Technology has simplified our lives, mobile phones have become banks: PM Modi

Published By : Admin | November 27, 2016 | 14:21 IST
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Technology has simplified our lives. Mobile phones have become banks today: PM

भारत माता की... जय

भारत माता की.. जय

महात्मा बुद्ध की महा परिनिर्माण स्थली कुशीनगर की ई पवित्र भूमि के प्रणाम करत बानी... सब काम-धाम, खेती-बारी, जोतनी-बोवनी छोड़ के रौव्वा लोगन-लोग इतनी बड़ी संख्या में यहां आईल बीड़ी... ई देखके हमार मन गदगद हो गईल बा। आप लोगन के भी प्रधान सेवक के नमस्कार..ई भगवान बुद्ध का धरती है, भगवान महावीर का ई धरती है...भारत सहित पूरी दुनिया के इहे धरती शांति, अहिंसा के उपदेश दीहलस। अस्तेर अउर क्रांति, एवं योग के ऊ नायक शिवा अवतारी महायोगी गोरखनाथ... यहि क्षेत्र के तपस्या के लिए चुनल, महान संत कबीर इहे क्षेत्र में चीरशांति पउलस, इहे भूमि पर दुनिया में सबसे पहले लोकतंत्र के जन्म भईल... गणराज्यन के ई पवित्र भूमि से प्रदेश में परिवर्तन के हुंकार फुकलें के अब समय आ गईला बा। रौव्वा लोग अब प्रदेश के विकास की खातिर भी गौठी बांधी तैयार हो जाई...

मंच पर विराजमान श्रीमान ओम जी, प्रदेश के उत्साही..लोकप्रिय नौजवान अध्यक्ष श्री केशव प्रसाद मोर्य जी, आदरणीय कलराज मिश्र जी, श्री मनोज सिन्हा जी, अनुप्रिया पटेल जी, सांसद श्रीमान आदित्यनाथ जी, रीता बहुगणा जी, श्रीमान रमापति जी, रामेश्वर जी, सूर्यप्रताप जी, उपेंद्र शुक्ला जी, स्वामी प्रसाद मौर्य जी, हमारे यहां के सांसद श्रीमान राजेश पांडे जी, श्रीमान कामेश्वर सिंह जी, श्री राम चौहान जी, संतोषी जी, जन्मेजय सिंह जी, दारासिंह जी, विजय दुबे जी, स्वतंत्र देवसिंह जी, जयप्रकाश जी, श्री प्रताप शुक्ला जी, जयप्रकाश निषाद जी, भाई पंकज सिंह जी, महेंद्र यादव जी, श्री गंगा सिंह कुशवाहा जी, रविंद्र कुशवाहा जी और विशाल संख्या में पधारे हुए...मेरे प्यारे भाईयो और बहनों....

मुझे एक बार फिर आप सब के बीच आने का सौभाग्य मिला है। 2014 के चुनाव में मैं उत्तर प्रदेश के काशी क्षेत्र से चुनाव लड़ रहा था। उत्तर प्रदेश के कई स्थानों में जाने का सौभाग्य मिला था, लेकिन मेरे भाईयों-बहनों... उस समय मैं खुद चुनाव लड़ रहा था... यहां कुशीनगर में भी आया था, लेकिन उस समय सभा में इससे आधे लोग भी नहीं आते थे... और माताएं-बहनें तो कभी नहीं आती थीं। आज इतनी बड़ी तादाद में माताएं-बहनें मुझे आशीर्वाद देने आए हैं... इतनी बड़ी विशाल जनसभा... मुझे आशीर्वाद देने आई है। माताएं-बहनें, भाईयों-बहनों मैं आप सब को सर झुका कर नमन करता हूं, आप का अभिनंदन करता हूं और आपने मुझ पर जो यह विश्वास जताया है, आपके आशीर्वाद से... आपके विश्वास को कभी... मैं चोट नहीं पहुंचने दूंगा, आंच नहीं आने दूंगा। भाईयों-बहनों हम सालों से सुनकर के आए हैं... कि हमारा देश कृषि प्रधान देश है।

अगर भारत में गांव, गरीब, किसान उसके जीवन में अगर हमने बदलाव लाया होता तो हिंदुस्तान को आज जो मुसीबतें झेलनी पड़ रही हैं... ये मुसीबतें कभी झेलनी नहीं पड़ती... ये हमारा गांव ताकतवर होता... हमारा किसान ताकतवर होता तो वो हिंदुस्तान की समस्याओं को दूर करने के लिए सबसे पहले खड़ा हुआ होता और इसलिए भाईयों-बहनों आज जो दिल्ली में सरकार बैठी है, ये सरकार पूरी तरह गरीबों को समर्पित है, ये सरकार गांव को समर्पित है, ये सरकार किसानों को समर्पित है, ये सरकार दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित... इन सभी हमारे समाज के लोगों को समर्पित है, उनका कल्याण करना चाहती है। भाईयों-बहनों यहां गन्ना का किसान कैसी-कैसी परेशानियों से गुजरा है ये कौन नहीं जानता है?

चीनी मिलें यहां के जीवन के लिए चुनौती बन गई और राजेश जी कह रहे थे कि अगर देने वाला मजबूत है तो मांगने की ज़रुरत क्या है? भाईयों-बहनों... मैं भी आप ही के जैसा हूं, ये जमाना चला गया... जब सरकार में बैठे हुए लोग ये मानते थे कि वो देने वाले बन गए हैं हम तो सेवक हैं..सेवक, आपकी सेवा करने के लिए आए हैं आपका कष्ट...आपका कष्ट हमारा कष्ट है, आपकी कठिनाईयों को दूर करना ही हमारी जिम्मेवारी है, सेवा भाव से करना हमारी जिम्मेवारी है... भाईयों-बहनों, अगर देने वाला कोई है तो देशवासी हैं भाईयों-बहनों भाईयों-बहनों...जनता जनार्दन देने वाली होती है और आपने मुझे इतना दिया है इतना दिया है मैं तो कर्ज चुकाने आया हूं भाईयों-बहनों... कर्ज चुकाने आया हूं।

2014-15 में गन्ना किसानों का बकाया 22 हजार करोड़ रुपया था भाईयों-बहनों 22 हजार करोड़ और लोगों को ऐसी आदत हो गई थी... भई इसके बिना ठीक है आया तो आया... नहीं आया तो नहीं आया इसी से गुजारा कर लो। लोग नाराज़गी भी व्यक्त नहीं करते थे, सिर्फ हाथ जोड़कर विनती करते रहते थे, चीनी मालिकों को कह रहे थे कि जरा भुगतान कर दो। लखनऊ में सरकार को परवाह नहीं होती थी, उसको तो लगता थी कि चुनाव आएंगे... कुछ इधर-उधर का बांट देंगे तो चल जाएगा। लोग सहने के आदि हो गए थे। जब दिल्ली में सरकार बनी उत्तर प्रदेश के लोगों ने मुझे इतना बड़ा सेवा का अवसर दिया... हमने तय किया कि गन्ना किसानों की चिंता करेंगे। भाईयों-बहनों 2014-15 के 22 हजार करोड़ बकाया था अब शायद मुश्किल से अंगुली से गिन सकेंगे इतना सा बचा होगा बाकी सारी बातें किसान के घर तक पहुंचा दी।

मेरे पास चीनी वाले आए थे वो कह रहे थे साहेब... दाम कम हो गया है चीनी का कारखाना चलाना मुश्किल हो गया है, हमें पैकेज दे दो। मैंने कहा पैकेज लेने की आपकी आदत पुरानी है, लेकिन मोदी नया है... मुझे ये पुरानी आदत आती नहीं है, तो पहली मीटिंग में मैंने कहा जो मांगोगे देने को तैयार हूं तो बड़े खुश होकर के गए... फिर मैंने धीरे से अफसरों को भेजा और मैंने कहा जरा मुझे सूची दो कौन-कौन गन्ने किसान का कितना पैसा बकाया है... उसकी ज़रा सूची दो तो चीनी मिल के लोग ज़रा कांपने लग गए, फिर दोबारा मिलने आए। मैंने कहा पैकेज मिलेगा लेकिन कारखानें के मालिक को नहीं मिलेगा। हमें सूची दे दो... गन्ना किसान को जो बकाया है सीधा-सीधा उसके बैंक अकाउंट में जमा करेंगे, आपको बीच में नहीं आने देंगे। वो कहने लगे नहीं..नहीं साहेब पैकेज नहीं चाहिए, यहां तक कहने लग पैकेज नहीं चाहिए। भाईयों-बहनों सरकार ने फैसला किया कि गन्ना किसानों का बकाया है उसका पैकेज चीनी मालिकों को नहीं दिया जाएगा, गन्ना किसानों के खाते में जमा होगा और जिन-जिन लोगों ने बैंक का खाता खुलवाया, उसका तुरन्त फायदा उनको मिल गया, उनके खाते में सीधा पैसा जमा हो गया कोई बिचौलिया बीच में नहीं आया।

भाईयों-बहनों चीनी मिलें... चलें... गन्ना किसानों को उनकी मेहनत का पैसा मिले, इसके लिए हमारी भरपूर कोशिश है। लेकिन इसके लिए... एक के बाद एक कदम उठाने पड़ते हैं, हमने कदम उठाया कि जब चीनी का दाम कम हो जाता है दुनिया में... तो चीनी मिलें बंद हो जाती है, चीनी मिलें बंद हो जाए तो गन्ना किसान का गन्ना कोई खरीदता नहीं है और खरीदता है तो तीन महीने, चार महीने के बाद खरीदता है और तब उसका वजन कम हो जाता है, वजन कम हो जाता है तो किसान तो घाटे में ही चला जाता है... ये खेल चलता रहता है और बेचारा किसान चुपचाप सहन करता रहता है।

हमने तय किया कि अगर दुनिया में चीनी का दाम इधर-उधर हो गया तो हम हिंदुस्तान के चीनी के कारखानें में चीनी नहीं बनाएंगे तो इथेनॉल बनाएंगे और इथेनॉल बनाकर के पेट्रोल, डीजल, की जगह पर उसको उपयोग करेंगे... गाड़ी चलाने के लिए उसको जलाएंगे, लेकिन किसान का गन्ना नहीं जलने देंगे और चीनी मिलों को इथेनॉल बनाने के लिए मज़बूर किया, जिनके पास प्लांट नहीं थे उनको कहा है प्लांट लगाओ, चीनी का दाम गिर जाता है तो चीनी मत बनाओ इथेनॉल बनाओ और पेट्रोल की जगह पर इथेनॉल यूज करो, डीजल की जगह पर इथेनॉल यूज करो लेकिन गन्ने के किसान को मरने नहीं दिया जाएगा... ये काम हमने कर के दिखाया भाईयों-बहनों।

सौ करोड़ लीटर... आज तक का हिंदुस्तान का रिकॉर्ड है कि भारत ने सौ करोड़ लीटर इथेनॉल बनाकर के गाड़ियों में उसका उपयोग किया। उसके कारण जो विदेशों से... तेल लाना पड़ता है उसमें हम कुछ बचत कर पाए, इधर गन्ना के किसान का भुगतान कर पाए। भाईयों-बहनों समस्याएं आती हैं लेकिन समस्याओं के रास्ते भी खोजे जा सकते हैं। ये सरकार ऐसी है कि समस्याओं को भी सामना करने के लिए हर पल तैयार रहती है... जनता-जनार्दन के साथ खड़े होकर चलती है।

 

भाईयों-बहनों मैं हमेशा कहता हूं कि उत्तर प्रदेश का भला तब तक नहीं होगा जब तक उत्तर प्रदेश का पूर्वी... उत्तर प्रदेश का विकास नहीं होगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश का विकास होना चाहिए और विकास करने के लिए रेल का काम हो... रोड का काम हो... इसके लिए भारत सरकार अरबों-खरबों रुपये लगा रही है। हमारे मनोज सिन्हा जी रेल मंत्री... दिन-रात लगे हुए हैं कि रेल में विकास उत्तर प्रदेश में कैसे हो? उत्तर प्रदेश के लोगों को कैसे लाभ मिले?  पूर्वी उत्तर प्रदेश में कोई बीमार हो जाए तो कहां जाए... कब पहुंचे... अच्छी अस्पताल नहीं, भारत सरकार ने निर्णय किया... गोरखपुर के अंदर एम्स का अस्पताल लगा देंगे और उस पूरे इलाके के भाग्य को बदलने के लिए, उनको आरोग्य की सुरक्षा देने के लिए हम काम करेंगे।

फर्टीलाइजर का कारखाना... उसको चालू करने का हमने निर्णय किया। एक जमाना था, भईया... बहुत-बहुत... आपका प्यार सर-आंखों पर भैया, आपका प्यार सरांखों पर... अब जगह है नहीं कोई आगे आ नहीं आ पाओगे भैया। ये जन-सैलाब उमड़ पड़ा है।

भाईयों-बहनों... हमने देखा है जब हमारे किसान को यूरिया चाहिए... यूरिया, किसान को रात-रात यूरिया लेने के लिए कतारों में खड़ा रहना पड़ता था। हड्डियां पिघल जाएं ऐसी ठंड में रात-रात भर खड़ा रहना पड़ता था, लेकिन देश में कभी किसी को इसकी पीड़ा नहीं होती थी, और जब यूरिया लेने जाता था, पुलिस आकर के लाठी चार्ज करती थी, किसान को यूरिया नहीं मिलता था। मेरे भाईयों-बहनों एक साल हो गया... आपने देखा होगा कहीं पर ग्राहक को यूरिया के लिए कतार नहीं लगानी पड़ती, कहीं पर यूरिया के लिए पुलिस को लाठी नहीं चलानी पड़ती, ये कैसे हुआ? ये जादू कैसे आया?

भाईयों-बहनों रातों-रात, रातों-रात... कोई यूरिया का कारखाना तो नहीं लग गया था, लेकिन क्यों नहीं मिलता था युरिया...? यूरिया की पैदावर नहीं थी क्या...? यूरिया की पैदावर थी... यूरिया के कारखाने चलते थे... किसान को सब्सिडी भी मिलती थी लेकिन यूरिया किसान के खेत में नहीं जाता था... कैमिकल के कारखाने में चोर रास्ते से चला जाता था... और कैमिकल वालों को सस्ते में यूरिया मिल जाता था। उसमें से वो अपनी और चीजें बनाकर के बाजार में बेचते थे।

फर्टीलाइजर... फसल के लिए हुआ करता था, फर्टीलाइजर यूरिया उद्योगपतियों की भलाई के उपयोग में आता था। हमने आकर के उसकी दवाई की, बड़ा अच्छा ऊपाय ढूंढ करके निकाला। हमने कहा कि हम यूरिया का नीमकोटिंग कर देंगे, जो नीम का पेड़ होता है नीम की जो फली होती है, उसका तेल यूरिया पर लगा देंगे, उससे... जो धरती माता है, उसको भी अच्छा खुराक मिल जाएगा, और एक बार अगर यूरिया पर नीमकोटिंग हो गया... तो किसी भी कैमिकल के लिए वो यूरिया बेकार हो गया, और इसलिए अब 100 ग्राम यूरिया भी कैमिकल के कारखाने में नहीं जाता है। जितना यूरिया पैदा होता है किसान के खेत में जाता है, बताइए भाईयों-बहनों... चोरी बंद हुई कि नहीं हुई? बेईमानी बंद हुई कि नहीं हुई? काला बाजारी बंद हुई कि नहीं हुई? किसान को यूरिया मिला कि नहीं मिला? भाईयों-बहनों...क्या इसका ज्ञान पहले नहीं था क्या? पहले की सरकारों को भी इसका ज्ञान था, कागज पर सब लिखा हुआ है, लेकिन किसान से ज्यादा... उनको कारखानें वालों की चिंता थी। और इसलिए कभी भी उन्होंने यूरिया की इस प्रकार चिंता नहीं की, हमने शत प्रतिशत यूरिया नीमकोटिंग कर दिया। उसके कारण आज किसान को यूरिया मिल रहा है।

भाईयों-बहनों... हमने किसान के लिए सॉइल हेल्थ कार्ड बनाया। आज आप देखते होंगे... जब हम बीमार हो जाते हैं, बीमार हो जाते हैं तो हम लोग ब्लड टेस्ट कराते हैं, पेशाब की जांच करवाने के लिए डॉक्टर कहता है, उसका जब तक रिपोर्ट नहीं आता है डॉक्टर दवाई नहीं देता है। वो कहता है पहले पैथोलॉजिकल जांच करवा के लाइए, बल्ड टेस्ट का रिपोर्ट लाइए, युरीन टेस्ट का रिपोर्ट लाइए उसके बाद वो दवाई करता है। भाईयों-बहनों जैसा शरीर का स्वभाव है, वैसा ही हमारी धरती माता का भी है, धरती माता में भी बीमारियां होती हैं, धरती माता में भी ताकत होती हैं, अच्छाईयां होती हैं और इसलिए जैसे हमारे शरीर में ब्लड की जांच हो सकती है, हमारे खून की जांच हो सकती है, हमारे पेशाब की जांच हो सकती है, वैसे ये धरती मां के अंदर क्या..क्या अच्छाईयां हैं... कमियां हैं..., उसकी जांच हो सकती है।

और इसलिए हमने ये धरती मां की जांच करने की लेबोरेटरी बनाना, अपनी ज़मीन, खेत की ज़मीन का टेस्टिंग कराना और फिर रिपोर्ट आती है कि आपके जमीन में ये दवाई डालनी चाहिए... ये नहीं डालनी चाहिए... ये खाद डालनी चाहिए... ये नहीं डालनी चाहिए... ये फसल उगानी चाहिए... ये फसल नहीं उगानी चाहिए और उसके कारण किसान के जो पैसे बर्बाद होते थे, वरना किसान क्या करता था? अगर पड़ोसी ने लाल डिब्बे वाली दवाई डाल दी तो ये भी लाल डिब्बे वाली दवाई डाल देता था। पड़ोसी ने काले डिब्बे वाला पाउडर डाल दिया तो ये भी काले डिब्बे वाला पाउडर डाल देता था। और उसके कारण किसान को बहुत नुकसान होता था। भाईयों-बहनों... हमने सॉइल हेल्थ कार्ड लगाकर के... किसान को उसकी धरती माता की रक्षा कैसै हो?, उस धरती माता में से ज्यादा से ज्याद उपज कैसे मिले? उसके लिए रास्ता खोल दिया औऱ जो आने वाले दिनों में किसान का भला करने वाला है।

भाईयों-बहनों... हमारा किसान कितनी ही मेहनत करे लेकिन, हमारा किसान कितनी ही मेहनत करे लेकिन, लेकिन जब प्राकृतिक आपदा आ जाए तो उसकी सारी मेहनत मिट्टी में मिल जाती है, पानी में बह जाती है, किसान बर्बाद हो जाता है। अधिक बारिश आ जाए तो भी किसान दुखी, कम बारिश आ जाए तो भी किसान दुखी, नदियों में ज्यादा पानी आ जाए तो भी किसान दुखी, ज्यादा फसल हो जाए तो भी किसान दुखी, कम फसल हो जाए तो भी किसान दुखी, इस किसान की रक्षा कैसे करेंगे?

भाईयों-बहनों और इसलिए हम प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हम लाए हैं, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और उसमें किसान को बहुत कम पैसा देना है, बहुत कम देना है, भारत सरकार पैसे देगी और आपके फसल को कोई भी प्राकृतिक नुकसान होगा तो उस किसान को बीमा योजना से पूरा का पूरा पैसा मिलेगा... भाईयों-बहनों। इतना ही नहीं आपने तय किया हो कि जून महीने में बुवाई करनी है, लेकिन बारिश नहीं आई, आपने सोचा जुलाई में करेंगे फिर भी बारिश नहीं आई, आपने सोचा अगस्त में करेंगे फिर भी बारिश नहीं आई। पानी ही नहीं आया तो बुवाई कहां करोगे?  और बुवाई नहीं की तो फसल कहां होगी?, और फसल नहीं होगी तो फसल बर्बाद भी कैसे होगी? तो ऐसी स्थिति में किसान क्या करेगा? जिसकी बुवाई नहीं हुई तो उसको तो फसल नहीं आनी है तो फसल बीमा लगना नहीं है। पहली बार इस देश में दिल्ली में ऐसी सरकार बैठी है, इसमें ऐसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लाए है कि प्राकृतिक आपदा के कारण अगर बुवाई नहीं हुई तो भी उसका हिसाब लगाकर उसको मिनिमम बीमा का पैसा दिया जाएगा।

भाईयों-बहनों कभी हमारा किसान... अच्छी फसल हो... खुशी मना रहा हो... खेत में फसल काट कर खलिहान में बड़ा ढेर किया है.... अपनी किसानी पैदावर का, अब वो इंतजार कर रहा है कि कोई ट्रैक्टर मिल जाए और ट्रैक्टर में समान रखकर बाजार में मंडी में जाकर के बेच कर के आ जाऊंगा। अब उसको ट्रैक्टर आने में देर हो गई दो-चार दिन, पांच दिन, ट्रक आने में देर हो गई, मंडी सामान पहुंचाने में मुश्किल हो गया और अचानक... अचानक बारिश आ गई, सारी फसल तैयार है खेत में ढेर पड़ा है, फसल का बीमा कहां से मिलेगा क्योंकि सब पूरा हो गया था। ये दिल्ली में ऐसी सरकार है, जो किसानों की चिंता करने वाली सरकार है। हमने प्रधानमंत्री फसल बीमा में योजना बनाईं कि फसल की कटाई के बाद जो फसल का ढेर है, अगर 15 दिन के भीतर-भीतर कोई प्राकृतिक आपदा आ गई और किसान का नुकसान हो गया तो उसका बीमा भी मिलेगा भाईयों-बहनों।

आप मुझे बताईए भाईयों कि बुवाई से लेकर कटाई तक हर परिस्थिति में बीमा देने की ताकत ये दिल्ली में बैठी सरकार लेकर आई है, लेकिन मैं दिल्ली की सरकार को कहना चाहता हूं कि अगर अब झगड़े शांत हो गये हो, आपके पास समय हो, यहां के गरीबों की चिंता करने की फुर्सत हो, किसानों की चिंता करने की फुर्सत हो तो ये उत्तर प्रदेश सरकार ये प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना उत्तर प्रदेश में लागू करवाए। यहां के किसानों को जरा लाभ मिले, खर्चा दिल्ली सरकार करने को तैयार है, काम करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार कुछ करे। मुझे नहीं लगता है कर पाएंगे। उनको इसमें इंटरेस्ट ही नहीं है भाईयों, समस्याओं का समाधान करने में इंटरेस्ट नहीं है।

भाईयों-बहनों आप बताइए कि यहां हमारी गंडक नहर... कितनी लंबी गंडक नहर है, लेकिन उसकी तलहटी में सारी मिट्टी भरी पड़ी है और उसके कारण पानी की संग्रह क्षमता कम हो गई है और केनाल के आखरी में पानी पहुंचता ही नहीं है। पानी दिखता है फिर भी किसान का खेत सूखा है। भाईयों-बहनों हम कह-कह कर थक गए इन सरकारों को... उत्तर प्रदेश सरकार को कह-कह कर थक गए कि मनरेगा के पैसे हम दे रहे हैं आप मनरेगा से इस गंडक की नहर जो है... उसको जरा मिट्टी निकलवाइए ताकि पानी मेरे किसानों को पहुंचे, उनको ये करने की भी फुर्सत नहीं है।

आप मुझे बताईए भाईयों क्या ये कूड़ा-कचरा निकालना कोई राजनीति है क्या? राजनीति है क्या? ये कूड़ा-कचरा निकालोगे तो किसानों का भला होगा कि नहीं होगा? अगर नहर साफ होगी तो किसानों का भला होगा कि नहीं होगा? लेकिन भाईयों-बहनों ये ऐसे राजनीतिक प्रकृति के लोग हैं कि उनको कूड़ा-कचरा निकालना ही नहीं है। उनको सब जगह पर कूड़े-कचरे में ही मजा आता है।

अभी पिछले दिनों हमने एक निर्णय किया भ्रष्टाचार के खिलाफ... काले धन के खिलाफ... 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए। आप मुझे बताइए मेरे भाईयों-बहनों... ये भ्रष्टाचार ने देश को बर्बाद किया है कि नहीं किया है? ये काले धन ने बर्बादी लाई है कि नहीं लाई है? ये देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराना चाहिए कि नहीं कराना चाहिए? इस देश को काले धन से मुक्त कराना चाहिए कि नहीं कराना चाहिए? किसी ने तो कदम उठाना चाहिए कि नहीं उठाना चाहिए? भाईयों-बहनों बीमारी के कारण, जब बीमारी दूर करने के लिए दवाईयां देते हैं तो थोड़ी तकलीफ तो होती है कि नहीं होती है?

आज मैं देश का आभार व्यक्त करने आया हूं। भगवान बुद्ध की इस धरती से मैं देशवासियों का आभार व्यक्त करता हूं, क्योंकि यही तो महापुरुष थे, जिन्होंने हमें संयम का मार्ग सिखाया है, यही तो महापुरुष हैं, यही तो महात्मा गांधी की धरती है जिसने हमें ट्रस्टिसशिप का सिद्धांत सिखाया है। भाईयों-बहनों दूसरों का लूट कर के जमा करने वाले लोग... क्या कभी किसी का भला करेंगे?  हक का पैसा हरेक को मिलना चाहिए लेकिन लूट का पैसा मिलना चाहिए क्या? ये सरकारी खजाने में जमा होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? और इसलिए भाईयों-बहनों सरकार ने 8 तारीख को निर्णय किया है और मैंने देश से 50 दिन मांगे हैं 50 दिन... पहले दिन से मैंने कहा है कि तकलीफ होगी... जो बड़े-बड़े हैं उनको बड़ी-बड़ी तकलीफ होगी लेकिन छोटे लोगों को छोटी-छोटी तकलीफ तो होगी।

मेरे भाईयों-बहनों ये देश की जनता को मैं नमन करता हूं, ये लोकतंत्र की ताकत देखिए, कल चीन के अखबारों में लिखा है कि लोकतंत्र में कोई ऐसा फैसला लेने की हिम्मत नहीं कर सकता है, अरे उन्हें मालूम नहीं है कि भारत की जनता की रग-रग में ऐसा लोकतंत्र है, जो औरों की भलाई सोचता है, अपनी भलाई बाद में सोचता है। और इसलिए जनता-जनार्दन के आशीर्वाद के कारण ऐसा कठोर फैसला करने का साहस होता है।

मैं इस बात से सहमत हूं। मैंने पहले ही दिन से कहा है कि ये निर्णय सरल नहीं है, उसको लागू करना भी सरल नहीं है। 8 तारीख को हीं मैंने कहा था कि 50 दिन तकलीफ रहने वाली है अभी तो मेरे प्यारे भाईयों-बहनों 20 दिन ही हुआ है, अभी 30 दिन बाकी है। सरकार पूरी तरह आपकी समस्याओं का समाधान करने के लिए लगी हुई है और देशवासियों ने तकलीफ झेल करके भी मेरा साथ दिया है, इसके लिए मैं देशवासियों का जितना आभार व्यक्त करुं, उतना कम है। भाईयों-बहनों ये बात सही है लोग ऐसा समझाते हैं कि हमारे पास नोटें नहीं है तो हम क्या करें...

भाईयों-बहनों आप लोग अपना मोबाइल फोन रिचार्ज कराना जानते हैं कि नहीं जानते हैं, क्या किसी स्कूल में पढ़ने के लिए गए थे? नहीं गए थे न...? आ गया कि नहीं आ गया? आपको मोबाईल फोन रिचार्ज कैसे करना है? आ गया कि नहीं आ गया? कितने पैसे भरना? कैसे भरना? कहां भरना? सब आया कि नहीं आया...? कोई सिखाने आया था...? नहीं आया था।

भाईयों-बहनों आप whatsApp  करते हैं whatsApp.... यूं-यूं करते हैं चला जाता है कोई सिखाने आया था...? कोई पढ़ाने आया था? किसी स्कूल में सीखने गए थे? आपको आया कि नहीं आया? आज भाईयों-बहनो टैक्नोलॉजी इतनी सरल है कि यहां आप लोग फोटो निकालते हैं और यहीं से अपने दोस्तो को फोटो भेज रहे हैं... भेज रहे हो न... मैं देख रहा हूं सब लोग फोटो निकाल रहे हैं... भेज रहे हो न, जितनी आसानी से आप अपने मोबाइल फोन से फोटो भेज सकते हो, whatsApp भेज सकते हो, अपने मोबाइल फोन का एकाउंट रिचार्ज करा सकते हो, उतनी ही आसानी से... बैंक में अगर आपका खाता है, बैंक में अगर आपका पैसा है तो आप मोबाईल फोन से जो भी खरीदना हो... खरीद सकते हो, जो भी लेना हो... ले सकते हो। आज आपका मोबाइल फोन... ये आपका मोबाइल फोन यही आपके बैंक की ब्रांच बन गया है। आपकी हथेली में आपकी अपनी बैंक बन गई है। पहले जेब में बटुवा रखना पड़ता था, और बटुए में पैसे रखने पड़ते थे।

अब जमाना चला गया है। अब बटुए की जरुरत नहीं.. अब मोबाईल फोन में ही पैसे होते हैं। दुकानदार के पास जाइए और उसको बताइए कि भई... बताइए मेरे पास ये बैंक का एप है। मैं आपके यहां से 20 रु का सामान लेना चाहता हूं, मैं मोबाइल फोन से पैसे दूंगा वो कहेगा हां-हां दे दीजिए... तुरन्त उसके मोबाइल में एक सेकेंड में पैसा चला जाएगा, आपको 20 रु का माल मिलेगा।

भाईयों-बहनों... आज हमारे देश में आधे से अधिक लोग जो रेलवे में जाते हैं वो खुद जाकर के पैसे देकर टिकट नहीं लेते ऑनलाइन टिकट लेते हैं, उनके पैसे वापिस आते हैं तो ऑनलाइन आ जाते हैं। भाईयों-बहनों आज आपने अखबार में एक इश्तेहार देखा होगा, एक एडवर्टाइज़मेंट आज आपने अखबार में देखा होगा। मेरा आप सब से आग्रह है कि इस एडवर्टाइज़मेंट को पूरी तरह पढ़ें और इसका कटिंग करके हर दुकान पर लगा दें... अखबार से निकाल करके सब लोग इतना काम ज़रुर करें और इसमें किस प्रकार से मोबाइल में खाता खोला जाता है, उसकी सारी विधि बताई गई है। आप के पैसे आप के हैं, बिना नोट के भी आप इसका खर्च कर सकते हो।

भाईयों-बहनों ये नोटों का उपयोग काले धन वाले संग्रह करना चाहते हैं। हम काले धन वालों को सफल होने नहीं देना चाहते हैं, हम भ्रष्टाचारियों को सफल होने देना नहीं चाहते हैं। और इसलिए भाईयों-बहनों मुझे आगे के भी उनके रास्ते बंद करने हैं। आज के अंग्रेजी अखबारों में भी इसका एडवर्टाइज़मेंट छपा हुआ है, आज के हिंदी अखबारों में भी ये इश्तेहार छपा हुआ है।

मेरा आप सब से आग्रह है, और यहां जो भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता हैं वो अखबार से कटिंग निकाल करके हर दुकान के बाहर एक बोर्ड पर लगा दें और ऐसे इश्तेहार रोज आते जाएंगे। स्टेट बैक ऑफ इंडिया की एप है, सरकार की एप है, आपको सिर्फ अपने मोबाईल फोन पर उस एप को डाउनलोड करना है, आपके गांव के मोहल्ले के व्यापारी को डाउनलोड करना है, सीधा आपका पैसा बैंक से चला जाएगा जो सामान खरीद चाहते हैं, खरीद सकते हैं। एक रुपया के बिना कोई काम अटकने वाला नहीं है...ये व्यवस्था मौजूद है भाईयों। और इसलिए.. इसलिए मुझे आपसे मदद चाहिए। मेरी विशेष पढ़े-लिखे नौजवानों से आग्रह है, सरकारी मुलाजिमों से आग्रह है कि आप भी अपने अड़ोस-पड़ोस में... जिसके पास भी माबाइल फोन है, उसको ज़रा सिखाइए कि किस प्रकार से मोबाइल फोन से कारोबार किया जा सकता है।

आप देखिए ये जो सारी चर्चाएं हैं आप खुद उसको एक मिनट में बंद करवा सकते हैं। और देशवासियों ने सहयोग दिया है, हमारे पास रास्ते भी हैं उस रास्तों पर चलिए देश में कभी भ्रष्टाचार दोबारा आने की हिम्मत नहीं करेगा भाईयों, देश में दोबारा काला धन पैदा होने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी। देश में नोटें छाप-छाप कर के ढेर करने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी, और नोटों के बंडल किसी को बिस्तर के नीचे छुपाने की नौबत नहीं आएगी।

भाईयों-बहनों एक तरफ में भ्रष्टाचार का... भाईयों-बहनों एक तरफ सरकार... एक तरफ हम सब भ्रष्टाचार के सारे रास्ते बंद करने में लगे हैं, काले धन के सारे रास्ते बंद करने में लगे हैं, और दूसरी तरफ.... भारत बंद करने में लगे हैं। आप मुझे बताइए... भ्रष्टाचार का रास्ता बंद होना चाहिए कि भारत बंद होना चाहिए? पूरी ताकत से बताइए कि भ्रष्टाचार का रास्ता बंद होना चाहिए कि भारत बंद होना चाहिए? भ्रष्टाचार का रास्ता बंद होना चाहिए कि भारत बंद होना चाहिए? काला धन का रास्ता बंद होना चाहिए कि भारत बंद होना चाहिए? काले धन का रास्ता बंद होना चाहिए कि भारत बंद होना चाहिए? काले धन का रास्ता बंद होना चाहिए कि भारत बंद होना चाहिए? भाईयों-बहनों सिर्फ और सिर्फ गरीब के लिए मैंने ये फैसला लिया है। 70 साल तक जो लूटा है उसको निकालना है... और गरीब का घर बनाना है, 70 साल तक लूटा है, किसान के खेत में पानी पहुंचाना है, 70 साल तक लूटा है उन पैसों को निकाल कर के गरीब की झोपड़ी में बिजली का तार पहुंचाना है, 70 साल तक लूटा है उन पैसों से गरीब बच्चों की पढ़ाई करवानी है। 70 साल तक जो लूटा है उन पैसों को निकाल कर के गरीब बुजूर्गों को दवाई दिलवानी है।

भाईयों-बहनों ये जो कुछ भी निकलेगा ये सारा का सारा गरीबों की भलाई के काम आने वाला है और इसलिए मेरे भाईयों-बहनों अब हम लुटने नहीं देंगे देश को... और मुझे विश्वास है भाईयों, जिस देश में सवा सौ करोड़ देशवासियों के आशीर्वाद हों वहां पर काला धन का खात्मा संभव है, भ्रष्टाचार का खात्मा संभव है, भाईयों-बहनों देश अच्छी दिशा में जाने के लिए तैयार बैठा है और मुझे विश्वास है ये देश इस महायज्ञ में, ईमानदारी के महायज्ञ में, देशवासियों को कष्ट झेलकर केभी आहूति देते मैं देख रहा हूं... और इसलिए भाईयों-बहनों आने वाले दिनों में देश इस बात को स्वीकार करेगा कि फैसला कठोर था, लेकिन भविष्य उज्जवल है, और इसलिए मेरे भाईयों-बहनों मैं आपसे अनुरोध करने आया हूं कि आप गांव के हर दुकानदार को इन अखबार के माध्यम से कैसे मोबाइल पर उनकी बिजनेस लगाया जा सकता है... सिखाइए।

आप स्वंय कम से कम दस परिवार, पंद्रह परिवार उनको सिखाइए... बिना पैसे सारा कारोबार चलाने की दिशा में सारी दुनिया चल पड़ी है। हम पीछे रह गए भाईयों, हम पीछे रह गए भाईयों अब हिंदुस्तान पीछे नहीं रह सकता। आप मुझे बताइए, आप मेरी मदद करेंगे...? दोनों हाथ ऊपर कर के मुझे आशीर्वाद दीजिए... आप मेरी मदद करेंगे...? आपके आशीर्वाद रहेंगे....? ये परिवर्तन आकर रहेगा... भ्रष्टाचार जाके रहेगा... काला धन जाएगा... भाईयों-बहनों आपका भविष्य बन जाएगा।

आपके आशीर्वाद के लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

धन्यवाद.....

'মন কী বাত'কীদমক্তা হৌজিক অদোমগী ৱাখল্লোন অমদি তান-ৱাশিং শেয়র তৌবীয়ু!
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Our youth has a key role in taking India to new heights in the next 25 years: PM Modi
January 24, 2022
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“Sacrifice of Sahibzadas of Guru Gobind Singh Ji for India's civilization, culture, faith and religion is incomparable”
“Today we feel proud when we see the youth of India excelling in the world of startups. We feel proud when we see that the youth of India are innovating and taking the country forward”
“This is New India, which does not hold back from innovating. Courage and determination are the hallmark of India today”
“Children of India have shown their modern and scientific temperament in the vaccination program and since January 3, in just 20 days, more than 40 million children have taken the corona vaccine”

कार्यक्रम में उपस्थित मंत्रीपरिषद के हमारे साथी स्मृति ईरानी जी, डॉक्टर महेंद्रभाई, सभी अधिकारीगण, सभी अभिभावक एवं शिक्षकगण, और भारत के भविष्य, ऐसे मेरे सभी युवा साथियों!

आप सबसे बातचीत करके बहुत अच्छा लगा। आपसे आपके अनुभवों के बारे में जानने को भी मिला। कला-संस्कृति से लेकर वीरता, शिक्षा से लेकर इनोवेशन, समाजसेवा और खेल, जैसे अनेकविध क्षेत्रों में आपकी असाधारण उपलब्धियों के लिए आपको अवार्ड मिले हैं। और ये अवार्ड एक बहुत बड़ी स्‍पर्धा के बाद आपको मिले हैं। देश के हर कोने से बच्‍चे आगे आए हैं। उसमें से आपका नंबर लगा है। मतलब कि अवार्ड पाने वालों की संख्‍या भले कम है, लेकिन इस प्रकार से होनहार बालकों की संख्‍या हमारे देश में अपरम्‍पार है। आप सबको एक बार फिर इन पुरस्कारों के लिए बहुत बहुत बधाई। आज National Girl Child Day भी है। मैं देश की सभी बेटियों को भी बधाई देता हूं, शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों

आपके साथ-साथ मैं आपके माता-पिता और टीचर्स को भी विशेष रूप से बधाई देना चाहता हूँ। आज आप इस मुकाम पर पहुंचे हैं, इसके पीछे उनका भी बहुत बड़ा योगदान है। इसीलिए, आपकी हर सफलता आपके अपनों की भी सफलता है। उसमें आपके अपनों का प्रयास और उनकी भावनाएं शामिल हैं।

मेरे नौजवान साथियों,

आपको आज ये जो अवार्ड मिला है, ये एक और वजह से बहुत खास है। ये वजह है- इन पुरस्कारों का अवसर! देश इस समय अपनी आज़ादी के 75 साल का पर्व मना रहा है। आपको ये अवार्ड इस महत्वपूर्ण कालखंड में मिला है। आप जीवन भर, गर्व से कहेंगे कि जब मेरा देश आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा था, तब मुझे ये अवार्ड मिला था। इस अवार्ड के साथ आपको बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी भी मिली है। अब दोस्तों की, परिवार की, समाज की, हर किसी की आपसे अपेक्षाएँ भी बढ़ गई हैं। इन अपेक्षाओं का आपको दबाव नहीं लेना है, इनसे प्रेरणा लेनी है।

युवा साथियों, हमारे देश के छोटे छोटे बच्चों ने, बेटे-बेटियों ने हर युग में इतिहास लिखा है। हमारी आज़ादी की लड़ाई में वीरबाला कनकलता बरुआ, खुदीराम बोस, रानी गाइडिनिल्यू जैसे वीरों का ऐसा इतिहास है जो हमें गर्व से भर देता है। इन सेनानियों ने छोटी सी उम्र में ही देश की आज़ादी को अपने जीवन का मिशन बना लिया था, उसके लिए खुद को समर्पित कर दिया था।

आपने टीवी देखा होगा, मैं पिछले साल दीवाली पर जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में गया था। वहां मेरी मुलाकात श्रीमान बलदेव सिंह और श्रीमान बसंत सिंह नाम के ऐसे वीरों से हुई जिन्होंने आज़ादी के तुरंत बाद जो युद्ध हुआ था कश्‍मीर की धरती पर, अभी तो इनकी उम्र बहुत बड़ी है, तब वो बहुत छोटी उम्र के थे और उन्‍होंने उस युद्ध में बाल सैनिक की भूमिका निभाई थी। और हमारी सेना में पहली बार बाल-सैनिक के रूप में उनकी पहचान की गई थी। उन्होंने अपने जीवन की परवाह न करते हुए उतनी कम उम्र में अपनी सेना की मदद की थी।

इसी तरह, हमारे भारत का एक और उदाहरण है- गुरु गोविन्द सिंह जी के बेटों का शौर्य और बलिदान! साहिबज़ादों ने जब असीम वीरता के साथ, धैर्य के साथ, साहस के साथ पूर्ण समर्पण भाव से बलिदान दिया था तब उनकी उम्र बहुत कम थी। भारत की सभ्यता, संस्कृति, आस्था और धर्म के लिए उनका बलिदान अतुलनीय है। साहिबज़ादों के बलिदान की स्मृति में देश ने 26 दिसम्बर को 'वीर बाल दिवस' की भी शुरुआत की है। मैं चाहूँगा कि आप सब, और देश के सभी युवा वीर साहिबज़ादों के बारे में जरूर पढ़ें।

आपने ये भी जरूर देखा होगा, कल दिल्ली में इंडिया गेट के पास नेताजी सुभाषचंद्र बोस की डिजिटल प्रतिमा भी स्थापित की गई है। नेताजी से हमें सबसे बड़ी प्रेरणा मिलती है- कर्तव्य की, राष्ट्रप्रथम की! नेताजी से प्रेरणा लेकर हम सबको, और युवा पीढ़ी को विशेष रूप से देश के लिए अपने कर्तव्यपथ पर आगे बढ़ना है।

साथियों,

हमारी आजादी के 75 साल इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि आज हमारे सामने अपने अतीत पर गर्व करने का, उससे ऊर्जा लेने का समय है। ये समय वर्तमान के संकल्पों को पूरा करने का है। ये समय भविष्य के लिए नए सपने देखने का है, नए लक्ष्य निर्धारित करके उन पर बढ़ने का है। ये लक्ष्य अगले 25 सालों के लिए हैं, जब देश अपनी आज़ादी के सौ साल पूरे करेगा।

अब आप कल्‍पना कीजिए, आज आप में से ज्‍यादातर लोग 10 और 20 के बीच की उम्र के हैं। जब आजादी के सौ साल होंगे तब आप जीवन के उस पड़ाव पर होंगे, तब ये देश कितना भव्‍य, दिव्‍य, प्रगतिशील, ऊंचाइयों पर पहुंचा हुआ, आपका जीवन कितना सुख-शांति से भरा हुआ होगा। यानी, ये लक्ष्य हमारे युवाओं के लिए हैं, आपकी पीढ़ी और आपके लिए हैं। अगले 25 सालों में देश जिस ऊंचाई पर होगा, देश का जो सामर्थ्य बढ़ेगा, उसमें बहुत बड़ी भूमिका हमारी युवा पीढ़ी की है।

साथियों,

हमारे पूर्वजों ने जो बोया, उन्‍होंने जो तप किया, त्‍याग किया, उसके फल हम सबको नसीब हुए हैं। लेकिन आप वो लोग हैं, आप एक ऐसे कालखंड में पहुंचे हैं, देश आज उस जगह पर पहुंचा हुआ है कि आप जो बोऐंगे उसके फल आपको खाने को मिलेंगे, इतना जल्‍दी से बदलाव होने वाला है। इसीलिए, आप देखते होंगे, आज देश में जो नीतियाँ बन रही हैं, जो प्रयास हो रहे हैं, उन सबके केंद्र में हमारी युवा पीढ़ी है, आप लोग हैं।

आप किसी सेक्टर को सामने रखिए, आज देश के सामने स्टार्टअप इंडिया जैसे मिशन हैं, स्टैंडअप इंडिया जैसे प्रोग्राम चल रहे हैं, डिजिटल इंडिया का इतना बड़ा अभियान हमारे सामने है, मेक इन इंडिया को गति दी जा रही है, आत्मनिर्भर भारत का जनआंदोलन देश ने शुरू किया है, देश के हर कोने में तेजी से आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर विस्तार ले रहा है, हाइवेज़ बन रहे हैं, हाइस्पीड एक्सप्रेसवेज़ बन रहे हैं, ये प्रगति, ये गति किसकी स्पीड से मैच करती है? आप लोग ही हैं जो इन सब बदलावों से खुद को जोड़कर देखते हैं, इन सबके लिए इतना excited रहते हैं। आपकी ही जेनेरेशन, भारत ही नहीं, बल्कि भारत के बाहर भी इस नए दौर को लीड कर रही है।

आज हमें गर्व होता है जब देखते हैं कि दुनिया की तमाम बड़ी कंपनियों के CEO, हर कोई उसकी चर्चा कर रहा है, ये CEO कौन हैं, हमारे ही देश की संतान हैं। इसी देश की युवा पीढ़ी है जो आज विश्‍व में छाई हुई है। आज हमें गर्व होता है जब देखते हैं कि भारत के युवा स्टार्ट अप की दुनिया में अपना परचम फहरा रहे हैं। आज हमें गर्व होता है, जब हम देखते हैं कि भारत के युवा नए-नए इनोवेशन कर रहे हैं, देश को आगे बढ़ा रहे हैं। अब से कुछ समय बाद, भारत अपने दमखम पर, पहली बार अंतरिक्ष में भारतीयों को भेजने वाला है। इस गगनयान मिशन का दारोमदार भी हमारे युवाओं के पर ही है। जो युवा इस मिशन के लिए चुने गए हैं, वो इस समय कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

साथियों,

आज आपको मिले ये अवार्ड भी हमारी युवा पीढ़ी के साहस और वीरता को भी celebrate करते हैं। ये साहस और वीरता ही आज नए भारत की पहचान है। कोरोना के खिलाफ देश की लड़ाई हमने देखी है, हमारे वैज्ञानिकों ने, हमारे वैक्सीन Manufacturers ने दुनिया में लीड लेते हुये देश को वैक्सीन्स दीं। हमारे हेल्थकेयर वर्कर्स ने मुश्किल से मुश्किल समय में भी बिना डरे, बिना रुके देशवासियों की सेवा की, हमारी नर्सेस गाँव गाँव, मुश्किल से मुश्किल जगहों पर जाकर लोगों को वैक्सीन लगा रही हैं, ये एक देश के रूप में साहस और हिम्मत की बड़ी मिसाल है।

इसी तरह, सीमाओं पर डटे हमारे सैनिकों की वीरता को देखिए। देश की रक्षा के लिए उनकी जांबाजी हमारी पहचान बन गई है। हमारे खिलाड़ी भी आज वो मुकाम हासिल कर रहे हैं, जो भारत के लिए कभी संभव नहीं माने जाते थे। इसी तरह, जिन क्षेत्रों में बेटियों को पहले इजाजत भी नहीं होती थी, बेटियाँ आज उनमें कमाल कर रही हैं। यही तो वो नया भारत है, जो नया करने से पीछे नहीं रहता, हिम्मत और हौसला आज भारत की पहचान है।

साथियों,

आज भारत, अपनी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को मजबूत करने के लिए निरंतर कदम उठा रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थानीय भाषा में पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है। इससे आपको पढ़ने में, सीखने में और आसानी होगी। आप अपनी पसंद के विषय पढ़ पाएं, इसके लिए भी शिक्षा नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं। देश भर के हजारों स्कूलों में बन रही अटल टिंकरिंग लैब्स, पढ़ाई के शुरुआती दिनों से ही बच्चों में इनोवेशन का सामर्थ्य बढ़ा रही हैं।

साथियों,

भारत के बच्चों ने, युवा पीढ़ी ने हमेशा साबित किया है कि वो 21वीं सदी में भारत को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए कितने सामर्थ्य से भरे हुए हैं। मुझे याद है, चंद्रयान के समय, मैंने देशभर के बच्चों को बुलाया था। उनका उत्साह, उनका जोश मैं कभी भूल नहीं सकता। भारत के बच्चों ने, अभी वैक्सीनेशन प्रोग्राम में भी अपनी आधुनिक और वैज्ञानिक सोच का परिचय दिया है। 3 जनवरी के बाद से सिर्फ 20 दिनों में ही चार करोड़ से ज्यादा बच्चों ने कोरोना वैक्सीन लगवाई है। ये दिखाता है कि हमारे देश के बच्चे कितने जागरूक हैं, उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का कितना एहसास है।

साथियों,

स्वच्छ भारत अभियान की सफलता का बहुत बड़ा श्रेय भी मैं भारत के बच्चों को देता हूं। आप लोगों ने घर-घर में बाल सैनिक बनकर, स्‍वच्‍छाग्रही बनकर अपने परिवार को स्वच्छता अभियान के लिए प्रेरित किया। घर के लोग, स्वच्छता रखें, घर के भीतर और बाहर गंदगी ना हो, इसका बीड़ा बच्चों ने खुद उठा लिया था। आज मैं देश के बच्चों से एक और बात के लिए सहयोग मांग रहा हूं। और बच्‍चे मेरा साथ देंगे तो हर परिवार में परिवर्तन आएगा। और मुझे विश्‍वास है ये मेरे नन्‍हें-मुन्‍हें साथी, यही मेरी बाल सेना मुझे इस काम में बहुत मदद करेगी।

जैसे आप स्वच्छता अभियान के लिए आगे आए, वैसे ही आप वोकल फॉर लोकल अभियान के लिए भी आगे आइए। आप घर में बैठ करके, सब भाई-बहन बैठ करके एक लिस्‍ट बनाइए, गिनती करिए, कागज ले करके देखिए, सुबह से रात देर तक आप जो चीजों का उपयोग करते हैं, घर में जो सामान है, ऐसे कितने Products हैं, जो भारत में नहीं बने हैं, विदेशी हैं। इसके बाद घर के लोगों से आग्रह करें कि भविष्य में जब वैसा ही कोई Product खरीदा जाए तो वो भारत में बना हो। उसमें भारत की मिट्टी की सुगंध हो, जिसमें भारत के युवाओं के पसीने की सुगंध हो। जब आप भारत में बनी चीजें खरीदेंगे तो क्‍या होने वाला है। एकदम से हमारा उत्‍पादन बढ़ने लग जाएगा। हर चीज में उत्पादन बढ़ेगा। और जब उत्पादन बढ़ेगा, तो रोजगार के भी नए अवसर बनेंगे। जब रोजगार बढ़ेंगे तो आपका जीवन भी आत्मनिर्भर बनेगा। इसलिए आत्मनिर्भर भारत का अभियान, हमारी युवा पीढ़ी, आप सभी से भी जुड़ा हुआ है।

साथियों,

आज से दो दिन बाद देश अपना गणतन्त्र दिवस भी मनाएगा। हमें गणतन्त्र दिवस पर अपने देश के लिए कुछ नए संकल्प लेने हैं। हमारे ये संकल्प समाज के लिए, देश के लिए, और पूरे विश्व के भविष्य के लिए हो सकते हैं। जैसे कि पर्यावरण का उदाहरण हमारे सामने है। भारत पर्यावरण की दिशा में आज इतना कुछ कर रहा है, और इसका लाभ पूरे विश्व को मिलेगा।

मैं चाहूँगा कि आप उन संकल्पों के बारे में सोचें जो भारत की पहचान से जुड़े हों, जो भारत को आधुनिक और विकसित बनाने में मदद करें। मुझे पूरा भरोसा है, आपके सपने देश के संकल्पों से जुड़ेंगे, और आप आने वाले समय में देश के लिए अनगिनत कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

इसी विश्वास के साथ आप सभी को एक बार फिर बहुत बहुत बधाई,

सभी मेरे बाल मित्रों को बहुत-बहुत प्‍यार, बहुत-बहुत बधाई, बहुत बहुत धन्यवाद !