प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का मुख्य फोकस रोजगार सृजन पर रहा है। पिछले 11 वर्षों में, भारत ने अनौपचारिक रोजगार सृजन से हटकर एक व्यवस्थित इकोसिस्टम की ओर कदम बढ़ाया है, जो भागीदारी, विस्तार, और इनोवेशन पर फोकस कर एंटरप्रेन्योरशिप, कौशल विकास, और वर्कफोर्स के नियमन को प्रोत्साहित करता है। मोदी सरकार ने रोजगार को व्यक्तियों के सम्मान व सशक्तिकरण तथा राष्ट्रीय विकास को तेजी से बढ़ाने के माध्यम के रूप में नए सिरे से परिभाषित किया है। शहरों, कस्बों और गांवों हर जगह देश में एक कर्मचारी की जीवनशैली आज बढ़ते अवसरों, आकांक्षाओं और सार्थक परिवर्तन को दर्शाती है।

रोजगार की नई परिभाषा: नौकरी की तलाश से नौकरी देने तक

मोदी सरकार ने देश में एक महत्वपूर्ण वैचारिक परिवर्तन को विकसित किया है, जिसके अंतर्गत नागरिकों को नौकरी तलाशने के बजाय नौकरी के अवसर उत्पन्न करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस बदलाव के केंद्र में बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम की मुख्य भूमिका है, जिसमें आज लगभग 1.60 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स हैं। इन स्टार्टअप्स ने 17.70 लाख से अधिक सीधी नौकरियों के अवसर सृजित किए हैं, जो देश के रोजगार परिदृश्य पर इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप के बढ़ते प्रभाव पर जोर देता है। देश में लगभग 50% स्टार्टअप्स टियर II और टियर III शहरों में स्थित हैं, जिससे नौकरियों के अवसर अब महानगरों से आगे बढ़कर छोटे शहरों और कस्बों में स्थानीय प्रतिभाओं को सशक्त कर रहे हैं और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा दे रहे हैं।

MSME मंत्रालय द्वारा खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के माध्यम से लागू किए गए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के अंतर्गत नए गैर-कृषि व्यवसाय स्थापित करने में मदद मिली है। इस योजना ने देश भर में वर्ष 2019 से 2024 के बीच 33 लाख से अधिक नौकरियां सृजित की हैं।

नौकरी तलाशने से आगे बढ़कर नौकरी के अवसर सृजित करने के इस महत्वपूर्ण बदलाव में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की मुख्य भूमिका रही है। कोलैटरल-फ्री लोन के माध्यम से मुद्रा योजना ने कई लोगों को एंटरप्रेन्योर बनने या व्यवसाय का विस्तार करने में सक्षम बनाया है।

देश में अब तक 52 करोड़ से अधिक लोन स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 68% महिला उद्यमियों को दिए गए हैं। इन लोन के माध्यम से 11 करोड़ नए उद्यमियों को मदद मिली है।

वर्कफोर्स के बदलाव के केंद्र में युवाओं की मुख्य भूमिका

मोदी सरकार कई कौशल विकास योजनाओं के माध्यम से देश की मजबूत डेमोग्राफिक स्थिति का तत्परता से लाभ उठा रही है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के अंतर्गत 2015 से अब तक 1.6 करोड़ से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया गया है।

PMKVY-4.0 के अंतर्गत, लाखों उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें से अधिकांश व्यावसायिक प्रशिक्षण लेकर नियमित आय प्राप्त कर रहे हैं।

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) के अंतर्गत वर्ष 2014 से ही ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। वर्ष 2020-21 में शुरू की गई प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही (PM-DAKSH) योजना के अंतर्गत SC, OBC, EWS, और अन्य उपेक्षित समुदायों के उम्मीदवारों को 112 प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से प्रशिक्षित किया है, जिसके लिए 366 करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित है।

हाल ही में शुरू की गई प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PMIS) का उद्देश्य भारतीय युवाओं को 1 करोड़ पेड-इंटर्नशिप प्रदान करके उद्योग-जगत के लिए तैयार करना है। यह योजना MY Bharat पोर्टल द्वारा समर्थित है, जहां नौकरी की तलाश में युवाओं ने करियर सपोर्ट, कौशल विकास के अवसर और सरकार के साथ जुड़ने के लिए पहले से ही रजिस्ट्रेशन करा रखा है। भविष्य के बारे में सोचते हुए, मोदी सरकार 4.1 करोड़ से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से कौशल-उन्नयन और कई रोजगार-केंद्रित अभियानों पर ध्यान दे रही है।

भविष्य के लिए तत्पर एक आदर्श वर्कफोर्स का विकास

मोदी सरकार की रोजगार नीति का एक प्रमुख सिद्धांत वर्कफोर्स के नियमितीकरण और मानकीकरण पर जोर देना है। वित्त वर्ष 2025 में ही, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने 1.13 करोड़ नए सब्सक्राइबर जोड़े, जो देश भर में बढ़ते नियमित रोजगार सृजन को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू किए गए रोजगार मेला के 15 कार्यक्रमों में 10.5 लाख नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं, जिससे केंद्र सरकार की भर्ती प्रक्रिया को तेज किया गया है और नियमित रोजगार के प्रत्यक्ष अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

भारत की बढ़ती डिजिटल इकॉनमी नियमित रोजगार उपलब्ध कराने का एक मुख्य साधन बन गई है। वर्तमान में इस सेक्टर में लगभग 1.5 करोड़ व्यक्ति कार्यरत हैं, जिससे देश डिजिटल प्रतिभा और सेवाओं के लिए एक उभरता हुआ वैश्विक केंद्र बन रहा है।

औद्योगिक रोजगार को बढ़ावा देने के लिए, एम्प्लॉयमेंट लिंक्ड इंसेंटिव (ELI) योजना के बजट को 10,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे कंपनियों को अधिक नियुक्तियां करने और कर्मचारियों को लंबे समय तक नौकरी में रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

भागीदारी से सुनिश्चित हुई विकास की राह

प्रधानमंत्री मोदी की रोजगार सृजन नीति ने भागीदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। महिलाओं, युवाओं और परंपरागत रूप से उपेक्षित समूहों के लिए समर्थन को प्राथमिकता देकर, सरकार ने सुनिश्चित किया है कि कोई भी रोजगार के अवसरों से वंचित न रहे।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने समावेशी रोजगार सृजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब तक दिए गए ऋण का 68% ऋण महिलाओं को और 51% ऋण SC, ST, और OBC लाभार्थियों को प्रदान कर मुद्रा योजना ने उपेक्षित समूहों को अपने छोटे व्यवसाय शुरू कर आय बढ़ाने में सक्षम बनाया है।

मुद्रा के अलावा, SEED योजना के माध्यम से 8 राज्यों में 3,500 सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स (SHGs) के गठन को सपोर्ट मिला है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना कारीगरों और शिल्पकारों को ऋण दिलाने और उनके कौशल विकास में मदद कर रही है, जिसके लिए अब तक 2.6 करोड़ से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शुरू की गईं ये योजनाएं व्यक्तियों, परिवारों और समुदायों को आत्मनिर्भर बनने और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान देने के लिए सशक्त कर रही हैं।

परिणाम और उपलब्धियों के 11 साल

पिछले 11 वर्षों में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने अवसरों के सृजन और आसानी से उनका लाभ उठाने पर जोर दिया है। नियमित नौकरियां, स्वरोजगार, कौशल विकास, और डिजिटल भागीदारी ने भारत के रोजगार परिदृश्य को पुनर्परिभाषित किया है। इस प्रयास की व्यापकता, भागीदारी, और निरंतरता ने भारत के युवाओं, महिलाओं, और उद्यमियों में विश्वास जगाया है।

प्रधानमंत्री मोदी का रोजगार समृद्ध आत्मनिर्भर भारत का सपना, जिसमें सभी के लिए समान अवसर हों, धीरे-धीरे नया आकार ले रहा है। विकसित भारत बनने की दिशा में यह सपना देश का लगातार मार्गदर्शन कर रहा है।