प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में भारत की खेल पहचान में जबरदस्त वृद्धि हुई है। देश में खेल के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आया है, जो संस्थागत सुधारों, जमीनी स्तर पर विकास और समावेशी भागीदारी से प्रेरित है। यह परिवर्तन प्रतिबद्धता, इन्फ्रास्ट्रक्चर और राष्ट्रीय गौरव से जुड़ा हुआ है – और देश ने खेलों के क्षेत्र में एक शांत परंतु शक्तिशाली क्रांति को देखा है। यह क्रांति नीतिगत स्तर और खिलाड़ियों के प्रदर्शन – दोनों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
यह बदलाव एक सोची-समझी रणनीति और दीर्घकालिक योजना है, जिसे पीएम मोदी की खिलाड़ियों से जुड़ाव, अच्छे खेल मैदानों और सुविधाओं का निर्माण, ज्यादा बजट और विशेष योजनाओं के ज़रिए आगे बढ़ाया गया है। आज खेल भारत की तरक्की की कहानी का हिस्सा हैं और यह अब देश की उम्मीद, एकता और दुनिया में आगे बढ़ने की सोच का प्रतीक बन गए हैं।
विजन से एक्शन तक: खेलों को बढ़ावा देने वाली सरकार
प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा खेलों को राष्ट्र निर्माण की एक मजबूत शक्ति के रूप में देखा है। उन्होंने कई बार यह दोहराया है कि खेल देश में एकता बढ़ाने, युवाओं को प्रेरित करने और भारत को एक आत्मविश्वासी और उभरती हुई वैश्विक ताकत के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उनकी यह सोच कार्यों में भी दिखाई देती है, जैसे कि ‘खेलो इंडिया’ और ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS)’ जैसे प्रमुख कार्यक्रमों के माध्यम से। इन पहलों ने देश में खेलों की पूरी व्यवस्था को नया रूप दिया है और भारत को खेलकूद के प्रति समर्पित एक राष्ट्र बना दिया है।
प्रेरणा देने वाला इन्फ्रास्ट्रक्चर
सरकार ने खेलों में दीर्घकालिक सफलता के लिए स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश को प्राथमिकता दी है। इसका स्पष्ट प्रमाण है कि युवा मामले और खेल मंत्रालय के बजट में कई गुना वृद्धि हुई है। इस फंडिंग से देशभर में ठोस परिणाम देखने को मिले हैं।
देशभर के युवा खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है – सरकार ने कुल 323 नए खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिन पर 3074 करोड़ का निवेश किया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की सुविधाएं देने के लिए देशभर में 1041 खेलो इंडिया केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही, 32 खेलो इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) और 301 खेल अकादमियों को मान्यता दी गई है, जिससे खेलों का पूरा इकोसिस्टम और मजबूत हुआ है। खेलो इंडिया सीओई(CoE) में खिलाड़ियों को विशेषज्ञ कोचिंग, पोषण और उच्चस्तरीय प्रशिक्षण की सुविधा दी जा रही है।
पिछले 11 वर्षों में खेलों का संस्थागत विकास तेजी से हुआ है। मणिपुर में एक राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है, जो खेल, विज्ञान, कोचिंग और प्रदर्शन से जुड़े शैक्षणिक कार्यक्रम प्रदान कर रहा है। उत्तर प्रदेश में स्थापित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय सरकार की एक और बड़ी उपलब्धि है, जो खेलों में शैक्षणिक और व्यावहारिक उत्कृष्टता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
ये विकास प्रधानमंत्री मोदी के उस विजन को दर्शाते हैं, जिसमें खिलाड़ियों को उनकी पूरी यात्रा के हर चरण में मजबूत समर्थन देने की सोच के साथ एक संगठित और मिशन आधारित रणनीति के अंतर्गत स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकसित किया जा रहा है।
खिलाड़ियों को सशक्त बनाना: गांव से वैश्विक मंच तक
खेल के क्षेत्र में भारत का उदय युवा प्रतिभाओं की पहचान और उनके पोषण से हुआ है। नए टैलेंट को मेडल जीतने वाले खिलाड़ी में बदलने में 'खेलो इंडिया' कार्यक्रम की अहम भूमिका रही है। इस कार्यक्रम के तहत अब तक 2781 से अधिक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, उपकरण, चिकित्सा देखभाल और वित्तीय सहायता दी गई है।
इसका असर जबरदस्त रहा है – 2022 एशियाई खेलों में भारत के 42 पदकों में से 124 पदक विजेता 'खेलो इंडिया' से प्रशिक्षित खिलाड़ी थे। वहीं 28 खिलाड़ी पेरिस 2024 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 'खेलो इंडिया' के खिलाड़ियों ने अब तक करीब 6000 राष्ट्रीय रिकॉर्ड और 1400 अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए हैं – जो भारत के जमीनी स्तर के खेलकूद के कार्यक्रमों की प्रगति को दर्शाता है।
टोक्यो ओलंपिक में भारत ने 7 पदक जीते थे और पेरिस ओलंपिक में भी भारत ने 6 पदकों के साथ दमदार प्रदर्शन किया। वहीं, पेरिस पैरालंपिक में भारत ने अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 29 पदक जीते हैं।
महिलाओं, ग्रामीणों और युवाओं को शामिल करने वाली योजनाएं
भारत में खेल क्षेत्र का परिवर्तन समावेश पर आधारित है। अस्मिता महिला लीग्स (ASMITA Women’s Leagues) ने महिलाओं को 20 खेलों में संरचित रूप से भाग लेने का अवसर दिया है, जिससे उनकी भागीदारी बढ़ी है और उन्हें अधिक मंच मिला है।
प्रतिभाओं की जल्दी पहचान सुनिश्चित करने के लिए, खेलो इंडिया राइजिंग टैलेंट आइडेंटिफिकेशन (KIRTI) जैसे कार्यक्रमों के अंतर्गत 1.8 लाख से अधिक मूल्यांकन किए जा चुके हैं।
सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने 11,000 से अधिक युवा क्लबों को खेल सामग्री वितरित की है।
नेतृत्व जो सुनता है, कार्य करता है और भारत की शक्ति का परिचय देता है
प्रधानमंत्री का खिलाड़ियों के साथ व्यक्तिगत जुड़ाव खेल प्रतिभा के सम्मान, प्रोत्साहन और पहचान की संस्कृति को बढ़ावा देने में मददगार रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का पैराथलीट्स, महिला टीमों और उभरते चैंपियनों के प्रति समर्थन हर खेल क्षेत्र में आत्मविश्वास जगाता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, मोदी सरकार ने खेलों को कूटनीति और सॉफ्ट पावर के रूप में उपयोग किया है। सरकार ने खेलों को राष्ट्रीय पहचान और महत्वाकांक्षा का प्रतीक बनाया है — स्थानीय खेलों को बढ़ावा देकर और देश की वैश्विक खेल आयोजनों में उपस्थिति बढ़ाकर।
खेलो इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से, देश ने संरचित राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किए, प्रतिभाओं का विकास किया और दुनिया के मंच पर भारत की बढ़ती साख को दिखाया है।
विजय और उपलब्धियों का एक दशक
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में भारत का खेलों के प्रति दृष्टिकोण पूरी तरह से बदल गया है। भारत की खेल यात्रा घरेलू और विश्व स्तर पर लगातार और स्पष्ट परिणाम दे रही है, जिससे आत्मविश्वास से सराबोर खिलाड़ियों की एक पीढ़ी बन रही है जो देश को वैश्विक खेलों में सफल होने और नेतृत्व करने के लिए तैयार हो रहा है।
यह कहानी है कामयाबी की और भारत के खेलों के परिवर्तन की, जो प्रेरणा, इन्फ्रास्ट्रक्चर, अवसर और विश्वास से संचालित है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत जीतने और नेतृत्व करने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहा है।