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मंच पर विराजमान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, हम सबके मार्गदर्शक आदरणीय राजनाथ सिंह जी, गुजरात प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान आर. सी. फलदू जी, श्रीमान रूपाला जी, श्री वी. सतीश जी, कैप्टन अभिमन्यु जी, अमितभाई शाह, स्मृति बहन, मंत्री परिषद के मेरे सभी साथी, संसद सदस्य श्री, पार्टी के सभी वरिष्ठ साथी और गुजरात के कोने-कोने से आए हुए पार्टी के सभी कार्यकर्ता भाइयों और बहनों..!

ज 6 अप्रैल है। भारतीय जनता पार्टी के रुप में हमारी विकास यात्रा के 32 वर्ष पूर्ण हो करके 33 वें वर्ष में हम लोग प्रयाण कर रहे हैं। भाइयों-बहनों, 33 वर्ष की यात्रा पूरे हिन्दुस्तान के अंदर एक नई आशा को जन्म देने वाली यात्रा है। भारतीय जनता पार्टी का जन्म उस समय हुआ था जब कुछ निजी स्वार्थ वाले तत्व अपने निहित स्वार्थ के खातिर नए नए सवाल उठा कर के देश में कोई आल्टरनेट पनपे नहीं उस षडयंत्र के शिकार हुए थे। एक सौ से ज्यादा सदस्य वाले सदन में आए दिन भारतीय जनता पार्टी को अपमानित करने का प्रयास होता था। लोकतंत्र की मर्यादाओं को तोड़ा जाता था और उस पीड़ा में से, उस दर्द में से सत्ता के मार्ग को छोड कर के जनता के बीच जाने का फैसला भारतीय जनता पार्टी ने लिया था और तब से हमारे वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में, कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम से इस पार्टी ने जनसामान्य की आशा-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए प्रयास प्रारंभ किया था। भारतीय जनता पार्टी का जन्म सत्ता भूख में से नहीं हुआ है, भारतीय जनता पार्टी का जन्म सत्ता के दलालों की भलाई करने के लिए नहीं हुआ है। इस पार्टी का जन्म देश के कोटी-कोटी नागरिकों के भाग्य को बदलने के लिए हुआ है, कल्याण के लिए हुआ है। और जब कोई अच्छा काम करता है तो रूकावटें भी कम नहीं आती है। भाइयों-बहनों, कभी मैं केरल की तरफ देखता हूँ। क्या कारण है कि साम्यवादियों के लगातार हमलों के बावजूद भी, हमारे सैंकड़ों कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतारने के बावजूद भी, चाहे केरल हो या बंगाल हो भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता जीत मिले या ना मिले, जिंदगी खपा देने में कभी कमी नहीं रखता..! क्या कारण है कि सत्ता के गलियारों से दूर-दूर का नाता नहीं होने के बावजूद भी, एक भारत माता की जय के लिए अपना जीवन न्यौछावर करने वाले लक्षावती लोग आज भारतीय जनता पार्टी का कमल का झंडा उठा कर के चल रहे हैं..!

मैं दिल्ली में बैठे हुए शासकों को चेतावनी देता हूँ कि अगर आप सोचते हैं कि आपकी सी.बी.आई. के हमले भारतीय जनता पार्टी को निराश करेंगे, तो आप सोचने में गलती कर रहे हैं। आपको लगता है कि अपने गर्वनरों के माध्यम से आप भारतीय जनता पार्टी की सरकारों को परेशान करोगे, तो आप लिख कर रखिए, जहाँ भाजपा की सरकारें हैं, वहाँ की जनता दिल्ली सरकार के और काँग्रेस पार्टी के इस रवैये का चुन-चुन के जवाब देती है और देती रहेगी..! सारी संवैधानिक संस्थाओं को भारतीय जनता पार्टी की सरकारो को परेशान करना, भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को परेशान करना, भारतीय जनता पार्टी के दल को परेशानियों में डालना, इसी के लिए उपयोग में लाया जाता है। कांग्रेस के मित्रों, ये दिल्ली में आपकी सत्ता का नशा लंबे दिनों तक रहने वाला नहीं है..!

भाइयों-बहनों, कांग्रेस में और भारतीय जनता पार्टी में बहुत बड़ा अंतर है। भारतीय जनता पार्टी की सोच और कांग्रेस पार्टी की सोच के बीच कभी कोई मेल नहीं हो सकता। भाजपा के चरित्र और कांग्रेस के चरित्र की कभी कोई तुलना नहीं कर सकता। भाइयो-बहनों, कांग्रेस जिन पर आस लगा कर बैठी है, जिनके शब्द कांग्रेस की नीति माने जाते हैं, ऐसे एक नेता का मैंने दो दिन पूर्व मैंने एक भाषण सुना। मित्रों, मुझे बहुत गहरा धक्का लगा, मन को एक पीड़ा हुई के क्या ये लोग देश के विषय में ऐसा सोचते हैं..? भाइयों-बहनों, कांग्रेस के एक नेता कह रहे हैं और कांग्रेस पार्टी की सोच को प्रकट कर रहे हैं कि ये भारत देश मधुमक्खियों का छत्ता है। मेरे कांग्रेस के मित्रों, आपके लिये ये देश मधुमक्खी का छाता हो सकता है, हमारे लिए ये देश हमारी माँ है..! ये भारत हमारी माता है, इसके सौ करोड देशवासी हमारे भाई-बहन हैं..! ये पवित्र भूमि है, ये ऋषि-मुनियों की भूमी है। अटल बिहारी वाजपेयी कहा करते थे कि यहाँ का कंकर-कंकर हमारे लिए शंकर है। अटल बिहारी बाजपेयी कहा करते थे कि गंगा जी में बहती हुई हमारी हड्डी को कान में लाकर सुनोगे तो उस हड्डी में से भी आवाज आएगी, भारत माता की जय..! ये हमारे संस्कार है। हमारे लिए ये माँ है माँ..! इस माँ की पीड़ा हम देख नहीं सकते हैं। ये हमारी माँ है, जिसके संतानों का दु:ख-दर्द हमारी चिंता का कारण है। आपके लिए ये मधुमक्खी का छाता हो सकता है, हमारे लिए तो हमारी माँ है..! और मेहरबानी करके कांग्रेस के मित्रों, हमारी भारत माता का अपमान मत करो..! आपको अगर हिन्दुस्तान के लोगों की भाषा समज नहीं आती है तो कहीं से सीखा करो, लेकिन आपके अज्ञान के कारण मेरे देश की संस्कृति और परंपरा को बर्बाद करने का पाप मत करो..! भाइयो और बहनों, मैं कभी किसी नेता के भाषण पर समय बर्बाद नहीं करता, क्योंकि वो ध्यान देने योग्य होते भी नहीं हैं। लेकिन जब हमारी भावनाओं पर चोट पहुंचाई जाती है तब इस माँ के कल्याण के लिए जीवन खपाने वाले लक्षावती कार्यकर्ता को पीड़ा होनी बहुत स्वाभाविक है।

भाइयों-बहनों, मैं हैरान हूँ..! इस देश में पानी की समस्या है इसका देश के नेताओं को अता-पता भी नहीं है। आप पर हमें दया आती है..! हमारे गुजरात कांग्रेस के नेता पानी को लेकर के गुजरात के किसानों को, गुजरात के नागरिकों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। मैं कांग्रेस के मित्रों को प्रार्थना करता हूँ, आवाहन भी करता हूँ कि अगर आपको गुजरात के किसानों की इतनी चिंता है, अगर आपको गुजरात के गांव में पानी की चिंता है और सच्चे दिल से चिंता है तो आप समय बर्बाद किये बिना दिल्ली की आपकी सरकार पर दबाव डालो और सरदार सरोवर डेम की ऊंचाई का काम जो रुका हुआ है, उसको पहले पूरा करो..! मेरे पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं, गाँव-गाँव से आवाज उठनी चाहिए, नर्मदा डैम को पूर्ण करने के लिए अब हम ज्यादा इंतजार नहीं करेंगे..! हम दिल्ली के तख्त के साथ लड़ाई लड़ेंगे और कांग्रेस के लोगों को हर गली-मौहल्ले में जवाब देना पड़ेगा।

भाइयो-बहनों, कांग्रेस पार्टी से सुधरने की अपेक्षा मत करना, वो कभी नहीं सुधर सकते..! इस चुनाव में गुजरात की जनता ने जिस प्रकार से कांग्रेस पार्टी को सजा दी है, जिस प्रकार से उनके एक-एक दिग्गज नेताओं को गुजरात की जनता ने परास्त कर दिया है... जिस भाषा का पिछले पांच साल से वे प्रयोग कर रहे थे, जिस झूठ के सहारे गुजरात की जनता को गुमराह करने का रात-दिन प्रयास रहे थे, जिस गंदी गालियों का उपयोग किया जा रहा था... गुजरात की जनता ने उस भाषा को बोलने वालों को चुन-चुन कर साफ कर दिया। आशा थी कि वे समझेंगे, सुधरेंगे और लोकतंत्र की मार्यादाओं का पालन करेंगे, लेकिन भाइयों और बहनों, इस सरकार को अभी तो कल 101 दिन हुए हैं, लेकिन 100 दिन भी वे इंतजार करने को तैयार नहीं हैं, उनकी मन:स्थिति क्या होगी इसका आप अंदाजा लगा सकते हो..!

भाइयों-बहनों, भारतीय जनता पार्टी विकास के मंत्र को लेकर चली है। आज गुजरात की धरती पर हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष पधारे हैं तब मैं गुजरात की जनता की ओर से उनसे कहना चाहता हूँ कि आज चारों तरफ आपने इतना बड़ा दिल बताया है, सार्वजनिक जीवन में इतनी ऊंचाई का अनुभव करवाया है, मेरे जैसे छोटे कार्यकर्ता को आपने बहुत बड़ा बड़प्पन दिया है। भाइयों-बहनों, राजनीति में ये छोटी घटना नहीं होती है। अपने साथी को इस ऊंचाई तक ले जाने के लिए बहुत बड़ा दिल लगता है..! लेकिन मैं आज कहना चाहता हूँ कि आपने जो मुझ मान-सम्मान दिया है, आपने जो मेरी इज्जत की है, देश भर के कार्यकर्ताओं के दिलों में मेरी जगह बनाने के लिए आपने कोई कसर नहीं छोड़ी है, लेकिन ये यश भले ही मोदी को मिलता होगा, नाम भले ही मोदी का लिया जाता होगा, लेकिन इस यश के हकदार ये सारे मेरे भाई-बहन हैं, मेरे कार्यकर्ता हैं..! मेरे कार्यकर्ता भाइयों-बहनों, आपने परिश्रम ना किया होता, आपने विकास में विश्वास ना किया होता, आपने इस देश की भलाई के मंत्र को चरित्रार्थ ना किया होता, तो नरेन्द्र मोदी को कौन पहचानने वाला था..? ये पहचान आपके कारण बनी है, आपके पुरषार्थ के कारण बनी है, आपके त्याग और तपश्चर्या के कारण बनी है। और आज जब भारतीय जनता पार्टी का जन्म दिन है मैं आप सब का अभिनंदन करता हूँ, आप सबको वंदन करता हूँ..! मेरे कार्यकर्ता भाइयो-बहनों, मैंने पहले ही दिन जब से कार्य संभाला है, उस दिन से मैंने कहा है, आज मैं दोबारा दोहराता हूँ कि मैं परिश्रम में कोई कमी नहीं रखूँगा, मैं बद इरादे से कोई पाप नहीं करूंगा..! भाइयों-बहनों, जब मैं कहता हूँ कि इंडिया फर्स्ट, तो उस लक्ष्य से, उस मार्ग से भारतीय जनता पार्टी कभी चलित नहीं हो सकती। हमारे लिए दल से बड़ा देश है। हम देश के लिए जीने-मरने वाले लोग हैं। गली-मौहल्ले में भी काम करेंगे लेकिन भारत माता के लिए करेंगे। हम गुजरात की सेवा करते हैं लेकिन हमारा तो मंत्र है, ‘भारत के विकास के लिए गुजरात का विकास’..! हम सबको इस माँ भारती के कल्याण के लिए, निराशा की गर्त में डूबे हुए सामाज में एक नया विश्वास पैदा करने के लिए अपने इस कार्य को हमें करते रहना है।

भाइयो-बहनों, भारतीय जनता पार्टी आज पूरे देश में एक आशा की किरण बनी हुई है। और ये बात पॉलिटिकल पंडित हैं वो जानें। पॉलिटिकल पार्टीयों का जन्म होने के बाद अस्सी-अस्सी साल तक उन्हें सत्ता स्थान पर पहुंचने का मौका नहीं मिला हो, ऐसे दुनिया में कई उदाहरण हैं। ये भारतीय जनता पार्टी है। इतना बड़ा देश, इतना बड़ा लोकतंत्र, लेकिन जन्म से जवानी की यात्रा पूरी होने से पहले तक पहुंचते-पहुंचते, इस देश की जनता ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हमें सेवा करने का मौका दिया था। इंग्लैंड की लेबर पार्टी को अस्सी साल तक मौका नहीं मिला था। भारतीय जनता पार्टी को जन्म से जवानी की यात्रा पूरी होने से पहले देश की जनता ने उस पर अमी वर्षा कर दी थी। आप कल्पना कर सकते हो कि लोग कांग्रेस से कितने तंग आ गए हैं, लोग देश की तबाही से कितने तंग आ चुके हैं..! और तब जा करके भाइयो-बहनों, भारत माँ का भाग्य बदलना ये भारतीय जनता पार्टी के हर कार्यकर्ता का दायित्व है। स्वामी विवेकानंद जी की स्मृती में हम ये 150 वां वर्ष मना रहे हैं। विवेकानंद जी का सपना पूरा करने के लिए देशवासियों को बाहर से नई प्रेरणा की जरूरत नहीं है। विवेकानंद जी के शब्द काफी है, विवेकानंद जी का संदेश काफी है, विवेकानंद जी का जीवन काफी है..! उससे प्रेरणा लेकर के एक नए उमंग और विश्वास के साथ आगे बढ़ना है।

भाइयो-बहनों, आज भारतीय जनता पार्टी जहाँ भी पहुँची है, गुजरात में भारतीय जनता पार्टी ने जो स्थिति पैदा की है वो किसी एक व्यक्ति के कारण नहीं है। पीढ़ियाँ की पीढ़ियाँ बीत गई, परिवार के परिवार इस पार्टी के लिए खप गए हैं। एक जमाना था, अगर मंहगाई के लिए भाजपा के कार्यकर्ता जुलूस निकालते थे तो 21-21 दिन की सजा हुआ करती थी। पूरा परिवार 21-21 दिन तक गुजरात की जेलों में रहने के लिए मजबूर हुआ करता था। ऐसे अनेक कार्यकर्ताओं के परिश्रम के कारण ये पार्टी यहाँ पहुँची है। इस पार्टी को यहाँ तक पहुँचाने वाले, अपने परिवारों को खपा देने वाले, अपनी जवानी को खपा देने वाले उन लक्षावधी कार्यकर्ताओं का मैं आज पुण्य स्मरण करता हूँ, उनका अभिनंदन करता हूँ, उनको वंदन करता हूँ..!

भाइयो-बहनों, एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आज हमको करना है। हम यहाँ से संकल्प लेकर के जाने वाले हैं। हमारे पार्टी के पूर्व अध्यक्ष श्रीमान् रूपाला जी हम सबको एक संकल्प दिलाने वाले हैं। लेकिन इस संकल्प की भी एक विशेषता है। हमारे हाथ में एक मोमबत्ती दी गई है, जो जलानी है। जब मोमबत्ती जलाएंगे तो ये सारी रोशनी बंद होने वाली है। भाइयों-बहनों, ये प्रकाश की ओर जाने का संदेश है और घर-घर, गाँव-गाँव कमल खिलाने का संदेश है। और जो लोग भारतीय जनता पार्टी को दिन-रात गाली देते हैं, नई-नई डिक्शनरी के शब्द निकालते हैं वे कान खोल कर के सुन लें, आप भारतीय जनता पार्टी पर जितना ज्यादा कीचड़ उछालोगे कमल उतना ही ज्यादा खिलने वाला है। उस कमल के संदेश को ले कर के आईये भाइयो-बहनों, आज अपनी पार्टी के 33 वर्ष की यात्रा का गौरव करते हुए एक नई यात्रा का शुभ संकल्प करके चलें। मेरी आप सब से प्रार्थना है कि आप सबको जो मोमबत्ती दी गई है उसको जलाया जाए और यहाँ की व्यवस्था वालों से मेरी प्रार्थना है कि स्टेडियम में और लाइटें बंद करके इस नजारे का अनुभव किया जाए और जब तक ये विधि पूरी नहीं होती है, हम अपना स्थान छोड़ेगें नहीं, हम जाएंगे नहीं। मेरे साथ बोलिए -

भारत माता की जय..!

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Saving every drop of water, preventing any kind of wastage of water should become an integral part of our lives: PM Modi

माझ्या प्रिय देशबांधवानो, नमस्कार !

 

दोन दिवसांपूर्वीची काही अद्भुत छायाचित्रे, काही अविस्मरणीय क्षणांच्या ताज्या आठवणी आताही माझ्या डोळ्यांसमोर आहेत. त्यामुळे, यावेळच्या ‘मन की बात’ ची सुरुवात याच क्षणांनी करुया. टोक्यो ऑलिंपिक मध्ये भारतीय खेळाडूंना तिरंगा घेऊन चालतांना बघून केवळ मीच नाही, तर संपूर्ण देश रोमांचित झाला होता. त्याक्षणी, संपूर्ण देशाने जणू एकत्र येत, आपल्या या योद्ध्यांना म्हटले -

विजयी भव ! विजयी भव !

जेव्हा हे खेळाडू भारतातून गेले, त्याआधी मला त्यांच्याशी बोलण्याची, त्यांचे आयुष्य जाणून घेण्याची आणि देशालाही ते सांगण्याची संधी मिळाली होती. हे खेळाडू, आयुष्यातील अनेक आव्हानांवर मात करत, इथे पोहोचले आहेत.

आज त्यांच्याजवळ आपले प्रेम आणि सर्वांच्या पाठिंब्याची ताकद आहे- त्यामुळे चला, आपण सगळे मिळून आपल्या या सर्व खेळाडूंना शुभेच्छा देऊया, त्यांचा उत्साह वाढवूया. सोशल मीडियावर देखील ऑलिंपिक खेळाडूंना पाठिंबा देण्यासाठी आता व्हिक्टरी पंच कॅम्पेन म्हणजेच विजयी ठोसा अभियान सुरु झाले आहे. आपणही आपल्या चमू सोबत आपला व्हिक्टरी पंच शेयर करा, भारतासाठी चीयर करा !

 मित्रांनो, जो देशासाठी तिरंगा हातात घेतो, त्याच्या सन्मानार्थ आपल्या भावना अभिमानाने उचंबळून येणं स्वाभाविक आहे. देशभक्तीची हीच भावना आपल्या सर्वांना एकमेकांशी बांधून ठेवते. उद्या, म्हणजेच 26 जुलै रोजी, ‘कारगिल विजय दिवस’ही आहे. कारगिलचे युद्ध भारतीय सैन्याच्या शौर्य आणि संयमाचे असे प्रतीक आहे, जे संपूर्ण जगाने पहिले आहे. यावर्षी हा गौरवास्पद दिवस देखील अमृत महोत्सवाच्या दरम्यान साजरा केला जाणार आहे, त्यामुळे तो आणखीनच विशेष आहे. माझी अशी विनंती आहे की तुम्ही सर्वांनी कारगिल युद्धाची रोमांचकारी कथा नक्की वाचा. कारगिलच्या योद्ध्यांना आपण सर्व आधी वंदन करूया.

मित्रांनो

यावर्षी, 15 ऑगस्ट रोजी देश आपल्या स्वातंत्र्याच्या 75 व्या वर्षात प्रवेश करत आहे. आपले हे खूप मोठे भाग्य आहे की जे स्वातंत्र्य मिळवण्यासाठी , देशाने कित्येक शतके वाट पहिली, त्या देशाच्या स्वातंत्र्याला 75 वर्षे पूर्ण होत असतांनाच्या क्षणांचे आपण साक्षीदार बनणार आहोत.

आपल्याला आठवत असेल, स्वातंत्र्याचा हा अमृत महोत्सव आपण 12 मार्चपासून महात्मा गांधींच्या साबरमती आश्रमातून केली होती. याच दिवशी, बापूंच्या दांडी यात्रेचे पुनरुज्जीवन करण्यात आले होते. तेव्हापासून, जम्मू-काश्मीर पासून ते पुडदूचेरीपर्यंत, गुजरातपासून ते ईशान्येकडील राज्यांपर्यंत अमृत महोत्सवासही संबंधित कार्यक्रम होत आहेत. अशा अनेक घटना, ज्यांचे योगदान तर खूप आहेच, मात्र त्यांची म्हणावी तेवढी चर्चा झाली नाही,- आज लोक त्यांच्याविषयीही जाणून घेत आहेत. आता जसे की मोईरांग डे चेच बघा ना! माणिपूरची छोटीशी वस्ती मोईरांग, कधीकाळी नेताजी सुभाषचंद्र बोस यांच्या भारतीय राष्ट्रीय लष्कर म्हणजे आयएनएचे प्रमुख केंद्र होते. इथे स्वातंत्र्याच्या पहिल्याच लढाईआधी, आयएनएच्या शौकत मलिक जी यांनी भारताचा झेंडा फडकवला होता. या अमृत महोत्सवादरम्यान, 14 एप्रिल रोजी याच मोईरांग मध्ये पुन्हा एकदा तिरंगा फडकवण्यात आला. असे कितीतरी स्वातंत्र्य संग्राम सैनिक आणि महापुरुष आहेत ,ज्यांचे आपण यानिमित्ताने स्मरण करत आहोत. सरकार आणि सामाजिक संस्थांकडूनही सातत्याने याच्याशी संबंधित कार्यक्रम आयोजित केले जात आहेत. यंदाच्या 15 ऑगस्टलाही असेच एक आयोजन होणार आहे. हा एक प्रयत्न आहे- राष्ट्रगीताशी संबंधित.  सांस्कृतिक मंत्रालयाचा प्रयत्न आहे की त्या दिवशी, जास्तीत जास्त भारतीयांनी एकाच वेळी राष्ट्रगीत गायचे. यासाठी एक संकेतस्थळ देखील तयार करण्यात आले आहे- Rashtragaan.in

 

या संकेतस्थळाच्या मदतीने आपण राष्ट्रगीत गाऊन ते ध्वनिमुद्रित करु शकाल आणि या अभियानात सहभागी होऊ शकाल. मला आशा आहे, आपण या विशेष उपक्रमात नक्की सहभागी व्हाल. अशाच प्रकारचे अनेक अभियान, अनेक उपक्रम आपल्याला येत्या  काळात बघायला मिळणार आहेत. “अमृत महोत्सव’ हा कुठल्या सरकारचा कार्यक्रम नाही, तर हा कोट्यवधी भारतवासियांचा कार्यक्रम आहे. प्रत्येक स्वतंत्र आणि कृतज्ञ भारतीयाने आपल्या स्वातंत्र्यसैनिकांना केलेले हे वंदन आहे. या महोत्सवाच्या मूळ भावनेचा विस्तार तर बराच मोठा आहे. –ही भावना आहे, आपल्या स्वातंत्र्यसैनिकांच्या मार्गावरुन चालणे, त्यांच्या स्वप्नातल्या देशाची उभारणी करणे. जशाप्रकारे, देशाला स्वातंत्र्य मिळवून देण्यासाठी ते सगळे झपाटलेले लोक एकत्र होऊन लढले होते, तसेच आपल्याला देशाच्या विकासासाठी एकत्र यायचे आहे. आपल्याला देशासाठी जगायचे आहे, देशासाठी काम करायचे आहे. आणि या प्रवासात अगदी छोटी छोटी कामेदेखील मोठा प्रभाव पाडू शकतात. आपली दैनंदिन कामे करतांनाही आपण राष्ट्र निर्मितीचे काम करु शकतो. जसे की ‘व्होकल फॉर लोकल’. आपल्या देशातील स्थानिक उद्योजक, कलाकार, शिल्पकार, विणकर यांना आधार देणे, हे आपल्या रोजच्या सवयीचा भाग बनले पाहिजे. सात ऑगस्ट रोजी येणारा ‘राष्ट्रीय हातमाग दिवस’ आपल्यासाठी अशी एक संधी आहे ज्यावेळी आपण प्रयत्नपूर्वक हे काम करु शकतो. राष्ट्रीय हातमाग दिनामागेही खूप मोठी ऐतिहासिक पार्श्वभूमी आहे.याच दिवशी, 1905 साली स्वदेशी आंदोलनाची सुरुवात झाली होती.  

मित्रांनो,

आपल्या देशातील ग्रामीण आणि आदिवासी भागात, हातमाग, उत्पन्नाचे एक महत्त्वाचे साधन आहे. हे एक असे क्षेत्र आहे, ज्याच्याशी, लाखों महिला, लाखो विणकर, लाखो शिल्पकार जोडलेले आहेत. आपले छोटे छोटे प्रयत्न, वीणकरांमध्ये एक नवी उमेद जागवू शकतात. आपण स्वतः काही ना काही तरी खरेदी करा, आणि आपले अनुभव इतरांनाही सांगा. जेव्हा आपण स्वातंत्र्याचा अमृत महोत्सव साजरा करत आहोत, अशावेळी एवढे काम करणे आपली निश्चितच जबाबदारी आहे, मित्रांनो !

आपण पहिले असेल 2014 पासूनच आपल्या ‘मन की बात’ मध्ये आपण नेहमीच खादीवर चर्चा करतो. आपल्याच प्रयत्नांमुळे आज देशात खादीची विक्री कित्येक पटीने वाढली आहे. कोणी कधी विचार केला असेल का, की खादीच्या कुठल्या दुकानात एकाच दिवशी, एक कोटींपेक्षा अधिक विक्री होऊ शकते ! मात्र, आपण हे देखील करुन दाखवले आहे. आपण जेव्हाही कधी खादीचे कोणतेही उत्पादन खरेदी करता, तेव्हा त्याचा लाभ, आपल्या गरीब  वीणकर बंधू-भगिनींना होतो.

यामुळेच, खादीची खरेदी करणे एकप्रकारे लोकसेवाही आहे आणि देशसेवाही आहे. माझी आपल्याला आग्रही विनंती आहे, की आपण सर्व, माझे प्रिय बंधू-भगिनी, ग्रामीण भागात तयार होणाऱ्या हातमागाच्या वस्तू जरूर खरेदी करा. आणि त्या वस्तू #MyHandloomMyPride वर शेयर करा.  

मित्रांनो, जेव्हा आपण स्वातंत्र्य आंदोलन आणि खादीविषयी बोलतो आहोत, त्यावेळी बापूंचे स्मरण होणे स्वाभाविक आहे. जसे बापूंच्या नेतृत्वाखाली ‘भारत छोडो आंदोलन’ झाले होते, तसेच आज प्रत्येक भारतीयाला ‘भारत जोडो’ आंदोलनाचे नेतृत्व करायचे आहे. हे आपले कर्तव्य आहे, की आपण आपले काम अशाप्रकारे करावे, जे विविधतांनी भरलेल्या आपल्या भारताला एकत्र आणण्यासाठी उपयुक्त ठरेल. चल तर मग, आपण अमृत महोत्सवानिमित्त हा अमृत संकल्प  घेऊया, की देशच कायम आपली सर्वात मोठी ‘आस्था’ आणि सर्वात मोठी प्राथमिकता असेल. “Nation First, Always First”, हा मंत्र घेऊनच आपल्याला पुढे वाटचाल करायची आहे.

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो, आज मी ‘मन की बात’ ऐकणाऱ्या माझ्या युवा मित्रांचे विशेष आभार मानू इच्छितो. अगदी काही दिवसांपूर्वी, माय गव्ह च्या वतीने ‘मन की बात’ च्या श्रोत्यांविषयी एक अध्ययन करण्यात आले होते. या अध्ययनात असे आढळले की ‘मन की बात’ साठी संदेश आणि सूचना पाठवणाऱ्या लोकांमध्ये प्रामुख्याने कोणते लोक आहेत?

 तर अध्ययनातून ही माहिती पुढे आली की, मला संदेश आणि सूचना पाठवणाऱ्या लोकांमध्ये सुमारे 75 टक्के लोक 35 वर्षांपेक्षा कमी वयाचे आहेत. म्हणजेच, भारताच्या युवा शक्तिच्या सूचना ‘मन की बात’ ला दिशा देत आहेत. मी हा खूप चांगला संकेत आहे, असे मानतो. ‘मन की बात’ हे एक असे माध्यम आहे, जिथे सकारात्मकता आहे, संवेदनशीलता आहे. ‘मन की बात’ मध्ये आपण अनेक सकारात्मक गोष्टी करतो. या कार्यक्रमांचे स्वरूप एकोप्याचे आहे. सकारात्मक विचार आणि सूचनांसाठी, भारताच्या युवकांची सक्रियता मला आनंदीत करते आहे. मला याचाही आनंद आहे, की मन की बात च्या माध्यमातून मला युवकांचे मन जाणण्याची देखील संधी मिळते आहे.

मित्रांनो, आपल्याकडून मिळालेल्या सूचना, हीच ‘मन की बात’ ची खरी ताकद आहे. आपल्या सूचनाच, ‘मन की बात’ च्या माध्यमातून भारताची विविधता प्रकट करत असतात. भारतवासियांच्या सेवा आणि त्यागाचा सुगंध, चारी दिशांना पसरवत असतात. आपल्या परिश्रमी युवकांची संशोधने सर्वाना प्रेरित करत असतात. ‘मन की बात’ मध्ये आपण कितीतरी प्रकारच्या कल्पना पाठवत असता.आपण सर्वांवर तर चर्चा करु शकत नाही, मात्र त्यातील बहुतांश कल्पना मी संबंधित विभागांना नक्कीच पाठवत असतो. जेणेकरुन, त्या कल्पना प्रत्यक्षात अमलात आणल्या जाव्यात.

मित्रांनो, मी आज आपल्याला साई-प्रनीथ यांच्या प्रयत्नाविषयी सांगणार आहे. साई-प्रनीथ जी, एक सॉफ्टवेअर इंजिनियर आहेत, आंध्रप्रदेशचे रहिवासी आहेत. गेल्या वर्षी त्यांनी पहिले की त्यांच्या भागात खराब हवामानामुळे अनेक शेतकऱ्यांचे खूप नुकसान झाले. हवामान शास्त्र विषयात त्यांना पूर्वीपासूनच रस होता, आणि म्हणूनच, त्यांनी आपल्या या रुचिचा आणि कौशल्याचा वापर शेतकऱ्यांच्या कल्याणासाठी घेण्याचा निर्णय घेतला. ते आता वेगवेगळ्या डेटा स्त्रोतांकडून हवामानाचा डेटा विकत घेतात, त्याचे विश्लेषण करतात आणि स्थानिक भाषेत, वेगवेगळ्या माध्यमांच्या मदतीने शेतकऱ्यांपर्यंत आवश्यक ती माहिती पोचवतात. हवामानाच्या माहितीशिवाय, प्रणीथजी वेगवेगळ्या हवामानात लोकांनी काय करायला हवे, याचेही मार्गदर्शन करतात. विशेषतः पूरापासून संरक्षण करण्यासाठी किंवा वादळ  आणि वीज पडल्यावर, त्यापासून कसे संरक्षण करायचे, याची माहितीही ते लोकांना देतात.

मित्रांनो,

एकीकडे, या तरुण सॉफ्टवेअर अभियंत्याचा हा प्रयत्न मनाला स्पर्शून जाणारा आहे. तर दुसरीकडे आमच्या एका मित्राकडून होणारा तंत्रज्ञानाचा वापरही, आपल्याला थक्क करुन सोडेल.

 हे मित्र आहेत, ओडिशाच्या संबलपूर जिल्ह्यात एका गावात राहणारे श्री इसाक मुंडा जी. ईसाक जी एकेकाळी रोजंदारी स्वरुपात काम करत होते, मात्र आता ते इंटरनेटवर गाजत आहेत. त्यांच्या यू ट्यूब चॅनेल मधून ते उत्तम पैसे कमावत आहेत. ते आपल्या व्हिडिओ मधून स्थानिक पदार्थ, पारंपरिक स्वयंपाक बनवण्याच्या पद्धती, आपले गाव, आपली जीवनशैली, कुटुंब आणि आहारविहाराच्या सवयी, अशा गोष्टी दाखवत असतात. एक YouTuber म्हणून त्यांनी आपला प्रवास, मार्च 2020 पासून सुरु केला होता. त्यावेळी, त्यांनी ओडिशातीळ सुप्रसिद्ध स्थानिक पदार्थ, ‘पखाल’ शी संबंधित, एक व्हिडिओ पोस्ट केला होता. तेव्हापासून त्यांनी शेकडो व्हिडिओ पोस्ट केले आहेत. त्यांचा हा प्रयत्न अनेक कारणांनी सर्वात वेगळा आहे. विशेषतः यासाठी की या उपक्रमामुळे शहरात राहणाऱ्या लोकांना ती जीवनशैली बघण्याची संधी मिळते, ज्याविषयी त्यांना विशेष काही माहिती नसते. ईसाक मुंडा जी संस्कृती आणि पदार्थ या दोघांना एकत्रित घेऊन, त्याचा उत्सव साजरा करतात आणि त्यातून आपल्या सर्वांना प्रेरणाही देतात.

मित्रांनो, आता आपण जेव्हा तंत्रज्ञानाविषयी बोलतो आहोत, तेव्हा मी आणखी एका रोचक विषयावर चर्चा करु इच्छितो.

आपण अलीकडेच वाचले असेल, पहिले असेल की आयआयटी मद्रास च्या माजी विद्यार्थ्यानी स्थापन केलेल्या एक स्टार्ट-अप ने एक थ्री-डी प्रिंटेड हाऊस तयार केले आहे. या थ्री-डी प्रिंटिंग ने घराची निर्मिती कशी शक्य झाली? तर, या स्टार्ट अप ने सर्वात आधी, थ्री-डी प्रिंटर मध्ये एक त्रिमीतीय चित्र भरले आणि एका विशिष्ट प्रकारच्या काँक्रीटच्या माध्यमातून, थरावर थर चढवत, एक  थ्री-डी संरचना तयार केली. आपल्याला हे जाणून अत्यंत आनंद होईल, की देशात अशाप्रकारचे अनेक प्रयोग सुरु आहेत. एक काळ असा होता, जेव्हा छोट्या छोट्या बांधकामालाही कित्येक वर्षे लागत असत. मात्र, आता तंत्रज्ञानामुळे भारतातील परिस्थिति बदलली आहे. काही काळापूर्वी, आपण जगभरातील अशा नवोन्मेषी कंपन्यांना आमंत्रित करण्यासाठी एक जागतिक गृहनिर्माण तंत्रज्ञान आव्हान स्पर्धा आयोजित केली होती. हा देशातील अशा वेगळ्या प्रकारचा पहिलाच प्रयोग होता, ज्याला आम्ही लाईट हाऊस प्रयोग असे नाव दिले होते. सध्या देशात सहा विविध ठिकाणी, लाईट हाऊस प्रकल्पांवर अत्यंत वेगाने काम सुरु आहे. या लाईट हाऊस प्रकल्पांमध्ये अत्याधुनिक तंत्रज्ञान आणि अभिनव कार्यपद्धतींचा वापर केला जातो. यामुळे बांधकामाचा कालावधी कमी होतो. त्यासोबतच, जी घरे तयार होतात, ती अधिक टिकावू, किफायतशीर आणि आरामदायी असतात. मी अलिकडेच, ड्रोन च्या माध्यमातून या प्रकल्पांचा आढावा घेतला आणि त्यांच्या कामाची प्रगती देखील प्रत्यक्ष पाहिली.

इंदौरच्या प्रकल्पात विटा आणि सीमेंट काँक्रीटच्या भिंतीच्या ऐवजी प्री- फॅब्रिकेटेड सँडविच पॅनल सिस्टिमचा वापर केला जात आहे. राजकोट इथे, लाईट हाऊस फ्रेंच तंत्रज्ञानाच्या मदतीने तयार केले जात आहेत. ज्यात, बोगद्याच्या माध्यमातून, मोनोलिथिक काँक्रीट बांधकाम तंत्रज्ञानाचा वापर केला जात आहे. या तंत्रज्ञानाने तयार झालेली घरे, संकटांचा सामना करण्यासाठी अधिक सक्षम असतील. चेन्नईत, अमेरिका आणि फिनलंडचे तंत्रज्ञान, प्री-कास्ट काँक्रीट सिस्टिमचा  वापर होत आहे. त्यामुळे घरे लवकर बनतील आणि त्यासाठी खर्च देखील कमी येईल. रांची इथे जर्मनीच्या थ्री-डी बांधकाम तंत्रज्ञानाचा वापर करुन घरे बांधली जाणार आहेत. यात प्रत्येक खोली वेगवगेळया जागी बनवली जाईल.  आणि त्यानंतर हे पूर्ण बांधकाम एकमेकांशी जोडले जाईल. अगरतला इथे न्यूझीलैंड च्या तंत्रज्ञानाचा वापर करत पोलादी चौकटी वापरुन घरे बनवली जात आहेत, ही घरे मोठ्या भूकंपाचाही सामना करु शकतील. तसेच, लखनौ इथे, कॅनडाच्या तंत्रज्ञानाचा वापर केला जात आहेत, यात प्लास्टर आणि पेंटची गरज पडत नाही. आणि जलद गतीने घरे तयार करण्यासाठी आधीपासूनच तयार असलेल्या भिंतींचा वापर केला जात आहे.

मित्रांनो, आज देशात हे सगळे जे प्रयोग होत आहेत, ते प्रकल्प मूळ, इनक्युबेशन केंद्र म्हणून कामी येतील. यामुळे आमचे गृहनिर्माण नियोजनकर्ते, स्थापत्यतज्ञ, अभियंते आणि विद्यार्थी नवे तंत्रज्ञान समजू  शकतील आणि त्याचे प्रत्यक्ष प्रयोगही करु शकतील. मी मुद्दामच या सगळ्या गोष्टी, युवकांना सांगतो आहे, जेणेकरुन आमचे युवक, राष्ट्रहितासाठी तंत्रज्ञानाच्या नवनवीन क्षेत्रांना प्रोत्साहन देऊ शकतील.

 मी या गोष्टी विशेषत आपल्या युवकांसाठी सांगत आहे , जेणेकरून आपले  युवक राष्ट्रहितासाठी  तंत्रज्ञानाच्या नवनवीन क्षेत्रांकडे प्रोत्साहित होऊ शकतील .  माझ्या प्रिय देश बांधवांनो,

 तुम्ही इंग्रजीत एक म्हण ऐकली असेल – “To Learn is to Grow” अर्थात  शिकणं म्हणजेच  पुढे जाणे आहे.  जेव्हा आपण काही नवीन शिकतो , तेव्हा आपल्यासाठी प्रगतीचे नवनवीन मार्ग आपोआप खुले होतात.  जेव्हा कधी  काहीतरी वेगळं नवीन करण्याचा प्रयत्न झाला आहे,  मानवतेसाठी नवीन कवाडे खुली झाली आहेत,  एका नवीन युगाचा प्रारंभ झाला आहे . आणि तुम्ही पाहिलं असेल,  जेव्हा काही नवीन घडते,  तेव्हा त्याचा परिणाम प्रत्येकालाच आश्चर्यचकित करतो. आता जसे की मी  तुम्हाला विचारलं की असं कोणते  राज्य आहे , ज्याचा संबंध तुम्ही सफरचंदाशी जोडाल?  सर्वांनाच माहित आहे , तुमच्या मनात सर्वप्रथम हिमाचल प्रदेश , जम्मू-काश्मीर , उत्तराखंडचे नाव येईल. मात्र  जेव्हा मी म्हणेन की या यादीत तुम्ही मणिपूरला देखील जोडा तेव्हा कदाचित तुम्हाला आश्चर्य वाटेल . काही तरी नवीन करण्याची उर्मी घेऊन युवकांनी मणिपूरमध्ये ही कामगिरी करून दाखवली आहे.  सध्या मणिपूरच्या उखरुल जिल्ह्यात सफरचंदाची शेती मोठ्या प्रमाणात सुरू आहे. इथले शेतकरी आपल्या बागांमध्ये सफरचंद पिकवत  आहेत. सफरचंद पिकवण्यासाठी इथल्या  लोकांनी खास हिमाचल प्रदेशात जाऊन प्रशिक्षण देखील घेतले आहे. यापैकीच एक आहेत  टी एस रिंगफामी योंग . योंग हे व्यवसायाने एरोनॉटिकल इंजिनीअर आहेत . त्यांनी पत्नी टी.एस. एंजेल यांच्या मदतीने सफरचंदाची शेती केली आहे . त्याचप्रमाणे अवुन्गशी शिमरे ऑगस्टीना  यांनी देखील आपल्या बागांमध्ये सफरचंदाचे  उत्पादन घेतले आहे . अवुन्गशी दिल्लीमध्ये नोकरी करत होत्या . ही नोकरी सोडून त्या आपल्या गावात परत गेल्या आणि सफरचंदाची शेती सुरू केली. मणिपूरमध्ये आज असे अनेक सफरचंद उत्पादक आहेत, ज्यांनी काही वेगळे आणि नवीन करून दाखवले आहे.

 मित्रांनो आपल्या आदिवासी समुदायात बोरे  खूप लोकप्रिय आहेत.  आदिवासी समुदायाचे लोक नेहमीच बोरांची  शेती करतात . मात्र कोविड -19 महामारी नंतर याची शेती विशेष  वाढली आहे. त्रिपुराच्या उनाकोटी येथील असेच 32 वर्षांचे युवक मित्र आहेत विक्रमजीत चकमा. त्यांनी बोरांची लागवड  करून खूप नफा कमावला आणि आता ते लोकांना बोरांचे पीक घेण्यासाठी  देखील प्रेरित करत आहेत.  राज्य सरकार देखील अशा लोकांच्या मदतीसाठी पुढे आले आहे सरकारकडून यासाठी अनेक विशेष बागा तयार केल्या जात आहेत, जेणेकरून बोरांच्या लागवडी संबंधित लोकांची मागणी पूर्ण करता येईल. शेती मध्ये संशोधन होत आहे,  तर शेतीच्या इतर दुय्यम उत्पादनांमध्ये देखील सर्जनशीलता पाहायला मिळत आहे.

मित्रांनो मला उत्तर प्रदेशच्या लखीमपुर-खीरी मध्ये करण्यात आलेल्या एका प्रयत्नाबद्दल माहिती समजली आहे . कोविडच्या काळात लखीमपुर-खिरी  मध्ये एक अनोखा उपक्रम हाती घेण्यात आला. तिथल्या महिलांना केळ्याच्या तणांपासून फायबर बनवण्याचे प्रशिक्षण देण्याचं काम सुरू करण्यात आले आहे . कचऱ्यापासून टिकाऊ सर्वोत्तम वस्तू  बनवण्याचा मार्ग. केळ्यांचे तण कापून मशीनच्या मदतीने हे फायबर तयार केलं जातं , जे ज्यूट  प्रमाणे असतं .  या फायबरपासून  हॅन्ड बॅग,  सतरंजी असे कितीतरी वस्तू बनवल्या जातात .

 यामुळे एक तर पिकांचा कचर्‍याचा वापर सुरू झाला आहे आणि दुसरीकडे गावात राहणाऱ्या आपल्या भगिनी आणि मुलींना उत्पन्नाचे एक साधन देखील मिळाले आहे . बनाना फायबरच्या या कामात एका स्थानिक महिलेची  रोजची 400 ते 600 रुपये कमाई होते.  लखीमपुर-खीरी मध्ये शेकडो एकर जमिनीवर केळ्याची शेती होते . केळ्यांचे पीक घेतल्यानंतर  साधारणपणे शेतकऱ्यांना तण फेकण्यासाठी वेगळा खर्च करावा लागत होता . आता त्यांचे पैसे देखील वाचतात.  म्हणजेच आम के आम , गुठलियो  के दाम ही म्हण इथे अगदी चपखल बसते.

 मित्रांनो एकीकडे बनाना फायबर पासून वस्तू  बनवल्या जात आहेत  तर दुसरीकडे केळ्याच्या पिठापासून डोसे आणि गुलाबजाम सारखे स्वादिष्ट पदार्थ देखील तयार होत आहेत.  कर्नाटकच्या उत्तर कन्नड आणि दक्षिण कन्नड जिल्ह्यांमध्ये महिला हे वैशिष्ट्यपूर्ण कार्य करत आहेत.

त्याची सुरुवात देखील कोरोना काळातच  झाली . या महिलांनी  केळ्याचा पिठापासून केवळ डोसा ,  गुलाबजाम सारखे पदार्थ नुसते बनवले नाहीत तर त्याची  छायाचित्रे देखील सोशल मीडियावर शेअर केली आहेत . जेव्हा जास्तीत जास्त लोकांना या पीठाबाबत समजले  तेव्हा  त्यांची मागणी आणखी वाढली आणि  या महिलांचे उत्पन्न देखील. लखीमपुर-खीरी प्रमाणेच इथेही ही नावीन्यपूर्ण कल्पना महिलाच राबवत आहेत.

मित्रांनो अशी  उदाहरणे  आयुष्यात काही तरी नवीन करण्याची प्रेरणा देतात . तुमच्या आसपास देखील असे अनेक लोक असतील.  जेव्हा तुमचं कुटुंब मनातल्या गुजगोष्टी सांगत असेल तेव्हा तुम्ही या गोष्टीदेखील तुमच्या गप्पांमध्ये समाविष्ट करा.

कधीतरी वेळ काढून मुलांबरोबर असे उपक्रम पहायला जा आणि  संधी मिळाली तर स्वतःदेखील असं काहीतरी करून दाखवा. आणि हो आणि हे सगळं तुम्ही माझ्याबरोबर NamoApp किंवा  MyGov वर  शेअर केलं तर मला खूप छान वाटेल.

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो,  आपल्या संस्कृत ग्रंथांमध्ये एक श्लोक आहे-

आत्मार्थम् जीव लोके अस्मिन्, को न जीवति मानवः |

        परम् परोपकारार्थम्, यो जीवति स जीवति ||

अर्थात स्वतःसाठी या जगात प्रत्येक जण जगत असतो मात्र वास्तवात खरेतर ती व्यक्ती जगत असते जी परोपकारासाठी जगते.  भारत मातेच्या सुपुत्रांच्या परोपकारी प्रयत्नांच्या गोष्टी हीच तर आहे मन की बात. आज देखील अशाच काही अन्य मित्रांबाबत आपण बोलणार आहोत . एक मित्र चंदीगड शहरातलेआहेत.  चंदीगड मध्ये मी देखील काही वर्ष राहिलो आहे . खूपच आनंदी आणि सुंदर शहर आहे.  तिथे राहणारे लोक देखील दिलदार आहेत . आणि हो, तुम्ही जर खाण्याचे शौकीन असाल तर इथे तुम्हाला आणखी मजा येईल. या चंदिगडमधील सेक्टर 29 मध्ये संजय राणा फुड स्टॉल चालवतात.

आणि सायकलवर  छोले भटूरे विकतात.  एक दिवस त्यांची मुलगी रिद्धिमा आणि भाची रिया एक कल्पना घेऊन त्यांच्याकडे आल्या.  दोघींनीही त्यांना कोविड लस  घेणाऱ्यांना मोफत छोले-भटूरे खायला द्यायला  सांगितलं. ते  आनंदाने तयार झाले आणि त्यांनी लगेच हे उत्तम आणि नेक कार्य सुरु केले. संजय राणा यांचे छोले-भटूरे मोफत खाण्यासाठी तुम्हाला दाखवावे लागेल कि तुम्ही त्यादिवशी लस घेतलेली आहे.  लसीकरणाचा संदेश दाखवला की लगेचच  ते तुम्हाला स्वादिष्ट छोले-भटूरे देतील. असे म्हणतात समाजाच्या कल्याणासाठी काम करण्यासाठी पैशांपेक्षा जास्त सेवाभाव, कर्तव्य भावनेची अधिक गरज असते . आपले संजय भाऊ हेच सिद्ध करत आहे.

मित्रांनो अशाच आणखी एका कामाची चर्चा मला करायची आहे. हे काम  तामिळनाडूच्या निलगिरी मध्ये होत आहे. तिथे राधिका शास्त्री यांनी एम्बुरेक्स प्रकल्पाची सुरुवात केली आहे.  डोंगराळ भागातल्या रुग्णांना उपचारासाठी सहजपणे वाहतुकीचे  साधन उपलब्ध करून देणे हा या प्रकल्पाचा  उद्देश आहे. राधिका कून्नूरमध्ये एक कॅफे चालवतात . त्यांनी आपल्या कॅफेच्या सहकाऱ्यांच्या मदतीने एम्बुरेक्स साठी निधी जमा केला. निलगिरी डोंगरावर आज सहा एम्बुरेक्स कार्यरत आहे आणि दुर्गम भागातल्या आपत्कालीन स्थितीत रुग्णांसाठी उपयुक्त ठरत आहेत. एम्बुरेक्समध्ये स्ट्रेचर,  ऑक्सीजन सिलेंडर , फर्स्ट एड बॉक्स यासारख्या अनेक गोष्टींची व्यवस्था केली आहे.

मित्रांनो संजय असोत किंवा राधिका , त्यांच्या उदाहरणातून असं दिसून येतं की आपण आपलं कार्य आपला व्यवसाय , नोकरी करता करता सेवाकार्य  देखील करू शकतो.

 मित्रांनो काही दिवसांपूर्वी एक खूपच रोचक आणि खूपच भावनिक घटना घडली, ज्यामुळे  भारत जॉर्जिया मैत्रीला बळकटी मिळाली.  या कार्यक्रमात भारताने सेंट क्वीन केटेवानच्या  होली रेलिक म्हणजेच त्यांचे पवित्र स्मृतिचिन्ह जॉर्जियाचे  सरकार आणि तिथल्या जनतेकडे सुपूर्द केले. यासाठी आपले परराष्ट्रमंत्री स्वतः तिथे गेले होते . अतिशय भावनिक वातावरणात झालेल्या कार्यक्रमात जॉर्जियाचे राष्ट्रपती,  पंतप्रधान अनेक धर्मगुरू आणि मोठ्या संख्येने जॉर्जियाची जनता उपस्थित होती. या कार्यक्रमात भारताची प्रशंसा करताना जे गौरवोद्गार काढण्यात आले ते कायम स्मरणात  राहतील . या एका कार्यक्रमाने दोन्ही देशांबरोबरच गोवा आणि जॉर्जिया  दरम्यान संबंध देखील अधिक दृढ केले आहेत. असं यासाठी कारण सेंट क्वीन केटेवान यांचे हे अवशेष  २००५ मध्ये गोव्याच्या सेंट ऑगस्टीन चर्च येथे सापडले होते .

मित्रानो, तुमच्या मनात प्रश्न निर्माण झाला असेल हे सगळं काय  आहे आणि हे सगळं केव्हा झाले?  खरं तर ही चारशे पाचशे  वर्षांपूर्वीची गोष्ट आहे .क्वीन केटेवान जॉर्जियाच्या राज परिवारातील मुलगी होती . दहा वर्षांच्या तुरुंगवासानंतर  १६२४ मध्ये ती शहीद झाली होती . एका प्राचीन पोर्तुगाल दस्तावेनुसार सेंट  क्वीन केटेवानच्या  अस्थी जुन्या गोव्याच्या सेंट ऑगस्टीन कॉन्व्हेंट मध्ये ठेवण्यात आल्या होत्या. मात्र  दीर्घकाळ असे मानले जात होते की गोव्यामध्ये दफन करण्यात आलेले तिचे अवशेष 1930 च्या भूकंपात गायब झाले होते .

भारत सरकार आणि जॉर्जियाचे इतिहासकार,  संशोधक पुरातत्व शास्त्रज्ञ  आणि जॉर्जियन चर्चच्या अनेक दशकांच्या अथक प्रयत्नानंतर 2005 मध्ये ते पवित्र अवशेष शोधण्यात यश मिळाले होते. हा विषय जॉर्जियाच्या लोकांसाठी खूपच भावनात्मक आहे . म्हणून  त्यांचं ऐतिहासिक धार्मिक आणि अध्यात्मिक भावना लक्षात घेऊन भारत सरकारने या  अवशेषांचा एक भाग जॉर्जियाच्या जनतेला  भेट देण्याचा निर्णय घेतला. भारत आणि जॉर्जियाचा सामायिक इतिहासातील  या बाबी जपून ठेवल्याबद्दल मी आज गोव्याच्या जनतेचे मनः पूर्वक आभार मानतो . गोवा अनेक महान आध्यात्मिक वारसांची भूमी आहे.  सेंट ऑगस्टीन चर्च युनेस्कोच्या जागतिक वारसा स्थळ (गोव्याचे चर्चेस आणि कॉन्व्हेंट) चा  एक भाग आहे .

माझ्या प्रिय देश बांधवांनो,  जॉर्जिया मधून आता मी तुम्हाला थेट सिंगापूरला घेऊन जातो , जिथे या महिन्याच्या सुरुवातीला आणखी एक गौरवशाली संधी समोर आली. पंतप्रधान आणि माझे मित्र ली सेन लुंग यांनी अलीकडेच नूतनीकरण केलेल्या सिलाट रोड गुरुद्वाराचे  उद्घाटन केलं. त्यांनी पारंपारिक पगडी देखील घातली होती . हा गुरूद्वारा  सुमारे शंभर वर्षांपूर्वी बांधण्यात आला होता. आणि तिथे  भाई महाराज यांना समर्पित स्मारक देखील आहे. भाई महाराजजी  भारताच्या स्वातंत्र्याच्या लढ्यात सहभागी झाले होते. आणि हा क्षण स्वातंत्र्याची 75 वर्ष साजरी करताना अधिक प्रेरक ठरतो. दोन्ही देशांदरम्यान लोकांमधील संबंध अशाच प्रयत्नांतून अधिक बळकट होतात. यातून हे देखील समजतं की सौहार्दपूर्ण  वातावरणात राहणे आणि एक दुसऱ्याची संस्कृती समजून घेणे  किती महत्त्वाचे आहे .

माझ्या देशबांधवांनो,  आज मन की बात मध्ये आपण अनेक विषयांवर चर्चा केली. आणखी एक विषय आहे जो माझ्या मनाच्या अत्यंत जिव्हाळ्याचा विषय आहे .

हा विषय आहे जलसंरक्षणाचा . माझं बालपण जिथे गेलं तिथे पाण्याची नेहमी टंचाई असायची. आम्ही पावसासाठी आसुसलेले असायचो आणि म्हणूनच पाण्याचा एक एक थेंब वाचवणे  आमच्या संस्कारांचा एक भाग बनला आहे . आता 'जन  भागीदारीतून जल  संरक्षण ' या मंत्राने तिथले चित्र पालटून टाकले आहे. पाण्याचा प्रत्येक  थेंब वाचवणे आणि पाणी कुठल्याही प्रकारे वाया जाणार नाही याची काळजी घेणे  हा आपल्या जीवनशैलीचा एक सहज भाग असायला हवा. आपल्या कुटुंबाची परंपरा बनायला  हवी ज्याचा  प्रत्येक सदस्यांना अभिमान वाटेल .

मित्रानो, निसर्ग आणि पर्यावरण संरक्षण भारताच्या सांस्कृतिक जीवनात  आपल्या दैनंदिन जीवनात वसलेले आहे. पाऊस हा  नेहमीच आपले विचार, आपलं  तत्वज्ञान आणि आपल्या संस्कृतीला आकार देत आला आहे. ऋतुसंहार आणि मेघदूत मध्ये महाकवी कालिदास यांनी पावसाचे खूप सुंदर वर्णन केलं आहे . साहित्यप्रेमीमध्ये या कविता आजही खूप लोकप्रिय आहेत. ऋग्वेदातील पर्जन्यसूक्त मध्ये देखील पावसाच्या सौंदर्याचे खूप सुंदर वर्णन केलं आहे. त्याचप्रमाणे श्रीमद्भागवत मध्ये देखील काव्यात्मक स्वरूपात पृथ्वी, सूर्य आणि पाऊस यामधील संबंध विस्ताराने सांगितला आहे

अष्टौ मासान् निपीतं यद्, भूम्याः च, ओद-मयम् वसु |

        स्वगोभिः मोक्तुम् आरेभे, पर्जन्यः काल आगते ||

अर्थात सूर्याने 8 महीने पाण्याच्या रूपात पृथ्वीच्या संपत्तीचा वापर केला  होता. आता पावसाळ्याच्या ऋतूत सूर्य संचित संपत्ती पृथ्वीला परत करत आहे . खरंच  पावसाचा ऋतू केवळ सुंदर आणि आनंददायी नाही तर  पोषण देणारा,  जीवन देणारा देखील असतो. पावसाचे पाणी जे आपल्याला मिळत आहे ते आपल्या भावी पिढ्यांसाठी आहे हे आपण कधीही विसरू नये .

आज माझ्या मनात हा विचार आला कि रोचक संदर्भानेच  मी आज आपली आजची मन कि बात  समाप्त करावी. तुम्हा सर्वांना आगामी सण -उत्सवांच्या खूप खूप  शुभेच्छा . सण उत्सवांच्या काळात हे जरूर लक्षात ठेवा की कोरोना  अजूनही आपल्यातून गेलेला नाही. कोरोनाशी  संबंधित नियम विसरायचे नाहीत. तुम्ही सगळे निरोगी आणि प्रसन्न रहा .  खूप खूप धन्यवाद!