2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में महिलाओं को हर क्षेत्र में सशक्त बनाने के लिए ऐतिहासिक नीतियाँ लागू की गईं। सम्मान से लेकर आर्थिक सशक्तिकरण तक, पिछले 11 वर्षों में नारी शक्ति के लिए एक समावेशी और गतिशील भविष्य की मजबूत नींव रखी गई है। सरकार ने महिलाओं के जीवन के हर चरण को सुरक्षित और सशक्त बनाने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है, जिसके तहत कई सुधारात्मक नीतियाँ और पहल शुरू किए गए हैं।

महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना

जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में अपने पहले स्वतंत्रता दिवस के भाषण में महिलाओं की गरिमा और स्वच्छता की बात की, तो एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ। इसकी शुरुआत स्वच्छ भारत मिशन से हुई, जो सिर्फ शौचालय बनाने तक सीमित नहीं रहा। पिछले 11 वर्षों में 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए हैं, जिससे महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा को मजबूती मिली है। अब 100% ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों की सुविधा उपलब्ध है, और वे दिन चले गए जब महिलाओं को शौच या पेशाब रोकने के लिए खाना-पीना बंद करना पड़ता था।इससे उनकी मासिक धर्म स्वच्छता, गरिमा और स्वास्थ्य में भी सुधार हुआ है।

इस परिवर्तन को आगे बढ़ाते हुए, प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी सोच से 2019 में जल जीवन मिशन (JJM) की शुरुआत हुई। इस पहल ने हर घर में सुरक्षित और पर्याप्त जल सुनिश्चित करके लोगों के जीवन को बदल दिया है। इससे न केवल स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और जलजनित बीमारियाँ कम हुई हैं, बल्कि महिलाओं को रोज़ पानी लाने की असुविधा से भी मुक्ति मिली है।

आज़ादी के बाद से 2019 तक जहाँ सिर्फ 3 करोड़ घरों में ही नल जल कनेक्शन था, वहीं अब यह संख्या पांच गुना बढ़कर 15 करोड़ से अधिक घरों तक पहुँच गई है। इस बदलाव ने महिलाओं का समय बचाया है, जिससे वे शिक्षा, कौशल विकास और अन्य कार्यों पर ध्यान दे पा रही हैं।

एक अध्ययन के अनुसार, जब 8.3 प्रतिशत घरों में बाहर से पानी लाने की निर्भरता कम होती है, तो 7.4 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी कृषि और संबंधित कार्यों में बढ़ जाती है। इसी तरह, पीएम उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक धुएँ रहित रसोईघर बने हैं। इससे महिलाओं को लकड़ी जुटाने के झंझट और पारंपरिक चूल्हे के धुएँ से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान से छुटकारा मिला है।

सरकार सिर्फ महिलाओं के रोज़मर्रा के जीवन को आसान बनाने तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि इससे आगे बढ़कर ठोस कदम भी उठाए हैं। ऐसा ही एक ऐतिहासिक कदम था 2019 में तीन तलाक को खत्म करना। इस ऐतिहासिक फैसले ने मुस्लिम महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की और एक पुरानी व अन्यायपूर्ण प्रथा को खत्म किया, जिसने न जाने कितनी ज़िंदगियों को बर्बाद कर दिया था।

सरकार ने महिलाओं को घर की निर्णय लेने की प्रक्रिया में सशक्त बनाने का भी काम किया है, जैसे कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घरों का मालिकाना हक़ महिलाओं को देना। आज 70% से अधिक पीएम आवास अकेले या संयुक्त रूप से महिलाओं के नाम पर हैं।

यह सिर्फ एक छत नहीं है, बल्कि महिलाओं की घर और समाज में स्थिति को मज़बूत करने की दिशा में एक साहसिक कदम है।

प्रधानमंत्री मोदी की हर योजना महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और सशक्त भारत के निर्माण की ओर बढ़ी है। इसी कड़ी में "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" अभियान एक महत्वपूर्ण पहल है। इसने समाज में गहराई से जड़ें जमा चुकी लिंग भेद की मानसिकता को चुनौती दी है और सोच में बदलाव लाया है — अब बेटियों को बोझ नहीं, बल्कि सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में देखा जाने लगा है।

सरकार ने सबसे पहले भारतीय महिलाओं की कमजोरियों को समझते हुए उनकी सुरक्षा, सम्मान और बुनियादी ज़रूरतों को प्राथमिकता दी और इसके लिए जनकल्याण केंद्रित नीतियों को अपनाया।

नारी शक्ति का असली सशक्तिकरण तब तक अधूरा है जब तक उन्हें एक सुरक्षित माहौल न मिले। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक मजबूत सहायता प्रणाली तैयार की है, जो संकट में फंसी महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करती है। चाहे वह वन स्टॉप सेंटर हों, महिलाओं के लिए शुरू की गई यूनिवर्सल हेल्पलाइन हो, या फिर थानों में बनाए गए विशेष महिला हेल्प डेस्क — मिशन शक्ति के हर हिस्से ने महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत किया है और न्याय तक उनकी पहुंच को आसान बनाया है।

नारी शक्ति की उड़ान: अब महिलाएं बन रहीं हैं रोजगार देने वाली

आज भारत में महिलाएं पहले से कहीं ज़्यादा बदलाव की अगुवाई कर रही हैं। देश के करीब आधे स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक है। यह बदलाव सरकार की समग्र नीतियों और डिजिटल नवाचार की वजह से आया है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘नारी शक्ति’ को हमेशा प्राथमिकता दी गई है।

सरकार महिलाओं की उम्मीदों में निवेश कर रही है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसे कार्यक्रमों के तहत अब तक दिए गए कर्ज़ में लगभग 70% लाभार्थी महिलाएं हैं। पूंजी की बेहतर पहुंच के कारण महिलाएं अब खुद का कारोबार शुरू कर रही हैं और कई बार दूसरों को भी रोजगार दे रही हैं। इसी तरह स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत 75% कर्ज़ महिलाओं को दिए गए हैं। इसके अलावा जन धन खातों में 55% हिस्सेदारी महिलाओं की है। यह सारे प्रयास महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं और समावेशी विकास को आगे बढ़ा रही हैं।

जमीनी स्तर पर महिलाओं को आर्थिक और उद्यमिता के क्षेत्र में बढ़त मिल रही है। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) ने भारत के ग्रामीण इलाकों की महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। आज देशभर में 90 लाख से ज़्यादा SHGs "स्वयं सहायता समूह में 10 करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये समूह महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहे हैं और उन्हें उद्यमी बनने का रास्ता दे रहे हैं।

इस आंदोलन की सबसे बड़ी सफलता है ‘लखपति दीदी’ की बढ़ती संख्या—अब 1 करोड़ से ज्यादा महिलाएं इस पहल के तहत अच्छी आमदनी कमा रही हैं, आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं और गांवों की तरक्की में अहम भूमिका निभा रही हैं।

इन सभी प्रयासों ने ‘नारी शक्ति’ को भारत की विकास यात्रा के केंद्र में ला खड़ा किया है। महिलाएं अब सिर्फ बदलाव में भागीदार नहीं हैं—बल्कि वे इस बदलाव का नेतृत्व कर रही हैं, अपने बिज़नेस खड़ी कर रही हैं और पूरे देश में मज़बूत समुदायों की नींव रख रही हैं।

घर की निर्णयकर्ता से नीतिनिर्माता तक का सफर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में शासन व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आया है, खासकर महिलाओं की भागीदारी को लेकर। एक ऐतिहासिक सुधार के तहत ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के अंतर्गत कार्यपालिका (संसद एवं विधानसभा) में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू किया गया है। यह निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर नीतिनिर्धारण में महिलाओं की भागीदारी को एक नई पहचान देता है।

जमीनी स्तर पर, आज निर्वाचित महिला प्रतिनिधि परिवर्तन की अगुवाई कर रही हैं। हाल की एक रिपोर्ट के अनुसार, पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) में लगभग 46% निर्वाचित प्रतिनिधि महिलाएं हैं, और देशभर में 14 लाख से अधिक महिलाएं इन ग्रामीण स्थानीय निकायों में सेवा दे रही हैं। यह मजबूत भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि स्थानीय शासन में महिलाओं की आवाज़ सुनी जाए और समुदाय की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर निर्णय लिए जाएं।

इस बदलाव का असर सिर्फ़ आँकड़ों तक सीमित नहीं है। जब अधिक महिलाएं नेतृत्व की भूमिकाओं में आती हैं, तो नीतियाँ महिलाओं की प्राथमिकताओं के अनुरूप बनती हैं — जिन्हें पहले की सरकारें आम तौर पर नज़रअंदाज़ कर देती थीं।

महिला नेतृत्व वाले विकसित भारत की ओर अग्रसर हमारा देश

प्रधानमंत्री मोदी के समग्र दृष्टिकोण के तहत पिछले ग्यारह वर्षों में देश ने एक व्यवस्थित और समावेशी बदलाव देखा है, जिसमें नारी शक्ति इसके केंद्र में है। महिलाएं अब पीछे नहीं रह गई हैं, बल्कि विकसित भारत 2047 के विजन को आगे बढ़ा रही हैं।

पिछले दशकों से बिलकुल अलग, भारत ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार किया है जहाँ अब उच्च शिक्षा में लगभग 50% नामांकन महिलाएं हैं। 2017-18 से, महिला सकल नामांकन अनुपात (GER) पुरुषों से भी अधिक हो गया है। इसी तरह, चंद्रयान-3 की सफलता में 50 से अधिक महिला वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो महिला नेतृत्व वाले विकास की गर्व और ताकत का परिचायक है।

मौजूदा सरकार एक ऐसा भविष्य बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, जहाँ सशक्त महिलाएँ प्रगति को गति दें, नीतियों को आकार दें और पीढ़ियों को प्रेरित करें।

उदाहरण के तौर पर, 'नमो ड्रोन दीदी' जैसी पहलें हैं, जो महिलाओं का एक विशेष समूह तैयार कर रही हैं, जिन्हें उन्नत ड्रोन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे न केवल कृषि क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि महिलाओं के लिए आय के नए अवसर भी खुलेंगे।

महिला सशक्तिकरण अब सिर्फ एक नारा नहीं रह गया है; यह प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के हर नीति निर्णय में साफ दिखता है। 2014 के बाद से बनी नीतियों ने समाज के हर वर्ग की महिलाओं को सशक्त बनाया है — चाहे वह 12 करोड़ से अधिक शौचालय निर्माण हो या महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना हो। गरिमा, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और अवसर के साथ महिलाएं अब बदलाव का इंतजार नहीं कर रही हैं, बल्कि वे खुद बदलाव की अगुवाई कर रही हैं।