पिछले एक दशक में भारत का कारोबारी परिदृश्य पूरी तरह से बदल चुका है। त्वरित अप्रूवल, आसान कंप्लायंस और डिजिटली इंटीग्रेटेड सिस्टम्स के कारण आज भारत उद्योग और निवेश के लिए दुनिया की पसंदीदा जगह बनकर उभरा है। यह परिवर्तन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और NDA सरकार के सतत प्रयासों का ही परिणाम है, जिससे लो-कॉस्ट, प्रभावशाली और व्यावहारिक सुधारों के माध्यम से इनोवेशन को प्रोत्साहित और व्यवसायों को सशक्त किया।

किसी व्यवसाय को शुरू करने, चलाने या बंद करने की प्रक्रिया जो पहले जटिल और काफी समय लेने वाली मानी जाती थी, अब कहीं अधिक तेज और पारदर्शी हो गई है। व्यावसायिक कानूनों का गैर-अपराधीकरण, कंप्लायंसेस में कमी, डिजिटल अप्रूवल और तेज एग्जिट मैकेनिज्म, इन सभी रिफॉर्म्स ने सरकार और व्यवसायों के बीच की प्रक्रियाओं को सरल बनाया है, जिससे भारत में एक अधिक कारगर, समावेशी और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक व्यावसायिक वातावरण बन सका है।

विश्वास पर आधारित बिजनेस इकोसिस्टम का निर्माण

मोदी सरकार के रिफॉर्म्स का सबसे महत्वपूर्ण आधार नियम-कानूनों का सरलीकरण रहा है। केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में अब तक 42,000 से अधिक कंप्लायंसेस को तर्कसंगत बनाया गया है। इससे पेपरवर्क कम हुआ, पुराने नियम समाप्त हुए और रोजमर्रा के व्यावसायिक कामकाज सरल हुए हैं। छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए इन बदलावों से देरी और कंप्लायंस की लागत दोनों में ही कमी आई है।

सरकार ने 3,700 से अधिक कानूनी प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया है, जिनके अंतर्गत पहले छोटी-मोटी गलतियां भी दंडनीय थीं। इससे एक ऐसा विधिक माहौल तैयार हुआ, जो विश्वास पर आधारित है। जन विश्वास अधिनियम, 2023 के माध्यम से 42 अलग-अलग कानूनों के 183 प्रावधानों को संशोधित किया गया, जिससे छोटे-छोटे कंप्लायंसेस में चूक होने पर मिलने वाले आपराधिक दंड समाप्त किए गए।

इन सुधारों से भारत के व्यावसायिक कानूनों का सरलीकरण हुआ है, व्यापारियों पर बोझ घटा है और एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार हुआ है जो भ्रष्टाचार और पक्षपात से नहीं, बल्कि विश्वास और स्पष्ट नियम-कानूनों से संचालित हो रहा है।

डिजिटल एकीकरण (Integration) से त्वरित अप्रूवल

अप्रूवल्स को सरल और कारगर बनाना और प्रशासनिक देरी को कम करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इंटीग्रेशन मोदी सरकार के रिफॉर्म्स का एक अहम हिस्सा रहा है। वर्ष 2021 में नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) की शुरुआत इसी दिशा में एक क्रांतिकारी पहल थी। यह एक ऐसा एकीकृत डिजिटल प्लेटफार्म है, जो केंद्र और राज्य दोनों अप्रूवल्स को एक ही स्तर पर उपलब्ध कराता है। इसकी वजह से अब एक ही काम के लिए अलग-अलग एप्लीकेशन देने की जरूरत नहीं रही, और गवर्नमेंट-टू-बिजनेस (G2B) इकोसिस्टम कहीं अधिक सरल और प्रभावकारी हुआ है। अब तक 150 से अधिक देशों के यूजर्स द्वारा NSWS पोर्टल के माध्यम से 75,000 से अधिक व्यावसायिक अप्रूवल्स प्राप्त किए जा चुके हैं।

इसके साथ ही किसी व्यवसाय को बंद करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए Centre for Processing Accelerated Corporate Exit (C-PACE) का गठन किया गया, जिससे किसी कंपनी को बंद कराने में लगने वाला समय लगभग दो साल से घटकर सिर्फ 90 दिन हो गया है। इससे सरकार और सरकारी व्यवस्थाओं पर व्यवसायियों का विश्वास बढ़ा है और फंड्स का बेहतर पुनर्निर्धारण हो पाया है।

स्टार्टअप्स को सशक्त करने वाले सक्षम फ्रेमवर्क का निर्माण

भारत आज विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है, और इसका श्रेय उन रिफॉर्म्स को जाता है, जो शुरुआती बाधाओं को हटाकर इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित बनाते हैं। इंटरनेट आधारित कंपनी रजिस्ट्रेशन फॉर्म्स का डिजिटलीकरण, सरल PAN-TAN रजिस्ट्रेशन, कंप्लायंसेस का सेल्फ-सर्टिफिकेशन, SPICe+ जैसी प्रक्रियाओं का सरलीकरण और IP फाइलिंग को फास्ट-ट्रैक करने जैसे सुधारों ने इस इकोसिस्टम को और सशक्त किया है।

इन आसान लेकिन प्रभावशाली रिफॉर्म्स ने एंट्री-कॉस्ट को घटाया है, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया है और इनमें लगने वाले समय को कम किया है।

वर्ष 2016 में, जहां सिर्फ 500 स्टार्टअप्स थे, आज 1.61 लाख से अधिक मान्यता-प्राप्त स्टार्टअप्स हैं। इनमें से 50% से अधिक स्टार्टअप Tier-II और Tier-III शहरों में हैं और 73,000 से अधिक में कम-से-कम एक महिला निदेशक है। बीते कुछ सालों में इनमें से ही 100 से ज्यादा स्टार्टअप्स अब $1 बिलियन से भी ज्यादा मूल्यांकन वाले उद्यम यानि यूनिकॉर्न्स बन गए हैं। इन प्रोसेस रिफॉर्म्स ने भारत के हर कोने में इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप की आकांक्षा को और मजबूती दी है।

औपचारिक व्यवस्था में लाकर MSMEs को दी मजबूती

26 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देने वाला MSME सेक्टर, जो भारत के कुल निर्यात में 45% से ज्यादा योगदान देता है, रिफॉर्म्स का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है। उद्यम पोर्टल ने 3 करोड़ से ज्यादा MSMEs को फॉर्मल इकॉनमी से जोड़ा है, जिससे उन्हें संस्थागत लोन, सरकारी योजनाओं और खरीद-बिक्री के प्लेटफॉर्म्स का एक्सेस मिला है।

इसी दिशा में सरकारी खरीद में पारदर्शिता लाने के लिए Government e-Marketplace (GeM) प्लेटफॉर्म एक मजबूत कदम रहा है। वित्त वर्ष 2025 में (फरवरी तक) GeM पोर्टल ने 5.4 लाख करोड़ रुपये का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) दर्ज किया, जिसमें 38% हिस्सा सूक्ष्म (Micro) और लघु (Small) उद्यमों से आया। SWAYATT योजना के अंतर्गत 1.8 लाख से अधिक महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों को GeM पोर्टल पर रजिस्टर किया गया, जो इन रिफॉर्म्स द्वारा सबकी भागीदारी की भावना को दर्शाता है।

इन कदमों ने MSME सेक्टर की भागीदारी को और वृहद रूप दिया है और बिजनेस इकोसिस्टम को अधिक सुगम और सहभागी बनाया है।

एंटरप्रेन्योर्स के लिए पूंजी की बेहतर उपलब्धता

मोदी सरकार ने उद्यमियों के लिए सिर्फ रिफॉर्म्स ही नहीं, बल्कि पूंजी की उपलब्धता भी सुनिश्चित की है। SIDBI द्वारा संचालित Fund of Funds for Startups (FFS) के अंतर्गत लगभग 1,200 स्टार्टअप्स में निवेश हुआ, जिससे 2 लाख से अधिक नौकरियों का सृजन संभव हुआ है। स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना (SISFS) ने 213 इनक्यूबेटर्स के माध्यम से 2,647 स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान की है, जिससे 16,000 से ज्यादा नौकरियां सृजित हुईं।

इसी दिशा में Credit Guarantee Scheme for Startups (CGSS) ने 604 करोड़ रुपए के 260 से ज्यादा लोन स्वीकृत किए, जिनमें कई महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स भी शामिल हैं। ये सभी प्रयास भारत में एक सशक्त, नवोन्मेषी और सुदृढ़ स्टार्टअप इकोसिस्टम को गति दे रहे हैं।

भारत के रिफॉर्म्स को वैश्विक मान्यता

मोदी सरकार द्वारा किए गए प्रोसेस रिफॉर्म्स का प्रभाव ग्लोबल इंडेक्सेस में भारत की बढ़ती रैंकिंग में स्पष्ट दिखता है। आज भारत Global Retail Development में 1st, Global Unicorn Index में 3rd, Global Manufacturing Output में 5th और Global Innovation Index में 39th स्थान पर है। इससे भारत की छवि एक सुधार-आधारित भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार इकॉनमी के रूप में सुदृढ़ हुई है।

एक औद्योगिक-क्रांति के लिए तैयार भारत

पिछले 11 वर्षों की प्रगति यह दर्शाती है कि प्रोसेस रिफॉर्म्स कैसे पारदर्शी और जवाबदेह इकॉनोमिक गवर्नेंस को संभव बनाते हैं। कंप्लायंस को सरल बनाना, सेवाओं को डिजिटाइज करना, और प्रक्रियागत देरी को कम करना—ये सभी कदम भारत को एक सुदृढ़ और समावेशी अर्थव्यवस्था की ओर ले जा रहे हैं।

ये रिफॉर्म्स निश्चित ही विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने की नींव बनेंगे—एक ऐसा भारत जहां उद्यमों को मजबूती मिले, सबके लिए सामान अवसर उपलब्ध हों और सतत विकास और व्यापक हो।