प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2025 के बजट सत्र में अपने भाषण में कहा कि ‘मिडिल क्लास’ आश्वस्त और संकल्‍पबद्ध है, और वह भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में मजबूती से साथ खड़ा है। उन्होंने न केवल मिडिल क्लास के योगदानों को स्वीकार किया, बल्कि एक बार फिर मिडिल क्लास पर भरोसा जताया कि वही भारत को विकसित देशों की श्रेणी में पहुंचाएगा।

बजट भाषण से ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं मां लक्ष्मी से प्रार्थना करता हूं कि वे गरीबों और मिडिल क्लास पर अपनी कृपा बनाए रखें।” अगले ही दिन जब बेसिक टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर 12 लाख कर दी गई और सैलरी पाने वाले वर्ग के लिए यह सीमा और बढ़कर 12.75 लाख कर दी गई, तो ऐसा लगा मानो सच में मां लक्ष्मी, जो धन की देवी हैं, गरीबों और मिडिल क्लास पर मेहरबान हो गई हों।

बेसिक टैक्स छूट की सीमा में यह जबरदस्त बढ़ोत्तरी — 7 लाख से 12 लाख तक — एक ही वित्त वर्ष में 70% से ज्यादा की बढ़ोत्तरी, इससे पहले कभी सुनने को नहीं मिली थी। लेकिन मोदी सरकार के लिए यह कोई नई बात नहीं है। जब से प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में कार्यभार संभाला है, टैक्स-फ्री इनकम की सीमा चार बार बढ़ाई गई है — 2 लाख (2014) से 2.5 लाख, फिर 5 लाख (2019), 7 लाख (2023), और अब प्रभावी रूप से 12 लाख (2025)। यह मिडिल क्लास को दिया गया ठोस समर्थन है — एक तरह से राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को दी गई मान्यता। यह मिडिल क्लास की ईमानदारी का अभिनंदन है।

आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, और उसने जापान को पीछे छोड़ दिया है। भारत की जीडीपी अब 4 ट्रिलियन डॉलर हो गई है। साल 2014 में भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, तब जीडीपी 1.86 ट्रिलियन डॉलर थी। यह विकास बहुत ही विशाल और अद्भुत है।

यहाँ तक कि प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) भी लगभग दोगुनी हो गई है — 2013-14 में यह 1438 अमेरिकी डॉलर थी, जो 2024 में बढ़कर 2880 अमेरिकी डॉलर हो गई है। इसके साथ ही सरकार पिछले एक दशक से औसतन 5% की महंगाई दर को नियंत्रित रखने में सफल रही है, जिससे मिडिल क्लास के हाथ में ज्यादा पैसा स्थिर रूप से बना रहा है।

पिछले 11 सालों में 25 करोड़ से ज्यादा लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकलकर न्यू मिडिल क्लास में शामिल हुए हैं। जैसे-जैसे मिडिल क्लास बढ़ रहा है, वैसे-वैसे उसकी अपेक्षाएं और आकांक्षाएं भी बढ़ रही हैं।

लेकिन सरकार इन बढ़ती उम्मीदों को कभी निराश नहीं करती। चाहे शिक्षा हो या नए अवसर, चाहे जीवन को आसान बनाना हो या शांति से जीने की सुविधा — हर जगह मिडिल क्लास को प्राथमिकता दी जाती है। सरकार लगातार काम करती है ताकि मिडिल क्लास को उसका हक और सम्मान मिलता रहे।

जब हम ‘ईज ऑफ लिविंग’ यानी आसान और बेहतर जीवन की बात करते हैं, तो इसमें जबरदस्त बदलाव आया है। टियर-2 और टियर-3 शहर अब हवाई मार्ग से बेहतर तरीके से जुड़ गए हैं। अच्छी और साफ-सुथरी ट्रेनें और रेलवे स्टेशन बने हैं। शहरों में मेट्रो सेवाएं शुरू हुई हैं और राज्यों के बीच कनेक्टिविटी के लिए ‘नमो भारत’ रैपिड मेट्रो जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं। यह सब बड़ी स्तर पर तैयार हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर है, जो खासकर मिडिल क्लास के लिए काम करता है और उसकी सेवा करता है।

आज भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र को पहले से ज्यादा सुलभ और किफायती बना दिया गया है, जिससे लोगों की बड़ी बचत हो रही है। पूरे देश में 15,000 से ज्यादा जन औषधि केंद्र गरीब और मिडिल क्लास के लोगों को सस्ती दवाइयाँ उपलब्ध करा रहे हैं।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के तहत 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सभी वरिष्ठ नागरिकों को, उनके सामाजिक-आर्थिक स्तर की परवाह किए बिना, स्वास्थ्य बीमा कवरेज दिया जा रहा है। यह सुविधा देशभर में मिडिल क्लास द्वारा खूब सराही जा रही है।

एक और क्षेत्र जिसमें सरकार ने शानदार काम किया है, वह है शिक्षा — जो मिडिल क्लास की रीढ़ मानी जाती है। उच्च शिक्षा के संस्थानों में बढ़ोत्तरी हुई है, जिनमें मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट संस्थान शामिल हैं। इन बढ़ते विकल्पों ने मिडिल क्लास के युवाओं को जगह दी है और उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया है।

शिक्षा के साथ-साथ स्किल-बेस्ड ट्रेनिंग (कौशल आधारित प्रशिक्षण) ने भी मिडिल क्लास परिवारों के लिए नए अवसर खोले हैं। अंतरिक्ष क्षेत्र से लेकर स्टार्टअप्स तक, मिडिल क्लास ने अपने दम पर भारत को आगे ले जाने का रास्ता तैयार किया है।

अच्छी नौकरियों से लेकर अपने बिजनेस शुरू करने तक, मिडिल क्लास हमेशा शिखर पर बना हुआ है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत नए उद्यमों को दिए जाने वाले लोन ने 2015 से अब तक 11 करोड़ नए उद्यमियों को कर्ज दिया है। ये उद्यमी, जो पहले नौकरी ढूंढते थे, अब खुद नौकरी देने वाले बन गए हैं। ये असली मिडिल क्लास की ताकत है।

PMMY के तहत एक दिलचस्प ट्रेंड यह देखा गया है कि लोन की औसत राशि लगभग तीन गुना बढ़ गई है — जो वित्त वर्ष 2015-16 में ₹38,000 थी, वह 2022-23 में बढ़कर ₹72,000 हो गई, और अब 2024-25 में ₹1.02 लाख तक पहुंच गई है। यह दर्शाता है कि बाजार का दायरा व्यापक हुआ है और इसमें मिडिल क्लास की बड़ी भूमिका है। आज का मिडिल क्लास पहले से ज्यादा कमाता है।

बढ़ी हुई आमदनी ने बचत और खर्च — दोनों को बढ़ावा दिया है। मिडिल क्लास का इन्फ्रास्ट्रक्चर में बढ़ता प्रभाव साफ तौर पर दिखता है। चाहे मेट्रो शहर हों, टियर-2 शहर हों या टियर-3, भारत के हर हिस्से में इन्फ्रास्ट्रक्चर मार्केट में मिडिल क्लास की भागीदारी साफ नजर आती है।

कम ब्याज दरों पर होम लोन मिलने और मिडिल क्लास के लिए 'क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम' जैसी योजना आने से अब घर लेना एक हकीकत बन गया है। रियल एस्टेट में तेजी तो साफ दिखी, लेकिन इसके साथ कुछ समस्याएं भी रहीं — जैसे पारदर्शिता की कमी और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में देरी।

लेकिन इस दिशा में भी सरकार ने तुरंत कदम उठाया। घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने और रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संसद ने रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 (RERA) को लागू किया। आज 1.42 लाख से ज्यादा प्रोजेक्ट RERA के दायरे में आ चुके हैं।

SWAMIH (स्पेशल विंडो फॉर अफोर्डेबल एंड मिड-इनकम हाउसिंग) योजना के अंतर्गत अब तक 51,000 से अधिक मकान तैयार हो चुके हैं और उनकी चाबियाँ घर खरीदारों को सौंपी जा चुकी हैं। साल 2025 में ही 40,000 और घर पूरे होने वाले हैं।

मिडिल क्लास भारत के इस असाधारण बदलाव की नींव है, जिसने देश को एक वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित किया है। मोदी सरकार ने लगातार मिडिल क्लास को सशक्त किया है — चाहे वह भारी टैक्स राहत हो, या इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास से जुड़ी परिवर्तनकारी योजनाएं हों।

सरकार ने शिक्षा, उद्यमिता और आर्थिक तरक्की के अवसर बढ़ाकर यह सुनिश्चित किया है कि मिडिल क्लास सिर्फ भारत की तरक्की का लाभ न उठाए, बल्कि उसका नेतृत्व भी करे। जैसे-जैसे भारत विकसित राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है, मिडिल क्लास अपनी मेहनत, संकल्प और महत्वाकांक्षा के साथ सबसे आगे खड़ा है — एक समृद्ध और समावेशी भविष्य को आकार दे रहा है।