरिक्ष मिशन में — महिलाएं अब दर्शक नहीं, परिवर्तन की सूत्रधार हैं जो हर क्षेत्र में सफलता की गाथाएं लिख रही हैं एवं राष्ट्र को गौरवान्वित कर रही हैं।

नारी शक्ति की यह यात्रा, जो विकसित भारत 2047 के विज़न का नेतृत्व कर रही है, सही समय पर लिए गए सही नीति निर्णयों की वजह से शुरू हुई।

जब प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से महिलाओं से जुड़ी बेहद संवेदनशील और निजी बातों जैसे शौचालय की ज़रूरत और मासिक धर्म स्वच्छता (Menstural Hygine) पर बात की, तो यह पहली बार था जब किसी प्रधानमंत्री ने ऐसे विषयों को सार्वजनिक मंच पर उठाया जिन्हें पहले वर्जित (Taboo) माना जाता था।

हालांकि, उनके मजबूत संकल्प और सरकार के अथक प्रयासों ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ऐसा माहौल तैयार किया, जहाँ जीवन के हर क्षेत्र की महिलाएं अपनी सामर्थ्य और प्रतिभा दिखाने का अवसर पा रही हैं। तभी से भारतीय महिलाएं हर मंच पर देश का नाम रोशन कर रही हैं।

जब सैनिक स्कूलों और नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA) के द्वार लड़कियों के लिए खुले, तो इससे बदलाव की एक लहर चली और कई लड़कियों को रक्षा क्षेत्र में आने का अवसर मिला। इसके परिणामस्वरूप, अब पूरे भारत में 1,500 से ज्यादा लड़कियां सैनिक स्कूलों में पढ़ रही हैं।

2022 से, जब NDA लड़कियों के लिए खुला, तब से कुल 126 महिला कैडेट इसमें शामिल हुई हैं। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के वृंदावन में पहली पूरी महिला सैनिक स्कूल भी खुली है, जो लड़कियों को शुरुआती प्रशिक्षण सुनिश्चित करती है।

सरकार ने महिलाओं की रक्षा बलों में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कई प्रावधान भी किए हैं। उदाहरण के लिए, महिलाओं को 12 विभागों और सेवाओं में स्थायी कमीशन (Permanent Commission) दिया जा रहा है।

साथ ही, नौसेना की अग्निपथ योजना में 20% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। 2023 में 1,000 से ज्यादा महिला अग्निवीरों ने नौसेना में भर्ती लिया है।

इसके अलावा, कई मौकों पर वर्दी में महिलाओं ने उदाहरण पेश करते हुए नया इतिहास रचा है। पहली बार, 75वें गणतंत्र दिवस पर तीनों सेनाओं के एक संपूर्ण महिला दल ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। इसके अलावा, भारत को गर्व है कि वह विश्व का पहला देश है जिसने पूरी महिला पुलिस यूनिट को शांति स्थापना मिशन के तहत 2007 से 2016 तक संयुक्त राष्ट्र मिशन इन लाइबेरिया (UNMIL) में तैनात किया। वर्तमान में, दुनिया भर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की दिशा में काम कर रहे छह संयुक्त राष्ट्र मिशनों में लगभग 150 भारतीय महिला शांति सैनिक तैनात हैं।

भारत की महिला एथलीट देश के खेल इतिहास में एक नया अध्याय लिख रही हैं। केवल 'खेलो इंडिया – स्पोर्ट्स फॉर विमेन' योजना के तहत ही अब तक लगभग 9.5 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, जिससे 21 खेलों में 575 प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें 60,000 से अधिक महिला एथलीटों ने फरवरी 2024 तक भाग लिया। इसमें से 8,000 से अधिक महिलाओं को सीधे लाभ मिला है, जबकि 3,375 महिला खिलाड़ी SAI (भारतीय खेल प्राधिकरण) की खेल प्रोत्साहन योजनाओं के तहत विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।

यह मजबूत जमीनी स्तर की पहल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रंग ला रही है — भारत को 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं ने कुल 61 में से 23 पदक दिलाए, 2023 एशियाई पैरा खेलों में 111 में से 40 पदक जीतकर इतिहास रचा, और पेरिस 2024 ओलंपिक व पैरालंपिक में 6 ओलंपिक पदकों में से 2 और 29 पैरालंपिक पदकों में से 11 पदक जीतकर चमक बिखेरी। गांव की पटरियों से लेकर अंतर्राष्ट्रीय पोडियम तक, भारत की बेटियां सिर्फ प्रतिस्पर्धा नहीं कर रही हैं, बल्कि वे जीत भी हासिल कर रही हैं।

भारत की महिलाएं अब अनुसंधान(शोध और नवाचार(इनोवेशन) के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। आज STEMM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, गणित और चिकित्सा) क्षेत्रों में कुल नामांकन का 43% हिस्सा महिलाएं हैं — यह बढ़ोतरी विशेष योजनाओं और सहायक नीतियों की वजह से संभव हुई है। STEM शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 10 लाख से अधिक छात्राओं को छात्रवृत्तियों का लाभ मिला है। अनुसंधान और विकास (R&D) में महिलाओं की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है — आज 25% R&D प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं।

इतना ही नहीं, WISE-KIRAN योजना के माध्यम से 2,153 महिला वैज्ञानिकों को सशक्त किया गया है, और 2014-15 से 2021-22 के बीच महिला पीएचडी नामांकन दोगुने से भी अधिक हो गए हैं। सबसे खास बात यह है कि भारत के चंद्रयान-3 मिशन में 50 से अधिक महिला वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने अहम भूमिका निभाई, जो अनुसंधान(शोध) और नवाचार(इनोवेशन) में महिलाओं की बढ़ती नेतृत्व क्षमता का प्रतीक है।

अब प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 70% ऋण महिलाओं को दिए गए हैं, जिससे उनके उद्यमशीलता के निश्चय को मजबूती मिली है। स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत भी 75% ऋण महिला उद्यमियों को मंजूर किए गए हैं।

जनवरी 2025 तक, लगभग 10.05 करोड़ महिलाओं के परिवार को 90.90 लाख स्वयं सहायता समूहों (SHGs) में संगठित किया जा चुका है।

माननीय प्रधानमंत्री के 3 करोड़ 'लखपति दीदी' बनाने के विजन के तहत अब तक 1.15 करोड़ महिलाएं 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं, और 2.91 करोड़ संभावित 'लखपति दीदी' देशभर में चिन्हित की गई हैं।

महिलाएं अब नौकरी चाहने वाली नहीं, नौकरी देने वाली बन रही हैं, वित्तीय साक्षरता और जनधन खातों के माध्यम से सीधे बैंकिंग तक पहुंच ने उन्हें सशक्त बनाया है।

महिलाएं सिर्फ कारोबार नहीं चला रही हैं, बल्कि वे “बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स” में भी शामिल हो रही हैं, क्योंकि लगभग आधे DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक है।

औपचारिक निर्णयों के साथ-साथ, महिलाएं अब अपने घर के फैसलों में भी नेतृत्व कर रही हैं — NFHS के आंकड़ों के अनुसार, महिलाएं 88.7% प्रमुख घरेलू निर्णयों में भागीदारी करती हैं।

पूरे भारत भर में महिलाएं आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में मजबूत ट्रेंडसेटर के रूप में उभर रही हैं। वे अब सिर्फ भाग नहीं ले रहीं, बल्कि रोजगार सृजन और उद्यमिता में नेतृत्व कर रही हैं। यह बदलाव सिर्फ ग्रामीण आजीविका तक सीमित नहीं है। जनधन खातों के माध्यम से महिलाएं तेजी से आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो रही हैं, वित्तीय साक्षरता बढ़ रही है और वे अपनी आय पर सीधा नियंत्रण रख रही हैं।

बोर्डरूम से लेकर गांवों तक, महिलाएं अब भारत की विकासगाथा में सिर्फ भागीदार नहीं, उसकी दिशा तय करने वाली बन चुकी हैं।

हर क्षेत्र में — चाहे वह रक्षा हो या कूटनीति, खेल हो या विज्ञान, या फिर स्टार्टअप्स — भारत की महिलाएं राष्ट्र के गौरव और प्रगति का एक नया अध्याय रच रही हैं। यह बदलाव सिर्फ कहानियों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के आर्थिक संकेतकों में भी साफ झलकता है।

भारत में महिला श्रम भागीदारी दर (FLFPR) में बेहद सकारात्मक बढ़ोतरी देखी गई है — जो 2017-18 में 23.3% से बढ़कर 2023-24 में 41.7% से अधिक हो गई है।

साथ ही, महिलाओं में बेरोजगारी की दर लगातार घट रही है, जो यह दर्शाता है कि महिलाओं के लिए नए अवसर बन रहे हैं और समावेशिता बढ़ रही है।

प्रतीकात्मक रूप से और वास्तविक रूप से भी भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का ऐतिहासिक चुनाव एक ऐसा मील का पत्थर है, जो समानता और प्रतिनिधित्व के प्रति राष्ट्र की गहरी प्रतिबद्धता(कमिटमेंट) को दर्शाता है। जैसे-जैसे भारत विकसित भारत 2047 के विजन की ओर बढ़ रहा है, यह साफ है कि नारी शक्ति सिर्फ राष्ट्र निर्माण में भाग नहीं ले रही, बल्कि उसका नेतृत्व भी कर रही है।